जैसीनगर में 600 से अधिक नव दंपति जोड़े बंधे मंगल परिणय सूत्र में

जैसीनगर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द्र सिंह राजपूत ने कहा जाता है कि एक बेटी का कन्यादान अगर कोई कर दे तो उसे यज्ञ का पुण्य मिलता है। जैसीनगर में बुधवार को आयोजित कन्यादान योजना में 600 से अधिक बेटियां हैं, जिनका कन्यादान हम ले रहे हैं, जो कि महायज्ञ के समान है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से बेटियों के पिता की चिंताएं दूर हुई हैं, इस योजना ने बेटियों के पिता के माथे का पसीना पोंछने का काम किया है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना एवं शादी समारोह एक महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री राजपूत ने यह बात सुरखी विधानसभा क्षेत्र के जैसीनगर में आयोजित मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह समारोह में व्यक्त किये।  मंत्री राजपूत ने कहा कि जैसीनगर में यह शादी समारोह एक महापर्व की तरह मनाया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि पहले बेटियां बोझ समझी जाती थीं, लेकिन राज्य सरकार अब बेटियों के जन्म से लेकर शादी तक पूरा खर्च वहन करती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के महिला सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे लगातार प्रयासों से हमारी बेटियां वरदान बन गई हैं। मंत्री ने विवाह समारोह में सपत्नीक किया नृत्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत तथा मंच पर सभी अतिथियों ने वैवाहिक जोड़ों पर पुष्प वर्षा कर मंगलकामनाओं के साथ उन्हें विवाह की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और उनकी पत्नी श्रीमती सविता सिंह राजपूत ने नृत्य किया एवं वर-वधू को आशीर्वाद दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत एवं आकाश सिंह राजपूत ने भी बुंदेली गीतों पर जमकर नृत्य किया।      सांसद श्रीमती लता वानखेड़े ने कहा कि मध्यप्रदेश में बेटियों बहनों  को अनेक योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि पहले जहां एक बेटी का कन्यादान करने में परिवार कई परेशानियों से गुजरता था।  आज सरकार के माध्यम से एक साथ  इतनी बेटियों का कन्यादान करने का हम सब को सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। मंत्री राजपूत द्वारा अपने क्षेत्र के लिए किये जाने वाले कार्य हमेशा से ही सुर्खियों में रहे हैं। इस कन्यादान में उनके द्वारा की गई व्यवस्थाएं प्रशंसनीय हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के द्वारा मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना के माध्यम से जहां सभी वर्गों का कन्यादान किया जाकर परिजनों की चिंताएं भी दूर की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के द्वारा बेटियों की शादी में 49000 की राशि उनके खाते में हस्तांतरित कर रही है। इससे वह अपना जीवन सुख में व्यतीत कर सकेंगी। उन्होंने सभी नव दंपतियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  श्रीमती सविता सिंह राजपूत ने कहा कि आज मेरा सौभाग्य है कि मुझे सुरखी विधानसभा क्षेत्र में दो दिन में एक हजार से अधिक बेटियों का कन्यादान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। श्रीमती सविता सिंह राजपूत ने बुंदेली बन्ना मांगलिक गीत की प्रस्तुत दी। इस अवसर पर मंत्री राजपूत के आमंत्रण पर बुंदेलखंड की गायिका सुकविता शर्मा ने बुंदेली मांगलिक गीतों की प्रस्तुत दी।  इस अवसर पर अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में वर वधू के परिजन मौजूद थे।   recent visitors 50

मैहर जिले में टेक्निकल एरर के कारण किसानों का 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान अटका

सतना कुछ समय पूर्व ही अस्तित्व में आए मैहर जिले में टेक्निकल एरर के कारण किसानों का 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान अटक गया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के एवज में मिलने वाली इस रकम का कुछ हिस्सा जारी हो चुका है, लेकिन तकनीकी खामी के कारण वह पैसा किसानों के खाते में नहीं जा पा रहा है। मैहर में इस सत्र में 8600 किसानों ने 150.12 करोड़ रुपए से अधिक कीमत का 5.77 लाख ङ्क्षक्वटल गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचा था। डिजिटल हस्ताक्षर करते ही भुगतान फेल हो गया किसानों को देने के लिए राज्य शासन से 5 से 12 मई के बीच 3.73 करोड़, 99 लाख और 55.22 करोड़ रुपए के ईपीओ नागरिक आपूर्ति निगम कार्यालय मैहर को प्राप्त भी हुए। लेकिन जेआईटी पोर्टल में तकनीकी खामियों के कारण डिजिटल हस्ताक्षर करते ही भुगतान फेल हो गया। मैहर के उलट सतना में 184 करोड़ का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। यहां 25667 किसानों से 523.33 करोड़ रुपए मूल्य के 20.12 लाख ङ्क्षक्वटल गेहूं की खरीदी की गई थी। शेष भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। इन्हें भुगतान का इंतजार अमरपाटन ब्लॉक के ग्राम लालपुर निवासी किसान नारायण प्रसाद चौरसिया को 189 ङ्क्षक्वटल गेहूं के भुगतान का इंतजार है। किसान ने 11 अप्रेल को यह गेहूं बेचा था। इसी तरह 13 अप्रेल को 75 ङ्क्षक्वटल गेहूं का विक्रय करने वाले जरियरी गांव निवासी भगवती पाण्डेय को भी भुगतान की प्रतीक्षा है। 15 अप्रेल को 240 ङ्क्षक्वटल गेहूं देने वाले मैहर के घनश्याम प्रसाद त्रिपाठी भी 6 लाख 24 हजार रुपए की अपनी राशि मिलने की बाट जोह रहे हैं। 24 अप्रेल को 19 ङ्क्षक्वटल गेहूं का विक्रय करने वाले मैहर के ग्राम देवरा निवासी रामदयाल कुशवाहा को भी 49 हजार 400 रुपए के बकाया में से एक पाई का भुगतान भी नहीं हुआ है। जेआईटी पोर्टल में तकनीकी समस्या आने से नहीं हो रहा भुगतान जेआईटी पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण अभी किसानों को भुगतान नही हो रहा। लगभग डेढ़ सौ करोड़ का भुगतान लंबित है। प्रबंधक संचालक को चिठ्ठी भेजकर अवगत कराया गया है। इसके साथ ही 12 मई को एनआईसी भोपाल को भी पत्र से जानकारी भेज दी गई है। राजीव पाण्डेय, प्रभारी डीएसओ, मैहर recent visitors 30

मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में SC ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें फटकार लगाई

 मंत्री विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट ने भी लगाई फटकार, MP High Court के एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने से इनकार विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, पूछा- संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसा बयान कैसे दे सकता मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में SC ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें फटकार लगाई भोपाल / जबलपुर मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर उनके खिलाफ महू के मानपुर थाने में बुधवार देर रात एफआईआर दर्ज की गई थी। मंत्री द्वारा एफआईआर रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई गई थी, जिस पर उन्हें वहां से भी फटकार मिली। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि स्वत: संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इस मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। आज हाईकोर्ट के पटल पर उस वीडियो का लिंक भी रखे जाएंगे, जिसमें मंत्री ने कर्नल सोफिया को लेकर टिप्पणी की थी। कांग्रेस कर रही मंत्री को पद से हटाने की मांग इधर कांग्रेस मंत्री विजय शाह को पद से हटाने की मांग कर रही है। प्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर सहित कई शहरों में मंत्री शाह के खिलाफ प्रदर्शन भी किया गया था। इन धाराओं में दर्ज हुआ केस, उम्र कैद या 7 साल तक की सजा का प्रविधान बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 152 : अलगाव, सशस्त्र विद्रोह और विध्वंसक गतिविधियों को भड़काने वाले कृत्यों को अपराध मानती है। यह देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्यों को भी अपराध मानती है। इसमें उम्रकैद या सात साल तक के कारावास के दंड का प्रविधान है। बीएनएस 196(1)(ख) : धर्म, जाति, जन्मस्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के लिए हानिकारक कार्य करने से संबंधित है। इसमें पांच वर्ष के कारावास का प्रविधान है। बीएनएस 197(1)(ग) : राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों से संबंधित है। इसमें किसी भी समूह की भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा को संदेह में लाने वाले आरोप, दावे या कथन शामिल हैं। इसमें तीन वर्ष के कारावास का प्रविधान है। हाईकोर्ट ने कहा- “गटर जैसी भाषा”, दर्ज हुआ मामला 14 मई 2025 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत ने उनकी टिप्पणी को “गटर की भाषा” कहा और इसे महिलाओं के सम्मान और सेना की गरिमा के विरुद्ध करार दिया। कोर्ट के मुताबिक, एक कैबिनेट मंत्री की ओर से इस तरह की टिप्पणी न केवल कर्नल सोफिया के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती है, बल्कि इससे भारतीय सेना की प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़े होते हैं। आदेश के तहत आईपीसी की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है। Supreme Court की फटकार, 16 मई को अगली सुनवाई विजय शाह ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए Supreme Court का रुख किया, लेकिन यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। 15 मई को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंत्री की भाषा अस्वीकार्य है और उन्होंने अपने पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख तय की है और कहा है कि मामले में कानून के तहत उचित निर्णय लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर समर्थन, विपक्ष का हमला यह मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। हजारों लोग कर्नल सोफिया के समर्थन में सामने आए हैं और विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं और सेना के प्रति भाजपा सरकार के “दृष्टिकोण” का प्रतिबिंब बताया है। यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में इसका असर मध्य प्रदेश की राजनीति पर भी दिख सकता है। recent visitors 48

राज्य मंत्री पटेल ने प्रशासन को फर्जी सूचनाओं से सतर्क रहने के दिए निर्देश

भोपाल लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री  नरेंद्र शिवाजी पटेल ने देवास में उनके नाम का दुरुपयोग कर शासकीय सर्किट हाउस में रुकने के प्रयास तथा हंगामा करने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा जनप्रतिनिधियों के नाम का उपयोग कर शासकीय प्रतिष्ठानों का अनुचित लाभ लेना, समाज में भ्रम फैलाना और शांति भंग करना निंदनीय और दंडनीय अपराध है। राज्यमंत्री श्री पटेल ने प्रशासन को यह भी निर्देशित किया है कि किसी भी जनप्रतिनिधि से जुड़ी सूचना प्राप्त होने पर उसकी पुष्टि केवल अधिकृत एवं आधिकारिक माध्यम से ही की जाए। इससे न केवल भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा, बल्कि ऐसे असामाजिक तत्व प्रशासन को गुमराह कर शासकीय संसाधनों का दुरुपयोग भी नहीं कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि दिनांक 13 मई 2025 की रात्रि को तीन युवक—देवेन्द्र पटेल, मनोज कुमार पटेल एवं हरी मोहन पटेल ने मंत्री के नाम की धौंस देकर सर्किट हाउस, देवास में रुकने की जबरन कोशिश की। युवकों ने शराब के नशे में अभद्र भाषा का उपयोग कर शांति व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न किया। मौके पर पहुँची पुलिस टीम ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने शांति भंग करते हुए खुद को मंत्री का आदमी बताकर दबाव बनाने की कोशिश की। राज्य मंत्री श्री पटेल ने उक्त मामले में प्रशासनिक सजगता की सराहना की है और संबंधित व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। थाना नाहर दरवाजा पुलिस द्वारा तत्परता से कार्रवाई करते हुए तीनों युवकों को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध धारा 170 बीएनएसएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को अनुविभागीय अधिकारी देवास के समक्ष प्रस्तुत कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।   recent visitors 37

जलवायु की चुनौतियाँ हम सभी के सामने हैं और इसमें हर व्यक्ति की भूमिका :मंत्री सारंग

भोपाल जलवायु परिवर्तन को भारतीय कृषि के लिए एक तात्कालिक और गंभीर संकट बताते हुए, मध्यप्रदेश के सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को भोपाल में आयोजित "क्षेत्रीय नीति संवादः जलवायु परिवर्तन और इसका कृषि पर प्रभाव" विषयक कार्यक्रम में जलवायु चेतना और सामूहिक प्रयासों को गति देने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच का उल्लेख करते हुए कहा, "जलवायु की चुनौतियाँ हम सभी के सामने हैं और इसमें हर व्यक्ति की भूमिका है। अब समय है कि हम सभी मिलकर निर्णायक कदम उठाएं।" सस्टेनेबिलिटी मैटर्स द्वारा इंडियागरी और सॉलिडरिदाद के सहयोग से आयोजित इस संवाद में कृषि वैज्ञानिकों, नीति विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और किसानों ने हिस्सा लिया। सभी का उद्देश्य था- जलवायु के अनुकूल कृषि की दिशा में सामूहिक और वैज्ञानिक समाधान खोजने का प्रयास करना। मंत्री सारंग ने यह भी आश्वस्त किया कि इस तरह के संवादों को राज्य सरकार पूरा समर्थन देगी ताकि व्यावहारिक समाधान सामने आएं। उन्होंने कहा, "ऐसे विचार-मंथन अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि इन्हीं से ठोस नीतियाँ और सहयोगी मॉडल तैयार होते हैं।" सॉलिडरिदाद के जनरल मैनेजर डॉ. सुरेश मोटवानी ने जलवायु-संवेदनशील कृषि और बदलते मौसम में अनुकूलन' विषय पर सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा, "सच्ची जलवायु लचीलापन खेत स्तर से शुरू होती है, लेकिन इसके लिए नवाचार और समेकित नीति समर्थन भी जरूरी है। अब कृषि केवल उत्पादन नहीं, बल्कि आजीविका, पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य सुरक्षा की रक्षा का माध्यम भी है।" कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जल-गहन खेती की बजाय माइक्रो-इरिगेशन, वॉटर शेड डेवलपमेंट और विकेन्द्रीकृत जल शासन जैसे टिकाऊ उपायों को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक जलवायु विज्ञान को जोड़ने वाली संस्थागत संरचनाओं की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि किसानों की आवाज भी जलवायु योजना में शामिल हो। सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के कार्यकारी निदेशक और ग्रेमैटर्स कम्युनिकेशंस के निदेशक डॉ. नवनीत आनंद ने संवाद को अकादमिक चर्चा से आगे ले जाकर नीति-निर्माण से जोड़ने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा, "हमें जलवायु चिंता से जलवायु कार्रवाई की ओर बढ़ना होगा। मध्यप्रदेश में कृषि की गहराई और नवाचार को अपनाने की तत्परता है, जिससे यह राज्य नेतृत्व करने में सक्षम है। यह मंच विज्ञान, मिट्टी, नीति और स्थिरता को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास है।" इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल के जलवायु परिवर्तन अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष डॉ. भास्कर सिन्हा ने विधायकों को जागरूक करने और केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं के प्रमाची मूल्यांकन के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता बताई। संवाद के दौरान दो प्रमुख पैनल चर्चाएँ आयोजित की गई, जिनमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) सहित अनेक प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स 2025 के आयोजन के साथ हुआ, जिसमें देशभर में कृषि क्षेत्र में स्थायी बदलाव लाने वाले अग्रणी प्रयासों को सम्मानित किया गया। इस वर्ष आठ श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। सॉइल हेल्थ चैंपियन का सम्मान निको रूज़ेन सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस फॉर रिजनरेटिव एग्रीकल्चर और बिहार कृषि विभाग को संयुक्त रूप से मिला। बिहार कृषि विभाग को क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर और वॉटर कंजर्वेशन श्रेणियों में भी सम्मानित किया गया। एग्री एक्रेस को एजीटेक स्टार्ट-अप ऑफ़ द ईयर घोषित किया गया, जबकि दिलीप धाकड़ को उनके मधुमक्खी पालन स्टार्ट-अप डी-मालवा के लिए यंग अग्रिप्रेन्योर अवार्ड से नवाजा गया। कम्युनिटी-लेड एग्रीकल्चर सस्टेनेबिलिटी अवार्ड भरतखंड कंसोर्टियम ऑफ़ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी एलटीडी. को दिया गया। प्रोग्रेसिव फार्मर रिकॉग्निशन श्रेणी में शिवेंद्र सिंह राजपूत (ग्राम बधेर), संजना बामनिया (ग्राम धानखेड़ी, सीहोर) और प्रेम सिंह (ग्राम भीलखेड़ा, विदिशा) को जलवायु-संवेदनशील कृषि में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह भोपाल संवाद एक राष्ट्रीय श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका अगला आयोजन चंडीगढ़, पटना और गुवाहाटी में होगा, ताकि भारत की कृषि के लिए एक' क्षेत्रीय रूप से सुसंगत और समावेशी जलवायु कार्य योजना तैयार की जा सके।   recent visitors 57

25 मई को पीएम मोदी ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देंगे, सभी मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों को बुलाया

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने 25 मई को एनडीए के सभी मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में बिहार के सीएम नीतीश कुमार, आंध्र के चंद्रबाबू नायडू के आने की संभावना है। इसके अलावा महाराष्ट्र से अजित पवार और एकनाथ शिंदे जैसे लीडर भी मौजूद रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि इस मीटिंग में पीएम नरेंद्र ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देंगे। इसके अलावा मौजूदा राजनीतिक स्थितियों पर भी बात होने की संभावना है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान से छिड़ी जंग और फिर सीजफायर होने से एक वर्ग निराश बताया जा रहा है। इसे लेकर भाजपा नेतृत्व गंभीर है। ऐसे में एनडीए के साथियों को भरोसे में लेने की कवायद भी यह बैठक मानी जा रही है। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ राजनाथ सिंह और अमित शाह जैसे सीनियर नेता भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह और अमित शाह भी इस बैठक में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कुछ ब्रीफ कर सकते हैं। भाजपा की कोशिश है कि ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सुरक्षा बलों की जीत के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाए। यही नहीं इस मामले में किसी भी तरह की राजनीति से भी बचने की सलाह पीएम नरेंद्र मोदी ने दी है। उन्होंने कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों से कहा था कि राजनीतिक मामलों पर टिप्पणियां करने से फिलहाल बचें। ऑपरेशन सिंदूर को पूरी तरह से सेना को ही समर्पित किया जाए। इसका राजनीतिक श्रेय न लिया जाए। भाजपा के सीनियर नेताओं की तरफ से यह संदेश हर प्रदेश यूनिट को भी दिया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर का श्रेय न लिया जाए। दरअसल पीएम मोदी बिलकुल नहीं चाहते कि इस मौके पर किसी भी तरह का राजनीतिक वाद-विवाद छिड़े। भाजपा की ओर से अपने कार्यकर्ताओं को भी साफ कहा गया है कि वे यही कहें कि ऑपरेशन सिंदूर वाला ऐक्शन आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए था। यह पाकिस्तान के साथ जंग छेड़ने वाली बात नहीं थी। इसके अलावा भारत की ओर से पाकिस्तानी सेना को टारगेट भी नहीं किया गया। लेकिन पाकिस्तान की सेना ने भारत के खिलाफ हमले किए तो उसे करारा जवाब दिया गया। पीएम मोदी ने भी आदमपुर एयरबेस पर दी गई अपनी स्पीच में ऐसी ही बात की थी। recent visitors 74

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जारी किए आदेश, जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य पर मिलेगा पुरस्‍कार

भोपाल जल गंगा संवर्धन अभियान में श्रेष्ठ कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, कर्मियों को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कार दो श्रेणी में प्रदान किये जायेंगे। इस संबंध में म.प्र. राज्‍य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्‍त श्री अवि प्रसाद ने बताया कि एक पुरस्कार जल गंगा संवर्धन अभियान में समग्र रूप से उत्कष्ट कार्य पर और दूसरा मनरेगा अन्‍तर्गत खेत-तालाब निर्माण में श्रेष्ठ कार्य करने पर दिया जाएगा। अभियान में समग्र रूप से श्रेष्ठ कार्य करने पर पुरस्कार प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी में दिया जाएगा। विभाग द्वारा प्रदेश के सभी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ को निर्देश पत्र भी जारी कर दिए गए हैं। अभियान में समग्र रूप से श्रेष्ठ कार्य करने वाले जिले के कलेक्टर को क्रमश: 1 लाख 50 हजार रुपये, 1 लाख 25 लाख रुपये और 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि से पुरस्कृत किया जाएगा। इसी प्रकार मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत को प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्‍कार क्रमश: 1 लाख, 75 हजार और 50 हजार रुपये पुरस्कार स्वरूप राशि प्रदान की जाएगी। जबकि, जिले के अमले के लिए क्रमश: 6 लाख, 4 लाख 50 हजार और 3 लाख रुपये की पुरस्कार स्वरूप राशि प्रदान की जाएगी। जिले के अधिकारियों-कर्मचारियों को पुरस्कार देने के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत जिला स्तरीय समिति द्वारा चयन किया जाएगा। इसके साथ ही यदि अभियान के अंतर्गत श्रेष्ठ कार्य करने वाले जिला, जनपद, पंचायत में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों, कर्मियों का स्थानांतरण हो जाता है तो उन्हें पदस्थापना की कार्य अवधि के समानुपात में पुरस्कार की राशि प्रदान की जाएगी। जिन नवगठित जिलों में जिला पंचायत गठित नहीं है उन जिलों के कलेक्टरों को संयुक्त रूप से उनकी जनपदों के प्रदर्शन के आधार पर समानुपातिक रूप से पुरस्कार दी जाएगी। राज्य स्तर पर किया जाएगा सत्यापन जल गंगा संवर्धन अभियान की अवधि पूर्ण होने पर मनरेगा डेशबोर्ड/ पोर्टल/JGSA dashboard पर निर्धारित मापदंडों के अनुसार जिला, जनपद और ग्राम पंचायतों की रैंक के आधार पर उपरोक्त श्रेणियों का चयन किया जाएगा। इसका सत्यापन राज्य स्तर पर किया जाएगा। खेत-तालाब में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिले व विकासखंड को भी मिलेगा पुरस्कार जल गंगा संवर्धन अभियान में खेत-तालाब के निर्माण में उत्कृष्ट कार्य वाले जिले व विकासखंड को पुरस्कृत किया जाएगा। यह पुरस्कार दो श्रेणियों में दिया जाएगा। जिला स्तरीय पुरस्कार के लिए "ए" व "बी" दो श्रेणी होगी। "ए" श्रेणी में 4 या उससे कम जनपदों को शामिल किया जाएगा। है। इसी तरह से बी श्रेणी में 5 या उससे अधिक जनपदों को शामिल किया जाएगा। विकासखंड स्तरीय पुरस्कार के लिए भी ए व बी श्रेणी निर्धारित की गई। ए श्रेणी में 70 या उससे कम ग्राम पंचायतों वाली जनपद पंचायतों को शामिल किया गया, जबकि "बी" श्रेणी के लिए 71 या उससे अधिक ग्राम पंचायत वाली जनपदों को शामिल किया गया है। पूरे प्रदेश में जिला स्तर व विकासखंड स्तर की दोनों श्रेणियों के लिए 1-1 पुरस्कार दिया जाएगा। जिला स्तरीय पुरस्कार "ए" व "बी" श्रेणी में आने वाले कलेक्टर को 1 लाख रुपये, मुख्य कार्यपालन अधिकारी को 75 हजार रुपये, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को 50 हजार रुपये और जिले के अमले के लिए 2 लाख 75 हजार रुपये की राशि पुरस्कार के तौर पर दी जाएगी। विकासखंड स्तर पर भी "ए" व "बी" श्रेणी में आने वाले जनपद पंचायत सीईओ को 50 हजार रुपये, सहायक यंत्री जनपद पंचायत को 30 हजार रुपये और जनपद अमले को 1 लाख 20 हजार रुपये की राशि पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाएगी।   recent visitors 43