पूजा खेडकर के काले कारनामों की लिस्ट कभी वो दृष्टिबाधित बनीं, तो कभी उन्होंने मानसिक रोगी का सर्टिफिकेट लगाया

नई दिल्ली आईएएस की नौकरी गंवा चुकी पूजा खेडकर इन दिनों सुर्खियों में हैं। उनके फर्जीवाड़ों की पूरी फेहरिस्त सामने आ गई थी। सोशल मीडिया पर भी उनकी काफी आलोचना होती रहती है। उनके फर्जी दस्तावेजों के बारे में जब लोगों को पता चला, तब तो लोग और भी ज्यादा भड़क गए। अब सोशल मीडिया पर उनके द्वारा किए गए फर्जीवाड़े की लिस्ट वायरल हो रही है, जिसमें बताया गया है कि उन्होंने किस-किस साल में यूपीएससी एग्जाम अटेम्प्ट किए थे, और उसमें क्या घपलेबाजी की थी। यूजर प्रशांत सिंह ने हाल ही में एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है, जिसमें पूजा खेडकर के काले कारनामों की लिस्ट है। कभी वो दृष्टिबाधित बनीं, तो कभी उन्होंने मानसिक रोगी का सर्टिफिकेट लगाया। फिर माता-पिता के नामों में भी फेरबदल किया। अपने नाम में भी कई तरह के बदलाव किए। ये फोटो शेयर करते हुए प्रशांत ने लिखा- ‘एक ओलंपिक्स गोल्ड तो पूजा खेडकर को भी मिलना चाहिए। क्या गजब और कंसिस्टेंट परफॉर्मेंस है!’ दरअसल, पूजा ने जितनी बार भी यूपीएससी की परीक्षा दी, उसमें उन्होंने फर्जी दस्तावेज लगाए, जिससे उन्हें कुछ रियायत मिल जाए। इस लिस्ट को देखकर आपको समझ आएगा कि यूपीएसी ने उन्हें क्यों घेरे में लिया। इस ट्वीट पर कुछ लोगों ने कमेंट किया है। एक ने सवाल किया कि आखिर अब जाकर यूपीएससी को कैसे पता चला कि उसने घपलेबाजी की है? वहीं एक ने कहा- ‘इसे ITUS अवॉर्ड देना चाहिए!’ अगर आप इस कमेंट का अर्थ नहीं समझ पाए, तो बता दें कि अक्षय कुमार, परेश रावल और सुनील शेट्टी की फिल्म फिर हेरा फेरी में अक्षय कुमार एक सीन में बोलते हैं कि उनके पास एक डिग्री है, जिसका नाम है आईटस। जब बिपाशा बासु उस डिग्री का फुल फॉर्म पूछती हैं, तो सुनील शेट्टी तपाक से बोलते हैं- ‘इसकी टोपी उसके सर दरअसल, सुनील, अक्षय के घपलेबाजी करने के स्वभाव पर व्यंग्य करने के लिए ऐसा बोलते हैं। इसी से जोड़ते हुए ट्विटर पर भी यूजर ने पूजा खेडकर को ये अवॉर्ड देने की बात कही।     recent visitors 113

खरीफ फसलों का बुआई क्षेत्र 3 प्रतिशत बढ़कर 904.60 लाख हेक्टेयर हो गया

नई दिल्ली  भारत में इस वर्ष खरीफ फसलों का बुआई क्षेत्र 3 प्रतिशत बढ़कर 904.60 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 879.22 लाख हेक्टेयर था। कृषि मंत्रालय की ओर से एकीकृत किए गए डेटा से यह जानकारी मिली है। धान, दलहन, तिलहन, बाजरा, और गन्ना जैसी मुख्य फसलों की बुआई में बढ़त देखने को मिली है। इसकी वजह देश में सामान्य से अच्छा मानसून होना है। कृषि क्षेत्र में आगे और बढ़त देखने को मिल सकती है। इसकी वजह आम बजट 2024-25 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र में उत्पादन बढ़ने और लचीलापन लाने के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित करना है। कृषि क्षेत्र में उत्पादकता और लचीलापन बढ़ाने के लिए किए गए ऐलानों में तिलहन में आत्मनिर्भरता और सब्जी उगाने के लिए बड़े स्तर का क्लस्टर आदि शामिल है। सीतारमण ने कहा कि सरकार की रणनीति सरसों, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, और सूरजमुखी जैसे तिलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। सरकार इनके उत्पादन, भंडारण और विपणन को मजबूत करेगी। वित्त मंत्री की ओर से आगे कहा गया है कि बड़े स्तर पर सब्जी उत्पादन के क्लस्टर ऐसे स्थानों पर बनाए जाएंगे, जहां खपत काफी ज्यादा है। सरकार उत्पादों के संग्रहण, भंडारण और विपणन सहित सब्जी आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए किसान-उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और स्टार्टअप को बढ़ावा देगी। सरकार की ओर से सभी बड़ी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू किया गया है, जिससे किसानों को उनकी फसल की लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत मार्जिन मिल सके।     recent visitors 110

सचिन वाझे ने फडणवीस को पत्र लिखकर अनिल देशमुख और जयंत पाटिल पर रंगदारी वसूलने का आरोप लगाया

मुंबई निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाझे ने गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख और राकांपा (एसपी) के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल पर रंगदारी वसूलने का आरोप लगाया है। सचिन वाझे ने कहा कि रंगदारी वसूली का पैसा वह खुद अनिल देशमुख और जयंत पाटिल के पीए तक पहुंचाता था। वाझे ने यह भी कहा कि अगर सरकार इस मामले का नार्को टेस्ट करवाती है तो वह इसके लिए पूरी तरह से तैयार है। सचिन वाझे ने ये बातें मीडिया के साथ उस वक्त साझा कीं, जब उसे जेजे अस्पताल में मेडिकल चेकअप के लिए लाया गया। इसके बाद इसे लेकर राजनीति गर्मा गई है। पूर्व रेल राज्य मंत्री राव साहेब दानवे ने कहा कि इस मामले की छानबीन की जानी चाहिए कि आखिर वसूली का पैसा कहां-कहां तक पहुंचा है। यह कोई सामान्य बात नहीं है। वाझे के आरोप गंभीर हैं। पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि इससे पहले वाझे ने 100 करोड़ की वसूली का आरोप लगाया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि आरोपित के वक्तव्य पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। अनिल देशमुख ने कहा कि सचिन वाझे से गृहमंत्री फडणवीस झूठा बयान दिलवा रहे हैं और यह सब फडणवीस की ही नई चाल है। शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राऊत ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की राजनीति को निचले स्तर पर ला दिया है। कल मैं भी जेल में बंद कई आरोपितों को खड़ा कर कहवा सकता हूं कि देवेंद्र फडणवीस ने उनसे वसूली करवाई और पैसे लिये। इसलिए सचिन वाझे के आरोपों का कोई महत्व नहीं है। संजय राऊत ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को करारा झटका लगा है, इसलिए भाजपा अब क्रिमिनल्स का सहारा विधानसभा चुनाव के लिए ले रही है। उल्लेखनीय है कि सचिन वाझे को उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित अंटिलिया बंगले के पास जिलेटिन बम रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उस पर एक व्यापारी की हत्या का भी आरोप है। इस मामले में तत्कालीन मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की रंगदारी वसूलने का आदेश देने का आरोप लगाया था। इसी आरोप के बाद अनिल देशमुख ने गृहमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद इस आरोप की छानबीन मुंबई पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने किया था। परमवीर सिंह ने जांच एजेंसियों को बताया था कि उनके पास कोई सबूत नहीं हैं, उन्होंने सुनी सुनाई बात के आधार पर आरोप लगाया था। जब मामले की छानबीन चल रही थी, उस समय जेल में बंद सचिन वाझे ने भी मुंबई के होटलों से 100 करोड़ रुपये की रंगदारी वसूलकर अनिल देशमुख के पीए को देने का आरोप लगाया था। हालांकि, कोर्ट ने उनके आरोपों को मानने से मना कर दिया था। अनिल देशमुख को जमानत मिल गई है। पिछले सप्ताह अनिल देशमुख ने कहा था कि जब वे जेल में थे, उस समय गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समित कदम नामक व्यक्ति को भेजकर उन्हें कहा था कि वे उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, अजीत पवार और पार्थ पवार पर झूठा आरोप लगाएं, जिससे इन सबको गिरफ्तार किया जाए। इसके बाद उन्हें ईडी छोड़ देगा। अनिल देशमुख ने कहा कि मैंने ऐसा नहीं किया, इसलिए ईडी की कार्रवाई की गई थी। अनिल देशमुख के इस वक्तव्य के एक सप्ताह बाद सचिन वाझे ने अपना पुराना आरोप फिर से नए तरीके से लगाते हुए देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। हालांकि, इस पत्र पर गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।   recent visitors 103

लक्ष्य सेन को ओलंपिक में स्वर्ण पदक की उम्मीदों को बरकरार रखने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा

पेरिस भारतीय बैडमिंटन की सनसनी लक्ष्य सेन रविवार को जब यहां पेरिस ओलंपिक खेलों के पुरुष एकल सेमीफाइनल में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन विक्टर एक्सेलसन से भिड़ेंगे तो उन्हें अपने पहले स्वर्ण पदक की उम्मीदों को बरकरार रखने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। पहली बार ओलंपिक में खेल रहे सेन ने शुक्रवार को क्वार्टर फाइनल मैच में चीनी ताइपे के चाउ टीएन चेन को 19-21 21-15 21-12 से हराकर भारतीय बैडमिंटन में नया इतिहास रचा। वह ओलंपिक खेलों के व्यक्तिगत पुरुष एकल के सेमीफाइनल में जगह बनाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं। लेकिन अब उनका सामना उस एक्सेलसन से है जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अपने प्रतिद्वंदियों को कोई मौका नहीं दिया है। डेनमार्क के ओडेंस के रहने वाले इस 30 वर्षीय खिलाड़ी ने तोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक और रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। वह 2017 और 2022 में विश्व चैंपियन रहे। उनके नाम पर 2016 में थॉमस कप की जीत शामिल है। इसके अलावा उन्होंने कई बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर और सुपर सीरीज खिताब जीते हैं। यही नहीं वह दिसंबर 2021 से जून 2024 तक विश्व के नंबर एक खिलाड़ी भी रहे। विश्व चैंपियनशिप 2021 के कांस्य पदक विजेता सेन को डेनमार्क के खिलाड़ी से अभी तक सात बार हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने एक्सेलसन को केवल एक बार 2022 में जर्मन ओपन में हराया था। भारत के 22 वर्षीय खिलाड़ी ने हालांकि अपने से अधिक रैंकिंग के खिलाड़ियों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया है। पेरिस ओलंपिक खेलों में ही उन्होंने ग्रुप चरण में दुनिया के चौथे नंबर के खिलाड़ी जोनाथन क्रिस्टी और क्वार्टर फाइनल में विश्व के 11वें नंबर के खिलाड़ी चाउ को हरा कर अपने कौशल का शानदार नमूना पेश किया। एक्सेलसन ने इस सत्र में केवल एक खिताब मलेशिया मास्टर्स के रूप में जीता है। जून के शुरू में सिंगापुर ओपन के दौरान उनके टखने में चोट लग गई थी जिसके कारण उन्हें इंडोनेशिया ओपन से हटना पड़ा था। दूसरी तरफ सेन अभी अपने करियर में सबसे फिट नजर आ रहे हैं। उनका रक्षण शानदार है क्योंकि उन्होंने कोर्ट को अच्छी तरह से कवर किया है। एक्सेलसन को प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में बाई मिली थी। क्वार्टर फ़ाइनल में उन्होंने सिंगापुर के पूर्व विश्व चैंपियन लोह कीन यू को हराया। डेनमार्क का यह खिलाड़ी अपने तीखे स्मैश के लिए जाना जाता है और सेन को धैर्य से उनका सामना करना होगा। सेन के पास ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने का यह बेहतरीन मौका है। अगर वह एक्सेलसन से पार पाने में नाकाम रहते हैं तो उन्हें फिर कांस्य पदक के लिए चुनौती पेश करनी होगी।     recent visitors 119

मध्य प्रदेश सरकार छह और सात अगस्त को दो किश्त में 5 हजार करोड़ रुपये का कर्जा लेगी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार पर इस वित्तीय वर्ष में चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो जाएगा। इसी के साथ मध्य प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति 50 हजार रुपये से अधिक का कर्जदार होगा। अब तक सरकार 3.75 लाख करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। अब छह और सात अगस्त को दो किस्तों में पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाएगा। वहीं, मध्य प्रदेश के कुल बजट की बात करें तो 3.65 लाख करोड़ रुपये का बजट है, लेकिन इससे अधिक मध्य प्रदेश सरकार पर कर्ज है। जीडीपी का तीन प्रतिशत लोन ले सकती है सरकार वित्तीय वर्ष 2024-25 की समाप्ति तक राज्य सरकार पर चार लाख 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर्ज होने का अनुमान है, क्योंकि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रविधान के अनुसार सरकार राज्य सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत तक ऋण ले सकती है। आधा प्रतिशत ऋण ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों के लिए विशेष परिस्थिति में लिया जा सकता है। वर्ष 2024-25 में सरकार 65 हजार करोड़ रुपये तक कर्ज ले सकती है। इसका उपयोग विकास परियोजना और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए किया जा सकता है। ऐसे बढ़ा प्रदेश पर कर्ज मार्च 2023 मार्च की स्थिति में प्रदेश पर कुल कर्ज 3,19,109 करोड़ रुपये था। जुलाई 2024 तक मध्य प्रदेश पर 3,75,578 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है। वर्तमान प्रत्येक व्यक्ति है 45 हजार रुपये का कर्जदार जुलाई में लाए गए 3.65 लाख करोड़ रुपये के बजट में कुल राजस्व आय 2.63 लाख करोड़ रुपये है और साल भर के खर्च 3.26 लाख करोड़ रुपये हैं। ऐसे में राज्य सरकार को खर्चों के लिए 31 मार्च 2025 तक और कर्ज लेना होगा। इसमें बाजार से 65 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा सकता है। अभी मप्र सरकार पर जो कर्ज है उसके अनुमान में यह बात सामने आती है कि वर्तमान में मप्र का प्रत्येक व्यक्ति पर 45 हजार रु. का कर्जदार है। मार्च 2025 तक प्रत्येक व्यक्ति 50 हजार से अधिक के कर्ज में होगा। recent visitors 94

CAG रिपोर्ट केअनुसार सिंचाई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी से तेलंगाना के खजाने को 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान

हैदराबाद  तेलंगाना में 1983 से 2018 के बीच शुरू हुई 20 सिंचाई परियोजनाओं की लागत मार्च 2023 तक एक लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये हो गई जिसका कारण इनके क्रियान्वयन में विलंब होना है। भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।  राज्य विधानसभा में रखी गई कैग रिपोर्ट (2022-23 के लिए) के अनुसार, परियोजनाओं के पूरा न होने से राज्य आर्थिक विकास के अपेक्षित लाभ से वंचित हो रहा है और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण में निवेश से मिलने वाले लाभ की कोई गारंटी नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य सरकार ने किसी भी सिंचाई परियोजना के वित्तीय परिणामों को सामने नहीं रखा है। कैग ने कहा, ‘‘वर्ष 2023 तक पूरी होने वाली 20 सिंचाई परियोजनाएं (1983 से 2018 के बीच शुरू) अधूरी हैं। इन परियोजनाओं की मूल लागत 1,02,388 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,06,977 करोड़ रुपये हो गई है, यानी विलंब की वजह से लागत में 1,04,589 करोड़ रुपये (102 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है।’ मार्च 2023 तक इन परियोजनाओं पर 1,73,564 करोड़ रुपये का व्यय हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार पर 13 अधूरी सिंचाई परियोजनाओं के संबंध में 8,971 करोड़ रुपये की देनदारी है। कैग रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इन परियोजनाओं/निर्माण के पूरा होने में अत्यधिक देरी से न केवल सरकार पर वित्तीय बोझ साल दर साल बढ़ता जा रहा है, बल्कि जनता को अपेक्षित लाभ से भी वंचित होना पड़ रहा है।’’   recent visitors 120

अनजाने में जातिसूचक शब्द के प्रयोग से नहीं चल सकता एससी-एसटी एक्ट का केस :इलाहाबाद हाई कोर्ट

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि आरोपित नहीं जानता कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति का है तो विवाद होने पर एससी-एसटी एक्ट लागू नहीं होगा। कोर्ट ने जालौन जिले में टवेरा कार की सामने से आल्टो कार में टक्कर मारना और गाली-गलौच, मार-पीट करने पर आईपीसी सहित एससी-एसटी एक्ट में दर्ज आपराधिक केस कार्यवाही रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि विवेचना अधिकारी ने सतही तौर पर विवेचना की। किसी चश्मदीद गवाह का बयान नहीं लिया और यह पता करने की कोशिश नहीं की कि क्या घटना पर एससी-एसटी एक्ट का अपराध बनता भी है या नहीं और चार्जशीट दाखिल कर दी। किसी के चोटिल होने की रिपोर्ट नहीं है और पहचान परेड भी नहीं कराई गई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले से कहा कि जब आरोपित को मालूम ही नहीं था कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति का है और अनजाने में अपमानित किया गया है तो एससी-एसटी एक्ट लागू नहीं होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने नसीम खान, फहीम व पांच अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने 27 जून 19 को दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश व सम्मन रद्द कर दिया है। मालूम हो कि शिकायतकर्ता आल्टो कार चला रहा था। याची व अन्य आरोपित टवेरा कार चला रहे थे। पेट्रोल पम्प पर याची ने अपनी कार से ऑल्टो में टक्कर मारी और मार-पीट की। जिस पर एफआईआर दर्ज की गई थी। ST/SC Act का दुरुपयोग चिंतनीय: इलाहाबाद हाई कोर्ट देश में एससी-एसटी ऐक्ट के दुरुपयोग को लेकर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं। ये सवाल यूँ ही नहीं उठाए जाते हैं, इसके ऐसे कई उदाहरण हैं कि फर्जी SC-ST के कारण कई लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए तबाह हो गई। कई लोगों के जीवन के अनमोल वर्ष जेल में बीते और बाद में पता चला कि केस झूठा था। ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और कठोर टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई करने के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक सरकारी कर्मचारी के इशारे पर एक पति-पत्नी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। जस्टिस प्रशांत कुमार ने कहा, “अगर उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की गतिविधियों की अनुमति किसी और के द्वारा नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी के द्वारा दी जाती है तो यह न्यायालय अपने कर्तव्य में असफल होगा। यहाँ भू-माफियाओं, राजस्व अधिकारियों और तत्कालीन एसएचओ की मिलीभगत है, जिसमें एक जोड़े को गलत तरीके से आपराधिक कार्यवाही में फंसाया गया है और उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर किया गया।” याचिकाकर्ता अलका सेठी और उनके पति ध्रुव सेठी द्वारा दायर याचिका पर FIR रद्द करने का आदेश कोर्ट ने दे दिया। याचिकाकर्ताओं पर आरोप था कि सतपुड़ा में सड़क के खसरा नंबरों का लेखपाल निरीक्षण कर रहा था। इस दौरान अलका और उनके पति से लेखपाल का सामना हुआ। याचिका के अनुसार दोनों दंपत्ति ने लेखपाल को जातिसूचक गालियाँ दीं। कथित तौर पर ध्रुव सेठी ने कहा कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो वह उसकी पत्नी के साथ बदतमीजी और भ्रष्टाचार के मुकदमे में फँसा देगा। आरोप है कि याचिकर्ता ने लेखपाल को बंधक बना लिया था और बिहारीगढ़ एसएचओ के हस्तक्षेप के बाद लेखपाल को रिहा कराया जा सका। इसके बाद लेखपाल ने SC/ST ऐक्ट सहित विभिन्न धाराओं में पति-पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज करा दी। इसके बाद पूरे आपराधिक कार्यवाही के साथ-साथ विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अधिनियम), सहारनपुर द्वारा पारित समन एवं आरोप पत्र को चुनौती देते हुए पति-पत्नी ने अदालत का रुख किया। इस पर तर्क दिया गया कि ध्रुव सेठी ने जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था और म्युटेशन के बाद सीमांकन के लिए आवेदन किया था। सीमांकन के आदेश के बावजूद राजस्व अधिकारियों ने इसे पूरा नहीं किया। अधिकारी सीमांकन नहीं कर रहे थे और इसके लिए आवेदकों को इधर-उधर दौड़ा रहे थे। जब उन पर दबाव डाला गया तो उन्होंने आश्वासन दिया कि सीमांकन पक्षों के सामने कराया जाएगा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्होंने आवेदकों की अनुपस्थिति में सीमांकन करना शुरू कर दिया। जब इसका विरोध किया गया तो हाथापाई शुरू हो गयी। दंपति ने कोर्ट को बताया कि स्थानीय भू-माफिया, जिनका उस क्षेत्र में और राजस्व पर भी प्रभाव था, और स्थानीय पुलिस अधिकारी ने एक साजिश रची। वे उनकी जमीन हड़पना चाहते थे। इसी वजह से उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। इसके साथ ही दंपति ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि लेखपाल की जाति क्या है और ना ही जाति से संबंधित उन्होंने कोई बात कही। इस पर न्यायालय ने कहा कि चौंकाने वाली बात है कि ST/SC ऐक्ट के प्रावधानों का कुछ लोगों द्वारा व्यक्तिगत प्रतिशोध, व्यक्तिगत हितों या खुद को बचाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। न्यायालय ने कहा कि यह कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एक भी सबूत नहीं था कि उन्हें लेखपात की जाति के बारे में पता था। कोर्ट ने कहा कि यह विश्वास करना कठिन है कि आवेदकों ने लेखपाल के खिलाफ जाति-संबंधी शब्दों का इस्तेमाल किया था। राजस्व अधिकारी को बाँधने की घटना को भी कोर्ट ने अविश्वसनीय बताया और कहा कि एक महिला एवं एक पुरुष इतने लोगों कैसे हावी हो सकते हैं और एक व्यक्ति को बाँध सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि FIR पढ़ने से कोई मामला नहीं बनता। इसलिए इसे रद्द किया जाता है। SC/ST Act के दुरुपयोग को लेकर कई कोर्ट सख्त यह कोई पहली बार नहीं है कि किसी कोर्ट ने ST/SC ऐक्ट के गलत इस्तेमाल पर इस तरह की कठोर टिप्पणी की है। इससे पहले इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। फरवरी 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे ही व्यक्ति को निर्दोष करार दिया था, जो पिछले 20 वर्षों से जेल में कैद था। व्यक्ति को बलात्कार के आरोप और SC/ST एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने आरोपित की रिहाई की बात कहते हुए मामले पर तल्ख़ टिप्पणी भी … Read more