राजनीतिज्ञों, नागरिकों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारगणों ने मुख्यमंत्री के साथ मनाई होली, गाए होली गीत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में प्रदेशवासियों को होली पर्व की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमारे त्यौहार सबका मंगल लेकर आते हैं, इसीलिए ऐसे पर्वों पर बधाई और मंगलकामनाएं दीं जाती हैं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि ये आनंद मनाने का पर्व है। खुश होकर, आनंद लेकर ही मनाये। उन्होंने सभी से आत्मीयता और सौहार्द के साथ सभी त्यौहार मनाने का आह्वान किया। समारोह में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, सांसद खजुराहो वी.डी.शर्मा, समाजसेवी हितानंद शर्मा, सांसद भोपाल आलोक शर्मा, सांसद नर्मदापुरम दर्शन सिंह चौधरी, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवान दास सबनानी, रविन्द्र यति, गणमान्य नागरिक, पत्रकार, अधिकारी और कलाकारों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ होली मनाई। सभी ने बड़े हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की मंगलकामनाएं दीं। सांस्कृतिक कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति के रूप में सुघड़ कलाकारों ने ब्रज, बरसाने और महाकाल की होली का भव्य एवं मनोरम मंचन किया गया। पारम्परिक गीत-संगीत, नृत्य और रंगों की इस अनुपम छटा ने सभी को अभिभूत कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि होली भाईचारे, प्रेम और समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमें सामाजिक एकता और सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि वे पर्यावरण का संवेदनशीलतापूर्वक ध्यान रखते हुए होली मनाएं और जल संरक्षण का भी संदेश जन-जन तक पहुंचाएं। उल्लास और उमंग से सराबोर इस होली मिलन समारोह में सभी ने शालीनता के साथ पर्व का आनंद लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच पर प्रस्तुती दे रहे कलाकारों और अतिथियों के साथ रंग बरसे भीगे….., होली के दिन दिल खिल-खिल…..,, दमादम मस्त कलंदर, भोले खेलें होली… जैसे होली गीतों का सस्वर गायन कर सभी के उल्लास को दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास पधारे सभी आगंतुकों पर पुष्प-वर्षा के साथ गुलाल उड़ाकर मेजबान के रूप में सबका स्वागत किया।   recent visitors 31

CM यादव ने साधु संतों की चरण वंदन करते हुए कहा है कि साधु-संतों का स्नेह और आशीर्वाद इस जन्म की सबसे बड़ी उपलब्धि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साधु संतों की चरण वंदन करते हुए कहा है कि साधु-संतों का स्नेह और आशीर्वाद इस जन्म की सबसे बड़ी उपलब्धि है।उज्जैन में परमात्मा ने जन्म दिया उसके लिए हम सौभाग्यशाली है। बाबा महाकालेश्वर की उज्जयिनी नगरी आध्यात्म ,भारतीय दर्शन,धर्म, गणित,चिकित्सा, धनुर्विद्या और  शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में हमेशा से विख्यात रही है। भगवान कृष्ण ने उज्जैन में सांदीपनी गुरु से शिक्षा प्राप्त की और उसी ज्ञान से श्रीमद भगवतगीता का उपदेश विश्व को दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश अग्रणी राष्ट्र बन रहा है। हम आध्यात्मिक नगरी अवंतिका को भारत का सिरमौर बना रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये बातें उज्जैन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा बड़नगर रोड़ स्थित, पंचायती निरंजनी अखाड़ा में आयोजित "होली के रंग – साधु संतो के संग" कार्यक्रम में सम्मिलित होकर कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन और प्रदेश के अन्य धार्मिक नगरों में 1 अप्रैल से शराब-बंदी की जा रही है। हम संपूर्ण प्रदेश में गौ-शालाओं को बढ़ावा दे रहे है। दूध उत्पादन पर बोनस भी दिया जाएगा।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव को उज्जैन में "होली के रंग-साधु संतों के संग" कार्यक्रम में ढोल, डमरू, वेद ऋचाओं की गूंज के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पूरी जी महाराज ने गुलाल लगाकर होली की मंगलकामनाएं दी। रविंद्र पूरी जी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उज्जैन को संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक राजधानी बनाने के लक्ष्य को पूर्ण करने में हम साधु-संत संपूर्ण रूप से साथ है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्र पूरी जी महाराज, महामंडलेश्वर शांतिस्वरूपानंद गिरी जी महाराज, महामंडलेश्वर सुमन्नानन्द गिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर प्रेमानंद पूरी जी महाराज,महंत डॉक्टर रामेश्वर दास जी महाराज,महंत देवगिरी जी महाराज,महंत शनि भारती जी महाराज,महंत सुरेशानंद पूरी जी महाराज आदि साधु,संत,महंतों का पुष्प-वर्षा कर स्वागत किया।   recent visitors 35

अगर कोई व्यक्ति किसी की आय पर निर्भर था, तो वह मुआवजा पाने का अधिकारी होगा, चाहे वह रिश्ते में कोई भी हो- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि सड़क हादसे में मुआवजा मृतक पर आर्थिक तौर पर निर्भर हर मेंबर को मिलेगा। इस मामले में कानूनी रिप्रेजेंटेटिव की संकीर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती है। जो लोग आर्थिक तौर पर मृतक पर निर्भर थे उन्हें दावेदारों की कैटिगरी से बाहर नहीं किया जा सकता है। अदालत ने हाल के फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि कानूनी प्रतिनिधि वह व्यक्ति होता है जो सड़क दुर्घटना में किसी शख्स की मृत्यु के कारण पीड़ित होता है और यह जरूरी नहीं कि केवल पत्नी, पति, माता-पिता या संतान ही हो। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने उस मामले की सुनवाई की जिसमें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accident Claims Tribunal – MACT) ने मुआवजा प्रदान करते समय मृतक के पिता और बहन को आश्रित नहीं माना था। MACT ने माना कि मृतक के पिता उनकी आय पर निर्भर नहीं थे और चूंकि पिता जीवित थे, इसलिए छोटी बहन को भी आश्रित नहीं माना जा सकता था। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने MACT के इस फैसले को बरकरार रखा जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को रद्द करते हुए माना कि निचली अदालतों ने अपीलकर्ताओं को मृतक का आश्रित मानने से इनकार करके गलती की थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजा केवल पति-पत्नी, माता-पिता या बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी व्यक्तियों तक विस्तार होता है जो मरने वाले के कारण प्रभावित हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा राशि 17 लाख 52 हजार 500 तय कर दी। क्या है मामला? ग्वालियर में 25 सितंबर 2016 को 24 साल के धीरज सिंह तोमर ऑटो में जा रहे थे। ड्राइवर तेज रफ्तार से ऑटो चला रहा था। लापरवाही के कारण ऑटो दुर्घटनाग्रस्त हो गया और धीरज की मौके पर ही मृत्यु हो गई। एमएसीटी ने मामले में कुल 9,77,200 मुआवजे भुगतान का आदेश दिया गया। मृतक के परिजनों को यह रकम भुगतान किए जाने का निर्देश दिया। लेकिन साथ ही कोर्ट ने मृतक के पिता और बहन को दावेदार नहीं माना और अन्य दावेदारों को यह रकम दिए जाने को कहा गया था। यह फैसला आगे का रास्ता तय करेगा सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ताओं जिनमें मृतक के पिता और बहन को मृतक का आश्रित माना और उन्हें मुआवजा प्रदान किया। यह फैसला भविष्य के मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि मोटर वाहन दुर्घटनाओं में मुआवजा केवल मृतक के पारंपरिक उत्तराधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी लोगों को मिलेगा जो उसकी आय पर निर्भर थे।   recent visitors 40

मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज, सातवें वेतन आयोग के अनुसार अब मिलेगा भत्ता

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने अपने नए बजट में कर्मचारियों के भत्तों में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 12 मार्च 2025 को पेश किए गए बजट में बताया कि 1 अप्रैल 2025 से कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के अनुसार भत्ते दिए जाएंगे। अभी तक कर्मचारियों को 6वें वेतन आयोग के हिसाब से भत्ते मिल रहे थे, जो 13 साल पुराने थे। इस बदलाव से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर परिवहन और पेट्रोल भत्ते में, जो अब तक काफी कम थे। 7वें वेतन आयोग के अनुसार भत्ता मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट भाषण में घोषणा की कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों को अब 7वें वेतन आयोग के अनुसार भत्ते मिलेंगे। यह नया नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा। पिछले 13 सालों से, कर्मचारियों को 2010 में निर्धारित 6वें वेतन आयोग के आधार पर भत्ते मिल रहे थे। इस लंबे अंतराल में महंगाई काफी बढ़ गई है, जिससे पुराने भत्ते कम पड़ रहे थे। इस बदलाव से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। भत्ता था काफी कम वित्त मंत्री ने बताया कि 6वें वेतन आयोग के तहत परिवहन भत्ता मात्र 200 रुपये और पेट्रोल भत्ता 106 रुपए प्रति सप्ताह था। यह राशि वर्तमान समय की आवश्यकताओं के हिसाब से काफी कम है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए यह बदलाव जरूरी हो गया था। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। ये भत्ते हैं शामिल सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों में विकलांगता भत्ता, घर किराया भत्ता, सचिवालय भत्ता, आदिवासी क्षेत्र भत्ता, यात्रा भत्ता, जोखिम भत्ता, दैनिक भत्ता, पुलिस कर्मियों के लिए आहार भत्ता, वर्दी धुलाई भत्ता और सिलाई भत्ता शामिल हैं। ये भत्ते कर्मचारियों की अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं। 7वें वेतन आयोग के अनुसार इन भत्तों में भी संशोधन होगा, जिससे कर्मचारियों को और अधिक लाभ मिलेगा। लंबे समय से थी संसोधन की मांग कर्मचारी संगठन लंबे समय से भत्तों में संशोधन की मांग कर रहे थे। सरकार ने उनकी मांग को मानते हुए यह फैसला लिया है। यह फैसला कर्मचारियों के लिए एक बड़ी जीत है। हालांकि, नए कर्मचारियों को इस लाभ के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। नए नियमों के लागू होने के बाद, मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के हिसाब से बकाया महंगाई भत्ता भी मिलेगा। यह राशि उनके पिछले वेतन के आधार पर गणना की जाएगी। recent visitors 36

पीएम आवासों का लाभ देने में नंबर वन मध्यप्रदेश के लोगों को चार साल में 24.89 लाख पीएम आवास मिलेंगे

भोपाल  विधानसभा का बजट सत्र में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अभिभाषण में कहा की  सरकार एक लाख किमी सड़क निर्माण की योजना, 30 लाख किसानों को सोलर पंप, केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना व ताप्ती ग्राउंड वाटर रिचार्ज जैसी मेगा परियोजनाओं से सिंचाई का रकबा एक करोड़ हेक्टेयर करने जैसे कार्यों का उल्लेख किया।  पीएम आवासों(PM Awas Yojana) का लाभ देने में नंबर वन मध्यप्रदेश के लोगों को चार साल में 24.89 लाख पीएम आवास मिलेंगे। इनमें से 13 लाख आवास निर्माणाधीन है। निर्माण 6-8 महीने में पूरा हो जाएगा। एक साल के भीतर 13 लाख परिवार निवास करने लगेंगे। गंगा जल लेकर पहुंचे: जबलपुर उत्तर मध्य से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे गंगाजल का कलश लेकर सदन पहुंचे। कहा कि महाकुंभ से 15000 लीटर गंगा जल लाया था। अपनी विधानसभा के 50 हजार घरों में बंटवाया है। कांग्रेस विधायकों को गंगाजल देने के सवाल पर कहा कि गंगा का जल उसी के पास जाता है जिसकी आस्था होती है। 36 लाख का निर्माण पूरा: अब तक 11.89 लाख आवास आवंटित करने का ही आंकड़ा सामने आ रहा था, लेकिन सदन में राज्यपाल के अभिभाषण में पीएम आवास का पूरा लेखा-जोखा सामने आया है। बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में अब तक 36 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। सरकार ने सदन को बताया     पीएम स्वनिधि योजना केतहत 13 लाख कमजोर लोगों को कर्ज दिलाया।     मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना में 1640 करोड़ के748 विकास कार्य जारी।     कायाकल्प योजना में 1363 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण जारी     413 शहरों में गीता भवनबनाए जा रहे हैं।     एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने 105 करोड़ रुपए दिए।     30 अनुसूचित जाति बाहुल्य जिलों में संत रविदास सह सामुदायिक भवनों कानिर्माण करवा रहे।     राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन के तहत 97 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की।     19 धार्मिक स्थलों में पूरीतरह शराबबंदी करेंगे।     दो महानगर बनाएंगे। पहला भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ को मिलाकर बनाएंगे। दूसरा इंदौर, उज्जैन, देवास व धार को मिलाकर।     भोपाल, इंदौर, ग्वालियर व जबलपुर में 2,500 करोड़ से ऐलिवेटेड कॉरिडोर बना रहे।     नवीकरणीय ऊर्जा में 14 फीसदी की बढ़ोतरी की,इसे और बढ़ाएंगे। recent visitors 42

वित्त वर्ष 2026 में भारतीय फार्मास्यूटिकल्स बाजार 8-9 प्रतिशत बढ़ेगा

नई दिल्ली वित्त वर्ष 2026 में भारतीय फार्मा बाजार में सालाना आधार पर 8-9 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। जारी एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (आईएनडी-आरए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में इस सेक्टर की वृद्धि सालाना आधार पर 7.5-8.0 प्रतिशत रहेगी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर कृष्णनाथ मुंडे ने कहा कि “भारतीय फार्मा बाजार में वित्त वर्ष 2024 में सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2023 में सालाना आधार पर 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।” इस साल फरवरी में फार्मा बाजार ने सालाना आधार पर 7.5 प्रतिशत का राजस्व दिया इस साल फरवरी में फार्मा बाजार ने सालाना आधार पर 7.5 प्रतिशत का राजस्व दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कीमत और नए लॉन्च में आई वृद्धि की वजह से देखी गई। कीमत में वृद्धि सालाना आधार पर 5.2 प्रतिशत और नए लॉन्च में सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ओवरऑल फार्मा प्रोडक्ट्स की 12 महीने की रोलिंग बिक्री में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा, मूविंग एनुअल टोटल (एमएटी) या ओवरऑल फार्मा प्रोडक्ट्स की 12 महीने की रोलिंग बिक्री में फरवरी में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। कार्डियक थेरेपी ने फार्मा बाजार में एमएटी में 10.8 प्रतिशत की वृद्धि और मासिक बाजार हिस्सेदारी में 13.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोलॉजी/सेंट्रल नर्वस सिस्टम और डर्मेटोलॉजी का स्थान रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी ओर, एंटी-इंफेक्टिव, रेस्पिरेटरी और गायनोकोलॉजी थेरेपी में फरवरी में कमजोर वृद्धि देखी गई। इस बीच, एक दूसरी हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि देश में फार्मा सेक्टर में तेजी से उत्पादन में वृद्धि देखी जा रही है। भारत बना जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर मैकिन्से एंड कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय फार्मा सेक्टर 8 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ा है और 2024 में निर्यात दरों में भी 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। एपीआई और बायोटेक्नोलॉजी में अपनी क्षमताओं का विस्तार करते हुए, इसने 8 प्रतिशत सीएजीआर से वृद्धि की है, जो वैश्विक औसत से दोगुना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर भी बन गया है, जिसकी फार्मा निर्यात वृद्धि दर 9 प्रतिशत है, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है। recent visitors 41

सर्वेक्षण में एक्सपर्ट्स की सबसे बड़ी आशंका विश्वयुद्ध, परमाणु युद्ध और अंतरिक्ष की लड़ाई , कई एक्सपर्ट्स जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चेतावनी दे रहे

वॉशिंगटन  दुनिया में जियो-पॉलिटिकल हालात काफी खतरनाक रास्ते पर मुड़ चला है। यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया कई बार परमाणु युद्ध के मुहाने पर पहुंच चुकी है। लेकिन आगे हालात और भयावह होने वाले हैं। वाशिंगटन में वैश्विक मामलों के थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की तरफ से किए गये एक सर्वेक्षण से बता चला है कि तीसरा विश्वयुद्ध निश्चित है और ये अगले 10 सालों में शुरू हो सकता है। इस सर्वेक्षण में दुनिया के 300 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने भाग लिया था। इस दौरान इस मुद्दे पर बात की गई कि आखिर अगले 10 सालों में दुनिया कैसे दिखेगी। कई एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि 2035 तक अमेरिका, चीन और रूस जैसी वैश्विक शक्तियों के बीच युद्ध छिड़ सकता है। वहीं कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले 10 सालों में जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वेक्षण में 357 राजनीतिक रणनीतिकारों ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने अगले 10 सालों में दुनिया की बदलती परिस्थितियों और हालातों को लेकर भविष्यवाणियां की हैं। इस दौरान 10 में से चार एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि अगले 10 सालों में अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बीच विश्वयुद्ध शुरू हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि ये लड़ाई सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युद्ध की आग अंतरिक्ष तक पहुंचेगी। 10 सालों में दुनिया कितनी होगी खतरनाक? सर्वेक्षण के दौरान 10 में से 3 एक्सपर्ट्स ने कहा कि 2035 तक दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द जलवायु परिवर्तन होगा। जबकि करीब 1.7 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 10 सालों में कोई महामारी दुनिया में दस्तक दे सकती है। वहीं 5.1 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तीय ऋण अगले 10 सालों में दुनिया को पंगु बना सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युद्ध का अंत यूक्रेन के लिए अच्छा नहीं होगा और यूक्रेन युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका की आर्थिक और कूटनीतिक वर्चस्व में भारी कमी आएगी। एक्सपर्ट्स इस बात पर अभी भी एकमत हैं कि दुनिया में परमाणु युद्ध का खतरा बना हुआ है। अटलांटिक काउंसिल की टीम ने कहा, "यह भयावह पूर्वानुमान निश्चित तौर पर एक अंधकारमय वैश्विक परिदृश्य के मुताबिक है, जिसमें 62 प्रतिशत एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया है कि एक दशक बाद दुनिया आज की तुलना में बदतर होगी। इस दौरान सिर्फ 38 प्रतिशत ने अनुमान लगाया है कि यह बेहतर होगी।" इस सर्वेक्षण के दौरान एक्सपर्ट्स के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक बात परमाणु युद्ध का खतरा था। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि परमाणु युद्ध जैसा ही खतरनाक स्थिति जलवायु परिवर्तन से भी बन सकते हैं। 10 में से तीन एक्सपर्ट्स ने जलवायु परिवर्तन को 2025 और 2035 के बीच दुनिया में होने वाले विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा माना। recent visitors 45