मंत्री पटेल ने देखा गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया गो-शाला परिसर में किया वृक्षारोपण

Minister Patel visited the cow rehabilitation center Hingonia Tree plantation was done in the cow shelter premises भोपाल। पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया, जयपुर का भ्रमण किया. इस दौरान उन्होंने गो-शाला परिसर में बहुउद्धेशीय पशु चिकित्सालय, आईओसीएल के गैस प्लांट, मिल्क पार्लर आदि को देखा. उन्होंने बाड़ों में गायों की देखभाल एवं साफ सफाई व्यवस्था का अवलोकन भी किया. मंत्री पटेल द्वारा गो-शाला परिसर में वृक्षा रोपण भी किया गया. भ्रमण के दौरान मंत्री पटेल के साथ राजस्थान पशुपालन विभाग के निदेशक, संयुक्त निदेशक, उप निदेशक और गो शाला के प्रबंधक थे. गो-शाला का संचालन कृष्ण बलराम सेवा ट्रस्ट द्वारा किया जाता है. गो-पुनर्वास केन्द्र हिंगोनिया लगभग 3 हजार 200 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 70 बाड़े हैं, जिनमें एक हजार 300 नंदी सहित कुल 17 हजार 500 गो-वंश है. गो-शाला में गोबर से संवर्धित सीएनजी गैस प्लांट स्थापित है, जिसकी उत्पादन क्षमता 400 किलोग्राम सीएनजी प्रतिदिन है. गो-शाला के 200 बीघा क्षेत्र में नेपियर घास का उत्पादन किया जाता है. गो-शाला का दुग्ध उत्पादन 2 हजार लीटर प्रतिदिन है. यहां गोबर से गो-काष्ठ, दीपक, गमले, जैविक खाद्य तथा दूध से दही, पनीर घी और मिठाई को निर्माण किया जाता है. गो-शाला परिसर में ग्रामीण बहुउद्धेशीय आधुनिक पशु चिकित्सालय स्थापित है, जो 24 घंटे संचालित रहता है. recent visitors 110

तबादला-पोस्टिंग: अधिकारी ही रहे बॉस, गिड़गिड़ाते रह गए मंत्री, चांस खत्म

तबादला-पोस्टिंग: अधिकारी ही रहे बॉस, गिड़गिड़ाते रह गए मंत्री, चांस खत्म

Transfer-Posting: Officers remained the bosses, ministers kept pleading, chances over भोपाल। प्रदेश में एक महीना 17 दिन ट्रांसफर और पोस्टिंग का सीजन चला। सरकार ने मंत्रियों को छूट दी थी, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग में विभाग के एसीएस-पीएस ने अपनी मनमार्जी चलाई और उन्होंने ही अपनी रणनीति के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले किए। चिंताजनक पहलू यह है कि गंभीर बीमारी से जुड़े प्रकरणों में कर्मचारियों को ट्रांसफर का लाभ नहीं मिला। जबकि नीति में गंभीर बीमारी, परिवार में बीमार और पति-पत्नी को एक ही जिले में पदस्थ करने का प्रावधान किया गया था। वन विभाग ने तो ‘ए-प्लसÓ की नोटशीट तक की सिफारिशों को दरकिनार कर दिया है। आखिरी दिन तक वन मंत्रालय में तबादला सूची में मैनेजमेंट कोटे के आधार देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे। तबादला सीजन में मंत्रियों और प्रमुख सचिवों के बीच तालमेल की कमी भी खुलकर सामने आई है। तबादले के लिए तमाम मनुहार कर बैन हटवाने वाले मंत्रियों को अपने मिलने-जुलने वालों के तबादले और पोस्टिंग करने का मौका नहीं मिल सका है। वरिष्ठ अफसरों ने इसके लिए सरकार के नियमों को भी दरकिनार किया है। एसीएस और मंत्रियों के बीच खींचतान की वजह से कई विभागों में 8 फीसदी तक तबादले नहीं हो पाए हैं। वहीं कई विभागों द्वारा अब बैकडेट में तबादला आदेश जारी किए जा रहे हैं। राजस्व विभाग ने 509 पटवारियों का तबादला किए। इसके बाद 89 पटवारियों के आधी रात को आदेश जारी कर दिए गए हैं। अभी कुछ सूची जारी करने की तैयारी विभाग कर रहा है। वह भी बैकडेट में होने की तैयारी चल रही है। वन विभाग में फारेस्ट गार्ड, प्रभारी रेंजर से लेकर एसडीओ तक के ट्रांसफर 17 और 18 जून तक जारी किए गए हैं। सीएम के विभागों को लेकर खासी माथा-पच्चीमुख्यमंत्री के पास गृह, जेल, उद्योग, नर्मदा घाटी, विमानन, वन जैसे करीबन 10 से ज्यादा विभाग हैं। इन विभागों में जितने भी ट्रांसफर किए गए हैं, उसमें सीएम मॉनिट के नाम पर एसीएस-पीएस ने अपनी मनमानी की है। वन विभाग में दीगर मंत्रियों को डस्टबिन में डाल दिया गया। इससे मंत्रियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। साथ ही स्थानांतरित हुए अधिकारियों-कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। कई अधिकारियों का मैनेजमेंट कोटे से मनपसंद पोस्टिंग कराने की सिफारिश मंत्रियों और शीर्षस्थ अधिकारियों से की थी। उनके नाम सूची में आए, लेकिन चाही गई जगह नहीं मिली। यहां भी देर रात तक नाम कटते और जुड़ते रहे हैं। यही वजह रही कि एक रेंजर स्वस्ति श्री जैन की पोस्टिंग 2 जगह कर दी गई। कुछ मामलों में जहां जगह ही नहीं, वहां भी तबादले किए गए हैं। वन विभाग में चर्चा है कि मंत्रालय के अधिकारियों ने जमकर मनमानी की, क्योंकि वन विभाग सीएम के पास है और उनके पास गृह जेल उद्योग और आईएएस की पोस्टिंग संबंधित महत्वपूर्ण कार्य हैं। इसके कारण उनका वन विभाग पर फोकस कम रहा और इसका फायदा नौकरशाह और शीर्ष अफसरों ने जमकर उठाया। यही स्थिति जेल विभाग में भी रही। उद्योग विभाग की सूची का तो कर्मचारियों को पता ही नहीं चला। एमएसएमई विभाग में मंत्री चेतन्य काश्यप के प्रस्तावों को तवज्जो ही नहीं दी गई। उधर, पीएचई में किए गए तबादलों में विभागीय मंत्री द्वारा की गई अनुशंसाओं को दरकिनार कर ट्रांसफर किए गए। यह सब मुख्यमंत्री के नाम पर विभागों के अफसरों ने खेल खेला है। इस मामले में तो कर्मचारियों ने विभागाध्यक्षों पर लेनदेन के भी आरोप लगाए हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल की तबादलों में नहीं चलीकैबिनेट में प्रहलाद पटेल कद्दावर मंत्रियों में गिने जाते हैं, लेकिन तबादलों में अफसरों ने उनकी नहीं सुनी। तबादला आदेश जारी करने के दौरान अफसरों ने यह कहकर मंत्री के नाम रिजेक्ट किए कि यह तीन फार्मूले में फिट नहीं बैठते हैं। ये फार्मूला है-पारस्परिक तबादला, गंभीर बीमारी जैसे कैंसर या ब्रेन ट्यूमर तथा तीसरा महिला का अपने परिवार से दूर पदस्थ होना बताया गया। यही वजह है कि मंत्री के यहां से गए प्रस्तावों पर तबादले नहीं किए गए। उधर, आजीविका मिशन, आरईएस, पंचायत राज सहित अन्य विभागाध्यक्ष कार्यालयों में ट्रांसफर खुलकर किए गए हैं। राजस्व विभाग के पीएस विवेक पोरवाल ने मंत्री करण सिंह वर्मा की भी नहीं सुनी, ऐसी चर्चा है। मंत्री ने जो सूची भेजी, उसमें भारी काट-छांट करते हुए प्रमुख सचिव और सीएलआर ने नामात्र के तबादले किए हैं। recent visitors 130

कैबिनेट से दूरी या दबाव? मंत्री विजय शाह की लगातार तीसरी अनुपस्थिति

कैबिनेट से दूरी या दबाव? मंत्री विजय शाह की लगातार तीसरी अनुपस्थिति

Distance from the cabinet or pressure? Minister Vijay Shah’s absence for the third time in a row भोपाल। मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह लगातार तीसरी बार कैबिनेट बैठक से अनुपस्थित रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब वे कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान** को लेकर जांच के घेरे में हैं। कैबिनेट की इस अहम बैठक में एक बार फिर विजय शाह की कुर्सी खाली रहना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी मंत्रियों को बैठक के लिए स्पष्ट निर्देश दिए थे, बावजूद इसके शाह की लगातार अनुपस्थिति कई तरह के सवाल खड़े कर रही है। क्या है सोफिया कुरैशी विवाद? गौरतलब है कि कुछ समय पहले विजय शाह ने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर एक टिप्पणी की थी, जिसे लेकर न केवल विपक्ष, बल्कि आम जनता और महिला संगठनों में भी नाराजगी देखी गई। इस मामले की जांच फिलहाल जारी है और यह अटकलें तेज हैं कि जांच की गंभीरता को देखते हुए शाह खुद को फिलहाल सार्वजनिक मंचों से दूर रख रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज विजय शाह मध्यप्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और पूर्व में वन मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। लेकिन अब तीन बार लगातार कैबिनेट मीटिंग से नदारद रहना उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलें बढ़ा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर जांच में कोई ठोस निष्कर्ष निकलता है, तो पार्टी नेतृत्व उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। recent visitors 135

खरीफ 2025: सोयाबीन की उम्मीदों के साथ किसानों की तैयारी तेज, पर बीज संकट बना चुनौती

खरीफ 2025: सोयाबीन की उम्मीदों के साथ किसानों की तैयारी तेज, पर बीज संकट बना चुनौती

Kharif 2025: Farmers’ preparations intensify with expectations of soybean, but seed crisis remains a challenge भोपाल ! खरीफ 2025 की तैयारियों ने ज़ोर पकड़ लिया है और इस बार किसानों के लिए ये सीजन निर्णायक साबित हो सकता है। मौसम विभाग ने मानसून समय पर आने और सामान्य वर्षा की भविष्यवाणी की है, जिससे फसल उत्पादन को लेकर उम्मीदें बंधी हैं। खासकर सोयाबीन की खेती करने वाले किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है। सोयाबीन की खेती को मिल सकती है रफ्तार, पर बीज बना बाधा मध्यप्रदेश देश में सबसे अधिक सोयाबीन उत्पादन करने वाला राज्य है, लेकिन इस बार किसानों को उपचारित व प्रमाणित बीज नहीं मिल रहा। किसान मंडियों से बीज खरीदकर या अपने ही पुराने बीज का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। किसानों की बात: सीहोर जिले के किसानों अमित सिंह, राजेंद्र सिंह और विक्रम सिंह मालवीय का कहना है कि मंडियों से बीज मिल रहे हैं, लेकिन प्रमाणित बीज की उपलब्धता सीमित है। उड़द, मक्का और धान बन रहे विकल्प कई किसान इस बार सोयाबीन के बदले उड़द और मक्का जैसी फसलें बोने की योजना बना रहे हैं। वहीं जहां पानी की अधिकता है वहां धान की खेती को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे फसल विविधता तो बढ़ेगी लेकिन सोयाबीन उत्पादन में गिरावट की आशंका भी जताई जा रही है। प्रति एकड़ 10 क्विंटल तक उत्पादन संभव कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान उन्नत किस्में और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें तो प्रति एकड़ 10 क्विंटल तक उत्पादन संभव है। खरीफ 2025 के लिए प्रमुख सोयाबीन किस्में: विशेषज्ञ सलाह: 2021, 2022 और 2023 में जारी की गई नई किस्मों को अपनाने से उत्पादन में 20% तक की बढ़ोतरी संभव है। बीज प्रमाणीकरण के आंकड़े राज्य के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि: किसानों के लिए सुझाव: सही किस्म, सही समय उपसंचालक कृषि के.के. पांडे ने बताया कि बीज तीन वर्गों में आते हैं — जल्दी पकने वाली, मध्यम अवधि वाली और देर से पकने वाली किस्में। किसानों को अपने क्षेत्र और बुवाई के समय के अनुसार सही किस्म चुननी चाहिए। बीज की खरीद प्रमाणित स्रोतों से ही करें, और बुवाई से पहले उसका परीक्षण अवश्य करें। खरीफ 2025 में मानसून की अनुकूलता के साथ उत्पादन में सुधार की पूरी संभावना है, लेकिन प्रमाणित बीजों की कमी एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है। अगर किसानों को समय पर सही बीज मिल जाएं और वे आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें, तो यह सीजन कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक मोड़ साबित हो सकता है। recent visitors 223

गुटबाजी खत्म करो, बदलाव चाहिए तो बताओ – मैं करूंगा’: भोपाल में राहुल गांधी का कांग्रेस नेताओं को सख्त संदेश

गुटबाजी खत्म करो, बदलाव चाहिए तो बताओ – मैं करूंगा’: भोपाल में राहुल गांधी का कांग्रेस नेताओं को सख्त संदेश

Rahul Gandhi’s strong message to Congress leaders in Bhopal भोपाल ! लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को भोपाल में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ की शुरुआत करते हुए पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया: गुटबाजी अब और नहीं चलेगी, सभी को मिलकर संगठन को मजबूत करना होगा। पार्टी संगठन को मिशन 2028 के तहत नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश के तहत राहुल गांधी ने एक ही दिन में पांच अहम बैठकें कीं। उन्होंने सभी नेताओं से साफ कहा, कोई भी फैसला ऊपर से नहीं थोपा जाएगा। आप मिलकर निर्णय लें, और अगर कोई बदलाव चाहिए, तो बताइए – मैं करूंगा। लेकिन पहले एकजुट हो जाइए। संगठन में नई जान फूंकने की कोशिश राहुल गांधी ने नेताओं को याद दिलाया कि पिछले बीस सालों में कांग्रेस का संगठन मध्य प्रदेश में कमजोर हुआ है और अब समय है इसे फिर से खड़ा करने का। उन्होंने संगठन को मजबूत, पारदर्शी और जनसरोकार से जुड़ा बनाने पर जोर दिया। कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ का लक्ष्य 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले स्थानीय और जिला स्तर पर संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करना है। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की आवाज़ सुनी जाएगी और निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाएंगे, न कि ऊपर से थोपे जाएंगे। recent visitors 110

भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन में भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन व राजगढ़ शामिल, बनेगी ग्रेटर केपिटल सिटी

भोपाल  भोपाल को ग्रेटर केपिटल की तर्ज पर विकसित करने के लिए भोपाल विकास प्राधिकरण को भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन (Bhopal Metropolitan Region)का नोडल एजेंसी बनाया है। इंदौर में भी आइडीए का यह जिमा सौंपा गया है। भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन में भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन व राजगढ़ शामिल हैं। प्रमुख सचिव शहरी आवास एवं विकास संजय शुक्ला के अनुसार बीडीए कंसलटेंट तय कर आगामी प्लानिंग बनाएगा। यह उच्चाधिकारियों की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी।भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर और राजगढ़ को मिलाकर मेट्रोपोलिटन सिटी बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत अगले 14 महीने में पांचों जिलों का सर्वे करने के साथ रीजनल डेवलपमेंट एंड इंवेस्टमेंट प्लान बनाया जाएगा। इस प्लान के आधार पर भोपाल को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाया जाना है। बुधवार को संभागायुक्त संजीव सिंह के कार्यालय में पांचों जिलों के कलेक्टर्स की मौजूदगी में बीडीए के सीईओ श्यामवीर सिंह ने प्रजेंटेशन दिया। इसमें डीपीआर को लेकर बात रखी गई। आठ हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र कवर होगा संभागायुक्त ने बताया कि पांच जिलों के आठ हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करेगा और इसमें पांच जिले शामिल होंगे, जिसमें भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर और राजगढ़ शामिल किया गया है। इन जिलों को जोड़ने से महानगर की आबादी 35 लाख हो जाएगी। चार स्टेज में काम किया जाएगा। पहले चरण में टीम का गठन, सर्वे, बैठकें आयोजित कर अमलीजामा पहनाना, वर्कप्लान फाइनल करना, सभी विभागों का सर्वे अपने अपने एरिया में करना और विधानसभावार 18 विभागों का डेटा जुटाने का काम किया जाएगा, जबकि आखिरी स्टेज में इंजीनियरिंग, लागत अनुमान और वर्कप्लान की डीपीआर तैयार की जाएगी। दो जून को डीपीआर बनाने के लिए टेंडर निकाला जाएगा। इसके आधार पर टैंडर लेने वाली कंपनी को डीपीआर बनाने का काम सौंपा जाएगा। इस डीपीआर के लिए 18 विभागों से डेटा मांगा गया है। ये तहसील होंगी शामिल     भोपाल जिला : हुजूर, बैरसिया, कोलार     विदिशा जिला : विदिशा शहर, ग्यारसपुर, गुलाबगंज     रायसेन जिला : रायसेन, औबेदुल्लागंज, गौहरगंज     सीहोर जिला : सीहोर शहर, आष्टा, इच्छावर, श्यामपुर, जावर     राजगढ़ जिला : राजगढ़, नरसिंहगढ़, पचोर ये भी होंगे काम     पांचों जिलों के गांव और शहरों को एक दूसरे से जोड़ा जाएगा     सड़कों को एक दूसरे से जोड़कर आवागमन आसान किया जाएगा     इन शहरों शुरू होगा उद्योगों का विकास     इन जिलों के पर्यटन क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा     सैटेलाइट से गांवों को चिह्नित किया जाएगा     कचरा डिस्पोजल और सीवेज सिस्टम भी डेवलप किया जाएगा ऐसे होगा काम ● सीहोर- भोपाल की प्लानिंग कर तालाब व कैचमेंट संरक्षण का काम होगा। ● मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र को भोपाल से जोडकऱ काम किया जाएगा। ● अन्य जिलों में स्थित भोपाल के पास की वैश्विक धरोहरें सांची, भीमबैठका और अन्य पर भोपाल से काम तय हो जाएगा। ● मेट्रो का नेटवर्क भी पास के क्षेत्रों तक बढ़ाने की राह खुलेगी। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग मेट्रोपॉलिटन रीजन में सेटेलाइट टाउन बनाकर नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। अतिरिक्त आबादी को इसमें बसाया जाएगा। शहरी क्षेत्र की बजाय रीजन के रूरल एरिया में विशेष आवासीय क्षेत्र बनाकर लोगों को बसाएंगे और कार्यस्थल पर आवाजाही के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करेंगे। इतना ही नहीं, रीजन में नए टूरिस्ट सेंटर व सर्किट तय किए जाएंगे। इस तरह होगा विकास का खाका क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की योजना ग्रोथ सेंटर को चिन्हित करना सेटेलाइट टाउन के लिए क्षेत्र चिन्हित करना टूरिस्ट सेंटर व सर्किट भी तय होगा पर्यावरणीय विकास के लिए पूरा मैनेजमेंट तय करना बेहतर कृषि भूमि का संरक्षण प्लान कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान होगा, जिसमें रोड, प्राकृतिक नाले, जनसुविधाएं व सेवाओं के साथ रीजन के आर्थिक विकास का पूरा मैप रहेगा। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्राथमिक मैप तैयार है। बेहतर प्लान के साथ रीजन तय करेंगे। भोपाल का स्वरूप बदलेगा, विकास की संभावनाएं बढ़ेगी। – संजीव सिंह, संभागायुक्त व प्रशासक बीडीए एमपी में 9 शहरों को मिलाकर बनेंगे 2 मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, 6 संभागों का होगा डेवलपमेंट  मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेशकों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नगरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पहला मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र इंदौर-उज्जैन-देवास और धार को मिलाकर और दूसरा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भोपाल-सीहोर, रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर विकसित किया जाएगा।  केंद्र के विजन के मुताबिक राज्य के प्रमुख संभाग मुख्यालय ग्वालियर, सागर, रीवा, जबलपुर, नर्मदापुरम और शहडोल को रीजनल इकोनॉमिक ग्रोथ हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सरकार का यह प्रयास अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ रोजगार, व्यापार और निवेश के नये अवसरों को भी बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। सुविधाओं में होगा सुधार जानकारी के तहत इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर का 100 प्रतिशत क्षेत्र शामिल किया जाएगा, जबकि उज्जैन का 44 प्रतिशत धार और नागदा का भी कुछ हिस्सा इसमें जोड़ा जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक और शहरी विकास को संगठित तरीके से आगे बढ़ाना है, जिससे आधारभूत सुविधाओं में सुधार हो और निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। 5 जिलों की बदल जाएगी सूरत, जानिए कैसे मेगा रोड प्रोजेक्ट से 80 लाख को होगा फायदा  मध्य प्रदेश के पांच जिलों – भोपाल, विदिशा, सीहोर, रायसेन और नर्मदापुरम की सूरत अब जल्द ही बदलने वाली है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में मेगा रोड प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य इन जिलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करना है। इस परियोजना के तहत, आने वाले समय में इन क्षेत्रों के लोग 80 लाख की आबादी तक को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इन जिलों को भोपाल से बेहतर कनेक्ट करने के लिए सड़क नेटवर्क पर काम तेज कर दिया गया है और कंसल्टेंट तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अगले एक महीने में इन पांच जिलों से जुड़े रोड नेटवर्क का सर्वे भी पूरा कर लिया जाएगा। सीएम का ग्रेटर राजधानी की बात करना हाल ही में भोपाल में आयोजित आंबेडकर ब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वृहद राजधानी के निर्माण की बात की थी। इस घोषणा के बाद से ही इस दिशा में कार्य शुरू हो गया था और अब वृहद राजधानी के रूप में भोपाल और आसपास के इलाकों … Read more

एमपी 12वीं बोर्ड रिजल्ट आज होगा घोषित: सीएम डॉ. मोहन यादव करेंगे जारी, जानिए कैसे और कहाँ देखें अपना रिजल्ट

MP 12th Board Result declared today: CM Dr. Mohan Yadav will release it, know how and where to see your result भोपाल। आज का दिन लाखों छात्रों के लिए बेहद अहम रहा। मध्यप्रदेश बोर्ड (MPBSE) की 12वीं की परीक्षा का परिणाम आज सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समत्व भवन से औपचारिक रूप से घोषित किया। इस साल कुल 7 लाख 6 हजार छात्रों ने 12वीं की परीक्षा दी थी। रिजल्ट देखने के लिए ये विकल्प हैं: [mpbse.mponline.gov.in](https://mpbse.mponline.gov.in) Digi Locker App MPBSE Mobile App MP Mobile App एप्लिकेशन या वेबसाइट में जाकर “Know Your Result” पर क्लिक करें, फिर रोल नंबर और एप्लिकेशन नंबर डालकर रिजल्ट पाएं। MP Board Result Button with Icon MP बोर्ड रिजल्ट 2025 देखें सीएम ने छात्रों को दी शुभकामनाएं:रिजल्ट जारी करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने छात्रों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कहा कि “यह सिर्फ एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। मेहनत और हौसला ही सफलता की असली कुंजी है।”कम अंक आए हैं? घबराएं नहीं:गांधी मेडिकल कॉलेज की मनोचिकित्सक डॉ. रुचि सोनी ने कहा कि बोर्ड के नतीजे अहम होते हैं, लेकिन यह जीवन का आखिरी निर्णय नहीं। कम अंक आने पर निराश न हों, खुद पर विश्वास रखें और अपने सपनों का रास्ता खुद तय करें। recent visitors 237