आरटीआई में मांगी सूचना से शिक्षा विभाग में हड़कंप – सरस्वती का जन्म कब हुआ, उनका शिक्षा में क्या योगदान रहा

RTI information sought stirs education department – when was Saraswati born, what was her contribution to education विद्या की देवी मां सरस्वती का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान क्या है? उनका जन्म कब हुआ? कहां पढ़ाई की? कौनसी डिग्री ले रखी है? ये कुछ ऐसे सवाल है जो सूचना का अधिकार अधिनियम में लगाए एक आवेदन में पूछ गए हैं। इनकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी से मांगी गई है। शिक्षा विभाग में आरटीआई में इस तरह के सवालों वाला प्रार्थना पत्र मोतीलाल नामक व्यक्ति ने लगाया है। अधिकारी फिलहाल आवेदक को जवाब भिजवाने की कवायद में जुटे हैं क्योंकि तय समय पर उपलब्ध सूचना नहीं दी जाने पर उन पर जुर्माना लग सकता है। आवेदक ने शिक्षा विभाग से एक व्यक्ति ने मां सरस्वती के जन्म, पढ़ाई एवं डिग्री के बारे में सूचना मांगी है। फिलहाल इस तरह की सूचना कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। जो भी होगा, समय पर आवेदक को बता दिया जाएगा। ब्रह्माराम चौधरी, सीडीईओ शिक्षा विभाग से यह सूचना भी मांगी है कि सरकारी स्कूलों में सरस्वती की प्रतिमा किस आदेश से स्थापित की गई। इस संबंध में निदेशालय, जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश की प्रतिलिपी, जिले के किन-किन स्कूलों में सरस्वती प्रतिमा स्थापित है? इसकी सूची भी मांगी है। उल्लेखनीय है कि सूचना का अधिकार लागू करने के पीछे मंशा सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाकर विकास कार्यों में आमजन की सहभागिता बढ़ना है। ताकि, किसी प्रकार की अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार पर कार्रवाई हो । recent visitors 93

‘मैं दारू पीता हूं’, BRC को जूते से मारूंगा भो#@$, बहाली के 3 दिन बाद ही शराबी टीचर की हेकड़ी

‘मैं दारू पीता हूं’, BRC को जूते से मारूंगा भो#@$, बहाली के 3 दिन बाद ही शराबी टीचर की हेकड़ी

“I drink alcohol,” I’ll beat the BRC with my shoes, drunk teacher’s arrogance just three days after reinstatement सतना ! जिले में एक शिक्षक की ‘दबंगई’ और शराब के नशे में धुत होकर शिक्षा विभाग अधिकारियों को धमकाने का मामला गरमा गया है। शराबी शिक्षक की 2 महीने के निलंबन के बाद महज 3 दिन पहले बहाल हुई है। बहाल होते ही उनका एक नया वीडियो वायरल हो गया है। इसमें वह स्कूल स्टाफ के सामने कुर्सी पर बैठकर डींगे हांक रहे हैं। साथ ही बीआरसी को ‘जूते मारने’ की धमकी दे रहे हैं। शिक्षक की पहचान पुष्पेन्द्र सिंह के रूप में हुई है। मामला मझगवां ब्लॉक के पछीत माध्यमिक शाला का है। जहां शनिवार शाम को वायरल हुए इस वीडियो में शिक्षक पुष्पेन्द्र सिंह का अंदाज देखकर लगता है कि उन्हें कानून या विभाग का कोई खौफ नहीं है। वीडियो में वे अपने स्टाफ के सामने हेकड़ी दिखाते हुए कह रहे हैं, ‘मैं दारू छोड़ूंगा नहीं और अगर इस बार बीआरसी ने कुछ किया, तो उसे जूते मारूंगा।’ बीआरएसी से क्यों है खुन्नसदरअसल, पुष्पेन्द्र सिंह की यह खुन्नस इसलिए है क्योंकि पिछली बार (4 सितंबर को) जब वे शराब पीकर स्कूल पहुंचे थे। तब बीआरसी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही जेडी रीवा ने उन्हें निलंबित किया था। 26 नवंबर को ही उनकी बहाली हुई थी। हालांकि स्कूल पहुंचते ही उन्होंने फिर से वही रंग दिखा दिया। अब तक 3 बार हो चुके हैं सस्पेंडशिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, शिक्षक पुष्पेन्द्र सिंह आदतन शराबी और विवादित रहे हैं। यह कोई पहला मौका नहीं है। पहली बार निर्वाचन कार्य के दौरान शराब पीकर अभद्रता करने पर चुनाव आयोग के निर्देश पर सस्पेंड हुए थे। इसके बाद माध्यमिक शाला बरहठा में पदस्थापना के दौरान निलंबित हुए। तीसरी बार माध्यमिक शाला तुर्रा में रहते हुए कार्रवाई हुई। चौथी बार अब पछीत विद्यालय में निलंबन से लौटते ही फिर वही हरकत कर दी। संकुल प्राचार्य को सौंपी गई जांचबहाली के तीसरे दिन ही शिक्षक का यह रूप सामने आने के बाद विभाग हरकत में आ गया है। वीडियो वायरल होने के बाद मामले की जांच गौहानी संकुल के प्राचार्य उपेन्द्र सिंह को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि शिक्षक की इस हरकत पर एक बार फिर निलंबन की गाज गिरना तय है। recent visitors 85

ज्ञान के मंदिर को शर्मशार करने वाला टीचर निलंबित

ज्ञान के मंदिर को शर्मशार करने वाला टीचर निलंबित

Teacher suspended for bringing shame to the temple of knowledge देवास/ उदयनगर ! उदयनगर संकुल के शासकीय प्राथमिक विद्यालय झिरी मोहल्ला बिसाली के शिक्षा के मन्दिर को शर्म सार करने वाला अश्लील वीडियो वाइरल होने के बाद सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षक को निलंबित कर दिया और एक जांच दल को भेजकर जांच करवाई तो वहां स्थानीय लोगो ने वीडियो के बारे में बताया कि यह वीडियो शिक्षक विक्रम कदम व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का ही है, स्पष्ठ रूप से ग्रामीण जनो एव जांच दल में आये बीईओ नरेश प्रताप सिंह, संकुल प्राचार्य कन्हैयालाल परमार,ब्लाक समन्वयक सुभाष मालवीय,जनशिक्षा केंद्र प्रभारी कल्याण सिंह बुंदेला, जनशिक्षक महेश पालीवाल, दीपक सोलंकी ने वायरल वीडियो का मोके व स्कूल परिसर का अवलोकन कर स्पष्ठ रूप से कहा कि दोनो वायरल वीडियो विक्रम कदम व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के ही है ,जो कि शिक्षा के मंदिर व शिक्षक जगत को शर्म सार कर देने वाली घटना हैऐसे कृत्य माफी के लायक नही हैग्रामीण जनो एव सरपंच आलावा ने अधिकारियों से इस विषय मे चर्चा कर लिखित में देकर कहा कि दोनों को यहां से हटाया जाए जो कि इस प्रकार के कृत्य बच्चो की मानसिकता पर बुरे असर डालते हैसाथ ही यहां पर नए शिक्षक की व्यवस्था की जाए वही आंगनवाड़ी सुपर वायजर उषा पण्डिया का कहना है कि आंगनवाड़ी झिरी मोहल्ला की कार्यकर्ता का आपत्तिजनक वीडियो के बारे मे पत्र जारी कर तीन दिवस में स्पष्टीकरण मांगा हैस्पष्टीकरण आने पर जो भी उचित कार्यवाही होगी कि जाएगी कथनबीईओ नरेश प्रताप सिंहवरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर अखबारों में प्रकाशित खबर की जांच में आये थे व जो की पूरी खबर व वायरल वीडियो सही पाया गया जिसका प्रतिवेदन बना कर वरिष्ठ अधिकारी को भेजा गया जिस पर त्वरित कार्यवाही करते हुवे शिक्षक विक्रम कदम को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया हैनिलंबित शिक्षक ने थाने पर आवेदन देकर वीडियो वायरल करने वाले के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है ओर कहा है कि यह वीडियो AI से बनाया हुआ है । इसकी जांच करवाई जाए recent visitors 94

स्कूल अनुमति के नाम पर रिश्वतखोरी, सर्व शिक्षा अभियान का परियोजना समन्वयक दंपति 60 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

स्कूल अनुमति के नाम पर रिश्वतखोरी, सर्व शिक्षा अभियान का परियोजना समन्वयक दंपति 60 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

Bribery in the name of school permission, Sarva Shiksha Abhiyan project coordinator couple arrested red-handed while accepting 60 thousand rupees मंडला। जिले में भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) जबलपुर ने शुक्रवार को सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना समन्वयक अरविंद विश्वकर्मा और उनकी पत्नी आरती विश्वकर्मा को 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। आरोप है कि दंपति ने ककैया विकासखंड बिछिया स्थित विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल के संचालक रविकांत नंदा से स्कूल की अनुमति प्रदान करने के नाम पर कुल एक लाख 20 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने 23 सितंबर को पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये पहले ही सौंप दिए थे। शुक्रवार को दूसरी किस्त 60 हजार रुपये की अदायगी के समय ईओडब्ल्यू टीम ने बिंझिया स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप पर आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को पूछताछ के लिए पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस लाया गया, जहां देर शाम तक आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई चलती रही। लगभग दो माह पहले स्कूल संचालक ने रिश्वत मांगने की लिखित शिकायत ईओडब्ल्यू जबलपुर को सौंपी थी, जिसके आधार पर यह जाल बिछाया गया। टीम ने मौके से नगद राशि सहित आवश्यक दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है। recent visitors 74

स्कूल शिक्षा विभाग ने नये शिक्षा सत्र में तैयार किया है एजुकेशन पोर्टल

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने नये शिक्षा सत्र एक अप्रैल, 2025 से एजुकेशन पोर्टल 3.0 तैयार किया है। इस पोर्टल में विभाग से जुड़ी मानव संसाधन की व्यापक जानकारी का समावेश किया गया है। इस पोर्टल से विभाग के कर्मचारियों का डाटाबेस तैयार किया गया है। पोर्टल में मानव संसाधन से संबंधित जानकारी को कर्मचारी और विकासखण्ड स्तर पर वेरीफाई किया गया है। इसमें विभाग के करीब 2 लाख 75 हजार कर्मचारियों की समस्त जानकारी पारदर्शी रूप से पोर्टल पर प्रदर्शित की गयी है। विभाग के पौने तीन लाख कर्मचारियों के स्‍थानांतरण को भी पारदर्शी माध्यम से स्थानांतरण नीति-2022 के आधार पर ऑनलाइन ट्रांसफर मॉड्यूल तैयार किया गया है। उच्च पद प्रभार एवं अतिथि शिक्षक प्रक्रिया को भी पोर्टल पर ऑनलाइन किया जा रहा है। विभाग के सभी कर्मचारियों को वेतन पर्ची उनके मोबाइल पर प्राप्त हो सके, ऐसी व्यवस्था विभाग द्वारा की गयी है। परिवेदना प्रणाली विभाग के कर्मचारी छोटी-छोटी समस्याओं के लिये जिला या मुख्यालय स्तर पर चक्कर न लगायें। इसके लिये उनकी शिकायतों निराकरण के लिये परिवेदना प्रणाली को ऑनलाइन किया गया है। पोर्टल में इंटीग्रेटेड डेशबोर्ड से मुख्यालय, जिला और विकासखण्ड स्तर पर समस्त गतिविधियों की मॉनीटरिंग किये जाने की व्यवस्था की गयी है। एजुकेशन पोर्टल 3.0 में एकीकृत डाटाबेस के आधार पर जानकारी तैयार की जा रही है। यह जानकारी सुरक्षित रहे, इसके लिये ब्लॉक चेन बेस्ड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। विभाग में विभिन्न जानकारियों के लिये अलग-अलग पोर्टल का उपयोग अब तक किया जा रहा था। अब विभाग में एकीकृत पोर्टल के माध्यम से सभी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा सकेगा। मॉनीटरिंग सहित एआई तकनीक का उपयोग एजुकेशन पोर्टल 3.0 में ऑर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया जा रहा है। पोर्टल पर दी गई सुविधा से स्कूल स्तर पर विद्यार्थी एआई जैसी तकनीक का उपयोग कर सकेंगे। सीएम राइज योजना के अंतर्गत संचालित विद्यालयों में सिलेबस, कैलेण्डर, टाइम-टेबल, टीचर एण्ड क्लॉस और स्कूल ट्रांसपोर्ट जैसी गतिविधियों को ऑनलाइन किया गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूल की बसों में भी जीपीएस एवं कैमरों के माध्यम से मॉनीटरिंग की व्यवस्था एजुकेशन पोर्टल 3.0 में की गयी है। सभी सरकारी स्कूलों में उपलब्ध इन्फ्रा-स्ट्रक्चर और प्रोक्योरमेंट को भी ऑनलाइन किया गया है। अभिभावकों की सुविधा के लिये पोर्टल के माध्यम से बच्चे की डायरी को भी ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे अभिभावक अपने बच्चों के टेस्ट, मार्क्स एवं होमवर्क ऑनलाइन देख सकेंगे। विद्यार्थियों के लिये व्होकेशनल और कैरियर गाइडेंस को ऑनलाइन किया गया है, जिससे विद्यार्थी प्रगति की ओर अग्रसर हो सकें। पहली बार प्रदेश में सरकारी स्कूल की केश-बुक ऑनलाइन लिखने की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे विभाग के बजट की पूर्णत: मॉनीटरिंग किया जा सकेगा। विभाग के सभी छोटे-बड़े निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग भी ऑनलाइन करने की सुविधा पोर्टल में दी गयी है।   recent visitors 37

उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को नए साल का तोहफा, 31 दिसंबर से शुरू होंगे म्यूचुअल ट्रांसफर

  लखनऊ उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को नए साल का तोहफा दिया है! छह महीने में दूसरी बार म्यूचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. बेसिक शिक्षा परिषद ने सर्दी की छुट्टियों में एक से दूसरे जिले में पारस्परिक स्थानान्तरण की तैयारियां शुरू कर दी हैं. यह छह महीने में दूसरी बार होगा जब शिक्षकों को अंतरजनपदीय म्यूचुअल ट्रांसफर का अवसर मिलेगा. 31 दिसंबर से शुरू होगा म्यूचुअल ट्रांसफर शिक्षक सेवा नियमावली के अनुसार, गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में तबादले का प्रावधान है. इस बार भी जिले से जिले की बजाय स्कूल से स्कूल में स्थानान्तरण की योजना है. यह प्रक्रिया 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश में पूरी की जाएगी. जून में हुआ था 2700 से ज्यादा शिक्षकों का ट्रांसफर इससे पहले इसी साल गर्मी की छुट्टियों में 19 जून को 2796 परिषदीय शिक्षकों (1398 जोड़े) का तबादला हुआ था. हालांकि, तबादले का शासनादेश दो जून 2023 को जारी हुआ था, लेकिन कानूनी अड़चन के कारण शिक्षकों को सालभर इंतजार करना पड़ा था. परिषद ने शासन को भेजा प्रस्ताव स्थानान्तरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद से बड़ी संख्या में शिक्षक फिर से तबादला करने का अनुरोध कर रहे हैं. बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है. सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी का कहना है कि शासन से अनुमति मिलने पर सर्दी की छुट्टियों में अंतरजनपदीय पारस्परिक तबादले की प्रक्रिया की जाएगी.   recent visitors 39

मध्यप्रदेश: शिक्षा विभाग में बड़ा खेल, 1.46 लाख सरकारी कर्मचारी किए गए इनएक्टिव, जांच शुरू

Madhya Pradesh: Big game in education department, 1.46 lakh government employees made inactive, investigation started भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसमें राज्य के अलग-अलग जिलों में लगभग 1 लाख 46 हजार 333 सरकारी कर्मचारियों को अचानक “इनएक्टिव” कर दिया गया है। कर्मचारियों द्वारा इस मामले की शिकायत किए जाने के बाद ही विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया और अब जांच की तैयारी की जा रही है। जांच के बाद दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कैसे हुआ यह मामला? एजुकेशन पोर्टल पर यह अनियमितता तब सामने आई जब लगभग 2 लाख शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को इनएक्टिव कर दिया गया। विभाग ने अपनी ओर से कर्मचारियों को इनएक्टिव करने के लिए विभिन्न कारण दिए। इनमें 22 हजार 672 कर्मचारियों को मृत घोषित किया गया, जबकि 1 लाख 2 हजार 637 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त मानकर इनएक्टिव किया गया। इसके अलावा, 2781 कर्मचारियों को “टर्मिनेट” यानी सेवा समाप्त बताकर हटा दिया गया, और 18 हजार 243 कर्मचारियों को इस्तीफा देने का हवाला देकर उनके नामों को पोर्टल से हटा दिया गया। कर्मचारियों की शिकायत के बाद विभाग हरकत में इस बड़े पैमाने पर हुई इनएक्टिव कार्रवाई के बाद प्रभावित कर्मचारियों ने शिक्षा विभाग से शिकायत की, जिसके बाद ही विभाग ने अपनी गलती मानी और इस मामले की जांच करने का निर्णय लिया। विभाग ने इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम और पदों की जानकारी मांगी है। आगे की कार्रवाई और विभाग पर उठ रहे सवाल जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई है, लेकिन इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को एक साथ इनएक्टिव किया गया है। शिक्षा विभाग पर सवालों की बौछार इस मामले के बाद शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में आ गया है कि इतनी बड़ी गलती कैसे हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। कर्मचारियों को अचानक इनएक्टिव करने का कारण समझ से परे है, और इससे यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि पोर्टल पर डेटा एंट्री और सत्यापन में भारी गड़बड़ी हुई है। इस तरह की अनियमितता ने कर्मचारियों में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है और पूरे प्रदेश में इस घटना की तीखी आलोचना हो रही है। अब देखना होगा कि जांच में कौन दोषी साबित होता है और क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितता न हो। recent visitors 124