मुख्यमंत्री ने वर्चुअली सहभागिता कर वर-वधुओं को दिया आशीर्वाद

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के हमेशा साथ है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में गोटेगांव में हुआ 218 जोड़ों का सामूहिक विवाह मुख्यमंत्री ने वर्चुअली सहभागिता कर वर-वधुओं को दिया आशीर्वाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विवाह हमारी संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यह हमारे समाज और परिवार का आधार है। सामूहिक विवाह सम्मेलन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए संबल और सहयोग के प्रतीक हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के साथ हमारी सरकार दोस्त बनकर हमेशा साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नरसिंहपुर जिले के नई कृषि उपज मंडी प्रांगण, गोटेगांव में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आय़ोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में वर्चुअली सहभागिता कर संबोधित कर रहे थे। सामूहिक विवाह सम्मेलन में कुल 218 जोड़े (216 कन्याओं का विवाह और 02 बेटियों का निकाह) परिणय सूत्र में बंधे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार माताओं, बहनों और बेटियों के हितों की रक्षा के लिए हर कदम पर साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि बहन, बेटियों के लिए हमने अपने सालाना बजट में 27 हजार 147 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। प्रदेश में ग्रामसभा से लेकर विधानसभा तक महिलाओं की प्रभावी उपस्थिति है। शासकीय नौकरियों में हमने महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान किया है। प्रदेश में 40 प्रतिशत से अधिक स्टार्ट-अप्स का संचालन महिलाएं कर रही हैं। बीते वर्षों में 5 लाख स्व-सहायता समूहों के माध्यम से करीब 62 लाख ग्रामीण बहनें आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। यह हमारे लिये गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नवविवाहित जोड़ों को दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं व आशीर्वाद देते हुए कहा कि 16 संस्कारों में सबसे सुंदर संस्कार पाणिग्रहण संस्कार है। विवाह 2 परिवारों का और 2 संस्कारों का भी मिलन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य न केवल बेटियों को सम्मानपूर्वक विदा करना है, बल्कि उनके जीवन की नई शुरुआत को आर्थिक संबल सशक्त आधार देना भी है। उन्होंने वर-वधूओं से अपील की कि वे सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपने जीवन को आत्मनिर्भर और सुखमय बनाएं। सम्मेलन को गोटेगांव विधायक महेन्द्र सिंह नागेश ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल, पूर्व विधायक हाकम सिंह चढ़ार, समाजसेवी रामस्नेही पाठक, महंत पीतम पुरी, दादूराम पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिगण, वर-वधू एवं बड़ी संख्या में उनके परिजन एवं नागरिकगण उपस्थित थे। 26 मई को नरसिंहपुर में लगेगा विशाल कृषि मेला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जनसमूह को जानकारी दी कि आगामी 26, 27 एवं 28 मई को जिला मुख्यालय में नरसिंहपुर में विशाल कृषि मेला आयोजित किया जाएगा। 26 मई को वे स्वयं नरसिंहपुर जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस कृषि मेले में कृषि आधारित उद्योगों के बारे में जानकारी के अलावा दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन, शाक-सब्जी उत्पादन, श्रीअन्न उत्पादन, उद्यानिकी, बागवानी, उन्नति किस्म के बीज, खाद, उर्वरक की जानकारी सहित उन्नत कृषि उपकरणों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। उन्होंने नरसिंहपुर जिले के सभी किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे इस त्रि-दिवसीय विशाल कृषि मेले में आकर कृषि की नई तकनीकों और इस क्षेत्र में हो रहे नवाचारों की जानकारी लें और इन्हें अपनाकर अपनी फसल का उत्पादन बढ़ाएं।  recent visitors 33

भारत की सख्ती के बाद पाकिस्तान ने BSF के अगवा जवान को छोड़ा, DGMO लेवल की बातचीत के बाद रिहाई; 20 दिन बाद अटारी-वाघा बॉर्डर से लौटे

अटारी पाकिस्तान ने भारत के बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ को वापस लौटा दिया है. पाकिस्तानी रेंजर्स ने अटारी वाघा सीमा के रास्ते बीएसएफ कॉन्स्टेबल को वापस भेजा है. वे पिछले करीब बीस दिनों से पाकिस्तान के कब्जे में थे. कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार सुबह 10:30 बजे वतन वापस लौटे हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है. कैसे पाकिस्तान पहुंच गए थे पूर्णम कुमार? पूर्णम कुमार, गलती से इंटरनेशनल बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तान पहुंच गए थे, जिसके बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में ले लिया. वे पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात थे. भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. पाकिस्तान ने भी जवाबी हमले किए, जिससे तनाव बढ़ गया. ऐसे में पूर्णम के परिवार की चिंता और भी बढ़ गई. पत्नी ने जताई थी उम्मीद पूर्णम कुमार की पत्नी राजनी ने उम्मीद जताई थी कि डीजीएमओ की बातचीत में पूर्णम कुमार के मुद्दे को उठाया जाएगा. उन्होंने कहा था, 'जब भारतीय सेना ने 3 मई को एक पाकिस्तानी रेंजर को राजस्थान में हिरासत में लिया, तब लगा था कि शायद मेरे पति को भी छोड़ा जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब DGMO वार्ता से नई उम्मीद जगी है.' राजनी ने यह भी कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को उन्हें फोन किया और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री ने उनके ससुरालवालों की चिकित्सा सहायता की भी बात कही. बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ की पत्नी रजनी अपने पति के पाकिस्तान के हिरासत में लिए जाने की कहानी सुना ही रही थी तब ही इसी बीच उन्हें एक कॉल आती है. रजनी हमारा कॉल ऑन रखते हुए दूसरा कॉल पिक करती हैं, दूसरी तरफ से कुछ आवाज आती है और रजनी ऊंची आवाज में कहती हैं क्या बात कर रहे हैं, सच में? तब ही क्विंट के रिपोर्टर ने पूछा क्या हुआ, सब ठीक है? तब रजनी ये बोलते हुए कॉल कट कर देती हैं कि भैया मैं थोड़े देर में कॉल करती हूं. रजनी के कॉल कट करते ही हमने तुरंत इंटरनेट पर बीएसएफ जवान पूर्णम से जुड़ी जानकारी देखने की कोशिश की. लेकिन हमें पूर्णम के पाकिस्तान में गलती से घुस जाने और परिवार से जुड़ी पुरानी खबरों के अलावा कुछ नया नहीं मिला. दरअसल, 23 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने बीएसएफ के एक जवान पूर्णम कुमार शॉ को हिरासत में ले लिया था. साव गलती से पाकिस्तान बॉर्डर में घुस गए थे. करीब 21 दिन बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान पूरनम कुमार शॉ को मंगलवार लगभग साढ़े 10 बजे पाकिस्तान ने भारत को सौंप दिया है. पाकिस्तानी रेंजर्स ने अटारी वाघा सीमा के रास्ते बीएसएफ कॉन्स्टेबल को वापस भेजा है. मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं शॉ जवान शॉ मूल रूप से पश्चिम बंगाल में हुगली के रिसड़ा गांव के रहने वाले हैं। वह 23 अप्रैल को फिरोजपुर में किसानों के साथ भारत-पाक बॉर्डर पर ड्यूटी कर रहे थे। इस दौरान वह गलती से एक पेड़ के नीचे बैठने के लिए पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गए। जहां पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें पकड़ लिया और अपने साथ ले गए। क्या है पूरी कहानी? हिमाचल के कांगड़ा में बीएसएफ के 34 बटालियन में तैनात पूर्णम कुमार की ड्यूटी 16 अप्रैल 2025 को पंजाब के पठानकोट के पास फिरोजपुर में पोस्टिंग हुई थी. 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की जान ले ली. इसी बीच कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार शॉ 23 अप्रैल 2025 को दोपहर 11:50 बजे, फिरोजपुर सेक्टर के क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान गलती से पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गए, जिसके बाद पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में ले लिया. पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पर्यटकों और नागरिकों पर हमला किया, जिसे 26/11 मुंबई हमलों के बाद भारत में सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना गया. इस हमले ने भारत की शून्य सहिष्णुता की नीति को और मजबूत किया. जवाब में, भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें भारतीय वायु सेना, थल सेना और नौसेना ने समन्वित रूप से पाकिस्तान और PoK में आतंकी शिविरों को नष्ट किया. इस ऑपरेशन ने न केवल आतंकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत किसी भी आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा. पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन के बाद 7-8 मई की रात को भारत के 15 सैन्य ठिकानों जैसे श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट और अमृतसर पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. हालांकि, भारतीय नौसेना, वायु सेना और थल सेना के एकीकृत प्रयासों ने इन हमलों को पूरी तरह विफल कर दिया. भारतीय नौसेना ने अपनी वाहक युद्ध समूह (Carrier Battle Group) और उन्नत वायु रक्षा तंत्र का उपयोग कर पाकिस्तानी वायु तत्वों को समुद्री क्षेत्र में निष्क्रिय कर दिया. गर्भवती पत्नी भी फिरोजपुर पहुंची थी 28 अप्रैल को BSF जवान की गर्भवती पत्नी रजनी पश्चिम बंगाल से फिरोजपुर पहुंची थी। यहां उन्होंने BSF के सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की। वह 2 दिन फिरोजपुर में रुकी भी रहीं। हालांकि, उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह से उन्हें वापस भेजा गया। क्या है जीरो लाइन और उसका प्रोटोकॉल…     जीरो लाइन बेहद संवेदनशील हिस्सा: जीरो लाइन अंतरराष्ट्रीय सीमा का वह संवेदनशील हिस्सा होता है जहां दो देशों की सीमाएं बेहद पास होती हैं। भारत-पाकिस्तान की जीरो लाइन पर सीमित समय और परिस्थितियों में किसानों को खेती करने की अनुमति दी जाती है। साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए भारत की तरफ से BSF के जवान तैनात किए जाते हैं। इन जवानों को 'किसान गार्ड' भी कहा जाता है।     क्या कहता है प्रोटोकॉल: आमतौर पर ऐसी घटनाओं में 24 घंटे के भीतर जवानों को लौटा दिया जाता है। हालांकि, मौजूदा मामले में ऐसा नहीं किया गया। इस मामले में एक अधिकारी ने बताया कि पहले दोनों देशों के बीच अगर कोई जवान बॉर्डर पार कर लेता था तो फ्लैग मीटिंग के बाद उसे लौटा दिया जाता था। यह सामान्य बात थी, लेकिन पहलगाम में आतंकी हमले के बाद बदले हालात में यह घटना असामान्य हो गई है। पहले भी गलती से जवान … Read more

फिर ‘आप’ ने सेना के शौर्य का ‘सबूत’ मांगना शुरू कर दिया, आतिशी की ओर से पूछे गए एक सवाल पर अब भाजपा हमलावर

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान में सीजफायर के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के तमाम बड़े नेता सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना की ओर से पूछे गए एक सवाल पर अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हमलावर हो गई है। भाजपा ने आरोप लगाया कि सर्जिकल स्ट्राइक की तरह एक बार फिर 'आप' ने सेना के शौर्य का 'सबूत' मांगना शुरू कर दिया है। भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने मार्लेना पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा कि मोदी विरोध और भाजपा विरोध के नाम पर सबूत गैंग फिर काम पर। उन्होंने कहा, 'आम आदमी पार्टी जो सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांग चुकी है। पाकिस्तान के अखबारों में फ्रंट पेज पर छप चुकी है। बालाकोट स्ट्राइक के बाद सेना के शौर्य पर सवाल किए। अब ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की जयजयकार की बजाय सबूत मांग रही है कि पाकिस्तान ने हाथ कहां जोड़े, पाकिस्तान ने तो दुनिया के सामने नहीं माना कि हाथ जोड़े, तो कैसे मान लें। मतलब कि सेना के बयान पर, डीजीएमओ के बयान पर, सेना ने जो प्रमाण दिए उस पर सवाल खड़े कर दिए।' पूनावाला ने कहा कि आम आदमी पार्टी पाकिस्तान के नैरेटिव को दोहरा रही है और कह रही है कि पाकिस्तान ने हाथ नहीं जोड़े। पाकिस्तान ने तो 71 के बाद भी नहीं माना, पाकिस्तान ने तो 1999 के कारगिल के बाद भी नहीं माना कि उन्हें शिकस्त खाई। तो क्या पाकिस्तान के वर्जन पर हम भरोसा करें, भारत की सेना पर नहीं? ये वही लोग हैं जिन्होंने पहलगाम के बाद पहले पाकिस्तान को क्लीनचिट दे रहे थे, इंडि गठबंधन के नेता, फिर गिड़गि़ड़ा रहे थे कि पाकिस्तान पर कार्रवाई ना हो। अब जब कार्रवाई हुई है तो सेना के मनोबल पर चोट करने के लिए कभी अजय राय माखौल उड़ाते हैं, कभी इमरान मसूद सबूत मांगते हैं। अब आतिशी मार्लेना, जिनके माता-पिता ने अफजल गुरु का समर्थन किया था, सबूत मांग रही हैं, यह दिखाता है कि टू एंड हाफ फ्रंट वॉर में ये हाफ फ्रंट हैं। दो शरीर एक जान, आम आदमी पार्टी और पाकिस्तान।' आतिशी ने क्या कहा ऐसा? दिल्ली की पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी मार्लेना ने मंगलवार को सीजफायर पर सवाल उठाते हुए कई सवाल सरकार पर दागे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा, 'कल प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के साथ एकतरफा संवाद किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने उनके सामने हाथ जोड़े और उन्हें दया आ गई। इसलिए उन्होंने सीजफायर के लिए हां कह दिया। मोदी जी ने यह बात कह तो दी लेकिन इस पर बहुत सारे सवाल उठते हैं। पहला सवाल- अगर पाकिस्तान ने हाथ जोड़े और भारत ने पाकिस्तान पर दया खाकर सीजफायर किया तो इसकी घोषणा भारत ने खुद क्यों नहीं की, क्यों इसकी घोषणा ट्रंप ने की। दूसरा सवाल- अगर पाकिस्तान ने भारत के सामने हाथ जोड़े तो सामने आकर समझौता क्यों नहीं हुआ। क्यों पाकिस्तान दुनिया के सामने आकर नहीं बोलता, कागज पर साइन नहीं करता, मीडिया के सामने आकर नहीं बोलता कि हमने भारत से हार मानी और हाथ जोड़े। आज पूरा देश जानना चाहता है कि यदि पाकिस्तान ने हाथ जोड़े थे तो वो दुनिया के सामने क्यों नहीं कह पाते। अगर पाकिस्तान ने भारत के सामने हाथ जोड़े तो क्या उसने कम से कम पहलगाम में हमला करने वाले आतंकवादियों को भारत को सौंपा? इसका भी कोई प्रमाण नहीं है।' पीएम मोदी ने क्या कहा था? पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद पाकिस्तान की बौखलाहट पर भारत की ओर से की गई सैन्य कार्रवाई को लेकर देश को संबोधित करते हुए बताया था कि किस तरह पाकिस्तान ने भारतीय सेना के डीजीएमओ के सामने सीजफायर के लिए गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा, 'भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा। पाकिस्तान दुनियाभर में तनाव कम करने के लिए गुहार लगा रहा था। बुरी तरह पिटने के बाद इसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे डीजीएमओ को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर तबाह कर चुके थे। आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। पाकिस्तान के सीने में आतंकी अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था। इसलिए पाकिस्तान की तरफ से जब गुहार लगाई गई पाकिस्तान की तरफ से जब यह कहा गया कि वह आगे कोई आतंकी गवितिधि और सैन्य दुस्साहस नहीं करेगा तो भारत ने भी उस पर विचार किया।' recent visitors 55

मंत्री विजय शाह मामले में MP हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, कहा- 4 घंटे में दर्ज करें FIR, क्या इस्तीफा देंगे शाह

भोपाल  कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की मुश्किल बढ़ गई है। हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। जबलपुर HC के जस्टिस अतुल श्रीधरन और अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान कोर्ट ने सरकार को चार घंटे के अंदर (6:00 बजे तक) मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। बता दें कि मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर पीएम मोदी भी नाराज हैं। मंत्री शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में एक विवादित टिप्पणी की थी, जिस पर कांग्रेस ने उनके इस्तीफे की मांग की है। मंत्री शाह ने बाद में अपने बयान के लिए माफी मांगी और कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। लेकिन कांग्रेस ने उनकी माफी को स्वीकार नहीं किया और उनके इस्तीफे की मांग जारी रखी है। 'विजय शाह पर देशद्रोह का मामला दर्ज हो' बता दें कि मंत्री विजय शाह के बयान से बवाल मचा हुआ है. बुधवार (14 मई) को पीसीसी चीफ जीतू पटवारी समेत कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल श्यामला हिल्स थाने पहुंचा. कांग्रेस ने उठाई विजय शाह के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की है. कांग्रेस गुरुवार (15 मई) को मध्य प्रदेश के सभी थानों में कल शिकायती आवेदन भी देगी. एक मिनट भी पद रहने का हक नहीं- कांग्रेस मंत्री विजय शाह के बयान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि विजय शाह ने सेना का अपमान किया है और उन्हें एक मिनट भी मंत्री पद पर रहने का अधिकार नहीं है. उनके बयान से देश के लोग खुश नहीं हैं. हमने श्यामला हिल्स थाने में इसको लेकर आवेदन दिया है साथ ही हमने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी पत्र लिखा है. क्या इस्तीफा देंगे मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया कुरैशी पर जनजातीय मंत्री विजय शाह द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है. इस मामले में मंत्री विजय शाह को केन्द्रीय नेतृत्व से फटकार लगी है. इसके बाद उन्होंने मांफी भी मांगी है. इधर, कांग्रेस ने विजय शाह के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है. कांग्रेस के आक्रामक रुख और जनता की नाराजगी को देखते हुए अब बीजेपी बचाव की मुद्रा में है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विजय शाह मंत्री पद से इस्तीफा देंगे. बीजेपी नेता जुटे डैमेज कंट्रोल में वहीं, मंत्री विजय शाह के विवादास्पद बयान से हुई पार्टी की किरकिरी के बाद डैमेज कंट्रोल की कोशिशें बीजेपी ने तेज कर दी हैं. विजय शाह को प्रदेश पार्टी मुख्यालय तलब किया गया. सफाई देने मंत्री हवाई चप्पल पहने ही दौड़े-दौड़े पहुंचे. इसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने बयान को लेकर माफी मांगी. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कहना है "मंत्री विजय शाह को समझाइश दी गई है. पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को संज्ञान में लिया है और उन्हें आगाह किया गया है. सोफिया कुरैशी इस देश की बेटी है और उसने जो पराक्रम किया है, उसको पूरा देश सैल्यूट करता है." कांग्रेस अध्यक्ष खडगे के बयान को लेकर वीडी शर्मा ने कहा "वे क्या कहते हैं वह उनका नजरिया है, लेकिन पार्टी इस पूरे मामले में गंभीर है." हालांकि विजय शाह के इस्तीफे के सवाल पर पार्टी अध्यक्ष ने कुछ भी नहीं कहा. नेम प्लेट पर कालिख पोतने वाले कांग्रेसियों के खिलाफ एफआईआर इधर, मंत्री विजय शाह के विवादास्पद बयान के विरोध में मंत्री की नेम प्लेट पर कालिख पोतने के मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. वहीं, मंत्री पर एफआईआर दर्ज कराने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कांग्रेस नेता थाने भी पहुंचे. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अब इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर विजय शाह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है. जीतू पटवारी ने लिखा है "मंत्री का यह बयान न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि भारतीय सेना की गरिमा, देश की एकता और सामाजिक सद्भाव पर भी खुला हमला है. कर्नल सोफिया कुरैशी ने अपनी वीरता और देशभक्ति से देश का मान बढ़ाया है. ऐसे व्यक्तित्व पर हमला उनकी व्यक्तिगत गरिमा पर प्रहार और भारतीय सेना एवं जन भावनाओं का अपमान है." recent visitors 25

पूर्व स्पिनर अनिल कुंबले ने बताया कोहली के बाद नंबर-4 का करुण नायर को दावेदार, अब सभालेंगे भार

नई दिल्ली विराट कोहली के रिटायरमेंट के बाद भारतीय टीम थोड़ी कमजोर सी नजर आ रही है। टॉप पर ना तो अब रोहित शर्मा होंगे और ना ही मिडिल ऑर्डर का भार संभालने वाले किंग कोहली। ऐसे में इंग्लैंड दौरे पर टीम थोड़ी बिखरी-बिखरी नजर आ सकती है। इस समय कप्तानी के अलावा सवाल यह है कि नंबर-4 की पोजिशन पर कौन बैटिंग करेगा। कोहली ने सचिन के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी, मगर अब उनके बाद कौन? इस सवाल का जवाब पूर्व स्पिनर अनिल कुंबले ने दिया है। इस लीजेंड्री स्पिनर ने इंग्लैंड दौरे पर करुण नायर को नंबर-4 का दावेदार बताया है। बता दें, नायर ने आखिरी टेस्ट 2017 में खेला था। कुंबले ने कहा, "करुण ने जिस तरह का घरेलू प्रदर्शन किया है, उसे देखते हुए वह भारतीय टीम में वापसी के हकदार हैं। इसलिए शायद वह भारत के लिए नंबर 4 पर खेल सकते हैं, क्योंकि मुझे लगता है कि आपको थोड़े अनुभव की जरूरत होती है। आपको इंग्लैंड में किसी ऐसे खिलाड़ी की जरूरत है जो वहां जाकर खेल चुका हो। वह काउंटी क्रिकेट खेल चुका है, इसलिए वह वहां की परिस्थितियों को जानता है। करुण की उम्र भले ही 30 के पार हो, लेकिन वह अभी भी युवा है। अगर उसे मौका मिलता है, तो युवाओं के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलने की काफी उम्मीदें होंगी। अगर घरेलू क्रिकेट में किए गए प्रदर्शन को मान्यता नहीं मिलती है, तो यह थोड़ी चुनौती बन जाती है।" नायर अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं, उन्होंने हाल ही में घरेलू सत्र में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने रणजी ट्रॉफी 2024-25 में विदर्भ की जीत में अहम भूमिका निभाई और इस सत्र के चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे। उन्होंने 16 पारियों में 53.93 की औसत से 863 रन बनाए, जिसमें चार शतक और दो अर्द्धशतक शामिल हैं। चयनकर्ता उन्हें सनियर टीम में मौका देने से पहले इंग्लैंड दौरे पर इंडिया ए के स्क्वॉड के लिए भी चुन सकते हैं। recent visitors 37

अवैध तरीके से रह रहे 148 बांग्लादेशियों को किया गया डिपोर्ट

जोधपुर भारत सरकार अब अवैध रूप से देश में रह रहे विदेशियों के खिलाफ सख्त रवैया अपना रही है। इसी कड़ी में राजस्थान के जोधपुर से सोमवार को 148 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किए जाने की कार्रवाई शुरू की गई। ये सभी बांग्लादेशी नागरिक पहले अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर विभिन्न स्थानों पर रह रहे थे। राजस्थान पुलिस ने हाल ही में चलाए गए विशेष अभियान के तहत प्रदेशभर में अवैध प्रवासियों की पहचान की। इस दौरान कुल 1008 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया। इनमें से अकेले जयपुर रेंज से 761 और सीकर जिले से 394 अवैध बांग्लादेशी पकड़े गए। दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद पहले चरण में 148 नागरिकों को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन बांग्लादेशी नागरिकों को सीकर पुलिस की निगरानी में जोधपुर लाया गया, जहां से उन्हें एयरफोर्स स्टेशन के जरिए पश्चिम बंगाल रवाना किया गया। वहां से इन्हें भारत-बांग्लादेश सीमा पार कराकर उनके देश वापस भेजा जाएगा। सरकार की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि अब भारत अवैध रूप से रह रहे विदेशियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में और भी अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें उनके मूल देशों में भेजा जाएगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कई अवैध प्रवासी वर्षों से भारत में रह रहे थे और इन्होंने यहां के फर्जी दस्तावेज़ बनवाकर काम-धंधे शुरू कर दिए थे। कई बार ये लोग कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। डिपोर्ट किए गए बांग्लादेशी नागरिकों की सूची केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है और विदेश मंत्रालय के समन्वय से इनकी वापसी सुनिश्चित कराई जा रही है।   recent visitors 46

जेसी जॉर्ज मोदी ने कहा कि वो चुनाव लड़ सकती हैं, इस खुले इजहार से राजनीतिक गलियारों में मची खलबली

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिवंगत दिग्गज नेता सुशील कुमार मोदी की पत्नी जेसी जॉर्ज मोदी ने चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी है। बिहार में पार्टी के संघर्ष से अच्छे दिनों तक अगुआ रहे सुशील मोदी की पत्नी के चुनाव लड़ने की ख्वाहिश के खुले इजहार से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। सुशील मोदी का पिछले साल 13 मई को निधन हो गया था। उनकी पहली पुण्यतिथि पर पटना में आयोजित समारोह के बाद पत्रकारों से जेसी जॉर्ज मोदी ने कहा कि वो चुनाव लड़ सकती हैं। पत्रकारों ने जब जेसी जॉर्ज मोदी से पूछा कि क्या वो राजनीति में आ सकती हैं, क्या वो चुनाव लड़ सकती हैं तो उन्होंने जवाब दिया- “मेरा भाषण नहीं सुने क्या स्टेज पर, बहुत गलत बात।” मीडिया ने फिर से पूछा कि क्या आप लड़ सकती हैं तो उन्होंने कहा- “हां लड़ सकती हूं।” फिर जेसी जॉर्ज मोदी ने कार में बैठते हुए कहा- “इतना अच्छा भाषण हमने दिया, भाषण नहीं सुने क्या।” समारोह में जेसी जॉर्ज मोदी ने नीतीश के साथ सुशील मोदी के रिश्तों को बहुत स्पेशल बताते हुए कहा कि जब दोनों अलग हो गए थे तो उनके पूछने पर मोदी ने रोते हुए कहा था कि नीतीश मेरे दोस्त हैं। सुशील मोदी देश के उन गिने-चुने राजनेताओं में शामिल हैं, जो संसद और विधानमंडल के दोनों सदनों में रहे। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से राजनीति में आए सुशील मोदी चुनावी राजनीति में बिहार विधानसभा से आए। पटना सेंट्रल विधानसभा सीट से लगातार तीन बार जीतकर विपक्ष के नेता के पद तक पहुंचे सुशील मोदी 2004 में भागलपुर लोकसभा सीट से संसद पहुंचे। 2005 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार बनी तो वो पटना लौटे और एनडीए सरकार के उपमुख्यमंत्री बने। तब से वो विधान परिषद सदस्य बनते रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से अलग हो गए नीतीश कुमार के 2015 में लालू यादव से हाथ मिलाने के बाद बनी महागठबंधन सरकार को दो साल के अंदर गिराकर नीतीश को वापस एनडीए के साथ लाने का श्रेय सुशील मोदी को ही जाता है। 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद भी उन्हें फिर डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया और राज्यसभा सांसद बनाकर दिल्ली भेज दिया गया। नीतीश को मोदी की कमी लगातार खलती रही, जिसके कारण वो बीच में एक बार फिर अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक महागठबंधन के साथ चले गए थे। recent visitors 43