भोपाल के 22 सेंटरों पर आज से आयोजित होगा कुकिंग कॉम्पीटिशन

Cooking competition will be organized at 22 centers in Bhopal from today भोपाल। सिंधी व्यंजन की परंपरा को बरकरार रखने के उद्देश्य से भोपाल की सिंधी मेला समिति द्वारा आज शनिवार 26 जुलाई एवं रविवार 27 अगस्त को राजधानी भोपाल के 21 से अधिक सेंटरो पर एक साथ इस कुकिंग कॉप्टिशन का आयोजन किया जा रहा है। समिती के अध्यक्ष मनीष दरयानी एवं महासचिव नरेश तलरेजा ने बताया कि बुधवार को यह प्रतियोगिता भोपाल के बाहर कुछ शहरों में आयोजित हुई जिसमे विदिशा, गंजबासोदा, नर्मदापुरम, हरदा, सुल्तानपुर रही, जिसमे सैकड़ो की संख्या में समाज की महिलाओं ने बढ़चड हिस्सा लिया व सिंधी व्यंजनों की इस परम्परा को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया इस आयोजन की इस कड़ी में आज शनिवार एवं रविवार को इस यह आयोजन भोपाल के 21 स्थानों आर आयोजित किया जा रहा है जिसमे भोपाल की हजारों महिलाए इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपने लजीज व्यंजनो के साथ अपने हुनर का जलवा दिखायेगी। इस कुकिंग कॉप्टिशन कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती माया पंजवानी, सह- संयोजिका श्रीमती भावना लालवानी एवं सह संयोजक हरीश विधानी को नियुक्त किया है। recent visitors 117

राज्यपाल पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं के साथ किया सह-भोज

राज्यपाल पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं के साथ किया सह-भोज

Governor Patel had lunch with differently abled girls भोपाल ! Governor Patel had lunch राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जीवन में सफलता और आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखते रहना चाहिए। राज्यपाल बहुदिव्यांग बालिकाओं से उनके शिक्षकों के माध्यम से राजभवन के सभा कक्ष जवाहर खण्ड में आत्मीय चर्चा कर रहे थे। राज्यपाल पटेल से सौजन्य भेंट करने के लिए आनंद सर्विस सोसायटी की मूकबधिर बहुदिव्यांग बालिकाएं शुक्रवार को इंदौर से राजभवन आईं थीं। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री के.सी. गुप्ता भी मौजूद थे। निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित Governor Patel had lunch राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं से उनके मार्ग दर्शकों के माध्यम से परिचय प्राप्त किया। उनके जीवन की कठिनाईयों और सफलताओं को जाना। उनको निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। दिव्यांग बालिकाओं के साथ बालिका सुश्री गुरदीप कौर वासु के संघर्ष और सफलता की कहानी पर आधारित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। उन्होंने दिव्यांग बालिकाओं और शिक्षकों के साथ सह-भोज भी किया। राजभवन भ्रमण के अनुभव किए साझा राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सभी बालिकाओं से राजभवन भ्रमण के अनुभव जाने और सामूहिक चित्र भी खिंचवाया। बालिकाओं ने सांकेतिक भाषा में ऐतिहासिक राजभवन परिसर और विशेष रूप से आर्ट गैलेरी भ्रमण के सुखद अनुभव साझा किए। उन्होंने राज्यपाल के प्रति मुलाकात, सह-भोज करने और राजभवन भ्रमण का अवसर देने के लिए आत्मीय आभार जताया। राज्यपाल को स्व-रचित कलाकृतियां की भेंट राज्यपाल मंगुभाई पटेल से भेंट के अवसर पर मूकबधिर बहुदिव्यांग बालिका सुश्री दिव्या गोले और वैष्णवी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। उन्हें सुश्री किरण विश्वकर्मा और अन्य बालिकाओं ने स्वयं द्वारा सृजित पैंटिंग और कलाकृतियां भेंट की। राज्यपाल ने देखी बहुदिव्यांग गुरदीप पर बनी फिल्म राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बालिकाओं के साथ मध्यप्रदेश वाणिज्य कर विभाग में कार्यरत मूकबधिर बहुदिव्यांग शासकीय सेवक सुश्री गुरदीप के जीवन और संघर्षों पर आधारित लघु फिल्म को देखा। उन्होंने उपस्थित बालिकाओं से गुरदीप के जीवन के संघर्षों और सफलताओं से प्रेरणा लेने और निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुरदीप के परिजनों, संस्था के शिक्षकों और प्रतिनिधियों के समर्पण की प्रशंसा की। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, संस्था की को-फाउंडर और संचालक श्रीमती मोनिका पुरोहित, सचिव ज्ञानेन्द्र पुरोहित, गुरदीप की माताजी श्रीमती सीमा मंजीत कौर, शिक्षिका श्रीमती मृणालिनी शर्मा और बालिकाएं उपस्थित रही। recent visitors 122

भोपाल में ‘शुद्धिकरण अभियान’ की शुरुआत, अशोका गार्डन बना ‘राम बाग’ हमीदिया, हबीबगंज समेत कई नामों पर प्रस्ताव

भोपाल में ‘शुद्धिकरण अभियान’ की शुरुआत, अशोका गार्डन बना ‘राम बाग’ हमीदिया, हबीबगंज समेत कई नामों पर प्रस्ताव

ashoka garden now called ram bagh hamidia and habibganj also renamed भोपाल ! hamidia and habibganj also renamed मध्य प्रदेश की राजधानी इन दिनों एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। नगर निगम द्वारा शुरू किए गए ‘शुद्धिकरण अभियान’ के तहत अब शहर के प्रमुख स्थलों और इलाकों के नाम भारतीय सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप किए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह कदम गुलामी और विदेशी आक्रांताओं की छाया को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस कड़ी में पहला बड़ा बदलाव अशोका गार्डन को लेकर हुआ है। अब इस इलाके को ‘राम बाग’ के नाम से जाना जाएगा। मेयर इन काउंसिल (MIC) ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया है और नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि, “भोपाल की पहचान राजा भोजपाल से जुड़ी हुई होनी चाहिए, न कि उन नामों से जो हमारी ऐतिहासिक चेतना को धूमिल करते हैं।” Read more: क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव हमीदिया, हबीबगंज समेत कई नामों पर प्रस्ताव hamidia and habibganj also renamedनिगम ने हमीदिया अस्पताल, हमीदिया कॉलेज और हबीबगंज जैसे इलाकों के नामों को बदलने की सिफारिश भी शासन को भेजी है। इन नामों को नवाबी काल और विदेशी प्रभाव का प्रतीक माना जा रहा है। सूर्यवंशी ने स्पष्ट कहा कि, “हमीदुल्लाह खान जो कि भोपाल का अंतिम नवाब था, वह भारत की जगह पाकिस्तान में विलय चाहता था। ऐसे नाम अब भोपाल की संस्कृति के अनुकूल नहीं हैं।” राजनीति भी गर्माई, विपक्ष ने उठाए सवालजहां सत्ता पक्ष इसे “संस्कृति का सम्मान” और “गुलामी से मुक्ति” बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे “राजनीतिक स्टंट” करार दिया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नाम बदलने की राजनीति की जा रही है। नवीन पहचान की ओर बढ़ता भोपाल hamidia and habibganj also renamedशहर सरकार द्वारा पारित यह प्रस्ताव इस बात का संकेत है कि भोपाल अब अपनी पहचान भारतीय परंपरा, संस्कृति और गौरवशाली अतीत के आधार पर दोबारा गढ़ने की ओर अग्रसर है। हालांकि, इस अभियान पर विचारधारा और राजनीतिक मतभेदों की छाया भी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। recent visitors 117

भोपाल में स्कूलों के बाहर ई-रिक्शा पर लगेगा प्रतिबंध, बच्चों की सुरक्षा पर प्रशासन सख्त

E-rickshaws will be banned outside schools in Bhopal, administration strict on children’s safety भोपाल! राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों के बाहर ई-रिक्शा पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। शुक्रवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें सांसद आलोक शर्मा की अध्यक्षता में जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि ई-रिक्शा में छोटे बच्चों को स्कूल लाना-ले जाना सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। कलेक्टर ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि ई-रिक्शा का उपयोग बच्चों की जान के लिए खतरा बन सकता है, खासकर अधिक संख्या में बच्चों को बिना सुरक्षा उपायों के बैठाने पर। इसी वजह से स्कूल परिसर और उसके आसपास ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। ट्रैफिक सुधार की दिशा में ठोस पहलबैठक में 42 चौराहों पर ट्रैफिक सुगमता के लिए लेफ्ट टर्न सुधार की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके लिए तीन करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है। सांसद शर्मा ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे मैनिट के ट्रैफिक एक्सपर्ट्स की मदद से एक हफ्ते के भीतर सुधार योजना पेश करें। उन्होंने बिना तैयारी आए अधिकारियों को फटकार भी लगाई। अन्य अहम फैसले: अतिक्रमण, कंडम वाहन और ट्रांसफार्मर हटेंगेइसके अलावा शहर की सड़कों से अतिक्रमण हटाने, पुराने और अनुपयोगी वाहनों को हटाने, तथा रास्तों में खंभे और ट्रांसफार्मर जैसी बाधाओं को दूर करने पर भी जोर दिया गया। पार्किंग व्यवस्था को आम नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल में अब ट्रैफिक सुधार महज़ कागजों की बात नहीं रह जाएगी। प्रशासनिक सख्ती और योजनाबद्ध क्रियान्वयन से आने वाले दिनों में बच्चों की सुरक्षा और आमजन की आवाजाही में काफी सुधार देखने को मिलेगा। ई-रिक्शा पर लगाया गया यह प्रतिबंध एक सख्त लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है। recent visitors 110

मध्यप्रदेश : जनता परेशान और जनप्रतिनिधि मालामाल – लोकतंत्र का बदलता चेहरा

मध्यप्रदेश : जनता परेशान और जनप्रतिनिधि मालामाल – लोकतंत्र का बदलता चेहरा

Madhya Pradesh: People are troubled and public representatives are rich – the changing face of democracy भोपाल ! मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है—इस बार कारण है 102 विधायकों के लिए बनने जा रहे आलीशान फ्लैट्स, जिनकी लागत 159.13 करोड़ रुपये आंकी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जुलाई को इन फ्लैट्स का भूमिपूजन करेंगे। दस मंजिला इमारतें, तीन बेडरूम, हॉल, किचन, बालकनी, पार्किंग, स्विमिंग पूल, जिम, कैंटीन और फायर अलार्म जैसी सुविधाएं… ये सब सुनकर मन में सवाल उठना स्वाभाविक है: क्या सचमुच हमारे जनप्रतिनिधियों की ज़रूरतें जनता की परेशानियों से ज्यादा जरूरी हो गई हैं? प्रदेश की सड़कों की हालत, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर स्थिति और बेरोजगारी जैसे मुद्दे अभी भी आम नागरिक की सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं। गांवों में पीने के पानी की किल्लत है, किसान कर्ज से त्रस्त हैं, युवाओं को रोजगार नहीं, और शहरों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहीं दूसरी ओर, राज्य के खजाने से करोड़ों खर्च करके विधायकों को “विश्राम” देने की तैयारी चल रही है। यह सच है कि जनप्रतिनिधियों को काम करने के लिए बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन जब जनता महंगाई और बदहाल व्यवस्था से जूझ रही हो, तब इतनी विलासिता क्या उचित है? क्या लोकतंत्र का मतलब सिर्फ शासकों की सुविधा रह गया है, और जनता की तकलीफों को नजरअंदाज कर देना अब परंपरा बन गई है? अतीत में जिन जमीनों पर ये फ्लैट बनने थे, वहां पेड़ों की कटाई का विरोध हुआ। इसका हल निकाला गया, लेकिन जनता की समस्याओं का हल कौन निकालेगा? सवाल यह नहीं है कि विधायकों को आवास मिलना चाहिए या नहीं, सवाल यह है कि क्या यह प्राथमिकता होनी चाहिए जब राज्य की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की स्थिति दोनों ही संकट में हैं? आज जरूरत है कि सरकारें दिखावे और सुविधाओं की राजनीति से ऊपर उठकर जन सरोकारों को प्राथमिकता दें। नहीं तो धीरे-धीरे लोकतंत्र केवल “वोट लेकर सुविधाएं पाने का माध्यम” बनकर रह जाएगा। जनता सब देख रही है, और उसका फैसला समय आने पर बहुत साफ़ होता है। recent visitors 105

मंत्री पटेल ने देखा गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया गो-शाला परिसर में किया वृक्षारोपण

Minister Patel visited the cow rehabilitation center Hingonia Tree plantation was done in the cow shelter premises भोपाल। पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया, जयपुर का भ्रमण किया. इस दौरान उन्होंने गो-शाला परिसर में बहुउद्धेशीय पशु चिकित्सालय, आईओसीएल के गैस प्लांट, मिल्क पार्लर आदि को देखा. उन्होंने बाड़ों में गायों की देखभाल एवं साफ सफाई व्यवस्था का अवलोकन भी किया. मंत्री पटेल द्वारा गो-शाला परिसर में वृक्षा रोपण भी किया गया. भ्रमण के दौरान मंत्री पटेल के साथ राजस्थान पशुपालन विभाग के निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक और गो शाला के प्रबंधक थे. गो-शाला का संचालन कृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट द्वारा किया जाता है. गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया लगभग 3 हजार 200 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 70 बाड़े हैं, जिनमें एक हजार 300 नंदी सहित कुल 17 हजार 500 गो-वंश है. गो-शाला में गोबर से संवर्धित सीएनजी गैस प्लांट स्थापित है, जिसकी उत्पादन क्षमता 400 किलोग्राम सीएनजी प्रतिदिन है. गो-शाला के 200 बीघा क्षेत्र में नेपियर घास का उत्पादन किया जाता है. गो-शाला का दुग्ध उत्पादन 2 हजार लीटर प्रतिदिन है. यहां गोबर से गो-काष्ठ, दीपक, गमले, जैविक खाद्य तथा दूध से दही, पनीर घी और मिठाई को निर्माण किया जाता है. गो-शाला परिसर में ग्रामीण बहुउद्धेशीय आधुनिक पशु चिकित्सालय स्थापित है, जो 24 घंटे संचालित रहता है. recent visitors 121

तबादला-पोस्टिंग: अधिकारी ही रहे बॉस, गिड़गिड़ाते रह गए मंत्री, चांस खत्म

तबादला-पोस्टिंग: अधिकारी ही रहे बॉस, गिड़गिड़ाते रह गए मंत्री, चांस खत्म

Transfer-Posting: Officers remained the bosses, ministers kept pleading, chances over भोपाल। प्रदेश में एक महीना 17 दिन ट्रांसफर और पोस्टिंग का सीजन चला। सरकार ने मंत्रियों को छूट दी थी, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग में विभाग के एसीएस-पीएस ने अपनी मनमार्जी चलाई और उन्होंने ही अपनी रणनीति के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले किए। चिंताजनक पहलू यह है कि गंभीर बीमारी से जुड़े प्रकरणों में कर्मचारियों को ट्रांसफर का लाभ नहीं मिला। जबकि नीति में गंभीर बीमारी, परिवार में बीमार और पति-पत्नी को एक ही जिले में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया था। वन विभाग ने तो ‘ए-प्लसÓ की नोटशीट तक की सिफारिशों को दरकिनार कर दिया है। आखिरी दिन तक वन मंत्रालय में तबादला सूची में मैनेजमेंट कोटे के आधार देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे। तबादला सीजन में मंत्रियों और प्रमुख सचिवों के बीच तालमेल की कमी भी खुलकर सामने आई है। तबादले के लिए तमाम मनुहार कर बैन हटवाने वाले मंत्रियों को अपने मिलने-जुलने वालों के तबादले और पोस्टिंग करने का मौका नहीं मिल सका है। वरिष्ठ अफसरों ने इसके लिए सरकार के नियमों को भी दरकिनार किया है। एसीएस और मंत्रियों के बीच खींचतान की वजह से कई विभागों में 8 फीसदी तक तबादले नहीं हो पाए हैं। वहीं कई विभागों द्वारा अब बैकडेट में तबादला आदेश जारी किए जा रहे हैं। राजस्व विभाग ने 509 पटवारियों का तबादला किए। इसके बाद 89 पटवारियों के आधी रात को आदेश जारी कर दिए गए हैं। अभी कुछ सूची जारी करने की तैयारी विभाग कर रहा है। वह भी बैकडेट में होने की तैयारी चल रही है। वन विभाग में फारेस्ट गार्ड, प्रभारी रेंजर से लेकर एसडीओ तक के ट्रांसफर 17 और 18 जून तक जारी किए गए हैं। सीएम के विभागों को लेकर खासी माथा-पच्चीमुख्यमंत्री के पास गृह, जेल, उद्योग, नर्मदा घाटी, विमानन, वन जैसे करीबन 10 से ज्यादा विभाग हैं। इन विभागों में जितने भी ट्रांसफर किए गए हैं, उसमें सीएम मॉनिट के नाम पर एसीएस-पीएस ने अपनी मनमानी की है। वन विभाग में दीगर मंत्रियों को डस्टबिन में डाल दिया गया। इससे मंत्रियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। साथ ही स्थानांतरित हुए अधिकारियों-कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। कई अधिकारियों का मैनेजमेंट कोटे से मनपसंद पोस्टिंग कराने की सिफारिश मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों से की थी। उनके नाम सूची में आए, लेकिन चाही गई जगह नहीं मिली। यहां भी देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे हैं। यही वजह रही कि एक रेंजर स्वस्ति श्री जैन की पोस्टिंग 2 जगह कर दी गई। कुछ मामलों में जहां जगह ही नहीं, वहां भी तबादले किए गए हैं। वन विभाग में चर्चा है कि मंत्रालय के अधिकारियों ने जमकर मनमानी की, क्योंकि वन विभाग सीएम के पास है और उनके पास गृह जेल उद्योग और आईएएस की पोस्टिंग संबंधित महत्वपूर्ण कार्य हैं। इसके कारण उनका वन विभाग पर फोकस कम रहा और इसका फायदा नौकरशाह और शीर्ष अफसरों ने जमकर उठाया। यही स्थिति जेल विभाग में भी रही। उद्योग विभाग की सूची का तो कर्मचारियों को पता ही नहीं चला। एमएसएमई विभाग में मंत्री चेतन्य काश्यप के प्रस्तावों को तवज्जो ही नहीं दी गई। उधर, पीएचई में किए गए तबादलों में विभागीय मंत्री द्वारा की गई अनुशंसाओं को दरकिनार कर ट्रांसफर किए गए। यह सब मुख्यमंत्री के नाम पर विभागों के अफसरों ने खेल खेला है। इस मामले में तो कर्मचारियों ने विभागाध्यक्षों पर लेनदेन के भी आरोप लगाए हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल की तबादलों में नहीं चलीकैबिनेट में प्रहलाद पटेल कद्दावर मंत्रियों में गिने जाते हैं, लेकिन तबादलों में अफसरों ने उनकी नहीं सुनी। तबादला आदेश जारी करने के दौरान अफसरों ने यह कहकर मंत्री के नाम रिजेक्ट किए कि यह तीन फार्मूले में फिट नहीं बैठते हैं। ये फार्मूला है-पारस्परिक तबादला, गंभीर बीमारी जैसे कैंसर या ब्रेन ट्यूमर तथा तीसरा महिला का अपने परिवार से दूर पदस्थ होना बताया गया। यही वजह है कि मंत्री के यहां से गए प्रस्तावों पर तबादले नहीं किए गए। उधर, आजीविका मिशन, आरईएस, पंचायत राज सहित अन्य विभागाध्यक्ष कार्यालयों में ट्रांसफर खुलकर किए गए हैं। राजस्व विभाग के पीएस विवेक पोरवाल ने मंत्री करण सिंह वर्मा की भी नहीं सुनी, ऐसी चर्चा है। मंत्री ने जो सूची भेजी, उसमें भारी काट-छांट करते हुए प्रमुख सचिव और सीएलआर ने नामात्र के तबादले किए हैं। recent visitors 147