असम : हर एक विधानसभा क्षेत्र को 40 हजार सदस्य बनाने का लक्ष्य रखने को कहा था

गुवाहाटी असम भाजपा अपने वर्तमान सदस्यता अभियान के तहत 60 लाख नए सदस्य बनाने के 100 प्रतिशत लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, असम में भाजपा की सदस्यता 58 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राज्य इकाई ने हर एक विधानसभा क्षेत्र को 40 हजार सदस्य बनाने का लक्ष्य रखने को कहा था। कुल 126 विधानसभा क्षेत्रों में से 91 ने पहले ही यह लक्ष्य पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा, “हमें पूरे असम में बेहतरीन प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इस त्योहारी सीजन में भी लोग हमारी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। यह वाकई अभूतपूर्व है। केंद्रीय नेता भी हमारे प्रदर्शन से बहुत खुश हैं।” वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “असम के 91 विधानसभा क्षेत्रों में अब ‘बीजेपी सदस्यता 2024’ के तहत 40 हजार से ज्यादा सदस्य शामिल हुए हैं। बेहाली, करीमगंज उत्तर और मजबत निर्वाचन क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं को 40 हजार से ज्यादा सदस्य बनाने में उनकी कड़ी मेहनत के लिए बधाई। 58.31 लाख नए सदस्यों के साथ असम भाजपा अपने निर्धारित लक्ष्य के 100 प्रतिशत के करीब है।” राज्य में भाजपा नेता सदस्यता अभियान में 18 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सीएम सरमा ने पहले कहा था, “हमारी पार्टी कॉलेज या विश्वविद्यालय चुनाव नहीं लड़ती है। हालांकि, उन्हें हमारी पार्टी का सदस्य बनाने में कोई रोक नहीं है। मैं ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं कि वे भाजपा में युवाओं को शामिल करने पर जोर दें। वे भविष्य में इस देश के लिए हमारे मिशन को आगे बढ़ा सकते हैं।” इस बीच, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने कहा कि असम देश में पार्टी के सदस्यता अभियान में 85 प्रतिशत लक्ष्य पूरा करके देश में सबसे आगे है।   recent visitors 85

छत्तीसगढ़ में सदस्यता अभियान में 36 लाख का आंकड़ा पार, रखा 50 लाख पार करने का लक्ष्य

रायपुर छत्तीसगढ़ में भाजपा अपने सदस्य बनाने के काम में जोर-शोर से जुटी हुई है. नतीजतन प्रदेश में अब तक 36 लाख लोगों को भाजपा का सदस्य बनाया जा चुका है. ये दावा प्रदेश संयोजक व प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने किया है. इनका कहना है कि जल्द ही 50 लाख के आंकड़े को भी पार कर लिया जायेगा. इसके लिए योजना बनाकर जमीनी स्तर पर काम भी शुरू कर दिया गया है. ऑफलाइन सदस्य बनाने का अभियान भी भारतीय जनता पार्टी के संगठन महापर्व-सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक व प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने कहा कि  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के नेतृत्व में चल रहे सदस्यता अभियान में 36 दिनों में छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के 36 लाख सदस्य बनाए जा चुके हैं. भाजपा के सदस्यता अभियान को प्रदेशभर में जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है और जो लोग ऑनलाइन सदस्य नहीं बन पा रहे हैं, उनकी मांग को देखते हुए प्रदेश में अब फार्म भरकर ऑफलाइन सदस्य बनाने का अभियान भी युद्धस्तर पर चल रहा है. लक्ष्य को पार करने में लगातार जुटे हैं प्रदेश संयोजक सिंहदेव ने ये भी कहा कि छत्तीसगढ़ में सदस्यता अभियान को लेकर भाजपा ने विशेष अभियान भी चलाकर सदस्यता के लक्ष्य की प्राप्ति में बड़ी छलांग लगाई है.  जिनमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, उप मुख्यमंत्रीअरुण साव व विजय शर्मा समेत प्रदेश सरकार के सभी मंत्री, सांसद-विधायक, पदाधिकारी व कार्यकर्ता बूथ स्तर तक पहुंचकर सदस्यता के लक्ष्य को पार करने में लगातार जुटे हुए हैं. ये तैयारियां भी इधर सदस्यता को गति प्रदान करने प्रदेश के सभी पाँच संभागों से भारतीय जनता युवा मोर्चा की 20 रथयात्राएं शुरु हो चुकी हैं. पार्टी के सभी मोर्चा-प्रकोष्ठों को भी अभियान की सफलता के लिए लक्ष्य सौंपकर जिम्मेदारी दी गई है. सिंहदेव ने कहा कि नमो ऐप, वेब साइट की लिंक, रेफरल लिंक और मिस्ड कॉल के जरिए सदस्यता अभियान को गति देने के बाद पार्टी कार्यकर्ता पूरे समर्पण के साथ जिन क्षेत्रों में नेटवर्क नहीं है या जिन लोगों को ऑनलाइन सदस्य नहीं बनाया जा सक रहा हो, वहां घर-घर सम्पर्क करके फॉर्म भरकर ऑफलाइन सदस्यता अभियान में जुट गए हैं. ये अभियान भी होगा शुरू भाजपा सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक सिंहदेव ने कहा कि इसी के साथ पार्टी के सक्रिय सदस्य बनाने का अभियान भी शुरू होने जा रहा है. प्रत्येक मंडल में 200 सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य दिया गया है. प्रदेशभर में चलने वाले सक्रिय सदस्यता अभियान के लिए भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव को सक्रिय सदस्यता अभियान का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है. पार्टी के सदस्यता अभियान को लेकर सतत समीक्षा का क्रम भी प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में चल रहा है. अभी हाल ही में भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल व प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की मौजूदगी में हुई बैठक में जिला अध्यक्ष एवं जिला सदस्यता प्रभारी और महामंत्रियों से जिलेवार चर्चा करके सदस्यता के लिए लक्ष्य तय किया गया. recent visitors 80

हरियाणा में नायब सिंह सैनी समेत मंत्रिमंडल में 14 सदस्य होंगे, मंत्रिमंडल में किसकी लगेगी लॉटरी

चंडीगढ़ हरियाणा में बीजेपी की लगातार तीसरी बार जीत के बाद अब सबकी निगाहें नई सरकार और कैबिनेट के गठन पर टिकी हैं। हरियाणा सरकार में मुख्यमंत्री सहित कुल 14 मंत्री हो सकते हैं। इसका मतलब है कि भाजपा को 11 नए चेहरों की तलाश करनी होगी, क्योंकि केवल अनिल विज ही वो सीनियर नेता हैं जिन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी है। अनिल विज को मंत्री पद मिल सकता है। बीजेपी जाटों, ब्राह्मणों, पंजाबी और दलितों सहित राज्य की विभिन्न जातियों को ध्यान में रखकर कैबिनेट का गठन करेगी। जातिगत समीकरणों और समुदायों की मांगों को संतुलित करते हुए सरकार बनाना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन बीजेपी ने हाल के दिनों में सफलतापूर्वक किया है। पिछले साल दिसंबर में, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव जीतने के बाद, पार्टी ने विधायकों और राज्य के नेताओं से परामर्श करने के बाद मुख्यमंत्रियों और मंत्रिमंडलों की घोषणा करने में अपना समय लिया। हरियाणा में भी इसी तरह के कदम उठाने की संभावना है। बीजेपी के पास अब दलित समुदाय से नौ विधायक हैं, आठ पंजाबी मूल के, सात ब्राह्मण और जाटों और यादवों में से प्रत्येक के छह विधायक हैं। पार्टी के पास गुर्जर, राजपूत, वैश्य और एक ओबीसी नेता भी हैं। इन दो दलित नेताओं में से एक मिल सकती है कैबिनेट में जगह इस सरकार में भाजपा के पास नौ दलित विधायक हैं, जिनमें से दो सबसे आगे हैं। एक हैं छह बार के विधायक कृष्ण लाल पंवार और दूसरे हैं दो बार के विधायक कृष्णा बेदी। पंजाबी मूल के आठ लोगों में सात बार के विधायक और पूर्व गृह मंत्री अनिल विज हैं, जो मार्च में मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के बाद नाराज हो गए थे। यह तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लोकसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद इस्तीफा देने के बाद हुआ था। पिछले महीने अपनी अम्बाला कैंट सीट जीतने वाले शविज ने तीसरी बार उस रिंग में अपनी टोपी फेंकी लेकिन उन्हें फिर से नजरअंदाज कर दिया गया। और यह पार्टी के लिए थोड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। कृष्ण मिड्ढा को क्या मिलेगी जगह जींद के विधायक कृष्ण मिड्ढा भी इस रेस में हैं, जिन्होंने लगातार तीसरी बार अपनी सीट जीती है। एक और अब तीन बार के विधायक यमुनानगर से घनश्याम दास अरोड़ा हैं। लेकिन उनकी नियुक्ति को छोड़ दिया जा सकता है क्योंकि उनकी सीट अम्बाला क्षेत्र के भीतर है। अरोड़ा को हांसी से तीन बार के विधायक विनोद भयाना के लिए नजरअंदाज किया जा सकता है। किस ब्राह्मण चेहरे को मिलेगा मौका फिर नंबर आता है ब्राह्मण को, इनमें बल्लभगढ़ से तीन बार के विधायक मूल चंद शर्मा शामिल हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में बरकरार रखा जा सकता है। एक और संभावित दो बार के लोकसभा सांसद अरविंद शर्मा हैं जिन्होंने गोहाना जीता। राम कुमार गौतम, जिन्होंने सफीदों को जीत दिलाई, जिसे भाजपा ने कभी नहीं जीता था। अहीरवाल बेल्ट से कौन होगा मंत्री भाजपा के लिए अहीरवाल बेल्ट के छह विधायक महत्वपूर्ण हैं जिन्होंने एक बार फिर पार्टी को भारी मतों से वोट दिया। कांग्रेस को हराने के लिए इस बार यह समर्थन महत्वपूर्ण था। इनमें बादशाहपुर से छह बार के विधायक राव नरबीर सिंह हैं। वह पहली सैनी सरकार में नहीं थे, लेकिन 2014 के चुनाव जीतने के बाद श खट्टर की अध्यक्षता वाली सरकार में थे। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव ने पहली बार अटेली सीट जीती है, लेकिन उनका नाम शॉर्टलिस्ट में है। साथ ही दो बार के विधायक लक्ष्मण यादव का नाम भी है। इस जाट विधायक को मिल सकती है जगह जाट हरियाणा की सबसे बड़ी उप-आबादी में से एक है। जाट नेता महीपाल ढांडा अब पानीपत (ग्रामीण) से दो बार के विधायक हैं और उनके बरकरार रहने की संभावना है। राई से दूसरी बार चुने गए कृष्ण गहलोत भी इस दौड़ में शामिल हैं। एक संभावित बड़ा नया नाम पार्टी के राज्यसभा सांसद किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी का है। अन्य संभावित उम्मीदवारों में वैश्य समुदाय के पूर्व मंत्री विपुल गोयल शामिल हैं। हरियाणा में सबसे अमीर महिला और हिसार से निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल ने औपचारिक रूप से भाजपा को अपना समर्थन दे दिया है। इससे उनके नए मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना बढ़ गई है। recent visitors 74

बीजेपी का मातृ संगठन आरएसएस जातिगत जनगणना बात के बाद अब टीडीपी ने भी मांग दोहरा दी

नई दिल्ली देश भर में राजनीतिक दल और कई सामाजिक संगठन जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं। बिहार में तो नीतीश कुमार जब आरजेडी के साथ सरकार चला रहे थे, उसी समय उन्होंने जातिगत जनगणना करा दी थी। इसके बाद से ही वह पूरे देश में ऐसा करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा गठबंधन के एक और सहयोगी चिराग पासवान भी ऐसी मांग करते रहे हैं। यूपी से अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद और ओपी राजभर भी यह दोहरा चुके हैं। इस बीच एनडीए सरकार के सबसे बड़े गठबंधन सहयोगी टीडीपी ने भी यह मांग दोहरा दी है। भाजपा का मातृ संगठन आरएसएस भी इसके पक्ष में बात रख चुका है। संघ का कहना था कि ऐसा किया जा सकता है, बस राजनीतिक इस्तेमाल न हो। तेलुगु देशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने दिए इंटरव्यू में जातिगत जनगणना को जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि कास्ट सेंसस होनी चाहिए। यह जनता की भावना है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। नायडू ने कहा, 'आप जातिगत जनगणना कराएं। फिर आर्थिक विश्लेषण करें। स्किल सेंसस करें। इससे आपको पता चलेगा कि किसकी क्या स्थिति है और फिर उसके आधार पर आर्थिक गैर-बराबरी दूर करने में मदद मिलेगी।' नायडू ने कहा कि जनभावना है कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए। यदि ऐसा है तो फिर उसका सम्मान जरूरी है। यह बात सही है कि देश में गरीबी सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां तक कि आप निचली जाति से हैं और पैसे वाले हैं तो लोग आपका सम्मान करेंगे। समाज में आपकी इज्जत होगी। लेकिन आप भले ही ऊंची जाति के हैं, लेकिन गरीब हैं तो फिर कोई आपको महत्व नहीं देगा। यह सच्चाई है। इसलिए आर्थिक स्थिति ही समानता का सबसे बड़ा पैमाना है। इसलिए आपको समाज में संतुलन के लिए आर्थिक गैर-बराबरी खत्म करने के लिए ही काम करना होगा। बता दें कि आरएसएस ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की मीटिंग के बाद जातिगत जनगणना को लेकर सधा हुआ जवाब दिया था। संघ का कहना था कि यदि समाज को ऐसा लगता है तो कराई जा सकती है, लेकिन इसका प्रयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। इससे समाज में वैमनस्यता बढ़ती है। recent visitors 79

‘मोदी के कामों ने किया प्रेरित’, भाजपा में शामिल हुईं केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी

तिरुवनन्तपुरम  केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी आर. श्रीलेखा ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। 2020 में केरल फायर एंड रेस्क्यू सर्विस के महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुईं श्रीलेखा केरल की पहली महिला डीजीपी रैंक की अधिकारी भी थीं। श्रीलेखा एक लेखिका भी हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद, श्रीलेखा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के करिश्मे ने उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। मुझे भाजपा की विचारधारा पर भरोसा है। उन्होंंने कहा कि मैं तीन हफ़्ते तक सोचने के बाद भाजपा में शामिल हो रही हूं। तीन हफ़्ते पहले भाजपा ने मुझसे पार्टी में शामिल होने के लिए संपर्क किया था। मैं सेवा में एक निष्पक्ष अधिकारी रही हूं। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद अपने अनुभव के आधार पर, मुझे एहसास हुआ कि लोगों की सेवा करने का यही सबसे अच्छा तरीका है। वहीं केरल बीजेपी अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने श्रीलेखा को एक बहादुर अधिकारी बताते हुए कहा कि पूर्व आईपीएस अधिकारी केरल से परिचित थीं और उन्होंने पुलिस में कई सुधार किए। उन्होंने पुलिस बल में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। श्रीलेखा ऐसे समय में भाजपा में शामिल हुई हैं जब केरल में एडीजीपी एमआर अजीत कुमार की हाल के वर्षों में आरएसएस नेताओं के साथ बैठकों पर बहस हो रही है। वह पूर्व डीजीपी जैकब थॉमस के बाद सेवानिवृत्ति के बाद पार्टी में शामिल होने वाली दूसरी पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। फरवरी 2021 में भाजपा में शामिल होने के बाद, जैकब थॉमस ने इरिंजालकुडा विधानसभा क्षेत्र से राज्य विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के आर. बिंदु से हार गए थे। 1987 बैच की आईपीएस अधिकारी श्रीलेखा के अपने करियर के अंत में केरल की माकपा सरकार के साथ संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। अपने सेवानिवृत्ति के दिन, उन्होंने डीजीपी-रैंक के अधिकारियों को दी जाने वाली औपचारिक विदाई पार्टी और गार्ड ऑफ ऑनर से परहेज किया था। तिरुवनंतपुरम की रहने वाली श्रीलेखा सिविल सेवा में शामिल होने से पहले एक कॉलेज लेक्चरर और एक बैंक अधिकारी थीं। उन्होंने विभिन्न जिलों में एसपी और बाद में डीआईजी और आईजी के रूप में कार्य किया। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए उन्होंने चार साल तक सीबीआई के साथ काम किया था। उन्होंने नौ पुस्तकें भी लिखी हैं। recent visitors 95

भाजपा विधायक दल की बैठक कल मुख्यमंत्री निवास या हरियाणा निवास में होने की संभावना, शपथ ग्रहण हो सकती है जल्द

चंडीगढ़ हरियाणा में विधानसभा चुनाव की मतगणना के बाद अब सरकार बनने की स्थिति साफ हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी जहां हैट्रिक लगाते हुए लगातार तीसरी बार प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है। वहीं, मुख्यमंत्री के पद को लेकर पार्टी हाई कमान पहले से ही नायब सिंह सैनी का नाम घोषित कर चुकी है। इस प्रक्रिया में भाजपा विधायक दल की बैठक शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास या हरियाणा निवास में होने की संभावना है।इसी सिलसिले में चंडीगढ़ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भी वीरवार को पहुंच सकते हैं आ नए चुने विधायकों से मुलाकात कर सकते हैं।हरियाणा में वर्ष 2014 से 2019 तथा 2019 से 2024 तक कमान साढ़े 9 साल मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल के पास ही रही है। हालांकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने दशहरा के पर्व के बाद विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा होने की बात कही है। इसी बीच अब मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले विधायकों के नामों को लेकर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। इस चुनाव में पार्टी के कईं दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के सम्मुख मंत्रिमंडल का गठन किए जाने के समय भौगोलिक और जातीय सभी समीकरणों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। हालांकि अनिल विज, मूलचंद शर्मा, विपुल गोयल सरीखे कुछ नाम ऐसे है, जिनका मंत्री बनना लगभग तय है।घरोंडा से विधायक हरविंद्र कल्याण का नाम विधानसभा अध्यक्ष के इस पद के लिए चर्चा में हैं। मंत्री के लिए चर्चा में यह नाम मुख्यमंत्री के अलावा हरियाणा की नई बनने वाली सरकार में मंत्री बनने की चाह रखने वाले नेताओं की लंबी फेहरिस्त है। इनमें कुछ नामों के बारे में हम आपकों बताने जा रहे हैं। इन नामों में पूर्व की बीजेपी सरकार में मंत्री रहे अनिल विज का इस बार भी मंत्री बनना करीब-करीब तय माना जा रहा है। हालांकि वह मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन साथ ही वह यह भी कह चुके हैं कि वह किसी भी पद पर अपना दावा नहीं जताएंगे और पार्टी की ओर से उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वह उसे बखूबी निभाएंगे। इसके अलावा पूर्व बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मूलचंद शर्मा का इस बार भी मंत्री बनना तय माना जा रहा है। इनके अलावा मनोहर पार्ट वन में राज्य मंत्री रहे कृष्णलाल पंवार, विपुल गोयल और कृष्ण बेदी का भी मंत्री बनना तय माना जा रहा है। इनके अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव, रामकुमार गौतम, महीपाल ढांडा, प्रमोद विज, कृष्ण गहलावत, डॉ. कृष्ण मिड्ढा, विनोद भयाना, घनश्याम दास अरोड़ा, श्रुति चौधरी के नाम भी मंत्री पद की दौड़ में शामिल है। यह बन सकते हैं विधानसभा अध्यक्ष हरियाणा में चूंकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता इस बार विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए है तो इस सूरत में बीजेपी को नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव करना होगा। ऐसे में पूर्व में डिप्टी स्पीकर रहे रणबीर गंगवा का अलावा घरोंडा से विधायक हरविंद्र कल्याण का नाम इस पद के लिए चर्चा में हैं।गंगवा मंत्री बनना चाहते हैं। विजयदशमी के दिन 12 अक्टूबर को झोट ग्रह की संभावना।देश के पी एम नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह में से कोई बड़ी हस्ती भी शपथ ग्रहण में मौजूद रह सकती है। मुख्यमंत्री समेत हो सकते हैं 14 मंत्री 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री समेत कुल 14 मंत्री हो सकते हैं। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि अपने कद्दावर नेताओं के अलावा भारतीय जनता पार्टी तीसरी पारी की सरकार में किन-किन नेताओं को मंत्री पद से नवाजने का काम करती है, क्योंकि मंत्री बनाते समय भारतीय जनता पार्टी को चुनावी समीकरण के साथ भौगोलिक और जातीय दोनों समीकरणों को ध्यान में रखन होगा।   recent visitors 76

हरियाणा में और मजबूत हुई भाजपा, दो निर्दलीयों ने थामा बीजेपी का हाथ

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद पार्टी का उत्साह बना हुआ है. इस बीच चुनाव में जीत दर्ज कर चुके दो निर्दलीय बीजेपी में शामिल हो गए हैं. चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज कर चुके राजेश जून और देवेंद्र कादियान बीजेपी में शामिल हो गए हैं. हरियाणा चुनाव के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और अन्य बीजेपी नेताओं के साथ बैठक के बाद दोनों विधायक बीजेपी में शामिल हो गए. देवेंद्र कादियान ने सोनीपत जिले में पड़ने वाली गन्नौर सीट से जीत दर्ज की है. उन्होंने कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 35,209 वोटों के अंतर से हराया है. इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार देवेंद्र कौशिक तीसरे नंबर पर रहे. बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के कारण देवेंद्र कादियान ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया था. गन्नौर सीट से कादियान ने निर्दलीय ही यह चुनाव जीत लिया. कादियान ने 10 सितंबर को वीडियो जारी कर बीजेपी को अलविदा कह दिया था. उन्होंने काफी भावुक होकर दावा किया था कि वह गन्नौर सीट से टिकट चाहते थे, लेकिन उन्हें बीजेपी ने टिकट नहीं दिया. इससे नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी. वहीं, राजेश जून कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय ही बहादुरगढ़ सीट से खड़े हो गए थे. राजेश जून ने बीजेपी उम्मीदवार दिनेश कौशिक को 41,999 वोटों के अंतर से चुनाव हराया. हरियाणा में बीजेपी की हैट्रिक हरियाणा में बीजेपी ने हैट्रिक लगा दी है. ये अपने आप में रिकॉर्ड है, क्योंकि हरियाणा में कभी भी कोई पार्टी लगातार तीसरी बार चुनाव नहीं जीती है. इतना ही नहीं, हरियाणा के इतिहास में बीजेपी का ये अब तक की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस भी हैं. बीजेपी इससे पहले कभी भी इतनी ज्यादा सीटें नहीं जी सकी है. हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 48, कांग्रेस 37, आईएनएलडी 2 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 3 सीटें जीती. इस बार बीजेपी ने 2014 और 2019 से भी बड़ी जीत हासिल करते हुए 48 सीटें जीत ली हैं. 2014 में बीजेपी ने 47 और 2019 में 40 सीटें जीती थीं. वहीं, नतीजों से पहले तक कांग्रेस की वापसी का अनुमान लगाया जा रहा था. लेकिन कांग्रेस इस बार 37 सीटें ही जीत सकी. 2 सीटें इनेलो को मिली हैं. वहीं, तीन निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं.   recent visitors 84