पर्यटकों के लिए खुले सभी टाइगर रिजर्व, सभी टाइगर रिजर्व में 3-4 दिन के लिए वाहनों की बुकिंग लगभग फुल

भोपाल प्रदेश के सभी छह टाइगर रिजर्व के गेट एक अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खोल दिए गए। तीन महीने बाद टाइगर रिजर्व के गेट खुलने पर बड़ी संख्या में पर्यटक पार्क में बाघों के दीदार के लिए पहुंचे। सभी टाइगर रिजर्व में 3-4 दिन के लिए वाहनों की बुकिंग लगभग फुल हो चुकी है। MP के छह टाइगर रिजर्व पहले दिन प्रदेश के छह टाइगर रिजर्व के कोर जोन में 490 जिप्सियों से करीब 5 हजार पर्यटकों ने बाघों का दीदार है। इस बार जिप्सियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या भी और बढ़ने का अनुमान है। कोर जोन में बुकिंग न मिलने पर बफर जोन में लगभग 500 पर्यटक पर्यटन कर सकते हैं। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में पहले दिन से ही सभी जिप्सिंयां पर्यटकों से फुल रहीं। टाइगर रिजर्व क्षेत्र के रिजॉर्ट में पर्यटकों की बुकिंग को देखते हुए अगल कुछ दिनों तक बुकिंग फुल है। ऑनलाइन बुकिंग वे पर्यटक जिन्होंने ऑनलाइन बुकिंग नहीं कराई वो काउंटर पर करंट बुकिंग करा सकते है। टाइगर रिजर्व में दस-दस टिकट करंट बुकिंग के लिए होते हैं, जिसके लिए लंबी कतारें लगती हैं, जबकी ऑनलाइन बुकिंग MP online की ऑफीशियल साइट WWW.MPOnline.Gov.in से कर सकते हैं। recent visitors 105

प्रोफेसरों ने आज अपनी नौकरी पर लटकी तलवार से बचाव के लिए पंजाब सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

पंजाब पंजाब के सरकारी कॉलेजों को लंबे समय से संभाल रहे और पंजाब के जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा दे रहे गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों ने आज अपनी नौकरी पर लटकी तलवार से बचाव के लिए और सेवानिवृत्ति की उम्र तक नौकरी को सुरक्षित करने की मांग को लेकर गेस्ट फैकल्टी साझा फ्रंट पंजाब के बैनर तले एक दिन की सामूहिक छुट्टी लेकर सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक विरोध धरना दिया। फ्रंट के नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी यह जायज मांग जल्द पूरी नहीं की तो वे संघर्ष तेज करेंगे। उन्होंने बताया कि चन्नी सरकार ने 2021 में जाते-जाते वोट बैंक बढ़ाने की लालसा में 1091 प्रोफेसर और 67 लाइब्रेरियन, कुल 1158 के रूप में कॉलेजों के लिए प्रोफेसरों की पोस्ट निकाली थी। इन पोस्टों को 45 दिनों के अंदर भरने के लिए बहुत जल्दबाजी दिखाई। संक्षेप में कहें तो यह भर्ती कई तरह के संदेह के घेरे में आने के बाद माननीय हाईकोर्ट में इसके खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गईं। इसका परिणाम यह हुआ कि माननीय हाईकोर्ट ने इस भर्ती में कई खामियों को सही ठहराते हुए इसकी अधिसूचना को रद्द कर दिया। इसके बाद 1158 ने सरकार पर दबाव बनाकर अपना केस डबल बेंच पर लगाया। डबल बेंच में पंजाब सरकार द्वारा एलपीए दाखिल कर इस भर्ती को अंजाम तक पहुँचाया गया और कल रात बारह बजे से नए प्रोफेसरों को ज्वाइन कराया गया। गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों ने कहा कि 'हमें इन 1158 प्रोफेसरों से कोई विरोध नहीं है, कोई शिकायत नहीं है। लेकिन हमें सरकार की नीतियों से रोष है कि इतने लंबे समय से जिन शिक्षकों ने इन कॉलेजों को संभाला और कॉलेज में आए हर छात्र का जीवन संवारा, आज पंजाब सरकार नए लोगों को ज्वाइन कराके इन गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों को नौकरी से निकालने की योजना बना रही है।' इन प्रोफेसरों में कई रिटायरमेंट के करीब पहुँच चुके हैं, अब वे कहाँ जाएँ? आज तक ये प्रोफेसर नाममात्र की तनख्वाह पर काम कर रहे हैं। जब अब इन प्रोफेसरों के सम्मानजनक वेतन पाने का समय आया था, तो अब सरकार बाहर का रास्ता दिखा रही है। गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों की अधिकांश उम्र संघर्ष करते ही बीती है। आज पंजाब के सरकारी कॉलेजों में लंबे समय से शिक्षण सेवाएँ दे रहे गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों को नजरअंदाज कर नए प्रोफेसरों की भर्ती की जा रही है। जिसके कारण गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसर अपनी नौकरी हाथ से जाते हुए महसूस कर रहे हैं। इस अहसास में उनके लिए बहुत बड़ी पीड़ा है। अब ये प्रोफेसर अपमानित हो रहे हैं। आज बड़ी संख्या में मौजूद गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसरों ने कहा कि 'अगर मौजूदा पंजाब सरकार इन प्रोफेसरों की नौकरी को सुरक्षित नहीं करती और सम्मानजनक वेतन नहीं देती, तो गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसर संयुक्त फ्रंट द्वारा संघर्ष को अन्य संघर्षशील संगठनों के सहयोग से बड़े स्तर पर किया जाएगा। अगर जान की बाज़ी लगानी पड़ी, तो उसके लिए भी तैयार हैं। अगर किसी गेस्ट फैकल्टी सहायक प्रोफेसर का जान-माल का नुकसान होता है, तो इसकी ज़िम्मेदार सीधे तौर पर पंजाब सरकार होगी।' recent visitors 81

पंजाब सरकार ने चुनाव में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित की, इस फैसले का महिलाओं ने किया स्वागत

चंडीगढ़ पंजाब में होने वाली पंचायतों के दौरान पंजाब सरकार ने राज्य की महिलाओं के लिए बड़ा फैसला लेते हुए चुनाव में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित कर दी हैं। सरकार के इस फैसले का पंजाब की महिलाएं स्वागत कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि वे हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर रही हैं, ऐसे में पंजाब सरकार का यह कदम सराहनीय है। सूत्रों के मुताबिक अकेले जालंधर जिले में करीब 950 गांव हैं और इनमें से लगभग आधे गांवों में महिलाएं ही सरपंच बनेंगी। महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण मिलने से गांवों में महिला नेताओं की कमी महसूस होने लगी है। जालंधर ईस्ट ब्लॉक में 78 गांव हैं, जिनमें से 22 गांव एस.सी. समुदाय के लिए आरक्षित हैं और केवल 22 गांव एस.सी. महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए भी 17 गांव आरक्षित किए गए हैं। शेष 17 गांव जनरल वर्ग के लिए हैं। recent visitors 127

राहुल गांधी ने बहादुरगढ़ के फेमस पकौड़े के साथ रोड शो की शुरुआत, इशारों में राजेंद्र जून को जिताने की कही बात

बहादुरगढ़ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हरियाणा परिवर्तन यात्रा का आज दूसरा दिन है। हरियाणा परिवर्तन यात्रा का शुभारंभ आज देश की राजधानी दिल्ली से सटे बहादुरगढ़ से हुआ। राहुल गांधी यहां कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह जून के समर्थन में रोड शो करने पहुंचे थे। इस दौरान बहादुरगढ़ के पकौड़ा चौक पर पहुचने पहले से मौजूद हजारों की संख्या में लोगों ने गांधी का जोरदार स्वागत किया।   इसके आगे कांग्रेस नेता खुली गाड़ी में सवार होकर हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।  वहीं उन्होंने बहादुरगढ़ के मशहूर पकोड़ों का स्वाद भी चखा। रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा के मान सम्मान का प्रतीक पगड़ी पहनाकर राहुल गांधी का स्वागत किया। बहादुरगढ़ शहर के व्यस्ततम चौराहे पकौडा चौक से राहुल गांधी का रोड शो शुरू हुआ। भारी भीड़ के चलते राहुल की गाड़ी को भी सरक सरक कर ही आगे बढ़ना पड़ा। यहां राहुल गांधी को सुनने और देखने के लिए हजारों की संख्या में समर्थक पहुंचे हुए थे। नेता प्रतिपक्ष ने इशारों से राजेन्द्र जून को जिताने की अपील की। बहादुरगढ़ शहर के लाइनपार क्षेत्र, कानोंदा गांव और लड़रावन गांव से होते हुए राहुल गांधी की हरियाणा परिवर्तन यात्रा सोनीपत जिले में पहुंची। इससे पहले गांवों में ग्रामीणों ने राहुल का जोरदार स्वागत भी किया। recent visitors 130

हरियाणा में धान खरीद न होने से किसान लामबंद होने लगे, फैला आक्रोश, मंडी में ताला लगाने पर अड़े

कुरुक्षेत्र/करनाल हरियाणा में धान खरीद न होने से किसान लामबंद होने लगे हैं। सरकार की तरफ से धान खरीद शुरु होने का लेटर तो जारी हो गया, लेकिन हकीकत में अभी खरीद केंद्रों में ताला लटक रहा है। इसी को लेकर करनाल और कुरुक्षेत्र में किसानों ने प्रदर्शन किया। जिले के बीआर चौक पर जाम लगाकर सड़क पर बैठे किसानों ने कहा कि उन्हें बार-बार तारीख दी जा रही है, लेकिन खरीद केंद्र फसल नहीं ली जा रही है। उनका कहना है कि मंडियां भी धान के ढेर से भर चुकी हैं। कहीं ऐसा न हो फसल खराब हो जाए। वहीं करनाल में भारतीय किसान यूनियन के सैकड़ों किसानों ने सेक्टर 12 लघु सचिवालय गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। धान की खरीद न होने और कम  रेट पर धान की खरीद होने से परेशान किसानों द्वारा विरोध जताया गया। किसानों द्वारा धान की ट्राली लघु शौचालय गेट पर लाई गई और गेट के सामने ही धान  को सड़क के ऊपर गिराने  का ऐलान कर दिया। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा सरकारी बोली शुरू करने की बात की गई थी, परंतु आज की तारीख में भी खरीद नहीं हो रही है। किसानों ने कहा कि पहले जल्दी खरीद होने का आस्वासन दिया था। बाद दोबारा डेट आगे बढ़ा दी गई। वहीं 27 तारीख से धान की बोली करने की बात की गई थी, परंतु धान की खरीद सही दामों पर नहीं की जा रही। जिसको लेकर किसानों में रोष है, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राइस मिलरों के जरिए किसानों को बर्बाद करना चाहती है। राइस मिल सस्ते में धान खरीद रहे हैं जिससे उनको 500 से ₹700 का नुकसान हो रहा है। करनाल एडीसी ने किसानों के साथ मीटिंग की और कहा कि जल्दी ही बातचीत कर के बोली शुरू कर दी जाएगी। परन्तु किसानों ने धरना जारी रखने की बात की और कहा मंडियों के गेट को ताला लगाएंगे। recent visitors 80

स्मार्ट चिप कंपनी ने बंद किया काम, अब ड्रायविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के लिए बढ़ी मुसीबत, फिलहाल कोई विकल्प नहीं

ग्वालियर मध्य प्रदेश में अब ड्रायविंग लाइसेंस बनवाने से लेकर वाहनों के रजिस्ट्रेशन कार्ड को लेकर मुसीबत बढ़ गई है। इसे तैयार करने वाली स्मार्ट चिप कंपनी की बढ़ी अवधि 30 सितंबर भी खत्म हो गई। इस वजह से एक अक्टूबर से कंपनी ने काम बंद कर दिया। अब परिवहन विभाग के पास फिलहाल ड्रायविंग लाइसेंस व वाहनों के रजिस्ट्रेशन कार्ड बनाने का कोई विकल्प नहीं है। परिवहन विभाग ने पिछले दिनों स्मार्ट चिप कंपनी से अधिक संख्या में स्मार्ट कार्ड मंगवा लिए थे, जिससे कंपनी जब काम बंद कर दे तो कुछ दिन काम चल जाए। 22 साल से स्मार्ट चिप कंपनी प्रदेश में काम कर रही है। कंपनी से दिसंबर तक काम करने के लिए कहा गया था लेकिन उसने मना कर दिया। कंपनी के भुगतान को लेकर विवाद परिवहन विभाग के अनुसार इस मामले में शासन स्तर पर चर्चा चल रही है। परिवहन विभाग और स्मार्ट चिप कंपनी के इस विवाद में आवेदक सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। 2002 से नोएडा की स्मार्ट चिप कंपनी मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग के लिए काम कर रही थी। कंपनी के भुगतान को लेकर विवाद है। इससे पहले जून 2024 में कंपनी को तीन माह का एक्सटेंशन दिया गया था। इसी बीच सितंबर तक और काम करने की सहमति बनी। परिवहन विभाग ने इसी बीच यह भी दावा किया कि कंपनी के सेटअप व कर्मचारियों को परिवहन विभाग टेकओवर करेगा। इसको लेकर भी प्रयास किए जा रहे हैं। 2022 से दिया जा रहा था एक्सटेंशन स्मार्ट चिप कंपनी का कार्यकाल असल में 2022 में ही खत्म हो गया था जिसे बार-बार एक्सटेंशन दिया जा रहा था। परिवहन विभाग ने डीएल-रजिस्ट्रेशन कार्ड के लिए टेंडर किए थे, जिसमें तीन कंपनियां आईं, लेकिन अभी तक कुछ तय नहीं हो सका।ग्वालियर में पांच हजार कार्ड कुछ दिन पहले इसी आशंका में मंगवा लिए गए थे कि त्योहारी सीजन के कारण लोग परेशान होंगे, लेकिन यह स्थाई हल नहीं है। परिवहन अपर आयुक्त उमेश जोगा के अनुसार शासन स्तर पर विचार चल रहा है। recent visitors 89

सुजल-शक्ति अभियान: जल संरक्षण और सामुदायिक जागरूकता की मिसाल

भोपाल मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन अन्तर्गत "सुजल-शक्ति अभियान" चलाया जा रहा है, जिसकी थीम "जल हमारा–जीवन धारा" रखा गया है। यह अभियान 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2024 तक चलेगा। इसमें चिन्हित ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति को सतत् और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान का प्रमुख उद्देश्य, हर घर को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ जल संसाधनों के प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। इस अभियान में ग्रामीण जल प्रणालियों को बेहतर बनाना, जल गुणवत्ता की नियमित जांच करना और समुदायों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जल-जीवन मिशन में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों के सहयोग से अभियान संचालित किया जा रहा है। इसकी विशेष बात यह है कि इसमें सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे स्थानीय जल प्रबंधन को मजबूत किया जा सके और जल संकट से निपटने के लिए स्थायी समाधान खोजे जा सकें। दस्तक-धारा दिवस की गतिविधियाँ अभियान के चौथे दिन, 1 अक्टूबर 2024 को 'दस्तक-धारा दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके तहत समुदाय में जल संरक्षण, सतत जल आपूर्ति और सामुदायिक जिम्मेदारियों को लेकर जागरूकता के लिये गतिविधियां की जा रही हैं। दिन की शुरुआत जल कर, उसकी गणना, वास्तविक प्राप्ति, और 24×7 जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के वस्तुस्थिति की समीक्षा से हुई। चिन्हित ग्रामों में ‘हर घर जल गांव प्रमाणीकरण’ प्रक्रिया की जानकारी जुटाई गई। साथ ही, "हम, जल साथी" अभियान के तहत उन परिवारों की पहचान की गई जिन्होंने जल प्रबंधन चैंपियन के मानदंड पूरे किए हैं। इन परिवारों को हरे स्टिकर देकर सम्मानित किया गया, जिससे अन्य परिवार भी जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाने के लिये प्रेरित हों। सामुदायिक सहभागिता पर जोर दस्तक-धारा दिवस के लिये गठित टीम ने घर-घर जाकर परिवारों से संपर्क किया और उन्हें जल जीवन मिशन के लाभ और महत्व के बारे में बताया। परिवारों को नियमित जल प्राप्ति के लिए जल-कर के महत्व को समझाया गया और साथ ही, जल स्रोतों की सुरक्षा और टिकाऊ जल प्रबंधन के महत्व को भी साझा किया। अभियान में ग्राम जल और स्वच्छता समिति, स्वयं सहायता समूह, पंप ऑपरेटर, एनजीओ साझेदार, युवा स्वयं-सेवक, जन अभियान परिषद और एनएसएस सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। फॉलो-अप गतिविधियों के तहत, "हम जल साथी" स्टिकर प्राप्त परिवारों को के अलावा अन्य परिवारों को स्थायी जल प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ ही, जल कर एकत्र करने और उन परिवारों से संवाद किया गया जिन्हें इसके भुगतान में कठिनाई हो रही है। अभियान की सफलता की दिशा में कदम सुजल-शक्ति अभियान से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि जल संसाधनों के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। 'दस्तक-धारा दिवस' के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में की गई यह पहल आने वाले समय में जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।   recent visitors 134