जानिए प्रेगनेंसी के दौरान कौन से मेडिकल टेस्ट है जरूरी

गर्भधारण के दौरान समय-समय पर कई तरह की जांच की जाती हैं। इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है। साथ ही कोई कंप्लीकेशन ना हो इसकी जानकारी भी चिकित्सक को मिल जाती है। यदि कोई कंप्लीकेशन होती भी है तो चिकित्सक समय रहते उसका इलाज कर बच्चे और मां को किसी भी परेशानी से बचाया जा सकता है। आइये जानते हैं कि गर्भधारण के दौरान डिलिवरी तक कौन-कौन सी चिकित्सा जांच की जाती हैं सीबीसी यानी कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट डॉक्टर आपका सीबीसी टेस्ट आपके गर्भवती होने के बाद करेगा। इससे आपके रक्त में लाल और सफेद कोशिकाओ का पता लगाया जाता है । इसके साथ ही हीमोग्लोबिन, हेमैटक्रीट और प्लेटलेट्स कणों को भी काउंट किया जाता है। हीमोग्लोबिन रक्त में मौजूद प्रोटीन होता है जो कि सेल्स को ऑक्सीजन देता है और हेमैटक्रीट शरीर में लाल रक्त कणों को जांचने का माप है। दोनों में से किसी के भी कम होने पर एनीमिया कहा जाता है। प्लेटलेट्स रक्त में थक्का जमने में सहायता करती हैं। महिला नार्मल डिलिवरी के दौरान तकरीबन आधा लीटर रक्त खो देती है। ऐसे में रक्त की कमी होने पर बच्चे और मां दोनों के लिए स्थिति खतरनाक हो सकती है। आरएच फैक्टर टेस्ट आरएच फैक्टर टेस्ट में लाल रक्त कणों के सरफेस में प्रोटीन की मात्रा देखने को किया जाता है। अगर प्रोटीन होता है तो इसे आरएच पॉजिटिव कहा जाता है अन्यथा नेगेटिव। यह टेस्ट लगभग 85 प्रतिशत महिलाओं में पॉजिटिव ही आता है। यूरिन टेस्ट डॉक्टर यूरिन टेस्ट से ही गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की सही जानकारी लगा पाते हैं। इसमें मुख्यत शुगर की जांच की जाती है। इसके साथ ही किडनी के इन्फेक्शन का पता लगाने के लिए यूरिन में प्रोटीन की मात्रा, जांच की जाती है। इस टेस्ट के माध्यम से बैक्टीरिया की जांच की जाती है जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का पता चल पता  है। केटोन्स की भी जांच होती है जिससे यह पता लगता  है कि शरीर कार्बोहाइड्रेट की जगह वसा का  इस्तेमाल ऊर्जा के लिए तो नहीं कर रहा है। रक्तचाप की जांच गर्भवती महिला के रक्तचाप की जांच की जाती है ताकि रक्तचाप ज्यादा या कम दोनों ही होने की स्तिथी में महिला को किसी भी प्रकार की हानि से बचाया जा सके। भ्रूण का अल्ट्रासाउंड भ्रूण के शारीरिक विकास को देखने के लिए समय समय पर अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इसमें प्लेसेंटा की स्थिति और बच्चे के शरीर का हर माप देखा जाता है। बच्चे की मूवमेंट और अन्य क्रियाओं का भी पता अल्ट्रासाउंड से ही चलता है। मल्टीपल मार्कर स्क्रीनिंग यह दो तरह का होता है। ट्रिपल स्क्रीन टेस्ट और क्वाड स्क्रीन टेस्ट। यह आहार नाल न्यूरल टयूब में किसी भी तरह के डिफेक्ट को देखने के लिए किया जाता है। भ्रूण की हृदय गति मापना हर महीने भ्रूण की हृदय गति में बदलाव आता है। जन्म के समय भी यह बदल जाती है। डॉक्टर समय-समय पर जांच कर यह चेक करते हैं की हार्ट बीट सामान्य है या नहीं। यदि ह्रदय गति कम आये तो माना जाता है कि बच्चे को ऑक्सीजन कम मिल रही है।   recent visitors 169

साइबर ठगी के बढ़ते जाल को लेकर जयपुर कमिश्नरेट की तरफ से नई पहल

जयपुर राजधानी जयपुर के पुलिस कमिश्नरेट में आज से साइबर सपोर्ट सेंटर शुरू किया गया है। इस सेंटर के जरिए राजस्थान में साइबर ठगी के शिकार लोगों की मदद की जाएगी और उनकी काउंसिंग की जाएगी ताकि वे भविष्य में इस तरह की ठगी का शिकार होने से बचें। अक्सर साइबर क्राइम का शिकार बच्चे, महिलाएं एवं बुजुर्ग अवसाद में भी चले जाते हैं। ऐसे में यह सेंटर इस तरह के पीड़ित लोगों की काउंसिलिंग करेगा, जिससे वे मानसिक अवसाद से बाहर निकल सकें। डीजीपी यूआर साहू व डीजी साइबर क्राइम हेमंत प्रियदर्शी ने इस सेंटर की शुरुआत की है। यह सेंटर मुंबई स्थित एनजीओ रेस्पांसिबल नेटिजन्स द्वारा संचालित किया जाएगा। कोगटा फाउंडेशन इसमें आर्थिक सहयोग करेगा। यह सेंटर ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए लोगों को मुकाबला करने, साइबर अपराधों के पीड़ितों को तत्काल सहायता प्रदान करने और #CyberSafe Jaipur अभियान के अंतर्गत साइबर वेलनेस को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। जानकारी के अनुसार साइबर अपराध के सबसे ज्यादा शिकार बच्चे होते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार साइबर स्पेस का उपयोग करने वाले 3 में से 1 बच्चे को ऑनलाइन बुलिंग का सामना करना पड़ता है। करीब 70 प्रतिशत बच्चों को साइबर खतरों का हर स्टेज पर सामना करना पड़ रहा है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंस से जुड़े साइबर अपराधों में 24.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। साइबर धोखाधड़ी के कारण 2024 में 2054 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। राजस्थान में हर रोज 3 हजार साइबर मामले दर्ज हो रहे हैं। इनमें से 45.25 प्रतिशत अपराध पैसों के लेन-देन, 30.16 प्रतिशत यूपीआई घोटाले से संबंधित हैं। वहीं लगभग 12 प्रतिशत अपराध सोशल मीडिया  व 11 प्रतिशत यौन उत्पीड़न से संबंधित हैं। साइबर अपराध के शिकार लोगों ने बीते 3 साल में 1581 करोड़ रुपए गंवा दिए, वहीं समय पर पुलिस के हस्तक्षेप के कारण 676 करोड़ रुपए बैंकों से निकाले जाने बचा लिए गए। यह केंद्र रिस्पॉन्सिबल नेटिजन्सव के तहत संचालित होगा। इस टीम में परियोजना समन्वयक, वरिष्ठ परामर्शदाता और मनोवैज्ञानिक, कानूनी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और कार्यशाला संचालक एवं केस डॉक्यूमेंटेशन के लिए फ्रंट डेस्क अधिकारी शामिल होंगे।  इस सेंटर में साइबर ठगी के शिकार लोगों को ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग और इंटरनेट की लत के मामलों के लिए परामर्श व मनोवैज्ञानिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही तकनीकी और कानूनी सहायता के तहत अकाउंट रिकवरी, धोखाधड़ी रोकथाम, पुलिस रेफरल उपलब्ध कराई जाएगी।  जागरूकता कार्यक्रम- छात्रों, कानून प्रवर्तन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा सत्र, जन जागरूकता अभियान- साइबर अपराधों की रोकथाम हेतु पहल। साइबर वेलनेस सहायता- तत्काल हस्तक्षेप और दीर्घकालीन पीड़ित सहायता दिए जाने की योजना है।   recent visitors 78

इंदौर: एमवाय अस्पताल में लापरवाही उजागर होने से बचने मीडिया का अस्पताल में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया !

इंदौर एमपी के इंदौर में स्थित एमवाय अस्पताल (Maharaja Yashwantrao Hospital or MYH) में वहीं के स्टाफ द्वारा किराये के कर्मचारियों से कैजुअल्टी में काम कराने के खुलासे के बाद प्रबंधन मनमानी को दबाने में जुट गया है। आए दिन अस्पताल की लापरवाही उजागर होने से किरकिरी न हो, इसलिए एमवायएच अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने मीडिया का अस्पताल में प्रवेश प्रतिबंधित (Media Banned) कर दिया है। दलील दी कि कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों के फोटो-वीडियो बनाने से परेशानी होती है। इसलिए मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक लगाई है। मालूम हो, एमवायएच में एवजियों का मामला उजागर होने से प्रबंधन की काफी फजीहत हुई थी। अस्पताल के कुछ लोगों ने कैजुअल्टी में काम करने के लिए 500 रुपए रोज पर अनाधिकृत रूप से कर्मचारियों को रख लिया था। यह काम वर्षों से चल रहा था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार ने एक्शन नहीं लिया। मामला उजागर होने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सख्ती के तौर पर मरीजों के साथ आने वालों से मुख्य गेट पर पूछताछ की जा रही है। कैजुअल्टी में मरीज के साथ एक ही परिजन को नियमानुसार जाने की अनुमति है। मरीजों की आवाज खामोश करने की साजिश मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध का काला आदेश मरीजों की पीड़ा को खामोश करने की साजिश है। अस्पताल में सेवाभावी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की कमी नहीं है। वे हर पल इस प्रयास में रहते हैं कि किस तरह मरीज की पीड़ा कम की जाए। तकलीफ उन्हें है जो सरकारी नौकरी में आराम की गुंजाइश तलाशते हैं। वे नहीं चाहते हैं कि उनके अस्पताल से नदारद होने या मनमानी करने की बात उजागर हो। अस्पताल में मीडियाकर्मी या और किसी को मरीजों के इलाज में अड़चन बनने की इजाजत नहीं है। लेकिन, इस काले आदेश को वापस लेना होगा। मामले में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना होगा। ताकि मनमर्जी जारी रहे एमवायएच में डॉक्टरों के समय पर नहीं आने, मरीजों से दुर्व्यवहार और इलाज में लापरवाही उजागर होती रहती है। मरीजों के परिजन से मारपीट, शव ले जाने में एंबुलेंस माफिया की मनमानी और निजी अस्पतालों में मरीजों को रेफर करने जैसे घटनाक्रम साबित हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि इन्हें दबाने के लिए अधीक्षक ने मीडिया पर प्रतिबंध का आदेश दिया है। चार दिन बाद भी नहीं लगे फोटो एमवायएच में पीजी स्टूडेंट्स द्वारा बाहरी लोगों को किराये पर रखकर ओटी टेक्नीशियन व ड्रेसर का काम लिया जा रहा था। मामले में कार्रवाई नहीं हुई और नौकरी पर रखे एवजियों के फोटो भी नहीं लगाए गए। पुलिस को भी सूचना नहीं दी है। नाम सामने नहीं आने से पुलिस पूछताछ नहीं कर पा रही है। recent visitors 56

उज्जैन महाकालेश्वर में इस साल 6 सवारियां निकाली जाएँगी, शेड्यूल जारी

उज्जैन सावन-भादौ महीने में उज्जैन महाकालेश्वर में बाबा महाकाल की सवारी (Mahakal Sawari 2025)की को लेकर महाकाल मंदिर समिति की ओर से शेड्यूल जारी कर दिया गया है। अगर आप भी महाकाल की सवारी के लिए उत्सुक हैं। तो आपको बता दें कि इस साल 2025 में 11 जुलाई को सावन (Sawan 2025) का महीना शुरू हो रहा है। सावन के इस महीने में महाकाल की पहली सवारी 14 जुलाई को और आखिरी या शाही सवारी 18 अगस्त को निकाली जाएगी। 2024 में निकाली गई थीं सात सवारियां, बाबा ने बैलगाड़ी पर किया था नगर भ्रमण बता दें कि पिछले साल 2024 में सावन-भादौ (Sawan Bhado 2024) महीने में कुल 7 सवारियां निकाली गई थीं। 22 जुलाई को पहली और 2 सितंबर को अंतिम या शाही सवारी का आयोजन किया गया था। बता दें कि पिछले साल महाकाल बैलगाड़ी पर बैठकर नगर भ्रमण पर निकलते थे और भक्तों का हाल जानते थे। इस साल 6 सवारियां यहां जाने सवारियों की डेट –इस साल 2025 में 11 जुलाई से सावन मास आरंभ, यहां देखें जुलाई से अगस्त तक महाकाल सवारी की पूरी डेट लिस्ट… जुलाई 2025 (July 2025) में महाकाल सवारी – पहली सवारी – 14 जुलाई – दूसरी सवारी – 21 जुलाई – तीसरी सवारी- 28 जुलाई अगस्त 2025 (August 2025) में महाकाल सवारी – चौथी सवारी- 4 अगस्त – पांचवी सवारी- 11 अगस्त – छठी या शाही सवारी- 18 अगस्त भक्तों के साथ सावन सोमवार उपवास पर रहेंगे महाकालेश्वर बता दें कि सावन-भादौ के महीने में बाबा महाकाल भक्तों के साथ स्वयं भी उपवास रखते हैं। इस दौरान उपवास रखे हुए ही वे अपने भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकल पड़ते हैं। महाकाल की सवारी में शामिल होने के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ता है। बता दें कि इस बार नागपंचमी का पर्व 29 मई को मनाया जाएगा। recent visitors 54

जालौर में 44.4 के पार पहुंचा पारा, 27 के बाद हल्की बारिश की संभावना

जालौर जिले में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को इस सीजन की अब तक की सबसे भीषण गर्मी दर्ज की गई। सुबह से ही तेज धूप और उमस ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार जिले का अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस वर्ष का अब तक का सर्वाधिक तापमान रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 31.3 डिग्री सेल्सियस रहा, जो राजस्थान की तीसरी सबसे गर्म रात रही। इससे पहले बारां में 31.8 और जैसलमेर में 31.5 डिग्री सेल्सियस की गर्म रात रिकॉर्ड की गई थी। रविवार को सुबह से ही शहर और जिले के अन्य क्षेत्रों में चिलचिलाती धूप के कारण आमजन बेहाल नजर आए। आसमान पूरी तरह साफ रहा और हवा न चलने से उमस और भी अधिक बढ़ गई। दोपहर 1 से 3 बजे के बीच सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और जगह-जगह मृग-मरीचिका जैसे दृश्य नजर आए, मानो सड़क पर पानी बह रहा हो। बाहर निकलने वाले लोग गर्मी से बचने के उपाय करते दिखाई दिए। कई क्षेत्रों में कूलर और एसी तक बेअसर हो गए। विशेषकर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। स्वर्णगिरी पहाड़ी के आसपास दो किलोमीटर के दायरे में दिन के साथ-साथ रात भी भट्टी जैसी गर्म रही। दिनभर सूर्य की तपिश झेलने के बाद रात को भी पहाड़ों से गर्म हवा निकलती रही, जिससे तापमान में गिरावट नहीं आ सकी और लोग रात में भी बेचैनी महसूस करते रहे। मौसम विभाग के अनुसार आगामी दो दिनों 26 और 27 मई को भी भीषण गर्मी और हीटवेव का असर बना रहेगा। इन दिनों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि 27 मई की शाम के बाद मौसम में परिवर्तन की उम्मीद जताई गई है। बीकानेर और जोधपुर संभाग के कुछ हिस्सों में तेज आंधी, गरज-चमक और वज्रपात के साथ बारिश हो सकती है। जालौर जिले के कुछ क्षेत्रों में भी हल्की बारिश होने की संभावना है। 28 और 29 मई को तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है और मौसम थोड़ा सामान्य हो सकता है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिलने की संभावना है। प्रशासन और मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि अत्यधिक गर्मी के मद्देनजर दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचें। विशेषज्ञों ने लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने, हल्का और सुपाच्य भोजन करने तथा खुले में काम करते समय छाया, टोपी और सनग्लासेस का प्रयोग करने की सलाह दी है। recent visitors 57

मिशन संडे की जांच में खुली पोल, छिंदारी डेम बना भ्रष्टाचार का जलाशय, पूरे भुगतान के बाद भी काम अधूरा

खैरागढ़ छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर एक बार फिर भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा के निर्देशन में संचालित ‘मिशन संडे’ टीम ने रविवार को छिंदारी गांव स्थित रानी रश्मि देवी सिंह जलाशय का निरीक्षण किया. इस जलाशय को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वन विभाग को 41 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी, लेकिन यहां के हालात कुछ और ही कहानी बयां करते हैं. निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि अधिकांश निर्माण कार्य या तो अधूरे हैं या बेहद घटिया गुणवत्ता के हैं. किचन शेड, मचान, कुर्सियां और बैठने की अन्य व्यवस्थाएं बेहद साधारण और कमजोर सामग्री, जैसे- बांस और सस्ती लकड़ियों से बनाई गई है. यह स्पष्ट दिखा कि निर्माण कार्यों में न केवल लापरवाही बरती गई है बल्कि शासकीय धन का खुला दुरुपयोग भी हुआ है. टीम को यह भी जानकारी मिली कि इन अधूरे कार्यों का भुगतान वन विभाग द्वारा पहले ही पूरा कर दिया गया है. वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने भी टीम के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों ने सरकारी पैसे का खुलकर दुरुपयोग किया है. विकास के नाम पर केवल दिखावा किया गया है. ग्रामीणों ने आरोप लगाए कि विभाग ने बिना जमीनी काम किए, कागजों में ही पूरे प्रोजेक्ट को पूर्ण दिखा दिया. recent visitors 45

महीनों की शांति के बाद, कोरोना वायरस भारत के शहरों में धीरे-धीरे वापसी कर रहा, 20 राज्यों में आये मामले

नई दिल्ली महीनों की शांति के बाद, कोरोना वायरस भारत के शहरों में धीरे-धीरे वापसी कर रहा है. दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कोविड-19 के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है. इन सभी राज्यों में अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है. भारत में दो नए कोविड-19 वेरिएंट- NB.1.8.1 और LF.7 का पता चला है. देश के कम से कम 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना के नए मरीज सामने आए हैं. आईसीयू बेड, ऑक्सीजन सप्लाई और अन्य जरूरी उपकरणों के साथ अस्पतालों को अपनी ओर से पूरी तैयारी रखने का निर्देश है. महाराष्ट्र में कोरोना के ज्यादातर नए केस मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे शहरों में रिपोर्ट हो रहे हैं. केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस महीने कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. कर्नाटक में भी बेंगलुरु नए कोविड मामलों का सेंटर बनकर उभरा है. राष्ट्रीय राजधानी में तीन साल में पहली बार कोरोना वायरस के 23 मामले दर्ज किए गए हैं. ज्यादातर मामले हल्के हैं और मरीजों को कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है. हालांकि, ठाणे और बेंगलुरु में कोरोना संक्रमित दो मरीजों की मौत भी हुई है. कर्नाटक के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि जिस कोरोना संक्रमित 84 वर्षीय व्यक्ति की बेंगलुरु में मौत हुई, उसे पहले से कई गंभीर बीमारियां थीं. वहीं, ठाणे नगर निगम ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज कालवा अस्पताल में इलाज करा रहे 21 वर्षीय कोविड-19 मरीज की मौत हो गई. केरल में कोविड संक्रमण के सर्वाधिक मामले मई में कोविड संक्रमण के सर्वाधिक 273 मामले केरल में सामने आए हैं. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने सभी जिलों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है. केरल के अस्पतालों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और खांसी के लक्षण वाले लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी गई है. पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भी कोविड के मामलों में मामूली वृद्धि देखी गई है, जहां 35 संक्रमण दर्ज किए गए हैं. इनमें होसकोटे का नौ महीने का बच्चा भी शामिल है. सांस की गंभीर बीमारी या सांस लेने में दिक्कत का सामना करने वाले लोगों को तत्काल अपना कोविड टेस्ट करवाने की सलाह दी गई है. मुंबई में मई में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 95 मामले सामने आए हैं, जो महाराष्ट्र में कोविड संक्रमण के कुल मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा है. हालांकि, शहर में अस्पताल में भर्ती होने की दर कम रही है, केवल 16 मरीज भर्ती हुए हैं. बीएमसी ने सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (SARI) जैसे लक्षण वाले सभी मरीजों को अपना कोविड जांच कराने की सलाह दी है. महाराष्ट्र के ठाणे में पिछले तीन दिनों में कोविड के 10 मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है. आंध्र प्रदेश में कोरोना के मामलों में बहुत ज्यादा उछाल नहीं आया है, लेकिन राज्य ने अस्पतालों को वैक्सीन, पीपीई किट और ट्रिपल-लेयर मास्क की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने का निर्देश दिया है. कोविड प्रभावित देशों, खासकर एशियाई देशों से लौटने वालों को कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी गई है. तमिलनाडु में भी मई महीने में अब तक कोरोना संक्रमण के 66 नए मामले दर्ज किए गए हैं. अचानक क्यों बढ़ने लगे कोरोना के मामले? दक्षिण एशिया में कोविड मामलों में उछाल संभवतः JN.1 वैरिएंट (ओमिक्रॉन का एक सब-वैरिएंट) के प्रसार के कारण हो रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैरिएंट काफी एक्टिव है, लेकिन इसे अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा चिंताजनक वैरिएंट के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है. कोरोना के इस वैरिएंट से संक्रमित होने वाले मरीजों में लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं और वह चार दिनों के भीतर ठीक हो जाता है. कुछ सामान्य लक्षणों में बुखार, नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द, थकान, थकावट इत्यादि शामिल हैं. तमिलनाडु में अप्रैल 2025 में NB.1.8.1 की पहचान की गई, जबकि गुजरात में मई में LF.7 के चार मामलों की पुष्टि हुई. इन दोनों को WHO द्वारा 'निगरानी में रखे गए वैरिएंट' के रूप में वर्गीकृत किया गया है. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का प्रमुख स्ट्रेन JN.1 बना हुआ है, जो सभी जांच किए गए सैंपल्स के 53% में पाया गया है. इसके बाद BA.2 (26%) और अन्य ओमिक्रॉन सबलाइनेज (20%) आते हैं. NB.1.8.1 और LF.7 जैसे वैरिएंट के सामने आने के बावजूद, कोई सबूत नहीं है कि ये ज्यादा गंभीर बीमारी का कारण बन रहे हैं. इनसे संक्रमित होने वाले मरीजों में लक्षण सामान्य सर्दी या हल्के फ्लू जैसे ही रहते हैं. बढ़ते कोविड मामले कितनी परेशानी की बात? कोरोना संक्रमण में अचानक बढ़ोतरी को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं, घबराने की नहीं. उनका कहना है कि पिछले संक्रमणों और टीकाकरण से मिली मजबूत हाइब्रिड इम्युनिटी के साथ, भारत स्थिर स्थिति में है. साथ ही उन्होंने सरकार को नए कोविड वैरिएंट पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत में मामूली वृद्धि कोविड-19 संक्रमण की सही संख्या को सही ढंग से नहीं दर्शा सकती है, क्योंकि श्वसन संबंधी लक्षणों वाले कई व्यक्ति कोविड-19 परीक्षण नहीं करवाते हैं. फिर भी, इस बात का कोई संकेत नहीं है कि वायरस ने अधिक गंभीर बीमारी पैदा करने के लिए म्यूटेशन किया है. वायरस के विकास पर नजर रखने वाले माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स का कहना है कि जब तक वायरस में महत्वपूर्ण विकासात्मक बदलाव नहीं आता, तब तक संक्रमण के पैटर्न या गंभीरता में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. लोगों में बन गई है सेल्फ इम्युनिटी: डॉ. गुलेरिया दिल्ली एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने आज तक से बातचीत में कहा कि जो नया वैरिएंट JN.1 सामने आया है, यह 2023 में ही रिपोर्ट हुआ था. कोरोना का यह वैरिएंट पूरी दुनिया में अब सबसे डॉमिनेंट वैरिएंट हो गया है. इस वैरिएंट में कुछ म्यूटेशन हुए हैं, जिसके कारण यह ज्यादा संक्रमणकारी हो गया है. यह लोगों की बॉडी की इम्युनिटी को बायपास करके उनको संक्रमित कर रहा है. लेकिन इससे संक्रमित लोगों में देखा गया है कि लक्षण हल्के होते हैं. अधिकतर लोगों में खांसी, नजला, बुखार, गले में खरास जैसे सामान्य लक्षण ही … Read more