आरएसएस ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर ‘चिंता’ व्यक्त की

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर शुक्रवार को ‘चिंता’ व्यक्त की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आग्रह किया। आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से भी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने और जान-माल की सुरक्षा के लिए उचित बंदोबस्त करने का आग्रह किया। अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ी हिंसा गौरतलब है कि बांग्लादेश में सोमवार को प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा देने के बाद से कई हिंदू मंदिरों, हिंदू समुदाय के लोगों के घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की गई है। नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर शेख हसीना सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद देश में अव्यवस्था का माहौल हो गया था। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मद यूनुस ने बृहस्पतिवार को हसीना की जगह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली। होसबाले ने एक बयान में विश्व समुदाय और भारत के सभी राजनीतिक दलों से हिंदू, बौद्ध और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों के साथ एकजुट होने का आग्रह किया, जो बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। RSS ने जताई चिंता उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के आंदोलन के दौरान हिंदू, बौद्ध तथा वहां के अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ हो रही हिंसा की घटनाओं पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गंभीर चिंता व्यक्त करता है।' होसबाले ने कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से उम्मीद है कि वह ऐसी घटनाओं को तुरंत रोकने के उपायों को सख्ती से लागू करे। केंद्र सरकार से की अपील उन्होंने कहा, 'इस गंभीर समय में विश्व समुदाय तथा भारत के सभी राजनीतिक दलों से भी अनुरोध है कि बांग्लादेश में प्रताड़ना के शिकार बने हिंदू, बौद्ध इत्यादि समुदायों के साथ एकजुट होकर खड़े हों। बांग्लादेश में व्याप्त हालात के मद्देनजर एक पड़ोसी मित्र देश होने के नाते उपयुक्त भूमिका निभाने का प्रयास कर रही भारत सरकार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आग्रह करता है कि बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध आदि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये हरसंभव प्रयास करे।' recent visitors 99

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के 100 पेट्रोल पंपों पर पीयूसी जांच के लिए आदेश, पेट्रोल भराने से पहले ध्यान दें!

नई दिल्ली अगले हफ्ते से वैध पीयूसी (प्रदू्षण नियंत्रण) प्रमाणपत्र के बिना वाहन चलाने वालों की खैर नहीं है। दिल्ली सरकार ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए 100 पेट्रोल पंपों पर पीयूसी जांच के लिए कैमरे लगाने व सॉफ्टवेयर इंस्टाल करने के लिए निजी कंपनी नवगति टेक को टेंडर आवंटित कर दिया है। कंपनी को 15 दिन के अंदर अपनी सिस्टम शुरू कर देना है। कंपनी को दिया गया पांच साल के लिए ठेका कंपनी को पांच साल के लिए ठेका दिया गया है। दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ( डीटीआईडीसी ) के इसी टेंडर को विस्तार देकर बाकी के 400 पेट्रोल पंपों पर भी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए जाएंगे। बता दें कि इसी कंपनी ने चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर पायलट प्रोजेक्ट भी किया था। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नवगति टेक को 15 दिनों के अंदर कम से कम 25 पेट्रोल पंपों पर पीयूसी जांच के लिए सिस्टम तैयार कर देने को कहा गया है। उन्होंने दावा किया कि कुछ ही दिनों में 100 पेट्रोल पंपों पर पीयूसीसी जांच का सिस्टम लग जाएगा। पीयूसी नहीं बनवाने पर कटेगा ई-चालान जिसकी अनुमानित लागत छह करोड़ रुपये है। पेट्रोल पंपों पर आने वाले वाहनों में वैध पीयूसीसी नहीं होने पर प्रदूषण जांच के लिए कुछ घंटों की मोहलत भी दी जाएगी और इस अवधि में पीयूसी नहीं बनवाने पर स्वत: ई-चालान कट जाएगा और इसकी सूचना मोबाइल पर भेज दी जाएगी। दिल्ली के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर पहले से कैमरे लगे हुए हैं और निजी कंपनी को पेट्रोल पंपों पर साफ्टवेयर इंस्टाल करना है तथा परिवहन सेवा पोर्टल पर जोड़ना भर है। इससे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप 25 पेट्रोल पंपों पर पीयूसीसी वैधता सत्यापन प्रणाली स्थापित की गई थी और इस दौरान करीब 24 प्रतिशत वाहन यहां पर वैध पीयूसीसी के बिना पाए गए थे। बता दें कि दिल्ली में 79 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। recent visitors 98

वक्फ संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त संसदीय कमेटी में ओवैसी और इमरान मसूद समेत होंगे 31 सदस्य, हुआ एलान

नई दिल्ली वक्फ अधिनियम (संशोधन) विधेयक के लिए संयुक्त संसदीय कमेटी (JPC) का एलान कर दिया गया है। इसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। असदुद्दीन ओवैसी, निशिकांत दुबे, तेजस्वी सूर्या, जगदंबिका पाल, इमरान मसूद और गौरव गोगोई समेत कुल 31 सदस्य होंगे। बता दें कि शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई। इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ (संशोधन) विधेयक- 2024 के लिए जेपीसी के 21 लोकसभा सदस्यों और राज्यसभा से 10 सदस्यों के नामों की सिफारिश करने को कहा। इसके बाद सदन ने प्रस्ताव पारित किया। बता दें कि गुरुवार को किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया था। विपक्ष के भारी हंगामे के बाद सरकार ने विधेयक को जेपीसी को भेजने की सिफारिश की थी। लोकसभा के वो 21 सांसद जो जेपीसी के सदस्य होंगे     जगदंबिका पाल     निशिकांत दुबे     तेजस्वी सूर्या     अपराजिता सारंगी     संजय जयसवाल     दिलीप सैकिया     अभिजीत गंगोपाध्याय     डीके अरुणा     गौरव गोगोई     इमरान मसूद     मोहम्मद जावेद     मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी     कल्याण बनर्जी     ए राजा     लावु श्री कृष्ण देवरायलू     दिलेश्वर कामत     अरविंद सावंत     सुरेश गोपीनाथ     नरेश गणपत म्हस्के     अरुण भारती     असदुद्दीन ओवैसी ये राज्यसभा सदस्य होंगे जेपीसी का हिस्सा     बृज लाल     डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी     गुलाम अली     डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल     सैयद नसीर हुसैन     मोहम्मद नदीम उल हक     वी विजयसाई रेड्डी     एम. मोहम्मद अब्दुल्ला     संजय सिंह     डॉ. वीरेंद्र हेगड़े   recent visitors 97

ऊर्जा मंत्री श्री तोमर कल ग्वालियर में करेंगे जन-सुनवाई

भोपाल   ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर शनिवार 10 अगस्त को आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु की जाने वाली जन-सुनवाई ग्वालियर नगर निगम के बिस्मिल भवन कांच मील स्थित जोन 5 के क्षेत्रीय कार्यालय पर करेंगे। मंत्री श्री तोमर शनिवार को प्रात: 8.30 बजे से 12 बजे तक नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय में जन-सुनवाई करेंगे। जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम व विद्युत वितरण कंपनी सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस जन-सुनवाई में उपस्थित रहकर जन-समस्याओं का निराकरण करने एवं आवश्यक व्यवस्थायें करने के निर्देश दिए गए हैं।   recent visitors 99

उत्तर-पूर्व सीरिया के अल-होल शरणार्थी शिविर में खोजबीन के दौरान हथियारों और सामान की खेप बरामद की, झंडे व सिक्के शामिल

सीरिया उत्तर-पूर्व सीरिया के अल-होल शरणार्थी शिविर में सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) ने हाल ही में खोजबीन के दौरान आईएस (इस्लामिक स्टेट) से जुड़े हथियारों और सामान की खेप बरामद की। इस खोज में AK47, हैंड ग्रेनेड, और रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड जैसे हथियार और आईएस के झंडे व सिक्के शामिल हैं। इस बीच उनको आईएस के झंडे और उनके द्वारा उपयोग किए गए सिक्के भी मिले हैं। सैनिकों ने तंबू के अंदर और बाहर छानबीन की, जिससे शिविर में रहने वाले लोग चौंक गए और कुछ बच्चे रोने लगे। महिलाओं से अपने घूंघट उठाने के लिए कहा आईएस के सक्रिय सेल के संभावित सदस्य, जिसमें यजीदी महिलाएं और बच्चे शामिल हो सकते हैं, को खोजने के लिए यह कार्रवाई की गई थी। सैनिक महिलाओं से अपने घूंघट उठाने के लिए कहा गया, क्योंकि कई यजीदी आईएस के प्रतिशोध से डरते हैं। बच्चों के रूप में उठाए गए अन्य लोगों ने चरमपंथियों के साथ इतने साल बिताए हैं कि उन्हें अब अपनी पुरानी ज़िंदगी याद नहीं है। बच्चों के रूप में उठाए गए अन्य लोगों ने चरमपंथियों के साथ इतने साल बिताए हैं कि उन्हें अब अपनी पुरानी ज़िंदगी याद नहीं है। इसके बाद समूह को एक सैन्य वाहन में भरकर शिविर की बैरिकेडिंग परिधि से बाहर ले जाया जाता है। यह पता लगाने के लिए कि वे वास्तव में कौन हैं, उन सभी की जांच की जाएगी। 24 वर्षीय यजीदी महिला, कोवन ने बताई अपनी कहानी इस दौरान एक 24 वर्षीय यजीदी महिला, कोवन, ने अपनी कहानी साझा की। उसने बताया कि उसे और उसके परिवार को आईएस ने बंदी बना लिया था, और उसने कई बार दुर्व्यवहार का सामना किया। उसकी बहनों और बड़े भाई को पहले ही रिहा किया जा चुका है, लेकिन उसके माता-पिता और सबसे छोटी बहन अभी भी लापता हैं। आईएस ने 2014 में इराक और सीरिया में हिंसा और कब्जे की शुरुआत की थी। उन्होंने उत्तरी इराक में सिंजर पर हमला किया, जो दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े यजीदी समुदाय का ऐतिहासिक घर है। यजीदी एक प्राचीन कुर्द-भाषी जातीय और धार्मिक समूह है, जो यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम के तत्वों को एकीकृत करता है। 6,000 से अधिक महिलाओं और बच्चों को बनाया गुलाम यजीदी समुदाय को 'ईश्वरविहीन' मानते हुए आईएस ने उन पर अत्याचार किया। हजारों यजीदी मारे गए और 6,000 से अधिक महिलाओं और बच्चों को गुलाम बना लिया गया। इस दौरान कई अन्य महिलाओं ने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की कहानियाँ सुनाईं, जिनमें बलात्कार और शोषण शामिल थे। कोवन ने आगे यह भी कहा कि चरमपंथियों ने हज़ारों पुरुषों और वृद्ध महिलाओं की हत्या कर दी, उनके शवों को सामूहिक कब्रों में दफना दिया। उन्होंने 6,000 से ज़्यादा महिलाओं और बच्चों को गुलाम बनाकर बेचा। कई महिलाओं के बलात्कार से बच्चे पैदा हुए थे जिन्हें उनके समुदायों ने "आईएस के बच्चे" के रूप में अस्वीकार कर दिया था। कुछ ने मुझे बताया कि आतंकी समूह ने उनके छोटे बच्चों का यौन शोषण किया था, जबकि अन्य को गर्भनिरोध दिया गया था ताकि वे गर्भवती न हों। गुप्त यज़ीदी गुलाम मार्च 2019 में अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना द्वारा पूर्वी सीरिया में बागौज पर फिर से कब्ज़ा करना सीरिया में IS की क्षेत्रीय हार का प्रतीक था। हज़ारों पुरुष चरमपंथियों को SDF द्वारा संचालित हिरासत केंद्रों में ले जाया गया, जहाँ वे अभी भी मुकदमे का इंतज़ार कर रहे हैं। हालांकि मार्च 2019 में बागौज पर गठबंधन सेनाओं की विजय के बाद आईएस की क्षेत्रीय हार का प्रतीक बना, लेकिन आईएस परिवार और उनके यजीदी गुलाम अब भी दो विशाल शिविरों में रखे गए हैं। IS परिवार – और उनके गुप्त यज़ीदी गुलाम – अभी भी उत्तर-पूर्वी सीरिया में दो विशाल शिविरों में रखे गए हैं, जिन्हें अधिकारी "टिक-टिक करते टाइम बम" के रूप में वर्णित करते हैं। इस बीच, लगभग 3,000 यज़ीदी महिलाओं के अभी भी लापता होने का अनुमान है, माना जाता है कि उन्हें बंदी बनाकर रखा गया है। IS लड़ाकों के सामने किया पेश 24 वर्षीय कोवन ने अपने बचावकर्ताओं को बताया कि जब उन्होंने सिंजर पर हमला किया तो IS ने उसे उसके परिवार के साथ बंदी बना लिया। वह सिर्फ़ 14 साल की थी, चार बहनों में सबसे बड़ी और उसका एक बड़ा भाई था। चरमपंथी समूह के ढहने के बाद उसे अल होल कैंप में ले जाया गया, जहाँ, उसका कहना है, IS परिवारों ने उसे यज़ीदी होने के कारण प्रताड़ित किया। पकड़े जाने के कुछ दिनों के भीतर, कोवन को IS लड़ाकों के सामने पेश किया गया, जिन्होंने उसे खरीदा और फिर उसे बलात्कार और मारपीट के लिए घर ले गए। कई बार बेचे जाने के बाद, उसे मोसुल से लेकर रक्का और फिर बागौज तक आईएस के इलाके में ले जाया गया। उसे खरीदने वाला पहला आदमी उसकी उम्र से दोगुना था। उसे मासिक धर्म भी शुरू नहीं हुआ था। जब वह अपने साथ हुए भयानक दुर्व्यवहार को याद करती है, तो उसकी आवाज़ में गुस्सा और दुख का मिश्रण होता है। जब उसने भागने की कोशिश की, तो वे उसे बालों से पकड़कर मार डाले गा । उसने कहा आगे कहा कि अगर मैंने उसकी मर्जी के मुताबिक काम नहीं किया तो वह मुझे मार देता और अपने घर के पिछवाड़े में दफना देता। कोवन की आज़ादी कड़वी-मीठी है, और उसके आघात से उबरने में वर्षों लग सकते हैं।  recent visitors 89

समाज कल्याण के क्षेत्र में संचालित अनुदान प्राप्त संस्थाओं की होगी ऑडिट : मंत्री श्री कुशवाह

भोपाल सामाजिक न्याय दिव्यंजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रदेश में दिव्यंजन कल्याण, नशा मुक्ति तथा वरिष्ठजनों के लिए संचालित आश्रमों व संस्थाओं की गुणवत्ता की ऑडिट करायी जा रही है। निरीक्षण ऑडिट रिर्पोट के आधार पर ही भविष्य में अनुदान ओर अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। यह ऑडिट रिपोर्ट प्रत्येक तिमाही में तैयार कराई जाएगी। श्री कुशवाह ने ऑडिट के सभी बिंदुओं पर प्राप्त रिपोर्ट का विस्तृत एनालिसिस के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा है कि भारत सरकार और राज्य सरकार सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में संचालित विभिन्न शासकीय और अशासकीय संस्थाओं को आर्थिक और तकनीकी सहयोग प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं पर गुणवत्ता नियंत्रण राज्य शासन की जिम्मेदारी है। सामाजिक न्याय विभाग द्वारा संस्थानों की गुणवत्ता ऑडिट करने का निर्णय लिया गया है। आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यंगिता सशक्तिकरण डॉ. आर आर भोसले ने बताया कि प्रदेश में दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में 36 राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त संस्थाओं तथा 54 केंद्रीय और जिला निराश्रित नीति से अनुदान प्राप्त संस्थाओं की गुणवत्ता ऑडिट कराई जा रही है इसी प्रकार वरिष्ठजनों के लिए संचालित 79 अशासकीय की संस्थाओं तथा नशामुक्ति अभियान के अंतर्गत संचालित केंद्रीय अनुदान प्राप्त अशासकीय 13 नशामुक्ति सह पुनर्वास केंद्र, सात आउट रीच एंड ड्राप इन सेंटर, तीन कम्यूनिटी बेस्ड पियरलेड सेंटर का भी ऑडिट कराया जा रहा है। ऑडिट के लिए गठित टीम का दायित्व है कि वह सभी केंद्रों पर साफ़ सफाई, भोजन व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा, फर्नीचर ओर अन्य सामग्री की गुणवत्ता, मनोरंजन, खेलकूद सुविधाओं, ओर ऑफिस रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त की करेंगी। इसके आधार पर संस्थाओं की ग्रेडिंग की जाएगी। अब यह ऑडिट प्रत्येक तिमाही में की जाएगी, उन्होंने बताया कि 50 प्रतिशत से कम अंक पाने वाली संसथाओ के विरुद्ध एक्ट के प्रावधानों के तहत कर्रवाई की जायगी।   recent visitors 90

अब जिला प्रशासन के साथ-साथ सांसद व विधायकों की राय भी ली जाएगी, तय होंगे मप्र बोर्ड परीक्षा केंद्र

भोपाल मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा 25 फरवरी से शुरू होगी। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने समय-सारिणी और केंद्र निर्धारण को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है। इसमें निर्देशित किया गया है कि इस बार परीक्षा केंद्र के निर्धारण से पहले जिला प्रशासन के साथ-साथ सांसद व विधायकों की राय भी ली जाएगी। साथ ही 250 कम क्षमता वाले स्कूल को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। इसके अलावा लगातार तीन साल बने परीक्षा केंद्र के दौरान सामूहिक नकल के प्रकरण सामने आए, तो उस स्कूलों को केंद्र नहीं बनाया जाएगा। साथ ही परीक्षा केंद्र बनाने के लिए तय सीमा भी तय कर दी गई है। निर्देश दिए गए हैं कि जिन स्कूलों में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, उनके नजदीकी स्कूलों को ही परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा।   शहरी क्षेत्रों में पांच किमी से ज्यादा व ग्रामीण क्षेत्रों में 10 किमी से ज्यादा दूरी नहीं होना चाहिए। विषम परिस्थितियों में ज्यादा दूरी के परीक्षा केंद्र बनाने पर कारण भी बताना होगा। जिले को 30 सितंबर तक परीक्षा केंद्र की सूची माशिम को भेजनी है। बता दें, कि मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं की परीक्षा में करीब 18 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे।इसके लिए करीब पौने चार हजार परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। 30 नवंबर तक अंतिम सूची जारी करेगा माशिमं 30 नवंबर तक परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी करेगा। माशिमं के परीक्षा केंद्रों के जिला स्तर पर निर्धारण के बाद जिला योजना समिति से अनुमोदन करवाया जाएगा। इसके लिए 30 अगस्त तक की तारीख तय की गई है।माशिमं की जारी समय-सीमा के अनुसार 10 अगस्त तक परीक्षा केंद्रों का भौतिक सत्यापन करना होगा। परीक्षा केंद्रों का समिति द्वारा चयन 20 अगस्त तक करना है। चयन परीक्षा केंद्रों का प्रकाशन कर दावे-आपत्ति प्राप्त करने की समय-सीमा 30 अगस्त तक रहेगी। दावे एवं आपत्ति का निराकरण जिला योजना समिति से अनुमोदन प्राप्त करने की तिथि 24 सितंबर तक रहेगी। मंडल को अनुमोदित केंद्र चार्ट की सूची 30 सितंबर तक रहेगा। केंद्र नहीं होने पर फोटोकापी मशीन लौटानी होगी अगर किसी स्कूल के खिलाफ अनिमिततता के मामले सामने आए है, तो ऐसे स्कूल को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा। पिछले साल के बने केंद्रों को वर्ष 2025 की परीक्षा में प्रस्तावित नहीं किया जाता है, तो उसका भी कारण बताना होगा। स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए सरकारी स्कूल को ही परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। अगर किसी केंद्र को इस साल परीक्षा केंद्र नही बनाया जाता है, तो उन्हें फोटोकापी मशीन व कंप्यूटर नवीन परीक्षा केंद्रों को देना होगी। इसकी जिम्मेदारी डीईओ को दिया गया है। recent visitors 111