बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही

मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार संकल्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीति आयोग की विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047 बैठक में की सहभागिता बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता मे नीति आयोग की शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) की 10वीं बैठक में भाग लिया। यह बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण के विजन से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की प्रथम पंक्ति में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में शामिल होकर प्रधानमंत्री मोदी का मार्गदर्शन प्राप्त किया और इसे भारत के भविष्य निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर कहा कि प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में सभी राज्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश विकास और लोक कल्याण के संकल्प पथ पर अग्रसर है और निरंतर नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है।   recent visitors 68

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने बताया ट्रंप के 25% टैरिफ के बावजूद भारत में बने आईफोन अमेरिका में होंगे सस्ते

 नई दिल्ली भले ही अमेरिका भारत में बने आईफोन पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए, फिर भी इसकी कुल उत्पादन लागत अमेरिका में इसे बनाने की तुलना में बहुत कम होगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है। जीटीआरआई की ओर से यह जानकारी ऐसे समय पर दी गई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बयान के कारण खासा चर्चा में है। अपने बयान में ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर एपल भारत में आईफोन बनाने का फैसला करता है तो वे इसपर पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा देंगे। हालांकि, जीटीआरआई का मानना है कि इस तरह के शुल्कों के बावजूद भारत में आईफोन का निर्माण लागत की दृष्टि से अधिक प्रभावी है। रिपोर्ट में 1,000 अमेरिकी डॉलर के आईफोन की पूरी मौजूदा मूल्य शृंखला के बारे में विस्तार से बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आईफोन के निर्माण में एक दर्जन से अधिक देशों का योगदान है। एपल अपने ब्रांड, सॉफ्टवेयर और डिजाइन जरिए मूल्य का सबसे बड़ा हिस्सा, लगभग 450 डॉलर प्रति डिवाइस अपने पास रखता है। क्वालकॉम और ब्रॉडकॉम जैसे अमेरिकी घटक निर्माताओं के हिस्से में करीब 80 जाते हैं। जबकि ताइवान चिप बनाकर 150 अमेरिकी डॉलर हासिल करता है। दक्षिण कोरिया ओएलईडी स्क्रीन और मेमोरी चिप्स बनाकर 90 डॉलर हासिल करता है। जापान मुख्य रूप से कैमरा सिस्टम तैयार कर 85 डॉलर के पार्ट्स की आपूर्ति करता है। जर्मनी, वियतनाम और मलेशिया छोटे आईफोन के कई अन्य छोटे-छोटे हिस्से बनाकर 45 डॉलर का योगदान देते हैं। जीटीआरआई ने कहा कि चीन और भारत जैसे देश आईफोन असेंबली के मामले में प्रमुख खिलाड़ी होने के बावजूद, प्रति डिवाइस केवल लगभग 30 डालर ही कमाते हैं। यह एक आईफोन के कुल खुदरा मूल्य का 3 प्रतिशत से भी कम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के बाद भी भारत में आईफोन का निर्माण आर्थिक रूप से तर्कसंगत है। ऐसा मुख्य रूप से भारत और अमेरिका में पारिश्रमिक लागत में भारी अंतर के कारण है। भारत में, आईफोन असेंबल करने वाले श्रमिक हर महीने लगभग 230 डॉलर कमा पाते हैं। वहीं कंपनी यदि अमेरिका के कैलिफोर्निया जैसे राजय में आईफोन बनाने का फैसला लेती है तो उसे काफी महंगा पड़ेगा। न्यूनतम मजदूरी से जुड़े कानूनों के कारण अमेरिका में फोन बनाने पर आईफोन की श्रम लागत लगभग 2,900 अमरीकी डॉलर तक पहुंच जाएगी, जो इसकी वर्तमान श्रम लागत से 13 गुना अधिक है। भारत में एक आईफोन को असेंबल करने में लगभग 30 डॉलर का खर्च आता है, जबकि अमेरिका में इसी प्रक्रिया पर लगभग 390 डॉलर का खर्च आएगा। अगर एपल अपना उत्पादन अमेरिका ले जाता है, तो हर आईफोन उसका मुनाफा वर्तमान के 450 अमेरिकी डॉलर से घटकर मात्र 60 अमेरिकी डॉलर रह जाएगा। ऐसे में, बिना खुदरा कीमतों में इजाफा किए वह इससे अधिक लाभ नहीं हासिल कर पाएगा। जीटीआरआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कैसे वैश्विक मूल्य शृंखलाएं और श्रम लागत का अंतर भारत को विनिर्माण के लिए एक प्रतिस्पर्धी विकल्प बनाते हैं। जीटीआरआई के अनुसार भारत में आईफोन की असेंबलिंग अमेरिका के संभावित व्यापार प्रतिबंधों के बावजूद कारगर बने रहने की उम्मीद है। recent visitors 71

राज्य सरकार की तरफ से निवेश के दावे किए जाने को खोखला बताया: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

जयपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार की तरफ से निवेश के दावे किए जाने को शनिवार को खोखला बताया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री जी यह सब अपने मन से नहीं कह रहे हैं, बल्कि उनसे कहलवाया जा रहा है। वह जो कुछ भी बोल रहे हैं, उसकी सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने प्रदेश में लोगों को हो रही पेयजल समस्या का भी जिक्र किया। गहलोत ने कहा कि प्रदेश में लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, सरकार का दोहरा पैमाना देखिए कि एक तरफ जहां ये लोग सार्वजनिक मंचों पर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ आम जनता को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? उन्होंने मनरेगा श्रमिकों पर कहा कि मौजूदा समय में उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, प्रशासन की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रशासन को चाहिए कि श्रमिकों से एक घंटा कम काम कराया जाए। हमारे श्रमिकों के ऊपर काम का अत्यधिक बोझ डाला जा रहा है, जिससे उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक सोची-समझी साजिश के तहत हमारी पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। उन पर राजनीतिक हमले करके हमारे हौसले को पस्त करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हमारा हौसला पस्त नहीं होगा। उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की कार्रवाई को भाजपा की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि आज से 90 साल पहले हमने इस अखबार को शुरू किया था। इसके बाद यह किसी कारणवश बंद हो गया, लेकिन अब हम इसे फिर से शुरू करने जा रहे हैं। जिससे भाजपा परेशान हो चुकी है। भाजपा को इस बात का डर है कि अगर नेशनल हेराल्ड को फिर से शुरू किया गया, तो कांग्रेस खुलकर अपने विचार प्रकट करेगी, जिससे उन्हें समस्या होगी। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संबंध में राहुल गांधी के सवालों की आलोचना किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं। अगर वे सवाल नहीं करेंगे तो कौन करेगा? अगर वे सवाल नहीं करेंगे, तो कल को जनता पूछेगी कि आप तो विपक्ष के नेता थे, लेकिन आपने आज तक कोई सवाल ही नहीं किया। आपने अपनी भूमिका का निर्वहन ढंग से किया ही नहीं। उन्होंने कहा कि आप इतिहास देख लीजिए। अमेरिका ने कभी हमारा साथ नहीं दिया। जब कारगिल युद्ध हुआ था, तब भी उसने हमारा साथ नहीं दिया था। ऐसी स्थिति में भारत को हिम्मत दिखानी चाहिए और उसे अमेरिका को दो टूक जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आखिर किस हैसियत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीजफायर का ऐलान करते हैं। सीजफायर का ऐलान भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी सहमति से होना चाहिए था। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं, अमेरिका ने इस मामले में दखल दे दिया। recent visitors 84

ऑपरेशन सिंदूर ने US को दिखाई असलियत, भारत से सबक ले वर्ना…अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ की चेतावनी

वाशिंगटन भारत द्वारा हाल ही में अंजाम दिए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पूरी दुनिया को भविष्य की लड़ाई का नया चेहरा दिखा दिया है। अमेरिका के प्रसिद्ध रक्षा विशेषज्ञ और वॉर इंस्टीट्यूट  में प्रोफेसर जॉन स्पेंसर ने कहा है कि यह सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी एक  नींद से जगाने वाली चेतावनी  है। उन्होंने लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए भारत ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य के युद्ध कैसे होंगे-तेज़, तकनीकी, और घातक। अब अमेरिका को भी अपनी सुस्त और महंगी डिफेंस मशीनरी पर गंभीरता से काम करना होगा।” अमेरिका का रक्षा ढांचा खतरे में जॉन स्पेंसर के मुताबिक अमेरिका की सैन्य तैयारियां खस्ताहाल हो चुकी हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर अचानक चीन से युद्ध छिड़ जाए, तो अमेरिका उसकी आक्रामक ताकत के सामने कमज़ोर साबित  हो सकता है। कुछ प्रमुख समस्याएं जो उन्होंने गिनाईं: अमेरिका हर साल केवल 24 से 48 PAC-3 मिसाइलें बना सकता है। यूक्रेन को भेजे गए स्टिंगर और जैवलिन मिसाइलों की भरपाई में   से 4 साल लग जाएंगे। 155 मिमी तोपों के गोले भी लगभग खाली स्टॉक में पहुंच चुके हैं।   अमेरिकी हथियार महंगे, सुस्त, और कम मात्रा में स्पेंसर ने अमेरिका की डिफेंस इंडस्ट्री पर सवाल उठाते हुए कहा  कि एक  Tomahawk मिसाइल की कीमत लगभग 2 मिलियन डॉलर है। HIMARS लॉन्चर की कीमत 5 मिलियन डॉलर से अधिक है। इसके मुकाबले ईरानी ड्रोन मात्र 40,000 डॉलर में उपलब्ध हैं और काम में ज़्यादा कारगर साबित हो रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिका की ड्रोन नीति पर निशाना साधते हुए कहा, “हम लाखों डॉलर के ड्रोन बनाते हैं, जबकि हमारे दुश्मन कुछ हजार डॉलर में घातक ड्रोन तैयार कर लेते हैं।” ड्रोन बन चुके  युद्ध के नए सिपाही ऑपरेशन सिंदूर में ड्रोन का जिस तरह से इस्तेमाल हुआ, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब लड़ाई के मैदान में पारंपरिक हथियारों की जगह  सस्ते और प्रभावशाली ड्रोन सिस्टम ले रहे हैं। स्पेंसर के शब्दों में “ड्रोन अब नए तोप के गोले हैं। युद्ध जीतने के लिए हमें   निगरानी करने वाले, हमला करने वाले और तेज़ उड़ान भरने वाले हजारों नहीं, लाखों ड्रोन  चाहिए।”   recent visitors 75

शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय मनेन्द्रगढ़ में जनभागीदारी समिति की बैठक सम्पन्न

मनेंद्रगढ़  शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ में नवगठित जनभागीदारी समिति की प्रथम बैठक का आयोजन उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सिंह राणा ने की। अध्यक्ष महोदय एवं सभी सदस्यगण पहली बार महाविद्यालय पधारे, जिनका स्वागत प्राचार्य डॉ.श्राबनी चक्रवर्ती द्वारा पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानपूर्वक किया गया। बैठक की कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए डॉ.चक्रवर्ती ने समिति के समक्ष प्रमुख एजेण्डा प्रस्तुत किए तथा महाविद्यालय की वर्तमान स्थिति से सभी सदस्यों को अवगत कराया। उन्होंने महाविद्यालय के समग्र विकास हेतु निम्नलिखित आवश्यक प्रस्ताव रखे- महाविद्यालय की बाऊंड्री वॉल का निर्माण, अतिरिक्त अध्यापन कक्षों की आवश्यकता, पेयजल व्यवस्था के अंतर्गत वॉटर कूलर की स्थापना, रिक्त पदों पर विशेषकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की वैकल्पिक नियुक्ति की आवश्यकता आदि। प्राचार्य डॉ. चक्रवर्ती ने इस बात पर विशेष बल दिया कि महाविद्यालय को स्नातकोत्तर स्तर का दर्जा प्राप्त है, किन्तु वर्तमान में केवल चार विषयों में ही स्नातकोत्तर कक्षाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने समिति से आग्रह किया कि हिन्दी, अंग्रेज़ी, इतिहास, अर्थशास्त्र, प्राणीशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, भौतिकशास्त्र, गणित एवं भूगर्भशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ कराने हेतु शासन स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएं। इसके साथ ही, महाविद्यालय में शिक्षकों व कर्मचारियों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती सुनिश्चित कराने की आवश्यकता भी जताई गई। बैठक में प्रस्तुत सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया तथा महाविद्यालय स्तर पर किए जाने वाले कार्यों पर समिति ने सर्वसम्मति से अपनी सहमति प्रदान की। शासन स्तर पर संपादित कार्यो के लिए आवश्यक प्रयास किए जाने का भी समिति द्वारा आश्वासन दिया गया। आज की इस बैठक में समिति के माननीय सदस्यगण श्री धमेन्द्र पटवा, सुंदरलाल दुग्गड़, मुरलीधर सोनी,  शैलेष जैन, आदित्य राज डेविड, गौरव अग्रवाल, राजकुमार गुप्ता, जीतेन्द्र यादव एवं महाविद्यालयीन स्टॉफ से डॉ. रश्मि तिवारी, डॉ.सुशील कुमार तिवारी, पुष्पराज सिंह, रामनिवास गुप्ता एवं मनीष श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही। निश्चित ही आज की इस बैठक में लिए गए निर्णय महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं भौतिक उन्नति हेतु रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे। recent visitors 65

आतंकवाद पर अब चुप्पी नहीं, PM मोदी का साफ संदेश- धैर्य की सीमा होती- पहलगाम हमले के बाद UAE का सख्त बयान

दुबई संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारत के राजदूत ने कहा है कि 2008 के मुंबई हमलों के बाद से आतंकवाद पर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों के रुख में अब उल्लेखनीय बदलाव आया है क्योंकि उन्हें व्यापक रूप से यह अहसास हो गया है कि आतंकवाद सभी का साझा दुश्मन है और इस खतरे से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है। UAE में भारत के राजदूत संजय सुधीर ने इस मुद्दे पर भारत के रुख को सामने लाने के लिए श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की देश की यात्रा की भी सराहना की। उन्होंने इस यात्रा को बहुत सफल बताया। राजदूत ने  कहा, ‘‘हमारे विमर्श, हमारे दृष्टिकोण, सभी को बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली। यह एक स्पष्ट प्रतिक्रिया थी, यह इस तथ्य का स्पष्ट दोहराव था कि UAE हमारा एक सच्चा रणनीतिक साझेदार, एक मित्र है, जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं।'' सुधीर ने GCC देशों बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद की प्रतिक्रिया और मुंबई हमले के बाद की प्रतिक्रिया में आए बदलाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने ‘पीटीआई' से कहा, ‘‘2008 में मुंबई आतंकवादी हमले के बाद स्थिति काफी अलग थी। जीसीसी देशों की प्रतिक्रिया काफी अलग थी। इस बार यह काफी अलग थी। हमारा नेतृत्व यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और कतर के साथ बहुत सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। यह वही जीसीसी है लेकिन कुछ चीजें बदल गई हैं क्योंकि व्यापक रूप से यह अहसास हो गया है कि आतंकवाद मानवता का साझा दुश्मन है और हमें इसका मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है।'' राजदूत ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात संभवतः पहला देश था जिसने स्पष्ट बयान जारी कर इस हमले की निंदा की और इसे आतंकवादी कृत्य बताया तथा सभी प्रकार के आतंकवाद को समाप्त करने का आह्वान किया। शिंदे के नेतृत्व वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान यूएई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की। इसने सहिष्णुता एवं सह-अस्तित्व मामलों के मंत्री शेख नाहयान बिन मुबारक अल नाहयान और विदेश मामलों, रक्षा एवं आंतरिक मामलों पर संघीय राष्ट्रीय परिषद समिति के अध्यक्ष अली राशिद अल नूमी समेत कई नेताओं से मुलाकात की। सुधीर ने कहा, ‘‘जिस तरह से प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया गया और हमारे दृष्टिकोण को प्रतिक्रिया मिली वह हमारी साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है।'' उन्होंने कहा कि यूएई की प्रतिक्रिया ने मानवता के साझा दुश्मन आतंकवाद का मुकाबला करने की उसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। सुधीर ने जिक्र किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद को प्रायोजित करने पर पाकिस्तान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि धैर्य की भी एक सीमा होती है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर' को भारत के अग्रसक्रिय रुख का प्रमाण बताते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धैर्य की भी एक सीमा होती है। हम महात्मा गांधी और गौतम बुद्ध की धरती से आते हैं लेकिन हमें कोई भी हल्के में नहीं ले सकता।'' सुधीर ने भारत एवं यूएई के द्विपक्षीय संबंधों पर का जिक्र करते हुए विशेष रूप से व्यापार में मजबूत वृद्धि पर प्रकाश डाला जो वित्त वर्ष 2024-25 में 100 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया।     recent visitors 78

चलते ट्रैक्टर से गिरने से बुजुर्ग की मौत

कोरबा कोरबा के उरगा थाना अंतर्गत मड़वारानी फाटक के पार करते समय एक चलते ट्रैक्टर से 56 वर्षीय बुजुर्ग ट्रैक्टर से नीचे गिर गया। हादसे में बुजुर्ग की मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया। सभी का रो रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि उरगा थाना अंतर्गत परसाभांठा निवासी 56 वर्षीय बिसाहू राम उर्फ गुडूम राम बिंझवार अपने रिश्तेदारों के साथ ट्रैक्टर में बैठकर खाद लेने गया हुआ था। जहां खाद लेकर घर वापस लौट रहे थे, ट्रैक्टर पर तीन लोग सवार थे। मड़वारानी फाटक पहुचने पर फाटक बंद था। इस दौरान दो व्यक्ति ट्रैक्टर से उतर कर पैदल फाटक पार कर दूसरी तरफ चले गए वहीं बिसाहू राम ट्रैक्टर पर ही बैठा हुआ था। फाटक पार करते समय  वह अचानक ट्रैक्टर से अनियंत्रित होकर नीचे गिर गया और ट्रैक्टर की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। देखते ही देखते राहगीरों की भीड़ एकत्रित हो गई और घायल को निजी वाहन से जिला मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया। गया जहां अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर मृत घोषित कर दिया। recent visitors 65