भारत ने शेख हसीना के सत्ता में दोबारा वापसी का समर्थन किया- गेश्वर रॉय

नई दिल्ली बांग्लादेश में छात्र आंदोलन को लेकर फैली अशांति के बीच शेख हसीना प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देकर भारत चली आई थीं और फिलहाल यही हैं. इसे लेकर उनकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) भारत पर भड़क गई है. पार्टी ने कहा है कि अगर भारत शेख हसीना की मदद करेगा तो उससे सहयोग जारी रखना मुश्किल हो जाएगा. बीएनपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री रह चुके गेश्वर रॉय ने बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी भारत और बांग्लादेश के बीच पारस्परिक सहयोग का समर्थन करती है. लेकिन, "अगर आप हमारी दुश्मन की मदद करेंगे तो हमारे लिए पारस्परिक सहयोग को जारी रखना मुश्किल हो जाएगा.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने शेख हसीना के सत्ता में दोबारा वापसी का समर्थन किया था. गेश्वर रॉय ने आगे कहा, 'शेख हसीना को भारत ढो रहा है… भारत और बांग्लादेश के लोगों को एक-दूसरे से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन क्या भारत को पूरे देश की जगह एक पार्टी को बढ़ावा देना चाहिए?' शेख हसीना फिलहाल भारत में रह रही हैं लेकिन वो कहां जाएंगी, इसे लेकर असमंजस बरकरार है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वो भारत में ही रहेंगी, किसी दूसरे देश से शरण की मांग करेंगी या फिर वापस बांग्लादेश लौट जाएंगी. इस बीच उनके बेटे सजीब वाजेद ने हाल ही में कहा था कि बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली होते ही उनकी मां वापस वतन लौट जाएंगी. बांग्लादेश से भागने के बाद शेख हसीना का कोई बयान सामने नहीं आया है, हालांकि, उनके बेटे सजीब वाजेद लगातार मीडिया से बात कर रहे हैं. उन्होंने अपनी मां की सुरक्षा करने के लिए भारत सरकार का धन्यवाद किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी कृतज्ञता जताई है. साथ ही उन्होंने उन रिपोर्ट्स को भी खारिज किया है जिसमें कहा जा रहा है कि शेख हसीना ने ब्रिटेन में राजनीतिक शरण की मांग की है. बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का गठन इस बीच गुरुवार शाम को बांग्लादेश के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ले ली है. उन्हें राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शपथ दिलाई. शपथ लेने के बाद यूनुस ने कहा कि मैं संविधान की रक्षा करूंगा, उसका समर्थन करूंगा और उसका संरक्षण करूंगा. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में 16 लोग शामिल हैं जिनमें हसीना के विरोधी छात्र नेता नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद भी हैं. दोनों ही छात्र नेता बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे थे. प्रधानमंत्री मोदी ने दी मोहम्मद यूनुस को बधाई मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का मुखिया चुने जाने पर पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी है. साथ ही प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस को उनकी नई जिम्मेदारी संभालने पर मेरी शुभकामनाएं. हम उम्मीद करते हैं कि हिंदुओं और अन्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और स्थिति जल्द से जल्द सामान्य होगी. भारत शांति, सुरक्षा और विकास के लिए दोनों देशों के लोगों की साझा आकांक्षाओं को पूरा करने की खातिर बांग्लादेश के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है.'   recent visitors 149

मंत्री तोमर शनिवार को प्रात: 8.30 बजे से 12 बजे तक नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय में जन-सुनवाई करेंगे

ग्वालियर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर शनिवार 10 अगस्त को आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु की जाने वाली जन-सुनवाई ग्वालियर नगर निगम के बिस्मिल भवन कांच मील स्थित जोन 5 के क्षेत्रीय कार्यालय पर करेंगे। मंत्री तोमर शनिवार को प्रात: 8.30 बजे से 12 बजे तक नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय में जन-सुनवाई करेंगे। जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम व विद्युत वितरण कंपनी सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस जन-सुनवाई में उपस्थित रहकर जन-समस्याओं का निराकरण करने एवं आवश्यक व्यवस्थायें करने के निर्देश दिए गए हैं।   recent visitors 99

गर्भवती महिलाओं की नि:शुल्क जाँच में निजी भागीदारी के प्रदेशव्यापी अभियान का किया शुभारंभ

भोपाल उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने श्यामशाह मेडिकल कालेज रीवा से प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जाँच अभियान का शुभारंभ किया। उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री जननी सुरक्षा कार्यक्रम के तहत हर माह की 9 और 25 तारीख को गर्भवती महिलाओं की नि:शुल्क जाँच के शिविर सभी अस्पतालों में लगाए जाएंगे। इनमें गर्भवती महिलाओं को जाँच, उपचार, दवा और आने-जाने की सुविधा नि:शुल्क दी जाएगी। कार्यक्रम में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से शामिल मण्डला और रतलाम जिले के हितग्राहियों से उप-मुख्यमंत्री ने संवाद किया। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के समस्त अस्पताल और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन शामिल हुए। उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मातृ-मृत्यु दर और शिशु-मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जननी सुरक्षा कार्यक्रम के तहत हर गर्भवती महिला को नि:शुल्क जाँच, उपचार और दवा की सुविधा दी जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत यदि शासकीय अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा नहीं है तो गर्भवती महिला की निजी सोनोग्राफी केन्द्र में सोनोग्राफी कराई जाएगी। इसकी राशि का भुगतान सरकार करेगी। सरकारी अस्पताल से जारी वाउचर से महिला सात दिन में कभी भी अपनी जाँच सोनोग्राफी सेंटर में करा सकती है। सही समय में रिस्क चिन्हांकन से उचित निदान कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जायेगा। मातृ-मृत्यु दर को नियंत्रित करने में जागरूकता और नागरिकों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि मातृ-मृत्यु दर और शिशु-मृत्यु दर नियंत्रित करने के प्रयासों में निजी अस्पतालों की भागीदारी देने वाला मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य है। गर्भवती महिलाओं की निजी सोनोग्राफी केन्द्रों में जाँच के लिए 15 करोड़ रुपए का प्रावधान कर दिया गया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट के पदों पर शीघ्र होगी भर्ती उप-मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए बजट की कोई कमी नहीं है। शीघ्र ही स्त्री रोग विशेषज्ञ तथा रेडियोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती की जाएगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की पदस्थापना तथा आवश्यक उपकरण स्थापित करके सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में जिला अस्पताल के समकक्ष स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएंगी। सुपर स्पेशलिटी हास्पिटल रीवा के लिए दूसरी कैथलैब मशीन शीघ्र ही उपलब्ध हो जाएगी। 20 करोड़ की लागत से कैंसर क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए भवन और 29 करोड़ लागत की लायनेक मशीन की व्यवस्था उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि कैंसर क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए रीवा में 20 करोड़ की लागत से भवन बनाया जा रहा है। इसमें कैंसर के उपचार के लिए 29 करोड़ रुपए की लायनेक मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। डॉक्टरों के साथ-साथ पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सों की भी भर्ती की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के प्रयासों से गरीब से गरीब रोगियों के लिए भी एयर एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध हो गई है। उप-मुख्यमंत्री ने प्रसव-पूर्व जाँच पुस्तिका तथा पोस्टर का विमोचन किया। संयुक्त संचालक डॉ अर्चना मिश्रा ने बताया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को दवा, जाँच और आने-जाने की नि:शुल्क सुविधा दी जा रही है। जरूरत होने पर नि:शुल्क रक्ताधान का भी प्रावधान है। नगर निगम के अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, रेडक्रास के समिति के अध्यक्ष डॉ प्रभाकर चतुर्वेदी, मेडिकल कालेज के डीन डॉ सुनील अग्रवाल, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य डॉ केएल नामदेव, संजय गांधी हास्पिटल के अधीक्षक डॉ राहुल मिश्रा तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।   recent visitors 108

15 अगस्त के दिन छोटे और बड़े तालाब की हर वोट पर तिरंगा लहराया जाएगा, तिरंगा यात्रा भी निकाली जाएगी.

भोपाल स्वतंत्रता दिवास यानी  15 अगस्त की शाम को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दोनों ताल छोटा और बड़ा तालाब राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगे नजर आएंगे. छोटे और बड़े तालाब की हर वोट पर तिरंगा लहराया जाएगा. इसके साथ ही राजधानी भोपाल में तिरंगा यात्रा भी निकाली जाएगी. इस तिरंगा आयोजन को लेकर खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने बैठक आयोजित कर अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए हैं.  भोपाल के तात्या टोपे स्टेडियम स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में तिरंगा यात्रा की तैयारियों के सम्बंध में मंत्री सारंग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के खेल अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने सभी जिला खेल अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कहा कि जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर 313 ब्लॉक में भी तिरंगा यात्रा निकले. इसमें खेल से जुड़े शासकीय और अशासकीय व्यक्ति, स्पोट्र्स क्लब, सोसायटी, खिलाड़ी, कोच, अकादमी सभी शामिल हो. मंत्री सारंग ने कहा कि 15 अगस्त की शाम को भोपाल के बड़े और छोटे तालाब में वॉटर स्पोर्टस खिलाड़ियों के माध्यम से हर वोट पर तिरंगा फहराकर देश प्रेम की भावना को जाग्रत किया जाएगा. उन्होंने इसमें सभी वॉटर स्पोर्टस के खिलाड़ियों को जोड़ने की बात कही. पुलिस बैंड भी होगा शामिल इस दौरान देशभक्ति का म्यूजिक/रीदम भी गूंजे. उन्होंने कहा कि ऐसा विहंगम दृश्य दिखे, जिससे सभी अभिभूत हों. मंत्री सारंग ने कहा कि तिरंगा यात्रा में सभी जिलों में पुलिस बैंड सबसे आगे चलें. उन्होंने ग्रामीण युवा समन्वयक, समाज सेवी संस्था,जनअभियान परिषद, एनसीसी, स्काउट गाईड, एनएसएस सभी के साथ तिरंगा यात्रा के लिये समन्वय स्थापित करने को कहा. मंत्री सांरग ने जिले के शहीद स्मारक जैसे स्थलों से यात्रा शुरू और समाप्त करने को कहा. उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों से यात्रा शुरू न करने की स्थिति में आधे घंटे पहले वहां आवश्यक रूप से पुष्पांजलि अर्पित करें. recent visitors 114

मुख्यमंत्री आज लाड़ली बहना योजना की हितग्राही बहनों के खातों में 1250 रूपये की राशि अंतरित करेंगे

CM डॉ. यादव विजयपुर से लाड़ली बहनों के खाते में करेंगे राशि अंतरित मुख्यमंत्री सावन माह में बहनों के खाते में डालेंगे 1250 और रक्षाबंधन नेग के 250 रूपये मुख्यमंत्री आज लाड़ली बहना योजना की हितग्राही बहनों के खातों में 1250 रूपये की राशि अंतरित करेंगे मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र के कार्यक्रमों में होंगे शामिल सभी ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों में होगा आभार सह-उपहार कार्यक्रम भोपाल प्रदेश की लाड़ली बहनें रक्षाबंधन के पहले दोगुनी खुशियाँ मनाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10 अगस्त को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की हितग्राही बहनों के खातों में 1250 रूपये की राशि अंतरित करेंगे। साथ ही रक्षाबंधन के उपहार स्वरूप लाभार्थी महिलाओं के खातों में 250 रूपये की उपहार (नेग) राशि अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्योपुर जिले के विजयपुर और टीकमगढ़ में 10 अगस्त को आयोजित रक्षाबंधन पूर्व लाड़ली बहना हितग्राहियों के लिए आभार सह उपहार कार्यक्रम में यह राशि अंतरित करेंगे। साथ ही लाभार्थी महिलाओं को आभार-पत्र और उपहार देगें और राखी बंधवाएगें। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत 10 अगस्त को प्रदेश की सभी 23 हजार 11 ग्राम पंचायतों एवं 416 नगरीय निकायों (नगर निमग, नगर पालिका एवं नगर पंचायत) में भी वृहृद स्तर पर आभार सह उपहार कार्यक्रम होंगे। राज्य सरकार के मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में होने वाले आभार सह-उपहार कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में होने वाले कार्यक्रम की थीम "रक्षाबंधन और सावन उत्सव" पर केन्द्रित है। इसके अतिरिक्त "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान में पौध-रोपण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होगें। इसमें सहभागियों को शासकीय हितग्राहीमूलक योजनाओं की जानकारी भी साझा करेंगे।   recent visitors 107

Waqf Amendment Bill को लेकर JPC का गठन, ओवैसी समेत इन 31 सांसदों को जगह

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन अधिनियम बिल 2024 के लिए आज जेपीसी के सदस्यों के नाम का ऐलान कर दिया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कुल 31 सदस्यों के नाम का ऐलान किया।  लोकसभा में बहस के बाद बिल को जेपीसी को भेजने का फैसला किया गया था। लोकसभा के 21 सदस्यों के अलावा राज्यसभा के भी 10 सदस्यों के नाम जेपीसी में शामिल किए गए हैं। सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को विधेयक पेश किया। विपक्षी दलों ने संक्षिप्त चर्चा के दौरान विधेयक की कड़ी आलोचना की। उन्होंने वक्फ कानून में प्रस्तावित बदलावों को 'असंवैधानिक', 'अल्पसंख्यक विरोधी' और 'विभाजनकारी' बताया। विधेयक का उद्देश्य 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन करना है। इसमें वक्फ संस्थानों के प्रशासन और संपत्तियों की देखभाल के नियमों में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव किया गया है। आइए जानते हैं कि अभी वक्फ कानून में क्या है? विधेयक में क्या संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं और ये परिवर्तन महत्वपूर्ण क्यों हैं? वक्फ प्रॉपर्टी क्या होती है? वक्फ मुसलमानों द्वारा धार्मिक, धर्मार्थ या निजी उद्देश्यों के लिए दी गई व्यक्तिगत संपत्ति होती है। संपत्ति के लाभार्थी भिन्न हो सकते हैं, लेकिन संपत्ति का स्वामित्व अल्लाह के पास माना जाता है। वक्फ एक डीड या डॉक्युमेंट के जरिए या मौखिक रूप से बनाया जा सकता है। साथ ही, किसी संपत्ति को तब भी वक्फ माना जा सकता है यदि इसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। एक बार जब किसी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया जाता है तो उसका स्वरूप हमेशा के लिए बदल जाता है और उसे उलटा नहीं जा सकता है। मतलब अगर कोई संपत्ति वक्फ घोषित हो गई तो वह हमेशा के लिए वक्फ ही रहेगी, वह किसी भी सूरत में अपने पुराने मालिक के पास नहीं जा सकती। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन कैसे होता है? भारत में वक्फ संपत्तियों को वक्फ अधिनियम, 1995 से मैनेज किया जाता है। हालांकि, भारत में 1913 से वक्फ के शासन के लिए एक कानूनी व्यवस्था रही है, जब मुस्लिम वक्फ मान्यकरण अधिनियम लागू हुआ था। इसके बाद मुस्लिम वक्फ अधिनियम, 1923 आया। स्वतंत्रता के बाद केंद्रीय वक्फ अधिनियम, 1954 पारित किया गया था, जिसे अंततः वक्फ अधिनियम, 1995 से बदल दिया गया था। वक्फ एक्ट, 1995 में आखिरी संशोधन 2013 में हुआ था। तब वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण के लिए दो साल तक की कारावास की सजा का प्रावधान किया गया था। साथ ही, वक्फ संपत्ति की बिक्री, उपहार, विनिमय, बंधक या हस्तांतरण को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था। वक्फ कानून एक सर्वेक्षण आयुक्त की नियुक्ति का प्रावधान करता है जो स्थानीय जांच करके, गवाहों को बुलाकर और सार्वजनिक दस्तावेजों की मांग करके सभी वक्फ संपत्तियों की सूची तैयार करता है। मुतवल्ली और ट्रिब्यूनल को समझें वक्फ संपत्ति के प्रबंधन के लिए कानून में मुतवल्ली की व्यवस्था है। मुतवल्ली एक पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करता है। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन उसी तरह से किया जाता है जैसे भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के तहत न्यासों के अधीन संपत्तियों का प्रबंधन किया जाता है। वक्फ एक्ट में कहा गया है कि वक्फ संपत्तियों से संबंधित किसी भी विवाद का फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल करेगा। ट्रिब्यूनल का गठन राज्य सरकार करती है। इसमें तीन सदस्य होते हैं- एक अध्यक्ष जो जिला, सत्र या सिविल न्यायाधीश, प्रथम श्रेणी से कम रैंक का राज्य न्यायिक अधिकारी नहीं होता है; दूसरा राज्य सिविल सेवा का एक अधिकारी; और तीसरा शरीयत का ज्ञान रखने वाला व्यक्ति। कानून में राज्यों में वक्फ बोर्ड, वक्फ परिषद, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओज) के गठन और नियुक्ति के प्रावधान भी हैं। वक्फ बोर्ड में शामिल सीईओ और सांसद मुस्लिम समुदाय से होने चाहिए। वक्फ बोर्ड की शक्तियां वक्फ बोर्ड राज्य सरकार के अधीन एक निकाय है, जो पूरे राज्य में वक्फ संपत्तियों के संरक्षक के रूप में काम करता है। अधिकांश राज्यों में शिया और सुन्नी समुदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं। देश की लगभग सभी प्रमुख मस्जिदें वक्फ संपत्तियां हैं और राज्य के वक्फ बोर्ड के अधीन हैं। वक्फ बोर्ड का नेतृत्व अध्यक्ष करता है और इसमें राज्य सरकार मुस्लिम विधायकों और सांसदों, राज्य बार काउंसिल के मुस्लिम सदस्यों, इस्लामी धर्मशास्त्र के मान्यता प्राप्त विद्वानों और 1 लाख रुपये या उससे अधिक की वार्षिक आय वाले वक्फ के मुतवल्ली में से एक या दो को नामित करती है। वक्फ बोर्ड को कानून के तहत संपत्ति का प्रशासन करने और वक्फ की खोई हुई संपत्तियों की वसूली के उपाय करने और बिक्री, उपहार, बंधक, विनिमय या पट्टे के माध्यम से वक्फ की किसी भी अचल संपत्ति के हस्तांतरण को मंजूरी देने की शक्तियां प्राप्त हैं। हालांकि, मंजूरी तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि वक्फ बोर्ड के कम से कम दो-तिहाई सदस्य ऐसे लेन-देन के पक्ष में मतदान न करें। वक्फ कानून में क्या-क्या बदलने का प्रस्ताव, लिस्ट देख लीजिए विधेयक में वक्फ कानून के मौजूदा ढांचे को काफी हद तक बदलने के प्रस्ताव किए गए हैं। प्रस्तावित संशोधन में वक्फ को नियंत्रित करने की शक्ति को बोर्ड और ट्रिब्यूनल से हटाकर राज्य सरकारों को देने की बात कही गई है। अभी वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल में बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय के सदस्य होते हैं। विधेयक में वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलने का भी प्रस्ताव है। नया नाम एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 करने का प्रस्ताव है। विधेयक के जरिए वक्फ एक्ट में मुख्य रूप से तीन बदलावों के प्रस्ताव किए गए हैं… ➤ पहला, विधेयक की धारा 3ए में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति तब तक कोई संपत्ति को वक्फ को दान नहीं कर सकता जब तक कि वह संपत्ति का वैध मालिक न हो और ऐसी संपत्ति को हस्तांतरित या समर्पित करने के लिए न सक्षम हो। इस प्रावधान से वैसी संपत्तियों पर वक्फ पर कब्जे रुकेंगे जो किसी के नाम से दर्ज नहीं हैं। ➤ दूसरा, विधेयक की धारा 3सी(1) में कहा गया है कि 'इस अधिनियम के प्रारंभ से पहले या बाद में वक्फ संपत्ति के रूप में पहचानी … Read more

बांग्लादेश में मुसलमानों के हमलों से जान-माल की रक्षा के लिए हिंदू भारत आना चाहते हैं, एडीजी को नवगठित समिति का अध्यक्ष बनाया

नई दिल्ली  बांग्लादेश में अराजकता की स्थिति से पड़ोसी देश होने के नाते भारत को भारी चिंता है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की घटनाएं रुह कंपा रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांग्लादेश के हालात पर नजर रखने के लिए एक समिति का गठन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि बीएसएफ के ईस्टर्न कमांड के एडीजी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। शाह ने लिखा, 'मोदी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा स्थिति की निगरानी के लिए समिति गठित की। सरकारी समिति भारतीय नागरिकों, हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश में अधिकारियों के संपर्क में रहेगी। भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति की निगरानी के लिए सरकारी समिति का नेतृत्व बीएसएफ की पूर्वी कमान के एडीजी करेंगे।' बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद स्थितियां काफी गंभीर हो गई हैं। कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ अल्पसंख्यक हिंदुओं के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर हमले कर रहे हैं। कट्टरपंथियों के हमले में कई निर्षोद हिंदू मारे जा चुके हैं। जान बचाने के लिए भारी संख्या में हिंदू भारत में शरण लेने को सीमा पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में पड़ोसी देश होने के नाते भारत के लिए बड़ा सरदर्द पैदा हो गया है। भारत के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे तो कैसे? दूसरी तरफ सीमा पर पहुंच रहे हिंदुओं और घुसपैठ करना चाह रहे कट्टरपंथी मुसलमानों के बीच फर्क करे तो कैसे? recent visitors 102