छत्तीसगढ़ बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा इसे लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया

रायपुर छत्तीसगढ़ बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा इसे लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है, वहीं जिला अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति अभी बाकी है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की है। महाराष्ट्र बीजेपी के सीनियर नेता विनोद तावडे को छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष बनने की रेस में पार्टी के कई सीनियर नेता हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार ओबीसी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश बीजेपी संगठन अगले तीन से चार दिनों में सभी जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा कर सकती है। जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। हालांकि छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव कब होंगे इसको लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है। कौन-कौन हैं दावेदार प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर बीजेपी के दावेदारों के भी नाम सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ बीजेपी में चर्चा है कि पार्टी इस बार किसी ओबीसी वर्ग के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। साय कैबिनेट में सभी वर्गों को साधा गया है। ऐसे में प्रदेश की ओबीसी राजनीति पर फोकस करते हुए बीजेपी बड़े चेहरे पर दांव लगा सकती है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए सीनियर नेताओं के नाम की चर्चा है। जिन नामों की चर्चा है उसमें पार्टी के सीनियर विधायक धरमलाल कौशिक का नाम सबसे आगे है। कौशिक पहले भी यह जिम्मेदारी संभाल चुके हैं उसके साथ ही रमन सिंह की कैबिनेट में मंत्री भी रह चुके हैं। बड़ी के बड़े नेता हैं। इसके अलावा मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव के भी रिपीट होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि अगर किरण सिंहदेव को रिपीट नहीं किया जाता है तो उन्हें कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। विष्णुदेव साय कैबिनेट में अभी दो विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसे में किरण सिंहदेव के नाम की अटकलें लगाई जा रही हैं। सामान्य वर्ग से शिवरतन शर्मा का भी नाम प्रदेश अध्यक्ष की रेस में है। इसके अलावा विक्रम उसेंडी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल का भी नाम शामिल है। कैबिनेट विस्तार भी है संभावित छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की भी अटकलें हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जिस सीनियर नेता को कैबिनेट में शामिल नहीं किया जाएगा। उनके प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना है। हालांकि कैबिनेट विस्तार को लेकर अभी तर सीएम विष्णुदेव साय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। recent visitors 101

विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने पहली लिस्ट में 29 उम्मीदवारों के नाम का किया ऐलान, केजरीवाल के सामने होंगे प्रवेश वर्मा

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी की पहली लिस्ट जारी हो गई है. बीजेपी ने इस लिस्ट में 29 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. केजरीवाल के खिलाफ प्रवेश वर्मा को टिकट दिया गया है. वहीं, सीएम आतिशी के खिलाफ रमेश बिधूड़ी को चुनावी मैदान में उतारा गया है. आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले कैलाश गहलोत को भी पार्टी ने बिजवासन सीट से टिकट दिया है. बिजवासन से कैलाश गहलोत को टिकट बीजेपी ने आदर्श नगर सीट से राजकुमार भाटिया, बादली से दीपक चौधरी, रिठाला से कुलवंत राणा, नांगलोई जाट से मनोज शौकीन, मंगोलपुरी सीट से राजकुमार चौहान, रोहिणी से विजेंद्र गुप्ता, शालीमार बाग से रेखा गुप्ता, मॉडल टाउन से अशोक गोयल, करोल बाग से दुष्यंत कुमार गौतम, पटेल नगर से राजकुमार आनंद, राजौरी गार्डन से सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, जनकपुरी से आशीष सूद, बिजवासन सीट से कैलाश गहलोत को टिकट दिया है. कालकाजी से रमेश बिधूड़ी, पटपड़गंज से रवींद्र सिंह नेगी पर भरोसा इसके साथ ही नई दिल्ली से प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, जंगपुरा से सरदार तरविंदर सिंह, मालवीय नगर से सतीश उपाध्याय, आरके पुरम सीट से अनिल शर्मा, महरौली से गजेंद्र यादव, छतरपुर से करतार सिंह तंवर, अंबेडकर नगर से खुशीराम चुनार, कालकाजी से रमेश बिधूड़ी, बदरपुर में नारायण दत्त शर्मा, पटपड़गंज से रवींद्र सिंह नेगी, विश्वास नगर से ओम प्रकाश वर्मा, कृष्णा नगर से अनिल गोयल, गांधीनगर से अरविंदर सिंह लवली, सीमापुरी से कुमारी रिंकू, रोहतास नगर से जितेंद्र महाजन और घोंडा से अजय महावर को चुनावी मैदान में उतारा गया है. इसके अलावा जनकपुरी विधानसभा सीट से आशीष सूद, बिजवासन से कैलाश गहलोत, नई दिल्ली से प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, जंगपुरा से सरदार तरविंदर सिंह मारवाह, मालवीय नगर से सतीश उपाध्याय, आरके पुरम से अनिल शर्मा, महरौली से गजेंद्र यादव, छतरपुर से करतार सिंह तंवर, अंबेडकर नगर (एससी) से खुशीराम चुनार, कालकाजी से रमेश बिधूड़ी, बदरपुर से नारायण दत्त शर्मा, पटपड़गंज से रविंद्र सिंह नेगी, विश्वास नगर से ओम प्रकाश शर्मा, कृष्णा नगर से अनिल गोयल, गांधीनगर से सरदार अरविंद सिंह लवली, सीमापुरी (एससी) से कुमारी रिंकू, रोहतास नगर से जितेंदर महाजन और गोहाना से अजय महावर को उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों की लिस्ट पहले ही जारी कर दी है। recent visitors 88

मध्य प्रदेश में अध्यक्ष पद को लेकर बीजेपी के सवर्ण दांव की चर्चा फिर से तेज

भोपाल नए साल की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 15 जनवरी तक मध्य प्रदेश में नए अध्यक्ष की ताजपोशी हो सकती है, क्योंकि दिल्ली से लेकर भोपाल तक कई संगठनात्मक बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें अध्यक्ष पद को लेकर रायशुमारी हुई है. फिलहाल खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वह 2020 से लेकर 2025 तक की पारी खेल चुके हैं. अध्यक्ष पद को लेकर कई तरह की अटकलें लग रही है, क्योंकि इस पद के लिए कई नेता दावेदार नजर आ रहे हैं. वीडी शर्मा को मिला था विस्तार वीडी शर्मा को बीजेपी ने 2020 में मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनाया था, जिसके बाद 2023 में उनका कार्यकाल पूरा हो गया था, क्योंकि बीजेपी में अध्यक्ष पद का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से उनके कार्यकाल को विस्तार दिया गया था, जिसके बाद से वह चार साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. हालांकि वीडी शर्मा अब भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं, क्योंकि उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है. हालांकि चर्चा यह भी है कि वीडी शर्मा को पार्टी कोई दूसरी जिम्मेदारी सौंप सकती है, ऐसे में उनकी जगह कोई और नेता ले सकता है. क्या मध्य प्रदेश फिर दिखेगा बीजेपी का सवर्ण दांव मध्य प्रदेश में अध्यक्ष पद को लेकर बीजेपी के सवर्ण दांव की चर्चा फिर से तेज हो गई है. क्योंकि फिलहाल प्रदेश में बीजेपी की राजनीतिक व्यवस्था को देखा जाए तो पार्टी ने सभी वर्गों को साधने का काम किया है. बीजेपी ने ओबीसी से आने वाले डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाया है, जबकि डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा एससी वर्ग से आते हैं. ये दोनों ही नेता मालवा जोन से आते हैं, इसी तरह राजेंद्र शुक्ला को भी डिप्टी सीएम बनाया गया है जो ब्राह्राण हैं और विंध्य अंचल से आते हैं. जबकि सवर्ण वर्ग के नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है जो चंबल रीजन से आते हैं. सवर्ण वर्ग से आने वाले वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा बुंदेलखंड रीजन से सांसद हैं, ऐसे में उनकी जगह बीजेपी किसी सवर्ण वर्ग के नेता पर ही दांव लगा सकती है. नरोत्तम मिश्रा के साथ ये नेता दावेदार मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सूबे के पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता नरोत्तम मिश्रा के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, वह पिछले कुछ दिनों में तेजी से राज्य की राजनीति में एक्टिव भी दिख रहे हैं, जबकि हाल में उन्होंने कई बार वीडी शर्मा से मुलाकात भी की है. मिश्रा के दिल्ली दौरे की भी चर्चा है. इसके अलावा भोपाल की हुजूर सीट से तीन के बार के विधायक रामेश्वर शर्मा के नाम की चर्चा भी चल रही है. शर्मा इस बार मंत्री पद के भी दावेदार थे, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिली थी, जिसके बाद उनके नाम की चर्चा अध्यक्ष पद के लिए भी चल रही है. वहीं पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया का नाम भी इस रेस में शामिल हैं, भदोरिया को संगठन का कुशल रणनीतिकार माना जाता है. ये नाम भी चौंका सकते हैं बीजेपी राजनीतिक अपने सरप्राइज के लिए भी जानी जाती है. 2014 के बाद से ही बीजेपी ने अब तक कई चौंकाने वाले फैसले किए हैं, ऐसे में इस बात की भी पूरी संभावना है कि किसी अनजाने चेहरे की एंट्री भी हो सकती है. पन्ना से विधायक और पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह, बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल का नाम भी तेजी से अध्यक्ष पद की रेस में शामिल हुआ है. माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान की दिल्ली में हुई बैठक में भी इन दोनों की चर्चा हुई है. वहीं भोपाल से पार्टी सांसद आलोक शर्मा भी अध्यक्ष की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं. आदिवासी वर्ग की भी चर्चा बीजेपी का फोकस हमेशा आदिवासी वर्ग पर भी रहा है. मोहन सरकार में आदिवासी वर्ग से आने वाले मंत्रियों की संख्या अच्छी खासी है, जिनके पास बड़े विभागों की जिम्मेदारियां हैं. ऐसे में अगर बीजेपी आदिवासी वर्ग से आने वाले नेता पर दांव लगाती है तो इस लिस्ट में मंडला से आठ बार के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम भी रेस में शामिल हैं. वह अटल और मोदी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. इसके अलावा राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी के नाम की चर्चा भी कई बार हो चुकी है. जबकि अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले नेता पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य के नाम की चर्चा भी तेज है. 15 जनवरी तक मिल सकता है नया अध्यक्ष मध्य प्रदेश में फिलहाल बीजेपी के संगठन चुनावों की प्रक्रिया जारी है, जिसके तहत मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियां हो चुकी हैं, जबकि जिला अध्यक्षों के लिए रायशुमारी का दौर जारी है. वहीं माना जा रहा है कि 15 जनवरी तक प्रदेश में नए अध्यक्ष की ताजपोशी भी हो सकती है. क्योंकि जिला अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया इस हफ्ते में पूरी होने की उम्मीद है, ऐसे में फिर नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है. recent visitors 94

भाजपा ने दिल्ली की 70 सीटों के लिए उम्मीदवारों को लेकर मंथन कर लिया, ऐलान जल्द

नई दिल्ली नए साल की शुरुआत में ही होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा में गहमागहमी बढ़ती जा रही है। दिल्ली भाजपा ने सभी 70 सीटों के लिए उम्मीदवारों को लेकर मंथन कर लिया है। अब केंद्रीय नेतृत्व के साथ अनौपचारिक बैठक में इस पर विचार किया जाएगा। इसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। दिल्ली विधानसभा चुनाव फरवरी की शुरुआत में होने की संभावना है। पार्टी का प्रचार अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से शुरू होगा। हरियाणा और महाराष्ट्र की बड़ी जीतों, लेकिन झारखंड के झटके के बाद भाजपा नेतृत्व ने अपनी चुनावी रणनीति को लेकर अंदरूनी तौर पर काफी विचार-विमर्श किया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी का मानना है कि जहां वह सीधे जनता तक अपना जुड़ाव कायम करने में सफल रही है, वहां उसे जीत मिली है और जहां इस मामले में कमजोर पड़ी, उसे हार का सामना करना पड़ा है। बड़े नेताओं को मैदान में उतारेगी पार्टी : सूत्रों का कहना है कि पार्टी मध्य प्रदेश की तरह दिल्ली में भी अपने अधिकांश बड़े नेताओं को चुनाव लड़ा सकती है। इनमें लोकसभा चुनाव में टिकट कटने वाले पूर्व सांसद, पूर्व विधायक भी शामिल हैं। एक बड़ी दावेदारी पूर्व और मौजूदा पार्षदों की है, लेकिन उनकी छवि को देखते हुए ही फैसला किया जाएगा। इसके लिए पार्टी ने कुछ एजेंसियों से भी संभावित उम्मीदवारों को लेकर फीडबैक लिया है। जनता से जुड़ाव को दिया जा रहा महत्व पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा कि जनता से जुड़ाव का केवल यह अर्थ नहीं है कि हम हर व्यक्ति से प्रत्यक्ष मिलें, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उसे यह लगना चाहिए कि भाजपा की सत्ता में ही बेहतरी होगी। अगर अन्य दल आए तो उनकी अपनी दिक्कतें बढ़ेंगी। यह काम मानस परिवर्तन यानी तथ्यों और स्थितियों के आधार पर मानसिकता में बदलाव लाने का है। ऐसे में साफ-सुथरे, सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए उम्मीदवार उतारने से जीतने की संभावना बढ़ जाती है। recent visitors 74

छत्तीसगढ़ में इस बार प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता, अध्यक्ष किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किए जाने की अटकलें

रायपुर  नए साल 2025 में बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलेगा। बीजेपी में संगठन चुनाव का दौर चल रहा है। माना जा रहा है कि जनवरी महीने में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की लिस्ट जारी हो जाएगी। उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का नाम घोषित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में इस बार प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता है। बीजेपी में ऐसी चर्चा चल रही है। हालांकि इस संबंध में किसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी में बीजेपी छत्तीसगढ़ बीजेपी के नेताओं और पदाधिकारियों में यह चर्ता है कि नया प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता है। क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री आदिवासी वर्ग से हैं और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव सामान्य वर्ग से आते हैं। विष्णुदेव साय की कैबिनेट में सभी वर्ग के नेताओं को शामिल किया गया है। बीजेपी अब राज्य की सियासत में ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी कर रही है। नए चेहरे को मिल सकती है जगह माना जा रहा है कि अब संगठन किसी ऐसे चेहरे को आगे करेगा जिसकी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ हो। चर्चा है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष रायपुर जिले से हो सकता है। अगर किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किया जाता है तो उन नेताओं को मौका मिल सकता है जो कैबिनेट में शामिल होने की दौड़ में हैं। किस वर्ग से कौन से नेता हैं प्रबल दावेदार छत्तीसगढ़ बीजेपी सूत्रों के अनुसार, इस बार आदिवासी या फिर ओबीसी वर्ग के नेता को प्राथमिकता दी जाएगी। ओबीसी वर्ग का अध्यक्ष बनाकर बीजेपी भूपेश बघेल के सामने एक बड़ा चेहरा खड़ा कर सकती है। ऐसे में ओबीसी वर्ग से धरमलाल कौशिक, आदिवासी वर्ग से विक्रम उसेंडी औऱ सामान्य वर्ग से शिवरतन शर्मा का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। कैबिनेट विस्तार की अटकलें छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। विष्णुदेव साय की कैबिनेट में दो विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बीच बीजेपी ऐसे नेता को आगे बढ़ा सकती है जिसके नाम से किसी भी गुट को दिक्कत नहीं हो। दिल्ली में हुई थी बैठक हाल ही में सीएम विष्णुदेव साय दिल्ली के दौरे पर थे। सीएम विष्णुदेव साय ने दिल्ली दौरे में संगठन चुनाव को लेकर आयोजित बैठक में हिस्सा लिया था। इस बैठक नें प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी समेत पार्टी के सीनियर नेता मौजूद थे। कहा जा रहा है कि इसी बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट विस्तार को लेकर फॉर्म्युला बनाया गया है। recent visitors 78

प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आलोक शर्मा के नाम की सिफारिश शिवराज सिंह चौहान ने की ….

भोपाल  मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी इकाई को अगले साल 15 जनवरी तक नए अध्यक्ष के मिलने की संभावना है. रविवार को दिल्ली में हुई एक संगठनात्मक बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी अध्यक्षता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के राष्ट्रीय संगठनात्मक महासचिव बीएल संतोष ने की. बैठक में शामिल होने वालों में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश पार्टी के संगठन महासचिव हितानंद शर्मा और मध्य प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक चुनाव प्रमुख विवेक शेजवलकर शामिल थे. एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष बन सकते हैं वीडी शर्मा? वीडी शर्मा ने फरवरी 2020 में राज्य इकाई की कमान संभाली और फरवरी 2023 में अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा किया. लेकिन विधानसभा चुनाव नौ महीने दूर होने के कारण, पार्टी ने उन्हें विस्तार दिया, और वह इस पद पर चार साल पूरे करने के करीब हैं. हालांकि वीडी शर्मा अभी भी प्रदेश अध्यक्ष के पद की दौड़ में हैं, लेकिन यह संभावना नहीं है कि उन्हें राज्य भाजपा प्रमुख के रूप में एक और कार्यकाल मिल सकता है. क्योंकि उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है. वीडी शर्मा पर भी लागू होगा पार्टी का नियम पार्टी के सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि जिन जिला अध्यक्षों ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें दोहराया नहीं जाना चाहिए. यही फॉर्मूला वीडी शर्मा पर भी लागू हो सकता है और इसकी बहुत कम संभावना है कि आरएसएस के पसंदीदा होने और प्रभावशाली संगठनात्मक रिकॉर्ड होने के बावजूद उन्हें दूसरा कार्यकाल मिलेगा. आलोक शर्मा के नाम की सिफारिश शिवराज सिंह चौहान ने की प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में तीन पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, बृजेंद्र प्रताप सिंह और अरविंद सिंह भदोरिया बताए जा रहे हैं. इसके अलावा भोपाल से पार्टी सांसद आलोक शर्मा भी दौड़ में हैं, जिनके नाम की सिफारिश केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बैतूल विधानसभा सीट से विधायक हेमंत खंडेलवाल ने की है, जिन्हें तीन विधानसभा चुनावों के दौरान यूपी में 15 जिलों के समन्वय का प्रभार दिया गया था. बृजेंद्र प्रताप सिंह की भी एंट्री कहा जा रहा है कि भोपाल की हुजूर सीट से स्थानीय विधायक रामेश्वर शर्मा भी इस पद पर नजर गड़ाए हुए हैं और उनके समर्थक उनकी उम्मीदवारी के लिए जोर लगा रहे हैं. प्रस्तावित राज्य भाजपा अध्यक्षों की सूची में सबसे हालिया प्रविष्टि बृजेंद्र प्रताप सिंह की है, जिनका नाम रविवार को दिल्ली में बैठक के दौरान सामने आया था. राज्य पार्टी के पदाधिकारियों का दावा है कि दौड़ में अंतिम नाम के रूप में एक छुपा रुस्तम उभर सकता है. कब होगी नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा, “मध्य प्रदेश में पार्टी संगठन ने सदस्यता अभियान के लिए बहुत अच्छा काम किया है. हमारे पास 1.5 करोड़ से अधिक सदस्य और एक लाख सक्रिय सदस्य हैं. बूथ से लेकर मंडल स्तर तक चुनाव हुए हैं. अगला जिला अध्यक्षों का चुनाव है, जो अगले सप्ताह के भीतर पूरा हो जाएगा और फिर नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की जाएगी. भाजपा के लिए संगठन ही लोगों की सेवा का मार्ग है, जिसे भी राज्य इकाई का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी जाएगी वह पार्टी के आदर्शों के लिए काम करेगा.” मप्र में बूथ और मंडल स्तर पर चुनाव हुए और सदस्यों की नियुक्ति की गई. पार्टी का संगठन के चुनाव पर जोर 5 जनवरी तक 60 संगठनात्मक जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी जायेगी. रविवार को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर हुई बैठक में उनकी सूची को अंतिम रूप भी दे दिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और हितानंद शर्मा के साथ जिला अध्यक्षों की अंतिम सूची पर निर्णय लेने के लिए अन्य सभी बैठकें रद्द कर दीं. पार्टी के सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां 5 जनवरी तक पूरी हो जाएं. हालांकि, अगर नामों की पसंद पर मतभेद हुआ तो सूची में 10 जनवरी तक की देरी हो सकती है. 431 सदस्य चुनेंगे पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष पार्टी कार्यालय के सूत्रों ने कहा, “लेकिन राज्य पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति 15 जनवरी तक कर दी जाएगी. नए राज्य अध्यक्ष के चुनाव के लिए 60 जिला अध्यक्षों, 230 प्रतिनिधियों (प्रत्येक विधानसभा सीट से एक) और 141 अन्य प्रतिनिधियों सहित 431 सदस्यों का एक निर्वाचक मंडल मतदाता है. इन 431 सदस्यों को बुलाया जाएगा और एक उपयुक्त राज्य पार्टी प्रमुख के नाम की सिफारिश करने के लिए कहा जाएगा.” recent visitors 72

मध्य प्रदेश में बीजेपी ने परिवारवाद पर लगाम लगा दी, एक परिवार से एक ही व्यक्ति को मौका, अधर में लटका है नेतापुत्रों का भविष्य

भोपाल मध्य प्रदेश में बीजेपी ने परिवारवाद पर लगाम लगा दी है। कई नेतापुत्रों के राजनीतिक सपने टूट गए हैं। बुधनी उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय को टिकट नहीं मिला। इसके बाद से दूसरे नेता निराश हो गए। अब भाजपा संगठन चुनाव में भी इन नेता पुत्रों की कोई पूछपरख नहीं हुई। बीजेपी का परिवारवाद विरोधी रुख नेताओं के बच्चों के लिए मुसीबत बन गया है। विधानसभा और लोकसभा जाने की उनकी राह मुश्किल हो गई है। कई नेता अपने बच्चों को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते थे। लेकिन पार्टी के नए नियमों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। क्या है पार्टी का स्टैंड भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपनी जीत का श्रेय परिवारवाद न फैलाने को दिया है। पार्टी का मानना है कि परिवारवाद से प्रतिभा दब जाती है। इसलिए पार्टी ने एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट देने का फैसला किया है। इससे कई नेता पुत्रों का राजनीतिक करियर खतरे में पड़ गया है। पहले ये नेता पुत्र राजनीति में काफी सक्रिय थे। अब वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। नए नियमों के बाद से गायब हैं नेतापुत्र ऐसे नेता पुत्रों में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के बेटे अभिषेक भार्गव भी शामिल हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर भी इसी सूची में हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय भी राजनीति में सक्रिय थे। पूर्व मंत्री जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के बेटे तुष्मुल भी इसी श्रेणी में आते हैं। बीजेपी ने पहले इन पर की कार्रवाई भाजपा ने आकाश विजयवर्गीय और जालम सिंह पटेल के टिकट पहले ही काट दिए थे। कार्तिकेय सिंह चौहान 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले से बुधनी में सक्रिय थे। उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें उपचुनाव में टिकट मिलेगा। प्रदेश भाजपा चुनाव समिति ने उनका नाम दूसरे नंबर पर भेजा भी था। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें टिकट नहीं दिया। नरेंद्र तोमर के बेटे भी थे एक्टिव पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे देवेंद्र सिंह तोमर लगभग 10 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन पार्टी ने नरेंद्र सिंह तोमर को ही मैदान में उतार दिया। इससे देवेंद्र का सपना टूट गया। सागर जिले की रहली सीट से नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव अपने बेटे अभिषेक को राजनीति में स्थापित करना चाहते थे। अभिषेक दमोह या खजुराहो से लोकसभा टिकट के लिए भी कोशिश कर रहे थे। जयंत मलैया भी खाली हाथ दमोह से सात बार विधायक रहे जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ भी टिकट की दौड़ में थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव का टिकट भी मांगा था। लेकिन पार्टी ने उन्हें तवज्जो नहीं दी। 2021 के उपचुनाव में सिद्धार्थ ने दमोह से टिकट मांगा था। लेकिन पार्टी ने कांग्रेस से आए राहुल लोधी को टिकट दे दिया। राहुल हार गए तो मलैया परिवार पर भितरघात का आरोप लगा। सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल दिया गया। बाद में वे वापस पार्टी में आ गए। बालाघाट में भी यही हाल बालाघाट से विधायक रहे गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते थे। मौसम को विधानसभा का टिकट भी मिला था। लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इसलिए गौरीशंकर बिसेन को ही चुनाव लड़ना पड़ा। अब गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी को जिलाध्यक्ष बनाने की कोशिश कर रहे हैं। recent visitors 60