पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले सात दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट, कई जगह आंधी तूफान व बिजली कड़कने का भी अलर्ट

लखनऊ उत्तर भारत समेत देशभर के विभिन्न हिस्सों में अगले सात दिनों तक मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, कई जगह आंधी तूफान व बिजली कड़कने का भी अलर्ट है। ऐसे में लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। मौसम विभाग ने पूर्वोत्तर और पश्चिमी हिमालयी इलाकों में अगले सात दिनों तक बहुत भारी बारिश होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले सात दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट है। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश आदि में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी राजस्थान में एक हफ्ते तक बारिश होगी। वहीं, हिमाचल प्रदेश में 9 और 10 अगस्त, उत्तराखंड में 11, पूर्वी राजस्थान में 9-11 अगस्त को बहुत भारी बारिश होने जा रही है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 9-15 अगस्त, हरियाणा, चंडीगढ़ में 9-12 अगस्त, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 9-13 अगस्त, जम्मू कश्मीर में 10, 11, 14 और 15 अगस्त को मूसलाधार बरसात होने जा रही है। मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, कोंकण, गोवा, गुजरात में एक हफ्ते तक तेज बारिश जारी रहने वाली है। इसके अलावा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र, कच्छ में भी हफ्तेभर तक बारिश जारी रहेगी। पूर्वी मध्य प्रदेश में 9, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 10 अगस्त को तेज बारिश होगी। इसके अलावा, पूर्वोत्तर राज्यों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में 9 और 10 अगस्त, मेघालय में 9 और बिहार में 10 अगस्त को बहुत भारी बारिश होगी। वहीं, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, बिहार में भी 9-15 अगस्त, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 9-11 अगस्त, ओडिशा, झारखंड में 9 और 10 अगस्त और 13-15 अगस्त को भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, दक्षिण भारत में भी आने वाले दिनों में तेज बारिश जारी रहने वाली है। मौसम विभाग के अनुसार, तमिलनाडु में 9-13 अगस्त, केरल में 11-14 अगस्त, तटीय कर्नाटक में 9 अगस्त को बहुत भारी बारिश होगी। recent visitors 112

केशव मौर्य पार्टी के सदस्य भी हैं, डिप्टी सीएम होने से पार्टी से सम्बन्ध खत्म नहीं हो जाता, याचिका हुई खारिज: कोर्ट

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के सरकार से बड़ा संगठन वाले बयान को लेकर दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में कोई तत्व ही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट कैपिसिटी में पार्टी फोरम में दिए गए बयान का कोई मायने नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह बयान पार्टी फोरम पर है, संवैधानिक पद पर रहते हुए सरकार के फोरम पर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि केशव मौर्य डिप्टी सीएम होने के साथ-साथ पार्टी के सदस्य भी हैं। डिप्टी सीएम होने से पार्टी से सम्बन्ध खत्म नहीं हो जाता। इस कारण पार्टी स्तर पर दिए गए बयान को लेकर अखबार में छपी खबरों के आधार पर याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कोई बल नहीं है। इस कारण खारिज की जाती है। याचिका में क्या कहा गया था याचिका को अधिवक्ता मंजेश कुमार यादव ने दाखिल किया था। उन्होंने याचिका में कहा था कि डिप्टी सीएम ने संगठन को सरकार से बड़ा बताया है। केशव मौर्य का सरकार से बड़ा संगठन कहना उनके पद की गरिमा को कम करता है। सरकार की पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न करता है। यह भी कहा कि भाजपा, राज्यपाल और चुनाव आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया या खंडन न करना इस मुद्दे को और जटिल बनाता है। याचिका में कहा गया कि उपमुख्यमंत्री बनाए जाने से पहले उन पर सात आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। इसलिए ऐसे आपराधिक रिकॉर्ड वाले किसी व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त करना गलत है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में दिया था बयान लोकसभा चुनाव में भाजपा के यूपी में खराब प्रदर्शन के बाद हो रही भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने यह बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि संगठन सरकार से बड़ा था, है और रहेगा। लखनऊ में कार्य समिति की बैठक के बाद डिप्टी सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी अपनी बात को दोहराते हुए लिखा था कि संगठन सरकार से बड़ा था, बड़ा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा था कि मैं उपमुख्यमंत्री बाद में हूं, पहले कार्यकर्ता हूं। recent visitors 99

पहले मां को हुई थी जेल, अब पूजा खेडकर के पिता पर भी दर्ज हुआ केस, गिरफ्तारी की तलवार लटकी

पुणे धोखाधड़ी और गलत तरीके से ओबीसी तथा दिव्यांग कोटा का लाभ हासिल करने की आरोपी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की पूर्व अधिकारी पूजा खेडकर के पिता पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी है। कुछ दिन पहले ही पूजा खेडकर की मां को जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा किया गया था। अब उनके पिता भी जेल जा सकते हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि पुलिस ने पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर के खिलाफ पुणे जिले में एक लोक सेवक को धमकाने और उसकी ड्यूटी में बाधा डालने के आरोप में मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि पुणे जिला कलेक्ट्रेट के एक तहसीलदार स्तर के अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर यहां बंडगार्डन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। एक अधिकारी ने बताया, "शिकायत में कहा गया है कि पूजा खेडकर की सहायक कलेक्टर के रूप में तैनाती के दौरान दिलीप खेडकर ने कथित तौर पर तहसीलदार दीपक अकाडे के खिलाफ धमकाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया और उनसे अपनी बेटी के लिए एक केबिन आवंटित करने के लिए कहा। पूजा के पिता को प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।" संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने हाल ही में पूजा खेडकर का चयन रद्द कर दिया और उन्हें भविष्य की सभी परीक्षाओं और चयनों से स्थायी रूप से वंचित कर दिया। दिल्ली में उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से वह वर्तमान में लापता हैं। पूजा खेडकर पर UPSC सिविल सेवा परीक्षा, 2022 के लिए अपने आवेदन में 'गलत जानकारी देने' का आरोप है। पुणे पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "जिला प्रशासन से शिकायत मिलने के बाद हमने दिलीप खेडकर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 186 (लोक सेवक को उसके सार्वजनिक कार्य करने में बाधा डालना), 504 (जानबूझकर अपमान करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है।" यह घटना इस साल जून में हुई थी। बता दें कि सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी दिलीप खेडकर पर पुणे की पौड पुलिस ने भी आपराधिक धमकी का मामला दर्ज किया था, जिसमें उनकी पत्नी मनोरमा पर मुलशी इलाके में एक व्यक्ति पर जमीन विवाद को लेकर बंदूक तानने का आरोप लगाया गया था। दिलीप खेडकर को उस मामले में अग्रिम जमानत दे दी गई थी, जबकि उनकी पत्नी मनोरमा को पुणे ग्रामीण पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हालांकि उनको हाल ही में अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया था। recent visitors 98

राज्यसभा में मचा हंगामा- उच्च सदन में कार्रवाई के दौरान जगदीप धनखड़-जया बच्चन में जमकर हुई बहस

नई दिल्ली राज्यसभा में एक बार फिर सभापति जगदीप धनखड़ और सपा सांसद जया बच्चन के बीच गर्मागर्म बहस देखने को मिली। यह शुक्रवार को उच्च सदन में कार्रवाई के दौरान हुई। जगदीप धानखड़ ने विपक्षी सांसदों पर संविधान और लोकतंत्र की अवहेलना का आरोप लगाया। कार्यवाही के दौरान सभापति ने जया अमिताभ बच्चन का नाम सदन को संबोधित करने के लिए पुकारा। इस पर जया बच्चन ने धनखड़ के टोन पर सवाल उठा दिया। इसके बाद सदन में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। वहीं, सभापति जगदीप धनखड़ का भी गुस्सा भड़क उठा। बहस इस कदर बढ़ी कि विपक्ष ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में सदन से वॉकआउट कर दिया। जया बच्चन ने अपनी असहमति जताते हुए कहा कि मैं एक कलाकार हूं। मैं बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशंस को बखूबी समझती हूं। मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि आपकी टोन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा, ‘हम लोग कलीग्स हैं। भले ही आप चेयर पर बैठे हैं…’ इसके बाद सभापति धनखड़ ने उन्हें रोकते हुए सीट पर बैठने के लिए कहा। धनखड़ ने आगे कहा, ‘जया जी, आपने बहुत इज्जत कमाई है। एक ऐक्टर, डायरेक्टर के हिसाब से काम करता है। आप वह नहीं देख रही हैं, जो मैं यहां से देख रहा हूं। मैं हर रोज यह सब देखता हूं।’ सभापति जगदीप धनखड़ यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि आप कुछ भी होंगी। एक सेलेब्रिटी होंगी, लेकिन आपको डेकोरम समझना होगा। इसके बाद भी सदन में काफी देर तक शोर-शराबा होता रहा। राज्यसभा से वॉकआउट करने के बाद जया बच्चन ने सभापति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मैंने सभापति की टोन पर ऑब्जेक्शन किया था। हम कोई स्कूली बच्चे नहीं हैं। हममें से कुछ लोग सीनियर सिटीजंस हैं। जया ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए उठे तो उन्होंने माइक बंद कर दिया। इस बात पर भी काफी गुस्सा आया। आखिर वह ऐसा कर कैसे सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों भी जया बच्चन और जगदीप धनखड़ के बीच नोक-झोंक देखने को मिली थी। उन्होंने खुद को जया अमिताभ बच्चन कहने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इस दौरान उन्होंने अपने पति की उपलब्धियों पर गर्व जताया था, साथ ही यह भी कहा कि पति के नाम नीचे पत्नी का नाम नहीं दबना चाहिए। हालांकि अगले ही दिन दोनों के बीच हंसी-खुशी का माहौल भी बना जब जया ने सभापति से कहा, ‘सर, मैं जया अमिताभ बच्चन आपसे कुछ पूछना चाहती हूं।’ recent visitors 119

प्रधानमंत्री ने फोन कॉल के दौरान बधाई दी, नीरज की मां की खेल भावना की भी तारीफ की, जाना चोट का हाल

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक 2024 में सिल्वर मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा से शुक्रवार को फोन पर बात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने नीरज की शानदार उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई दी और उनकी हालिया चोट के बारे में जानकारी ली। टोक्यो ओलंपिक के गोल्ड विनर नीरज चोपड़ा ने पेरिस ओलंपिक में भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। फोन कॉल के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नीरज की मां की खेल भावना की भी तारीफ की। देशभर में नीरज चोपड़ा की इस उपलब्धि के लिए प्रशंसा हो रही है। प्रधानमंत्री ने नीरज से उनके एडिक्टर की समस्या के बारे में भी पूछा जो पेरिस में होने वाले इस इवेंट से पहले उन्हें परेशान कर रही थी। इस साल जून में नीरज ने कहा था कि वह अपनी चोट से निपटने के लिए डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं। गुरुवार (8 अगस्त) को नीरज ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में 89.45 मीटर भाला फेंका और इस सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। हालांकि वे अपना गोल्ड मेडल डिफेंड करने से चूक गए। पाकिस्तान के अरशद नदीम ने 92.97 मीटर के बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स ने 88.54 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता। नीरज पहलवान सुशील कुमार और बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु के बाद लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाले तीसरे भारतीय बन गए। recent visitors 130

संसद में पेश हुए विधेयक में लड़कियों की शादी 9 साल और लड़कों की 15 साल की आयु में ही की जा सकेगी, नए ‘कानून’ पर बवाल

इराक इराक की संसद में पेश हुए विधेयक को लेकर आजकल जोरदार हंगामा हो रहा है। इस विधेयक में लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम आयु घटाकर 9 साल करने का प्रस्ताव रखा गया है। इराक के कानून मंत्रालय की तरफ से इस कानून का प्रस्ताव संसद में रखा गया है। फिलहाल इराक में भी महिलाओं की शादी के लिए न्यूनतम आयु 18 साल है। इस विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति खुद चुन सकता है कि उसके पारिवारिक मामले धार्मिक अथॉरिटी तय करेगी या फिर न्यायालय। इस विधेयक के आलोचकों का कहना है कि इससे उत्तराधिकार, तलाक और बच्चों की कस्टडी समेत कई अधिकारों का हनन होगा। अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो लड़कियों की शादी 9 साल और लड़कों की 15 साल की आयु में ही की जा सकेगी। ऐसे में लोगों में यह भी डर है कि इससे बाल विवाह का प्रचलन बढ़ जाएगा। जो संगठन कई सालों से महिला और बाल अधिकार की जंग लड़ रहे हैं, यह उनके लिए बड़ा झटका होगा। मानवाधिकर संगठनों, महिला संगठनों और सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज पर बुरा असर पड़ेगा। बाल विवाह से स्कूली शिक्षा कमजोर हो जाएगी, वहीं इससे जल्द गर्भधारण और घरेलू हिंसा के मामले बढ़ेंगे। बता दें कि यूनीसेफ के आंकड़ों का कहना है कि अब भी इराक में 28 फीसदी आबादी की शादी 18 साल से पहले ही हो जाती है। इराक वुमन नेटवर्क के अमल कबाशी का कहना है कि इराक में पहले से ही पुरुष प्रधान समाज है और इससे महिलाओं के अधिकारों का और ज्यादा हनन होगा और उनपर अत्याचार बढ़ेगा। इस विधेयक के जरिए 1959 के कानून में संशोधन किया जाएगा। तर्क दिया गया है कि अनैतिक संबंधों से लड़कियों को बचाने के लिए यह कानून बनाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस्लाम के नियमों को बनाए रखने के लिए यह ससंशोधन जरूरी है। recent visitors 149

अब हरेक बैंक खाताधारक एक खाते के लिए चार ‘नॉमिनी’ तक दर्ज करा सकेगा: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार (09 अगस्त) को लोकसभा में बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया है। इस विधेयक में ऐसा प्रावधान किया गया है कि हरेक बैंक खाताधारक एक खाते के लिए चार ‘नॉमिनी’ तक दर्ज करा सकेगा। अभी तक एक बैंक खाते में एक ही नॉमिनी का उल्लेख करने का नियम है। अगर यह बिल संसद से पारित होता है तो अब नॉमिनी को बढ़ाकर चार तक किया जा सकता है। हालांकि, यह वैकल्पिक प्रावधान होगा। प्रस्तावित विधेयक में एक और बड़े बदलाव की बात कही गई है। इसके तहत कंपनी के निदेशकों के सबस्टेंशियल इंटरेस्ट (substantial interest) को फिर से परिभाषित किया गया है और इसके तहत 5 लाख रुपये की वर्तमान सीमा को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये तक किया गया है, जो लगभग छह दशक पहले तय की गई थी। लोकसभा में विपक्ष के कुछ सदस्यों ने सदन में यह विधेयक पेश किये जाने का विरोध किया। कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों से जुड़े कानूनों में संशोधन का अधिकार राज्यों को है। उन्होंने इस संबंध में विधायी अधिकारों को लेकर अस्पष्टता की भी बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘सहकारी समितियों पर केंद्र नियंत्रण कर सकता है या नहीं, इस पर विरोधाभास है।’’ आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि सरकार एक साथ चार कानूनों में संशोधन का प्रयास कर रही है और यह सदन की परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आपस में जुड़े विषयों से संबंधित कानूनों को लेकर ही विधेयक लाया जाता है। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी चार कानूनों को एक विधेयक के माध्यम से संशोधित करने पर आपत्ति जताई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि बहु सहकारी बैंक से जुड़े कानून में पहले भी इस सदन के माध्यम से संशोधन किया जा चुका है और इससे छोटे खाता धारकों को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि हम चार विधेयक भी ला सकते थे लेकिन जब एक समान तरह के कामकाज से जुड़े कानून हैं तो हम एक संशोधन विधेयक ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम और सहकारी बैंकों के बीच एक संबंध है और कोई भी संशोधन इसी रास्ते से लाना होगा। सीतारमण ने कहा, ‘‘सहकारी संस्थाओं, खासकर उन संस्थाओं को, जो बैंकों के अतिरिक्त अन्य सारे काम करती हैं, उन्हें कमजोर करने का कोई प्रयास नहीं है। बैंक और बैंकिंग गतिविधियों के लिए लाइसेंस रखने वाली सहकारी समितियों के लिए एक नियम होना चाहिए और इसीलिए हमने यह कदम उठाया है।’’ मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पेश किए जाने की मंजूरी दी। विधेयक में वैधानिक लेखा परीक्षकों को भुगतान किया जाने वाला पारिश्रमिक तय करने में बैंकों को अधिक स्वतंत्रता देने का भी प्रावधान किया गया है। इस विधेयक में बैंकों के लिए विनियामक अनुपालन के लिए रिपोर्टिंग तिथियों को हर महीने के दूसरे और चौथे शुक्रवार के बजाय 15वें और आखिरी दिन को फिर से परिभाषित करने का भी प्रयास किया गया है। इस विधेयक को पिछले शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी, जिसके तहत भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934, बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949, भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम 1955, बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम 1970 और बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम 1980 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसकी घोषणा वित्त मंत्री ने अपने 2023-24 के बजट भाषण में की थी। उन्होंने कहा था, ‘‘बैंक प्रशासन में सुधार और निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए बैंकिंग विनियमन अधिनियम, बैंकिंग कंपनी अधिनियम और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में कुछ संशोधनों का प्रस्ताव है।’’ recent visitors 87