गिल-बटलर की जोरदार पारी, गुजरात ने हैदराबाद को 38 रन से हराया

अहमदाबाद  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 के मैच नंबर-51 में गुजरात टाइटन्स (GT) ने सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) को 38 रनों से हरा दिया. 2 मई (शुक्रवार) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आयोजित इस मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद को जीत के लिए 225 रनों का टारगेट मिला था, जिसका पीछा करते हुए वो छह विकेट पर 186 रन ही बना सकी. सनराइजर्स हैदराबाद के लिए अभिषेक शर्मा ने अर्धशतकीय पारी खेली, लेकिन वो टीम के काम नहीं आई. गुजरात अब टेबल में दूसरे नंबर पर मौजूदा आईपीएल सीजन में गुजरात टाइटन्स की 10 मैचों में ये सातवीं जीत रही. दूसरी ओर सनराइजर्स हैदराबाद की 10 मैचों में ये सातवीं हार रही. गुजरात टाइटन्स अब अंकतालिका में दूसरे नंबर पर आ गई है, जबकि सनराइजर्स हैदराबाद नौवें नंबर पर है. मुंबई इंडियंस बेहतर नेट रनरेट के चलते अंकतालिका में पहले नंबर पर है. इस हार के बाद सनराइजर्स हैदराबाद का प्लेऑफ में पहुंचना काफी मुश्किल हो चुका है. टारगेट का पीछा करते हुए सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत अच्छी रही. 'इम्पैक्ट सब' ट्रेविस हेड और अभिषेक शर्मा ने मिलकर 27 बॉल पर 49 रनों की पार्टनरशिप की. प्रसिद्ध कृष्णा ने हेड को आउट करके इस साझेदारी का अंत किया. हेड ने चार चौके की मदद से 16 गेंदों पर 20 रन बनाए. ईशान किशन इस मैच में कुछ खास नहीं कर पाए और 13 रन बनाकर गेराल्ड कोएट्जी की गेंद पर चलते बने. तेज गेंदबाज कोएट्जी का गुजरात टाइटन्स के लिए ये डेब्यू मुकाबला था. यहां से अभिषेक शर्मा और हेनरिक क्लासेन पर ये जिम्मेदारी थी कि वो तेजी से रन बनाए. अभिषेक लय में लग रहे थे और उन्होंने 28 गेंदों पर फिफ्टी पूरी, लेकिन वो नाजुक मौके पर आउट हो गए. अभिषेक को अनुभवी गेंदबाज ईशांत शर्मा ने चलता किया. अभिषेक ने चार चौके और 6 छक्के की मदद से 41 बॉल पर 74 रन बनाए. अभिषेक और क्लासेन के बीच तीसरे विकेट के लिए 57 रनों की पार्टनरशिप हुई. अभिषेक शर्मा के बाद सनराइजर्स हैदराबाद ने हेनरिक क्लासेन (23) का भी विकेट गंवा दिया. फिर अनिकेत वर्मा (3) और कामिंदु मेंडिस (0) भी सस्ते में आउट हो गए. यहां से सनराइजर्स हैदराबाद का जीत पाना बेहद मुश्किल था और वही हुआ. कप्तान पैट कमिंस (19*) और नीतीश रेड्डी (21*) केवल हार का अंतर कम कर सके. गुजरात टाइटन्स की ओर से प्रसिद्ध कृष्णा और मोहम्मद सिराज ने दो-दो विकेट झटके. ईशांत शर्मा और गेराल्ड कोएट्जी को भी एक-एक विकेट मिला.  IPL प्लेऑफ की रेस में कायम है सनराइजर्स हैदराबाद मौजूदा सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद की ये 10 मैचों में सातवीं हार रही. सनराइजर्स हैदराबाद के सिर्फ 6 अंक हैं और वो दस टीमों की अंकतालिका में नौवें पायदान पर है. सनराइजर्स हैदराबाद को लीग स्टेज में 4 मुकाबले और खेलने हैं. अब फैन्स के मन में ये सवाल जरूर होगा कि सनराइजर्स हैदराबाद क्या अब भी प्लेऑफ में पहुंच सकती है? तो इसका जवाब है- हां. लेकिन इसके लिए सनराइजर्स हैदराबाद को किस्मत का भी सहारा चाहिए… आमतौर पर प्लेऑफ में क्वालिफाई करने के लिए कम से कम 16 अंक चाहिए होते हैं. लेकिन कभी-कभी 14 अंकों पर भी टीमें क्वालिफाई कर जाती हैं, अगर उनका नेट रन रेट (NRR) अच्छा हो. जैसे कि पिछले आईपीएल सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने 14 अंकों के साथ प्लेऑफ के लिए क्वालिफाई किया था. पिछले सीजन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु शुरुआती आठ मैचों में से केवल एक ही जीत पाई थी. लेकिन, उसने अपने आखिरी छह मैच जीतकर प्लेऑफ में जगह बनाई. सनराइजर्स हैदराबाद को 14 अंकों तक पहुंचने के लिए बाकी के चार मैच बड़े अंतर से जीतने होंगे, ताकि उसका नेट रनरेट (NRR) सुधर सके. वर्तमान में सनराइजर्स हैदराबाद का NRR -1.192 है. हालांकि ये भी शायद पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि उसका भाग्य अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर करेगा. सनराइजर्स हैदराबाद को उम्मीद करनी होगी कि उसके अलावा अधिकतम 3 टीमें  ही 14 या उससे ज्यादा अंक हासिल करें. बता दें कि गुजरात टाइटन्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, मुंबई इंडियंस (MI) और पंजाब किंग्स (PBKS) के पास पहले से ही 13 या उससे अधिक अंक हैं. यदि ये चारों टीमें 14 से अधिक अंकों पर पहुंच जाती हैं तो सनराइजर्स हैदराबाद प्लेऑफ की रेस से पूरी तरह बाहर हो जाएगी. इन टीमों से जुड़े मैचों पर भी सनराइजर्स हैदराबाद को नजर रखनी होगी. सनराइजर्स हैदराबाद को अब दिल्ली कैपिटल्स (DC), कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR), रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) से मुकाबले खेलने हैं. सनराइजर्स हैदराबाद के बाकी मैचों का शेड्यूल 5 मई बनाम दिल्ली कैपिटल्स, हैदराबाद, शाम 7.30 बजे 10 मई बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स, हैदराबाद, शाम 7.30 बजे 13 मई बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, बेंगलुरु, शाम 7.30 बजे 18 मई बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स, लखनऊ, शाम 7.30 बजे अंपायर से दो बार भिड़ गए कप्तान शुभमन गिल शुभमन गिल ने खोया आपा, दो बार अंपायर से भिड़े गुजरात-हैदराबाद मैच में अंपायर्स के फैसले पर विवाद भी हुआ. इसके केंद्र में गुजरात टाइटन्स के कप्तान शुभमन गिल रहे. इस मैच में दो मौकों पर शुभमन गिल अंपायर से बहस करते दिखे. पहली बार शुभमन गिल ने उस समय आपा खोया, जब वो रनआउट होकर पवेलियन लौट रहे थे. यह वाकया गुजरात टाइटन्स की पारी में 13वें ओवर की आखिरी गेंद के बाद हुआ. उस ओवर में स्पिनर जीशान अंसारी की आखिरी गेंद को जोस बटलर ने लेग साइड में मोड़ने की कोशिश की, लेकिन बॉल शॉर्ट फाइन लेग की ओर अंदरूनी किनारा लेकर गई. ऐसे में शुभमन गिल और बटलर रन लेने के लिए दौड़ पड़े. उस एरिया में मौजूद हर्षल पटेल ने गेंद को तेजी से कलेक्ट किया और स्ट्राइकर एंड पर विकेटकीपर हेनरिक क्लासेन को दिया. हालांकि रन आउट करने की कोशिश में क्लासेन का दस्ताना भी स्टम्प से लगा, साथ ही गेंद पर भी स्टम्प पर हिट हुई. शुभमन गिल क्रीज से बाहर थे, लेकिन ये पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि  हेनरिक क्लासेन के दस्ताने ने बेल्स गिराया या गेंद के स्टम्प पर लगने से गिल्लियां गिरीं. टीवी अंपायर माइकल गॉफ ने कई फ्रेम देखने के बाद शुभमन गिल को आउट करार दिया. रिव्यू के दौरान शुभमन शांत और … Read more

टिम कुक ने किया खुलासा, अमेरिका में बिकने वाले आईफोन होंगे मेड इन इंडिया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस मेक इन इंडिया इन‍िशिएटिव की बात बरसों से करते आए हैं, उसके परिणाम अब सामने हैं। ये मोदी का मास्‍टरस्‍ट्रोक ही है कि ऐपल अपने सबसे पॉपुलर प्रोडक्‍ट आईफोन की मैन्‍युफैक्‍चरिंग लगातार इंडिया में शिफ्ट कर रहा है। अब ऐपल के सीईओ टिम कुक के हवाले से बड़ी जानकारी सामने आई है। एक इंटरव्‍यू में टिम कुक ने कहा है कि मार्च की तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच अमेरिका में बिकने वाले आधे से ज्‍यादा आईफोन भारत से आए थे। यही नहीं, कंपनी जून में खत्‍म होने वाली तिमाही यानी अप्रैल, मई और जून में अमेरिका में बिकने वाले ज्‍यादातर आईफोन्‍स को भारत से मंगवाएगी। आईफोन भारत से, बाकी प्रोडक्‍ट्स वियतनाम, चीन का नाम नहीं कंपनी अपनी सप्‍लाई चेन में लगातार बदलाव कर रही है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, ऐपल के अमेरिका में बिकने वाले आईफोन अब मेड इन इंडिया होंगे, जबकि आईपैड, ऐपल वॉच, मैक और एयरपॉड्स वियतनाम से आएंगे। चीन का तो नाम ही नहीं है। गौरतलब है कि कंपनी चीन से अपनी मैन्‍युफैक्‍चरिंग को कम कर रही है। अमेरिकी टैक्‍स से पिछड़ा चीन, भारत को मौका अमेरिका ने चीन पर जो टैक्‍स लगाए हैं, उससे ऐपल को चीन में बनने वाले प्रोडक्‍ट्स महंगे पड़ रहे हैं। कंपनी के अधिकारियों ने बीते हफ्ते हुए एक मीटिंग में यह जानकारी दी, जो अब सामने आई है। वहीं, ऐपल सीईओ टिम कुक ने उम्‍मीद जताई है कि अमेरिका में बिकने वाले ज्‍यादातर आईफोन्‍स अब भारत में बनेंगे। चीन में बनने वाले प्रोडक्‍ट्स को अमेरिका के बजाए अन्‍य देशों में भेजा जाएगा। नए टैरिफ से ऐपल का बढ़ सकता है खर्च अमेरिका ने चीन पर जो टैक्‍स लगाया है, उसका असर ऐपल पर होगा। कंपनी का कहना है कि मार्च में टैक्‍स का ज्‍यादा असर नहीं हुआ, लेकिन जून की तिमाही में उस पर 900 मिलियन डॉलर का खर्च बढ़ सकता है। दिलचस्‍प आंकड़ा यह भी है कि कंपनी की कमाई इस साल की पहली त‍िमाही में बढ़ी है। इसकी वजह उसके सभी प्रोडक्‍ट्स की अच्‍छी सेल बताई जा रही है। हाल ही में आई काउंटरपॉइंट इंडिया की रिपोर्ट भी कहती है कि प्रीमियम स्‍मार्टफोन कैटिगरी में ऐपल का दबदबा बढ़ रहा है। भारत में भी लोग ऐपल आईफोन्‍स को खूब खरीद रहे हैं। भारत से हवाई जहाज में भरकर भेजे आईफोन पिछले महीने यह खबर आई थी कि ऐपल ने अमेरिका का नया टैरिफ लागू होने से पहले ही कई हवाई जहाजों में आईफोन भरकर उन्‍हें अमेरिका पहुंचा दिया था। अब S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के अनुसार, कंपनी ने मार्च में भारत से अमेरिका को 98 फीसदी एक्सपोर्ट किया। कुल 31 लाख यूनिट अमेरिका पहुंचाईं गईं। टैक्‍स की बात करें तो अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर 26 फीसदी, जबकि चीन से आने वाले सामान पर 145 फीसदी टैक्‍स लगाता है। कंपनी भारत में नए रिटेल स्‍टोर्स भी खोलने जा रही है। recent visitors 39

केंद्र सरकार मप्र को 44255.33 करोड़ रुपए देगी और 24263.71 करोड़ रुपए राज्य सरकार के अंश के शामिल होंगे

 भोपाल मध्यप्रदेश में केंद्रीय योजनाओं के संचालन के लिए बड़ी राशि मिलने वाली है। इसी कड़ी में केंद्रीय योजनाओं के संचालन के पीएम मोदी (PM MODI) ने एमपी (MP) के लिए पिटारा खोला है। पीएम ने कुल 68519.05 करोड़ रुपए खर्च का फैसला किया है। केंद्र सरकार 44255.33 करोड़ रुपए देगी और 24263.71 करोड़ रुपए राज्य सरकार के अंश के शामिल होंगे। मोदी सरकार ने डॉ मोहन सरकार को 28 अप्रैल तक की स्थिति में 283.46 करोड़ रुपए दे भी दिए है। मप्र कृषि और ग्रामीण विकास विभाग को पिछले बजट से अधिक राशि, पिछले वित्त वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग के लिए 8561.16 करोड़ रुपए मिले थे, इस साल 9819.34 करोड़ रुपए का प्रावधान है। कृषि विकास विभाग में पिछले साल 237.36 करोड़ रुपए का प्रावधान था, इस वित्त वर्ष में 1005.46 करोड़ रुपए देने का फैसला लिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग को पिछले वित्त वर्ष में 1541 करोड़ रुपए का प्रावधान था। इस वित्त वर्ष में 4448.40 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। पिछले वित्त वर्ष में 4400 करोड़ के प्रावधान के बावजूद प्रदेश को जल जीवन मिशन में राशि आवंटित नहीं की गई, इस वित्त वर्ष में 8561.22 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पिछले एक महीने में केंद्र सरकार ने मोहन सरकार को 283 करोड़ रुपए दिए हैं , इसमें लोक निर्माण विभाग, किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग को 39.14 करोड़ रुपए मिला है, जबकि वित्त विभाग को भी 217.07 करोड़ रुपए मिला है. जिसका खर्च किया जाना है. बता दें कि 2024-25 में मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में मोहन सरकार को 37652 करोड़ रुपए देने का प्रावधान किया था, लेकिन इसमें 16155 करोड़ कम मिले थे, प्रदेश को केवल 21497 करोड़ रुपए ही मिले थे. इन विभागों को मिलेगा सबसे ज्यादा फंड इस पैसे में सभी विभागों को फंड मिलेगा, लेकिन ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग को सबसे ज्यादा फंड दिया जाएगा. इसके अलावा भी दूसरे सभी विभागों को फंड मिलेगा. लेकिन चार विभाग ऐसे हैं जिनके हिस्से में ज्यादा कुछ नहीं आने वाला है. इनमें पर्यटन संस्कृति विभाग, वित्त विभाग और भोपाल गैस त्रासदी विभाग शामिल है.  recent visitors 31

बीजेपी के जाति जनगणना कराने का ऐलान, जिसका लक्ष्य सामाजिक समीकरणों को साधना और चुनावी रणनीति को मजबूत करना

नई दिल्ली  बीजेपी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक चतुराई का परिचय देते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जाति जनगणना करवाने की घोषणा की है। यह फैसला सिर्फ आंकड़ें जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक इंजीनियरिंग, चुनावी रणनीति और वैचारिक संतुलन का भी समीकरण बिठाने का प्रयास किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब देश की राजनीति में 'मंडल-कमंडल' की बहस को फिर से हवा देने की कोशिश हो रही थी। ऐसे में यह समझना चुनावी और राजनीतिक रणनीति को देखते हुए बहुत जरूरी है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र की एनडीए सरकार ने यह कदम अचानक किन 5 प्रमुख वजहों से लिया है और कैसे यह उसके लिए एक 'गेमचेंजर' साबित हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव का नतीजा 2014 में नरेंद्र मोदी के पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2019 तक उनके कार्यकाल के दूसरे चुनाव तक बीजेपी ने ओबीसी (OBC),अति-पिछड़ी जातियों (EBC) और अनूसूचित जातियों (SC) को जोड़कर एक मजबूत सामाजिक समीकरण खड़ा किया था। लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का यह वोट बैंक बिखर गया और इन वर्गों का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की ओर झुक गया, जिससे बीजेपी के 400 पार वाला सपना चकनाचूर हो गया। बीजेपी और एनडीए को इसके चलते खासकर यूपी,राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में तगड़ा झटका लगा। ऐसे में जाति जनगणना वाला दांव इन जातियों की उन उपेक्षित भावनाओं पर मरहम लगाने का प्रयास है। ओबीसी को सीधा संदेश देने का प्रयास बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओबीसी होने वाले तथ्य को अबतक विपक्ष के पिछड़े वाले दांव को कुंद करने के लिए इस्तेमाल करती रही है। जब बिहार में जातिगत सर्वे करवाया गया था, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी जेडीयू एनडीए में नहीं थे। अलबत्ता तब भी बीजेपी ने आधिकारिक रूप से उस जातिगत सर्वे का समर्थन किया था। अब मोदी सरकार देशभर में जाति जनगणना का दांव चलकर प्रधानमंत्री और बिहार के सीएम नीतीश के पिछड़ा पृष्टभूमि को और मजबूती से भुनाने की कोशिश कर रही है। वैसे भी मोदी सरकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के अपने फैसले का हमेशा जिक्र करती रही है। अब इस फैसले से उसका काम और आसान हो सकता है कि असल में पीएम मोदी खुद पिछड़े समाज से तो हैं ही, वह ओबीसी समाज के मसीहा के तौर पर भी काम कर रहे हैं। राज्यों की राजनीति पर भारी पड़ने की कोशिश बीजेपी को मालूम पड़ चुका था कि अगर केंद्र जाति जनगणना को लेकर सुस्त रहा, तो विपक्ष शासित राज्य सरकारें इसे अपने-अपने ढंग से लागू करके सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश सकती हैं। तेलंगाना पहले ही इस दिशा में सक्रिय हो चुका है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार भी अपने दांव लगाने की कोशिशों में जुटी है और झारखंड में भी ‘सरना कोड’ की मांग जोर पकड़ रही है। ऐसे में केंद्र की ओर से इसे राष्ट्रीय स्तर पर करवाने का एलान करके, बीजेपी सरकार ने विपक्ष की राजनीति पर बढ़त बनाने वाली चाल चल दी है। नया प्रयोग करने की कोशिश 2014 में जब से मोदी सरकार आई है, उसकी अनेकों कल्याणकारी योजनाएं, सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करने के लिए बनाई गई हैं। ईडब्ल्यूएस कोटा और विश्वकर्मा योजना इसका सबसे बेहतरी उदाहरण है। इसी तरह से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए भी अनेकों योजनाएं चल रही हैं, जिनके माध्यम से इन वर्गों के उत्थान का भी काम हो रहा है, वहीं इसके माध्यम से सरकार इन वर्गों के बीच पहुंच भी पहुंची है। लेकिन, जाति जनगणना के माध्यम से पार्टी जातियों में बंटे भारतीय समाज को सीधे तौर पर साधने की कोशिश कर रही है, जिसे अब सहेज कर रखना उसके लिए बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी थी। क्योंकि, उज्जवला योजना, जनधन योजना जैसी अनेकों ऐसी योजनाएं हैं, जिनके माध्यम से भाजपा सरकार ने खुद को समाज के विशेष वर्गों के नजदीक पहुंचाया है, लेकिन अब उसमें भी जातियों के आधार पर दिक्कतें बढ़ने लगी थीं, जिसके लिए नया कार्ड चलना जरूरी लग रहा था। हिंदुत्व की सियासत पर जाति की चाशनी बीजेपी की राजनीति लंबे समय से हिंदुत्व के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ धार्मिक ध्रुवीकरण अब पार्टी के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अब पार्टी हिंदुत्व पर भी सामाजिक न्याय और पिछड़ों की चुनावी चाशनी लगाने की कोशिश कर रही है। इसका मकसद एक ऐसे व्यापक सामाजिक समीकरण को तैयार करना है, जिसमें धार्मिक और जातिगत दोनों स्तरों पर समर्थन हासिल हो सके। हालांकि, बीजेपी की यह सोच समझी रणनीति चुनावी फ्रंट पर कितना काम करती है, यह इस समय का सबसे बड़ा सवाल है। recent visitors 35

MP कैडर के 53 IAS अफसरों को एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी बुलाया, नए अफसरों की एंट्री सीएमओ

भोपाल  मध्यप्रदेश कैडर के 53 आईएएस अफसरों को करीब एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी बुलाया गया है। इन अफसरों को जून से जुलाई तक मिड करियर ट्रेनिंग के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी जाना होगा। खास बात यह है कि सूची में शामिल दो अफसर मुख्यमंत्री के सचिव सीबी चक्रवर्ती एम और डॉ. इलैया राजा टी हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में दो पद खाली हो जाएगा तो इसके बदले में नए अफसर आमद दे सकते हैं। चार जिलों के कलेक्टर भी शामिल इसके अलावा 4 जिलों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत चार जिलों के कलेक्टर भी शामिल हैं। यह सभी 53 अफसर सचिव, अपर सचिव स्तर के हैं। हालांकि कई अफसरों ने अपनी ट्रेनिंग रद्द करवाने के लिए जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि वर्किंग एफिशिएंसी में सुधार के लिए यह ट्रेनिंग आवश्यक होती है। इन अधिकारियों को 16 जून से 11 जुलाई तक होने वाले एमसीटीपी के चौथे चरण की ट्रेनिंग के लिए सूचित किया गया है। इन अफसरों के नाम शामिल लोकेश कुमार जाटव, धनंजय सिंह भदोरिया, स्वतंत्र कुमार सिंह, शशांक मिश्रा, स्वाति मीणा नायक, आईरिन सिंथिया जेपी, विकास नरवाल, भरत यादव, सीबी चक्रवर्ती, वी. किरण गोपाल, नंदकुमारम, शिल्पा गुप्ता, सूफिया फारूकी वली, अजय गुप्ता, अविनाश लवानिया, प्रियंका दास, अभिषेक सिंह, प्रीति मैथिल, ईलैया राजा टी., तेजस्वी नायक, अमित तोमर, श्रीकांत बनोठ, मुजीर्बुर रहमान, अनय द्विवेदी, तन्वी सुंदरियाल बहुगुणा, तरुण राठी, गणेश शंकर मिश्रा, अभिजीत अग्रवाल, कर्मवीर शर्मा, कौशलेंद्र विक्रम सिंह, अनुराग चौधरी, भास्कर लक्षकार, आशीष सिंह, शण्मुगा प्रिय मिश्रा, वीरेंद्र कुमार, दिनेश जैन, गिरीश शर्मा, शिवराज सिंह वर्मा, उमाशंकर भार्गव, प्रीति जैन, उषा परमार, सरिता बाला, ओम प्रजापति, चंद्र मौली शुक्ला, मनोज पुष्य, वीएस चौधरी कोलसानी, रुचिका चौहान, सौरव कुमार सुमन, विजय कुमार जे., हरजिंदर सिंह, नेहा मराव्या, बी. विजय दत्ता, अनुगृह पी और मोहित बुंदस। recent visitors 47

एम्स भोपाल मुंह के कैंसर की पहचान के लिए बना रहा ऐप, तंबाकू छोड़ने के लिए भी लोगों को प्रेरित करेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मुंह के कैंसर की पहचान अब आसान होगी। एम्स भोपाल एक मोबाइल ऐप बना रहा है। यह ऐप कुछ ही मिनटों में कैंसर की जांच कर लेगा। मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी यानि एमपीसीएसटी ने इस काम के लिए लाखों रुपए की सहायता भी दी है। यह ऐप लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए भी अपील करता हुआ नजर आएगा। एम्स भोपाल के डायरेक्टर डॉक्टर अजय सिंह का इसे लेकर कहना है कि यह ऐप तकनीक के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा। यह रिसर्च 24 महीनों तक चलेगी। एम्स भोपाल के डॉक्टर अंशुल राय इस प्रोजेक्ट को लीड कर रहे हैं। वे ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग में प्रोफेसर हैं। कई विभागों के डॉक्टर शामिल इस रिसर्च में कई और विभागों के डॉक्टर भी शामिल हैं। जैसे कि रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, पैथोलॉजी और सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ। यह ऐप कैंसर के लक्षणों को पहचानेगा। साथ ही, यह लोगों को तंबाकू, सुपारी और धूम्रपान के नुकसान बताएगा। इससे लोग इन्हें छोड़ने के लिए प्रेरित होंगे। प्रोजेक्ट के लिए लाखों की मदद एमपीसीएसटी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 7.4 लाख रुपए दिए हैं। पहली किस्त के रूप में 3.7 लाख रुपए मिल चुके हैं। इस ऐप से मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान जल्दी हो सकेगी। इससे लोगों को समय पर इलाज मिल पाएगा। और उनकी जान बच सकेगी। यह ऐप एक बहुत ही उपयोगी साबित हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो गांवों में रहते हैं और जिनके पास डॉक्टर तक पहुंचने के लिए साधन नहीं हैं। शोध के लिए लिए मिली मंजूरी, 7.4 लाख स्वीकृत एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि "ओरल कैंसर और अन्य प्री-मेलिग्मेंट (पूर्व-कैंसर) स्थितियों की पहचान के लिए एक मोबाइल ऐप के माध्यम से स्क्रीनिंग के लिए एक अभिनव अनुसंधान परियोजना प्रारंभ की है. इसके लिए एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ने दो साल के रिसर्च प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. इस दो वर्षीय अनुसंधान परियोजना के लिए कुल 7.4 लाख की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से पहले साल के लिए 3.7 लाख रुपये की पहली किस्त जारी की जा चुकी है. जबकि बची हुई राशि दूसरी किश्त में प्रदान की जाएगी." इस तरह मोबाइल एप से होगी कैंसर की स्क्रीनिंग एम्स के डाक्टरों ने बताया कि यह मोबाइल ऐप ओरल कैंसर, मुंह खोलने में रुकावट की बीमारी और अन्य गंभीर मुख स्थितियों की स्क्रीनिंग करने में मदद करेगा. यह एप कुछ ही मिनटों में परिणाम देगा और सभी रोगियों की जानकारी पूर्ण रूप से गोपनीय रखेगा. बता दें कि इस रिसर्च का नेतृत्व एम्स भोपाल के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉ. अंशुल राय करेंगे. उनके साथ को-प्रोजेक्ट इन्वेस्टिगेटर के रूप में डॉ. सैकत दास (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी), प्रो. अभिनव सिंह, डॉ. दीप्ति जोशी (पैथोलॉजी) और डॉ. अंकुर जोशी (कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन) शामिल हैं. जूनियर रिसर्च फेला को मिलेंगे 4 लाख 70 हजार डॉ. अंशुल राय ने बताया कि "रिसर्च के लिए स्वीकृत राशि में से दो साल के लिए जूनियर रिसर्च फेलो की सैलरी 4 लाख 80 हजार रुपए तय की गई है. कंज्यूमेबल्स पर 60 हजार रुपए, यात्रा व्यय पर 1 लाख रुपए और पब्लिकेशन व प्रिंटिंग पर 1 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे. बता दें कि यह रिसर्च मोबाइल ऐप के जरिए बड़ी आबादी में मुंह से जुड़ी गंभीर बीमारियों की पहचान और इलाज की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. डॉ. अंशुल राय ने जानकारी दी कि इस मोबाइल ऐप पर वे गत एक वर्ष से कार्य कर रहे हैं."  एक हजार मरीजों पर किया जाएगा शोध एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा कुल 7.5 लाख रुपये की धनराशि इस परियोजना के लिए प्रदान की गई है. आगामी दो वर्षों में यह अनुसंधान 1,000 व्यक्तियों पर किया जाएगा. एक व्यापक रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की जाएगी. जिससे ओरल कैंसर से संबंधित नीति निर्माण में सहायता मिल सके. यह ऐप उपयोगकर्ताओं को तंबाकू, सुपारी, सिगरेट और बीड़ी जैसे हानिकारक पदार्थों के प्रभावों के बारे में जागरूक करेगा और उन्हें इनका सेवन छोड़ने के लिए प्रेरित करेगा. यह ऐप अपनी तरह का पहला इनोवेशन है, जिसे सरकार ने फंडिंग दी है और यह स्पष्ट तरह से कैंसर होने के कितने चांसेस हैं उसका प्रमाण देगा. recent visitors 38

मुरैना में 5 फुटवेयर कंपनियां लगेंगी, होगा 301 करोड़ का निवेश, 1100 से अधिक श्रमिकों को मिलेगा रोजगार

मुरैना मध्य प्रदेश अब फुटवेयर इंडस्ट्री का नया हब बनने जा रहा है! मुरैना के सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में फुटवेयर एंड एक्सेसरीज क्लस्टर के लिए पांच कंपनियों को सरकार ने जमीन आवंटित की है। इन कंपनियों के 301 करोड़ रुपये के निवेश से न सिर्फ इलाके का कायाकल्प होगा, बल्कि 1120 से ज्यादा लोगों को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के मौके मिलेंगे। ये खबर स्थानीय लोगों के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। पांच कंपनियां, बड़ा निवेश, बंपर नौकरियां सीतापुर में जिन पांच कंपनियों को जमीन दी गई है, वे हैं- बू यांग स्काईकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड, कोलेन्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गुरुकृपा इंटरप्राइजेज, खुराना एंड कंपनी, और अशोका बूट फैक्ट्री। ये कंपनियां मिलकर 301 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। इससे न केवल फुटवेयर और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि हजारों युवाओं को नौकरी भी मिलेगी। सरकार का फोकस चंबल संभाग में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है, और ये कदम उसी दिशा में एक बड़ा धमाका है। 161 एकड़ में बनेगा इंडस्ट्रियल हब मप्र सरकार ने सीतापुर में फुटवेयर क्लस्टर के लिए लगभग 161.30 एकड़ जमीन आरक्षित की है, जिसमें से 75 एकड़ से ज्यादा पर इंडस्ट्रियल भूमि तैयार होगी । करीब 55 एकड़ जमीन पर उद्योग लगाने के लिए जमीनों के आवंटन का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा, 10 प्लग एंड प्ले यूनिट्स भी बनाई जा रही हैं, जहां उद्यमी सिर्फ अपनी मशीनें लगाकर तुरंत प्रोडक्शन शुरू कर सकेंगे। ये सुविधा छोटे और मझोले उद्योगपतियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का बड़ा निवेश , इंदौर में हुई थी शुरुआत  इंदौर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में कई कंपनियों ने चंबल संभाग में निवेश की इच्छा जताई थी। उसी का नतीजा है कि आज मुरैना में इतना बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। इसके अलावा, सीतापुर में अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स भी चल रहे हैं। मसलन, दिल्ली की जायक्स कंपनी 150 करोड़ की लागत से एथेनॉल प्लांट बना रही है, सात्विक एग्रो 210 करोड़ के निवेश से सोयाबीन और मक्का से प्रोटीन पाउडर का प्लांट तैयार कर रही है, और मयूर यूनिकोट्स 50 करोड़ के निवेश से वाहनों के सीट कवर्स के लिए केनवास बना रही है। सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले पुरुष और महिला कर्मचारियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल्स भी बनाए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ कर्मचारियों को रहने की सुविधा मिलेगी, बल्कि इलाके में काम करने की चाहत रखने वाले लोगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ये कदम मध्य प्रदेश को औद्योगिक नक्शे पर और मजबूत करेगा। इसे एमपी में औद्योगिक विस्तार के नजरिये से भी देखा जा सकता है। पांचों कंपनियों को मिली जमीन का विवरण     बू यांग स्काईकार्प प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 35.99 एकड़ क्षेत्रफल जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 225 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 300 लोगों को रोजगार मिलेगा।     कोलेन्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 5.44 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 43 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा इसमें 220 लोगों को रोजगार मिलेगा।     गुरु कृपा इंटरप्राइजेज कंपनी को 9.13 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इसमें 20 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 400 लोगों को रोजगार मिलेगा।     खुराना एण्ड कंपनी को 4-15 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा 10 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा 100 लोगों को रोजगार मिलेगा।     अशोका बूट फैक्ट्री को 0.72 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनके द्वारा तीन करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा तथा इसमें 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। 75 एकड़ में लगेंगी कंपनियां राज्य की ओर से मुरैना जिला प्रशासन को पत्र लिखकर 75 एकड़ भूमि उपलब्ध कराए जाने के आदेश दिए हैं। इस भूमि में अन्य कंपनियों की यूनिट भी लगाई जाएंगी। प्रदेश सरकार ने फुटवियर तथा ऐसेसिरीज क्लस्टर के विकास के लिए 161.30 एकड़ भूमि देना प्रस्तावित किया है। फिलहाल सरकार ने उपरोक्त में से 55 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल पर उद्योगों के लिए भू-खंण्डों के आवंटन के लिए पत्र जारी कर दिया है। सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र, मुरैना के एरिया मैनेजर अंकित शर्मा ने कहा कि सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में 10 प्लग एण्ड प्ले यूनिट्स लगाने का भी प्रस्ताव आया है। इनके लिए 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल का भी निर्माण किया जा सकता है। इसमें उद्योगपति सीधा अपनी मशीनें लगाकर कार्य प्रारंभ कर सकते हैं।   recent visitors 32