जिला पंचायत अध्यक्ष अलीराजपुर और जनपद पंचायत अध्यक्ष अमरवाड़ा की निर्वाचन प्रक्रिया स्थगित

भोपाल राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष अलीराजपुर और जनपद पंचायत अध्यक्ष अमरवाड़ा के रिक्त पद के निर्वाचन हेतु 21 अगस्त की तारीख नियत की गई थी। जनपद पंचायतों के उप निर्वाचन के कार्यक्रम घोषित होने के कारण जिला पंचायत अध्यक्ष अलीराजपुर और जनपद पंचायत अध्यक्ष अमरवाड़ा के निर्वाचन का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग अभिषेक सिंह ने बताया है कि निर्वाचन की आगामी तिथि पृथक से जारी की जायेगी।   recent visitors 86

बारिश में स्मार्टफोन को बचाने के लिए इन सरल चरणों का घर पर पालन करें

स्मार्टफोन बारिशों के मौसम में खराब हो सकता है। इसलिए आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है। इसके लिए आप कुछ गैजेट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये ऐसे तरीके हैं जो किसी के लिए भी बहुत जरूरी होने वाले हैं। आप इन्हें अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं क्योंकि मॉनसून के मौसम में बहुत तेज बारिश होती है और ये आपको बचाने के लिए काफी काम आते हैं। इसमें कुछ ऐसे बैग्स के बारे में भी आपको बताएंगे जो काफी काम आने वाले हैं- वाटरप्रूफ केस का उपयोग करें स्मार्टफोन को बारिश से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप वाटरप्रूफ केस का उपयोग करें। यह केस आपके फोन को पूरी तरह से सील कर देता है और पानी को अंदर जाने से रोकता है। बाजार में विभिन्न प्रकार के वाटरप्रूफ केस उपलब्ध हैं जो आपके फोन के मॉडल के अनुसार फिट होते हैं। जिपलॉक बैग का इस्तेमाल करें अगर आपके पास वाटरप्रूफ केस नहीं है, तो आप अपने फोन को जिपलॉक बैग में रख सकते हैं। यह अस्थायी समाधान है लेकिन फोन को पानी से बचाने में काफी प्रभावी होता है। सुनिश्चित करें कि बैग अच्छी तरह से बंद हो ताकि पानी अंदर न जा सके। सिलिकॉन प्लग का उपयोग करें सिलिकॉन प्लग का उपयोग करके आप अपने फोन के चार्जिंग पोर्ट, हेडफोन जैक और अन्य खुले हिस्सों को सील कर सकते हैं। ये प्लग आसानी से उपलब्ध होते हैं और फोन के खुले हिस्सों को पानी से सुरक्षित रखते हैं। फोन को सूखा रखें जब भी आप बारिश में बाहर हों, अपने फोन को बैग या पॉकेट में रखें। फोन को सीधे बारिश के संपर्क में न आने दें। अगर संभव हो तो फोन का उपयोग कम करें और जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकालें। हैंड्स-फ्री डिवाइस का उपयोग करें बारिश में फोन का उपयोग करने के बजाय हैंड्स-फ्री डिवाइस का उपयोग करें। इससे आपका फोन सुरक्षित रहेगा और आप बिना फोन को बाहर निकाले कॉल्स और अन्य कार्य कर सकेंगे। नियमित सफाई करें बारिश में फोन का उपयोग करने के बाद उसे सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछें। चार्जिंग पोर्ट और हेडफोन जैक को भी साफ करें ताकि उनमें नमी न रह जाए। बीमा का विकल्प चुनें अगर आप बहुत ज्यादा यात्रा करते हैं या बारिश वाले इलाके में रहते हैं, तो अपने स्मार्टफोन के लिए बीमा का विकल्प चुनें। इससे आपके फोन को पानी से नुकसान होने पर आपको आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। इन आसान और प्रभावी तरीकों को अपनाकर आप अपने स्मार्टफोन को बारिश से सुरक्षित रख सकते हैं। बारिश के मौसम में अपने फोन की सुरक्षा का ध्यान रखें और उसे नमी और पानी से बचाएं ताकि वह लंबे समय तक सही तरीके से काम करता रहे। recent visitors 105

मध्यप्रदेश में उद्योग के अवसर संभावनाओं और नीतियों पर हुई विस्तृत चर्चा

उद्योगों के सहयोग से मध्यप्रदेश और देश सभी क्षेत्रों में बढ़ेगा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरू में हुआ "राउंड टेबल सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटी इन मध्यप्रदेश" मध्यप्रदेश में उद्योग के अवसर संभावनाओं और नीतियों पर हुई विस्तृत चर्चा मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों के साथ किया नेटवर्किंग डिनर भोपाल बेंगलुरू में पहला दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन के लिये बेंगलुरु में आयोजित "राउंड टेबल सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटी इन मध्यप्रदेश" में उद्योगपतियों से संवाद करते हुए कहा कि उद्योगों की स्थापना और उद्यमियों को प्रोत्साहन से मध्यप्रदेश सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। इसमें उद्योगों का अहम योगदान रहा है। उद्योगों के सहयोग से ही मध्यप्रदेश और भारत प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना का साकार करेगा। बेंगलुरू में राउंड टेबल सेशन में मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिये अवसर, संभावनाओं और नीतियों पर उद्योगपतियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें उद्योगपतियों ने अपने अनुभव साझा किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के साथ नेटवर्किंग डिनर भी किया। राउंड टेबल सेशन में चेयरमैन नैसकॉम और सीईओ कॉग्निजेंट राजेश नांबियार ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। सुकून और शांति के टापू मध्यप्रदेश में उनकी कंपनी निश्चित ही उद्योग स्थापित करेंगी। इंफोसिस की ग्लोबल डिलीवरी हेड सुबिंदिया राज ने कहा कि प्रदेश के लोकल टेलेंट को निखारने और रोजगार देने के लिए मध्यप्रदेश में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। राकुटेन सिंफनी के एमडी राहुल अत्री ने कहा कि इंदौर क्लीनेस्ट सिटी होने के साथ ही उत्पादन हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राउंड टेबल सेशन में शामिल उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आश्वस्त किया कि वे सभी मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने में सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रहे हैं। जल्द ही प्रदेश में उनकी कम्पनियाँ विभिन्न क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करेगी। उद्योगपतियों ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में वर्तमान में उद्योगों विस्तारित करने, उद्योगों को लगाने में प्रशासनिक तौर पर सहयोग देने, उद्योग लगाने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिये सरकार की तत्परता को देखते हुए उद्योग लगाने के लिये मध्यप्रदेश में अनुकूल माहौल बना है। उद्योगपतियों ने राउंड टेबल सेशन में अधोसंरचना, इको सिस्टम, इंजीनियरिंग, रिसर्च, स्किल डेवलेपमेंट आदि विषयों पर विचार रखें और सुझाव भी दिए।   recent visitors 99

राज्यमंत्री जायसवाल ने कहा ग्रामोद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़, गौहर महल में 18 अगस्त तक चलेगा सावन मेला

भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा है कि ग्रामोद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ग्रामोद्योगों से हमारे ग्रामीण बुनकरों, करघाचालकों, दस्तकारों, हस्त शिल्पियों, कारीगरों, कच्चा माल आपूर्तिकर्ताओं और अन्य लोगों को भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। गांव और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वोकल फॉर लोकल मंत्र दिया गया है। इसके तहत देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिये हम सबको स्वदेशी वस्त्र अपनाना चाहिए। जितना हो सके, खादी के कपड़े पहनिए, यह हर मौसम में शरीर के लिए फायदेमंद है। खादी वस्त्रों की मांग बढ़ने से हमारे बुनकरों और ग्रामीण दस्तकारों को लाभ मिलेगा और वे आर्थिक रूप से सपन्न हो सकेंगे। राज्यमंत्री जायसवाल बुधवार को भोपाल के गौहर महल में दसवें राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस कार्यक्रम और सावन मेले के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह 9 अगस्त तक जारी रहेगा। इसमें हर दिन अलग-अलग इवेंट्स होंगे। राज्यमंत्री जायसवाल ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बुनकरों से अपील करते हुए कहा कि वे नये-नये डिजाइन के गुणवत्तापूर्ण टिकाऊ कपड़े बनाकर हमारी देशज संस्कृति को और समृद्ध बनायें और हम सबको गौरवान्वित होने का अवसर देते रहें। उल्लेखनीय है कि देश के सभी बुनकरों, दस्तकारों और ग्रामीण कारीगरों के हुनर एवं उनके असीम श्रम के सम्मान स्वरूप हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस मनाया जाता है। पहला राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस समारोह 7 अगस्त 2015 को चेन्नई में मनाया गया था। कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री जायसवाल ने सभी को राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस की बधाई और शुभकामनाएँ देकर सावन मेले का भरपूर आनंद लेने और शिल्पकारों के उत्पादों को क्रय करने का आहृवान किया। उन्होंने मंच से उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्पयों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में सचिव खादी एवं ग्रामोद्योग विकास बोर्ड मालसिंह, आयुक्त रेशम विकास मदन विभीषण नागरगोजे, मप्र संत रविदास हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम के प्रबंध संचालक तथा आयुक्त हस्तशिल्प एवं हाथकरघा मोहित बुंदस, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी भोपाल के डायरेक्टर आशीष अग्रवाल सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में बुनकर व स्टॉल प्रदर्शक उपस्थित थे। सावन मेला बुनकरों और हस्तशिल्पियों के उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय के लिये गौहर महल में सावन मेले का आयोजन किया गया है। यह 18 अगस्त तक चलेगा। सावन मेले में प्रदेश के हाथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन, बुनकरों का सम्मान एवं बुनाईकला को प्रदर्शित करने के लिये फैशन शो एवं सांस्कृतिक कार्यकम किये जायेंगे। हाथकरघा क्लस्टर चंदेरी, महेश्वर, ग्वालियर, सारंगपुर, सीधी, रीवा, मंदसौर, वारासिवनी, सीहोर, मंडला एवं डिण्डोरी में भी ऐसे ही आयोजन किये जा रहे हैं। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस पर पारम्परिक हाथकरघा क्लस्टर चंदेरी, महेश्वर, सारंगपुर मंदसौर, सौंसर, सीधी, वारासिवनी, सागर के बुनकरों व कारीगरों को सम्मानित किया गया। चंदेरी, महेश्वर, सौसर एवं वारासिवनी क्लस्टर में उत्पादित मलबरी एवं टसर सिल्क की साड़ियों, होम फर्नीशिंग सारंगपुर पड़ाना एवं मंदसौर क्लस्टर की आकर्षक चादरों के न्यू कलेक्शंस का प्रदर्शन भी इस अवसर पर किया जा रहा है। प्रदेश के हाथकरघा बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों द्वारा उत्पादित सामग्री के विक्रय को प्रोत्साहित करने के लिये निगम द्वारा आयोजित सावन मेले से प्रदेश के बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को एक मंच उपलब्ध कराया गया है। इससे उनके उत्पादों व अन्य सामग्री का प्रचार-प्रसार तो होगा ही, बिजनेस (विक्रय) का अवसर भी मिलेगा। प्रारंभ में कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री जायसवाल ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी व स्टाल्स का अवलोकन कर बुनकरों और विभिन्न स्टाल्स प्रदर्शकों से आत्मीयतापूर्ण चर्चा कर उनके आकर्षक उत्पादों की सराहना की। स्वागत उद्बोधन आयुक्त हस्तशिल्प एवं हाथकरघा मोहित बुंदस ने दिया।   recent visitors 151

राज्य सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष करोसिया की उपस्थिति में लिये गये निर्णय

भोपाल राज्य सरकार के आदेश के तहत विनियमित सफाई कामगारों को सफाई कामगार के उपलब्ध रिक्त पदों पर वरीयता के आधार पर स्थाई किया जायेगा। नगरीय निकायों में कार्यरत समस्त दैनिक वेतन भोगी जो वर्ष 2007 से वर्ष 2016 तक कार्यरत है उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार विनियमित किया जायेगा। निर्णय से 15 हजार से अधिक सफाई कर्मचारियों को विनियमितिकरण का लाभ मिलेगा। यह निर्णय  मंत्रालय में राज्य सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई उपस्थित थे। बैठक में तय किया गया कि मृतक कर्मचारी अथवा स्वास्थ्य कारणों से सेवानिवृत्त कर्मचारी के परिवार को नियमों में संशोधन कर एक परिजन को अनुकम्पा नियुक्ति दी जायेगी। इसका लाभ मृतक विनियमित कर्मचारियों के परिजनों को भी मिलेगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि नगरीय निकायों में सफाई से संबंधित उपकरण और वाहन सफाई कामगारों के समूहों को दिए जायेंगे। सफाई कामगारों के पदों को बढ़ाने पर विचार करने के लिए विभाग द्वारा एक प्रस्ताव तैयार कर मंत्रि-परिषद की बैठक में रखा जायेगा। राज्य सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष करोसिया ने कहा कि इन निर्णयों से सफाई मित्रों के परिवार का समग्र विकास होगा। बैठक में सफाई कामगारों के प्रतिनिधि सर्वगंगाराम घोसरे, अशोक वाल्मिकी, विष्णु भारती, रामप्रकाश वंशकार, अमित कच्छवा, राजेश खरे पीथमपुर, कमल भाटी, राजू सांगते और महिला प्रतिनिधि श्रीमती मधु वाल्मिकी, श्रीमती पार्वती ताम्य भी मौजूद थीं।   recent visitors 169

बिच्छीकानी से जयमरगी बी सड़क के निर्माण के लिए ग्रामीणों ने जताया मुख्यमंत्री और विधायक का आभार

पत्थलगांव सड़क निर्माण संघर्ष समिति की पहल आखिरकार रंग लाई है। प्रशासन द्वारा बिच्छीकानी से जमरगी बी तक सड़क निर्माण के लिए प्रशासकीय मंजूरी दे दी गई है। इसे लेकर ग्रामीणों ने विधायक गोमती साय के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात की थी। प्रशासकीय स्वीकृति मिल जाने के बाद अब सड़क के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। विकासखंड अंतर्गत ग्राम जमरगी बी, बिच्छीकानी एवं आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण एक अर्से से सड़क की समस्या से जूझ रहे हैं। इसे लेकर ग्रामीणों द्वारा सड़क निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले सड़क निर्माण के लिए प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों के प्रयासों से ग्राम बिच्छीकानी के ढुढरूपारा से जमरगी बी तक पक्की सड़क निर्माण के लिए शासन से मंजूरी मिल गई थी। इसे बजट में भी शामिल कर लिया गया था। परंतु प्रशासकीय स्वीकृति के अभाव में सड़क के निर्माण का कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। जिसके बाद संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने विधायक गोमती साय से मुलाकात कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। उनके मार्गदर्शन में सड़क निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोती लाल बंजारा के साथ ही ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने 26 जुलाई को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भी उनके रायपुर प्रवास के दौरान मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेवस साय को सड़क के अभाव में ग्रामीणों को हो रही परेशानियों से अवगत कराते हुए सड़क निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति दिलाए जाने की गुहार लगाई। इसके लिए विभाग को पत्र भी जारी कर दिया गया है। recent visitors 80

विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त पर विशेष लेख : आदिवासी अंचलों में पहुंच रही हैं तेजी से विकास योजनाएं

रायपुर, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत जनजातीय समुदाय की आबादी को देखते हुए राज्य की बागडोर श्री विष्णु देव साय के हाथों में सौंपी है। राज्य गठन के 23 वर्षों बाद वे ऐसे पहले आदिवासी नेता है जिन्हें राज्य के मुखिया के तौर पर कमान सौंपी गई है। राज्य में नई सरकार की गठन के साथ ही उन्होंने किसानों, महिलाओं और वंचित समूहों को आगे बढ़ाने के लिए योजनाओं की शुरूआत की। वे सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के ध्येय वाक्य को लेकर सभी वर्गों की उन्नति और बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं।     छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की देश-विदेश में अलग पहचान रही है। राज्य के आदिवासी अंचल एक ओर वनों से आच्छादित है। वहीं इन क्षेत्रों में बहुमूल्य खनिज सम्पदा भी है। मनोरम पहाड़ियां, झरनें, इठलाती नदियां बरबस लोगों को आकर्षित करती हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में गठित नई सरकार बनने के बाद राज्य के आदिवासी अंचलों में जन जीवन में तेजी से बदलाव लाने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के लिए अनेक नवाचारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।     आदिवासी समुदाय को सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जा रही महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जनमन योजना में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, आवास, पेयजल जैसी महत्वपूर्ण मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है।     आदिवासी क्षेत्रों के तेजी से विकास सुनिश्चित करने के लिए केन्द्र सरकार की पहल पर जगदलपुर के नगरनार में लगभग 23 हजार 800 करोड़ रूपए की लागत से वृहद स्टील प्लांट लगाया गया हैं, इससे आने वाले वर्षों में बस्तर अंचल की पूरी तस्वीर बदलेगी। लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा साथ ही रोजगार के नए अवसरों का निर्माण होगा।      इस साल के केन्द्रीय बजट में जनजाति उन्नत ग्राम अभियान योजना शामिल की गई है। इस योजना से राज्य के लगभग 85 विकासखंडों में शामिल गांवों को विभिन्न मूलभूत सुविधाएं मिलेगी। इसके अलावा जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसी प्राथमिकताएं भी जनजाति क्षेत्रों की दशा और दिशा बदलेंगी।     जनजाति क्षेत्रों के तेजी से विकास सुनिश्चित करने के लिए भारत माला प्रोजेक्ट के अंतर्गत रायपुर-विशाखापत्तनम एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है 464 किलोमीटर लंबा और छह लेन चौड़ा एक्सप्रेसवे होगा। यह छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे मार्ग छत्तीसगढ़ में 124 किलोमीटर, ओडिशा में 240 किलोमीटर और आंध्र प्रदेश में 100 किलोमीटर बनेगी। उड़ीसा से आंध्रप्रदेश के विशाखापटनम तक बनाए जा रहे इस नए कॉरिडोर से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। वहीं नए उद्योगों की स्थापना से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।     बस्तर के माओवादी आतंक से सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक तरफ सुरक्षा कैंपों की सख्या बढ़ायी जा रही है। वहीं सुरक्षा कैंपों के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों में केन्द्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए नियद् नेल्लानार जैसी नवाचारी योजनाओं की शुरूआत की गई है। इस योजना के बेहतर और सार्थक परिणाम मिल रहे हैं। लोगों का विश्वास फिर से शासन-प्रशासन के प्रति लौटने लगा है।     आदिवासियों की आय में वृद्धि और उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। प्रदेश सरकार ने लगातार ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे वनों के साथ आदिवासियों का रिश्ता फिर से मजबूत हुआ है। वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी के साथ-साथ तेन्दूपत्ता का खरीदी कार्य भी पहले से अधिक व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा 36 कॉलेजों के भवन-छात्रावास निर्माण के लिए 131 करोड़ 52 लाख रूपए मंजूर किए गए है। इससे प्रदेश के 36 कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ होंगे तथा शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। वहीं युवाओं को उच्च स्तर की शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होगी और वे बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकेंगे।      राज्य सरकार ने तेन्दूपत्ता पारिश्रमिक दर प्रतिमानक बोरा 4000 से बढ़ाकर 5500 रूपए कर दिया है। इससे लगभग 13 लाख जनजाति परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में लघु वनोपज संग्रहण भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से हो रहा है। लघु वनोपज के प्रसंस्करण के लिए वनधन केन्द्रों की स्थापना की गई है।     प्रदेश में जनजातिय समुदाय के बच्चों के लिए बेेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा माओवादी प्रभावित क्षेत्र के बच्चों के लिए 15 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों में मेधावी विद्यार्थियों को अखिल भारतीय मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराई जा रही हैं। नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी के लिए संचालित यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 185 कर दी गई है।     राज्य में बस्तर, सरगुजा, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरणों के कामकाज को व्यवस्थित और प्रभावित बनाने के लिए इनका पुनर्गठन किए जाने का निर्णय लिया गया है। इन प्राधिकरणों की कमान अब मुख्यमंत्री के हाथों में होगी। क्षेत्रीय विधायक इन प्राधिकरणों के सदस्य होंगे तथा मुख्यमंत्री के सचिव अथवा सचिव इन प्राधिकरणों के सदस्य सचिव होंगे।     आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए बस्तर अंचल के देवगुड़ियां और घोटुलों तथा अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत वृक्षारोपण किया जा रहा है। इससे लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, साथ ही ऐसे स्थानों में प्राकृतिक सुन्दरता भी बढ़ेगी। recent visitors 75