छतरपुर में माता बम्बरबैनी प्राचीन मंदिर स्थल पवित्र क्षेत्र घोषित

"मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" प्रारम्भ करने की स्वीकृति शासकीय सेवकों को देय विभिन्न भत्तों के पुनरीक्षण का निर्णय छतरपुर में माता बम्बरबैनी प्राचीन मंदिर स्थल पवित्र क्षेत्र घोषित मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश में नगरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के साधारण और ग्रामीण मार्गों में संगठित, सुविधाजनक एवं सुरक्षित यात्री परिवहन बस सेवायें उपलब्ध कराने के लिए "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" प्रारम्भ करने की स्वीकृति दी गई। प्रदेश में ग्रामीण एवं साधारण मार्गों का ट्रैफिक एवं मार्ग सर्व तथा बसों की फ्रीक्वेन्सी निर्धारित करते हुये एक व्यवस्थित प्लानिंग अनुसार यात्री बसों को चलाया जायेगा। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश राज्य में सुगम सुरक्षित एवं विनियमित यात्री परिवहन सुविधा, निजी क्षेत्र के माध्यम से उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया गया है। यात्री परिवहन सेवा की प्रारम्भ करने के लिए 101 करोड 20 लाख रुपये की अशंपूजी के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई। इसके लिए राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के गठन की स्वीकृति भी दी गई है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के 20 शहरों में सार्वजनिक परिवहन हेतु कंपनी एक्ट के तहत SPVs गठित हैं, जिसमें से 16 कार्यरत हैं। उक्त समस्त कंपनियों को 7 संभागीय कंपनियों के रूप में मर्ज किया जावेगा। उक्त सात कंपनियों के एकीकृत नियंत्रण के लिए राज्य स्तर पर कंपनीज एक्ट 2013 के तहत एक होल्डिंग कंपनी का गठन जायेगा। साथ ही त्रि-स्तरीय संरचना के तहत दायित्व निर्वहन और सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों में राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी के 51 प्रतिशत शेयर बहुसंख्यक आधार पर निवेश करने एवं सात सहायक कंपनियों के बोर्ड और उसके आर्टीकल ऑफ एसोसिएशन में आवश्यक संशोधन की स्वीकृति, रीवा एवं ग्वालियर के लिए वर्तमान प्रचलित कंपनी को बंद करते हुए नवीन क्षेत्रीय कंपनी गठित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। इन क्षेत्रीय सहायक कंपनियों का गठन, संबंधित संभागीय मुख्यालयों में स्थित सिटी बस ट्रांसपोर्ट की वर्तमान कंपनी में संशोधन कर, निर्मित करने की स्वीकृति दी गई। जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति के गठन की स्वीकृति भी प्रदान की गई। म.प्र. मोटरयान नियम 1994 के नियमों में आवश्यक संशोधन एवं वांछित प्रावधान करने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। इसके लिए प्रशासकीय विभाग द्वारा पृथक से विधि अनुसार कार्यवाही की जायेगी। सात सहायक कंपनियों की सुसंगत पूर्ववर्ती सिटी ट्रान्सपोर्ट कंपनियों द्वारा परिवहन संबंधी दायित्व के निर्वहन के लिए, जो चल-अचल संपति उपयोग में आ रही है, वे यथावत इन कपंनियों के आधिपत्य में रहेंगी। इसी प्रकार नगर-निगम, प्राधिकरण आदि द्वारा स्वयं की निधि से तैयार किये गये बस टर्मिनल, बस स्टैण्ड, बस स्टॉप आदि, होल्डिंग कंपनी के सामंजस्य से उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं यात्री सुविधा के लिए विकसित किए जाऐंगे। वर्तमान सिटी बस कंपनियों के कार्यालय भवन का उपयोग नवीन सहायक कंपनियां यथावत करती रहेंगी। कार्यालय की ऐसी अचल सपंतियां, जो नगरीय निकाय निधि से अर्जित या निर्मित हैं, उनका मूल्यांकन पृथक से किया जाकर, राशि की प्रतिपूर्ति परिवहन विभाग ‌द्वारा की जायेगी। नवीन गठित होने वाली राज्य स्तरीय कंपनी को नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा पुर्नघनत्वीकरण नीति 2022 के तहत पर्यवेक्षण एजेंसी के रूप में शामिल किया जायेगा। "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" संचालन के लिए बस परिवहन अधोसंरचना के तहत पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) प्रक्रिया से उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं मापदण्डों का यात्री एवं बस ऑपरेटर के लिए सुविधाओं का निर्माण किया जायेगा। बस संचालन एवं संधारण के लिए पीपीपी मोड़ प्रक्रिया से, निजी बस ऑपरेटर्स को, संगठित रूप से एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत, दक्ष आई.टी. प्लेटफार्म के माध्यम से विनियमित किया जायेगा। आई.टी. टेक्नालॉजी साल्यूशन की स्थापना करते हुए समस्त बस ऑपरेशन्स पर प्रभावी निगरानी रखी जायेगी। इसके तहत सेवा स्तर समझौता (सर्विस लेवल अग्रीमेंट) और प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (की परफॉर्मेंस इंडिकेटर) पर प्रभावी नियंत्रण रखा जायेगा, जिससे बस ऑपरेशन यात्रियों के लिए सुविधाजनक एवं सुरक्षित हो सके। होल्डिंग कंपनी द्वारा एक कुशल आई.टी. प्लेटफार्म स्थापित करते हुये उस पर नोटीफाइड रुट अनुसार निजी बस ऑपरेटर्स को अनुबंधित किया जायेगा। होल्डिंग कंपनी मुख्यतः आई.टी. प्लेटफार्म के माध्यम से यात्रियों एवं अनुबंधित ऑपरेटर्स के लिए सुविधाजनक एप एवं एमआईएस/डैशबोर्ड आदि का संचालन करेगी तथा साथ ही राज्य एवं क्षेत्रीय सहायक कंपनी की मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल एवं कमांड सेन्टर का संचालन सुनिश्चित करेगी। यात्रियों की लास्ट माईल कनेक्टिविटी के लिए मल्टी मोडल ट्रान्सपोर्ट उपलब्ध कराना, उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं मापदण्डों की अधोसंरचना का निर्माण कराना एवं दैनिंदिनी बस संचालन पर प्रभावी नियंत्रण भी इस नवगठित कंपनी के प्रमुख दायित्वों में रहेगा। होल्डिंग कंपनी के दायित्व निम्नानुसार रहेंगे (1) संभागवार सम्पूर्ण प्रदेश में साधारण मार्ग एवं ग्रामीण मार्ग में ओरिजिन एंड डेस्टिनेशन (ओ-डी) सर्वे एवं बस मार्ग का चिन्हांकन, ताकि अधिक से अधिक मार्ग ऑपरेटर्स के लिए वित्तीय रूप से साध्य हो सकें। साथ ही ऐसे मार्ग का चिन्हांकन जो वित्तीय रुप से ऑपरेटर के लिए साध्य न हों। (2) मार्ग सर्वे के बाद बसों की फ्रिक्विंसी का निर्धारण करते हुये मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों के तहत यात्री परिवहन सेवा के लिए संभागवार स्कीम तैयार करने के लिए शासन को आवश्यक सहयोग करना। (3) शासन द्वारा मार्गों पर निविदा प्रक्रिया से चयनित अनुबंधित ऑपरेटर्स को परमिट उपलब्ध करवाना । (4) एक कुशल आई.टी. प्लेटफार्म, राज्य स्तरीय उपक्रम के कार्यालय एवं क्षेत्रीय कंपनी के कार्यालयों में, कंट्रोल एवं कमांड सेंटर की स्थापना करते हुये एक कुशल आई. टी. प्लेटफार्म को संचालित करना। (5) आई.टी. टेक्नोलॉजी सॉल्युशन के माध्यम से यात्रियों के लिए ई-टिकिट, मोबाईल एप जिससे बसों की ट्रेकिंग, आक्युपेंसी तथा यात्रा प्लानिंग हो सकेगी। साथ ही यात्रियों के लिए कैशलेस, टेपऑन-टेपऑफ सुविधा, एप के माध्यम से पैसेंजर इंन्फोर्मेशन सिस्टम आदि उपलब्ध कराया जायेगा। साथ ही अनुबंधित ऑपरेटर्स के लिए ऑपरेटर एप, वीडियो ऑडिट साफ्टवेयर (किसी भी समय बसों में यात्रियों की संख्या हेतु) फील्ड ऑडिट एप, एम.आई.एस./ डैशबोर्ड की सुविधा (रिर्पोट सहित), ऑपरेटर स्टॉफ का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसके साथ ही राज्य एवं क्षेत्रीय सहायक कंपनी के लिए कंट्रोल एवं कमांड सेंटर सॉफ्टवेयर, बस/ऑटो/टैक्सी/मेट्रो के लिए एक बुकिंग प्लेटफार्म की सुविधा (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स प्लेटफार्म), ऑनलाइन यात्री बुकिंग सुविधा, यात्री हेल्प डेस्क, राज्य / संभाग के कार्यालयों में ऑपरेशन डेशबोर्ड, स्टाफ की ट्रेनिंग आदि उपलब्ध करायी जायेगी। इसके अलावा यात्रियों की लास्ट माईल कनेक्टिविटी एवं मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने 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आरएसएस महासचिव ने मंदिर मुद्दों पर स्वयंसेवकों का समर्थन किया, मथुरा और काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद में शामिल हों RSS सदस्य

बेंगलुरु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का बड़ा बया सामने आई है। महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि अगर आरएसएस के सदस्य मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद से जुड़े कामों में हिस्सा लेना चाहें, तो संगठन को कोई परेशानी नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सभी मस्जिदों को वापस लेने की बड़ी कोशिशें नहीं होनी चाहिए। इससे समाज में झगड़ा हो सकता है। होसबले ने कन्नड़ में आरएसएस की एक पत्रिका 'विक्रमा' से बात करते हुए कहा, 'उस समय (1984), वी.एच.पी., साधु-संतों ने तीन मंदिरों की बात की थी। अगर हमारे स्वयंसेवक इन तीन मंदिरों (अयोध्या में राम जन्मभूमि सहित) के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं, तो हम उन्हें नहीं रोकेंगे।' 'धर्म परिवर्तन और लव जिहाद चिंता' होसबले ने माना कि गोहत्या, लव जिहाद और धर्म परिवर्तन जैसी चिंताएं अभी भी हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि अब हमें दूसरी ज़रूरी चीज़ों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि छुआछूत को खत्म करना, युवाओं में अपनी संस्कृति को बचाना और अपनी भाषाओं को सुरक्षित रखना। भाषा विवाद पर क्या बोले होसबले भाषा के बारे में बात करते हुए होसबले ने तीन भाषाओं को सीखने के तरीके को सही बताया। उन्होंने कहा कि इससे भाषा से जुड़े 95% झगड़े खत्म हो सकते हैं। उन्होंने भारतीय भाषाओं को बचाने और इन भाषाओं में पढ़े लोगों को नौकरी के अवसर देने की बात कही। तीन भाषा नीति का समर्थन होसबाले ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण की भी बात कही है। उन्होंने कहा, 'हमारी सभी भाषाओं में बड़े स्तर पर साहित्यिक काम हुआ है।' उन्होंने कहा, 'अगर भविष्य की पीढ़ियां इन भाषाओं को नहीं पढ़ेंगी और लिखेंगी, तो वे कैसे आगे बढ़ेंगी? अंग्रेजी के प्रति लगाव मुख्य रूप से व्यवहारिक कारणों से है…। एक और अहम पहलू ऐसा आर्थिक मॉडल बनाना है, जहां भारतीय भाषाओं में पढ़े लोगों को रोजगार मिल सके।' उन्होंने कहा, 'वरिष्ठ बुद्धिजीवियों, न्यायाधीशों, शिक्षकों, लेखकों और राजनीतिक और धार्मिक नेताओं को इस मामले में प्रगतिशील रवैया अपनाना चाहिए।' हिंदी पर राजनीति पर क्या बोले अखबार के अनुसार, उन्होंने कहा, 'इतने बड़े देश में अच्छा होगा कि सभी संस्कृत सीख लें। डॉक्टर आंबेडकर ने भी इसकी वकालत की थी। कई लोगों की बोली जाने वाली भाषा सीखने में कोई परेशानी नहीं है। जिन लोगों को रोजगार चाहिए, उन्हें उस राज्य की भाषा सीखनी चाहिए। परेशानी तब होती है, जब राजनीति और विपक्ष के नाम पर इसे थोपे जाने का मुद्दा बना दिया जाता है। क्या भाषा विविधता के बाद भी भारत एकजुट हजारों सालों से एकजुट नहीं है? ऐसा लग रहा है कि हमने भाषा को आज परेशानी बना दिया है।' 'अंग्रेजी का क्रेज' उन्होंने कहा कि हमारी सभी भाषाओं में बहुत अच्छी किताबें लिखी गई हैं। उन्होंने चिंता जताई कि अगर आने वाली पीढ़ी इन भाषाओं में पढ़ेगी-लिखेगी नहीं, तो ये भाषाएं कैसे बचेंगी? अंग्रेजी का क्रेज इसलिए है क्योंकि इससे काम मिलता है… एक और ज़रूरी बात ये है कि हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा जहां भारतीय भाषाओं में पढ़े लोगों को अच्छी नौकरियां मिलें। बड़े-बड़े विद्वानों, जजों, शिक्षाविदों, लेखकों और नेताओं को इस बारे में सोचना होगा। हिंदी पर क्या बोले संघ महासचिव होसबले न ये भी कहा कि हिंदी बहुत लोग बोलते हैं, लेकिन कुछ लोग इसका विरोध करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये उन पर थोपी जा रही है। इतने बड़े देश में ये बहुत अच्छा होगा अगर सब लोग संस्कृत सीखें। डॉ. आंबेडकर ने भी ऐसा कहा था। अगर कोई ऐसी भाषा सीखता है जो बहुत लोग बोलते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आज हर सैनिक हिंदी सीखता है। जिन्हें नौकरी चाहिए वो उस राज्य की भाषा सीखते हैं। दिक्कत तब हुई जब इसे राजनीति की वजह से थोपने की बात कही गई। क्या भारत हज़ारों सालों से भाषाओं की विविधता के बावजूद एक नहीं रहा? ऐसा लगता है कि हमने भाषा को आज एक समस्या बना दिया है। recent visitors 61

वक्‍फ संशोधन बिल पर BJP को मिला पुराने दोस्‍त TDP का साथ, चंद्रबाबू की पार्टी बोली- सपोर्ट में करेंगे वोट

नईदिल्ली एनडीए में दूसरी सबसे बड़ी पार्टनर टीडीपी ने संसद में वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करने का ऐलान किया है। चंद्राबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी के लोकसभा में 16 सांसद हैं। पहले यह संभावना जताई जा रही थी तेलगूदेशम पार्टी वक्फ बिल पर न्यूट्रल पोजिशन बनाकर दूरी बनाए रख सकती है। वह न तो इसका समर्थन करेगी और न ही विरोध करेगी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने बताया कि टीडीपी ने हमेशा मुसलमानों के हितों का ख्याल किया है और सीएम नायडू पहले ही कह चुके हैं कि हम मुसलमानों की हर हित की रक्षा करेंगे। अब टीडीपी के ऐलान के बाद बिल पास होने की उम्मीद बढ़ गई है। BJP ने राज्यसभा MPs को 3 अप्रैल को सदन में मौजूद रहने का व्हिप जारी किया। कौन-कौन दे रहा समर्थन टीडीपी का कहना है कि वक्फ बोर्ड की 9 लाख एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। अगर इस संशोधन बिल के जरिये अगर उनकी जमीन से अवैध कब्जा वापस लेकर मुसलमानों के हित में इसका उपयोग किया जाता है, पार्टी इसका समर्थन भी करेगी। अभी एनडीए में शामिल जेडीयू और आरएलडी ने अपन रुख साफ नहीं किया है। संभावना जताई जा रही है कि जेडीयू इस बिल पर न्यूट्रल रहेगी। मंगलवार को जेडीयू के सांसद बिल पर चर्चा के लिए अमित शाह से मिले। बिहार की दूसरी पार्टी हिंदुस्तान आवामी मोर्चा ने बिल के समर्थन के संकेत दिए हैं। लोकसभा में बीजेपी के 240 सांसद हैं और टीडीपी के समर्थन के ऐलान से मोदी सरकार की राह आसान हो गई है। कल 12 बजे पेश होगा बिल वक्फ संशोधन विधेयक बुधवार 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष ने इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय तय किया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि अगर सदन को लगता है कि चर्चा के लिए समय बढ़ाया जाना चाहिए, इसकी अवधि बढ़ सकती है। अगर पक्ष कोई बहाना बनाकर चर्चा में भाग नहीं लेना चाहते हैं, तो मैं इसे रोक नहीं सकता। हम चर्चा चाहते हैं। हर राजनीतिक दल को अपनी राय रखने का अधिकार है और देश सुनना चाहता है कि संशोधन विधेयक पर किस राजनीतिक दल का क्या रुख है? संसद में रखी गई बातें हजारों सालों तक दर्ज रहेगी। रिकॉर्ड में यह दर्ज होगा कि किसने संशोधन विधेयक का विरोध और किसने समर्थन किया। कल लोकसभा में विधेयक होगा पेश वक्फ संशोधन विधेयक कल बुधवार को लोकसभा में विचार और पारित कराने के लिए लाया जाएगा. विपक्षी दल इस विधेयक का जमकर विरोध कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि विधेयक पर सदन में 8 घंटे की प्रस्तावित चर्चा के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजीजू जवाब देंगे और वह इस विधेयक को पारित कराने के लिए सदन की मंजूरी लेंगे. इस मामले में सूत्रों ने बताया कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में इस मामले पर चर्चा हुई. पिछले साल विधेयक पेश करते समय केंद्र सरकार ने इसे दोनों सदनों की एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव किया था. फिर जेपीसी की ओर से रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद, उसकी सिफारिश के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मूल विधेयक में कुछ बदलावों को अपनी मंजूरी दे दी. लोकसभा में विधेयक पास किए जाने के बाद राज्यसभा को इसकी सूचना दी जाएगी. संसद का जारी बजट सत्र 4 अप्रैल को खत्म हो रहा है. recent visitors 41

वर्ष-2024-25 में वृहद इकाइयों को दिया गया 3100 करोड़ का लंबित इन्सेन्टिव एमएसएमई इकाइयों को भी 1075 करोड़ रुपये के लंबित इन्सेन्टिव के भुगतान की पहल

मध्यप्रदेश है उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाला प्रथम राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्ष-2024-25 में वृहद इकाइयों को दिया गया 3100 करोड़ का लंबित इन्सेन्टिव एमएसएमई इकाइयों को भी 1075 करोड़ रुपये के लंबित इन्सेन्टिव के भुगतान की पहल राज्य में औद्योगिक इकाइयों का कोई भुगतान लंबित नहीं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट बैठक के पहले मंत्रीगण को दी जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश उद्योग क्षेत्र को प्रोत्साहन देने वाला ऐसा राज्य है जहां औद्योगिक इकाइयों को राशि के भुगतान का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। ऐसा कोई भी भुगतान लंबित नहीं है जो औद्योगिक इकाइयों को देय था। ऐसा कार्य करने वाला मध्यप्रदेश प्रथम राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट की बैठक के पहले मंत्रिगण को दिए संबोधन में राज्य शासन की प्राथमिकताओं और गतिविधियों से अवगत करवाया। औद्योगिक इकाइयों को राशि का भुगतान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ऐसा एकमात्र राज्य है जहां वृहद और लघु सूक्ष्म, मध्यम उद्योगों के समस्त देयकों का भुगतान पूर्ण हो चुका है। राज्य शासन औद्योगिकीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। वृहद औद्योगिक इकाइयों को वर्ष 2024-25 में कुल 3100 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया। औद्योगिक विभाग के अंतर्गत वृहद औद्योगिक इकाइयों को आज 702 करोड़ रुपये के इन्सेन्टिव का भुगतान करने का कार्य किया गया। एमएसएमई विभाग के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों को 1075 करोड़ रुपये के लम्बित इन्सेन्टिव का भुगतान किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई इकाइयों को कुल 2162 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसी तरह आज राज्य सरकार डीबीटी के माध्यम से एमएसएमई और वृहद इकाइयों के लिए 1777 करोड़ रुपये की देय इन्सेन्टिव राशि का भुगतान कर रही है। इससे 2500 से अधिक औद्योगिक इकाइयां लाभान्वित होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस सफलता के लिए मंत्री परिषद सदस्यों को बधाई भी दी। विक्रम संवत-2082 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वप्रथम सभी मंत्रियों को भारतीय नव वर्ष विक्रम संवत-2082 प्रारंभ होने की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा का अपना महत्व है। प्रदेश में गुड़ी पड़वा पर्व का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। इस आयोजन का वेबकास्ट भी किया गया। यह सौभाग्य की बात है कि सम्राट विक्रमादित्य मध्यप्रदेश से हैं। विक्रम संवत शुभारंभ पर महत्वपूर्ण प्रकल्प प्रदेश में प्रारंभ हुए हैं। स्कूल चलें हम अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'स्कूल चलें हम' अभियान के अंतर्गत एक अप्रैल से प्रवेशोत्सव प्रारंभ हुआ है। इस अभियान के तहत चार दिवसीय विशेष गतिविधियां हो रही हैं। मंत्रीगण अपने प्रभार के जिले में एक से चार अप्रैल तक प्रवेश उत्सव को सफल बनाने का प्रयास करें। राज्य में लगभग 85 लाख विद्यार्थियों को सत्र के प्रारंभ में ही पाठ्य पुस्तकें प्रदान करने का निर्णय लिया गया। प्रवेशोत्सव में इसी माह स्कूल की किताबें बांटी जानी हैं। इसके साथ ही सांस्कृतिक गतिविधियां, खेलकूद और विशेष भोज के आयोजन करना भी नियत किया गया है। कैलेंडर तैयार कर गतिविधियों का क्रियान्वयन का कार्य किया जा रहा है। सीएम राइज विद्यालयों का नाम अब सांदीपनि विद्यालय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रिमंडल के सदस्यों को अवगत करवाया कि प्रदेश में निर्मित एवं निर्माणाधीन समस्त सीएम राइज विद्यालयों का नाम अब सांदीपनि विद्यालय होगा। इंदौर में आईटी एंक्लेव 27 अप्रैल को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जानकारी दी कि आगामी 27 अप्रैल को इंदौर में आईटी कॉन्क्लेव का आयोजन होगा। सूचना प्रौद्योगिकी की दृष्टि से मध्यप्रदेश में इंदौर संभावना से भरा क्षेत्र है। यहां देश-विदेश की लगभग 200 कंपनियों की भागीदारी रहेगी। उद्योगों में कार्यरत बहनों को रहवास सुविधा के लिए 284 करोड़ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्र सरकार ने विशेष केंद्रीय सहायता से प्रदेश की औद्योगिक कामकाजी बहनों की रहवास सुविधा के लिए 284 करोड़ रुपए की राशि 5120 महिलाओं के लिए हॉस्टल की सुविधा के लिए स्वीकृत की गई है। ये हॉस्टल पीथमपुर, मंडीदीप, मालनपुर, विक्रम उद्योगपुरी, झाबुआ, सिंगरौली, देवास और नर्मदापुरम् में स्वीकृत किए गए हैं। महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस महती योजना के स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मध्यप्रदेश सरकार आभार व्यक्त करती है। जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि 30 मार्च से यह अभियान प्रारंभ किया है। अभियान आगामी 30 जून तक चलना है। प्रदेश में 90 दिन से अधिक चलने वाले इस अभियान के निश्चित ही अच्छे परिणाम आएंगे। ऐसा विश्वास है कि इस अभियान को सरकार और समाज द्वारा संयुक्त रूप से क्रियान्वित कर सफल बनाया जाएगा। गेहूं उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 2600 रुपये प्रति क्विंटल की जा रही है। जिले के प्रभारी मंत्री और जनप्रतिनिधि तोल कांटे आदि व्यवस्थाओं का अवलोकन कर इस कार्य के सुचारू संचालन में सहयोग करें। प्रदेश में 14.76 लाख किसानों द्वारा पंजीयन करवाया गया है। अब तक 8 लाख मैट्रिक टन गेंहूँ का उपार्जन लगभग 1 लाख किसानों से किया जा चुका है। इस माह अर्थात अप्रैल में उपार्जन कार्य में गति आएगी।   recent visitors 28

भारत में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर 6 हुई : अमित शाह

रायपुर गृहमंत्री अमित शाह 4 अप्रेल को फिर से छत्तीसगढ़ जाने वाले हैं. इससे पहले उन्होंने एक्स पर एक बड़ी जानकारी दी. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा दौरे से पहले शाह ने कहा देश में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सरकार को बड़ी सफलता मिली. देश में नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर 6 हो गई है. 31 मार्च 2026 तक भारत में नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य सरकार ने रखा है. मोदी 3.0 के मिशन में ये सबसे महत्वपूर्ण मु्द्दा है. इसे लेकर केंद्र सरकार का प्लान कारगर होते भी दिख रहा है. अमित शाह साफ कह चुके हैं कि 31 मार्च 2026 के बाद देश में नक्सलवाद केवल इतिहास बनकर रह जाएगा. इसे पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ की साय सरकार का प्लान पर एक्शन तारीफ के लायक है. नक्सलवाद को इतिहास बना देंगे- शाह 2 दिन पहले अमित शाह ने 50 नक्सलियों के सरेंडर के खुशी जाहिर करते हुए कहा था 'ये बहुत हर्ष का विषय है कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 50 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया. हिंसा और हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने वालों का मैं स्वागत करता हूँ. मोदी जी की नीति स्पष्ट है कि जो भी नक्सली हथियार छोड़कर विकास का मार्ग अपनाएँगे, उनका पुनर्वास कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा.  बाकी लोगों से भी मैं पुनः अपील करता हूँ कि वे हथियार त्याग कर मुख्यधारा में आएं. 31 मार्च 2026 के बाद देश में नक्सलवाद केवल इतिहास बनकर रह जाएगा, यह हमारा संकल्प है'. अब 6 जिलों में ही बचा है नक्सलवाद, 10 सालों में 29 जिले मुक्त इन जिलों को ‘सबसे अधिक प्रभावित जिले’ के रूप में उप-वर्गीकृत किया गया है। यह 2015 में लाई गई शब्दावली है। इसके अलावा एक उप वर्ग ‘चिंताजनक जिलों’ की श्रेणी का है। यह उप श्रेणी 2021 में बनाई गई थी। पिछली समीक्षा के अनुसार ‘सर्वाधिक प्रभावित जिले’ 12 थे। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 2015 में ऐसे 35 जिले, 2018 में 30 जिले और 2021 में 25 जिले थे। अब यह आंकड़ा तेजी से कम होता जा रहा है। साफ है कि बीते 10 सालों में 29 जिलों से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और अब सिर्फ 6 जिलों में ही यह बचा है। कमांडर्स से मुलाकात इस बीच छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने पीसी कर जानकारी दी. उन्होंने बताया  बस्तर पंडुम समापन में बस्तर की सांस्कृतिक विषयों पर कार्यक्रम होंगे.  3 अप्रैल को कवि कुमार विश्वास “बस्तर के राम“ की प्रस्तुति देंगे.  डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 4 अप्रैल को छत्तीसगढ़ आएंगे और 5 अप्रैल की सुबह दंतेवाड़ा जाएंगे. अमित शाह मां दंतेश्वरी माता के दर्शन करेंगे और बस्तर पंडुम के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके अलावा स्थानीय चुनाव के जनप्रतिनिधियों से भी मिलेंगे. बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर के जनप्रतिनिधियों से शाह की मुलाकात होनी है. नक्सलवाद को लेकर लगातार चल रही कार्रवाई के बीच अमित शाह बस्तर में कमांडर्स से मुलाकात करेंगे. बस्तर से लौटकर रायपुर में शाह प्रशासनिक बैठक भी करेंगे.  recent visitors 43

जबलपुर में प्रिंसिपल की भगवान राम पर टिप्पणी को लेकर बवाल, हिंदू संगठन ने स्कूल में किया पथराव

 जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर के विजय नगर स्थित जॉय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार को हिंदू संगठनों ने हंगामा किया। दरअसल, हिंदू नेताओं का आरोप है कि स्कूल के प्रिंसिपल ने भगवान राम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वाट्सएप पर आपत्तिजनक पोस्ट की है। इस घटना के खिलाफ हिंदू संगठनों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि स्कूल संचालक माफी मांगे। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन स्कूल संचालक के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं करेगा तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। 3 घंटे बाद पुलिस की समझाइश और कार्रवाई के आश्वासन के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ। ईसाई धर्मगुरु की पिटाई के बाद विवाद दरअसल, सोमवार की दोपहर को धर्मांतरण की आशंका में हिंदूवादी संगठनों ने मंडला से भंवरताल पार्क से आए कुछ महिलाओं और बच्चों को रोककर उन्हें जबरन बस में बैठाया और फिर वापस भेजने लगे। इस दौरान कुछ हिंदूवादी संगठनों ने रांझी के पास बस में बैठे यात्रियों को उतारकर थाने पहुंचा दिया। करीब तीन घंटे तक हंगामा चला। इसके बाद जब बातचीत करने के लिए ईसाई धर्मगुरु पहुंचे तो थाने में मौजूद लोगों ने उनके साथ मारपीट कर दी। स्कूल के संचालक अखिलेश मेबन ने थाने में हुए हंगामे का वीडियो अपने मोबाइल स्टेटस पर लिखते हुए…भगवान राम को लेकर टिप्पणी की थी। सोशल मीडिया के जरिए जब हिंदू संगठनों तक यह जानकारी पहुंची तो उन्होंने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया। विरोध कर रहे लोगों ने स्कूल में की तोड़फोड़ इसके अलावा हिंदू नेताओं ने स्कूल परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की और स्कूल के दीवारों पर मैला भी फेंका। पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों को रोकने का प्रयास भी किया। वहीं, विरोध कर रहे लोगों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। हिंदू संगठन की मांग है कि वो इस मामले पर स्कूल प्रशासन से बातचीत करना चाहते हैं। हालांकि, कोई भी इस मामले में अभी खुलकर नहीं बोल रहा। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल में फेंका कीचड़ हिंदू संगठन के कार्यकर्ता स्कूल में कीचड़ लेकर पहुंचे। यहां पुलिस और स्कूल का स्टाफ तैनात था, तभी प्रदर्शनकारियों ने कीचड़ से भरी पॉलीथिन स्कूल के अंदर फेंकी, जिन्हें कि मौके पर तैनात पुलिस ने रोका। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल की दीवार पर भी कालिख पोतकर अपना विरोध जताया। हिंदू संगठन के कार्यकर्ता संजय तिवारी का कहना है कि फेसबुक स्टेटस में स्कूल के संचालक ने स्टेटस लगाया है, जिसमें उन्होंने भगवान राम को अपशब्द कहे है। जिसके विरोध में बजरंग दल प्रदर्शन कर रहा है। इधर, ईसाई समुदाय ने एसपी ऑफिस घेरा इससे पहले रांझी थाना परिसर में फादर जार्ज डेविस को पीटने के मामले में ईसाई समुदाय के लोगों ने मंगलवार को एसपी ऑफिस का घेराव कर दिया। दो घंटे तक हंगामा चला। हंगामे की सूचना पर ओमती समेत सिविल लाइन, बेलबाग की थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जिन लोगों ने फादर के साथ मारपीट की थी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत ही गिरफ्तार किया जाए। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा। recent visitors 35

योगी सरकार के बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, जिनके घर गिराए उन्हें 10-10 लाख का हर्जाना दो

नई दिल्ली/ प्रयागराज सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में 2021 में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर मंगलवार (1 अप्रैल) को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी को आदेश दिया कि वह 5 याचिकाकर्ताओं को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दे। यह मुआवजा 6 सप्ताह के भीतर दिया जाना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए कहा कि नोटिस मिलने के मात्र 24 घंटे के भीतर मकान गिराना कानून के खिलाफ है। न्यायालय ने यह भी कहा कि भविष्य में सरकारों को इस प्रकार की गलत कार्रवाइयों से बचना चाहिए और उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। बच्ची का वीडियो बना मुद्दा 23 मार्च को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में हुई एक अन्य बुलडोजर कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक बच्ची अपनी झोपड़ी के गिराए जाने के दौरान भागती हुई दिख रही थी, जो अपनी किताबें बचाने के लिए दौड़ रही थी। इस भावनात्मक वीडियो का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चेताया कि ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की पहले भी चेतावनी  7 मार्च को भी सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को बुलडोजर कार्रवाई के लिए फटकार लगाई थी। पीड़ितों ने दावा किया कि राज्य सरकार ने गलती से उनकी ज़मीन को गैंगस्टर अतीक अहमद की संपत्ति मान लिया, जिसके कारण प्रयागराज में एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन अन्य लोगों के घर ध्वस्त कर दिए गए। इसी मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस उज्जल भुइयां ने यूपी के अंबेडकर नगर में 24 मार्च को हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान एक तरफ झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा था तो दूसरी तरफ 8 साल की एक बच्ची अपनी किताबें लेकर भाग रही थी. इस तस्वीर ने सबको हैरान कर दिया, ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जहां अवैध रूप से तोड़फोड़ की जा रही है और इसमें शामिल लोगों के पास निर्माण कार्य करने तक की क्षमता नहीं है. नोटिस के 24 घंटे बाद चला बुलडोजर याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनको एक्शन से पहले कोई नोटिस नहीं मिला. यहां तक कि नोटिस भेजने के 24 घंटे के भीतर ही बुलडोजर चला दिया गया. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक साल 2021 में पहले एक मार्च को उन्हें नोटिस जारी किया गया था, उन्हें 6 मार्च को नोटिस मिला. फिर अगले ही दिन 7 मार्च को मकानों पर बुलडोजर एक्शन लिया गया. अधिवक्ता जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य लोगों की याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की जिनके मकान ध्वस्त कर दिए गए थे. याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि प्रशासन और शासन को ये लगा कि ये संपत्ति गैंगस्टर और राजनीतिक पार्टी के नेता अतीक अहमद की है. इन सभी लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में फरियाद की थी. लेकिन हाईकोर्ट ने घर गिराए जाने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन घरों को गलती से गिराया गया है, उन्हें राज्य सरकार अपने खर्च पर फिर से बनाएगी। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सरकार इस फैसले को चुनौती देना चाहती है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत हलफनामा दाखिल करना होगा। सरकार को कड़ी चेतावनी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी की संपत्ति को नष्ट करना कानून का उल्लंघन है। यह फैसला भविष्य में सरकारों को मनमानी कार्रवाई करने से रोकने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। recent visitors 35