यूपी उपचुनाव से पहले सहयोगी दल को सीट ना देने के बाद राजनीति तापमान बढ़ा

लखनऊ उत्तर प्रदेश में 9 सीट पर होने वाला उपचुनाव बेहद रोचक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस उपचुनाव में भी जहां लोकसभा चुनाव की तरह इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच कांटे की फाइट होने की संभावना जताई जा रही थी। वहीं सीट बंटवारे को लेकर फंसे पेंच ने मामला और गरमा दिया है। दोनों गठबंधनों में तमाम बैठकों के बाद भी सीट बंटवारे का मामला सॉल्व नहीं हो पाया है। यहीं वजह है कि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस और बीजेपी ने निषाद पार्टी को एक भी सीट ना देकर उपचुनाव से पहले करारा झटका दे दिया है। सपा और बीजेपी के इस कदम के बाद सूबे का राजनीति पारा बढ़ गया है। चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी ने यूपी उपचुनाव की 9 में से 7 विधानसभा सीट पर कैंडिडेट घोषित कर दिए हैं। बीजेपी ने उन दो सीट पर भी उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिसको लेकर निषाद पार्टी के अध्यक्ष व यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में जमे हुए हैं। संजय निषाद के बीते दिनों दिए एक बयान से राजनीति गरमा गई थी। निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने साफ-साफ शब्दों में कहा था कि कार्यकर्ताओं की मंशा है कि निषाद पार्टी अपने सिंबल पर चुनाव लड़े। भले ही उम्मीदवार बीजेपी का हो। संजय ने कटेहरी और मझवां सीट पर दावा किया था। ऐसा कहकर संजय निषाद दिल्ली निकल गए थे। कटेहरी और मझवां समेत कुल 7 सीट पर प्रत्याशी घोषित संजय निषाद ने दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं से मुलाकात भी की थी। इन सबके बावजूद बीजेपी ने कटेहरी और मझवां समेत कुल 7 सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। बाकी बची दो सीट में से एक आरएलडी को दी है। जबकि एक सीट पर बीजेपी में मंथन चल रहा है। वहीं बीजेपी के टिकट घोषित होने के बाद से संजय निषाद की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि यूपी उपचुनाव से पहले सहयोगी दल को सीट ना देने के बाद राजनीति तापमान बढ़ गया है। फिलहाल सबकी निगाहें निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के अगले कदम पर टिकी हुई है। सपा ने एक भी सीट ना देकर तगड़ा झटका उधर इंडिया गठबंधन में भी सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पाई है। समाजवादी पार्टी ने एक भी सीट ना देकर तगड़ा झटका दे दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सभी 9 सीट पर सपा सिंबल पर प्रत्याशी उतारने का एलान कर दिया है। इसके बाद इंडिया गठबंधन में भी उपचुनाव से पहले फूट पड़ती नजर आ रही है। हालांकि अखिलेश ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ अपनी एक फोटो पोस्ट कर मामला मैनेज करने की पूरी कोशिश की है। सपा कांग्रेस को दो सीट देना चाहती थी। लेकिन यूपी कांग्रेस के नेता 5 सीट पर दावा ठोक रहे थे। तमाम प्रयासों के बाद भी दोनों दलों के बीच सीट पर बात नहीं बन पा रही थी। इसी क्रम में अखिलेश यादव ने बुधवार रात को एक लंबा-चौड़ा पोस्ट कर सभी 9 सीट पर सपा के सिंबल पर कैंडिडेट उतारने का ऐलान कर दिया है। 10 में से 9 सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग मैनपुरी की करहल, मिर्जापुर की मझवां, कानपुर की सीसीमऊ, प्रयागराज की फूलपुर, अयोध्‍या की मिल्‍कीपुर, अंबेडकरनगर की कटेहरी, गाजियाबाद सदर, अलीगढ़ की खैर, मुरादाबाद की कुंदरकी और मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट पर उपचुनाव होना है। इन 10 में से 9 सीट पर 13 नवंबर को वोटिंग होनी है। बीजेपी ने अभी सात सीटों पर उम्‍मीदवारों की घोषणा की है। कुंदरकी सीट से रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद सीट से संजीव शर्मा और खैर (अजा) सीट से सुरेंद्र दिलेर को ट‍िकट द‍िया गया है। जबकि करहल सीट से अनुजेश यादव, फूलपुर सीट से दीपक पटेल, कटेहरी सीट से धर्मराज निषाद और मझवां सीट से सुचिस्मिता मौर्या को कैंडिडेट घोषित किया है। recent visitors 100

भाजपा ने इस उपचुनाव को भाजपा ने भतीजे के सामने फूफा को खड़ा कर दिया, करहल सीट पर बड़ा दाव खेला

करहल यूपी में खाली 10 विधानसभा सीटों में 9 सीटों पर उपचुनाव होने वाला है। इस उपचुनाव में गठबंधन की ओर से सभी सीटों पर सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा जा रहा है। वहीं, वृहस्पतिवार को भाजपा की तरफ से 7 उम्मीदवरों की लिस्ट जारी की गई है। इसमें भाजपा ने करहल सीट पर बड़ा दाव खेला है। दरअसल, इस उपचुनाव को भाजपा ने भतीजे के सामने फूफा को खड़ा कर दिया है। दरअसल भाजपा ने करहल विधानसभा सीट पर मुलायम सिंह यादव के दामाद अनुजेश यादव को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इस सीट से तेज प्रताप यादव उम्मीदवार है। ऐसे में ये लड़ाई काफी दिलचस्प होने वाली हैं..क्योंकि अब करहल सीट पर फूफा और भतीजा आमने सामने होंगे। पिछले 2 दशकों से करहल पर सपा का कब्जा बता दें कि यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि रही करहल पर पिछले दो दशकों से सपा का कब्ज़ा रहा है, कहा जाता है कि दो दशकों के भीतर सपा प्रत्याशी को यहां पर किसी दूसरें दल से लड़ाई तो..बहुत दूर की बात है कभी मजबूत चुनौती तक भी नहीं मिली हैं, लेकिन लगता हैं इस बार बड़ी चुनौती मिल सकती है क्योंकि इस बार सपा को मात देने के लिए भाजपा ने बड़ा दाव खेला है। सपा के किले में सेंध लगाने की तैयारी  भाजपा का भतीजे तेज प्रताप यादव के सामने फूफा अनुजश यादव को उतारने का मकसद यही है कि करहल में सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी।  अनुजेश यादव मुलायम सिंह यादव के भाई अभयराम यादव की बेटी संध्या यादव के पति हैं। संध्या यादव, आजमगढ़ से सांसद धर्मेद्र यादव की सगी बहन हैं। संध्या यादव मुलायम परिवार की पहली बेटी हैं, जिन्होंने राजनीति में कदम रखा था। इतना ही नहीं वो मैनपुरी की जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। recent visitors 69

आगामी राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप-चुनावों के लिए भाजपा ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा की

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा उप-चुनावों के लिए अपने आठ उम्मीदवारों की गुरुवार को घोषणा की। पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने यहां एक विज्ञप्ति में कहा कि भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के विधानसभा के आगामी उप-चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की चौरासी (अजजा) सीट से श्री कारीलाल ननोमा को प्रत्याशी बनाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में कुंदरकी से श्री रामवीर सिंह ठाकुर, गाजियाबाद से श्री संजीव शर्मा, खैर (अजा) से श्री सुरेंद्र दिलेर, करहल से श्री अनुजेश यादव, फूलपुर से श्री दीपक पटेल, कटेहरी से श्री धर्मराज निषाद तथा मझवां से श्रीमती सुचिस्मिता मौर्या को टिकट दिया गया है।   recent visitors 90

अध्यक्ष नड्डा ने मप्र भाजपा के ‘I am BJP Future Force’ अभियान की तारीफ की और उन्होंने अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने को कहा

भोपाल मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने के उद्देश्य से 'आई एम बीजेपी फ्यूचर' नामक अनूठे सदस्यता अभियान का आयोजन किया। इस अभियान की सफलता ने राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी का ध्यान आकर्षित किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान की प्रशंसा की और कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। 'आई एम बीजेपी फ्यूचर' कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गैर-राजनीतिक युवाओं और प्रोफेशनल्स को पार्टी की विचारधारा से जोड़ना था। मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, और इंदौर में आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए 5000 से ज्यादा प्रोफेशनल्स ने भाजपा की सदस्यता ली। इस अनूठी पहल के तहत मध्य प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नड्डा ने की तारीफ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश भाजपा का यह कदम एक मिसाल है। प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने में मध्यप्रदेश भाजपा अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सभी राज्यों को भी इस तरह के प्रोग्राम आयोजित करने चाहिए, ताकि युवा और प्रोफेशनल्स राजनीति में शामिल हो सकें और 2047 के विकसित भारत के सपने को साकार कर सकें। चार प्रमुख शहरों में सफलता का सफर भोपाल (5 अक्तूबर): सफल लांच भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित इस अभियान का लांच 5 अक्तूबर को हुआ, जहां 150 प्रोफेशनल्स ने भाजपा की सदस्यता ली। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया और पार्टी के मूल्यों व दृष्टिकोण को साझा किया। जबलपुर (11 अक्तूबर): जोश और उमंग जबलपुर में 11 अक्तूबर को 300 से अधिक प्रोफेशनल्स भाजपा से जुड़े। वीडी शर्मा ने इस अवसर पर कहा, "युवा प्रोफेशनल्स का जुड़ना पार्टी के लिए एक नई ऊर्जा का संचार है।" उज्जैन (13 अक्तूबर): मुख्यमंत्री का नेतृत्व उज्जैन में 13 अक्तूबर को 500 से अधिक प्रोफेशनल्स ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया और प्रोफेशनल्स को भाजपा की विचारधारा से अवगत कराया। इंदौर (15 अक्तूबर): ग्रैंड फिनाले इंदौर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में 1500 से अधिक प्रोफेशनल्स भाजपा से जुड़े। वीडी शर्मा ने इस मौके पर कहा, "यह कार्यक्रम हमारे भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। recent visitors 116

हरियाणा में राज्यसभा के लिए BJP के कई दावेदार, कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई एक सीट

चंडीगढ़ हाल ही में हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव में इसराना से चुनाव जीतने के बाद कृष्णलाल पंवार ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष जगदीप धनखड़ ने पंवार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ऐसे में राज्यसभा में हरियाणा के हिस्से की एक सीट खाली हो गई है। हालांकि खाली हुई इस एक सीट के लिए चुनाव कब होंगे, इसकी अभी अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि हरियाणा में विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद कभी भी राज्यसभा की एक खाली हुई सीट के लिए चुनाव हो सकते हैं। राज्यसभा के सदस्य के रूप में कृष्णलाल पंवार का कार्यकाल एक अगस्त 2028 तक का था। उन्होंने 23 अगस्त 2022 को शपथ ग्रहण की थी। ऐसे में अब भारतीय जनता पार्टी की ओर से करीब चार साल के लिए अपने प्रत्याशी को राज्यसभा में भेजा जाएगा। इस्तीफा देकर मांगा था आशीर्वाद कृष्ण लाल पंवार ने हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसके बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि इसराना के विधायक के रूप में जनसेवा के अपने नए कर्तव्य की ओर कदम बढ़ाए। नई पारी की शुरुआत के लिए सभी अपना आशीर्वाद प्रदान करें। उन्होंने आगे लिखा था कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में इसराना को एक बेहतर और विकसित क्षेत्र बनाने के लिए कृत संकल्पित हूं। बता दें कि पंवार हरियाणा बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। बीजेपी ने सहेजी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत बता दें कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा की ओर से राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने किरण चौधरी को राज्यसभा में भेजा था। किरण चौधरी का राज्यसभा के सदस्य के रूप में 9 अप्रैल 2026 तक का कार्यकाल है। किरण चौधरी ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अपनी बेटी और समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके एवज में भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को सहेजते हुए किरण चौधरी को राज्यसभा में भेजने का काम किया। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने तोशाम से किरण चौधरी की बेटी श्रुति को अपना उम्मीदवार बनाया। तोशाम से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी ने उन्हें प्रदेश की नायब कैबिनेट में भी स्थान दिया। हरियाणा की राज्यसभा सीटों का गणित हरियाणा की अन्य राज्यसभा सीटों की बात करें तो इनमें बीजेपी के रामचंद्र जांगड़ा 10 अप्रैल 2020 को राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक का है। इसी प्रकार से बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला जो 3 अप्रैल 2024 को राज्यसभा के सदस्य मनोनित हुए थे, का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक है। इसी प्रकार से बीजेपी में शामिल होने के बाद राज्यसभा पहुंची किरण चौधरी का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक का है। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा का चुनाव लड़े कार्तिकेय शर्मा ने 2 अगस्त 2022 को राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली थी, इनका कार्यकाल 1 अगस्त 2028 तक का है। हालांकि कार्तिकेय को बीजेपी की ओर से समर्थन दिया गया था। इसी प्रकार से बीजेपी की ओर से राज्यसभा में गए कृष्णलाल पंवार ने 23 अगस्त 2022 को शपथ ग्रहण की थी, जिनका कार्यकाल एक अगस्त 2028 तक था, लेकिन अब उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा में हरियाणा के हिस्से की एक सीट खाली हो गई है। बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत हरियाणा विधानसभा के ताजा आंकड़ों को देखे तो इस बार भारतीय जनता पार्टी के पास खुद के 48 विधायक है। इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों का भी बीजेपी को समर्थन हैं, जबकि कांग्रेस के 37 और इनेलो के 2 विधायक है। ऐसे में यह साफ है कि कोई भी अन्य दल राज्यसभा के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगा, जिससे बीजेपी उम्मीदवार का निर्विरोध राज्यसभा में जाना तय माना जा रहा है। राज्यसभा के लिए बीजेपी के दावेदार मौजूदा राजनीतिक हालात में कृष्णलाल पंवार के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा की एक सीट एक बार फिर से बीजेपी के पास जाती दिखाई दे रही है। ऐसे में इस एक सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी में कई दावेदारों के नामों की चर्चा हो रही है। इनमें भाजपा नेता प्रो. रामबिलास शर्मा, ओमप्रकाश धनखड़, ज्ञानचंद गुप्ता, संजय भाटिया और कुलदीप बिश्नोई के नाम चर्चा में हैं। हो सकता है कि अंदरखाते अन्य नेता भी लॉबिंग में जुटे हों मगर यह सीट किसके पास जाएगी, फिलहाल यह भविष्य के गर्भ में है। बहुमत नहीं होने के कारण विपक्ष की ओर से इस सीट के लिए किसी को प्रत्याशी बनाए जाने की संभावना बहुत कम है।   recent visitors 89

बीजेपी महाराष्ट्र में ओबीसी, एससी और एसटी पर ही पूरा जोर लगाएगी

 मुंबई लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान कांग्रेस, सपा, आरजेडी और शरद पवार की एनसीपी जैसी पार्टियों ने प्रचार किया था कि एनडीए इसलिए 400 सीटें मांग रहा है ताकि संविधान बदल सके। इसके अलावा आरक्षण को खत्म किया जा सके। इस प्रचार ने असर भी दिखाया और माना जाता है कि इसी के चलते भाजपा 240 सीटों पर ही ठहर गई और एनडीए दलों के समर्थन से ही सरकार बन सकी। अब महाराष्ट्र में इसी दांव को भाजपा पलटने की तैयारी में है।  भाजपा और एनडीए सरकारों के मुख्यमंत्रियों की मीटिंग हो रही है। इसमें पीएम नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। इस मीटिंग का एजेंडा ही है कि कैसे आपातकाल के 50 साल पूरे होने को संविधान हत्या के प्रयास के तौर पर याद दिलाया जाए। यही नहीं महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी भाजपा, एकनाथ शिंदे और अजित पवार की एनसीपी इस मसले को उठाने वाले हैं। इसके तहत घर घर संविधान अभियान चलाया जाएगा। इसके माध्यम से संविधान लागू होने के 75 वर्ष का स्मरण किया जाएगा। दरअसल 'घर-घर संविधान' अभियान के माध्यम से भाजपा चाहती है कि विपक्ष के संविधान बदलने वाले नैरेटिव की काट की जा सके। विपक्ष के इस नैरेटिव का सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र और यूपी जैसे बड़े राज्यों में ही हुआ था। इस अभियान के माध्यम से एनडीए के दल चाहते हैं कि महाराष्ट्र के 25 फीसदी वोटों को साधा जा सके। राज्य में 16 फीसदी दलित आबादी है, जबकि 9 फीसदी संख्या आदिवासियों की है। सूबे में 29 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति और 25 सीटें जनजाति के लिए आरक्षित हैं। भाजपा को लगता है कि ये सीटें पूरा गेम पलटने का दम रखती हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के सुझाव पर ही 'घर-घर संविधान' अभियान शुरू किया जाएगा। वह चाहते हैं कि इस अभियान के जरिए यह संदेश दिया जाए कि भाजपा कैसे संविधान को लेकर तत्पर है। ओबीसी, एससी और एसटी पर ही पूरा जोर भाजपा नेताओं का कहना है कि यह अभियान दलितों, ओबीसी और जनजाति समुदाय के बीच अच्छा संदेश देगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस एवं उसके सहयोगी दलों ने इन्हीं समुदायों के बीच 2024 में भ्रम पैदा कर दिया था। महाराष्ट्र में भाजपा के दलित नेता धर्मपाल मेश्राम ने कहा कि इस बार लोकसभा चुनाव जैसी स्थिति नहीं होगी। हमारे अभियान का लाभ होगा और दलित मतदाता इस बार भाजपा के साथ फिर से आएंगे। क्या है 54 सीटों वाला प्लान, जिससे गेम पलटने की उम्मीद इस तरह भाजपा 54 आरक्षित सीटों पर फोकस कर रही है, जहां से गेम पलट सकता है। इसके अलावा ओबीसी वर्ग पर भी फोकस है क्योंकि मराठा आरक्षण आंदोलन के चलते उनके जरिए ही नुकसान की भरपाई की उम्मीद है। हरियाणा में भी भाजपा ने सामाजिक समीकरण का माइक्रो मैनेजमेंट करके जीत हासिल की थी। माना जा सकता है कि कुछ ऐसा ही प्रयास वह महाराष्ट्र में भी करना चाहती है। recent visitors 106

भाजपा पार्टी अब महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के साथ अपनी जीत का लक्ष्य रख रही है, महाराष्ट्र में क्या है रणनीति

महाराष्ट्र महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के तारीखों के ऐलान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी सियासी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिली सफलता ने भाजपा के अंदर अतिरिक्त उत्साह भर दिया है और पार्टी अब महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के साथ अपनी जीत की कहानी को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है। भाजपा के लिए यह चुनाव न केवल राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल है, बल्कि राज्य में उसकी स्थायी पकड़ को बनाए रखने का भी अवसर है।   भाजपा कैसे साधेगी गठबंधन की बिसात भाजपा इस बार महाराष्ट्र में शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतर रही है। महायुति गठबंधन के रूप में ये तीनों दल एकजुट होकर 288 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का लक्ष्य साधेंगे। हालांकि, भाजपा की रणनीति गठबंधन के बावजूद राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने की है और इस दिशा में वह 155 से 158 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करने की योजना बना रही है। सीटों के बंटवारे और सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाए रखना भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी लेकिन इसके लिए पार्टी ने गहन रणनीतिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। उपेक्षित जातियों पर फोकस और माइक्रो मैनेजमेंट महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा के लिए कई मुद्दे निर्णायक साबित हो सकते हैं। मौजूदा वक्त में मराठा आरक्षण राज्य में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा है, महायुति गठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। चूंकि भाजपा इस गठबंधन का हिस्सा है इसलिए मराठा आरक्षण का समाधान निकालने में उसकी भूमिका अहम होगी। इसके अलावा, महंगाई, किसान संकट, जल संकट, और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे मुद्दे भी चुनावी समीकरण को प्रभावित करेंगे। भाजपा इन समस्याओं का समाधान पेश कर मतदाताओं का समर्थन हासिल करना चाहेगी। क्या मिलेगा संगठनात्मक ताकत और संघ का सहयोग भाजपा के चुनावी अभियान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हरियाणा चुनाव में संघ की बढ़ी हुई भूमिका ने भाजपा को सफलता दिलाई, और अब महाराष्ट्र में भी पार्टी संघ की जमीनी संगठनात्मक ताकत का भरपूर उपयोग करने जा रही है। संघ की राज्य में मजबूत पकड़ होने के कारण भाजपा को विश्वास है कि इसे विधानसभा चुनाव में लाभ मिलेगा। इसके अलावा चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव को कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित करने और उन्हें चुनावी तैयारी के लिए प्रेरित करने का जिम्मा सौंपा गया है। केंद्र की योजनाओं से भाजपा को उम्मीद भाजपा को केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई कई योजनाओं से भी उम्मीदें हैं। पार्टी ने राज्य में अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को सुलझाने के लिए योजनाएं शुरू की हैं जिनमें किसानों के लिए सब्सिडी, जल प्रबंधन, और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। भाजपा की कोशिश होगी कि इन योजनाओं को लेकर वह जनता के बीच विश्वास बनाए रखे और मतदाताओं का समर्थन हासिल करे। कैसा रहा भाजपा का अबतक का चुनावी प्रदर्शन महाराष्ट्र में भाजपा का पिछले एक दशक का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शिवसेना से अलग होकर 122 सीटें जीतीं और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी। इसके बाद शिवसेना और भाजपा ने मिलकर सरकार बनाई। हालांकि, 2019 के चुनाव के बाद शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की अदला-बदली को लेकर भाजपा से अलग होकर महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के साथ गठबंधन किया। इसके बाद 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत ने एमवीए सरकार को गिरा दिया और शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार बनाई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। हरियाणा में मिली जीत से प्रेरित होकर पार्टी महाराष्ट्र में भी अपना प्रदर्शन बेहतर करने की तैयारी में है। मराठा आरक्षण, महंगाई, किसान संकट जैसे मुद्दे चुनावी अभियान में प्रमुख होंगे और भाजपा का लक्ष्य होगा कि वह इन मुद्दों पर जनता का भरोसा जीत सके। इसके अलावा केंद्र की योजनाओं का लाभ उठाते हुए भाजपा इस चुनाव को अपने पक्ष में करने की पूरी कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि पार्टी अपनी रणनीति में कितना सही साबित हो पाती है। recent visitors 101