यशस्वी और सिराज को टेस्ट सीरीज के सर्वश्रेष्ठ फील्डरों का खिताब मिला

नई दिल्ली बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को कानपुर टेस्ट में सात विकेट से शानदार जीत दर्ज करने के बाद सीरीज के सर्वश्रेष्ठ फील्डरों का खिताब मिला। बीसीसीआई डॉट टीवी पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में, भारत के फील्डिंग कोच टी दिलीप ने बताया कि जायसवाल और सिराज ने कप्तान रोहित शर्मा और केएल राहुल को पीछे छोड़ते हुए श्रृंखला में सर्वश्रेष्ठ फील्डर का तमगा हासिल किया। उन्होंने कहा, “इस बार हमारे पास बेस्ट फील्डर के लिए दो विजेता हैं। इस सीरीज में खिलाड़ियों ने शानदार फील्डिंग का उदाहरण पेश किया। दोनों टेस्ट मैचों में हमने कई अच्छे कैच लपके, जो वास्तव में सराहनीय है। मुझे लगाता है कि दो लोग इस पदक के हकदार थे और वह कोई और नहीं बल्कि जायसवाल और सिराज थे।” सीरीज में भारत की कैचिंग बेहतरीन रही और दिलीप ने खेल के इस पहलू में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए पूरी टीम की प्रशंसा की। हालांकि रोहित को पदक नहीं मिला, लेकिन दिलीप ने उनकी फील्डिंग स्किल्स की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब कैचिंग की बात आती है, तो मुझे लगता है कि वह सबसे ज्यादा भरोसेमंद है। राहुल के बारे में बात करते हुए दिलीप ने कहा, “वह ऐसा खिलाड़ी है जिसने वाकई अपनी मजबूत सजगता दिखाई है और जब कैचिंग की बात आती है तो वह वाकई बहुत ही शांत रहता है और बहुत ही बेहतरीन काम करता है।” बांग्लादेश पर शानदार जीत के साथ भारत ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में अपने अंक प्रतिशत को 74.24 तक पहुंचा दिया है और अपनी शीर्ष स्थिति को मजबूत किया है। भारत अब न्यूजीलैंड के साथ तीन मैचों की घरेलू टेस्ट सीरीज खेलेगा, जिसकी शुरुआत 16 अक्टूबर को बेंगलुरु में होगी, उसके बाद पुणे और मुंबई में मैच खेले जाएंगे।   recent visitors 89

केबीसी में शिरकत करेंगे पैरालिंपिक के तीन स्वर्ण पदक विजेता अवनि लेखरा, नवदीप सिंह और सुमित अंतिल

मुंबई सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन पर प्रसारित होने वाले लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) 16 में पैरालिंपिक के तीन स्वर्ण पदक विजेता अवनि लेखरा, नवदीप सिंह और सुमित अंतिल शिरकत करेंगे। अमिताभ बच्चन इन दिनों क्विज़-आधारित रियलिटी टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति के 16वें सीज़न की मेजबानी कर रहे हैं। आने वाले एपिसोड में पैरालिंपिक के तीन स्वर्ण पदक विजेता अवनि लेखारा, नवदीप सिंह और सुमित अंतिल शिरकत करेंगे। अमिताभ बच्चन ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर तीनो पैरालिंपिक पदक विजेताओं को समर्पित एक पोस्ट साझा की। अमिताभ बच्चन ने केबीसी 16 के सेट से तीन पैरालिंपिक पदक विजेताओं की कुछ कैंडिड तस्वीरें पोस्ट कीं। पहली दो तस्वीरें सुमित अंतिल और नवदीप सिंह की थीं। आखिरी तस्वीर में, अमिताभ,अवनि लेखरा को लाते हुए दिखाई दिए। तस्वीरों को शेयर करते हुए, अमिताभ ने कैप्शन में लिखा, टी 5148 – सीना गर्व से फूला हुआ है, भारत ने स्वर्ण पदक जीता है! पैरालिंपिक के तीन विजेताओं के सामने, हमारा सौभाग्य और गौरव! सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन ने भी 04 अक्टूबर को प्रसारित होने वाले इस एपिसोड का प्रोमो जारी किया है। वीडियो की शुरुआत में अमिताभ बच्चन पैरालिंपिक पदक विजेताओं का मंच पर स्वागत करते नजर आते हैं। नवदीप सिंह अपनी कहानी साझा करते हैं, जिसमें बताया गया है कि कैसे उनके बौनेपन के कारण लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था। सोनी चैनल ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो को कैप्शन के साथ पोस्ट किया, जिंदगी के हर सवाल का जवाब दे कर, भारत में विजय ध्वज लहराने वालों का केबीसी पर होगा दिल से स्वागत! देखिये कौन बनेगा करोड़पति 04 अक्टूबर रात 9 बजे सिर्फ सोनी एंटरटेनमेंट टेलिविजन पर।     recent visitors 128

सरकार किसी की भी बने इस बार जम्मू कश्मीर को पहला हिंदू सीएम मिलेगा !

श्रीनगर जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने तीन चरणों में अपना जनादेश दर्ज कर दिया है. मंगलवार को तीसरे और आखिरी चरण की वोटिंग संपन्‍न हुई. 8 अक्तूबर को मतगणना होगी. तीसरे चरण में मंगलवार को 7 जिलों की 40 विधानसभा सीटों पर 66.56% वोटिंग हुई. तीसरे फेज में वोटिंग परसेंटेज पहले और दूसरे फेज से ज्यादा रहने का सीधा मतलब कुछ निकलता है जिसे समझना होगा. पहले फेज में 61.38% और दूसरे फेज में 57.31% मतदान हुआ था. तीसरे फेज की 40 सीटों में से 24 जम्मू डिवीजन और 16 कश्मीर घाटी की हैं. मतलब साफ दिख रहा है कि जम्मू रिजन में जम कर वोटिंग हुई है. इस तरह इस बार जम्मू कश्मीर में जो माहौल बन रहा है उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस बार मुस्लिम बहुल जनसंख्या वाले इस केंद्र शासित प्रदेश को हिंदू सीएम मिल सकता है. कई कारण और भी हैं जो इशारा करते हैं कि सरकार किसी की भी बने इस बार जम्मू कश्मीर को पहला हिंदू सीएम मिल सकता है. भारतीय गणतंत्र में मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक और राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक का पद देश का कोई भी नागरिक हासिल कर सकता है. संविधान में इस बात की गारंटी दी हुई है. यही कारण है कि देश में राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर 2 बार देश के अल्पसंख्यक (मुस्लिम) हासिल कर चुके हैं. देश के कई राज्यों में मुस्लिम अल्पसंख्या में होने के बावजूद सीएम बन चुके हैं. महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल आदि में मुख्यमंत्री पद पर सीएम पद संभाल चुके हैं. इसी बात को आधार बनाकर जम्मू कश्मीर के विधानसभा चुनावों में इस बार जम्मू क्षेत्र में हिंदू मुख्यमंत्री का मुद्दा जोर पकड़ लिया है. जम्मू कश्मीर जो राजनीतिक हालत बन रहे हैं उसमें कोई भी पार्टी चुनाव जीते इस बार ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं कि यहां का मुख्यमंत्री कोई हिंदू भी बन सकता है.आइए देखते हैं कि वो कौन से कारण हैं जिसके आधार पर यह बात कही जा रही है. 1- जम्मू में इस बार क्यों है हिंदू सीएम का माहौल 1947 में भारत संघ में शामिल होने से लेकर 5 मार्च 1965 तक, जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री के नाम से संबोधित किया जाता था. न्यायमूर्ति मेहर चंद महाजन को छोड़कर, जो जम्मू-कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री थे, बाकी सभी प्रधानमंत्री घाटी से थे और मुस्लिम थे. शेख मोहम्मद अब्दुल्ला, बख्शी गुलाम मोहम्मद, ख्वाजा शम्सुद्दीन, और गुलाम मोहम्मद सादिक ने जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया. बाद में प्रधानमंत्री का पद मुख्यमंत्री में बदल दिया गया और सदर-ए-रियासत (राष्ट्रपति) को राज्यपाल का नाम दे दिया गया. इस बड़े परिवर्तन के बाद जम्मू कश्मीर के सभी मुख्यमंत्री एक तो मुस्लिम हुए और दूसरे कश्मीर घाटी से ही हुए. केवल गुलाम नबी आजाद ही एक मात्र ऐसे थे जम्मू के डोडा जिले से आते हैं. दरअसल 2011 की जनगणना के अनुसार, जम्मू और कश्मीर में 68.8% मुसलमान हैं,जो अधिकतर कश्मीर घाटी में रहते हैं. करीब 28.8% हिंदू हैं, जिनमें से अधिकांश जम्मू में रहते हैं. जम्मू में आने वाली विधानसभा सीटों और लोकसभा सीटों पर आम तौर पर हिंदू प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं. जम्मू क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ही नहीं कुछ सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का भी दबदबा है. पर इस बार जम्मू नॉर्थ के बीजेपी उम्मीदवार और राज्य उपाध्यक्ष शाम लाल शर्मा ने जम्मू डिवीजन के मतदाताओं से अपील की थी कि वे पार्टी के उम्मीदवारों को जिताएं ताकि केंद्र शासित प्रदेश को अपना पहला डोगरा हिंदू मुख्यमंत्री मिल सके. इतना ही नहीं एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एक मुस्लिम मुख्यमंत्री हो सकता है तो जम्मू और कश्मीर में एक हिंदू क्यों नहीं हो सकता? यहां तो हिंदुओं की आबादी 32% है. दरअसल इस बार के चुनाव परिणाम आने के बाद श्याम लाल शर्मा की कही बातें अतिशयोक्ति नहीं हैं. दरअसल पिछले कुछ सालों में जम्मू की हालत कश्मीर के मुकाबले बहुत कमजोर हुई है. जम्मू अब कश्मीर की शीतकालीन राजधानी भी नहीं रही. दूसरे ट्रेनों का ठहराव अब कटरा तक हो जाने से तीर्थयात्रियों की आमदरफ्त कम हो गई. इसलिए यहां के लोग चाहते हैं कि जम्मू क्षेत्र का आदमी सीएम बनेगा तो ही जम्मू के हक में फैसले हो सकेंगे. 2- त्रिशंकु विधानसभा बनी तो बीजेपी रहेगी सबसे आगे दरअसल श्याम लाल शर्मा के बयान को आप बीजेपी की रणनीति के रूप में देख सकते हैं. क्योंकि हिंदुओं के वोट बीजेपी और कांग्रेस में बंटने की उम्मीद है. बीजेपी इस प्रयास में है कि जम्मू डिवीजन जहां 43 विधानसभा सीटें हैं, में अधिक से अधिक सीटों पर कब्जा कर सके. दरअसल जम्मू कश्मीर विधानसभा में त्रिशंकु विधानसभाओं का इतिहास रहा है. अगर त्रिशंकु विधानसभा बनती है तो सबसे अधिक संभावना बीजेपी के ही सीएम की होगी. क्योंकि 5 नामित सदस्यों का सहयोग भी बीजेपी को मिलने की उम्मीद रहेगी. 2002 के विधानसभा चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस को 87 सदस्यीय विधानसभा में 57 सीटों से घटकर 28 सीटों पर आ गई थी. कांग्रेस ने 20 सीटें जीतीं और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने 16 सीटें हासिल कीं, जिसके बाद कांग्रेस, पीडीपी और कुछ छोटे दलों ने मिलकर सरकार बनाई. 2008 के विधानसभा चुनावों में भी त्रिशंकु परिणाम आए, जिसके कारण नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और कांग्रेस को मिलकर सरकार बनानी पड़ी. घाटी में राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती दरार के चलते, जम्मू के नेता यह मानने लगे कि जम्मू को भी अपना मुख्यमंत्री मिल सकता है. 2014 के चुनावों में बीजेपी ने जम्मू से 25 सीटें जीतीं, जब हिंदू मतदाता पार्टी के पीछे एकजुट हो गए थे. पीडीपी के साथ बीजेपी ने मिलकर सरकार बनाई. जाहिर है बीजेपी ने ऐसा राज्य में अपनी जड़ें जमाने के लिए किया होगा. अब बीजेपी खुलकर कह रही है कि यदि पार्टी पूर्ण बहुमत से जीतती है, तो मुख्यमंत्री जम्मू से होगा. 3-कांग्रेस-नेशनल कान्फ्रेंस की सरकार बनती है तो भी हिंदू सीएम की संभावना नए परिसीमन के बाद जम्मू कश्मीर में पहली बार चुनाव हो रहे हैं. कुल 90 सीटों पर विधानसभा के चुनाव होने हैं. इनमें 47 सीटें कश्मीर में हैं, जबकि 43 सीटें जम्मू में हैं. परिसीमन के पहले जम्मू एरिया की सीटों की … Read more

Indian Army ने 56 साल बाद ढूंढ निकाले Plane Crash में शहीद हुए जवानों के शव

शिमला/लाहौल स्पीति ये कहानी उन चार फौजियों की है, जिनके शवों के अवशेष 56 साल बाद मिले हैं। ये सभी फौजी हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में एक विमान हादसे में शहीद हो गए थे। 29 सितंबर 2024 को चन्द्रभागा-13 ढाका ग्लेशियर में सैनिकों के शवों के अवशेष बरामद हुए हैं। इन फौजियों में मलखान सिंह, सहारनपुर, नारायण सिंह पौड़ी-गढवाल और मुंशी राम, रेवाड़ी और थॉमस चैरियन केरल के तौर पर हुई है। सेना की रेस्क्यू टीम ने इन्हें निकाला है और अब काजा के लोसर हेलिपेड से इन अवशेषों को चंडीगढ़ भेजा गया। 1968 में हुआ था हादसा मामला 7 फरवरी 1968 का है। जब चंडीगढ़ से लेह के लिए भारतीय वायुसेना का एएन-12 जा रहा था। इसमें क्रू-मेम्बर के साथ कुल 102 सैनिकों सवार थे। इस दौरान रोहतांग दर्रे के करीब विमान का संपर्क टूटा और फिर यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान के खोज के लिए वर्ष 2004, 2007, 2013, 2019 विशेष अभियान चलाया गया है। डोगरा स्काउट्स ने कई अभियान चलाए और 2005, 2006, 2013 और 2019 में सर्च ऑपरेशन पांच शव बरामद किए थे। 2003 में मिले थे विमान के पार्टस 2003 में सबसे पहले मनाली के पर्वतारोही संस्थान के ट्रैकर्स ने विमान को खोजा था। 56 साल के बाद 29 सितंबर 2024 को चन्द्रभागा-13 ढाका ग्लेशियर में सैनिकों के शव बरामद हुए। भारतीय सेना के विशेष टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों को लोसर लाया गया। मनाली के एक ट्रैकर का कहना है कि साल 2023 में जब उन्होंने भी ढाका ग्लेशियर ट्रैक किया था तो यहां पर विमान का मलबा और कुछ फौजियों के अवेशष देखे थे और फोटो और वीडियो शेयर किए थे। उसने बताया कि यहां पहुंचने के लिए 2 दिन का वक्त लगता है। गर्मियों में बर्फ पिघलने के बाद यहां पर ट्रैकिंग करने वह गए थे। यहां पर पहुंचना आसान नहीं है, आम लोग यहां पर नहीं जाते हैं।  लाहौल स्पीति की चंद्रभागा रैंज में 56 साल पहले हुए विमान हादसे में अब चार फौजी जवानों के शव बरामद किए गए हैं. भारतीय सेना की टीम ने इन शवों को वहां से निकाला है और स्पीती के काजा के लोसर ले गई है. यहां पर शवों को परिवारों को सौंपा जाएगा. इन चार शवों में हरियाणा के रेवाड़ी के सिपाही मुंशीराम भी शामिल हैं. सभी शवों की पहचान हो गई है. जानकारी के अनुसार, 7 फरवरी 1968 को चंडीगढ़ से लेह के लिए इंडियन एयरफोर्स के एक विमान ने उड़ान भरी थी. इस विमान में 102 लोग सवार थे. लेकिन हिमाचल के रोहतांग दर्रे के पास विमान का संपर्क टूट गया था और फिर आगे बातल के ऊपर चंद्रभागा रैंज में विमान क्रैश हो गया था. विमान में रेवाडी की बावल तहसील के गांव गुर्जर माजरी के सिपाही स्वर्गीय मुन्शीराम भी सवार थे और 56 साल बाद अब उनकी बॉडी के अवेशष बरामद हुए हैं.  रेवाड़ी के डीसी अभिषेक मीणा ने  बताया कि सैन्य अभियान दल ने बर्फ से ढके पहाड़ों से चार शव बरामद किए हैं, उनमें स्वर्गीय मुन्शीराम के अवशेष भी हैं. उनके पार्थिव शरीर को जल्द ही गांव में लाया जाएगा. स्वर्गीय मुन्शीराम के पिता का नाम भज्जूराम, माता का नाम रामप्यारी तथा पत्नी का नाम श्रीमति पार्वती देवी है. स्वर्गीय मुन्शीराम के भाई कैलाशचन्द को इस सम्बन्ध में सेना की ओर से सूचना मिली हैं. लेह के लिए चंडीगढ़ से फौजियों ने भरी थी उड़ान गौरतलब है कि यह विमान हादसा 7 फरवरी, 1968 को हुआ था. चंडीगढ़ से 102 यात्रियों को ले जा रहा भारतीय वायु सेना का एएन-12 विमान खराब मौसम के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग के पर्वतारोहियों ने विमान के मलबे को खोजा था. बाद में सेना, खासकर डोगरा स्काउट्स ने कई अभियान चलाए और 2005, 2006, 2013 और 2019 में सर्च ऑपरेशन पांच शव बरामद किए थे. हालांकि, इस दौरान मनाली के कई ट्रैकर्स ने भी विमान के मलबे को स्पॉट किया था. लाहौस स्पीति के एसपी मयंक चौधरी ने बताया कि कि चंद्रभागा रैंज से चार जवानों के शवों को बरामद किया गया है. इन्हें काजा के लोसर ले जाया गया है और वहां पर मेडिकल टीम के अलावा, पुलिस की टीम भी मौजूद है. पोस्टरमार्टम के बाद परिजनों को ये शव सौंपे जाएंगे. 2003 में हुई हादसे की पुष्टि 2003 में, अधिकारियों ने पुष्टि की कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और कुछ शव बरामद किए गए थे. जिसके बाद अरनमुला से स्थानीय पुलिस ने थॉमस चेरियन के बारे में विवरण सत्यापित करने के लिए उनके घर का दौरा किया, जहां उनका परिवार रहता है. भाई थॉमस वर्गीस को समझ नहीं आ रहा था कि वह ऐसे समय क्या करें. हालांकि, उन्होंने दुख और राहत दोनों व्यक्त करते हुए कहा कि, यह उनके लिए दुखद भरा क्षण है लेकिन कब्र में दफनाने के लिए अपने भाई के अवशेषों को प्राप्त करने से कुछ शांति मिली है. तीन शवों की पहचान शैजू मैथ्यू ने बताया- परिवार 56 वर्षों के बाद भी उनकी निरंतर खोज के लिए सरकार और सेना के प्रति आभार व्यक्त करता है. केरल के कई अन्य सैनिक भी AN12 विमान में सवार थे, जिनमें कोट्टायम के केपी पनिकर, केके राजपन और आर्मी सर्विस कोर के एस भास्करन पिल्लई शामिल थे. इन सैनिकों के शव अभी तक नहीं मिले हैं. सितंबर में रोहतांग दर्रे में चार और शव मिले थे, और इनमें से तीन की पहचान हो गई है, जिसमें थॉमस चेरियन का शव भी शामिल है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि चौथा शव रन्नी के एक सैनिक पीएस जोसेफ का हो सकता है, जो विमान में भी था. recent visitors 138

विंध्याचल नवरात्र मेले की सुरक्षा व्यवस्था एटीएस के हवाले

मिर्जापुर  विंध्य क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी मां विंध्यवासिनी के विंध्याचल में नौ दिनों तक चलने वाला प्रसिद्ध नवरात्र मेला इस साल आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की निगरानी में होगा।गुरुवार से शुरु हो रहे विंध्याचल नवरात्र मेले की सुरक्षा व्यवस्था आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस ) के हवाले कर दी गई है। पूरा मेला सीसीटीवी कैमरों के जद में होगा। ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। मेला सुरक्षा में अर्धसैनिक बल के जवानों के साथ तीन हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।होमगार्ड, पीआरडी ,यातायात पुलिस एवं फायर ब्रिगेड जवानों को भी लगाया गया है। आधुनिक उपकरणों से युक्त बम डिस्पोजल दस्ता एवं जल पुलिस के जवान मुस्तैद रहेगे। मां विन्ध्यवासिनी देवी के गर्भगृह में चरण छूने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध वीआईपी व्यक्तियों पर भी लागू किया गया है। साथ ही साथ पंडों, नाईयो और सफाईकर्मी के लिए ड्रेस कोड में रहने के आदेश दिए गए हैं। दुकानदारों और वाहन स्टैंडो पर रेट लिस्ट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने मेला की मुकम्मल व्यवस्था कर लेने का दावा किया है। नगर मजिस्ट्र लाल बहादुर को मेला अधिकारी बनाया गया है। जबकि अपर जिला मजिस्ट्रेट एस पी शुक्ल सुपर मजिस्ट्रेट होगे। जिलाधिकारी प्रिंयका निरंजन बताया कि पूरे मेला क्षेत्र को 10 जोन और 21 सेक्टरों में बांटा गया है। सभी जोनो में जोनल मजिस्ट्रेट और सेक्टर मजिस्ट्रेटो को तैनात किया गया है। मेला क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक भीड़ एकत्र न हो सके इसके लिए जगह-जगह बैरियर लगाये गए हैं। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने बताया कि मेले में सिविल पुलिस के अलावा जल पुलिस यातायात घुड़सवार पुलिस के अलावा खुफिया एजेंसी के जवान भी है। किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलग से व्यवस्था की गयी है। उन्होंने बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से एटीएस के जवान मोर्चा संभालेंगे। यह टीम पूरे नवरात्र मेला सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी। उन्होंने बताया कि अतिसंवेदनशील स्थानों पर अतिसतर्कता बरती जा रही है। व्यवस्था एवं तैयारियों की समीक्षा के लिए मंडलायुक्त मुथु स्वामी और पुलिस उपमहानिरीक्षक आर पी सिह ने मेला की तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक आदेश निर्देश दिए। नवरात्र मेले में ड्यूटी पर तैनात किए गए सुरक्षा कर्मियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं ड्यूटी के दौरान श्रद्धालु दर्शनार्थियों के साथ विनम्र व्यवहार करे।साथ ही साथ साफ सुथरी वर्दी में अनुशासित रह कर अपने कर्तव्य एवं दायित्व का निर्वहन करेंगे।   recent visitors 86

तिरुपति मंदिर में 4 अक्टूबर से 9 दिवसीय ‘ब्रह्मोत्सव’ उत्सव, हर दिन 1 लाख भक्तों के आने की उम्मीद

तिरुपति आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद को लेकर हुए विवाद के बाद अब तिरुपति का श्री वेंकटेश्वर मंदिर 'ब्रह्मोत्सव' के लिए तैयारी कर रहा है. यह 9 दिवसीय उत्सव 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें हर दिन लगभग 1 लाख भक्तों के आने की उम्मीद है. बता दें कि लड्डू विवाद के बाद मंगलवार को मंदिर में सफाई अनुष्ठान 'कोईल अल्वार तिरुमंजनम' का आयोजन किया गया था.  इस दौरान पूरे मंदिर, मूर्तियों और पूजा के बर्तनों को साफ किया गया. हर दिन बनेंगे 8 लाख लड्डू ब्रह्मोत्सव के दौरान मंदिर प्रशासन बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की उम्मीद कर रहा है. पवित्र रसोई, जिसे ‘पोटु’ कहा जाता है, जहां प्रतिदिन लगभग 3.5 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं वहां  ब्रह्मोत्सव के दौरान प्रतिदिन कम से कम 8 लाख लड्डू बनाने के लिए तैयार हो रही है. जानकारी के अनुसार, हर दिन एक लाख तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है. प्रशासन व्यवस्था भी सख्त मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं. 4 से 12 अक्टूबर तक सभी वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है. मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों को भीड़ नियंत्रित करने की खास ट्रेनिंग दी जा रही है. लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा जा रहा है. कौन तैयार करता है लड्डू तिरुपति मंदिर देश के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है. यहां हर साल करीब तीन करोड़ श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं यानी रोजाना करीब 82 हजार श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन करते हैं. करीब 3.50 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं. सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डू दिए जाते हैं. इस पूरी व्यवस्था का संचालन उस कमेटी के द्वारा किया जाता है, जिसका गठन हर दो साल में आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार करती है. इस कमेटी का नाम है- तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम्. बता दें कि हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि पिछली सरकार में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा था. इसी साल जून में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारी और नायडू ने एनडीए की सरकार बनाई. इस दावे के बाद देशभर की सियासत गर्मा गई थी. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था.   recent visitors 147

लव जिहाद से भारत देश को अस्थिर करने की साजिश और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा बताया : कोर्ट

बरेली आनंद बनकर लव जिहाद करने वाले मोहम्मद आलिम को आजीवन कारावास सुनाने के दौरान बरेली की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की। फास्ट ट्रैक प्रथम रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने माना कि लव जिहाद के पीछे विदेशी फंडिंग है। उन्होंने इसे पाकिस्तान, बांग्लादेश की तरह भारत देश को अस्थिर करने की साजिश और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा बताया है। कोर्ट ने अपने फैसले में लव जिहाद को भी परिभाषित किया है। फास्ट ट्रैक प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में लिखा है कि लव जिहाद का मुख्य उद्देश्य हिन्दुस्तान के खिलाफ एक धर्म विशेष के कुछ अराजक तत्त्वों द्वारा जनसांख्यिकीय युद्ध और अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत वर्चस्व स्थापित करना है। आसान शब्दों में कहें तो लव जिहाद समुदाय विशेष के पुरुषों द्वारा गैर समुदायों से जुड़ी महिलाओं को उनके धर्म में परिवर्तित करने के लिए प्रेम का ढोंग करके शादी करना है। लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण, उस धर्म विशेष के कुछ अराजक तत्व करते हैं, करवाते हैं, उसमें सहयोग करते हैं या फिर इस षड्यंत्र में शामिल होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कृत्य कुछ ही अराजक तत्व कराते हैं लेकिन पूरा धर्म विशेष बदनाम होता है। फैसले में उन्होंने इसके पीछे विदेशी फंडिंग की भी आशंका जताई है क्योंकि इस कृत्य के लिए बड़ी मात्रा में रकम की जरूरत होती है। फैसले में लव जिहाद को किया परिभाषित कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह प्रकरण लव जिहाद के जरिये अवैध धर्मांतरण का है। ऐसे में सबसे पहले यह जानना भी जरूरी है कि लव जिहाद क्या है? लव जिहाद में समुदाय विशेष के पुरुष शादी के माध्यम से अपने धर्म में परिवर्तन कराने के लिए व्यवस्थित रूप से दूसरे समुदाय की महिलाओं को निशाना बनाते हैं। समुदाय विशेष के ये लोग इन महिलाओं का धर्मांतरण कराने के लिए प्यार का दिखावा करके धोखे से शादी कर लेते हैं। इस केस में भी अभियुक्त मोहम्मद आलिम ने अपना नाम आनंद बताकर पीड़िता को धोखे में रखकर हिंदू रीति रिवाज से शादी कर उसके साथ बलात्कार किया। फिर उसकी फोटो व वीडियो बनाकर बदनाम करने की धमकी देकर कई बार बलात्कार किया। विदेशी फंडिंग से हो रहा लव जिहाद, देश के लिए खतरा कोर्ट ने फैसले में कहा है कि लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण होता है। अवैध धर्मांतरण रोकने को उप्र सरकार द्वारा उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 पारित किया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण किसी अन्य बड़े उद्देश्य की पूर्ति को कराया जाता है। यदि समय रहते भारत सरकार के द्वारा लव जिहाद के माध्यम से अवैध धर्मांतरण पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देश को भुगतने पड़ सकते हैं। कोर्ट ने माना धर्मांतरण के लिए किया लव जिहाद फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज रवि कुमार दिवाकर ने इसे लव जिहाद का केस मानकर सात मार्च 2024 को आरोप तय कर सुनवाई शुरू की थी। आरोप साबित करने को एडीजीसी क्राइम दिगम्बर पटेल ने पीड़िता छात्रा समेत छह गवाह पेश किए थे। कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलीलों को सुनकर धर्मांतरण के उद्देश्य से लव जिहाद करने के दोषी आलिम को आजीवन कैद की सजा सुनाई। धर्मस्थल में की गई शादी अवैध करार कोर्ट ने आलिम द्वारा पीड़िता से फतेहगंज पश्चिमी के धर्मस्थल में की गई शादी को भी अवैध करार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हिन्दू विवाह अधिनियम में दोनों का हिन्दू होना जरूरी है जबकि आलिम ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है। सिर्फ लव जिहाद और धर्मांतरण के इरादे से उसने युवती को फंसाने के लिए मांग में सिंदूर भर दिया, जिसे शादी नहीं माना जा सकता। प्रमुख सचिव व डीजीपी को भेजी आदेश की कॉपी कंप्यूटर छात्रा से लव जिहाद के मामले में देवरनिया पुलिस ने उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम में कार्यवाही नहीं की। फास्ट ट्रैक प्रथम के जज रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने इस केस में फैसले की प्रति मुख्य सचिव, डीजीपी पुलिस और एसएसपी बरेली को भेजकर लव जिहाद के मामलों में इस अधिनियम के तहत कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। ताकि भविष्य में विधि अनुसार कार्रवाई हो। recent visitors 113