जयपुर।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारत आरम्भ से ही ज्ञान (टेलेंट) का खजाना रहा है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को पौराणिक कहानियां सुनाई जाती है तो उनकी बौद्धिक क्षमता विकसित होगी। राज्यपाल श्री बागडे शनिवार को माहेश्वरी एजुकेशन कमेटी द्वारा आयोजित "कहानी महोत्सव" को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने इस अवसर पर वीरता से जुड़ी कहानियां और माताओं द्वारा सुनाई जाने वाली लोरियों की बात करते हुए कहा कि इनमें कहा जाता है कि या तो शूरवीर जन्मे या भामाशाह जैसे वीर जन्म ले। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री से व्यक्ति सफल नहीं हो सकता, बौद्धिक क्षमता का होना भी जरूरी है। यह अधिक से अधिक पढ़ने, सुनने से विकसित होती है। उन्होंने कहा कि अच्छी कहानियां ही जीवन में अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है। इसलिए नई शिक्षा नीति में बच्चों को पाठयपुस्तकों के साथ व्यावहारिक शिक्षा देने पर जोर दिया गया है। राज्यपाल ने भास्कराचार्य द्वारा गुरुत्वाकर्षण की शोध करने की चर्चा करते हुए कहा कि इसी को बाद में न्यूटन ने सिद्धांत रूप में विश्व के सामने रखा। उन्होंने प्राचीन ज्ञान विज्ञान परम्परा से जुड़े नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालय को विश्वभर के ज्ञान केंद्र बताते हुए कहा कि इन्हें इसी कारण नष्ट कर दिया गया। ज्ञान केंद्र, नालंदा के पुस्तकालय को बख्तियार खिलजी ने जला दिया। वहां पुस्तकें इतनी थी कि तीन माह तक आग जलती रही। उन्होंने ज्ञान की उस परंपरा को फिर से जीवंत करने के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

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