संक्रांति तक कम से कम आधे राज्यों को नए अध्यक्ष मिल जाएंगे और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा

नई दिल्ली जेपी नड्डा बीते 4 सालों से अधिक समय से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं। उनका कार्यकाल बीते साल ही समाप्त हो गया था, लेकिन लोकसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें विस्तार मिल गया था। अब इलेक्शन के नतीजे आए भी 6 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा ही हैं। इस बीच पार्टी में संगठन बदलने की कवायद तेज हो गई है और सूत्रों का कहना है कि संक्रांति के बाद भाजपा को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। इसे लेकर बैठकें शुरू हो चुकी हैं और जल्दी ही किसी नेता के नाम पर मुहर लग सकती है। सूत्रों का कहना है कि भूपेंद्र यादव, अनुराग सिंह ठाकुर, शिवराज सिंह चौहान समेत कई ऐसे नेता हैं, जिन्हें अध्यक्ष बनाने का फैसला हो सकता है। फिलहाल पार्टी 15 जनवरी तक जिला और राज्य के अध्यक्ष बना लेना चाहती है। संक्रांति तक कम से कम आधे राज्यों को नए अध्यक्ष मिल जाएंगे और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। खबर है कि महीने के अंत तक पार्टी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। रविवार को भाजपा ने इस संबंध में मुख्यालय में मीटिंग भी बुलाई थी। इस मीटिंग में संगठन महामंत्री बीएल संतोष के अलावा जेपी नड्डा समेत कई अधिकारी मौजूद थे। इस मीटिंग में संगठन पर्व को लेकर भी चर्चा हुई है। इसके तहत सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि एक फुल प्रूफ व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे पता चल सके कि कौन संगठन से जुड़ रहा है। पार्टी नेताओं के अनुसार यह तैयारी है कि घर-घर जाकर भी सदस्य बनाए जाएं। इससे लोगों तक पहुंच बनाने का एक मौका पार्टी को मिल सकेगा। बता दें कि इसी साल अक्टूबर में भाजपा ने 10 करोड़ सदस्यों का आंकड़ा पार कर लिया था। रविवार को जेपी नड्डा और बीएल संतोष ने संगठन चुनाव का जायजा लिया। एक अधिकारी ने कहा कि यह सफल मीटिंग थी। हमने संगठन के सभी पहलुओं पर विचार किया। इस मीटिंग में यह भी तय हुआ है कि अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती को पूरे वर्ष मनाया जाएगा। साल भर इस अवसर पर अलग-अलग कार्य़क्रम का आयोजन होगा। पूरे साल अटल जी की जयंती को सुशासन वर्ष के तौर पर मनाया जाएगा। फिलहाल पार्टी का जोर इस बात पर है कि संक्रांति तक जिला और राज्यों के अध्यक्ष तय कर लिए जाएं। उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए। बता दें कि आमतौर पर किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत संक्रांति के बाद ही की जाती है। हिंदू धर्म की इस मान्यता का भाजपा की ओर से भी पालन होता रहा है। recent visitors 57

उज्जैन के बीजेपी लोक शक्ति कार्यालय पर इन दिनों शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर गहमा गहमी देखने को मिल रही

उज्जैन मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के संगठन चुनाव चल रहे हैं जिनमें हाई प्रोफाइल सीटों पर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन की हाई प्रोफाइल सीट पर शहर और जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में कई नेता शामिल हैं. भारतीय जनता पार्टी के प्रभारी विधायकों द्वारा रायशुमारी चल रही है. धार्मिक नगरी उज्जैन के बीजेपी लोक शक्ति कार्यालय पर इन दिनों शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर गहमा गहमी देखने को मिल रही है. उज्जैन में शहर और जिला अध्यक्ष पद को लेकर 24 नाम पर विचार चल रहा है. उज्जैन के नगर निगम के पूर्व सभापति सोनू गहलोत के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी में निर्वाचन प्रक्रिया के तहत शहर और जिला अध्यक्ष का चयन होता है लेकिन यह सब सौहार्दपूर्ण माहौल में रायशुमारी के साथ हो जाता है. इस बार भी भारतीय जनता पार्टी में कई योग्य दावेदार हैं, जिनका चयन चल रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि 31 दिसंबर के पहले ही नए अध्यक्ष का नाम सामने आ जाएगा. भाजपा नेता सौदान सिंह के मुताबिक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोगों नेताओं के नाम पर रायशुमारी चल रही है. विधायक भगवान दास सबनानी ने कई नेताओं से बातचीत कर शहर और जिला अध्यक्ष को लेकर नाम की पैनल तैयार की है. उज्जैन में रायशुमारी, भोपाल से लगेगी मुहर भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उज्जैन में राय सोमारी का दौर चल रहा है लेकिन आखिरी मुहर भोपाल से ही लगेगी. भोपाल से ही शहर और जिला अध्यक्ष नाम की घोषणा होगी. हालांकि बीजेपी में यह देखने में आता है कि महामंत्री को आगे शहर और अध्यक्ष की कमान मिलती है. इसी तरह के समीकरण उज्जैन में भी देखने को मिल रहा है. recent visitors 72

BJP के प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी? इस बात की चर्चा भोपाल से लेकर दिल्ली तक

भोपाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी? इस बात की चर्चा भोपाल से लेकर दिल्ली तक चल रही है. 15 जनवरी तक बीजेपी की मध्य प्रदेश इकाई को नया अध्यक्ष मिल जाएगा, लेकिन किसके नाम का ऐलान होगा? इसे लेकर हर कोई अलग-अलग नाम पर चर्चा कर रहा है. मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के जिला और शहर अध्यक्ष पद को लेकर नेताओं के बीच रायशुमारी चल रही है. सभी जिला और शहर अध्यक्षों की घोषणा के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चयन होगा. प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में इस बार कई नेताओं के नाम शामिल हैं. मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारने वाले कई नेता प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं. इसके अलावा प्रदेश पदाधिकारी के लिए भी कई नामों का जिक्र हो रहा है. हालांकि, अभी आलाकमान का पूरा फोकस शहर और जिला अध्यक्ष पर किया है. शहर, जिला अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि मिलकर प्रदेश अध्यक्ष का चयन करेंगे. प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा को 4 साल का कार्यकाल मिला है. लोकसभा चुनाव की वजह से पिछले साल होने वाले चुनाव को इस बार संपन्न कराया जा रहा है. प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया के मुताबिक, 15 जनवरी तक नए अध्यक्ष का नाम सामने आ जाएगा. उन्होंने बताया कि अभी शहर और जिला अध्यक्ष को लेकर विचार-विमर्श चल रही है. सांसद ही बनते आ रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष, इस बार क्या होगा? अगर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के पद की बात की जाए तो लंबे समय से यह देखने में आ रहा है कि सांसदों को ही ये जिम्मेदारी दी जा रही है. इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण जटिया, नंदू चौहान, राकेश सिंह, विष्णु दत्त शर्मा जैसे कई नाम शामिल हैं. इस बार भी यह कोशिश की जा रही है कि किसी सांसद को ही प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान मिले. वर्तमान अध्यक्ष भी दौड़ में शामिल वरिष्ठ पत्रकार सुनील जैन के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी दोबारा कार्यकाल की दौड़ में शामिल नजर आ रहे हैं. उनके कार्यकाल में ही बीजेपी की दो बार सरकार बन चुकी है. जब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, उस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. इसके बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद बीजेपी की सरकार बन गई. इसके पश्चात विधानसभा चुनाव 2023 में भी विष्णु दत्त शर्मा का ही कार्यकाल था, जब बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की. recent visitors 81

पांढुर्णा: भाजपा जिला अध्यक्ष के लिए संगठन ने भेजा नामों का पैनल, आलाकमान करेगा अंतिम फैसला

पांढुर्णा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पांढुर्णा जिला संगठन में जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। रायशुमारी के माध्यम से संभावित नामों का चयन किया गया और पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजा गया। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व इन नामों का आकलन कर अंतिम निर्णय करेगा। जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया: पहली बार नई रणनीति भाजपा ने पहली बार लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह जिलाध्यक्षों के चयन के लिए विस्तृत और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई है। पार्टी ने तय किया है कि संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक समीकरण, और नेतृत्व कौशल को प्राथमिकता दी जाएगी। चयन प्रक्रिया का स्वरूप भाजपा जिला कार्यालय में 12 मंडल अध्यक्षों, तीनों तहसीलों (पांढुर्णा, सौंसर, नांदनवाड़ी) के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ रायशुमारी की गई। रायशुमारी के आधार पर तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया गया। सभी नाम प्रदेश भाजपा कार्यालय भेजे गए, जहां से यह सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। केंद्रीय नेतृत्व दावेदारों का मूल्यांकन कर अंतिम चयन करेगा। प्रबल दावेदार और सामाजिक समीकरण जिलाध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें मुख्यतः कुनबी समाज से वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली ताई महाले, राहुल मोहोड़, संदीप मोहड़, देवीदास राउत, वही पावर समाज से श्रीमती सुनीता यादवराव डोबले, क्रिष्णकुमार डोबले और तेली समाज से श्रीमती मीनाक्षी ताई खुरसंगे, ठाकुर समाज से नरेंद्र परमार जैसे दावेदार भी चर्चा में रहे। हालाकि संगठन नेतृत्व में प्रबल नाम वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली महाले का माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला संगठन ने सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं की अनुभवजन्य क्षमता को ध्यान में रखते हुए पैनल तैयार किया है। केंद्रीय नेतृत्व सभी नामों का आकलन करेगा और जनवरी 2025 तक जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा संभव है। संघ की पृष्ठभूमि और संगठनात्मक अनुभव को मिलेगी प्राथमिकता भाजपा ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि है, और जिन्होंने संगठन में अनुकरणीय कार्य किया है। भाजपा की नई रणनीति इस बार भाजपा ने जिलाध्यक्ष चयन में पारदर्शिता और संगठनात्मक शक्ति को बढ़ाने के लिए नई रणनीति अपनाई है। पार्टी का उद्देश्य है कि सक्षम और प्रभावी नेतृत्व तैयार किया जाए, जो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में संगठन को मजबूत कर सके। recent visitors 76

नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की दखल बढ़ा, संघ की पृष्ठभूमि वाले नेता को ही इस पद की जिम्मेदारी मिलेगी!

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी में जुट गई है। फरवरी महीने के अंत तक भगवा पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने की संभावना है। फिलहाल सत्तारूढ़ पार्टी बूथ, जिला और विभागीय अध्यक्षों के चुनाव में व्यस्त है। जल्द ही प्रदेश अध्यक्षों का चयन होगा। इस बात की संभावना है कि आधे से अधिक राज्यों के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं। इसके बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जाएगा। इस रेस में कई नाम चल रहे हैं। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि सारी अटकलों पर पानी फिर सकता है। हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा को मिली शानदार जीत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। इसे देखते हुए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की दखल बढ़ने की संभावना है। ऐसी चर्चा है कि जेपी नड्डा के एक विवादास्पद बयान के बाद आरएसएस और भाजपा के बीच दूरी बन गई थी। इसका खामियाजा पार्टी को लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ा था। लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र के नतीजों के बाद आरएसएस और भाजपा के बीच रिश्ते सामान्य होने की बात भी कही जाने लगी है। इन नामों की चर्चा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय मंत्रियों मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव, धर्मेन्द्र प्रधान और भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े का नाम शामिल है। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन नामों पर विचार करना अभी जल्दबाजी हो सकती है। अंतिम निर्णय भले ही पीएम मोदी और अमित शाह लेंगे, लेकिन आरएसएस को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। ऐसे में संघ की पृष्ठभूमि वाले नेता को ही इस पद की जिम्मेदारी मिलेगी, जो कि भविष्य में दोनों संगठनों की बीच सामंजस्य बनाकर चल सके। बीजेपी एक दलित नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर विचार कर सकती है। अमित शाह के द्वारा संसद में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को लेकर दिए गया बयान के बाद भाजपा फिलहाल बैकफुट पर दिख रही है। वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे भी दलित समुदाय से आते हैं। ऐसे में बीजेपी दलित मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दे सकती है। ऐसे में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पार्टी महासचिव दुष्यंत गौतम और उत्तर प्रदेश मंत्री बेबी रानी मौर्य के नाम की भी चर्चा होने लगी है। recent visitors 85

20 जनवरी तक हो सकता है BJP के नए अध्यक्ष का ऐलान, जनवरी के दूसरे सप्ताह में बैठक

नई दिल्ली भाजपा को नया अध्यक्ष अगले सााल जनवरी-फरवरी में मिल सकता है। इसके लिए कुछ केंद्रीय मंत्रियों समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, इस बारे में फैसला होने से पूर्व भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं के बीच जनवरी के दूसरे सप्ताह में अनौपचारिक बैठक हो सकती है। इसके पहले पार्टी आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में नये अध्यक्षों की नियुक्ति करेगी। भाजपा नेतृत्व नये अध्यक्ष को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। वह संगठन स्तर पर अपनी स्थिति को व्यापक व मजबूत करने के साथ आगे बढ़ रहा है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा केंद्र में मंत्री बनने के बाद भी अपना दायित्व निभा ही रहे हैं और संगठन स्तर पर भी पूरी तरह सक्रिय हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि संगठन चुनाव चल रहे हैं। जनवरी-फरवरी में नया अध्यक्ष संगठन को मिल जाएगा। दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर इस नेता का कहना है कि यह संगठन पर निर्भर करेगा कि उसकी उस समय की प्राथमिकताएं और जरूरतें क्या हैं। चूंकि नया अध्यक्ष 15 जनवरी के बाद आना है, इसलिए अगर चुनाव के चलते संगठन एक माह का और समय लेता है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, भाजपा अध्यक्ष के चयन के पहले पार्टी व संघ के नेताओं के बीच नये नेता को लेकर चर्चा होना बाकी है। अभी जो नाम चर्चा में है, वह अनुमानों पर है। सूत्रों के अनुसार, अभी तक न तो भाजपा नेतृत्व ने किसी नाम को लेकर संघ से चर्चा की है और न ही संघ ने किसी नाम का सुझाव दिया है। संभवतः जनवरी के दूसरे सप्ताह में भाजपा व संघ के शीर्ष नेताओं के बीच इस बारे में अनौपचारिक बैठक होगी, जिसमें नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा होगी। जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर, जी. किशन रेड्डी आदि शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यों के संगठन चुनावों में आधा दर्जन से ज्यादा प्रदेशों में नये अध्यक्ष आना तय हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात शामिल हैं। संगठन चुनावों की मौजूदा स्थिति में अधिकांश राज्यों में मंडल अध्यक्षों के चुनाव पूरे हो चुके हैं। इस माह के अंत और जनवरी के पहले सप्ताह तक जिलों के चुनाव पूरे किए जाने की तैयारी है। इसके बाद राज्यों के चुनाव होंगे। क्या कहता है बीजेपी का संविधान? भारतीय जनता पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले कम से कम आधे राज्य इकाइयों में संगठनात्मक चुनाव खत्म पूरे जाने चाहिए. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है. हालांकि 2024 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा के कार्यकाल को आगे बढ़ा दिया गया था. 2020 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे नड्डा फरवरी 2020 में जेपी नड्डा को बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था. नड्डा पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इसके बाद जनवरी 2023 में नड्डा का कार्यकाल पूरा हो रहा था उससे पहले ही अमित शाह ने कहा कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ाने का फैसला किया. तब से लेकर अभी तक नड्डा बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. अब बीजेपी का नया अध्यक्ष सरकार या संगठन किसी से भी हो सकता है. बीजेपी का राष्ट्रीय पार्टी या फिर संगठन से कोई भी हो सकता है. अभी तक किसी का भी नाम सामने नहीं आया है. आने वाले कुछ दिनों में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है. recent visitors 103

मध्य प्रदेश नेतृत्व से भेजे जाने वाले तीन नामों में से अंतिम अंतिम मुहर दिल्ली से ही लगाई जाएगी

भोपाल भाजपा संगठन चुनाव को लेकर अब जिला अध्यक्षों को चुने जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सोमवार को राष्ट्रीय सहमंत्री शिव प्रकाश, केंद्रीय पर्यवेक्षक सरोज पांडे, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन मंत्री हितानंद की मौजूदगी में जिला अध्यक्ष चुनाव को लेकर बैठक बुलाई गई। बैठक में स्पष्ट हुआ है कि इस बार भाजपा के जिला अध्यक्षों के नाम सांसद-विधायकों की तरह दिल्ली से ही तय होंगे। मध्य प्रदेश नेतृत्व से भेजे जाने वाले तीन नामों में से अंतिम अंतिम मुहर दिल्ली से ही लगाई जाएगी। जिला अध्यक्ष को लेकर चयन समिति बंद लिफाफे में प्रदेश नेतृत्व को नामों का सुझाव देगी। सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय संगठन मध्य प्रदेश मनमानी रोकने की दिशा में यह कार्य कर रहा है। अभी तक क्षेत्रीय क्षत्रप अपने हिसाब से जिला अध्यक्षों का चयन करते थे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले सीएम मोहन यादव केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सोमवार रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में मुलाकात की। वह आज  भी दोपहर तक दिल्ली में रहेंगे। मुख्यमंत्री यहां कुछ अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर भारत सरकार से जुड़ी योजनाओं का प्रदेश में हो रहे क्रियान्वयन की प्रगति रख सकते हैं। वहीं संगठन के वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। केंद्रीय मंत्री चौहान से भी हुई मुलाकात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मिले। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी उनके साथ थे। उन्होंने कृषि से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। recent visitors 68