मुंबई एयरपोर्ट से NIA ने आईएसआईएस स्लीपर सेल के मॉड्यूल के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया

मुंबई  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मुंबई एयरपोर्ट पर ISIS के दो भगोड़े स्लीपर सेल सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों पुणे, महाराष्ट्र में 2023 में IED बनाने और परीक्षण करने के एक मामले में वॉन्टेड थे। अब्दुल्ला फैयाज शेख को डायपरवाला के नाम से भी जाना जाता है। वहीं तालहा खान को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल 2 पर आव्रजन अधिकारियों ने तब पकड़ा, जब वह इंडोनेशिया के जकार्ता में अपने ठिकाने से वापस आ रहे थे। इसके बाद NIA ने उन्हें हिरासत में ले लिया। ये दोनों आरोपी दो साल से ज़्यादा समय से फरार थे। NIA की स्पेशल कोर्ट, मुंबई ने इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। एजेंसी ने प्रत्येक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 3 लाख रुपये का इनाम भी रखा था। तीन-तीन लाख का था इनाम जांच में पता चला है कि इन दोनों और ISIS के पुणे स्लीपर सेल के आठ अन्य सदस्यों ने मिलकर साजिश रची थी। ये सभी आठ सदस्य अभी न्यायिक हिरासत में हैं। NIA के बयान में कहा गया है कि इन लोगों ने भारत में हिंसा फैलाकर शांति भंग करने और इस्लामिक शासन स्थापित करने की साजिश रची थी। दोनों पर तीन-तीन लाख रुपये का इनाम था। बम बनाने की वर्कशॉप की दोनों गिरफ्तार आरोपियों पर पहले भी आरोप लग चुके हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर पुणे के कोंढवा इलाके में अब्दुल्ला फैयाज शेख ने किराए पर लिए गए एक घर में IED बनाए थे। 2022-2023 के दौरान, उन्होंने बम बनाने की वर्कशॉप भी की और उस घर में एक नियंत्रित विस्फोट में IED का परीक्षण भी किया। एक्शन में एनआईए NIA भारत में ISIS की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। एजेंसी ने पहले ही सभी 10 आरोपियों के खिलाफ UAPA, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद यूनुस साकी, अब्दुल कादिर पठान, सिमाब नसीरुद्दीन काजी, जुल्फिकार अली बरोड़वाला, शामिल नाचन, आकिफ नाचन और शाहनवाज आलम शामिल हैं। NIA के अनुसार, ये सभी मिलकर भारत में अशांति फैलाने की योजना बना रहे थे। उनका मकसद था कि देश में डर का माहौल पैदा किया जाए। NIA अब इन सभी से पूछताछ कर रही है ताकि इस साजिश के बारे में और जानकारी मिल सके। NIA का कहना है कि वह देश में आतंकवाद को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं देगी। शशि मिश्रा recent visitors 59

देर रात युवतियों ने चिलम से उड़ाया धुआँ, गंजेड़ियों के साथ नशा करने सुपर कॉरिडोर पहुंची युवतियां

 इंदौर इंदौर में युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसमें लड़कियां भी पीछे नहीं है, शहर से एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें कुछ युवतियां गांजा पीते नजर आ रही हैं। वीडियो सुपर कॉरिडोर ओवरब्रिज का बताया जा रहा है। जहां देर रात युवतियां चिलम से गांजा पीते नजर आ रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि वीडियो में एक युवक चिलम जलाते हुए दिखाई दे रहा है, जबकि युवतियां धुएं के छल्ले बना रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये युवतियां घर के लोगों के सोते ही देर रात गंजेडियों के साथ यहां पहुंचती हैं और खुलेआम नशा करती हैं। सुपर कॉरिडोर जैसी जगह पर इस तरह नशे का सेवन सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन इन युवतियों और इनके साथियों पर कोई कार्रवाई करेगा? इंदौर में युवाओं में बढ़ते नशे की लत पर लगाम लगाने के दावों के बावजूद ये घटनाएं उजागर हो रही हैं।  कल देर रात 2:30 बजे एरोड्रम सुपर कॉरिडोर निकली तो देखा कि ब्रिज पर कुछ खास हलचल तो नहीं थी लेकिन ब्रिज के डिवाइडर पर युवाओं का ग्रुप बैठा था। टीम ने उनपर ध्यान दिया तो पता चला कि युवकों के साथ युवतियां बंसी में गांजा भरकर दम मार रही है। मुंह से ऐसे खींच रही है जैसे नशे की आदि हो। युवतियों के साथ चार अन्य युवक भी खड़े थे जो युवती के मुंह में रखी बंसी को सुलगाने के लिए माचिस जलाकर आग दे रहे थे। यह घटना उस समय हुई जब इलाके में सन्नाटा रहता है, लेकिन रात का समय है। शहर में क्राइम रेट फ्लकचुएट होने के चलते कमिश्नर संतोष सिंह ने अधिकारियों को रात में टाइट पुलिसिंग के निर्देश दे रखे है। उसके बाद भी ऐसे इलाकों में पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी गश्त करती नहीं दिखी और न ही बीट के पुलिसकर्मी दिखाई दिए। घरवालों के सोने के बाद दरवाजा खोलकर निकली  गांजा पी रही एक युवती और युवक को बहाने से बुलाकर बात की और खुद को कॉलेज का छात्र होना बताकर घर से निकालने का बहाना बनाना पूछता तो युवती बोली कि मम्मी-पापा के सो जाने के बाद में घर का दरवाजा खोलकर निकल जाती हूं। युवती फिलहाल सुखलिया इलाके के मार्थोमा स्कूल में 11वीं की पढ़ाई कर रही है। युवक भी 11वीं कक्षा में है। वहीं, अन्य युवती और युवक भी 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे है। recent visitors 48

शशि थरूर पाक के आतंकी चेहरे को बेनकाब करेंगे, भारतीय डेलिगेशन को लीड कर सकते हैं, कांग्रेस का आया रिएक्शन

नई दिल्ली सरकार पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आक्रामक राजनयिक अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत वैश्विक मंच पर भारत के पक्ष को मजबूती से रखने और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब किया जाएगा। खास बात है कि इस काम के लिए मोदी सरकार ने नरसिम्हा राव की कूटनीति के रास्ते पर चलने का फैसला लिया है। अगले सप्ताह से विभिन्न देशों में कई बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। यह ठीक उसी तर्ज पर जब नरसिम्हा राव ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर भारत का पक्ष रखने के लिए विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजयपेयी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा था। तब यूएन में गिर गया था पाकिस्तान का प्रस्ताव 1994 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार से जुड़े सत्र में एक प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य कश्मीर समस्या पर भारत का पक्ष रखना और पाकिस्तान द्वारा समर्थित एक प्रस्ताव को विफल करना था, जिसमें नई दिल्ली की निंदा की जाती। उस समय यह प्रयास बहुत सफल रहा था। वाजपेयी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के हस्तक्षेप के कारण पाकिस्तान का प्रस्ताव गिर गया था। वाजपेयी की टीम में कौन-कौन थे शामिल पीवी नरसिम्हाराव ने विदेश नीति के धुरंधर माने जाने वाले विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को प्रतिनिधि मंडल का प्रमुख नियुक्त किया था। उनके साथ कश्मीर के फारूक अब्दुल्ला और राव सरकार के विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद भी थे। संयुक्त राष्ट्र के बारे में गहन जानकारी के साथ प्रतिनिधिमंडल को मजबूत करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन राजदूत हामिद अंसारी को भी शामिल किया गया था। राव के कदम से परेशान थे खुर्शीद? अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने छह दशक से अधिक के राजनीतिक करियर में हमेशा व्यक्तिगत समीकरणों पर भरोसा किया। उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के साथ उनकी नजदीकी हमेशा उनके संबंधित राजनीतिक दलों में उत्सुकता भरी चर्चा का विषय रही। राव की तरफ से वाजपेयी को यूएन में भेजने के कदम को उनकी पार्टी के भीतर अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली। तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद जिनेवा में वाजपेयी के अधीन काम करने से विशेष रूप से परेशान थे। वापस लौटने पर हुआ था शानदार स्वागत जब जेनेवा से जीत हासिल कर भारतीय प्रतिनिधिमंडल राजधानी लौटा तो उसका वैसे ही शानदार स्वागत हुआ जैसा कि आमतौर पर विजयी क्रिकेट टीमों का होता है। राव की इस कूटनीति के तह भारत ने आखिरकार दुनिया को दिखा दिया कि कश्मीर मुद्दे पर उसका इरादा गंभीर है। इस सफलता के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख जावेद मीर को पकड़ लिया गया, जिससे आतंकवादियों के मनोबल को भी गहरा धक्का लगा था। शशि थरूर पाक के आतंकी चेहरे को बेनकाब करेंगे भारत सरकार ने एक सात सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, जो प्रमुख विदेशी सरकारों को हालिया भारत-पाकिस्तान संघर्ष और इस मुद्दे पर भारत के रुख से अवगत कराने के लिए उन देशों का दौरा करेगा. इस प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर को भी शामिल किया गया है. संसदीय कार्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. नामित अन्य सदस्यों में भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा, जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय कुमार झा, डीएमके की कनिमोझी करुणानिधि, राकांपा (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे शामिल हैं. मजे की बात ये है कि इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने के लिए कांग्रेस ने अपने जिन 4 सांसदों के नाम सरकार को सुझाए थे, उनमें से किसी को नहीं चुना गया. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 16 मई की सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से फोन पर बात की थी और उनसे अनुरोध किया था कि वे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जा रहे प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने के लिए चार नाम सुझाएं. कल 16 मई को दोपहर तक, लोक सभा में विपक्ष के नेता ने संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, डॉ. सैयद नसीर हुसैन और राजा बरार के नाम दिए. लेकिन केंद्र ने इन चारों को छोड़कर शशि थरूर पर विश्वास जताया. भारत सरकार का यह सात सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 23 मई से 10 दिवसीय राजनयिक मिशन पर रवाना होगा. वाशिंगटन, लंदन, अबू धाबी, प्रिटोरिया और टोक्यो जैसी प्रमुख राजधानियों का दौरा करके यह सर्वदलीय टीम आतंकवाद पर भारत की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी और ऑपरेशन सिंदूर के तहत हाल के घटनाक्रमों के बारे में विदेशी सरकारों को जानकारी देगी. बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में जैश, लश्कर और हिजबुल के 9 आतंकी​ ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे. recent visitors 62

मिस एशिया यूनिवर्स प्रतियोगिता में सतना की बेटी मीनाक्षी सिंह ने लहराया परचम, अब करेंगी एशिया में भारत का प्रतिनिधित्व

सतना  जिले के लिए गर्व का क्षण तब आया जब सतना की बेटी मीनाक्षी सिंह ने "मिस एशिया यूनिवर्स" प्रतियोगिता में शानदार जीत हासिल कर खिताब अपने नाम किया। अब मीनाक्षी पूरे एशिया में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह ऐतिहासिक उपलब्धि शुक्रवार को, दिल्ली के एक प्रतिष्ठित होटल में आयोजित फाइनल इवेंटके दौरान दर्ज हुई। प्रतियोगिता में देशभर से आई सुंदरियों ने भाग लिया था, लेकिन अपनी आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और प्रस्तुति से मीनाक्षी ने निर्णायकों का दिल जीत लिया। स्टेज पर उनके आत्मविश्वास और भारतीयता से भरे उत्तरों ने उन्हें सब पर भारी कर दिया। मीनाक्षी सिंह जो कि मूलतः सतना जिले की निवासी हैं, ने मॉडलिंग और फैशन के क्षेत्र में कड़ा संघर्ष करते हुए यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने अपने जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। प्रतियोगिता में मीनाक्षी को "बेस्ट कैटवॉक" और "ब्यूटी विद ब्रेन" टाइटल भी मिले, जिससे उनके समग्र प्रदर्शन को और भी मजबूती मिली। मीनाक्षी ने खिताब जीतने के बाद कहा,यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, सतना और पूरे देश की है। मैं अपने माता-पिता, गुरुजनों और उन सभी का आभार मानती हूं जिन्होंने इस सफर में मेरा साथ दिया। मेरा सपना है कि मैं भारत की सांस्कृतिक सुंदरता को एशिया के मंच पर गर्व से प्रस्तुत करूं।" इस उपलब्धि पर सतना में खुशी की लहर है। जिले के सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक वर्गों ने मीनाक्षी की उपलब्धि पर बधाई दी है। सोशल मीडिया पर भी मीनाक्षी सिंह ट्रेंड कर रही हैं। अब सबकी नजरें एशिया लेवल पर होने वाली मिस यूनिवर्स प्रतियोगितापर टिकी हैं, जहां मीनाक्षी सिंह भारत का तिरंगा थामे अपनी प्रतिभा और गरिमा से पूरी दुनिया को भारत की सुंदरता और शक्ति का अहसास कराएंगी। recent visitors 34

क्रिकेट बोर्ड ने टेस्ट मैचों के दौरान बच्चों की एंट्री को फ्री की, अब बच्चे स्टेडियम में बैठकर देख पाएंगे टेस्ट मैच

नई दिल्ली टेस्ट क्रिकेट का क्रेज इस समय कम हो रहा है। हर कोई इस फॉर्मेट को बढ़ावा देने के लिए नए-नए पैंतरे अपना रहा है। यही कारण है कि आईसीसी ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की प्राइज मनी को दोगुना से ज्यादा कर दिया है। इस बीच एक क्रिकेट बोर्ड ने टेस्ट मैचों के दौरान बच्चों की एंट्री को फ्री कर दिया है। ये कदम वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने उठाया है। सीडब्ल्यूआई ने कहा है कि वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली 3 मैचों की टेस्ट सीरीज के दौरान स्टेडियम में बच्चों की एंट्री फ्री रहेगी। अगले महीने से शुरू होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबला देखने के लिए कैरेबियाई देशों के बच्चों को एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा। क्रिकेट वेस्टइंडीज (सीडब्ल्यूआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) क्रिस डेह्रिंग ने इसको लेकर खुलासा किया। बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल, ग्रेनेडा के ग्रेनेडा नेशनल स्टेडियम और जमैका के सबीना पार्क में होने वाले आगामी टेस्ट मैचों के लिए सभी बच्चों को निशुल्क प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। केंसिंग्टन ओवल में ‘WI होम – फुल आह एनर्जी’ कैंपेन के आधिकारिक लॉन्च के दौरान बोलते हुए डेह्रिंग ने कहा कि यह पहल CWI की नई नीति के हिस्से के रूप में शुरू की गई है। उन्होंने कहा, “CWI में हम मानते हैं कि हर बच्चे के लिए टेस्ट क्रिकेट तक पहुंच पाना एक मानवाधिकार है। टेस्ट क्रिकेट में आने में सक्षम होना कैरेबियन में एक मानवाधिकार है और इसलिए, इस साल पहली बार हम एक नीति के रूप में सभी बच्चों को मुफ्त में टेस्ट मैच को देखने के लिए सक्षम कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, "आपको टिकट की जरूरत नहीं है, यह आपका अधिकार है। टिकट सिर्फ पैसे देकर खरीदने वालों के लिए है, आपका अधिकार नहीं है और अगर यह हमारे बच्चों का अधिकार है, तो यह हमारे माता-पिता और हमारे संगठनों और हमारी सरकारों और हर वयस्क का कर्तव्य है कि वे सुनिश्चित करें कि हमारे बच्चों को यह अधिकार मिले।" वहीं, सीडब्ल्यूआई के अध्यक्ष डॉ. शैलो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस कदम से टेस्ट सीरीज के दौरान स्टेडियम पूरी तरह भरे रहेंगे। हालांकि, अभी तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि कितनी उम्र तक के बच्चों को एंट्री फ्री मिलने वाली है। recent visitors 41

छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर अपना मिजाज बदला,5 दिन आंधी-बारिश…11 में यलो, 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

रायपुर  छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर अपना मिजाज बदला है। भीषण गर्मी झेल रहे प्रदेशवासियों को अब तेज अंधड़, गरज-चमक और बारिश का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने 17 से 21 मई तक के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। इसमें 7 जिलों को ऑरेंज अलर्ट, जबकि 11 जिलों को यलो अलर्ट में रखा है। इस दौरान तेज हवाएं चलने, बिजली गिरने और बौछारें पड़ने की संभावना है। खासकर मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ में इसका असर ज्यादा दिखेगा। वहीं तापमान की बात करें तो बिलासपुर 41.4 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जबकि जगदलपुर 23.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ सबसे ठंडा रहा। बीते 24 घंटे इन जगहों में हुई बारिश बीते 24 घंटे में बस्तर संभाग के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। सबसे ज्यादा बारिश भोपालपट्टनम में 5 सेमी दर्ज की गई। इसके बाद तोकापाल में 4 सेमी, बालोद और नगरी में 3-3 सेमी, छोटेडोंगर, नानगुर, दरभा में बारिश हुई। गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल रायपुर में दिन का तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 1.5 डिग्री कम रहा। सुबह और शाम को काफी नमी रही। सुबह 64% और शाम को 41% रही। राजधानी में 60% बादल छाए रहे और गर्मी से कुछ राहत मिली। देर शाम तक मौसम बदला और कई इलाकों में बारिश भी हुई। मौसम विभाग का कहना है कि 17 मई को रायपुर में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 41°C और न्यूनतम 28°C रहने का अनुमान है। अगले 48 घंटे तक होगी बारिश मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी कंटिभोटला ने बताया कि बस्तर संभाग में बिजली गिरने के साथ और गरज चमक की संभावना बढ़ने वाली है। ऐसी स्थिति अगले 4 से 5 दिनों तक दक्षिण छत्तीसगढ़ में देखने को मिलेगी। वहीं मध्य छत्तीसगढ़ में ऐसी स्थिति थोड़ी कम रहेगी, लेकिन प्रदेश में गरज चमक के साथ बिजली गिरने के गतिविधियां बढ़ेंगी। रायपुर में मौसम का हाल रायपुर में दिन का तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 1.5 डिग्री कम रहा। सुबह और शाम को काफी नमी रही। सुबह 64% और शाम को 41% रही। राजधानी में 60% बादल छाए रहे और गर्मी से कुछ राहत मिली। देर शाम तक मौसम बदला और कई इलाकों में बारिश भी हुई। मौसम विभाग का कहना है कि 17 मई को रायपुर में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 41°C और न्यूनतम 28°C रहने का अनुमान है। अगले 2 दिन गरज चमक की स्थिति ज्यादा मौसम विज्ञानी गायत्री वाणी कंटिभोटला ने बताया कि बस्तर संभाग में बिजली गिरने के साथ और गरज चमक की संभावना बढ़ने वाली है। ऐसी स्थिति अगले 4 से 5 दिनों तक दक्षिण छत्तीसगढ़ में देखने को मिलेगी। वहीं मध्य छत्तीसगढ़ में ऐसी स्थिति थोड़ी कम रहेगी, लेकिन प्रदेश में गरज चमक के साथ बिजली गिरने के गतिविधियां बढ़ेंगी। क्या अलर्ट है आने वाले दिनों के लिए? मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक,अगले 2 दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके बाद 3 दिन और ऐसा ही मिजाज रहने वाला है। बस हवाएं थोड़ी धीमी (40-50 किमी/घंटा) हो सकती हैं। recent visitors 55

10 लाख फिलिस्तीनियों को लीबिया Settle करने की तैयारी में हैं ट्रंप – रिपोर्ट , पढ़ें क्या है पूरा मामला

वाशिंगटन गाजा को लेकर अमेरिका का एक चौंकाने वाला प्लान सामने आया है। अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार युद्धग्रस्त गाजा पट्टी से करीब 10 लाख फिलिस्तीनियों को स्थायी रूप से लीबिया भेजने की योजना बना रही है। ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है और इस संबंध में लीबिया के नेतृत्व के साथ चर्चा भी कर चुका है। इस योजना के तहत, लीबिया को उन अरबों डॉलर की धनराशि को जारी करने का प्रस्ताव दिया गया है, जो अमेरिका ने एक दशक से अधिक समय पहले फ्रीज कर दी थी। एनबीसी न्यूज ने पांच सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इस योजना पर पिछले कुछ समय से अमेरिका तथा लीबिया की लीडरशिप के बीच बातचीत चल रही है। इन चर्चाओं की जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका लीबिया की अरबों डॉलर की संपत्ति को वापस देने पर विचार कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के एक प्रवक्ता ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा, “ये रिपोर्टें असत्य हैं। जमीन पर हालात ऐसे किसी प्लान के अनुकूल नहीं हैं। ऐसी कोई योजना चर्चा में नहीं रही और इसका कोई तर्क नहीं बनता।” लीबिया में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन नाटो समर्थित विद्रोह के बाद 2011 में लीबिया में अराजकता फैल गई थी, जिसमें लंबे समय से शासन कर रहे तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को सत्ता से हटा दिया गया और उनकी हत्या कर दी गई. देश विभाजित हो गया, और इसके पूर्वी और पश्चिमी हिस्से पर दो प्रतिद्वंद्वी मिलिशिया समूहों ने नियं​त्रण कर लिया. लीबिया में वर्तमान में दो प्रतिस्पर्धी प्रशासनों का शासन है: अब्दुल हामिद दबीबेह के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एकता सरकार (Government of National Unity), और प्रतिनिधि सभा समर्थित राष्ट्रीय स्थिरता सरकार (Government of National Stability), जिसका नेतृत्व लीबियाई नेशनल आर्मी और उसके कमांडर खलीफा हफ्तार के वास्तविक शासन के तहत ओसामा हम्माद द्वारा किया जाता है. जीएनयू त्रिपोली में स्थित है और देश के पश्चिमी हिस्से को नियंत्रित करता है, जबकि जीएनएस पूर्वी और मध्य क्षेत्र में काम करता है. इस विभाजन ने लीबिया में सत्ता के दो केंद्र स्थापित कर दिए हैं, जिसमें दोनों सरकारें वैधता और देश पर नियंत्रण के लिए होड़ कर रही हैं. कई सालों से अस्थिरता से जूझ रहा लीबिया 2011 में मुअम्मर गद्दाफी की हत्या और शासन के पतन के बाद से लीबिया लगातार अस्थिरता का सामना कर रहा है। देश पूर्व और पश्चिम में दो भागों में विभाजित हो गया है, जहां विभिन्न सशस्त्र गुट सत्ता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में फिलिस्तीनी नागरिकों को वहां पुनर्वासित करना एक व्यवहारिक और मानवीय चुनौती बन सकती है। गाजा में भीषण हमले, 100 से अधिक की मौत इधर, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिनमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार 108 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल थे। इजरायल का कहना है कि ये हमले हमास पर दबाव बनाने और बंधकों की रिहाई के लिए युद्ध को अगले चरण में ले जाने की तैयारी का हिस्सा हैं। इजरायल ने यमन के दो बंदरगाहों पर भी हमले किए, जिनके बारे में उसका दावा है कि वहां से हूती विद्रोही हथियारों को ट्रांसफर कर रहे थे। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए। ट्रंप की फिलिस्तीनियों को अन्य अरब देशों में बसाने की इच्छा जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे चाहते हैं कि जॉर्डन, मिस्र और अन्य अरब देश गाजा से फिलिस्तीनी शरणार्थियों को अधिक संख्या में स्वीकार करें, ताकि "इस तबाह हो चुके इलाके को साफ किया जा सके और एक नया शुरुआत दी जा सके।" उन्होंने कहा था, “यह लगभग एक ध्वस्त इलाका है। लगभग सब कुछ नष्ट हो गया है, लोग मर रहे हैं। मैं चाहूंगा कि कुछ अरब देशों के साथ मिलकर कहीं और मकान बनाएं, जहां ये लोग शायद शांति से रह सकें।” हमास ने बंधक सौदे के बदले युद्ध रोकने का प्रस्ताव दिया हमास के गाजा प्रमुख और इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ताओं में शामिल खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए एक भाषण में कहा कि उनका संगठन सभी बंधकों के बदले इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के लिए तत्पर है- बशर्ते युद्ध को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने अंतरिम संघर्षविराम के किसी भी प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इजराइल ने गाजा और यमन में हमले बढ़ाए इस बीच, इजरायल ने शुक्रवार को गाजा में दर्जनों हवाई हमले किए, जिसमें स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि 108 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे. इजरायली अधिकारियों ने इसे हमास पर बंधकों को रिहा करने के लिए दबाव बनाने के अभियान की शुरुआत बताया. इजराइल ने यमन में दो बंदरगाहों पर भी हमला किया, जिसके बारे में उसने कहा कि हूती उग्रवादी समूह द्वारा हथियारों को स्थानांतरित करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था. स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ घायल हो गए. इस बीच हमास के गाजा प्रमुख ने कहा कि समूह सभी बंधकों को इजरायल द्वारा जेल में बंद फिलिस्तीनियों की एक निश्चित संख्या के साथ बदलने के लिए तत्काल बातचीत करने के लिए तैयार है, जिससे इस क्षेत्र में युद्ध समाप्त हो जाएगा. इजरायल के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए हमास वार्ता दल का नेतृत्व करने वाले खलील अल-हय्या ने टेलीविजन पर दिए भाषण में कहा कि समूह अंतरिम युद्धविराम समझौते से इनकार करता है.   recent visitors 63