Fake appointment of Narmada Development Authority officer HR Chauhan
- पद का दुरुपयोग करने के लगे गंभीर आरोप
भोपाल। नर्मदा विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी एचआर चौहान (सदस्य अभियांत्रिकी वित्त) की फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया है। चौहान पर आरोप है कि उन्होंने शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी की है। इस मामले की शिकायत लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, मुख्य सचिव, राज्यपाल एवं एसीएस डब्ल्यूआरडी तक पहुंच चुकी है। इस पर संज्ञान लेते हुए ईओडब्ल्यू ने प्रकरण पंजीबद्ध करते हुए शासन को जांच करने के लिए निर्देशित किया है।
न्यायालय भी इस मामले में सरकार को जांच करने कह चुका है, लेकिन फिर भी कोई कार्यवाही आगे नहीं बढ़ रही है। भोपाल। समता समाधान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पवार ने यह मामला शासन तक पहुंचाया है। शिकायत में बताया गया कि एचआर चौहान की नियुक्ति फर्जी तरीके से हुई थी। यानि उनकी पदस्थापना न्यायालीन प्रकरणों की अनदेखी की गई है। इसमें ना तो गोपनीय प्रतिवेदन बुलाया गया और ना ही मेरिट प्रक्रिया अपनाई गई। चौहान की नियुक्ति मुख्य अभियंता नहर सनावद, सदस्य, अभियांत्रिकीय और सदस्य वित्त पर बोगस (फर्जी) तरीके से की गई है।
ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दिए ठेके
चौहान द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़ी-बड़ी निविदाएं निकाली गई, जिनकी दर प्रचलन दर से अधिक थी। जिस कारण शासन को करोड़ों का नुकसान हुआ। साथ ही इन्होंने निविदा की आड़ में करोड़ों का भ्रष्टाचार भी किया है। एक ही ग्रुप के 5-7 ठेकेदारों को उपकृत किया गया। विशेष रूप से ब्लैक लिस्टेड कंपनी मेंटोना को निविदा दी गईं। बिना किसी निविदा के कार्यों का एरिया भी बढ़ाया गया। जिसमें करोड़ की हेरा-फेरी की गई है।
नर्मदा घाटी विकास इंदौर में भी हुआ भ्रष्टाचार
मुख्य अभियंता नर्मदा घाटी विकास इंदौर के प्रभारी श्याम सुंदर राउत द्वारा भी भारी भ्रष्टाचार किया गया है। कार्यपालन यंत्री के रूप में न्यायालय द्वारा जांच स्थापित करने के बावजूद भी न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखाया गया। यह जिम्मेदारी सदस्य, अभियांत्रिकी एचआर चौहान की है। इसलिए श्याम सुंदर राउत और एचआर चौहान न्यायालय के आदेश की अव्हेलना करने के आरोपी हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर रही हैं। भ्रष्टाचार को भीतर से संरक्षण मिल रहा है। पवार की मांग है कि शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले दोषियों पर प्रकरण दर्ज किया जाए।