पाकिस्तान के भिखरियों ने भीख मांगकर खरीद ली हवेली से लेकर SUV, , विदेश तक फैला नेटवर्क

नई दिल्ली पाकिस्तान में भीख मांगना कारोबार बन गया है। काफी लोग भीख मांगकर आलिशान जीवन जी रहे हैं। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तान कर्ज के तले दबा हुआ है और उधार के पैसों से चल रहा है। पाकिस्तान को हाल ही में आईएमएफ से बेलआउट पैकेज मिला है। पाकिस्तान के भिखारियों की यह स्थिति है कि काफी लोग दुनिया के दूसरे देशों में भी जाकर भीख मांग रहे हैं। वहीं पाकिस्तान ने भी इस बात को मान लिया है कि उसके देश में भिखारियों की संख्या बढ़ रही है। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में बताया गया कि साल 2024 से अब तक 5000 से ज्यादा पाकिस्तानी भिखारियों को अलग-अलग देशों से वापस भेजा गया है। पाकिस्तानी भिखारियों के पास हवेली, SUV बता दें, इस साल फरवरी के महीने में एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें पेशे से एक डॉक्टर महिला ने दावा किया था कि उसकी शादी के कुछ महीने बाद उसे पता चला कि उसके ससुराल में हवेली, एसयूवी, स्विमिंग पूल और दूसरे आलीशान सामान भीख के पैसों से खरीदा गया था. इसलिए उसकी शादी एक शाही भिखारी परिवार में हुई है. इसमें सबसे खास बात ये है कि पाकिस्तान में दो तरह के भिखारी पाए जाते हैं. पाकिस्तान में दो तरह के भिखारी एक वो जो वहीं पर भीख मांगकर अपना गुजारा करते हैं जबकि दूसरे भिखारी वो हैं जिनके बड़े सपने होते हैं. वो ऐसे भिखारी होते हैं जो पाकिस्तान को छोड़कर दूसरे देशों में भीख मांगने जाते हैं. वहां पर वो भीख मांगकर काफी पैसे कमा लेते हैं. उनका ये सारा कारोबार एक मॉडल पर चलता है. जिस तरह से आपको कोई भी कारोबार शुरू करने के लिए स्किल्स की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह से पाकिस्तान में भिखारियों ने इस पेशे को अपने भीख मांगने के स्किल्स के साथ चला रहे हैं. ये भीख मांगते समय खास तरह की ड्रेस पहनते हैं, ये आपको अलग-अलग लुक में नजर आएंगे, ताकि सामने वाले लोगों का ध्यान खींचा जा सके. सऊदी अरब के बाद इराक ने सबसे ज्यादा 247 पाकिस्तानियों को वापस भेजा. यूएई ने पाकिस्तान सरकार के सामने गंभीर चिंता जताई और पाकिस्तानियों के लिए वीजा नियमों को कड़ा किया. इस दौरान 58 लोगों को वापस भेजा गया. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यह समस्या खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जिससे पाकिस्तानियों के लिए दूसरे देशों से वीजा प्राप्त करना मुश्किल हो गया है. उन्होंने अनुमान लगाया कि पाकिस्तान में करीब 22 मिलियन लोग भीख मांगते हैं, जिससे सालाना करीब 42 बिलियन डॉलर की कमाई होती है. यह आंकड़ा इस समस्या के पैमाने को दिखाता है. 2023 में सीनेट समिति की बैठक के दौरान, तत्कालीन विदेश मंत्रालय सचिव, जुल्फिकार हैदर ने खुलासा किया कि विदेशों में गिरफ्तार किए गए अधिकांश भिखारी लगभग 90 फीसदी पाकिस्तानी नागरिक थे. उन्होंने कहा कि उनमें से कई सऊदी अरब, ईरान और इराक जैसे देशों में तीर्थयात्रा वीजा पर यात्रा करते हैं, लेकिन फिर भीख मांगते हैं. व्यवसाय का नया मॉडल पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने खुलासा किया है कि सबसे ज्यादा 4,498 भिखारियों को सऊदी अरब से वापस भेजा गया था. ऐसे में जब सब कुछ सामने आ चुका है तो सवाल ये उठता है कि, पाकिस्तान अब भारत के रक्षा मंत्री के उस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देगा, जिसमें उन्होंने ये कहा था कि “जहां भी पाकिस्तान खड़ा होता है, भिखारियों की कतार वहीं से शुरू होती है. भीख मांगकर बनाई हवेली फरवरी में एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक पाकिस्तानी महिला ने बताया कि शादी के कुछ महीनों बाद उसे पता चला कि उसके ससुराल वालों की हवेली, एसयूवी, स्विमिंग पूल और दूसरी लग्जरी चीजें भीख मांगकर खरीदी गई हैं। यह पाकिस्तानी महिला पेशे से डॉक्टर है। उसकी शादी भिखारियों के एक अमीर परिवार में हुई थी। भीख मांगकर कमाई बेशुमार दौलत पाकिस्तानी भिखारियों ने भीख मांगकर बेशुमार दौलत कमाई है। यही नहीं, कई पाकिस्तानी भिखारी विदेश चले गए और वहां भी उन्होंने भीख मांगी। ऐसे में उन्होंने और ज्यादा दौलत इकट्ठी की ली। उनका यह बिजनेस मॉडल लोगों को हैरान कर रहा है। वहीं पिछले 3 सालों में 50 हजार पाकिस्तानी दुनिया भर के देशों में भीख मांगते पाए गए। किन-किन देशों से भेजे गए भिखारी? पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को सौंपे गए एक लिखित बयान के अनुसार साल 2024 से अब तक कुल 5,402 पाकिस्तानी भिखारियों को विदेश से खदेड़ा गया है। सऊदी अरब, इराक, मलेशिया, यूएई, कतर और ओमान जैसे कई देश शामिल हैं, जहां से पाकिस्तानी भिखारियों को पकड़कर भगाया गया है। ज्यादातर भिखारी सऊदी अरब से वापस भेजे गए हैं। सऊदी अरब से 4,498 और इराक से 242 भिखारी वापस पाकिस्तान भेजे गए। इसी तरह मलेशिया से 55 और यूएई से 49 पाकिस्तानी भिखारियों को वापस पाक भेजा गया है। recent visitors 52

पीएम मोदी 25 मई को आ रहे गुजरात, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला दौरा

अहमदाबाद पहलगाम हमले के बाद 'ऑपरेशन सिंदूर' से आतंकवादियों के आकाओं को कड़ा जवाब देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के गुजरात दौरे पर आएंगे। पीएम मोदी के अहमदाबाद, दाहोद और कच्छ के भुज जाने की संभावना है। पीएम मोदी कच्छ के भुज में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करेंगे। इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार जल्द ही पीएम मोदी का आधिकारिक कार्यक्रम रिलीज हो जाएगा। इसे अंतिम तौर पर फाइनल किया जा रहा है। पीएम मोदी पिछले साल दिवाली पर कच्छ पहुंचे थे तब उन्होंने सरक्रीक के पास हरामी नाला के नजदीक सैनिकों के साथ दिवाली मनाई थी। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले हफ्ते भुज एयरबेस का दौरा किया था। सीमावर्ती जिलों में हुए थे हमले पाकिस्तान के साथ सीजफायर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर राष्ट्र को संबोधित किया था। इसके बाद वह जाब के आदमपुर एयरबेस पहुंचे थे। वहां से पीएम मोदी ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था। अब पीएम मोदी अपने गृह राज्य गुजरात पाकिस्तान को कड़ा संदेश दे सकते हैं। गुजरात में कच्छ-बनासकांठा और पाटण जिले पाकिस्ता की सीमा वाले जिले हैं। सैन्य संघर्ष के दौरान इन जिलों पाकिस्तान ने ड्रोन से हमला किया था। जिसका भारत ने बखूबी जवाब दिया था और सभी हमलों को नाकाम कर दिया था। पहलगाम आतंकी हमले में गुजरात के तीन लोग मारे गए थे। इनमें दो भावनगर और एक व्यक्ति सूरत के रहने वाले थे। कच्छ में तैयारियां जोरों पर सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ऑपरेशन सिंदूर के बाद 25 मई से 26 मई तक गुजरात के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पीएम मोदी कच्छ के भुज, दाहोद और अहमदाबाद में रहने की उम्मीद है। पीएम मोदी अपने दौरे में कच्छ के भुज शहर में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। यह पीएम मोदी का 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पहला गुजरात में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम होगा। गुजरात दौरे पर के बाद पीएम मोदी पूर्वोत्तर के दौरे पर जाएंगे। recent visitors 63

श्रावण मास में रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास में भक्तों को सम्राट अशोक सेतु के रास्ते मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। रूद्रसागर पर बनाया गया नया पुल भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट का मुख्य विकल्प होगा। मंदिर प्रशासन द्वारा बनाए जा रहे दर्शन प्लान में इस विषय पर प्रमुखता से विचार किया जा रहा है। महाकाल मंदिर के रूद्रसागर पर उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा 200 मीटर लंबा व 9 मीटर चौड़ा अत्याधुनिक पुल का निर्माण किया है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने पुल का उद्घाटन कर इसे सम्राट अशोक सेतु नाम दिया है। हालांकि वर्तमान दर्शन व्यवस्था पूर्व निर्धारित मार्गों से सुचारू रूप से संचालित होने के कारण फिलहाल इस पुल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। श्रावण मास में भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायवर्ट करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। चलित भस्म आरती व्यवस्था श्रावण मास में चलित भस्म आरती व्यवस्था में सम्राट अशोक सेतु मुख्य भूमिका निभा सकता है। क्योंकि श्रावण मास में सामान्य दिनों में रात 3 बजे तथा प्रत्येक रविवार को रात 2.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे, पश्चात भस्म आरती होगी। रात्रि के समय श्रद्धालु चारधाम पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते इस पुल से सीधे मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। यह रास्ता वर्तमान मार्ग से करीब डेढ़ किलो मीटर छोटा भी है। इससे होकर दर्शनार्थी शीघ्र मंदिर में दर्शन कर बाहर निकल सकते हैं। अभी इस मार्ग से मिल रहा मंदिर में प्रवेश वर्तमान में सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते श्री महाकाल महालोक के नंदी द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। यहां से श्रद्धालु महालोक में भ्रमण करते हुए श्री मानसरोवर फैसिलिटी सेंटर से टनल के रास्ते मंदिर परिसर में होते हुए गणेश व कार्तिकेय मंडपम् से भगवान महाकाल के दर्शन कर पा रहे हैं। साढ़े 22 करोड़ की लागत से बना नया पुल सम्राट अशोक सेतु के निर्माण पर स्मार्ट सिटी कंपनी ने करीब साढ़े 22 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पुल का मध्य भाग काफी चौड़ा है। यहां खड़े होकर श्रद्धालु रूद्रसागर का मनोरम दृश्य देख सकते हैं। पुल पर आकर्षक लाइट लगाई गई है। रात्रि के समय इस पुल से गुजरना एक अलग ही आनंददायक अनुभव रहेगा। डायवर्ट रूट के रूप में होगा उपयोग     सम्राट अशोक सेतु महाकाल मंदिर में प्रवेश का नया मार्ग है। यह वर्तमान मार्ग से छोटा रास्ता है, भीड़ नियंत्रण के लिए रूट डायर्वट में इसका उपयोग होगा। श्रावण के दर्शन प्लान में इस पर विचार चल रहा है। – एसएन सोनी, उप प्रशासक महाकाल मंदिर   recent visitors 62

जीएसटी ट्रिब्यूनल में राजभाषा हिंदी को अमान्य कर दिया, व्यापारी को न्यायिक प्रक्रिया से दूर करने की साजिश

 इंदौर  जीएसटी ट्रिब्यूनल में राजभाषा हिंदी को अमान्य कर दिया गया है। आदेश जारी किया गया है कि ट्रिब्यूनल में आने वाले प्रकरणों में दस्तावेज सिर्फ अंग्रेजी में ही स्वीकार होंगे। और तो और किसी प्रकरण को दाखिल करने और पैरवी करने के मामलों में संबंधित दस्तावेजों को भी अंग्रेजी में अनुवाद कर लगाना होगा। जीएसटी ट्रिब्यूनल के इस आदेश से असंतोष फूट पड़ा है। टैक्स पेशेवर साफ कह रहे हैं कि टैक्स विवादों में हिंदी और क्षेत्रीय भाषा को बाहर कर न्याय महंगा करने और आम व्यापारी को न्यायिक प्रक्रिया से दूर करने की साजिश हो रही है। दस्तावेज सिर्फ अंग्रेजी में पेश किए जा सकेंगे आयकर की तरह जीएसटी के कर विवादों के निराकरण के लिए जीएसटी ट्रिब्यूनल की व्यवस्था की गई है। 2017 में जीएसटी लागू हुआ लेकिन अब तक ट्रिब्यूनल नहीं बने, सिर्फ नोटिफिकेशन जारी हुआ। स्थापना के नोटिफिकेशन के बाद अब सरकार ने नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया कि ट्रिब्यूनल में जाने वाले मामलों में दस्तावेज सिर्फ अंग्रेजी में ही पेश किए जा सकेंगे। यदि कोई दस्तावेज अन्य भाषा में हुआ तो उसका अंग्रेजी अनुवाद कर लगाना होगा। अहिल्या चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल के अनुसार 20 मई को दिल्ली में होने वाली नेशनल ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे को लाकर विरोध जताया जाएगा। तीन भाषाओं को हो मान्यता 2017 में जब जीएसटी प्रणाली लागू हुई थी तो उस समय सरकार ने इस प्रणाली को सुलभ बनाने के लिए तमाम घोषणाएं की थीं। कर सलाहकार आरएस गोयल के अनुसार ऐलान हुआ था कि जीएसटी पोर्टल 18 भाषाओं में काम करेगा। वो तो हुआ नहीं, अब ट्रिब्यूनल में तो हिंदी को भी बिसरा दिया गया है। चार्टर्ड अकाउंटेंट एसएन गोयल कहते हैं हिंदी के दस्तावेजों को तो आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल में भी मान्य किया जाता है। जीएसटी में भी कम से कम तीन भाषाओं को तो मान्यता होना चाहिए। recent visitors 51

हर मोहल्ले में विकास समिति बनाई जाएगी, जो स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की जरूरतों को चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करेगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार अब शहरी विकास को जनभागीदारी के माध्यम से गति देने की तैयारी कर रही है। 'जलगंगा अभियान' की तर्ज पर नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय संस्थाओं को एकजुट कर स्वच्छता, पर्यावरण, पौधरोपण और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का विस्तार नहीं, बल्कि लोगों में विकास कार्यों के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी का भाव जागृत करना है। जनशक्ति से जीवित हुए जलस्रोत भिंड जिले के लहरौली गांव में काली पोखर का पुनर्जीवन एक मिसाल बन चुका है, जिसे ग्रामीणों और पोरवाल परिवार के सहयोग से जलगंगा अभियान के अंतर्गत फिर से पीने योग्य बनाया गया। इसी तरह इंदौर नगर निगम ने नागरिक सहभागिता से 411 कुओं, बावड़ियों और 15 तालाबों का पुनरुद्धार किया है। अब सरकार इसी मॉडल को शहरी क्षेत्रों में लागू करने की योजना बना रही है। विकास कार्यों में साझा निवेश सरकार की योजना के अनुसार, विकास कार्यों में न सिर्फ स्थानीय लोग श्रमदान करेंगे, बल्कि आर्थिक सहयोग भी करेंगे। यह त्रिस्तरीय सहभागिता सांसद, विधायक और पार्षद निधि से भी समर्थित होगी। साथ ही स्थानीय कारोबारी और औद्योगिक इकाइयों को भी इस मुहिम में जोड़ा जाएगा। मोहल्ला समितियों को मिलेगा अधिकार हर मोहल्ले में विकास समिति बनाई जाएगी, जो स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की जरूरतों को चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करेगी। यह प्रस्ताव इंजीनियरों और पार्षदों की मदद से निगम अथवा जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया से विकास की योजना अधिक लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनेगी।   विकास निधियों की राशि सांसद निधि: 5 करोड़ रुपये विधायक निधि: 3.25 करोड़ रुपये महापौर निधि: 5 करोड़ रुपये नगर निगम अध्यक्ष निधि: 2 करोड़ रुपये पार्षद निधि: 25 लाख रुपये   recent visitors 38

जल गंगा संवर्धन अभियान में मनरेगा से किये जा रहे हैं जल संरक्षण के कार्य

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्ञान अभियान को मजबूती देने एवं प्रकृति, पर्यावरण व जल संरक्षण की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार मिशन के रूप में कार्य कर रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान जारी है। अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा योजना के तहत प्रदेश के 1 लाख कुओं को बारिश के पानी से रिचार्ज करने का लक्ष्य तय किया है। कुओं के पास कूप रिचार्ज पिट (डगवेल रिचार्ज विधि) बनाये जा रहे हैं। कूप रिचार्ज पिट को बनवाने में प्रदेश के कृषकों ने भी जागरूकता दिखाई है। कुओं के रिचार्ज होने से भू-जलस्तर बढ़ेगा, साथ ही कृषकों को सिंचाई व पीने के लिए पर्याप्त पानी भी उपलब्ध होगा। 1 लाख 3 हजार कुओं को रिजार्च करने का रखा गया है लक्ष्य, 75 हजार से अधिक में काम शुरू जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश में 1 लाख 3 हजार कुओं को रिचार्ज करने का लक्ष्य तय किया है। इसमें से 75 हजार से अधिक कुओं के पास कूप रिचार्ज पिट बनाने का कार्य शुरू हो गया है। खंडवा जिले में कूप रिचार्ज पिट बनाने को लेकर दिए गए लक्ष्य से अधिक का निर्माण कर दिया गया है। कूप रिचार्ज पिट बन जाने से भू-जल स्तर में वृद्धि होगी। साथ ही गर्मियों में कुओं के सूखने की संभावना भी कम हो जाएगी। कूप रिचार्ज पिट बनाने की विधि कूप रिचार्ज पिट बनाने के लिए एक खास संरचना तैयार की गई है। जिसमें पत्थर और मोटी रेत की परतें होंगी। पिट का निर्माण कुएं से 3 से 6 मीटर की दूरी पर किया जाएगा। इसके लिए 3 मीटर लंबा, 3 मीटर चौड़ा और 8 मीटर गहर गड्‌ढ़ा खोदा जा रहा है। गड्‌ढ़े में 8 इंच का पाइप डालकर इसे कुएं के अंदर डाला जाएगा। फिर कुएं में पाइप के छोर पर एल्बो लगाकर 1 फिट का पाइप नीचे की तरफ लगाया जाएगा। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए कुएं तक पहुंचाया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक जारी रहेगा। अभियान में बारिश के पानी को सहेजने व पुराने जल स्त्रोतों का जीर्णोद्धार करने का कार्य किया जा रहा है। तीन माह तक चलने वाले इस अभियान के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बारिश के पानी का संयचन करने व पुराने जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में खेत-तालाब, कूप रिचार्ज पिट, चैक, डैम, अमृत सरोवर सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं।   recent visitors 51

मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल सेक्टर को मिल रहा बढ़ावा, भोपाल में रेडीमेड गारमेंट पार्क तो इंदौर में बनेगा प्लग एन प्ले गारमेंट कॉम्पलेक्स

भोपाल मध्य प्रदेश जल्द ही टेक्सटाइल सेक्टर का हब बनने की दौड़ में अग्रसर आने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कई ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। अब सरकार टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश बढ़ाने की कोशिशे कर रही है। सरकार के प्लान के अनुसार, राजधानी भोपाल में रेडीमेड गारमेंट पार्क बनाया जाएगा, जबकि आर्थिक राजधानी इंदौर में प्लग एन प्ले गारमेंट कॉम्पलेक्स तैयार होगा। इसी को लेकर आगामी 27 मई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लुधियाना में टेक्सटाइल कंपनियों से निवेश पर चर्चा करेंगे।  मध्य प्रदेश रेडीमेड गारमेंट सेक्टर में भी आगे बढ़ रहा है। राजधानी भोपाल में रेडीमेड गारमेंट पार्क तैयार किया जा रहा है। ये पार्क कोलार रोड के सतगढ़ी में 61 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाया जा रहा है। भोपाल के प्रोजेक्ट में कोलकाता और दक्षिण भारत के मैन्युफैक्चरर्स निवेश के लिए तैयार है। वहीं इंदौर के परदेशीपुरा में प्लग-एन-प्ले गारमेंट कॉम्पलेक्स तैयार किए जा रहे हैं। इस कॉम्पलेक्स में चार ब्लॉक में कुल 184 यूनिट संचालित हो सकेगी। MPIDC ने बनाया कॉम्पलेक्स का प्रस्ताव भोपाल के कोलार रोड के सतगढ़ी में 61 हेक्टेयर में एमपीआईडीसी (MPIDC) ने कॉम्पलेक्स का प्रस्ताव बनाया है। पार्क से मेन रोड तक किलोमीटर की 4 लेन एप्रोच रोड 20 करोड़ की लागत से बनेगी। नेशनल हाईवे 46 और एयरपोर्ट की नजदीकी के चलते निवेशकों की रुचि बढ़ी है। 27 मई को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पंजाब के लुधियाना में टेक्सटाइल कंपनियों से निवेश पर चर्चा करेंगे। मध्यप्रदेश बनेगा टेक्सटाइल का नया हब इस टेक्सटाइल पार्क को राज्य में 2100 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा, जो अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इसमें शामिल होंगी – • 20 MLD क्षमता वाला Zero Liquid Discharge (ZLD) जल संयंत्र • सौर ऊर्जा आधारित पॉवर प्लांट • “प्लग एंड प्ले” फैक्ट्री यूनिट्स • श्रमिकों के लिए आवासीय परिसर सभी निर्माण कार्य 14 माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे यह देश का सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला टेक्सटाइल इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा। रोज़गार और निवेश का नया द्वार सरकार ने जानकारी दी है कि इस प्रोजेक्ट में अब तक 10,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो उद्योग जगत के भरोसे को दर्शाता है। इससे न केवल लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त बल भी मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ नीति को मिलेगा बल पीएम मित्रा पार्क योजना, प्रधानमंत्री मोदी की ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’, और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने वाली योजना है। इसके ज़रिए भारत वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में उभरेगा। शीघ्र शुरू होगी भूमि आवंटन प्रक्रिया सरकार ने बताया है कि परियोजना से संबंधित भूमि आवंटन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और इसके लिए औद्योगिक इकाइयों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। recent visitors 42