MY SECRET NEWS

Wednesday, June 10, 2026 06:18
ब्रेकिंग न्यूज

ढाका

पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश इस समय भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है. हिंदुओं पर हमले और धर्मगुरु चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी के बाद ISKCON पर बैन लगाने की तैयारी की जा रही है. इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है.

इस बीच बांग्लादेश सरकार ने ISKCON को धार्मिक कट्टरपंथी संगठन बता दिया है. हाईकोर्ट में बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह सरकार का मुख्य एजेंडा है और इसके लिए जरूरी तैयारी शुरू कर दी गई है. इसका मतलब है कि ISKCON पर जल्द ही बैन लगेगा.

अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि ISKCON एक धार्मिक कट्टरपंथी संगठन है. इस पर कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वह इस्कॉन पर सरकार के रुख और देश की मौजूदा स्थिति का खाका पेश करे. कोर्ट ने सरकार को सचेत रहने को कहा है ताकि देश में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़े.

हाईकोर्ट की जस्टिस फराह महबूब और जस्टिस देबाशीष रॉय की पीठ ने इस संबंध में कहा कि इससे पहले एक वकील ने इस्कॉन पर बैन लगाने के लिए याचिका दायर की और चटगांव में वकील सैफुल आलम की हत्या सहित पूरी स्थिति को कोर्ट के संज्ञान में लेकर आया. इस पर अब कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इस्कॉन संगठन क्या है? यह कहां से आया है? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह कोई राजनीतिक दल नहीं है बल्कि धार्मिक कट्टरपंथी संगठन है. बता दें कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने संविधान से धर्मनिरपेक्षता शब्द को हटाने की मांग की थी.

बता दें कि बांग्लादेश की लॉ एंफोर्समेंट एजेंसी ने चिन्मय कृष्ण दास को देशद्रोह के आरोप में 25 नवंबर को गिरफ्तार किया था. बांग्लादेश की अदालत ने उन्हें मंगलवार को उन्हें जमानत नहीं दी और जेल भेज दिया. इसके बाद चिन्मय दास के समर्थक सड़कों पर उतर आए और उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू किया. सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प के दौरान पत्रकारों सहित कम से कम 10 लोग घायल हो गए.

बांग्लादेश से किन अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं चिन्मय प्रभु

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, अल्पसंख्यकों के घरों और दुकानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज किए गए हैं. इन घटनाओं के अपराधी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि शांतिपूर्ण तरीके से वैध मांगें करने वाले धार्मिक नेता के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं.

चिन्मय दास की गिरफ्तारी क्यों?

चिन्मय दास को तब गिरफ्तार किया गया था, जब वो ढाका से चटगांव आ रहे थे. उन्हें ढाका एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया था. इस दौरान सादे कपड़ों में आए कुछ लोगों ने उन्हें जबरदस्ती वैन में बैठा लिया. उन लोगों ने खुद को बांग्लादेशी पुलिस का जासूस बताया था.

इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधा रमन दास ने बताया कि बिना कुछ कारण बताए ही चिन्मय दास को जबरदस्ती वैन में डाल दिया गया.

बांग्लादेशी पुलिस ने चिन्मय दास पर देशद्रोह का आरोप लगाया है. उनपर अक्टूबर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेशी झंडे का अपमान करने का आरोप है. ऐसा दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन में भगवा ध्वज को बांग्लादेशी झंडे से ज्यादा ऊंचा फहराया गया था. हालांकि, राधा रमन दास ने इन आरोपों को खारिज किया है.

चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद उनकी रिहाई की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों को दबाया जा रहा है. बांग्लादेश में जब से मोहम्मद युनूस की सरकार आई है तब से हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं.

ऐसी क्या मांगें कर रहे थे चिन्मय दास?

1. अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न से जुड़े मामले में तुरंत सुनवाई के लिए स्पेशल ट्रिब्यूनल बनाए जाए. पीड़ितों को मुआवजा और पुनर्वास मिले.

2. अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए एक कानून बनाया जाए.

3. अल्पसंख्यकों के लिए एक मंत्रालय बनाया जाए, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के मुद्दे और परेशानियों को उठाया जा सके.

4. कब्जाई गई देबोत्तर (मंदिर) की संपत्तियों को वापस किया जाए. मंदिरों और अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए कानून बने.

5. सभी स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों में अल्पसंख्यकों के लिए पूजा स्थल बनाए जाएं, ताकि वो भी पूजा कर सकें.

6. अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों को बढ़ाया जाए. साथ ही साथ पाली और संस्कृत बोर्डों का आधुनिकिकरण किया जाए.

7. दुर्गा पूजा के लिए पांच दिन का पब्लिक हॉलीडे घोषित किया जाए, क्योंकि ये हिंदुओं के लिए काफी अहम त्योहार है.

बांग्लादेश में किस हालत में हैं अल्पसंख्यक?

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का इतिहास लंबा रहा है, खासकर हिंदू समुदाय को. याद होगा कि दो साल पहले भी बांग्लादेश में हिंदू विरोधी भावनाएं भड़क गई थीं, जिसके बाद कई हिंदुओं की हत्या भी कर दी गई थी.

हाल ही में, शेख हसीना के इस्तीफे के बाद सैकड़ों जगहों से हिंदुओं पर हमले के मामले सामने आए हैं. इस्कॉन टेम्पल और दुर्गा मंदिरों को निशाना बनाया गया है. हिंदुओं के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की गई है. दिनाजपुर में उपद्रवियों ने एक श्मशान घाट पर भी कब्जा कर लिया था.

अभी तो हिंदुओं पर हो रही हिंसा के मामले सामने आ भी जा रहे हैं, लेकिन वहां दशकों से इनके साथ उत्पीड़न हो रहा है. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन का दावा है कि 1964 से 2013 के बीच एक करोड़ से ज्यादा हिंदू बांग्लादेश छोड़कर भाग गए हैं. फाउंडेशन का कहना है कि हर साल 2.30 लाख हिंदू बांग्लादेश छोड़ रहे हैं.

बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की आबादी तेजी से घटी है. 1951 में बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में गैर-मुस्लिम आबादी 23.2% थी. यहां आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी. उसमें सामने आया था कि बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की आबादी घटकर 9.4% हो गई है.

 

Loading spinner
यूजफुल टूल्स
QR Code Generator

QR Code Generator

Age Calculator

Age Calculator

Word & Character Counter

Characters: 0

Words: 0

Paragraphs: 0