हाईकोर्ट में अहमदााबद पूर्व सैनिक ने लगाई गुहार, इस्कॉन मंदिर के कुछ पुजारियों पर लगाए गंभीर आरोप

अहमदाबाद  एक पूर्व सैनिक ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके अपनी बेटी की कस्टडी की मांग की है। सेवानिवृत्त सैनिक पिता ने कोर्ट में कहा है कि मेरी बेटी सरखेज-गांधीनगर हाईवे पर स्थित इस्कॉन मंदिर के पुजारियों के कब्जे में है। पुजारियों ने उसे कथित तौर पर ब्रेनवॉश किय है। उसे राेज ड्रग्स दिया जाता है। पूर्व सैनिक की अपील पर गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद पुलिस को नोटिस जारी करके लड़की को हाजिर करने को कहा है। पिता का आरोप है कि बेटी पिछले छह महीने लापता हो गई थी। याचिकाकर्ता पूर्व सैनिक ने कहा है कि बेटी को जान होने की आशंका भी व्यक्त की है। ब्रेनवॉश करने का आरोप याचिकाकर्ता पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण आवेदन की सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा कि मेरी बेटी नियमित रूप से दर्शन और पूजा-भक्ति के लिए एसजी हाईवे पर प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर जाती थी। उसी दौरान वह इस्कॉन मंदिर के उक्त पुजारियों के संपर्क में आई। इसी दौरान इस्कॉन मंदिर के पुजारियों ने पूरी तरह से ब्रेनवॉश किया और उसे प्रभावित किया। पिता ने आरोप लगाया है कि इसके बाद बेटी मंदिर के पुजारी के साथ 23 तोला सोना और 3.62 लाख रुपये नकद लेकर घर से भाग गई। पहले दिया शादी का आदेश पिता का आरोप है मंदिर के पुजारी सुंदर मामा ने याचिकाकर्ता की बेटी की शादी अपने एक शिष्य से करने का आदेश दिया था। हालांकि याचिकाकर्ता ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उन्हें अपनी बेटी की शादी अपने समाज में करनी है। उसके बाद उन्हें धमकियां मिलीं और अंततः उनकी बेटी को मथुरा से एक शिष्य के साथ भगा दिया गया। पिता का आरोप है कि पुजारी कहते थे कि वह कृष्ण रूप हैं। 600 लड़कियां गोपियां हैं। याचिकाकर्ता पिता ने यह भी आरोप लगाया कि इस्कॉन मंदिर में लड़कियों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है और धर्म के नाम पर उन पर अत्याचार किया जा रहा है। परिवार से टूट जाता है मोह पूर्व सैनिक ने याचिका में कहा है कि सुंदर मामा सहित पुजारी मंदिर में आने वाले भक्तों का इस हद तक ब्रेनवॉश करते हैं कि गुरु माता-पिता से अधिक महत्वपूर्ण हैं और मंदिर में रहने वाली 600 लड़कियाँ गोपियाँ हैं और उन्हें यह मानने के लिए मजबूर किया जाता है कि वे कृष्ण रूप हैं। पिता का आरोप है कि उनकी बेटी मंदिर के पुजारी अवैध हिरासत और कारावास में हैं। बेटी को नियमित रूप से ड्रग्स और मारिजुआना दिया जा रहा है। पिता का आराेप है कि बार-बार शिकायत करने और गुहार लगाने के बावजूद पुलिस द्वारा उनकी बेटी को ढूंढने के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किया। पुलिस को हाईकोर्ट की नोटिस पिता की याचिका पर सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट की जस्टिस संगीता और जस्टिस संजीव ठाकर की पीठ ने राज्य सरकार, शहर के पुलिस आयुक्त, मेघानीनगर पुलिस स्टेशन के पीआई को नोटिस जारी करके कहा है कि लड़की को हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा। हाईकोर्ट ने इसके अलावा इस्कॉन मंदिर के प्रबंधन से जुड़े लोगों को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई 9 जनवरी को तय की गई है। इस्कॉन की तरफ से इस मामले में कोई भी बयान जारी नहीं किया गया है। recent visitors 77

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनसीआर क्षेत्र में राजस्थान के हिस्से में भी पटाखों पर पूर्ण बैन होना चाहिए

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की तरह ही यूपी और हरियाणा को पटाखे पर पूर्ण बैन लगाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस ओका की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि पटाखे पर बैन तभी प्रभावी हो सकेगा, जब एनसीआर राज्यों में भी इसी तरह का बैन लागू किया जाए। कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से बताया गया कि पटाखे पर पूरे साल के लिए बैन किया है। कोर्ट ने कहा कि एनसीआर इलाके में आने वाले राजस्थान के हिस्से में भी इसी तरह का बैन होना चाहिए। हम फिलहाल उत्तर प्रदेश और हरियाणा को निर्देश देते हैं कि दिल्ली द्वारा 19 दिसंबर, 2024 को लगाए गए प्रतिबंध की तरह वे भी प्रतिबंध लागू करें। कोर्ट में एमसी मेहता की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान उक्त आदेश पारित किया। जस्टिस ओका की अगुवाई वाली बेंच दिल्ली और एनसीआर में एयर पल्यूशन से निपटने के उपाय को लेकर सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान पटाखों पर साल भर के लिए बैन, जीआरएपी और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अमल को लेकर विचार हुआ। दिल्ली सरकार का क्या पक्ष? दिल्ली सरकार की ओर से सीनियर वकील शादान फरासत ने अदालत को बताया कि दिल्ली में पटाखों के निर्माण, स्टोरेज और बिक्री के साथ वितरण और उपयोग पर व्यापक बैन लगाया गया है। लेकिन ये उपाय तभी प्रभावी हो सकेंगे, जब एनसीआर राज्य भी ऐसे बैन लगाएं। क्योंकि इन राज्यों से पटाखे दिल्ली में लाए जा सकते हैं। अदालत को बताया गया कि राजस्थान के एनसीआर इलाकों में पटाखों पर पूर्ण बैन लगाया गया है। साथ ही, हरियाणा में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 5 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए, दिल्ली सरकार ने एनसीटी दिल्ली में सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, ऑनलाइन मार्केटिंग प्लैटफॉर्म के माध्यम से डिलिवरी और फोड़ने पर तत्काल प्रभाव से पूरे वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। अदालत ने कहा कि एक बार के लिए हम सुझाव देते हैं कि दिल्ली मॉडल का पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2025 को होगी, जिसमें पटाखों के प्रतिबंध पर अतिरिक्त निर्देशों पर विचार किया जाएगा। क्या है मामला सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने में कमी पर चिंता व्यक्त की थी। 12 दिसंबर को कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्यों को पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण, और उपयोग पर पूरे वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लेने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जोर देकर कहा था कि यह प्रतिबंध वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है। पहले कोर्ट ने यह भी कहा था कि कोई भी धर्म प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देता और नागरिकों के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने का आह्वान किया था। recent visitors 77

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अंकिता और हसनैन के अंतरधार्मिक विवाह को वैध करार दिया, विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत विवाह करने का अधिकार

जबलपुर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने  एक प्रेमी जोड़े को अंतरधार्मिक विवाह करने की इजाजत दे दी है। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत जोड़े को विवाह करने की अनुमति दी है। बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों की शादी बिना किसी विवाद के संपन्न कराई जाए। शादी के बाद उन्हें एक महीने तक सुरक्षा मुहैया कराई जाए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक उनकी सुरक्षा के संबंध में विचार कर निर्णय लें। इंदौर की एक युवती और जबलपुर के एक पुरुष ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उन्होंने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह के लिए कलेक्टर जबलपुर कार्यालय में आवेदन किया था। हालांकि, युवती के पिता ने हाईकोर्ट में सिंगल जज बेंच के आदेश को रोकने के लिए अपील दायर की थी, जिसमें 12 नवंबर को उन्हें शादी करने की अनुमति दी गई थी और युवती को अपने फैसले पर विचार करने के लिए शेल्टर होम में रहने के लिए भी कहा गया था। अपील में कहा गया था कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की गई शादी मुस्लिम एक्ट के तहत मान्य नहीं होगी। मुस्लिम समाज में अग्नि और मूर्ति की पूजा करने वालों से शादी मान्य नहीं है। मुस्लिम एक्ट में चार शादियों को मान्यता दी गई है, जबकि हिंदू मैरिज एक्ट में सिर्फ एक शादी को मान्यता दी गई है। अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शादी पर रोक लगा दी थी। डिवीजन बेंच ने गुरुवार को अपील पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया और अपने आदेश में कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा 4 के तहत हर जोड़े को धर्म, जाति या समुदाय से अलग विवाह करने का संवैधानिक अधिकार है। हाईकोर्ट ने कहा, "पर्सनल लॉ एक्ट विशेष विवाह अधिनियम पर बाध्यकारी नहीं है। विवाह में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। विवाह का विरोध करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पुलिस को शादी के एक महीने बाद तक सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को उनकी सुरक्षा के संबंध में निर्णय लेने का आदेश दिया गया है।" इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मैरिज रजिस्ट्रार को बिना किसी देरी या बाधा के विवाह की कार्यवाही आगे बढ़ाने का भी निर्देश दिया। recent visitors 71

हाई स्कूल शिक्षक भर्ती पर जबलपुर हाईकोर्ट 19 दिसंबर को करेगा अगली सुनवाई

जबलपुर मध्यप्रदेश में हाई स्कूल शिक्षक भर्ती पर जबलपुर हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि सरकार 2 दिनों में भर्ती नियमों में सुधार करे। साथ ही कोर्ट कोर्ट को सूचित भी करे। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रदेश में करीब 18 हजार हाई स्कूल शिक्षकों के रिक्त पदों में से 12 हजार पदों पर नियुक्तियां की गईं हैं लेकिन इनमें उम्मीदवारों के सेकेंड डिवीजन क्राईटेरिया को लेकर बड़ा विरोधाभास है। कोर्ट ने कहा-काउंसिलिंग नए सिरे से करवाई जानी चाहिए मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैथ और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार को सेकेंड डिवीजन मार्क्स क्राईटेरिया का नियम 2 दिनों के भीतर सुधारकर कोर्ट को सूचित करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि ऐसे उम्मीदवार जिन्हें क्राइटेरिया के मुताबिक मिनिमम मार्क्स होने पर भी सिलेक्ट नहीं किया गया, क्या उन्हें बचे हुए पदों पर भर्ती किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो 50 फीसदी से कम मार्क्स वाले सभी उम्मीदवारों की भर्ती रद्द कर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती की काउंसिलिंग नए सिरे से करवाई जानी चाहिए। मामले पर अगली सुनवाई 19 दिसंबर को तय कर दी है। इसलिए लगाई गई थी याचिका दरअसल, शिक्षा विभाग ने 448 ऐसे उम्मीदवारों को सेकेंड डिवीजन मानकर भर्ती किया है जिनके ग्रेजुएशन में मार्क्स 45 से 50 फीसदी के भीतर हैं। दूसरी तरफ ऐसे कई उम्मीदवार हैं जिन्हें थर्ड डिवीजन मानकर भर्ती नहीं किया है। जबकि ग्रेजुएशन में उनके भी मार्क्स 45 से 50 फीसदी के बीच हैं। एनसीटीई यानी नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन के नियमों के मुताबिक उम्मीदवारों की एलिजिबिलिटी यानी पात्रता, ग्रेजुएशन में सेकेंड डिवीजन तय की गई थी, लेकिन कई यूनिवर्सिटी 45 से 50 फीसदी अंक लाने वालों को सेकेंड डिवीजन तो कई यूनिवर्सिटी थर्ड डिवीजन मानती हैं। ऐसे में जब शिक्षा विभाग ने अंकों की जगह सिर्फ मार्क शीट में सेकेंड या थर्ड डिवीजन देखकर भर्तियां की हैं तो पूरी भर्ती प्रक्रिया सवालों में है। recent visitors 48

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में जूनियर नहीं बनेंगे डीन, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इंदौर राजधानी भोपाल और प्रदेश के 18 मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती को लेकर चल रहे विवाद में हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने साफ तौर पर कहा कि किसी सीनियर प्रोफेसर को जूनियर के तहत काम करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट का सरकार से सवाल     दरअसल, हाई कोर्ट ने इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के लिए वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश पांडे को डीन नियुक्त करने का आदेश भी दिया। दरअसल, डॉ. पांडे की डीन पद पर सीधी भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका पर 10 दिसंबर को सुनवाई हुई थी। इस मामले में जस्टिस शुक्ला ने सरकार से पूछा कि डॉ. पांडे से जूनियर प्रोफेसर डॉ. अशोक यादव को डीन का प्रभार क्यों सौंपा गया, जबकि सरकार कोई ठोस जवाब या दस्तावेज पेश नहीं कर पाई। हाई कोर्ट ने वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश पांडे को एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर का डीन नियुक्त करने का आदेश भी दिया। दरअसल, प्रो. डॉ. वेद प्रकाश पांडे की इंदौर में डीन के पद पर सीधी भर्ती से नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 10 दिसंबर को सुनवाई हुई। इसमें जस्टिस शुक्ला ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि डॉ. पांडेय से जूनियर डॉ. अशोक यादव को किस आधार पर डीन का प्रभार सौंपा गया। कोर्ट ने यह पाया कि सरकार ने कोई तथ्य या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं। अन्य मेडिकल कॉलेजों की सुनवाई 7 जनवरी को सरकार के वकील ने तर्क दिया कि प्रोफेसरों की गोपनीय रिपोर्ट डीन नहीं, बल्कि कमिश्नर व संचालक लिखते हैंं। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज पेश नहीं दे सके। कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब 7 जनवरी तक मांगे हैं। अन्य मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती के मामलों की सुनवाई भी इसी दिन निर्धारित की गई है। 7 जनवरी को फिर सुनवाई वहीं इस पर सरकार के वकील ने तर्क दिया कि डीन की गोपनीय रिपोर्ट कमिश्नर और संचालक लिखते हैं, न की प्रोफेसर। हालांकि, इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब 7 जनवरी तक देने को कहा है, और अन्य मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती से जुड़े मामलों की सुनवाई भी उसी दिन होगी। recent visitors 70

हाईकोर्ट ने सुनाई ख़ास सजा, दोषी युवक को रोपने होंगे स्वदेशी प्रजाति के 50 पौधे

 जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने न्यायालय के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणी वाली पोस्ट इंटरनेट मीडिया पर डालने के आपराधिक अवमानना प्रकरण में आरोपित युवक को दोषी पाते हुए सजा बतौर 50 स्वदेशी प्रजाति के पौधे रोपने के आदेश दिए हैं। इसके लिए 15 दिन की समय-सीमा निर्धारित की है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि वन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी आरोपित को बताएंगे कि वह कहां पर किस प्रजाति के पौधे लगा सकता है। इसके साथ ही युवक को चेतावनी दी कि वह भविष्य में ऐसी गलती न दोहराए। मुरैना जिले के संबलगढ़ न्यायालय का मामला प्रकरण मुरैना जिले के संबलगढ़ न्यायालय द्वारा हाई कोर्ट को भेजे गए पत्र से संबंधित था। इसमें अवगत कराया गया था कि राजस्थान के जयपुर जिले के त्रिवेणी नगर निवासी आरोपित राहुल साहू के विरुद्ध प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अभिषेक कुमार के न्यायालय में भरण-पोषण का मामला विचाराधीन था। राहुल की पत्नी पूजा राठौर वादी है। सात मई, 2024 को पूजा ने न्यायालय को सूचित किया कि राहुल ने उसके और न्यायालय के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणी वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर अपलोड की है। पूजा ने उस पोस्ट का साक्ष्य भी न्यायालय में प्रस्तुत किया। युगलपीठ ने सजा के सिलसिले में सुझाव मांगा न्यायालय ने इस जानकारी को अभिलेख पर लेकर आरोपित राहुल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया, लेकिन न तो आरोपित की ओर से जवाब प्रस्तुत किया गया और न ही वह उपस्थिति हुआ। इस रवैये को पर आपराधिक अवमानना प्रकरण चलाने के लिए न्यायालय ने हाई कोर्ट को पत्र भेज दिया। प्रकरण हाई कोर्ट में सुनवाई में आया तो कोर्ट रूम में उपस्थित अधिवक्ता आदित्य संघी से युगलपीठ ने सजा के सिलसिले में सुझाव मांगा। अधिवक्ता ने कहा कि सुझाव दिया कि आरोपित की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे सुधारात्मक रूप से प्रतीकात्मक सजा दी जा सकती है। इसके अंतर्गत समाज सेवा करना बेहतर होगा। मसलन, भंवरताल पार्क में पौधारोपण कराया जाए। हाई कोर्ट को यह सुझाव पसंद आया। recent visitors 86

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आदेश जारी कर 11 जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों के तबादले कर दिए

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने देर रात आदेश जारी कर 11 जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों के तबादले कर दिए हैं। इसके साथ ही साथ जजों के फैमिली कोर्ट के खाली पदों में भी ट्रांसफर हुए हैं। यह तबादला भारत के संविधान के अनुच्छेद 235 और मध्य प्रदेश सिविल कोर्ट अधिनियम, 1958 की धारा 8 की उपधारा (1) के तहत दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए किया गया है। इस आदेश के तहत कुल 18 जजों का तबादला किया गया है। इन जजों को मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रिक्त पदों पर पदस्थापित किया गया है, जिसमें 11 डिस्ट्रिक्ट जज और 7 फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज शामिल हैं। जिला सेशन कोर्ट में इन जजों का हुआ तबादला     अयाज मोहम्मद, द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पन्ना को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इंदौर तबादला किया गया।     नवीर अहमद खान, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल, भोपाल को VIII जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, हरदा नियुक्त किया गया।     सुरेखा मिश्रा, XIII जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इंदौर से III जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, विदिशा बनाई गईं।     रघुवेंद्र सिंह चौहान, द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अमरपतन (सतना) को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सोनकच्छ (देवास) भेजा गया।     शिप्रा पटेल, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अस्था (सीहोर) को XXI जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इंदौर के रिक्त पद का दायित्व सौंपा गया।     शिवलाल केवट, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सांवर (इंदौर) को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जैसिंहनगर (शहडोल) बनाया गया।     उषा तिवारी, अतिरिक्त न्यायाधीश, प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जावरा (रतलाम) के न्यायालय से जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, नसरुल्लागंज (सीहोर) भेजा गया।     उमेश कुमार पटेल, द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अस्था (सीहोर) अब XXX जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इंदौर कोर्ट संभालेंगे।     कपिल सोनी, IV जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, खरगोन (मंडलेश्वर) से XV जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर बने हैं।     श्वेता तिवारी, XXI जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जबलपुर को V जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश,के प्रभार के साथ रतलाम भेजा गया।     विजय कुमार पांडेय (जूनियर), III जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, शहडोल अब II जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सिरोंज (विदिशा) बनाए गए हैं। फैमिली कोर्ट में रिक्त पदों पर 7 प्रिंसिपल जजों की पदस्थापना की गई है     रामा जयंत मित्तल, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी (पी.ए.) अधिनियम, सीधी अब माया विश्वालाल की जगह अतिरिक्त प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट, इंदौर होंगी।     मनोज कुमार लढिया, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, निवास, जिला मंडला अब फैमिली कोर्ट, अनूपपुर के प्रिंसिपल जज होंगे।     अरविंद कुमार (जैन) जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, छतरपुर को फैमिली कोर्ट, रायसेन का प्रिंसिपल जज बनाया गया है।     अरुण प्रताप सिंह, XVI जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जबलपुर अब फैमिली कोर्ट, उमरिया के प्रिंसिपल जज होंगे।     रामा जयंत मित्तल, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, इंदौर को प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट, इंदौर बनाया गया है।     अवधेश कुमार (गुप्ता), प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट, डिंडोरी अब प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट, शाजापुर होगा।     मुन्नालाल राठौर को जिला सेशन जज निवारी टीकमगढ़ से डिंडोरी फैमिली कोर्ट का प्रिंसिपल जज बनाया गया है। recent visitors 64