केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलने के बाद मध्य प्रदेश सरकार 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू करेगी, जाने कितना बढ़ेगा वेतन

भोपाल केंद्र सरकार के 8वें वेतन आयोग का कार्य जल्द शुरू होने जा रहा है. इससे केंद्रीय कर्मचारियों को सैलरी में बंपर बढ़त मिलेगी. इसी के साथ मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की भी उम्मीदें बढ़ने लगी हैं. कर्मचारियों के मन में अब यही सवाल है कि केंद्र समान अगर 8वां वेतन मान लागू हुआ तो महंगाई भत्ता और उनकी पूरी सैलरी पर क्या फर्क पड़ेगा? तो बता दें कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी में हर महीने 19,000 रु तक की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, 8वां वेतनमान लागू होने में अभी काफी समय बाकी है. ऐसे में आप इस आर्टिकल में जान सकते हैं कि केंद्र के समान 8वां वेतनमान मिलने पर मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की संभावित सैलरी क्या हो सकती है. 8वें वेतनमान का लाभ कब मिलेगा? सबसे पहले जान लें कि केंद्र सरकार की 8वें वेतनमान की सिफारिशों कब लागू होंगी. तो बता दें कि अप्रैल में सरकार के 8वें वेतनमान आयोग का गठन हो रहा है. गठन के बाद आयोग अपना काम शुरू करेगा और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, महंगाई और जीवन यापन समेत कई फैक्टर्स के आधार पर सैलरी में बदलाव की सिफारिश करेगा. अगर पुराना रिकॉर्ड देखें तो आयोग को वेतनमान की सिफारिशें सरकार को भेजने में एक से डेढ़ साल तक का वक्त लगता है. ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों को 8वें वेतनमान का लाभ 2026 के बाद ही मिल पाएगा. वहीं केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलने के बाद मध्य प्रदेश सरकार 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू करेगी. 8वें वेतनमान से कितनी बढ़ेगी सैलरी? 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर गौर करें तो उस दौरान आयोग ने फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुना बढ़ाया था. ऐसे में बेसिक सैलरी 7000 रु से बढ़कर 17,990 रु हो गई थी. गौरतलब है कि फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जो महंगाई, कर्मचारियों के प्रदर्शन आदि कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है. इस संख्या को बेसिक सैलरी से गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है. उदाहरण के तौर पर अगर मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15 हजार रु है और नया फिटमेंट फैक्टर 2.60 के करीब होता है तो नई बेसिक सैलरी 39,000 रु हो सकती है. हालांकि, राज्य सरकार केंद्र सरकार की तरह वेतन आयोग की सिफारिशों को शत प्रतिशत लागू करने के लिए बाध्य नहीं रहती. क्योंकि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति केंद्र सरकार से काफी अलग होती है. वेतन आयोग क्या होता है? वेतन आयोग सरकार के एक डिपार्टमेंट की तरह काम करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार के कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा करना होता है. महंगाई, परफॉर्मेंस समेत कई फैक्टर्स को देखते हुए समय-समय पर आयोग सैलरी स्ट्रक्चर में सुधार करने की सिफारिश करता है. आमतौर पर हर 10 साल में नए वेतन आयोग का गठन होता है. वर्तमान में केंद्र सरकार के 8वें वेतनमान आयोग का गठन हो रहा है. केंद्र के वेतनमान आयोग की सिफारिशों के बाद राज्य की सरकारें भी इन सिफारिशों को अपनाती हैं या अलग से राज्य वेतन आयोग का गठन कर सकती हैं. 11 हजार रु तक बढ़ सकती है मध्य प्रदेश में सैलरी 8वें वेतनमान की सिफारिशों को लागू होने में एक साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है. ऐसे में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्र बराबर लाभ मिलना फिलहाल संभव नहीं है. दरअसल, पहले ही मध्य प्रदेश के कर्मचारी डीए यानी महंगाई भत्ते के मामले में केंद्रीय कर्मचारियों से 5 प्रतिशत तक पीछे हैं. हाल ही में मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने कर्मचारियों के कई भत्तों को बढ़ाया लेकिन ये फिर भी केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर नहीं हैं. माना जा रहा है कि 8वां वेतनमान लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी 19 हजार रु प्रतिमाह तक बढ़ सकती है. वहीं, मध्य प्रदेश में ये लागू होता है तो कर्मचारियों की सैलरी 11 हजार रु तक बढ़ सकती है. एमपी में 13 साल बाद बढ़े भत्ते लेकिन केंद्र से कम मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को 13 साल बाद 13 तरह के भत्तों में लाभ दिया है. इसमें DA यानी महंगई भत्ता , HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस समेत कई भत्ते शामिल हैं लेकिन कर्मचारी संगठन इससे खुश नहीं हैं. तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी कहते हैं, '' 13 साल बाद भत्ते बढ़ाए लेकिन ये पर्याप्त नहीं है. कर्मचारियों को उचित लाभ मिलने की उम्मीद थी.अगर ये भत्ते केंद्र के हिसाब से बढ़ाए गए होते तो मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलती.'' मध्य प्रदेश में DA होगा 60 प्रतिशत? बात करें मध्य प्रदेश के कर्मचारियों के DA की, तो छठवें वेतनमान की तुलना में सातवें वेतनमान में सैलरी में 14% की बढ़ोतरी हुई थी और इसके साथ मध्यप्रदेश में DA फिलहाल 50% मिल रहा है. अगले साल 8वें वेतनमान की सिफारिशें अगर लागू होती हैं तो मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की कुल सैलरी 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. इसमें कर्मचारियों का डीए 50 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत होने का अनुमान है. इस दौरान कर्मचारियों को 3 प्रतिशत का परफॉर्मेंस इंक्रीमेंट भी दिया जा सकता है. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की सैलरी में बंपर बढ़त हो सकती है. 50% हुआ डीए फिर बेसिक सैलरी में क्यों नहीं जुड़ा? मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही बढ़ाए गए महंगाई भत्ते से अब प्रदेश के कर्मचारियों को 50 प्रतिशत डीए मिल रहा है. लंबे समय से कर्मचारी संगठनों की मांग थी कि नियम मुताबिक 50 प्रतिशत से ज्यादा डीए होने पर इसे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से जोड़ दिया जाए. हालांकि, सरकार ने इस मांग को पूर्व में ही ठुकरा दिया था. दरअसल, सरकार ने छठवें वेतनमान की सिफारिश मानते हुए डीए को बेसिक सैलरी में नहीं जोड़ने का फैसला लिया था. सरकार का तर्क था कि ऐसा करने से प्रदेश की सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ सकता था. recent visitors 40

मास्टर प्लान की सड़कें शहर के यातायात को संभालने में असमर्थ, नई सड़कों और ब्रिज की आवश्यकता, तेजी से काम करना होगा

इंदौर  मास्टर प्लान के तहत बनने वाले मेजर रोड में हुई देरी का खामियाजा लंबे समय तक शहरवासियों को भुगतना पड़ेगा। 17 पहले बनी योजना के तहत बन रही ये सड़कें भी अब शहर का यातायात संभालने में सक्षम नहीं होंगी। एजेंसियों को नई सड़कों के साथ चौराहों पर ब्रिज और रिंग रोड की योजना पर भी तेजी से काम करना होगा। इधर मास्टर प्लान के तहत सड़कों का निर्माण अधूरा होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खोदी गई सड़कें यातायात को कर रही बाधित सड़कों का काम समय पर पूर्ण नहीं होने से लाखों लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं। इससे समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। अधूरी और खोदी हुई सड़कें यातायात को बाधित कर रही हैं। इनकी वजह से रोज हादसे हो रहे हैं। जिन सड़कों का निर्माण शुरू किया गया है, उनका काम भी धीमी गति से जारी है। ऐसे में लोगों को धूल और गड्ढों के कारण परेशान होना पड़ रहा है। जिन सड़कों पर काम हुआ, वह भी टुकड़ों-टुकड़ों में बनी हैं और आधी-अधूरी हालत में छोड़ दी गई हैं। एमआर-5, एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़कों की लागत अब कई गुना बढ़ गई है। देरी से बढ़ गई निर्माण लागत मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कें दशकों तक नहीं बनने के कारण निर्माण लागत बढ़ गई है। कई लोगों को अन्य स्थानों पर विस्थापित करना पड़ेगा। एमआर-3 की निर्माण लागत शुरुआत में 34 करोड़ थी, जो अब 50 करोड़ के पार पहुंच गई है। एमआर-4 की लागत भी 55 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। एमआर-11 को बनाने में 75 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। एमआर-12 को बनाने में 200 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो रही है। अन्य शहरों को जाने वाले वाहन शहर में करते हैं प्रवेश एमआर-11 और एमआर-12 का निर्माण पूरा नहीं होने से भोपाल और अन्य शहरों से आने वाले वाहनों को उज्जैन रोड जाने के लिए शहर में प्रवेश करना पड़ता है। वर्तमान में इन वाहनों का सर्वाधिक दबाव एमआर-10 पर है। यदि एमआर-11 बन गया होता तो बायपास से वाहन एबी रोड पहुंच सकते थे। एमआर-12 के बनने से वाहनों को एबी रोड और उज्जैन रोड तक की सीधी कनेक्टिविटी मिलने लगती। इन दोनों सड़कों के अधूरे होने से अभी विजय नगर क्षेत्र में वाहनों का खासा दबाव देखा जाता है। इनका निर्माण हुआ शुरू, लेकिन कई बाधाएं -एमआर-4 : रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी को जोड़ने वाली इस सड़क पर कई निर्माण सड़क पर आ रहे हैं। – एमआर-5 : इंदौर वायर से बड़ा बांगड़दा तक बनने वाली सड़क पर भी लक्ष्मीबाई मंडी के आगे सुपर कारिडोर की तरफ कई अतिक्रमण हैं। – एमआर-11 : बायपास से एबी रोड तक बनने वाली इस सड़क पर कई अतिक्रमण हैं। इस सड़क का समय पर निर्माण नहीं होने से कई विकास अनुमतियां जारी हो गईं। अब इसका सर्वे कर नया लेआउट तय किया जा सकता है। – एमआर-12 : बायपास से एबी रोड होते हुए उज्जैन रोड को जोड़ने वाली सड़क पर बाधाएं हैं। गत दो साल से टुकड़ों में इसका निर्माण किया जा रहा है। कैलोदहाला कांकड़ पर 100 से ज्यादा घरों की बाधा है। इनको विस्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। टुकड़ों- टुकड़ों में बनाया     मास्टर प्लान की प्रमुख सड़क एमआर-11 को बनाने का काम शुरू हो चुका है। दो साल में इसे पूरा कर लिया जाएगा। एमआर-12 का चार किमी हिस्सा टुकड़ों-टुकड़ों में बनाया जा चुका है। शेष सड़क का काम जारी है। कान्ह नदी पर पुल का काम शुरू हो चुका है। जल्द ही कैलोदहाला रेलवे क्रासिंग पर आरओबी का काम शुरू किया जाएगा। सिंहस्थ तक इस सड़क को बनाने का लक्ष्य रखा गया है। – आरपी अहिरवार, सीईओ, आईडीए सड़कों के लिए राशि आवंटित हुई     मास्टर प्लान की कुछ सड़कों का काम शुरू हो गया है और कुछ का काम जल्द शुरू होगा। हमारा लक्ष्य सिंहस्थ से पहले मास्टर प्लान की सभी सड़कों को तैयार करने का है। हमें पूरा विश्वास है कि हम लक्ष्य हासिल कर लेंगे। सड़कों को चार पैकेज में करने का उद्देश्य भी यही है। सड़कों के लिए राशि आवंटित हो चुकी है। कार्यादेश भी जारी हो गए हैं। ऐसे में दिक्कत नहीं आएगी। – शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त इंदौर     recent visitors 43

ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के सुगम आवागमन के लिए प्रदेश की शत-प्रतिशत बसाहटों को सड़कों से जोड़ने की समय-सीमा निर्धारित

भोपाल एमपी सरकार अगले तीन साल में प्रदेश की सभी बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के लिए काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के सुगम आवागमन और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए प्रदेश की शत-प्रतिशत बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के लिए समय-सीमा निर्धारित कर कार्रवाई करें।  सभी जिलों में सड़कों की आवश्यकता का वैज्ञानिक आधार पर सर्वे कर कार्य-योजना बनाई जाए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की बैठक में पीएम ग्राम सड़क योजना के कार्यों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। बैठक में मंत्री प्रहलाद पटेल, सीएस अनुराग जैन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। एआइ का करें उपयोग सीएम ने कहा, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्त, उन्नयन के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। सड़कों के रखरखाव, निरीक्षण में ऐप, जियो टैगिंग और एआइ का उपयोग कर और प्रभावी बनाया जाए। बैठक में बताया गया कि 89 हजार बसाहटों में से 50,658 बसाहटें सड़क मार्ग से जुड़ चुकी हैं। ग्राम सड़क योजना-4 के तहत बनने वाली 11,544 बसाहटों के लिए सर्वे कर लिया गया है। शेष 26,798 बसाहटों की कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार द्वारा पहल की जा रही है। 89 हजार में से 50 हजार बसाहटों में सड़कें अधिकारियों ने सीएम को बताया कि जनमन योजना के अंतर्गत पाण्डाटोला से बीजाटोला तक देश की पहली सड़क का निर्माण बालाघाट जिले के परसवाड़ा क्षेत्र में किया गया है। मेंटेनेंस और उन्नयन के लिए भारत सरकार से प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने में मध्यप्रदेश प्रथम रहा है। मार्गों के संधारण के लिए 2015-16 से लागू ई-मार्ग पोर्टल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई तथा केंद्र द्वारा इसे पूरे देश में नेशनल ई-मार्ग के रूप में लागू किया गया है। सीएम ने कहा कि सड़कों पर वर्तमान यातायात का सर्वे कर उन्नयन और लेन विस्तारीकरण का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। recent visitors 41

संजय विनायक जोशी की मुख्यधारा की राजनीति में वापसी जल्द !क्यों चर्चा में हैं आए पुराने ‘साथी’, जानिए संयोग

मुंबई/नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघ मुख्यालय के दौरे और संसद सत्र के खत्म होने के बाद बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक बेंगलुरु में हाेने की संभावना है। यह बैठक अप्रैल के तीसरी हफ्ते में प्रस्तावित है। इस बैठक में बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऐलान की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे पहले अप्रैल बीजेपी का इस हफ्ते 6 अप्रैल को स्थापना दिवस है। बीजेपी के स्थापना दिवस के दिन ही रामनवमी का पर्व है। बीजेपी द्वारा इस मौके को बड़े पैमाने पर सेलिब्रेट किए जाने की उम्मीद है, तो वहीं दूसरी तरफ कभी बीजेपी के कद्दावर संगठन मंत्री रह चुके संजय जोशी का जन्मदिन भी 6 अप्रैल को है। 6 अप्रैल से है अनूठा संयोग पीएम मोदी के नागपुर दौरे के बाद संजय जोशी के नाम की चर्चा एक बार फिर हो रही है। उनके करीबियों को भरोसा है कि ऐसे में जब इसी साल अक्तूबर को संघ की स्थापना को 100 साल पूरे हो रहे हैं। उससे पहले संजय विनायक जोशी की मुख्यधारा की राजनीति में वापसी हो सकती है। कुछ स्थानों पर संजय जोशी के जन्मदिन की बधाई देने वाले पोस्टर भी सामने आए हैं। संजय जोशी की उम्र अभी 62 साल है। ऐसे में 75 साल उम्र सीमा को देखते हुए उनके पास अभी वापसी का समय बचा हुआ है। यही वजह है कि संजय जोशी को पसंद करने वालों ने पीएम मोदी की नागपुर यात्रा के बाद नई उम्मीदें बांध ली है। जोशी के करीबियों का कहना है कि भले ही संजय जोशी राष्ट्रीय अध्यक्ष न बने लेकिन उनकी सक्रियता बढ़ेगी। सात सालों तक साथ किया काम 6 अप्रैल, 1962 को जन्में संजय जोशी लंबे समय से एक सीमित भूमिका में सक्रिय हैं। वह भी पीएम मोदी की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक रह चुके हैं। जोशी 2001 से लेकर 2005 तक बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं। नागपुर में जन्मे और वहां कुल साल तक प्रोफेसर रहे जोशी गुजरात में भी काम कर चुके हैं। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बीजेपी में 1987 में आए थे। इसके एक साल बाद जोशी को संघ ने बीजेपी गुजरात में भेजा था। इसके बाद उन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ 1988 से 1995 तक लगातार काम किया था। 1995 में पहली बार बीजेपी को गुजरात में सत्ता का स्वाद चखने को मिला था। तब देना पड़ा था इस्तीफा संजय जोशी को आखिरी बार नितिन गडकरी ने अध्यक्ष रहते हुए 2011 में जोशी को विधानसभा चुनावों की जिम्मेदारी सौंपीं थी लेकिन तब उनकी वापसी को बीजेपी में स्वीकार नहीं किया था। चुनावों के बाद उन्हें मई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से और एक महीने बाद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे में जोशी जोशी पिछले 12 सालों से अज्ञातवास में हैं। ऐसे में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 27 सितंबर, 2025 को 100 पूरे होंगे और इसी महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल की आयु पूरी करेंगे, क्या उसके पहले संजय जोशी की वापसी हो पाएगी? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। पीएम मोदी की बेहद अच्छे माहौल में संघ मुख्यालय की यात्रा के बाद समर्थकों को उम्मीद है कि नई शुरुआत हो सकती है। recent visitors 51

वक्फ विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है: जेपी नड्डा

नई दिल्ली केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है। उन्होंने कहा कि इस सदन के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों का पालन करके आगे बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ संपत्तियों के सही रखरखाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 70 साल तक किसने मुस्लिम समुदाय को डर में रखा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक इस नीति को अपनाया, लेकिन अब जनता ने इसका परिणाम देख लिया है। जेपी नड्डा ने तीन तलाक के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बहुत पहले ही इसे खत्म करने की बात कही थी, फिर भी कांग्रेस सरकार ने इसे जारी रखने की मजबूरी क्यों महसूस की? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकारों से वंचित रखा और उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बनाए रखा। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक खत्म कर मुस्लिम बहनों को मुख्यधारा में लाने का काम किया। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने इराक, सीरिया और अन्य मुस्लिम देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तीन तलाक पहले ही समाप्त कर दिया गया था। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने मुस्लिम महिलाओं को समानता से वंचित रखा और उन्हें आगे बढ़ने से रोका। वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि कई मुस्लिम देशों ने इसमें सुधार किए हैं। उदाहरण के लिए, तुर्की ने 1924 में ही अपनी पूरी वक्फ संपत्ति को सरकारी नियंत्रण में ले लिया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के 70 वर्षों के शासन में किस तरह विकास अवरुद्ध रहा, यह सभी ने देखा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य वक्फ कानून को नियमों के दायरे में लाना है। उन्होंने बताया कि 2013 के संशोधन का समर्थन करने के बावजूद उसका दुरुपयोग किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वक्फ से जुड़े मामलों को नागरिक सिविल कोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी जा सकती। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष से कहा कि आपने (विपक्ष) संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग की थी और हमने इसका गठन किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में जब वक्फ विधेयक के लिए जेपीसी का गठन किया गया था, तब इसमें केवल 13 सदस्य थे, लेकिन मोदी सरकार के तहत गठित जेपीसी में 31 सदस्य शामिल हुए। जेपीसी ने 36 बैठकें कीं और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस पर 200 घंटे से अधिक समय काम किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से हमने कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम समुदाय का वक्फ की प्रॉपर्टी का सही से उपयोग हो सके। इस विधेयक में तय किया गया है कि उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रॉपर्टी सही हाथों में रहे। recent visitors 61

रोजगारपरक गतिविधियों के लिए खाद्य प्र-संस्करण पर विशेषज्ञता आधारित सेल गठित किया जाए: मुख्यमंत्री

Governor Mangubhai Patel

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में उद्यानिकी फसलों की जिलेवार मैपिंग की जाए। विश्वविद्यालय सहित अन्य शासकीय विभागों की खाली जमीनों पर उद्यान विकसित करने तथा प्रदेश में पीपीपी मोड पर नर्सरीयां विकसित करने के लिए कार्य योजना बनायी जाए। प्रदेश के सभी जिलों में उद्यानिकी और खाद्य प्र-संस्करण पर केंद्रित वर्कशॉप और मेले आयोजित कर जिलों के किसानों और उद्यमियों को अन्य जिलों में संचालित बेस्ट प्रैक्टिसेज से परिचित कराया जाए। जिलों में कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में नवाचार करने तथा अपने स्तर पर इस क्षेत्र में उपलब्धियां अर्जित करने वाले किसानों का सम्मान किया जाए। इन्वेस्टर्स समिट के समान प्रदेश में उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण पर समिट का आयोजन हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में उद्यानिकी तथा खाद्य प्र-संस्करण विभाग की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। बैठक में उद्यानिकी तथा खाद्य प्र-संस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में कृषि विशेष रूप से उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। प्रदेश, भौगोलिक दृष्टि से सम्पन्न है, साथ ही सिंचाई और बिजली की भी पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश कि उद्यानिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से भी आगे निकले। उद्यानिकी के साथ खाद्य प्र-संस्करण के माध्यम से रोजगार के अवसर निर्मित करने की दिशा में भी अंन्तर्विभागीय समन्वय के साथ कार्य किया जाए। विभाग में विशेषज्ञों तथा तकनीकी दक्षता पर केंद्रित सेल स्थापित कर खाद्य प्र-संस्करण क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को प्रोत्साहित किया जाए। प्रदेश के तीनों क्षेत्रों चंबल-मालवा और महाकौशल में उद्यानिकी की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुसार कार्य योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उनकी मेहनत और उपज का वाजिब मूल्य मिले, उन्हें यह भरोसा दिलाना आवश्यक है। किसानों की उपज के लिए उपयुक्त सुविधाजनक स्थलों पर स्टोरेज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही आस-पास की मंडियों में उपज के मूल्य की सही जानकारी किसानों को उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था विकसित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बागवानी विकसित करने को जन आंदोलन बनाना जरूरी है। सभी विधायक और पंचायत प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में आदर्श बागवानी या नर्सरी विकसित कर क्षेत्र के किसानों को अपने स्तर पर प्रेरित करें। श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए किसानों को पुरस्कृत करने की व्यवस्था भी हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र जैसी संस्थाओं से किसानों के संवाद को भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है। बैठक में जानकारी दी गई कि आगामी माह में नीमच, मंदसौर में औषधीय कृषि के लिए उद्यानिकी इंडस्ट्री कॉन्क्लेव होगा। प्रदेश में 22 लाख 72 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलें ली जा रही हैं। आगामी 5 वर्ष में 33 लाख 91 हजार हैक्टयर तक ले जाने का लक्ष्य है। प्रदेश मसालों के उत्पादन में देश में प्रथम, उद्यानिकी में द्वितीय, पुष्प और सब्जी उत्पादन में तृतीय तथा फल उत्पादन में देश में चौथे स्थान पर है। रीवा के सुंदरजा आम और रतलाम के रियावन लहुसन को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है। स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से खरगोन की लाल मिर्च, जबलपुर के मटर, बुरहानपुर के केले, सिवनी के सीताफल, बरमान नरसिंहपुर के बैंगन, बैतूल के गजरिया आम, इंदौर के मालवी आलू, रतलाम की बालम ककड़ी, जबलपुर के सिंघाड़ा, धार की खुरासानी इमली और इंदौर के मालवी गराडू को जीआई टैग दिलाने की प्रकिया जारी है। इससे इन उत्पदों के निर्यात में वृद्धि होने से किसानों की आय भी बढ़ेगी। बैठक में विभिन्न केंद्रीय और राजकोषीय योजनाओं की प्रगति की समिक्षा की गई।   recent visitors 42

पीएम मोदी की थाइलैंड यात्रा : ‘रामकियेन’ भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है

बैंकॉक प्रधानमंत्री मोदी की थाईलैंड यात्रा के दौरान एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया है। यह डाक टिकट 18वीं सदी की रामायण के भित्ति चित्रों पर आधारित है। पीएम मोदी ने कहा, मैं थाईलैंड सरकार का आभारी हूं कि मेरी यात्रा के उपलक्ष्य में 18वी शताब्दी की ‘रामायण’ भित्ति चित्रों पर आधारित एक विशेष डाक-टिकट जारी किया गया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बैंकॉक पहुंचने पर रामायण के थाई संस्करण 'रामकियेन' को देखा। 'रामकियेन' भारत और थाईलैंड के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, 'एक अद्वितीय सांस्कृतिक जुड़ाव! थाई रामायण, रामकियेन का एक आकर्षक प्रदर्शन देखा। यह वास्तव में समृद्ध अनुभव था जिसने भारत और थाईलैंड के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।' उन्होंने लिखा, "रामायण एशिया के इतने सारे हिस्सों में दिलों और परंपराओं को जोड़ता है।" द्विपक्षीय चर्चा के बाद थाई प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा ने पीएम मोदी को एक बेहद खास गिफ्ट दिया। उन्होंने पीएम मोदी को पवित्र ग्रंथ 'द वर्ल्ड तिपिटका : सज्जया फोनेटिक एडिशन' भेंट किया। तिपिटका (पाली में) या त्रिपिटक (संस्कृत में) भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का एक प्रतिष्ठित संकलन है, जिसमें 108 खंड हैं और इसे प्रमुख बौद्ध धर्मग्रंथ माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को भेंट किया गया संस्करण पाली और थाई लिपियों में लिखा गया है, जो नौ मिलियन से अधिक अक्षरों का सटीक उच्चारण सुनिश्चित करता है। यह विशेष संस्करण 2016 में थाई सरकार ने 'विश्व तिपिटका परियोजना' के हिस्से के रूप में राजा भूमिबोल अदुल्यादेज (राम IX) और रानी सिरीकित के 70 साल के शासनकाल की स्मृति में प्रकाशित किया था। पीएम मोदी ने कहा, "प्रधानमंत्री शिनावात्रा ने मुझे त्रिपिटक भेंट किया और मैंने भगवान बुद्ध की भूमि भारत की ओर से हाथ जोड़कर इसे स्वीकार किया। पिछले वर्ष भारत ने भगवान बुद्ध और उनके दो प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे थे। यह जानकर बहुत खुशी हुई कि करीब चार मिलियन लोगों ने इन अवशेषों को नमन किया।" विश्लेषकों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री मोदी को त्रिपिटक भेंट करना भारत के आध्यात्मिक नेतृत्व और बौद्ध देशों के साथ उसके स्थायी संबंधों का प्रमाण है। recent visitors 53