अमेरिकी अधिकारियों का एक दल आएगा भारत , अंतरिम व्यापार समझौते पर होगी बातचीत

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर अगले दौर की चर्चा के लिए अमेरिकी अधिकारियों का एक दल आने वाले हफ्तों में भारत का दौरा कर सकता है। एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों की यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अमेरिका 9 जुलाई से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बना सकते हैं। इस बातचीत में नई दिल्ली घरेलू वस्तुओं पर 26 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ से पूर्ण छूट की मांग कर रहा है। एक सूत्र ने बताया, "व्यापार वार्ता के लिए अमेरिकी टीम के भारत आने की उम्मीद है। वार्ता तेज गति से आगे बढ़ रही है।" भारत के मुख्य वार्ताकार, वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह अपनी चार दिवसीय वाशिंगटन यात्रा पूरी की। उन्होंने प्रस्तावित समझौते पर अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ बातचीत की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी व्यापार वार्ता को गति देने के लिए पिछले सप्ताह वाशिंगटन में थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक से दो बार मुलाकात की। अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत का अतिरिक्त पारस्परिक शुल्क लगाया था, लेकिन बाद में इसे 90 दिनों के लिए 9 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया। हालांकि, भारतीय वस्तुओं पर अभी भी अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत बेसलाइन शुल्क लागू है। recent visitors 68

गुना जिले में 1855 सरकारी स्कूल, इनमें से सिर्फ 241 स्कूलों ने ही शिक्षकों की तस्वीर जानकारी के साथ प्रदर्शित की

गुना फर्जी शिक्षकों की स्कूलों में एंट्री रोकने के लिए शासन के 13 माह पुराने आदेश की जिले में धज्जियां उड़ाई जा रही है। प्रत्येक स्कूल के बाहर वहां पदस्थ नियमित शिक्षकों की तस्वीर प्रदर्शित करने के निर्देश शासन ने दिए थे। लेकिन जिले के 1613 स्कूलों में इस आदेश का पालन नहीं हुआ। आखिर यहां के शिक्षकों को अपना चेहरा दिखाने में किस बात का संकोच है? दरअसल, कई स्थानों पर वहां पदस्थ शिक्षकों की बजाय उनके रिश्तेदार या अन्य व्यक्तियों को ठेके पर रख लेने की शिकायत मिलने के बाद सरकारी स्तर पर यह आदेश जारी हुआ था कि सभी स्कूलों में वहां पदस्थ शिक्षकों के फोटो लगाए जाएं। गुना जिले में 1855 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से सिर्फ 241 स्कूलों ने ही शिक्षकों की तस्वीर जानकारी के साथ प्रदर्शित की है। इसमें भी ज्यादातर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी शामिल हैं। वहीं 1613 स्कूलों ने तो शिक्षकों की तस्वीर स्कूल में लगाई ही नहीं। 3000 से 5000 रुपए में भाड़े पर रखे शिक्षक सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक मोटा वेतन लेते हैं, लेकिन कई शिक्षक अपनी जगह किसी दूसरे पढ़े-लिखे व्यक्ति को 3000 से 5000 रुपए तक में किराए पर बच्चों को पढ़ाने के लिए रख लेते हैं। पूर्व में ऐसे शिक्षकों को सिर्फ नोटिस देकर शिक्षा अधिकारियों ने मामले को रफादफा कर दिया गया था। वर्तमान में एक सहायक शिक्षक का वेतन भी कम से कम 75 हजार रुपए है। कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके दूसरे कारोबार भी चलते हैं। या अपने रुतबे के कारण वे अपनी जगह किसी अन्य को स्कूल में पढ़ाने भेज देते हैं। नियमित शिक्षकों की जगह भाड़े के शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल प्रदेश के कई जिलों के स्कूलों की जांच कराई गई थी तब नियमित शिक्षकों की जगह एवज या भाड़े के शिक्षक पढ़ाते हुए मिले थे। गुना में भी कुछ स्कूलों में फर्जी शिक्षक मिले थे। इस खुलासे के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी स्कूलों को आदेश दिए थे कि स्कूलों में पदस्थ प्रत्येक शिक्षकों का नाम, मोबाइल नंबर और विषयवार जानकारी के साथ उनका फोटो प्रदर्शित किया जाए। ताकि छात्र-छात्रा और उनके अभिभावक शिक्षकों के बारे में जानकारी हो। अगर उनकी जगह कोई दूसरा शिक्षक स्कूल में पढ़ाने आए तो पहचान हो सके। भाड़े के शिक्षकों को सबक सिखाने और उनकी पहचान को लेकर यह व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन जिले में अभी तक यह फर्जीवाड़ा नहीं रुक पाए। लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश को जारी हुए 13 माह बीत चुके हैं। लेकिन जिले में 87 फीसदी सरकारी स्कूलों ने इसका पालन नहीं किया। शिक्षा विभाग के अफसर अक्सर स्कूलों का निरीक्षण करते हैं, लेकिन इस तरफ उन्होंने भी ध्यान नहीं दिया। जिला शिक्षा अधिकारी अब इस बारे में कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। नियमों का पालन करवाएंगे डीईओ चंद्रशेखर सिसौदिया ने बताया स्कूलों में पदस्थ शिक्षक की तस्वीर, उनकी योग्यता एवं विषयवार जानकारी नोटिस बोर्ड या फिर स्कूल के बाहर प्रदर्शित करनी है। पूर्व में लोकशिक्षण संचालनालय ने आदेश जारी किए थे। ज्यादातर स्कूलों ने जानकारी प्रदर्शित नहीं की है। आपके द्वारा जानकारी संज्ञान में लाई गई है, हम इसका पालन कराएंगे।   recent visitors 118

SC ने यौन शिक्षा में सुधार और POCSO मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के सुझावों पर केंद्र सरकार से राय मांगी

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई को सरकार को निर्देश दिया कि वह बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों से निपटने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर POCSO कोर्ट बनाए। कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों ने स्पेशल POCSO कोर्ट बनाए हैं, लेकिन तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में केस पेंडेंसी के चलते और ज्यादा कोर्ट बनाए जाने की जरूरत है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट कम होने के कारण मामले की जांच करने के लिए डेडलाइन का पालन नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने पॉक्सो केस के लिए निर्धारित डेडलाइन के अंदर ट्रायल पूरा करने के अलावा निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट और एमिकस क्यूरी वी गिरी और सीनियर एडवोकेट उत्तरा बब्बर को POCSO कोर्ट की स्थिति पर राज्यवार डीटेल देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उसने "बाल बलात्कार की घटनाओं की संख्या में खतरनाक वृद्धि" को हाइलाइट करते हुए एक्शन लिया था। कोर्ट ने राज्य सरकारों से उन जिलों में दो कोर्ट बनाने को कहा जहां POCSO अधिनियम के तहत बाल शोषण के पेंडिंग मामलों की संख्या 300 से ज्यादा है। कोर्ट ने कहा POCSO एक्ट के तहत 100 से ज्यादा FIR वाले हर जिले में एक कोर्ट बनाने के जुलाई 2019 के निर्देश का मतलब था कि डेजिगनेटेड कोर्ट केवल कानून के तहत ऐसे मामलों से निपटेगा। पहले जानिए क्या है पॉक्सो एक्ट भारत में बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए पॉक्सो एक्ट, 2012। अगर कोई 18 साल से कम उम्र का यौन शोषण करता है तो उसे इस कानून के तहत सजा मिलती है। बच्चों को गलत तरीके से छूना, उन्हें गलत तरीके से छूने के लिए कहना, या उनके साथ यौन संबंध बनाना, बच्चों को अश्लील चीजें दिखाना, उन्हें वेश्यावृत्ति या पोर्नोग्राफी में शामिल करना, या इंटरनेट पर उनसे गलत बातें करना भी बाल यौन शोषण (CSA) है। पॉक्सो एक्ट के तहत पुरुष और महिला आरोपी दोनों के खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट का हाल बहरहाल, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्श फंड (ICPF) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में CSA के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन इन मामलों को निपटाने की रफ्तार बहुत धीमी है। इसी वजह से भारत सरकार ने अक्टूबर 2019 में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने योजना शुरू की। इसके तहत, देश भर में 1,023 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) बनाए गए हैं। ये कोर्ट CSA के मामलों की तेजी से सुनवाई करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में FTSC को 1 अप्रैल, 2023 से 31 मार्च, 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इस पर कुल 1952.23 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (ICPF) की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों को निपटाने की क्या स्थिति है। पूरे देश में, 2022 में सिर्फ 3% मामलों में ही दोषियों को सजा मिली। मतलब 2,68,038 मामलों में से सिर्फ 8,909 मामलों में ही आरोपियों को दोषी पाया गया। हर FTSC ने 2022 में औसतन सिर्फ 28 पॉक्सो मामलों का निपटारा किया। 2022 में, हर पॉक्सो मामले को निपटाने में औसतन 2.73 लाख रुपये खर्च हुए। इसी तरह, हर सफल सजायाफ्ता पॉक्सो मामले पर सरकारी खजाने से औसतन 8.83 लाख रुपये खर्च हुए। अगर कोई नया मामला नहीं आता है, तो भी भारत को 31 जनवरी, 2023 तक लंबित पॉक्सो मामलों के बैकलॉग को खत्म करने में लगभग नौ (9) साल लगेंगे। अभी 2.43 लाख पॉक्सो मामले पेंडिंग हैं। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि हर जिले में स्थिति का दोबारा आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर नए ई-पॉक्सो कोर्ट बनाए जाएं। योजना के अनुसार, सभी 1,023 स्वीकृत फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट को तुरंत पूरी तरह से चालू किया जाना चाहिए। ट्रायल की समय-सीमा तय की जाए रिपोर्ट में कहा गया है कि पीड़ित के लिए न्याय की लड़ाई लोअर कोर्ट में सजा होने के बाद भी खत्म नहीं होती है। यह लड़ाई तब तक जारी रहती है जब तक कि अपील की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। इसलिए, अपील/ट्रायल के समय को तय किया जाना चाहिए ताकि जल्द न्याय मिल सके। इस संबंध में नीतियां बनाई जानी चाहिए, और हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर समयबद्ध ढांचे बनाए जाने चाहिए ताकि लंबित पॉक्सो मामलों का निपटारा तेजी से हो सके। विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने 16 दिसंबर, 2019 को एक विस्तृत आदेश पारित किया था। इसमें राज्य सरकारों को पॉक्सो एक्ट, 2012 के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे। यह 25 जुलाई, 2019 के आदेश के क्रम में था, जिसमें सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि हर जिले में 60 दिनों के भीतर एक विशेष पॉक्सो अदालत स्थापित की जाए, जिसमें 100 से अधिक पॉक्सो मामले लंबित हैं। कानून और न्याय मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर कार्रवाई की और जनवरी 2020 में बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के मामलों के त्वरित निपटान के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) की योजना लेकर आया. इस योजना में FY 2021-22 के अंत तक पूरे भारत में बलात्कार और पॉक्सो मामलों के त्वरित निपटान के लिए 389 एक्सक्लूसिव पॉक्सो कोर्ट (EPC) सहित 1,023 FTSC स्थापित करने की परिकल्पना की गई थी। इस विश्लेषण के माध्यम से, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (ICPF) पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों और शिकायतों के संबंध में भारत की स्थिति पर प्रकाश डालता है। इस व्यापक कानून के बनने के एक दशक बाद भी, पीड़ितों और उनके परिवारों की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं, जिन्हें पहले के कानूनों द्वारा पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया था। हालांकि, जिस गति से मामलों को निपटाया जा रहा है, वह बहुत निराशाजनक है। केस बैकलॉग की चौंकाने वाली स्थिति रिपोर्ट में केस बैकलॉग की एक चौंकाने वाली प्रवृत्ति का पता चला। … Read more

इजरायल ने दो महीने के भीतर गाजा पट्टी के 75 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा करने की योजना बनाई

यरुशलम  इजरायल ने दो महीने के भीतर गाजा पट्टी के 75 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा करने की योजना बनाई है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने  ये जानकारी दी है। इजरायली सेना इसके लिए बड़ा जमीनी हमला शुरू करने की तैयारी में है, जिसमें फिलिस्तीनी आबादी को गाजा में तीन छोटे क्षेत्रों में धकेल दिया जाएगा। अगर फिलिस्तीनी आतंकी समूह हमास बंधकों को छोड़ने के लिए सहमत नहीं होता है तो इस अभियान को जल्द शुरू किया जा सकता है। इन इलाकों में रहेगी आबादी जिन क्षेत्रों में फिलिस्तीनी आबादी को भेजा जाना है, उसमें दक्षिणी पट्टी के कट पर मावासी में नया सुरक्षित क्षेत्र है, जहां इजरायल ने पहले एक मानवीय क्षेत्र घोषित किया था। इसके अलावा मध्य गाजा का दीर अल-बलाह और नुसेरात में जमीन की एक पट्टी है। तीसरा क्षेत्र गाजा सिटी का केंद्र, जहां इस साल की शुरुआत में युद्ध विराम के दौरान कई फिलिस्तीनी वापस लौटे थे। 20 लाख आबादी रहेगी छोटे से हिस्से में इजरायली सेना के अनुसार, वर्तमान में मवासी क्षेत्र में करीप 700,000 फिलिस्तीनी रह रहे हैं, जबकि 3 से 3.5 लाख मध्य गाजा और गाजा शहर में करीब 10 लाख लोग हैं। इसका मतलब है कि जब आईडीएफ अपना जमीनी अभियान शुरू करेगी तो गाजा की 20 लाख आबादी को पट्टी के 25 फीसदी हिस्से में धकेल दिया जाएगा। कब्जे वाले हिस्से के लिए बना प्लान इसके बाद सेना गाजा के बाकी हिस्से पर कब्जा कर लेगी। हमास के बुनियादी ढांचे को हटा दिया जाएगा। अधिकांश इमारतों को ध्वस्त किया जाएगा और निकट भविष्य तक उस पर कब्जा बनाए रखा जाएगा। इस कब्जे वाले क्षेत्र में राफा, खान यूनिस और गाजा शहर के उत्तर में स्थित सभी शहर शामिल होंगे। इजरायल का हवाई हमला जारी इस बीच सोमवार को गाजा पट्टी में इजराइली हमलों में कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई जिनमें से 31 लोग आश्रय स्थल के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे एक स्कूल में हुए हमले में मारे गए। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि लोग सो रहे थे तभी स्कूल पर हमला किया गया जिससे उनके सामान में आग लग गई। इजराइली सेना ने कहा कि उसने स्कूल से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे चरमपंथियों को निशाना बनाया। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय की आपातकालीन सेवा के प्रमुख फहमी अवाद ने बताया कि उत्तरी गाजा में स्कूल पर हुए हमले में 55 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं। इस बीच शिफा अस्पताल ने बताया कि सोमवार को एक मकान पर हुए हमले में एक ही परिवार के 15 लोग मारे गए जिनमें पांच महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। ऑनलाइन उपलब्ध फुटेज में बचावकर्मियों को जले हुए शवों को निकालते और आग बुझाने के लिए संघर्ष करते देखा जा सकता है। recent visitors 63

नए बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन कंपनी की वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा

भोपाल बिजली कनेक्शन लेने को लेकर नई खबर सामने आई है। बता दें कि सरकारी कार्यालयों को अब महज पांच रुपए में बिजली का नया कनेक्शन दिया जा रहा है। कंपनी अफसरों के अनुसार शासकीय, अर्धशासकीय विभागों तथा निगम मंडलों को महज पांच रुपए में नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए मैदानी अफसरों को निर्देश दिए गए हैं। ये विभागों से समन्वय बनाएंगे।  एमपी के भोपाल शहर में नए कनेक्शन के लिए ऑनलाइन कंपनी की वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा। कंपनी के वितरण केन्द्र जाकर, टोल फ्री नंबर 1912 पर कॉल करने के साथ एमपी ऑनलाइन- कॉमन सर्विस सेंटर से भी आवेदन कर सकते हैं। विकलांग का बिजली कनेक्शन काटा वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली विभाग की अमानवीयता का मामला सामने आया है। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला और कार्यकर्ता बिजली विभाग की इस कार्रवाई का विरोध करने चांदबड़ बिजली दफ्तर पहुंचे। अफसरों द्वारा गलती नहीं मानने पर कांग्रेस नेताओं ने जमकर हंगामा किया। शुक्ला ने बताया कि नरेला निवासरत पैरालिसिस की गंभीर बीमारी से पीड़ित मुनीर अहमद कच्चे मकान में रहते हैं। उन्हें अनाप-शनाप बिजली बिल भेजा गया। पर राशि को जमा नहीं किया तो बिजली कंपनी ने उनका कनेक्शन काट दिया और बिजली चोरी का प्रकरण भी बना दिया। पीड़ित परिवार भीषण गर्मी में बेतहाशा परेशान हो रहा था जिसकी सूचना मिलने पर दफ्तर जाकर इसकी शिकायत की गई। आरोप है कि बिजली कंपनी के अफसरों ने बात सुनने की बजाए पीड़ित को आरोपी बताना शुरु कर दिया जिस पर विवाद हो गया। व्हीलचेयर पर पीड़ित को लेकर पहुंचे कांग्रेस नेताओं ने मौके पर नारेबाजी की। recent visitors 64

इंदौर-हैदराबाद एक्सप्रेसवे 713 किमी लंबा होगा, प्रोजेक्ट की लागत 15 हजार करोड़

 इंदौर छोटे शहर को बड़े शहरों से जोड़ने के लिए और  देश की रोड कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार लगातार सक्रिय है. अब तक भारत में कई बड़े एक्सप्रेसवे बनाए जा चुके हैं. वहीं भारतमाला परियोजना के तहत मध्यप्रदेश को दूसरे राज्य से जोड़ने के लिए एक प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है, जो जल्द पूरा होने जा रहा है. इंदौर से हैदराबाद को जोड़ने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 713 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है, जिससे हैदराबाद और इंदौर की दूरी महज़ कुछ ही घण्टे का हो जाएगा. 15 हजार करोड़ रुपए आएगा खर्च अधिकारियों के अनुसार, इंदौर-हैदराबाद के बीच बन रहे 713 किलोमीटर के एक्सप्रेस-वे में कई जगहों पर स्टेट हाईवे है, जिसे एनएचएआई के द्वारा नेशनल हाईवे की तरह ही बनाया जा रहा है. साथ ही यह कई स्टेट हाइवे और नेशनल हाईवे से जुड़ेगा. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 15 हजार करोड़ रुपए है. अगर अभी देखा जाए, तो हैदराबाद से इंदौर की दूरी करीब 900 किलोमीटर की है. ये एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद ये दूरी करीब 188 कम होकर 713 किलोमीटर की रह जाएगी. इसके चलते सिर्फ 10 घंटे के भीतर ही इंदौर से हैदराबाद पहुंचा जा सकेगा. इन शहरों से गुजरेगा एक्सप्रेस-वे यह हाईवे एमपी के इंदौर, बुरहानपुर और बड़वाह होते हुए मुक्तईनगर, जलगांव, अकोला, हिंगोली और नांदेड वहीं तेलंगाना के मंगलूर, रामसनपल्ली, संगारेड्डी होते हुए हैदराबाद तक जाएगा. इसके बन जाने के बाद लोकल व्यापार को लाभ मिलने वाला है. इस एक्सप्रेसवे की मदद से व्यापारी अपना सामान आसानी से बड़े शहरों तक पहुंचा सकेंगे.   recent visitors 85

प्रदेश में पंचायतों में उपचुनाव से जुड़ी बड़ी खबर, 1 महीने में होगा यह काम, तैयारियां पूरी

भोपाल मध्य प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं में उपचुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं, जिन पंचायतों में उपचुनाव होना है, वहां हलचल जारी है, ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का कार्यक्रम भी जारी कर दिया है. जिसमें इलेक्शन कमीशन की तरफ से कहा गया है कि 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएं, यानि 1 जनवरी 2025 से जो लोग 18 साल के होंगे उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा, जहां रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ग्राम पंचायतों में मतदाता सूची का आखिरी प्रकाशन करेंगे. ताकि उपचुनाव की स्थिति पर काम किया जा सके. आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार सभी रजिस्ट्रीकरण अधिकारी आज शाम तक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और शिफ्टिंग सूची के सत्यापन का कार्य करेंगे। इसके बाद मतदाता सूची तैयार किए जाने का काम शुरू होगा। इसके लिए जो भी कर्मचारी तैनात किए जाएंगे उन्हें आयोग द्वारा तय समय सीमा में मतदाता सूची में बदलाव कर देना होगा ताकि चुनाव कार्यक्रम तय किए जा सकें। ऐसे अपडेट होगी मतदाता सूची मतदाता सूची अपडेट के लिए 30 मई को शिफ्टिंग के साथ-साथ जांच और संशोधन के लिए  चेकलिस्ट रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को सौंपी जाएगी. फिर 5 जून को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा, इस संबंध में मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी जाएगी, फिर 5 और 6 जून को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित होगी, जिसमें दावे-आपत्तियां 5 से 11 जून तक ली जाएगी, फिर 17 जून तक दावे और आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा. इसके बाद 20 जून को चेकलिस्ट तैयार होगी और 21 जून को वेण्डर भी उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिसके बाद 23 जून को फोटो युक्त मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी, जिसे 23 जून को ही निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जाएगा. बता दें कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में पंचायतों में उपचुनाव की स्थिति बन रही है, ऐसे में निर्वाचन आयोग ने पंचायत उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसलिए वोटर लिस्ट को अपडेट करने की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग की तरफ से शुरू हो गई है. ऐसे चलेगा कार्यक्रम     मतदाता सूची बनाने वाले वेण्डर 30 मई को शिफ्टिंग, जांच और संशोधन के लिए चेकलिस्ट रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को देंगे।     दाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन 5 जून को किया जाएगा। इस संबंध में मतदाताओं तथा जनप्रतिनिधियों को जानकारी देने के लिए 5 और 6 जून को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की जाएंगी।     मतदाता सूची के संबंध में दावे-आपत्तियां 5 से 11 जून तक प्राप्त की जाएंगी।     दावे आपत्तियों का निराकरण 17 जून तक किया जाएगा। इसकी चेकलिस्ट 20 जून तक तैयार करके चेकलिस्ट में सुधार के बाद 21 जून को वेण्डर को उपलब्ध करा दिया जाएगा। फोटोयुक्त मतदाता सूची 23 जून तक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं वेण्डर द्वारा जनरेट की जाएगी। इसे 23 जून को ही वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। recent visitors 67