संत हिरदाराम नगर के दोनों उद्यानों का रखरखाव बंद कर दिया, लोगों ने जाना बंद किया

भोपाल नगर निगम ने संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के दोनों उद्यानों का रखरखाव बंद कर दिया है। घनी आबादी के बीच स्थित गिदवानी पार्क में जलभराव होने लगा है। वर्षा होती है और इसमें पानी भर जाता है। सीहोर नाका स्थित नए पार्क की फिसलपट्टियां खराब हो गई हैं। इसकी हरियाली भी उजड़ रही है। गिदवानी पार्क का प्रवेश द्वार कुछ समय पहले टूट गया था। अब यह गायब हो गया है। नगर निगम ने मेन रोड पर बरसों पहले विकसित नेहरू पार्क के बीच में ही ओवरहेड टेंक बनाकर पार्क को अपने हाथों से उजाड़ दिया। जन सुविधा केंद्र बनने के बाद बची हुई हरियाली भी खत्म हो गई। अब नागरिकों के लिए गिदवानी पार्क अलावा बोरवन पार्क एवं सीहोर नाका विसर्जन घाट के निकट स्थित छोटा पार्क है। इसका भी मेंटनेंस नहीं हो पा रहा है। उखड़ने लगा वाक ट्रैक, पानी जमा गिदवानी पार्क में कुछ समय पहले वाक ट्रेक बनाया गया था। अब यह उखड़ने लगा है। कुछ समय इसका अच्छा रखरखाव किया जाता था। पार्क की रौनक ही बढ़ गई थी। अब इसका रखरखाव भी नहीं हो रहा है। रंगीन पानी का फव्वारा भी बंद पड़ा है। बोरवन क्लब ने जन सहयोग से फव्वारा लगवाया लेकिन वह भी बंद हो गया है, क्योंकि मेंटेनेंस नहीं हो सका। उद्यान का प्रवेश द्वार टूट गया है। अब यहां बैरिकेड रख दिया गया है। रहवासी कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। रहवासी एवं सोशल एक्टिविस्ट कीर्ति वाधवानी के अनुसार वर्षा के दौरान पार्क में पानी जमा हो जाता है। वर्षा थमने के बाद भी इसकी निकासी तीन, चार दिन नहीं हो पाती। पूज्य सिंधी पंचायत के महासचिव माधु चांदवानी का कहना है कि पार्क में स्थाई कर्मचारी तैनात किया जाना चाहिए। पंचायत इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से मिलेगी। recent visitors 127

जनसुनवाई में आया मामला- उपभोक्ता से नगर निगम एक नहीं बल्कि दो कनेक्शन का जलकर जमा करने के लिए कहा जा रहा है

भोपाल गौतम नगर में रहने वाले एक उपभोक्ता से नगर निगम एक नहीं बल्कि दो कनेक्शन का जलकर जमा करने के लिए कहा जा रहा है। जबकि वह नियमित रूप से एक कनेक्श का जलकर जमा करता आ रहा है। जब वह शिविर में अपना जलकर जमा करने पहुंचा तो अधिकारियों ने उसे वापस लौटा दिया और कहा कि दो कनेक्शन का जलकर जमा करों तब ही रसीद मिलेगी।वहीं पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर द्वारा भुगतान करने के लिए रिश्वत मांगी जा रही है तो एक बत्ती कनेक्शन देने के लिए बिजली कंपनी द्वारा आठ हजार रुपये की मांग की गई है। उपभोक्ता से निगम मांग रहा 50 हजार रुपये गौतम नगर निवासी संजय शर्मा ने कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन देते हुए बताय कि उनके नाम से एक नल का कनेक्शन है। जिसका वह प्रति वर्ष जलकर जमा करता है। जब वह 31 जुलाई को वार्ड 13 में अपना जलकर छह हजार 476 जमा करने पहुंचा तो कर्मचारियों ने नहीं लिया। साथ ही कहा गया कि एक अन्य नल कनेक्श कर लगभग 50 हजार रुपये जलकर जमा करना होगा। इस तरह निगम द्वारा जबरदस्ती दो कनेक्शन का कर जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है । वहीं ग्राम निपानिया जाट निवासी शारदा बाई ने बताया कि वह मेहनत मजूदरी कर परिवार का जीवन यापन करती है। जब सबने ईंटखेड़ी लांबाखेड़ा विद्युत कार्यालय में एक बत्ती कनेक्शन के लिए आवेदन किया ताे उससे आठ हजार रुपये की मांग की जा रही है। दोनों की शिकायत सुनने के बाद एडीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। टीसी और मार्कशीट के बदले निजी स्कूल ने मांगे 19 हजार जनसुनवाई में पहुंची 10वीं कक्षा की छात्रा पूजा कुशवाहा ने एडीएम को शिकायत की है कि ब्राईट पैरागान स्कूल में वह दसवीं कक्षा में पढ़ती है। अब वह 11वीं कक्षा की पढ़ाई अन्य स्कूल से करना चाहती है। इसके लिए उसने स्कूल से मार्कशीट और टीसी मांग तो प्राचार्य द्वारा 19 हजार रुपये फीस की मांग की जा रही है।  जबकि पूर्व में 13 हजार 500 रुपये फीस बताई थी, जिसमें से साढ़े सात हजार छात्रा ने जमा कर दी थी। वह बाकी राशि जमा करने को तैयार है लेकिन स्कूल प्रबंधन अधिक फीस के लिए दबाव बना रहा है।वहीं ओल्ड सुभाष नगर निवासी रविकांत त्रिपाठी ने शिकायत की है कि नाली निर्माण के कार्य का भुगतान करने के बदले में सीपीए पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर संजय श्रीवास्तव द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। नहीं देने पर भुगतान रुकवा दिया है। एडीएम ने मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 16 पुलिस विभाग के मामले भी पहुंचे एडीएम भूपेंद्र गोयल ने बताया कि जनसुनवाई में वैसे तो पुलिस विभाग से कोई अधिकारी मौजूद नहीं रहता है लेकिन थानों की अपेक्षा लोग यहां पर मामले लेकर पहुंचते हैं। मंगलवार को जनुसनवाई लगभग 16 प्रकरण पुलिस विभाग से संबंधित आए थे। recent visitors 118

नर्मदा के निचले क्षेत्रों में बैकवाटर का लेवल तेजी से बढ़ रहा है, राजघाट में बैकवाटर में करीब 5 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज

बड़वानी प्रदेश के ऊपरी छोर पर हो रही बेहतर वर्षा से नर्मदा पर बने बांधों से सतत पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं ओंकारेश्वर बांध से आठ टरबाइन चलाकर 1896 क्यूमेक पानी की निकासी जारी है। इससे नर्मदा के निचले क्षेत्रों में बैकवाटर का लेवल तेजी से बढ़ रहा है। सप्ताहभर के दौरान ही राजघाट में बैकवाटर में करीब 5 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बैकवाटर बढ़ने से नए घाट पर बनी छत्रियां डूब गई है। मंगलवार को राजघाट में बैकवाटर का लेवल 125.50 मीटर तक रहा। बैकवाटर का खतरे का निशान 123.20 मीटर अब नीचे रह गया है। वहीं पुराना पुल अब डूब से महज डेढ़ मीटर बचा है। बैकवाटर बढ़ने के चलते बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे है। वहीं पुराने पुल के किनारों पर बैठकर व खड़े होकर लोग सेल्फी लेने से नहीं चूक रहे है। एक दिन पूर्व ही कलेक्टर ने टीएल बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिन सड़कों के पुल-पुलियाओं या रपटों पर बाढ़ का पानी आता है, उसे चिह्नित कर सुरक्षा के लिए कर्मी की ड्यूटी लगाए। साथ ही नर्मदा किनारे स्नान करने की जगहों पर तैराकों की व्यवस्था की जाए। इधर धूप खिलने से सड़कों का कीचड़ सूखाबीते सप्ताहभर से जारी वर्षा का दौर पिछले 48 घंटे में कमजोर पड़ा है। हालांकि रूक रूककर कहीं-कहीं हल्की वर्षा हो रही है। शहर में मंगलवार दिनभर मौसम साफ रहने से तेज धूप खिली। इससे सड़कों पर जमा कीचड़ सूखने लगा। वहीं मौसम शुष्क होते ही वातावरण में उमस-गर्मी फिर महसूस होने लगी है। बीते 24 घंटे में बारिश का हाल भू अभिलेख कार्यालय के अनुसार, बीते 24 घंटे में जिले में औसत रूप से मात्र 0.1 मिमी वर्षा हुई। इस दौरान निवाली में 12.6, पानसेमल में 9.4, वरला में 2, सेंधवा, चाचरिया, बड़वानी में 1-1 मिमी पानी बरसा। इस वर्ष 1 जून से लेकर अब तक जिले में औसत वर्षा का आंकड़ा 448.2 मिमी पहुंच गया है। बीते वर्ष इस दौरान 341 मिमी ही पानी बरसा था। जिले में औसत रुप से 746.3 मिमी वर्षा होती है।   इंदिरा सागर बांध में पानी की आवक घटी, नहीं खुलेंगे गेट प्रदेश में झमाझम वर्षा का दौर थमने से इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेट खोलने की प्रक्रिया फिलहाल टल गई है। बांध प्रबंधन दाेनों बांध के पावर हाउस की सभी टरबाइन चला कर पूरी क्षमता से विद्युत का उत्पादन कर बांध का जलस्तर नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है। इससे नर्मदा के डाउन स्ट्रीम में जलस्तर बढ़ने से साथ ही नर्मदा का प्रवाह बढ़ गया है। इस वर्षाकाल में मंगलवार दोपहर इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेट खोलने की चेतावनी बांध प्रबंधन ने जारी की थी। यह निर्णय बांध के ऊपरी क्षेत्र से आ रहे पानी की मात्रा को देखते हुए लिया गया था। कल शाम तक हांड़िया की ओर से इंदिरा सागर बांध के जलाशय में 10 हजार क्यूमेक्स की आवक हो रही थी, जो मंगलवार दोपहर कम होकर 9000 क्यूमेक्स के लगभग रह गई है। वहीं नर्मदा घाटी के ऊपरी क्षेत्र में तेज वर्षा का दौर थमने से बरगी और तवा बांध से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा भी कम हो गई है। इंदिरा सागर बांध का जलस्तर 259.14 मीटर के आसपास है। बांध की कुल जलभराव क्षमता 262.13 मीटर है, जबकि अगस्त माह में बांध का जलस्तर 260 मीटर रखने का प्रावधान है। इस जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए एनएचडीसी प्रबंधन द्वारा सभी टरबाइन चला कर लगभग एक हजार मेगावाट बिजली पूरी क्षमता से बनाई जा रही है। पावर हाउस की आठ टरबाइन चलने से नर्मदा नदी में 1840 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। इंदिरा सागर बांध से आ रहे पानी से ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर नियंत्रित करने के लिए यहां भी फिलहाल गेट खोलने की बिजली उत्पादन को प्राथमिक देकर जलस्तर नियंत्रित किया जा रहा है। recent visitors 108

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को ब्रिटेन ने दिया जोर का झटका, जिस देश में पहले पहुंचीं, वहीं शरण लें

नई दिल्ली बांग्लादेश की कल तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना आज शरण की मोहताज हैं। वह 5 अगस्त को पीएम पद से इस्तीफा देकर भारत आ गई थीं और फिलहाल यहीं हैं। कहा जा रहा है कि वह ब्रिटेन में शरण लेना चाहती हैं, जहां उनकी बहन और बेटे रहते हैं। लेकिन इस बीच ब्रिटेन से शरण की उम्मीद लगाए शेख हसीना को झटका लगा है। ब्रिटेन ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हमारे इमिग्रेशन रूल्स किसी व्यक्ति को शरण के लिए आने या फिर अस्थायी तौर पर रहने की परमिशन नहीं देते। ब्रिटिश गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस तरह की शरण तो किसी को भी उस देश में ही मांगनी चाहिए, जहां वह सबसे पहले सुरक्षित पहुंचा हो। इस तरह ब्रिटेन ने एक तरह से शेख हसीना को भारत में ही शरण मांगने का सुझाव दिया है। सर कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाले ब्रिटेन से विकल्प खारिज होने की सूरत में शेख हसीना को अब किसी नए विकल्प पर विचार करना होगा। अब तक भारत सरकार की ओर से शेख हसीना के ठहरने पर कुछ कहा नहीं गया है। लेकिन बांग्लादेशी मीडिया का कहना है कि शेख हसीना अंतरिम ठहराव के लिए ही भारत पहुंची थीं और वह यहां से किसी और देश जा सकती हैं। लेकिन अब तक वह हिंडन एयरबेस में ही ठहरी थीं। कुछ वक्त पहले उन्हें दिल्ली में ही किसी सुरक्षित ठिकाने पर ले जाया गया है। ब्रिटिश गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम कहते हैं कि यदि किसी को संरक्षण चाहिए तो जिस भी देश में वह सबसे पहले पहुंचे, वहीं उसे शरण मांगनी चाहिए। अब तक यह भी साफ नहीं है कि शेख हसीना ने ब्रिटेन से शरण मांगी है अथवा नहीं। 76 साल की शेख हसीना को हिंसक प्रदर्शनों के चलते सोमवार को देश छोड़ना पड़ा था और उससे ठीक पहले इस्तीफा दिया था। नौकरियों में कोटे के विरोध में वहां ऐसा आंदोलन हुआ कि 300 से ज्यादा लोग अब तक मारे जा चुके हैं। यही नहीं शेख हसीना के निकलने के बाद भी देश में हिंसा का दौर जारी है और करीब 100 लोग फिर मारे जा चुके हैं। कहा जा रहा है कि हसीना को निकलने के लिए सेना से 45 मिनट मिले थे। शेख हसीना अब जाएं तो जाएं कहां यदि शेख हसीना को ब्रिटेन में शरण नहीं मिलती है तो उन्हें किसी और देश का रुख करना होगा। इसके अलावा तब तक भारत में ही रहना होगा। सूत्रों का कहना है कि भारतीय एजेंसियां भी चाहती हैं कि शेख हसीना यहां ज्यादा दिन न रहें। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके यहां ठहरने से बांग्लादेश में भारत के खिलाफ माहौल बन सकता है। भारत के लिए बांग्लादेश से अच्छे संबंध रखना जरूरी है क्योंकि पाकिस्तानी एजेंसियां वहां हावी हो सकती हैं। ऐसे में हसीना की कीमत पर भारत सरकार ढाका से संबंध नहीं बिगाड़ना चाहेगी। recent visitors 125

छत्तीसगढ़-मुख्यमंत्री विष्णु देव बोले-बच्चे की पहली पाठशाला है परिवार, मेगा पालक शिक्षक बैठक में पहुंचे

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय बंदरचुंआ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित मेगा पालक शिक्षक बैठक कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां उन्होंने पालक शिक्षक बैठक में शामिल होकर पालकों से कार्यक्रम को लेकर उनके अनुभव जाने। बच्चों के माता पिता के साथ कुछ बच्चों के दादा दादी भी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि  परिवार किसी भी बच्चे की पहली पाठशाला है और माता पिता पहले गुरु। शासकीय स्कूलों में पालक शिक्षक संवाद का कार्यक्रम शुरू किया गया है जिससे पालकों को उनके बच्चों के पढ़ाई लिखाई के बारे में जानकारी मिले और बच्चे के शैक्षणिक प्रगति में उनकी भी सहभागिता हो। उन्होंने बताया कि आज स्कूलों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत सी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने पालकों से अनुरोध किया कि अपने बच्चों के शिक्षकों से सतत संपर्क में रहें। इससे बच्चे के पढ़ाई लिखाई के बारे में जानकारी मिलेगी ही साथ ही आपकी सहभागिता से बच्चे के गलत संगत में जाने की आशंका भी नही होगी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पालकों को सम्मानित भी किया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी साढ़े पांच हजार संकुलों में मेगा पालक शिक्षक मीटिंग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री महोदय ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में यह बात रखी कि प्राइवेट स्कूल में पीटीएम आयोजित होता है लेकिन सरकारी स्कूलों में यह नही होता है। इसे हमें लागू किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर यह पालक शिक्षक बैठक आयोजित किया जा रहा है। यह बच्चे के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाएगा। पालक शिक्षक बैठक का मुख्य उद्देश्य है पढ़ाई लिखाई और स्कूली गतिविधियों में शिक्षकों के साथ पालकों की सहभागिता हो। दादा ने बताया-मैं भी यहां से पढ़ा मेरा पोता भी यहीं से पढ़ रहा – डोंडापानी के श्री हरिसेवक चौहान ने बताया कि वे खुद इसी स्कूल से पढ़े हैं और अब उनका एक पोता यहां से पढ़कर अभी एमएससी कर रहा है। वहीं दूसरा पोता अभी जीव विज्ञान विषय के साथ कक्षा 11वीं में है। उन्होंने इस कार्यक्रम को शिक्षा गुणवत्ता बेहतर करने की दिशा में एक शानदार पहल बताया। उन्होंने कहा कि हमारे शिक्षक कहते थे मैं आपको तो पढ़ा ही रहा हूं आपके साथ आपके बच्चों की अच्छी शिक्षा का माध्यम भी बन रहा हूं क्योंकि आप शिक्षित होंगे तो आपका बच्चा भी निश्चित रूप से शिक्षित होगा। पालक शिक्षक के बीच संवाद से बच्चे के शिक्षा के स्तर की निरंतर मॉनिटरिंग होगी और उनकी नींव मजबूत होगी। इसी प्रकार फिलसिता कुजूर ने बताया कि मैं ज्यादा पढ़ी लिखी नही हूं लेकिन अपनी पोती को अच्छे से पढ़ाने लिखाने का प्रयास कर रहे हैं। पालक शिक्षक बैठक सभी पालकों को उनके बच्चों के बारे में जानकारी मिलेगी जिससे वे घर में भी बच्चों पर मेहनत कर पाएंगे। recent visitors 114

रायपुर रेलवे स्टेशन पर टला हादसा, आधा दर्जन रेल यात्री लिफ्ट में फंसे, लिफ्ट का दरवाजा तोड़ निकाला बाहर

रायपुर छत्तीसगढ़ के रायपुर रेलवे स्टेशन से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां प्लेटफार्म नंबर पर एक पर लगे लिफ्ट में आधा दर्जन रेल यात्री फंस गए, जिससे स्टेशन पर हड़कंप मच गया। फंसे हुए लोगों को दरवाजा तोड़कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। जानकारी के अनुसार दूसरे प्लेटफार्म से जब ओवरब्रिज क्रॉस कर यात्री प्लेटफार्म नंबर एक पर आ रहे थे, इसी दौरान अचानक, लिफ्ट में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इससे लिफ्ट रुक गई। लिफ्ट के रुक जाने से उसमें सवार रेल यात्रियों में घबराहट फैल गई। लिफ्ट में एक बच्‍चा सहित पांच यात्री सवार थे। तुरंत इस घटना की जानकारी स्‍टेशन अधीक्षक को दी गई। स्टेशन प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत राहत कार्य शुरू किया और लिफ्ट का दरवाजा तोड़कर फंसे हुए रेल यात्रियों को बाहर निकाला। इस घटना ने स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेलवे अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और लिफ्ट की नियमित जांच और रखरखाव के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। घटना के बाद लिफ्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से इस असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है और उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। recent visitors 108

दूसरे देशों के साथ जर्मनी की वायु सेना भी पहली बार भारतीय जमीन पर सैन्य अभ्यास में शामिल हो रही है

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना पहली बार कई देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही है. इसमें दूसरे देशों के साथ जर्मनी की वायु सेना भी पहली बार भारतीय जमीन पर सैन्य अभ्यास में शामिल हो रही है. दुनिया के कई हिस्सों से दर्जनों युद्धक विमानों का बेड़ा दक्षिण भारत के सुलुर एयरबेस पर पहुंच चुका है. मंगलवार से शुरू हो रहा यह सैन्य अभ्यास कई मामलों में अनोखा है. इसे तरंग शक्ति नाम दिया गया है. इसमें जर्मनी समेत 10 देश अपने विमानों के साथ हिस्सा ले रहे हैं. इस मौके पर जर्मन रक्षा मंत्री भी भारत आए हैं. पर्यवेक्षकों को भी मिला दें तो कुल 18 देशों की इसमें भागीदारी है. दक्षिण एशिया में इस तरह के सैन्य अभ्यास कम ही होते हैं. भारतीय वायु सेना ने 51 मित्र देशों को इस सैन्य अभ्यास के लिए निमंत्रण भेजा था. यह अभ्यास दो चरणों में हो होगा. पहला चरण मंगलवार, 6 अगस्त से 14 अगस्त तक है. इसमें जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन भारत के साथ युद्ध की अलग-अलग स्थितियों का अभ्यास करेंगे. भारत और जर्मनी रक्षा संब्ध बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं तरंग शक्ति का दूसरा चरण इसी महीने के आखिर में होना है. इसके लिए राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर तैयारी चल रही है. इसमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, सिंगापुर, ग्रीस, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका हिस्सा लेंगे. पिछले हफ्ते भारतीय वायु सेना के वाइस चीफ एयर मार्शल एपी सिंह ने पत्रकारों से कहा, "इस अभ्यास का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हमारे मित्रों के साथ रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करना है." जर्मन विमानों पर रहेगी नजर पहली बार जर्मनी के विमान इस अभ्यास के लिए भारत आए हैं. इस अभ्यास से पहले ही दोनों देश अपने रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में बढ़ने का एलान कर चुके हैं. जर्मन वायु सेना लुफ्तवाफे यूरोफाइटर टायफून जेट विमानों का बेड़ा ले कर आई है. इसके साथ ही एयरबस ए400एम परिवहन विमान को भी भारतीय अभ्यास में तैनात किया गया है. भारतीय सेना अंतरराष्ट्रीय बाजार में मध्यम आकार के परिवहन विमानों की तलाश में है. वायु सेना के रिटायर हो चुके एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने डीडब्ल्यू को बताया, "भारतीय वायु सेना मध्यम आकार के परिवहन विमानों की तलाश में है. इसके लिए तीन विमानों पर नजर हैः ब्राजील का एमब्रेयर सी-390, एयरबस ए400एम जिसमें जर्मनी साझीदार है और लॉकहीड सी-130 जो अमेरिका की ओर से पहले ही उड़ान भर रहे हैं." चोपड़ा ने यह भी कहा, "हमने जर्मनों और फ्रांसीसियों के साथ मध्यपूर्व में कुछ अभ्यासों के दौरान एयरबस ए400एम को पहले उड़ाया है, वहां इन देशों ने हमें ये विमान दिखाए थे. देखते हैं आगे यह कैसे बढ़ता है." भारत को लेकर जर्मन कंपनियों की उम्मीद बढ़ी रक्षा पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह अभ्यास भारत को यूरो फाइटर और ए400एम को वास्तविक परिस्थितियों में परखने का एक अच्छा मौका देगा. दिल्ली में मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की एसोसिएट फेलो स्वास्ति राव का कहना है, "जर्मनी के ए400एम की भार उठाने की क्षमता 37 टन है, अगर आप भारत के टेंडर को देखें तो, हमारी जो जरूरत है, जर्मनी उससे थोड़ा ज्यादा दे रहा है जो भारत के लिए अच्छा है." राव ने ध्यान दिलाया कि भारत को मध्यम आकार के परिवहन विमान की जरूरत लद्दाख इलाके में चीन के साथ चल रहे तनाव की वजह से है. राव का कहना है, "अगर आप जानते हैं कि बेहद ऊंचाई वाले ये इलाके कितने अहम हैं और कठिन हैं तो उन परिस्थितियों में ऐसे भार उठाने की क्षमता वाले विमान हमारे हक में होंगे और हम बेहतर योजना बना सकेंगे." राव के मुताबिक समय की भूमिका अहम होती है और 2-3 विमानों के बार-बार चक्कर लगाने से ऐसे हालात में काम नहीं बनता. इसकी बजाय एक ही साथ सब कुछ ले जाने की क्षमता काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. भारत क्या हासिल करना चाहता है बड़े अंतरराष्ट्रीय अभ्यास के साथ भारत अपने आपको भारत प्रशांत श्रेत्र में एक मजबूत ताकत के रूप में दिखाना चाहता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रूस पर निर्भर रही भारतीय वायु सेना में इस विशाल सैन्य अभ्यास के जरिए पश्चिमी देशों के ज्यादा उन्नत हथियारों के शामिल होने से आए बदलाव को भी दिखाने की कोशिश हो रही है. दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना ने इस अभ्यास के जरिए अपनी बढ़ती ताकत का भी प्रदर्शन किया है. चोपड़ा का कहना है, "इस तरह के जटिल और कई तरह की ताकत वाले अभ्यास में बड़ी योजना बनानी पड़ती है. कई सारे बड़े ताकत वाले विमान उड़ान भरेंगे. कई कई महीनों तक योजना बनाने और वायु शक्ति के मामले में आपसी समझ को बढ़ाने के साथ ही वास्तविक अभियानों पर हमारा ध्यान है. यह सब सुलुर में दिखेगा." जर्मनी का क्या फायदा है? जर्मनी का भारत के प्रति रुख बदल रहा है. खासतौर से यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जर्मनी भारत के साथ रक्षा संबंधों को आगे बढ़ा रहा है. जर्मनी की दिलचस्पी भारत प्रशांत क्षेत्र में भी है क्योंकि चीन उस इलाके में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और इलाके के देशों पर उसने दबाव बढ़ाने की नीति अपनाई है. इस स्थिति में भारत के साथ रक्षा समझौते काफी अहम साबित होंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत दिलचस्पी होते हुए भी भारत प्रशांत क्षेत्र में जर्मनी के लिए अकेले बहुत कुछ करना संभव नहीं होगा क्योंकि जर्मन मॉडल डिफेंस प्लेयर का मॉडल नहीं है. जर्मनी के पास बेहतहीन रक्षा उद्योग है लेकिन मजबूत सेना नहीं.   recent visitors 108