Monday, July 6, 2026 10:13 pm

सतना पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी से रुकी नाबालिग की शादी, बिना दुल्हन घर लौटा दूल्हा

सतना  सतना जिला अक्सर सुर्खियों में बना रहता है। एक बार फिर यहां जिला प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए नाबालिग का विवाह रुकवाया गया है। साथ ही समझाइश दी गई। इसके बाद दूल्हे को बिना दुल्हन ही घर वापस लौटना पड़ा। अब यह खबर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, मामला सिंहपुर थाना क्षेत्र के खम्हरिया खुर्द का है, जहां नाबालिग का विवाह उसकी मर्जी के खिलाफ करवाया जा रहा था। शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी, गुजरात से बारात भी आ चुकी थी। इसी बीच पुलिस की कार्रवाई से शादी रुकवा दी गई। 17 साल 6 महीने है उम्र सूत्रों के अनुसार, ग्रामीणों ने यह सूचना पुलिस को दी। वहीं, तहसीलदार सौरभ मिश्रा ने मामले में तत्परता दिखाते हुए राजेश चौधरी के घर पर पहुंचकर शादी रुकवा दी। जांच पड़ताल के दौरान युवती के आधार कार्ड और मार्कशीट से पता चला कि उसकी उम्र 17 साल 6 महीने है। आगे की कार्रवाई जारी बता दें कि राजेश चौधरी अपनी नाबालिग भांजी की शादी गुजरात में रहने वाले जेठालाल के बेटे अकारा के साथ तय कर दी थी। फिलहाल, दान-दहेज से जुड़ी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि युवती के माता-पिता का निधन हो चुका है और वह अपने मामा राजेश के पास रहती है। जिसकी शादी 11 दिसंबर को तय की गई थी और बारात भी आ चुकी थी। इसी बीच जानकारी लगते ही पुलिस की टीम दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और यह कार्रवाई की। साथ ही आगे की वैधानिक प्रक्रिया जारी है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे कई मामले आज भी मध्य प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं, जहां बाल विवाह का चलन जारी है। अभी भी कुछ गांवों में नाबालिग युवतियों का बाल विवाह करवा दिया जाता है। जिसकी खबरें आए-दिन सुनने को मिलती रहती है। वहीं, सतना जिले से भी कई बार ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जब पुलिस और महिला बाल विकास विभाग की सक्रियता से दूल्हे को बगैर दुल्हन के ही लौटना पड़ा है। recent visitors 79

बाल विवाह कराने या सहयोग करने वालों को होगी जेल , बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन की कड़ी पहल

Those who organize or support child marriage will be jailed, administration’s strictness to stop child marriage on Devuthani Ekadashi भोपाल ! प्रदेश सरकार ने आगामी देवउठनी एकादशी पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए कड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इस दिन होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में बाल विवाह के मामलों को रोकने के लिए प्रशासन ने विशेष कदम उठाए हैं। सामूहिक विवाह आयोजकों से यह शपथ पत्र लिया जाएगा कि उनके कार्यक्रमों में किसी भी रूप में बाल विवाह नहीं होगा। प्रशासन ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है और बाल विवाह करने या इसे प्रोत्साहित करने वालों को दो साल तक की सजा का प्रावधान किया है। इसके साथ ही, प्रशासन ने एक जाँच व्यवस्था बनाई है, जिसमें 10 विशेष टीमें तैनात की जाएंगी, जो सामूहिक विवाह कार्यक्रमों पर निगरानी रखेंगी। इन टीमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी बाल विवाह ना हो और सभी विवाह नियमों के तहत ही संपन्न हों।साथ ही, प्रशासन ने आयोजन से जुड़े सभी विभिन्न सेक्टरों को भी निर्देशित किया है। प्रिंटिंग प्रेस, हलवाई, कैटरिंग सेवाएं, बैंड, घोड़ी वाले और ट्रांसपोर्ट सेवा के संचालकों को भी बाल विवाह को रोकने में सहयोग देने के लिए कहा गया है। धर्मगुरु और समाज के प्रमुखों से भी यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस अभियान में प्रशासन का साथ देंगे और समाज में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे। इस कदम से प्रशासन का मुख्य उद्देश्य समाज में बाल विवाह की कुरीति को समाप्त करना है और इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास करना है।सभी की सक्रिय भागीदारी से उम्मीद की जा रही है कि देवउठनी एकादशी पर आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम सुरक्षित और कानूनी रूप से सही तरीके से संपन्न होंगे, जिससे प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं में कमी आएगी। यहां करें शिकायतबाल विवाह की सूचना चाइल्ड लाइन के दूरभाष नंबर 1098 पर दे सकते हैं। इसके अलावा एसडीएम, तहसीलदार, थाना प्रभारी, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दे सकते हैं। शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा। recent visitors 119