10 लाख भक्तों के लिए महाशिवरात्रि दर्शन प्लान, जानिए कहां से होगा प्रवेश और क्या रहेगी व्यवस्था

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के मंदिर में आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति ने पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। रविवार को कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए मंदिर क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। महाशिवरात्रि महापर्व 2026 (15 फरवरी) पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर और 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद या पासधारी श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे। भक्तों को सुलभ और सुरक्षित दर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भस्म आरती दर्शन, लड्डू प्रसाद, पूछताछ केंद्र, पार्किंग, जूता स्टैंड, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर मंदिर परिसर में अहम बैठक आयोजित की गईं। जिसमें कई निर्णय लिए गए। बैठक में कलेक्टर एवं मंदिर प्रशासक रौशन सिंह, प्रथम कौशिक, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र, सहायक प्रशासक आशीष फलवाडीया सहित मंदिर समिति के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सामान्य श्रद्धालुओं की प्रवेश-निर्गम व्यवस्था सामान्य श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला के समीप बने द्वार से प्रवेश करेंगे। वे भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप, नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर चौराहा होते हुए अपने गंतव्य की ओर जाएंगे। शीघ्र दर्शन व पासधारी श्रद्धालुओं की व्यवस्था शीघ्र दर्शन 250 रुपए टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए अलग से बैरिकेटिंग की गई है। ये श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, अशोक सेतु, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से दर्शन करेंगे। इसके अलावा शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालु हरसिद्धि पाल पार्किंग, बड़ा गणेश गली, प्रीपेड बूथ तिराहा, शहनाई जिगजेग, द्वार क्रमांक-01 से मंदिर में प्रवेश कर दर्शन कर सकेंगे। भस्म आरती दर्शन व्यवस्था महाशिवरात्रि पर्व पर भस्म आरती के लिए पंजीयनधारी श्रद्धालुओं का प्रवेश मानसरोवर भवन और द्वार क्रमांक-01 से निर्धारित किया गया है। पार्किंग सुविधा के लिए     पार्किंग : सामान्य श्रद्धालु के लिए कर्कराज पार्किंग, मेघदूत पार्किंग में व्यवस्था की गई है।     शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए कार्तिक मेला ग्राउंड, राणौजी की छत्रि, शगुन गार्डन, महाकाल मंडपम् पर व्यवस्था की गई है।     जूता स्टैंड : सुविधा के लिए भील समाज धर्मशाला, झालरिया मठ एवं हरसिद्धि पाल पर व्यवस्था की गई।     शीघ्र दर्शन काउंटर : कर्कराज पार्किंग, हरसिद्धि पाल पार्किंग पर की जाएगी।     लड्डू प्रसाद : काउंटरों की व्यवस्था नृसिंहघाट रोड पर एवं हरसिद्धि रोड पर की जाएगी। प्रशासन की अपील मंदिर समिति और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें और धैर्य बनाए रखें, जिससे सभी भक्त सुचारू रूप से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   recent visitors 35

कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल

दलहन क्षेत्र का राष्ट्रीय सम्मेलन 7 फरवरी को सीहोर के अमलाहा में दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर होगा साबित : कृषि मंत्री  कंषाना कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल भोपाल प्रदेश के अमलाहा, जिला सीहोर में 7 फरवरी को दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के लिये एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की मूल संवेदनाओं, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारीगण, दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, सरकारी बीज उत्पादक संस्थाएँ, दाल उद्योग से संबंधित प्रतिनिधि एवं अन्य सहयोगी एजेंसियाँ भाग लेंगी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता सुधार पर अपने विचार साझा करेंगे। यह सम्मेलन दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों तक नवीन शोध, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती पद्धतियों तथा बाज़ार से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है, जिससे दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। साथ ही विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय स्तर पर दलहन विकास की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।   recent visitors 38

भारतीय शोधकर्ताओं की खोज: बैक्टीरिया की मदद से मंगल की मिट्टी से बनेगी मजबूत ईंट, अंतरिक्ष मिशनों में मदद

बैंगलोर अंतरिक्ष यानी स्पेस सेक्टर में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है. इस लिस्ट में अब एक और गर्व की बात जुड़ गई है. पिछले साल इंटरनेशलन स्पेस स्टेशन जाकर लौटने वाले भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने अपने करियर में एक नई और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. उन्होंने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी IISc के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक ऐसी रिसर्च की है, जो भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बना सकती है. यह स्टडी इस बात पर फोकस है कि क्या मंगल ग्रह की मिट्टी से ही वहां कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स यानी इमारतें बनाने का सामान जैसे- ईंट, सीमेंट आदि तैयार की जा सकती है. इस रिसर्च का मकसद सीमेंट जैसी कार्बन उत्सर्जन करने वाले साधानों पर निर्भरता को मंगल ग्रह के साथ-साथ पृथ्वी पर भी कम करना है. इस रिसर्च जर्नल को PLOS One में पब्लिश किया गया है. शुभांशु शुक्ला फिलहाल IISc में मास्टर डिग्री कर रहे हैं. उनका कहना है कि भविष्य की मंगल यात्राओं में अगर हमें सड़कें, लैंडिंग पैड या रोवर के लिए मजबूत ज़मीन चाहिए, तो वहां की मिट्टी का ही इस्तेमाल करना सबसे बेहतर तरीका होगा. इससे पृथ्वी से भारी कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स को लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेही और मिशन ज्यादा टिकाऊं हो पाएंगे. रिसर्च में इस्तेमाल हुआ खास बैक्टीरिया इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास तरह के बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया है, जो मिट्टी के कणों को आपस में जोड़कर ईंट जैसा स्ट्रक्चर बना सकते हैं. पहले के एक्सपेरीमेंट्स में Sporosarcina pasteurii नाम का बैक्टीरिया यूज़ किया गया था. इस बार टीम ने बेंगलुरु की मिट्टी से मिला एक ज्यादा मजबूत बैक्टीरिया चुना, जिससे बायोसीमेंटेशन का प्रोसेस बेहतर हो सके. हालांकि, मंगल ग्रह की मिट्टी में पाए जाने वाले परक्लोरेट नाम के जहरीले केमिकल ने वैज्ञानिकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी. जब बैक्टीरिया को सिर्फ परक्लोरेट के संपर्क में लाया गया, तो वो तनाव में आ गए और धीरे-धीरे बढ़ने लगे, आपस में चिपकने लगे. लेकिन जब वही बैक्टीरिया ईंट बनाने वाले जरूरी तत्वों के साथ मौजूद थे, तो उसके रिजल्ट्स काफी चौंकाने वाले निकले. रिसर्च की पहली ऑथर यानी लेखिका स्वाति दूबे के अनुसार, इस स्थिति में बैक्टीरिया एक खास तरह का मैट्रिक्स छोड़ते हैं, जो कमजोर बैक्टीरिया तक पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है. इससे ईंट बनने का प्रोसेस और मजबूत हो जाता है. अब वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को मंगल जैसे वातावरण में, खासकर ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड वाली परिस्थितियों में टेस्ट करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर ये प्लानिंग सफल रही, तो यह टेक्नोलॉजी न सिर्फ मंगल पर कंस्ट्रक्शन वर्क करने में मदद करेगी, बल्कि पृथ्वी पर भी पर्यावरण के अनुकूल एक अच्छा विकल्प बन सकती है. recent visitors 37

सदियों पुराने वृक्षों की पहचान: पन्ना में बरगद, पीपल, नीम समेत कई पेड़ों का दस्तावेजीकरण

पन्ना   दक्षिण पन्ना वनमण्डल में 100 वर्ष से अधिक आयु के प्राचीन वृक्षों की पहचान एवं संरक्षण के उद्देश्य से "हेरिटेज ट्री आइडेंटिफिकेशन" अभियान संचालित किया जा रहा है. इस पहल के अंतर्गत वनकर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर पुराने वृक्षों की जानकारी एकत्रित कर रहे हैं. उनके फोटो और विवरण संकलित किए जा रहे हैं तथा ग्रामीणों से संवाद कर वृक्षों से जुड़ी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जानकारियां भी संजोई जा रही है. अभियान का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को पहचान देना है. बरगद, पीपल, नीम सहित कई 100 वर्ष पेड़ों का दस्तावेजीकरण अभियान के तहत विभिन्न रेंजों में वन अमले द्वारा निरंतर सर्वे कार्य किया जा रहा है. रैपुरा रेंज में डिप्टी रेंजर रंजना नागर, मोहन्द्रा रेंज में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार, पवई रेंज में वनरक्षक सत्येंद्र सिंह भदौरिया, शाहनगर रेंज में वनरक्षक प्रेमनारायण वर्मा तथा सलेहा रेंज में वनरक्षक उमाशंकर पाल द्वारा अब तक सराहनीय प्रयास किए गए हैं. अनेक ग्रामों में बरगद, पीपल, नीम, आम, इमली और अन्य प्रजातियों के 100 से 200 वर्ष तक एवं अधिक पुराने वृक्षों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है. वृक्षों के ऐतिहासिक महत्व, स्थानीय मान्यताओं की जानकारी रैपुरा क्षेत्र में डिप्टी रेंजर रंजना नागर द्वारा ग्रामीण बुजुर्गों से विस्तृत चर्चा कर लगभग 20 ऐसे वृक्षों की जानकारी संकलित की गई, जिनकी आयु 100 से 200 वर्ष तक आंकी जा रही है. वरिष्ठ ग्रामीणों ने बताया कि कई वृक्ष धार्मिक आस्था से जुड़े होने के कारण आज भी सुरक्षित हैं, जिनके नीचे विभिन्न देवस्थलों की स्थापना की गई है. इस संवाद से वृक्षों के ऐतिहासिक महत्व, स्थानीय मान्यताओं तथा संरक्षण की परंपराओं को समझने में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई. शाहनगर रेंज में वनरक्षक प्रेमनारायण वर्मा द्वारा गुरझाई क्षेत्र एवं पतने-बघने नदी के पास लगभग 100 से 105 वर्ष पुराने सेमर और आम के वृक्ष चिन्हित किए गए. मोहन्द्रा रेंज में वनरक्षक जगदीश प्रसाद अहिरवार ने हथकुरी, कुंवरपुर और मोहन्द्रा ग्रामों में कई हेरिटेज ट्री की पहचान कर उनके फोटोग्राफ्स संकलित किए. जिनमें अनेक वृक्ष 150 वर्ष से अधिक पुराने पाए गए. पवई रेंज में वनरक्षक सत्येंद्र सिंह भदौरिया द्वारा बरगद, इमली और नीम सहित विभिन्न ग्रामों में 100 से 200 वर्ष तक आयु वाले वृक्षों का दस्तावेजीकरण किया गया. वहीं, सलेहा रेंज में वनरक्षक उमाशंकर पाल ने बुजुर्ग ग्रामीणों से चर्चा कर धार्मिक आस्था से जुड़े लगभग 110 से 120 वर्ष पुराने वृक्षों की जानकारी एकत्रित की. वन मण्डल द्वारा इस अभियान को जनसहभागिता से जोड़ते हुए सभी वन क्षेत्रों में ऐसे प्राचीन वृक्षों की पहचान और संरक्षण के प्रयास तेज किए जा रहे हैं. विभाग का मानना है कि स्थानीय समुदायों की सहभागिता और जागरूकता से न केवल जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रह सकेगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति और परंपरा दोनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा. recent visitors 39

कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही है वैज्ञानिक कृषि तकनीक की जानकारी कृषि रथ से किसानों को मिट्टी में मौजूद तत्वों के अनुसार फसल कॉम्बीनेशन की मिल रही जानकारी कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को मिल रही आधुनिक कृषि तकनीकों की ट्रेनिंग और जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि को आधुनिक तकनीक, परम्परागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाने तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान की दिशा में इस महा अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया गया है। बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद-सत्र के आयोजन के साथ ‘‘कृषि रथ’’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर बुरहानपुर विधायक मती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील कृषकगण उपस्थित रहे। कृषि रथ द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहुंचकर किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधिकरण, कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय, विभागीय योजना, ई-टोकन उवर्रक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन संबंधित योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। प्रगतिशील किसानों को उत्पादन लागत को कम करने के लिये सही मिट्टी, सही खेती एवं सही फसल का कॉम्बीनेशन की जानकारी भी दी जा रही है। ग्राम पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल आयोजित बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला एवं एमागिर्द में कृषक चौपाल का आयोजन किया गया। कृषक चौपाल में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली, प्राकृतिक खेती के आधार जैसेः-जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपर्णी अर्क को बनाने की विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मृदा के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों, मिट्टी नमूना लेने की विधि एवं संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग की अनुशंसा करने की सलाह दी गयी। दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए जायद फसल उड़द और मूंगफली के बारे में बताया गया एवं बुवाई के लिए प्रेरित भी किया गया। बुरहानपुर जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हो रही कृषक चौपालों में पराली प्रबंधन सहित योजनाओं एवं अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी जानकारी दी जा रही है। ग्राम बाकड़ी में लगी कृषि चौपाल, योजनाओं की दी जानकारी कृषक कल्याण वर्ष-2026 अंतर्गत बुरहानपुर जिले के ग्राम बाकड़ी में कृषि रथ पहुंचा। इस दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा चौपाल लगाकर ग्रामीणों को उन्नत कृषि एवं तकनीकियों की बारीकी से जानकारी दी गयी। ग्रामीणों को जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट व रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के उपाय बताये गये। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि रथ गांव-गांव पहुंचकर किसानों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दे रहा है। प्रदेश सरकार के नेतृत्व में जिले में समृद्ध किसान से समृद्ध प्रदेश बनाने के लिये निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रत्येक गुरूवार को ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ आयोजित बुरहानपुर जिले में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने एवं उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रति गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में ‘‘प्राकृतिक हाट बाजार’’ का आयोजन किया जा रहा है। हाट बाजार के अवलोकन के दौरान कलेक्टर  हर्ष सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है, इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ सुरक्षित एवं पौष्टिक उत्पाद प्राप्त होते है, अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती करने के लिये प्रोत्साहित करें।   recent visitors 40

इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य में प्रगति, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताए मप्र के विकास के संकेत

अधोसंरचना विस्तार के साथ बेहतर स्वास्थ्य संकेतकों की ओर तेज गति से अग्रसर हो रहा है म.प्र. : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सुदृढ़ हो रही हैं मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आम नागरिकों के बेहतर स्वास्थ्य के लिये मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त किया जा रहा है। समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य अधोसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है और आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ मध्यप्रदेश स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मातृ-शिशु स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 173 से घटकर 142 तथा शिशु मृत्यु दर (IMR) 41 से घटकर 37 हुई है। जननी सुरक्षा योजना एवं मुख्यमंत्री प्रसूति सहायता योजना के अंतर्गत लाखों लाभार्थियों को हजारों करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। नवजात एवं कुपोषण प्रबंधन में एसएनसीयू एवं एनआरसी की सफल डिस्चार्ज दरों में भी वृद्धि हुई है। जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 5 प्रदर्शनकारी राज्यों में शामिल हुआ है। सिकल सेल मिशन के अंतर्गत व्यापक स्क्रीनिंग एवं उपचार सुविधाएँ विकसित की गई हैं। आयुष्मान भारत योजना में 4.43 करोड़ कार्ड तैयार कर प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है। योजनांतर्गत पात्र परिवारों को 5 लाख रूपये तक नि:शुल्क उपचार दिया जा रहा है। साथ ही गंभीर रोगियों को आपात स्थिति में त्वरित रूप से उच्च स्तरीय उपचार पीएम  एयर एम्बुलेंस सेवा से मुहैया कराया जा रहा है। अब तक 120 से अधिक नागरिकों को आपात स्थिति में सेवा का लाभ मिला है। मानवीय संवेदनाओं के दृष्टिगत निःशुल्क एवं सम्मानजनक शव-परिवहन सेवा भी प्रारंभ की गई है। राह-वीर योजना में आपात काल में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाकर जान बचाने वाले नागरिक को 25 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। साथ ही, मोबाइल मेडिकल यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान में प्रदेश में 33 मेडिकल कॉलेज है। विगत 2 वर्षों में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 तथा निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो गई है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन प्रारंभ किया गया है। आगामी 2 वर्षों में 6 शासकीय एवं पीपीपी मोड पर 13 मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किया जाना योजना में शामिल है। विगत 2 वर्षों में सरकारी एमबीबीएस सीटें 2275 से बढ़कर 2850 हुई हैं, जबकि सरकारी एवं निजी मिलाकर कुल एमबीबीएस सीटें 5550 हो गई हैं। पीजी (एमडी/एमएस) सीटों में भी वृद्धि करते हुए सरकारी पीजी सीटें 1262 से बढ़कर 1468 तथा कुल पीजी सीटें 2862 हो गई हैं। इसके अतिरिक्त 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। सशक्त स्वास्थ्य सेवाओं से मध्यप्रदेश मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है। पीपीपी मॉडल पर कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रगति पर है। एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज, इंदौर में अस्पताल भवन, मिनी ऑडिटोरियम एवं नर्सिंग हॉस्टल जैसे अधोसंरचनात्मक कार्यों हेतु 773.07 करोड़ रूपये के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के लिए 321.94 करोड़ रूपये तथा सतना मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल हेतु 383.22 करोड़ रूपये के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। इसके साथ ही 13 नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए 192.40 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए हैं। आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लिनियर एक्स-रेटर मशीनों की स्वीकृति दी गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्कैन एवं एमआरआई मशीनें स्थापित की गई हैं। भोपाल एवं रीवा में कार्डियक कैथ लैब की स्थापना की गई है। इंदौर और जबलपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाएँ प्रारंभ हुई हैं, वहीं इंदौर में कार-टी सेल थेरेपी एवं ब्लड कैंसर उपचार हेतु अत्याधुनिक मशीन स्थापित की गई है। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के तहत मेडिकल कॉलेजों में 354 नए सीनियर रेजिडेंट पद सृजित किए गए हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यापक भर्ती की गई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।   recent visitors 30

अगर भारत और चीन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो गया, तो क्या होगा देश की इकॉनमी का भविष्य?

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बन गई है. इसके साथ ही अमेरिका ने भारत टैरिफ की दर घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. पहले यह दर कुल 50 फीसदी था. इसमें 25 फीसदी टैरिफ और रूस से तेल खरीद के कारण 25 फीसदी पेनाल्टी थी. अमेरिका के साथ इस डील पर सहमति से चंद दिनों पहले 27 जनवरी को ही भारत और ईयू के बीच ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए गए थे. भारत-ईयू ट्रेड डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा गया. इसके बाद अमेरिका के साथ डील पर बनी सहमति को फादर ऑफ ऑल डील कहा जा रहा है. ऐसे अब दुनिया की दूसरी बड़ी इकोनॉमी यानी चीन के साथ भी ट्रेड के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की रिपोर्ट आई है. ऐसे में एक सहज सवाल यह है कि अगर भारत और चीन के बीच फ्री ट्रेड डील हो जाए तो क्या होगा? इस सवाल का जवाब अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के साथ डील में छिपा है. इन दोनों के साथ भारत का व्यापार हमारे के पक्ष में था. यानी भारत अमेरिका और यूरोपीय यूनियन दोनों को आयात से ज्यादा निर्यात करता है. इस कारण इन पक्षों ने भारत के साथ ट्रेड डील करने को अहमियत दी. उनको भारत के साथ डील के लिए मजबूर होना पड़ा. लेकिन चीन के साथ स्थिति उलट है. भारत चीन से आयात बहुत ज्यादा और निर्यात बहुत कम करता है. ऐसे में अमेरिका और यूरोपीय यूनियन की तरह यहां भारत के पाले में गेंद है. भारत को कोशिश करनी चाहिए कि अपनी शर्तों पर वह चीन को ट्रेड डील करने पर मजबूर करे. 155.6 अरब डॉलर तक पहुंचा व्यापार दरअसल, भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने मंगलवार को चीनी नववर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में घोषणा की कि दोनों देशों के बीच व्यापार 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है. यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर बढ़ते बदलावों और अस्थिरता के बीच आया है, जहां कई अर्थव्यवस्थाएं चुनौतियों का सामना कर रही हैं. राजदूत ने कहा कि व्यापार में यह वृद्धि भारत-चीन संबंधों में सुधार के स्पष्ट संकेत हैं. खासकर नियंत्रण रेखा पर चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के समाप्त होने के बाद. भारत से चीन को निर्यात 9.7 फीसदी बढ़ा उन्होंने कई सकारात्मक चीजों का जिक्र किया. भारत से चीन को निर्यात में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है, जिसमें लगभग 20,000 भारतीय तीर्थ यात्री शामिल हुए. चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से जारी करना शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बहाल हो गई हैं, जिससे लोगों के बीच आवाजाही बढ़ेगी. जू फेइहोंग ने कहा कि अगस्त 2025 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तियानजिन में सफल मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों को रीसेट और फ्रेश स्टार्ट किया. उन्होंने जोर दिया कि दोनों देश एक-दूसरे के सहयोगी और विकास के अवसर हैं. चीनी राजदूत ने भारत की इस वर्ष ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया और कहा कि चीन ब्रिक्स के माध्यम से बहुपक्षीय समन्वय मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार है. हालांकि, व्यापार में यह रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद भारत की ओर से कुछ चिंताएं बनी हुई हैं. द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन बना हुआ है, जहां चीन का निर्यात भारत की तुलना में काफी अधिक है. भारतीय पक्ष ने चीन के बाजारों में पर्याप्त पहुंच की कमी, खासकर उर्वरक, रेयर अर्थ और टनल बोरिंग मशीनरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात प्रतिबंधों पर चिंता जताई है. 116 अरब डॉलर का व्यापार घाटा कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में भारत का व्यापार घाटा 116 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया, जो रिकॉर्ड स्तर का है. चीनी राजदूत ने कहा कि उनका देश कभी जानबूझकर व्यापार अधिशेष नहीं बनाता. चीन न केवल विश्व का कारखाना बल्कि विश्व का बाजार भी बनना चाहता है. चीन का टैरिफ स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम (7.3 फीसदी) है, विदेशी निवेश की नेगेटिव लिस्ट छोटी हो रही है और वीजा-फ्री नीति का विस्तार हो रहा है. उन्होंने भारतीय कंपनियों को चीन इंटरनेशनल इम्पोर्ट एक्सपो जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने की सलाह दी, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय उत्पाद चीनी बाजार में पहुंच सकें और व्यापार घाटा सहयोगात्मक अधिशेष में बदल सके. 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंध छह दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गए थे, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे. अक्टूबर 2024 में एलओसी पर गतिरोध समाप्त होने के बाद से कई कदम उठाए गए हैं, जैसे सीमा विवाद को सुलझाना और संबंधों को सामान्य बनाना. recent visitors 38