एमपी में कानून व्यवस्था ध्वस्त: पुलिस के सामने महिला सरपंच प्रत्याशी का नामांकन फार्म छीनकर भागे दबंग, लिपिक को कुचलने की कोशिश

Law and order collapses in MP: thugs snatch nomination form from female Sarpanch candidate in front of police, attempt to crush clerk छतरपुर। जिले में जनपद पंचायत राजनगर की ग्राम पंचायत सीलोन में सरपंच पद के उपचुनाव के लिए नामांकन जमा करने के अंतिम दिन मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला प्रत्याशी का नामांकन फार्म रिटर्निंग आफिसर के सामने से कुछ युवक छीनकर कार से फरार हो गए। आरोप है कि फार्म लेकर भाग रही कार को रोकने का प्रयास करने पर जनपद पंचायत के लिपिक को वाहन से कुचलने की कोशिश भी की गई। घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हो रहा है। रिटर्निंग ऑफिसर के सामने से नामांकन पत्र लेकर भागे जानकारी के अनुसार, भूसौर निवासी दशोदा यादव सरपंच पद के लिए नामांकन जमा करने जनपद पंचायत राजनगर पहुंची थीं। दोपहर बाद नामांकन पत्र जांच के लिए रिटर्निंग आफिसर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे और नामांकन पत्र छीनकर बाहर निकल गए। इसके बाद वे सफेद रंग की कार में बैठकर भागने लगे। कार रोकने की कोशिश, लिपिक भी पीछे दौड़ा प्रत्याशी के पुत्र राजेश यादव के अनुसार, उनके स्वजन ने कार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि वाहन सवारों ने उन पर कार चढ़ाने की कोशिश की। इसी बीच जनपद पंचायत के लिपिक हरिनारायण कोरी युवकों के पीछे दौड़े, लेकिन आरोपित कार लेकर फरार हो गए। राजेश ने बताया कि उन्हें कुछ दिनों से धमकी मिल रहीं थी कि नामांकन दाखिल न करें। दो दर्जन से ज्यादा लोग धरने पर बैठे घटना के बाद जनपद पंचायत परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्याशी के पक्ष से करीब दो दर्जन लोग शाम तक जनपद पंचायत में धरने पर बैठे रहे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते रहे। उनका कहना था कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में नामांकन पत्र छीनकर ले जाना गंभीर मामला है। दोबारा भरवाया नामांकन फार्म राजनगर के रिटर्निंग ऑफिसर एवं तहसीलदार धीरज गौतम ने बताया कि महिला प्रत्याशी का नामांकन फार्म दोबारा भरवा दिया गया है। मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पुलिस बहुप्रसारित वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटना में शामिल लोगों तथा वाहन की पहचान में जुटी है। गौरतलब है कि जनवरी में ग्राम पंचायत सीलोन की तत्कालीन सरपंच सोना रैकवार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके बाद पिंकी रैकवार कार्यवाहक सरपंच के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही थीं। recent visitors 20

प्रदेश में पंचायतों में उपचुनाव से जुड़ी बड़ी खबर, 1 महीने में होगा यह काम, तैयारियां पूरी

भोपाल मध्य प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं में उपचुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं, जिन पंचायतों में उपचुनाव होना है, वहां हलचल जारी है, ऐसे में राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का कार्यक्रम भी जारी कर दिया है. जिसमें इलेक्शन कमीशन की तरफ से कहा गया है कि 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएं, यानि 1 जनवरी 2025 से जो लोग 18 साल के होंगे उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा, जहां रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ग्राम पंचायतों में मतदाता सूची का आखिरी प्रकाशन करेंगे. ताकि उपचुनाव की स्थिति पर काम किया जा सके. आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार सभी रजिस्ट्रीकरण अधिकारी आज शाम तक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने और शिफ्टिंग सूची के सत्यापन का कार्य करेंगे। इसके बाद मतदाता सूची तैयार किए जाने का काम शुरू होगा। इसके लिए जो भी कर्मचारी तैनात किए जाएंगे उन्हें आयोग द्वारा तय समय सीमा में मतदाता सूची में बदलाव कर देना होगा ताकि चुनाव कार्यक्रम तय किए जा सकें। ऐसे अपडेट होगी मतदाता सूची मतदाता सूची अपडेट के लिए 30 मई को शिफ्टिंग के साथ-साथ जांच और संशोधन के लिए  चेकलिस्ट रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को सौंपी जाएगी. फिर 5 जून को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा, इस संबंध में मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी जाएगी, फिर 5 और 6 जून को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित होगी, जिसमें दावे-आपत्तियां 5 से 11 जून तक ली जाएगी, फिर 17 जून तक दावे और आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा. इसके बाद 20 जून को चेकलिस्ट तैयार होगी और 21 जून को वेण्डर भी उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिसके बाद 23 जून को फोटो युक्त मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी, जिसे 23 जून को ही निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया जाएगा. बता दें कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में पंचायतों में उपचुनाव की स्थिति बन रही है, ऐसे में निर्वाचन आयोग ने पंचायत उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसलिए वोटर लिस्ट को अपडेट करने की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग की तरफ से शुरू हो गई है. ऐसे चलेगा कार्यक्रम     मतदाता सूची बनाने वाले वेण्डर 30 मई को शिफ्टिंग, जांच और संशोधन के लिए चेकलिस्ट रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को देंगे।     दाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन 5 जून को किया जाएगा। इस संबंध में मतदाताओं तथा जनप्रतिनिधियों को जानकारी देने के लिए 5 और 6 जून को स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की जाएंगी।     मतदाता सूची के संबंध में दावे-आपत्तियां 5 से 11 जून तक प्राप्त की जाएंगी।     दावे आपत्तियों का निराकरण 17 जून तक किया जाएगा। इसकी चेकलिस्ट 20 जून तक तैयार करके चेकलिस्ट में सुधार के बाद 21 जून को वेण्डर को उपलब्ध करा दिया जाएगा। फोटोयुक्त मतदाता सूची 23 जून तक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं वेण्डर द्वारा जनरेट की जाएगी। इसे 23 जून को ही वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। recent visitors 72

आधार और वोटर आईडी को जोड़ने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग अगले हफ्ते बैठक करेगी

नई दिल्ली  चुनाव आयोग अगले हफ्ते अहम बैठक करने वाला है। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। ईसी सूत्रों ने बताया कि यह बैठक आधार को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने के बारे में होगी। 2021 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन के बाद, आधार को EPIC (इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड) जोड़ने की अनुमति मिल गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने स्वैच्छिक आधार पर मतदाताओं से आधार नंबर लेना शुरू कर दिया। हालांकि, अभी तक दोनों डेटाबेस को लिंक नहीं किया गया है। वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाने पर जोर इस कदम का मकसद वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना और उसे साफ-सुथरा बनाना था। इसके लिए आधार और वोटर कार्ड को जोड़ना जरूरी नहीं था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी 18 मार्च को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, विधायी विभाग के सचिव राजीव मणि और UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार से मिलेंगे। आधार को EPIC से जोड़ने की चर्चा इस बैठक में आधार को EPIC से जोड़ने पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाताओं के एक ही EPIC नंबर होने का मुद्दा उठाया है। चुनाव आयोग ने माना है कि कुछ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने EPIC नंबर जारी करते समय गलत अल्फान्यूमेरिक सीरीज का इस्तेमाल किया था। चुनाव आयोग का प्लान क्या है इलेक्शन कमीशन ने हाल ही में फैसला लिया है कि वह तीन महीने के अंदर डुप्लिकेट नंबर वाले मतदाताओं को नए EPIC नंबर जारी करेगा। आयोग ने कहा है कि डुप्लिकेट नंबर होने का मतलब फर्जी वोटर नहीं है। केवल वही लोग वोट डाल सकते हैं जो किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड हैं। आधार को EPIC से जोड़ने के पीछे मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना है। इससे फर्जी वोटरों की पहचान करने में मदद मिलेगी। आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे हो सकते हैं। जैसे, इससे फर्जी वोटिंग रुक सकती है। एक व्यक्ति के एक से ज्यादा जगह वोट डालने की संभावना कम हो जाएगी। वोटर लिस्ट में एक ही व्यक्ति का नाम कई बार होने की समस्या भी दूर हो सकती है। चुनाव आयोग का मानना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी होगी। हालांकि, कुछ लोग इस कदम पर प्राइवेसी की चिंता भी जता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे लोगों की निजी जानकारी लीक हो सकती है। वो निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि आधार जैसी संवेदनशील जानकारी को वोटर आईडी से जोड़ना खतरनाक हो सकता है। यह लोगों के निजता के अधिकार का उल्लंघन भी हो सकता है। आधार-वोटर आईडी जोड़ने का फैसला अहम चुनाव ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करने का फैसला किया है। इसलिए गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और UIDAI के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी। यह देखना होगा कि EC इस मुद्दे को कैसे संभालता है। आधार को वोटर कार्ड से जोड़ने का फैसला काफी अहम है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सकती है, लेकिन साथ ही लोगों की निजता की सुरक्षा भी जरूरी है। आने वाले समय में इस पर और भी चर्चा होगी। recent visitors 68

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग जम्मू –कश्मीर में होने वाले नगरीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रिया को सशक्त करने में मदद करेगा

भोपाल राज्य निर्वाचन आयुक्तों की 31वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीसरे दिन मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग और जम्मू एवं कश्मीर राज्य निर्वाचन आयोग के बीच एमओयू किया गया। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग जम्मू –कश्मीर में होने वाले नगरीय निकाय निर्वाचन की प्रक्रिया को सशक्त करने में मदद करेगा। नेशनल कांफ्रेंस में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने प्रेजेंटेशन दिया। एमओयू के तहत मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग जम्मू और कश्मीर में होने वाले आगामी नगरीय निकाय चुनाव में 7 हजार ईवीएम और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने के साथ ही पोलिंग स्टाफ को ट्रेनिंग भी दिलाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में किए गए नवाचारों को जम्मू और कश्मीर में लागू करवाने के लिए प्रयास करेगा। साथ ही पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित बूथों पर पेपर लेस बूथ की प्रक्रिया अपनाने में मदद करेगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव की उपस्थिति में एमओयू में सचिव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग अभिषेक सिंह और सचिव जम्मू एवं कश्मीर राज्य निर्वाचन आयोग सुशील कुमार ने हस्ताक्षर किए। सचिव सुशील कुमार ने मध्यप्रदेश के राज्य निर्वाचन आयुक्त को इस एमओयू के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अब हमारे राज्य में सुगमता से नगरीय निकाय निर्वाचन कराने में मदद मिलेगी। राज्य निर्वाचन आयुक्तों के समक्ष विषय विशेषज्ञों ने दिया प्रेजेंटेशन पेंच नेशनल पार्क सिवनी में आयोजित राज्य निर्वाचन आयुक्तों की 31वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के विषय विशेषज्ञों द्वारा सुगम-सुविधाजनक निर्वाचन सम्बन्धी विभिन्न विषयों पर प्रेजेंटेशन दिए गये। आईसीपीएस (इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंटलरी स्टडीज) लंदन के डायरेक्टर अरविंद वेंकटरमन ने ‘’रिकगनाइजिंग इंडियास रोल एस ग्लोवल लीडर इन इलेक्शन एंड इलेक्टोरल डिप्लोमेसी’’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने भारत जैसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देश मे निर्वाचन प्रक्रिया के सरलीकरण के लिए इलेक्टोरल मैनेजर, ई-लर्निग जैसे ए-आई टूल्स तथा ब्लॉक चैन के उपयोग करने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। सेल्स डायरेक्टर एपीएसी टर्की मेहमत बुरक ने दूरस्थ मतदाता के पंजीयन तथा ऑनलाईन मतदान की कार्ययोजना पर अपना प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने मतदाताओं के डिजिटल प्रक्रिया द्वारा पंजीयन तथा बायोमेट्रिक से मतदाताओं के पहचान करने की प्रक्रिया पर जानकारी दी। साथ ही सुरक्षित, सुविधाजनक एवं पारदर्शी रूप से ऑनलाइन वोटिंग कराने की प्रक्रिया के बारे में बताया। कनाड़ा, बेनिन में वोटर रजिस्ट्रेशन एप्लिकेशन का डेमो भी दिया। वर्कली विश्वविद्यालय केलि फोर्निया के रिसर्च स्कालर प्रनव गुप्ता और अनस्तुभ अग्निहोत्री ने स्थानीय निर्वाचन में रिसर्च करने के संबध में प्रेजेंटेशन दिया। देश मे सुगम, सुविधाजनक पारदर्शी निर्वाचन कराने में ईवीएम, सॉफ्टवेयर सहित अन्य सपोर्ट उपलब्ध कराने वाले संस्थान इलेक्ट्रानिक्स कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईआईटी लिमिटेड बैंगलुरु के प्रतिनिधियों द्वारा राज्य निर्वाचन आयुक्तों के समक्ष निर्वाचन में किये जा रहे अनुसंधानों के बारे में अपना प्रेजेंटेशन दिया। विशेष रूप से नवीन एस-3 ईव्हीएम, इलेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम के उपयोग की कार्यविधि और लाभ को रेखांकित किया। इसी तरह पोलिंग एवं काउंटिंग में उपयोग होने वाले विभिन्न एप्लीकेशन के संबंध में आईएनसीटी चेन्नई के सीईओ गजपथी ने प्रेजेंटेशन दिया। अमिट स्याही और अन्य चुनाव सम्बन्धी सामग्री के संबंध में हैदराबाद एवं जयपुर की कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने प्रेजेंटेशन दिया। विभिन्न राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तों ने परिचर्चा में सहभागिता की। उन्होंने मध्यप्रदेश के पेपर लेस बूथ के मॉडल का अवलोकन किया।   recent visitors 82

चुनाव आयोग में ही गड़बड़ी… EVM का बचाव करने पर राजीव कुमार पर भड़के संजय राउत

महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए हैं. संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पूरी दुनिया कहती है कि ईवीएम में गड़बड़ी है. चुनाव आयोग कहता है कि इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है. उन्होंने कहा कि हमें तो लगता है कि आयोग में ही सारी गड़बड़ी है. मुख्य चुनाव आयुक्त का नाम लेते हुए संजय राउत ने कहा कि राजीव कुमार रिटायर होंगे, इसके बाद भी उनके पास बढ़िया काम रहेगा. रिटायरमेंट के बाद मोदी-शाह उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बना देंगे. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में ईवीएम में गड़बड़ी हुई है. चुनाव आयोग को गांवों में जाकर बैठना चाहिए, तभी उन्हें ईवीएम और बैलेट पेपर की सच्चाई उन्हें वाकई में समझ आएगी. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने लोकतंत्र का अपहरण कर लिया है. हजारों नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए. चुनाव आयोग अब बीजेपी के ‘ताट के नीचे बैठा बिल्ली’ बन गया है. दिल्ली विधानसभा चुनाव के तिथियों के ऐलान के समय उन सभी सवालों का जवाब दिया, जिसके लेकर इलेक्शन कमीशन पर सवाल उठाए जा रहे थे. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि चुनाव में वोट देने वाले किसी वोटर का नाम किसी भी तरीके से हटाया ही नहीं सकता है. उन्होंने कहा कि अगर फॉर्म साथ में न हो. यहां तक कि अगर किसी की मौत हो गई हो तो उसका रिकॉर्ड भी इलेक्शन कमीशन की तरफ से रखा जाता है. इसके लिए सभी मृतकों के डेथ सर्टिफिकेट को रिकॉर्ड में रखा जाता है. उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी किसी का नाम गलती से हट जाता है तो हमारी तरफ से उसे नोटिस भेजा जाता है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने एक शायरी के जरिए कहा कि आरोपों और इल्जामातों का दौर चले कोई गिला नहीं…हर परिणाम में प्रमाण देते है…शक का इलाज तो हकिम लुकमान के पास भी नहीं है. recent visitors 347

अब पोल बूथों के सीसीटीवी फुटेज उम्मीदवारों और आम जनता को उपलब्ध नहीं कराए जा सकते, चुनाव आयोग ने बदल नियम

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने चुनाव संबंधी नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। इसके तहत अब पोल बूथों के सीसीटीवी फुटेज उम्मीदवारों और आम जनता को उपलब्ध नहीं कराए जा सकते। इस सुधार से पहले, कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स के सेक्शन 93(2) के तहत चुनाव से संबंधित सभी कागजात आम जनता के निरीक्षण के लिए उपलब्ध थे। हालांकि इसके लिए कोर्ट के परमिशन की जरूरत थी। चुनाव आयोग द्वारा इन नियमों में बदलाव के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उसने चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और पारदर्शिता को खत्म करने का आरोप लगाया है। हालांकि आयोग का कहना है कि वोटरों की निजता और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाए गए हैं। यह बदलाव ऐसे वक्त में किए गए हैं जब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए थे कि वह हरियाणा विधानसभा चुनाव से संबंधित कागजात एडवोकेट महमूद प्राचा को उपलब्ध कराए। एडवोकेट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उसने हरियाणा चुनाव के दौरान हुई वीडियोग्राफी, सीसीटीवी कैमरा फुटेज, फॉर्म 17-सी पार्ट 1 और पार्ट 2 की कॉपीज मांगी थीं। अभी तक नियमों के नियमों में एक लिस्ट थी, जो सक्षम न्यायालय के निर्देश पर लोगों के लिए मुहैया करानी थी। शुक्रवार को नियमों में किए गए बदलाव ने इसमें एक लाइन जोड़ी है। इसमें चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पेपर्स की लिस्ट में डॉक्यूमेंट्स या फिर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स शामिल नहीं होंगे, जिनके बारे में नियमों में नहीं कहा गया है। कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहाकि उनकी पार्टी इन बदलावों को कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने कहाकि अगर हालिया समय में चुनाव की शुचिता को प्रभावित करने के लिए चुनाव आयोग ने कोई कदम उठाया है तो वह यही है। चुनाव आयोग के सूत्रों ने हालांकि बदलावों को जस्टिफाई किया है। इसमें कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज किसी को भी उपलब्ध कराने से मामला गंभीर हो सकता था। खासतौर पर जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील जगहों और नक्सल इलाकों में यह सुरक्षा का मसला बन सकता था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसके चलते वोटरों की जिंदगी पर भी संकट आ सकता था। चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक सभी इलेक्शन पेपर्स और डॉक्यूमेंट्स आम लोगों के निरीक्षण के लिए उपलब्ध हैं। किसी भी मामले में उम्मीदवार सभी तरह के रिकॉर्ड्स के बारे में जान सकते हैं। अधिकारी ने कहाकि प्राचा भी अपने विधानसभा क्षेत्र के सभी कागजात पाने के अधिकारी हैं। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक नियमों में जिन डॉक्यूमेंट्स को पब्लिक के लिए उपलब्ध न कराने की बात कही गई है वह इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स हैं। चुनाव आयोग के अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज पाने के बाद कोई भी एआई के जरिए उसमें छेड़छाड़ कर सकता है। इसलिए इस नियम को बदल दिया गया है। recent visitors 77

चुनाव आयोग ने 3 दिसंबर को कांग्रेस नेताओं को बुलाया, ‘चुनाव में कोई गडबड़ी नहीं, हर सवाल का मिलेगा जबाव’

नई दिल्ली महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस की ओर से ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) समेत चुनाव प्रक्रिया से समझौता किए जाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर निर्वाचन आयोग ने जवाब देते हुए कहा कि चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। आयोग ने कहा कि इसके बाद भी पार्टी के जो भी सवाल है वह उन सभी का लिखित और मौखिक दोनों ही तरीके जवाब देने को वह तैयार है। आयोग ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को बुलाया चुनाव आयोग ने कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को तीन दिसंबर को शाम पांच बजे मिलने अपने मुख्यालय बुलाया है। निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस पार्टी को यह जवाब उनकी ओर से 29 नवंबर को चुनाव में गड़बड़ियों को लेकर सौंपे गए ज्ञापन पर दिया है। जिसमें वोटों की संख्या और मतदान प्रतिशत को लेकर सवाल खड़े किए गए थे। चुनाव आयोग शिकायतों को सुनने को तैयार कांग्रेस कार्यसमिति की शुक्रवार को हुई बैठक में भी महाराष्ट्र चुनाव में हेर-फेर का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग के पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने की बात कही गई हरियाणा के बाद महाराष्ट्र चुनाव नतीजों को लेकर उठाए गए सवालों पर आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि मतदान के दौरान सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदान प्रतिशत और कुल वोटरों की संख्या की जानकारी लगातार दी जाती रहती है। मगर इसके बाद भी अगर कुछ और शिकायतें और जानकारी हैं तो आयोग उनको विस्तार से सुनने का तैयार है। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने भी लगाया गंभीर आरोप आयोग ने कहा कि वह स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव के लिए सदैव राजनीतिक दलों के सुझाव और शिकायतों का स्वागत करता है। खास बात यह है कि महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने चुनाव में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया था। साथ ही ईवीएम में हेर-फेर की भी शिकायत की थी। कांग्रेस की ओर से लगाए गए दो प्रमुख आरोपों का शनिवार को चुनाव आयोग ने विस्तार से जवाब दिया। इसमें पहला आरोप मतदान प्रतिशत को लेकर था। जिसमें कांग्रेस ने मतदान के दिन पांच बजे और रात 11 बजे के आंकड़े में भारी अंतर की शिकायत की है। इस पर आयोग ने सफाई दी कि वोटिंग प्रतिशत की एक तय प्रक्रिया है, उसी का पालन मतदान के दौरान किया जाता है। जैसे-जैसे मतदान के आंकड़े आते हैं वैसे ही उन्हें पूर्व के आंकड़ों में जोड़ दिया जाता है। बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में दूसरी अहम शिकायत मतदाता सूची को लेकर कि है जिस पर आयोग ने कहा है कि यह प्रक्रिया प्रत्येक पार्टी को जानकारी देकर अपनाई जाती है। सभी पार्टियां इसकी जांच परख भी करती हैं। कांग्रेस ने महाराष्ट्र चुनाव में शाम पांच बजे के बाद वोटिंग प्रतिशत में भारी उछाल के साथ इवीएम से जुड़ी शिकायतों के साथ शुक्रवार को चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी शिकायतें विस्तृत तौर पर रखने के लिए आयोग से मिलने का वक्त मांगा था। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने के लिए देशभर में जनजागरण अभियान चलाने का एलान भी किया है। recent visitors 87