Umang Singhar – Claims of providing clean water to every household under AMRUT 2.0, yet corruption worth ₹12,000 crore in the pipeline project alone!
घर-घर साफ पानी पहुंचाने के दावों के बीच मध्यप्रदेश में अमृत 2.0 योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत लगाए जा रहे SCADA सिस्टम में स्वीकृत ब्रांड के उपकरणों की जगह सस्ते लोकल सेंसर लगाए जा रहे हैं और उन पर दूसरे ब्रांड के स्टीकर चिपकाकर कथित तौर पर सरकारी व्यवस्था को गुमराह किया जा रहा है।
सिंघार के मुताबिक, मध्यप्रदेश में अमृत 2.0 के तहत 622 जलप्रदाय प्रोजेक्ट मंजूर हैं। ऐसे में यदि उनके लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला सिर्फ घटिया उपकरण लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन, परियोजनाओं की निगरानी और जनता को मिलने वाली पानी की सुविधा की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उपकरण स्वीकृत मानकों के मुताबिक नहीं थे, तो उन्हें पास किसने किया? कंसल्टेंट और इंजीनियरों की जांच व्यवस्था कहां थी? भुगतान किस आधार पर हुआ? और यदि सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है, तो उसकी भरपाई और जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
घर-घर साफ पानी का दावा, लेकिन पाइपलाइन में ही 12,000 करोड़ का भ्रष्टाचार!
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 24, 2026
अमृत 2.0 के तहत MP में 622 जलप्रदाय प्रोजेक्ट मंजूर हैं। लेकिन SCADA सिस्टम में अप्रूव्ड ब्रांड की जगह सस्ते लोकल सेंसर-उपकरण पर दूसरे ब्रांड के स्टीकर चिपका कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
यानी जनता के लिए…
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के नाम पर सरकारी पैसे के कथित दुरुपयोग को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।