ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट: बैठक में निवेश को बढ़ावा देने, औद्योगिक विकास को गति देने पर हुई चर्चा

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें शहर के प्रमुख उद्योगपति, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। बैठक में निवेश को बढ़ावा देने, औद्योगिक विकास को गति देने और इंदौर को निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में इंदौर कलेक्टर, एमपीआईडीसीए के अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट, जिला अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में उद्योगपतियों ने विभिन्न सुझाव दिए, जिसमें निवेश की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और निवेशकों को अधिक प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया। कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि सरकार निवेशकों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।  इंदौर को देश का प्रमुख औद्योगिक हब बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इंदौर कलेक्टर ने भी प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। इस दौरान एमपीआईडीसीए के अधिकारियों ने निवेशकों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी और उनसे इस पहल का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। महिलाओं के  रोजगार पर दिया जोर बैठक में यह भी तय किया गया कि निवेशकों की सुविधा के लिए एक समर्पित हेल्पडेस्क बनाई जाएगी, जहां वे अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही उद्योगपतियों ने प्रशासन का ध्यान महिलाओं की तरफ आकर्षित करवाते हुए कहा कि हम लोग इन्वेस्टमेंट पर तो फोकस कर रहे हैं, लेकिन महिलाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था करना चाहिए । इंदौर में उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन को लेकर उद्योगपतियों और विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि इंदौर में पहले से ही मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो चुका है, लेकिन प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी औद्योगिक विकास के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है। प्रमुख उद्योगपतियों ने सुझाव दिया कि महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मल्टी-मॉडल इंडस्ट्रियल हब और महिला केंद्रित कॉरिडोर बनाए जाएं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें। इसके साथ ही, स्टार्टअप और आईटी कंपनियों के लिए विशेष ज़ोन विकसित करने की भी मांग उठाई गई।   उद्योगपतियों ने सरकार से तेजी से भूमि आवंटन करने की अपील की पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को लेकर भी उद्योगपतियों ने सरकार से तेजी से भूमि आवंटन करने की अपील की। उनका कहना है कि कई कंपनियां विस्तार करना चाहती हैं, लेकिन जमीन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके अलावा, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार से इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी में सुधार की मांग की गई, जिसमें सब्सिडी और टैक्स से जुड़े प्रावधानों में राहत देने की बात कही गई। होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी सुझाव दिया कि मध्य प्रदेश में पर्यटन उत्सवों की तारीखें पहले से तय की जाएं, ताकि देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कही ये बात महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए कानूनी और वित्तीय परामर्शदाताओं को इंदौर में स्थापित करने की जरूरत है, ताकि निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके। इंदौर में औद्योगिक विकास को लेकर उद्योगपतियों ने कई अहम सुझाव दिए हैं, जिनमें महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीतिगत बदलाव की मांग शामिल है। recent visitors 67

नवाचार और विकास की संभावनाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में मध्यप्रदेश ने बनाई पहचान

भोपाल मध्यप्रदेश की उपजाऊ भूमि केवल भरपूर फसल ही नहीं, बल्कि नवाचार, सतत विकास और वैश्विक निवेश के नए द्वार भी खोल रही है। सरकार के इस रूपांतरणकारी प्रयास में दुनिया भर के निवेशकों को शामिल होने का आमंत्रण दिया जा रहा है। प्रदेश ने अपनी समृद्ध कृषि परंपरा और उन्नत कृषि तकनीकों के बल पर खुद को देश की “फ़ूड बास्केट” के रूप में स्थापित किया है। राज्य को अब तक सात कृषि कर्मण पुरस्कार मिल चुके हैं, जो इसकी कृषि क्षेत्र में मजबूती को दर्शाते हैं। मध्यप्रदेश में ‘श्वेत क्रांति’ का विस्तार मध्यप्रदेश में ‘श्वेत क्रांति’ तेजी से अपने पैर पसार रही है। राज्य में 2012 से 2023 के बीच दूध उत्पादन में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। इस विस्तार को डेयरी इन्वेस्टमेंट एक्सेलेरेटर जैसी योजनाओं से मजबूती मिली है, जो निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर डेयरी उद्योग के विकास को प्रोत्साहित कर रही है। मध्यप्रदेश दूध उत्पादन और उपलब्धता में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता (591 ग्राम प्रति दिन) में मध्यप्रदेश छठवें स्थान पर है। राष्ट्रीय सीएजीआर 6.18% की तुलना में मध्यप्रदेश की वृद्धि दर 8.60% है। देश के कुल दूध उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान वर्ष 2023 में 8.73% था। खाद्य और डेयरी प्रोसेसिंग में MSMEs को बढ़ावा राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को खाद्य और डेयरी प्रोसेसिंग में आगे बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है, जिनमें औद्योगिक विकास सब्सिडी, पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए वित्तीय सहायता और बिजली शुल्क में छूट शामिल है । पीएमएफएमई योजना से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को लाभ प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना के तहत क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी से खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे इस क्षेत्र में नए निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। बड़े निवेशकों के लिए आकर्षक सुविधाएं राज्य सरकार 50 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाले बड़े उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है। इसमें निर्यात इकाइयों को लाभ, हरित औद्योगिकीकरण (ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन) को बढ़ावा और कोल्ड चेन और वेयरहाउस जैसे खाद्य प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार के इन प्रयासों से राज्य का खाद्य और डेयरी उद्योग नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि पूरे देश के डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है। मध्यप्रदेश में निवेश की बयार: ‘सीड टू शेल्फ’ में वैश्विक निवेशकों का स्वागत मध्यप्रदेश खाद्य प्र-संस्करण और कृषि क्षेत्र में निवेश के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। राज्य अपने समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, रणनीतिक नीतियों और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के कारण ‘भारत की खाद्य टोकरी’ की उपाधि का वास्तविक हकदार बना है। अब, यह ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के जरिए वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तैयार है। खाद्य प्र-संस्करण में निवेश का हब बना मध्यप्रदेश राज्य सरकार की निवेश नीति को उद्योग जगत के सकारात्मक रुझान से बल मिल रहा है। पेप्सी -को, कोका कोला और अमूल जैसी शीर्ष वैश्विक कंपनियां पहले ही राज्य में निवेश कर चुकी हैं, जिससे यह क्षेत्र निवेशकों के लिए और भी आकर्षक बन गया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025: “सीड टू शेल्फ” सत्र पर फोकस 25 फरवरी 2025 को ‘इंवेस्ट मध्यप्रदेश – ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025’ के तहत “सीड टू शेल्फ” थीम पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सत्र का उद्देश्य कृषि, खाद्य प्र-संस्करण और बागवानी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना होगा। इस सत्र में अधिकारी, उद्योग जगत के दिग्गज और निवेशक एक मंच पर आएंगे, जिससे नई साझेदारियों और व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा। यह पहल मध्यप्रदेश को कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।   recent visitors 51

वित्त मंत्री सीतारमण ने पेश किया नया आयकर बिल, अब सेलेक्ट कमेटी करेगी समीक्षा, नियमों में क्या होंगे बड़े बदलाव

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नया इनकम टैक्स बिल 2025 लोकसभा में पेश कर दिया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को इस बिल को पेश करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से निवेदन किया कि वे इसे सेलेक्ट कमेटी को भेज दें. विपक्षी दलों ने नया इनकम टैक्स बिल पेश किए जाने का विरोध किया, लेकिन सदन ने बिल पेश करने के सरकार के प्रस्ताव को वॉयस वोट से पास कर दिया. नया इनकम टैक्स बिल पुराने इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 की जगह लेगा और इसके जरिये टैक्स से जुड़े पुराने नियमों और परिभाषाओं में कई अहम बदलाव भी किए जाएंगे. समीक्षा के लिए सेलेक्ट कमेटी में जाएगा बिल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा स्पीकर से आग्रह किया कि इस बिल (New Income Tax Bill 2025) को रिव्यू करने के लिए एक सेलेक्ट कमेटी बनाई जाए. यह सेलेक्ट कमेटी नए बिल के प्रावधानों को पढ़ने-समझने और उनकी समीक्षा के बाद अपनी तरफ से जरूरी सुझाव देगी. समिति का उद्देश्य नए बिल के तमाम पहलुओं पर विचार करके उसे और असरदार बनाना होगा और यह लोकसभा के अगले सत्र के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी. टैक्स टर्मिनोलॉजी में बड़े बदलाव नए इनकम टैक्स बिल को पेश करने का मुख्य मकसद टैक्स कानूनों को आसान और आधुनिक बनाना है. इसमें कई पुराने शब्दों को बदलकर नए शब्द शामिल किए गए हैं, जिससे टैक्सपेयर्स के लिए नियमों को समझना आसान होगा. मिसाल के तौर पर आकलन वर्ष यानी "असेसमेंट इयर" (Assessment Year) और "पिछले वर्ष" (Previous Year) की जगह अब "टैक्स इयर" (Tax Year) शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे टैक्सपेयर्स को अपने वित्त वर्ष और आकलन वर्ष के बीच के अंतर को समझने में आसानी होगी. इसी तरह नए बिल में "वर्चुअल डिजिटल एसेट" और "इलेक्ट्रॉनिक मोड" जैसी नई शब्दावली (Terminology) जोड़ी गई हैं, जिससे डिजिटल ट्रांजैक्शन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े प्रावधानों को बेहतर ढंह से समझा जा सकेगा. टोटल इनकम की परिभाषा में सुधार बिल में टोटल इनकम और टैक्सेबल इनकम की परिभाषा को ज्यादा स्पष्ट किया गया है. पुराने कानून में भारतीय निवासियों की ग्लोबल इनकम पर टैक्स लगता था, जबकि गैर-निवासियों पर केवल भारत में हुई कमाई पर ही टैक्स लगाया जाता था. नए बिल में भी यह नियम बरकरार रखा गया है लेकिन "डीम्ड इनकम" यानी संभावित आय की स्पष्ट परिभाषा दी गई है. इसमें कुछ खास व्यक्तियों को किए गए भुगतान को भी टैक्सेबल इनकम में शामिल किया गया है. इससे टैक्सपेयर्स और विदेशी कंपनियों के लिए नियम ज्यादा ट्रांसपेरेंट हो जाएंगे. डिडक्शन और छूट के नियमों में बदलाव नए बिल में टैक्स छूट और कटौतियों (deductions and exemptions) को बेहतर ढंग से पेश किया गया है. पहले इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 के सेक्शन 10 और 80C से 80U के तहत अलग-अलग तरह के टैक्स डिडक्शन और एग्जम्प्शन मौजूद थे. नए इनकम टैक्स बिल में इन सभी को सेक्शन 11 से 154 के तहत रखा गया है और कुछ नई प्रावधान जोड़े गए हैं. यह नए प्रावधान स्टार्टअप, डिजिटल बिजनेस और रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) से जुड़े निवेश को बढ़ावा देने के लिए लाए जा रहे हैं. कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव कैपिटल गेन्स टैक्स के सेक्शन्स में भी कुछ बदलाव लाए गए हैं. पुराने कानून के तहत कैपिटल गेन्स टैक्स को सेक्शन 45 से सेक्शन 55A के तहत रखा गया था और यह टैक्स, निवेश की अलग-अलग अवधि के आधार पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में बंटा था. साथ ही सिक्योरिटीज या इक्विटी के लिए टैक्स की खास दरें लागू थीं. नए बिल में भी क्लॉज 67 से 91 के तहत यह कैटेगराइजेशन बरकरार रखा गया है, लेकिन वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के लिए अलग से स्पष्ट नियम जोड़े गए हैं. माना जा रहा है कि इससे क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स पर टैक्स लगाने की प्रक्रिया ज्यादा ट्रांसपेरेंट हो जाएगी. नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन्स के लिए नए नियम नए बिल में नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन्स (non-profit organizations) के लिए भी टैक्स से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं. पुराने इनकम टैक्स एक्ट में सेक्शन 11 से 13 के तहत कुछ विशेष कामों के लिए टैक्स में छूट मिलती थी, लेकिन कंप्लायंस के नियम साफ नहीं थे. नए बिल में सेक्शन 332 से 355 के तहत इन संगठनों के लिए टैक्स छूट की परिभाषा को साफ किया गया है. साथ ही इसमें यह भी तय किया गया है कि नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन्स किन शर्तों के तहत बिजनेस एक्टिविटी में शामिल हो सकते हैं और उन्हें टैक्स में छूट कैसे मिलेगी. सरकार का मानना है कि नए टैक्स बिल के जरिये पेश किए जा रहे इन बदलावों से टैक्स से जुड़े नियम आसान होंगे और टैक्स सिस्टम को ज्यादा असरदार बनाया जा सकेगा. नए आयकर कानून में मूल्यांकन वर्ष की अवधारणा होगी समाप्त एक बार कानून बनने के बाद आयकर विधेयक 2025 छह दशक पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। पहले का कानून समय के साथ और विभिन्न संशोधनों के बाद काफी जटिल हो गया है, इसलिए इसकी जगह नया आयकर विधेयक लाया जा रहा है। सरकार की ओर से प्रस्तावित नए कानून में, आयकर अधिनियम, 1961 में उल्लिखित ‘पिछले वर्ष’ (FY) शब्द को बदलकर ‘कर वर्ष’ कर दिया गया है। इसके साथ ही, मूल्यांकन वर्ष (AY) की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है। नए कानून में कर निर्धारण वर्ष की अवधारणा होगी समाप्त वर्तमान में, पिछले वर्ष (2023-24) में अर्जित आय के लिए, कर का भुगतान निर्धारण वर्ष (2024-25) में किया जाता है। इस नये विधेयक में पिछले वर्ष और निर्धारण वर्ष की अवधारणा को हटा दिया गया है और सरलीकृत विधेयक में केवल कर वर्ष की बात कही गई है। आयकर विधेयक, 2025 में 536 धाराएं शामिल हैं, जो वर्तमान आयकर अधिनियम, 1961 के 298 धाराओं से अधिक हैं। मौजूदा कानून में 14 अनुसूचियां हैं जो नए कानून में बढ़कर 16 हो जाएंगी। पिछले छह दशकों में पुराने आयकर कानून में हुए हैं कई बदलाव हालांकि, नए आयकर विधेयक में भी वर्तमान कानून की तरह ही अध्यायों की संख्या 23 ही रखी गई है। जबकि पृष्ठों की संख्या काफी कम होकर 622 हो गई है, जो वर्तमान के भारी-भरकम अधिनियम का लगभग आधा है। वर्तमान में जो कानून अमल में है, उसमें पिछले छह … Read more

दलाई लामा को Z कैटेगरी सिक्योरिटी, IB की थ्रेट रिपोर्ट के आधार पर मिली सुरक्षा

नई दिल्ली  केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खुफिया जानकारी के आधार पर गुरुवार को तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया है.इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा खतरे की रिपोर्ट मिलने के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाया गया है. 89 वर्षीय दलाई लामा की सुरक्षा में कुल 33 सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे. इसमें उनके आवास पर सशस्त्र स्टेटिक गार्ड के अलावा 24 घंटे सुरक्षा देने वाले निजी सुरक्षा अधिकारी और शिफ्ट में काम करने वाले सशस्र कमांडो शामिल हैं. इस बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था के तहत 89 वर्षीय आध्यात्मिक गुरु को कुल 33 सुरक्षाकर्मी मिलेंगे, जिनमें उनके आवास पर तैनात सशस्त्र स्टैटिक गार्ड, चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान करने वाले निजी सुरक्षा अधिकारी और शिफ्ट में सशस्त्र अनुरक्षण करने वाले कमांडो शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित ड्राइवर और निगरानी कर्मी हर समय ड्यूटी पर रहेंगे. 33 सुरक्षाकर्मियों में 10 आर्म्ड स्टैटिक गार्ड शामिल हैं जो उनके घर पर रहेंगे. इसके अलावा 6 राउंड द क्लॉक पीएसओ,12 तीन शिफ्ट में आर्म्ड स्कॉर्ट के कमांडो, 2 वॉचर्स शिफ्ट में और 3 ट्रेंड ड्राइवर राउंड द क्लॉक सुरक्षाकर्मी मौजूद रहेंगे. 1959 से भारत में रह रहे दलाई लामा तिब्बत में चीनी शासन से भागने के बाद तिब्बती आध्यात्मिक गुरु 1959 से भारत में रह रहे हैं. उनके वैश्विक प्रभाव और तिब्बत के इर्द-गिर्द संवेदनशील भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए भारत सरकार उन्हें उच्च-स्तरीय सुरक्षा कवर प्रदान करती है. पिछले कुछ वर्षों में, खुफिया रिपोर्टों ने चीन समर्थित अभिनेताओं सहित विभिन्न संस्थाओं से दलाई लामा के जीवन को संभावित खतरों का संकेत दिया है, जिससे उनकी सुरक्षा भारतीय अधिकारियों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है. कई तरह की होती है सुरक्षा व्यवस्था बता दें कि भारत सरकार की ओर से देश के कुछ लोगों को खास तरह की सिक्योरिटी दी जाती है. केंद्र सरकार ने सुरक्षा के लिए पांच कैटेगरी बना रखी है. इसमें X, Y, Y+, Z और Z+ शामिल है. खतरे के हिसाब से व्यक्ति को सुरक्षा दी जाती है. कैटेगरी बढ़ने के साथ-साथ खर्चा भी बढ़ता जाता है. किस कैटेगरी की सुरक्षा पर कितना खर्चा होता है, इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं है. हालांकि, अनुमान है कि Z+ कैटेगरी की सुरक्षा पर हर महीने 15 से 20 लाख रुपये का खर्चा आता है. सके अलावा एक एसपीजी सिक्योरिटी होती है, जो सिर्फ देश के प्रधानमंत्री को मिली है. एसपीजी एक अलग फोर्स की तरह है, जो सिर्फ प्रधानमंत्री को कवर करती है. कैसी होगी सुरक्षा व्यवस्था? 33 सिक्योरिटी फोर्सेज में 10 सशस्त्र स्टैटिक गार्ड जो उनके घर पर रहेंगे. वहीं, 6 निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) जो चौबीसों घंटे उनके साथ मौजूद रहेंगे. साथ ही 12 कमांडो जो तीन शिफ्टों में उन्हें सुरक्षा देंगे. 2 वॉचर्स जो शिफ्ट में निगरानी करेंगे. 3 ट्रेंड ड्राइवर, जो हर समय उनके काफिले में साथ रहेंगे. इसके अलावा, उनकी सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी और अन्य व्यवस्थाएँ भी लागू की गई हैं. कौन हैं  बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा? दलाई लामा का जन्म सन् 1935 में ल्हामो थोंडुप के रूप में हुआ था. जब वे 2 साल के थे, तब उन्हें उनके पूर्ववर्ती तिब्बती धर्मगुरु का पुनर्जन्म माना गया. साल 1940 में उन्हें तिब्बत की राजधानी ल्हासा में 14वें दलाई लामा के रूप में मान्यता दी गई. वहीं,  1950 में चीन ने तिब्बत पर हमला किया. इसके बाद सन 1959 में चीन के खिलाफ एक विद्रोह असफल हो गया, जिसके कारण दलाई लामा भारत आ गए. तब से वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं. उनके अहिंसा और शांति के प्रयासों के लिए सन 1989 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. recent visitors 31

सीएम मोहन यादव 17 फरवरी को नौरोजाबाद के दौरे पर रहेंगे, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे

नौरोजाबाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 फरवरी को नौरोजाबाद के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमि पूजन और लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री बस स्टैंड पर पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे, जो नगर के नागरिकों के लिए गौरव का विषय होगा। इसके बाद रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा, जहां मुख्यमंत्री जनता को संबोधित करेंगे और विकास कार्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं कर सकते हैं। विकास कार्यों को मिलेगी गति मुख्यमंत्री के आगमन से नौरोजाबाद में विकास की नई धारा बहेगी। उनके इस दौरे में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमि पूजन और लोकार्पण किया जाएगा, जिससे नगर के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। सीएम यादव के दौरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि आयोजन को सफल और ऐतिहासिक बनाया जा सके। दौरे को लेकर तैयारियां जारी मुख्यमंत्री की यात्रा को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। नागरिकों को उम्मीद है कि इस दौरे से नौरोजाबाद को कई विकास योजनाओं का लाभ मिलेगा और नगर के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। इसी संबंध में भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष अग्रवाल ने बताया कि 17 फरवरी को मुख्यमंत्री यादव आएंगे। उनके दौरे को लेकर प्रशासन समेत पार्टी के नेता और कार्यकर्ता तैयारियों में जुटे हुए हैं। सीएम यादव नौरोजाबाद में कई विकास कार्यों का भूमि पूजन करेंगे।   recent visitors 33

एमपी टूरिज्म बोर्ड और वी रियल संस्था के बीच हुआ एमओयू,विदेशी पर्यटकों की संख्या में होगी वृद्धि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में गुरूवार को एमपी टूरिज्म बोर्ड और फिनलैंड की संस्था वी रियल के बीच प्रदेश के पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और संग्रहालयों पर आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वर्चुअल टूर तैयार करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीवंत अनुभूति देने वाले इन वर्चुअल टूर के माध्यम से अब पर्यटन, इतिहास और संस्कृति में रूचि रखने वाले व्यक्ति, अपने देश में रहते हुए मध्यप्रदेश के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध संस्कृति से परिचित हो सकेंगे। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों और एतिहासिक धरोहरों का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने में मदद मिलेगी और विश्व के विभिन्न देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भारत में फिनलैंड के राजदूत किम्मो लाहदेविर्ता का शॉल और पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया और प्रदेश के पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और संस्कृति को प्रदर्शित करती कॉफी टेबल बुक भेंट की। प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि फिनलैंड की कंपनी वी-रियल द्वारा इतिहास, संस्कृति, और धरोहर का उन्नत तकनीक के माध्यम से वीडियो निर्माण कर संरक्षित और पुनर्जीवित किया जाता है। कंपनी इस वर्चुअल टूर को अपने प्लेट फार्म पर उपलब्ध कराती है, जो वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक संस्थाओं सहित टूर और ट्रैवल संस्थानों सहित आम नागरिकों के लिए उपलब्ध रहते हैं। आज हुए इस एमओयू से मध्यप्रदेश के इतिहास और संस्कृति की अद्यतन जानकारी वर्चुअल स्वरूप में वैश्विक स्तर पर सहज रूप से उपलब्ध होगी। एमओयू हस्ताक्षर अवसर पर अपर प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड सुबिदिशा मुखर्जी, वी रियल संस्था के सीईओ जोहानेस स्वॉर्डस्टॉर्म सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।   recent visitors 40

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में हर क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में हर सेक्टर में निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद है। यहां नर्मदा, ताप्ती आदि नदियों की अपार जल राशि है, निरंतर बिजली उपलब्ध है, वन संपदा है, सड़कों, रेलवे और वायु मार्ग का अच्छा नेटवर्क है और उद्योगों को बड़ी रियायतें हैं। मुख्यमंत्री ने आगामी 24 एवं 25 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में झीलों, पहाड़ों और वन संपदा से युक्त सुंदर भोपाल शहर में आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक निवेश करें और इन तारीखों को अविस्मरणीय बनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में जीआईएस-2025 के कर्टेन रेजर कार्यक्रम में उद्योगपतियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय लोग उद्योगपतियों से मिलने में झिझक महसूस करते थे, लेकिन हमने उस धारणा को बदला है। हम निरंतर उद्योगपतियों, निवेशकों से संवाद कर रहे हैं। प्रदेश में छोटे-छोटे स्थान पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की गई हैं। समाज में उद्योगपतियों का महत्वपूर्ण स्थान है। उद्योगों से रोजगार उत्पन्न होते हैं और रोजगार से लोगों की आजीविका चलती है। वे एक तरह से उद्योगपति समाज के पालक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज दुनिया कह रही है कि हम बुद्ध के रास्ते पर चलकर युद्ध से विमुक्त होंगे। महात्मा बुद्ध हमारे ही देश के थे। भारत ने ही सारे विश्व को शांति और सर्व कल्याण का संदेश दिया है। हम शांति और विकास के पक्षधर हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने बनाई वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीआईएस-2025 के दिल्ली में इन्वेस्ट एम.पी. कर्टेन रेजर कार्यक्रम में कहा कि भोपाल में 24-25 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का कर्टेन रेज़र केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर संभावनाओं से भरपूर, सशक्त और समृद्ध मध्यप्रदेश की एक झलक थी। हमारे निवेश के 3डी मॉडल को आज दुनिया भर के उद्योग जगत ने सराहा है। यह मॉडल निवेशकों की ड्राइव, प्रदेश के डेवलपमेंट और हमारी डिटरमिनेशन का प्रतीक है। हम निवेशकों के साथ एक मजबूत साझेदारी बनाकर मध्यप्रदेश को नवाचार और औद्योगिक क्रांति का केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर कार्यरत रहेंगे। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश आगे बढ़ते हुए एक इंडस्ट्री रेडी स्टेट बन रहा है। हमने सभी सेक्टर के उद्योगपतियों को आमंत्रित किया है। 400 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आयोजन में 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भागीदारी की जिसमें नई दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों के निवेशक शामिल हुए। साथ ही 40 देशों के राजनयिक और व्यापारिक प्रतिनिधि, राजदूत, उच्चायुक्त, काउंसलर, मुख्य सचिव आर्थिक व व्यापारिक विशेषज्ञ आदि शामिल हुए। आयोजन में 15 से अधिक प्रमुख उद्योगपतियों से वन– टू–वन मीटिंग की गई जिसमे से जागृत कोटेचा (सीईओ, पेप्सिको भारत और दक्षिण एशिया), पुनित डालमिया (चेयरमैन, डालमिया भारत), माधवकृष्ण सिंघानिया (जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ, जेके सीमेंट), विनीत मित्तल (चेयरमैन, अवाडा ग्रुप), जीन-मार्क लेक्लरक्यू (सीईओ, सॉफलेट माल्ट), रिकान्त पिट्टी (संस्थापक, ईज माय ट्रिप), विनय व्यास (सीईओ, फ्यूजन एक्स एनर्जी), अनिल चालमालासेटी (ग्रुप सीईओ और एमडी, ग्रीनको ग्रुप), विनीत आर्य (वाइस चेयरमैन, जेबीएम समूह), राहुल मित्तल (चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, RITES) और अनुसूया रे (वाइस प्रेसिडेंट कॉर्पोरेट अफेयर्स, ऐबी-इनवेव इंडिया) शामिल थे। अनेक देशों ने दिखाई मध्यप्रदेश में निवेश की रुचि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के कर्टन-रेज़र कार्यक्रम में विभिन्न देशों के राजदूतों ने मध्यप्रदेश को संभावनाओं से भरपूर निवेश गंतव्य बताते हुए विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की इच्छा जताई। ऑस्ट्रेलिया के राजदूत ने शिक्षा, कृषि और कौशल विकास में सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही, जबकि मैक्सिको के राजदूत ने प्रदेश की नीतियों की सराहना करते हुए निवेश संभावनाओं पर सकारात्मक रुख प्रकट किया। अलबानिया के राजदूत ने शहरी नियोजन के क्षेत्र में अपनी रुचि व्यक्त की, वहीं जिम्बाब्वे के राजदूत ने कृषि क्षेत्र में साझेदारी को लेकर उत्साह दिखाया। स्लोवेनिया के राजदूत ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश और सहयोग की संभावनाओं को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। विभिन्न देशों की रुचि इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश अपनी रणनीतिक नीतियों, सुदृढ़ अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल वातावरण के कारण वैश्विक निवेशकों का पसंदीदा स्थान बन रहा है। मध्यप्रदेश: रणनीतिक निवेश गंतव्य के रूप में उद्योग जगत की पहली पसंद : सिंघानिया सीआईआई नॉर्दर्न रीजन के चेयरमैन और जेके सीमेंट के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ माधवकृष्ण सिंघानिया ने कहा कि प्रदेश की रणनीतिक स्थिति, निवेश अनुकूल नीतियां और सुगम प्रक्रियाएं इसे निवेशकों के लिए आकर्षक स्थल बनाती हैं। उन्होंने बताया कि जेके सीमेंट ने वर्ष 2016 में कटनी में वॉल पुट्टी प्लांट की स्थापना के साथ प्रदेश में अपनी औद्योगिक यात्रा शुरू की थी। इसके बाद उज्जैन और पन्ना में भी संयंत्र स्थापित किए गए। हाल ही में कंपनी ने पन्ना में 3 हजार करोड़ रूपये निवेश करने की घोषणा की है। मध्यप्रदेश की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति लॉजिस्टिक्स के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रदेश में उच्चस्तरीय अधोसंरचना, सुव्यवस्थित प्रशासनिक प्रक्रिया और उद्योग-अनुकूल नीतियां निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। विभिन्न सेक्टर-फोकस्ड नीतियों के माध्यम से सरकार निवेशकों की आवश्यकताओं के अनुसार सुधार कर रही है, जिससे मध्य प्रदेश एक वास्तविक निवेश-फ्रेंडली राज्य के रूप में उभर रहा है। अवाडा ग्रुप चेयरमैन विनीत मित्तल ने भी अपने अनुभव साझा किये। दो इंटरैक्टिव राउंड टेबल बैठकें हुईं कर्टेन रेजर कार्यक्रम में दिल्ली में दो इंटरैक्टिव राउंड टेबल मीटिंग हुई। पहली इंटरैक्टिव राउंड टेबल प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के साथ हुई, जिसमें भारत में दूरसंचार के भविष्य और मध्य प्रदेश में निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश सरकार के स्वागत भाषण से हुई। डीपीआईआईपी के प्रमुख सचिव ने प्रस्तावित टेलीकॉम पार्क की जानकारी दी, जो राज्य के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय दूरसंचार मंत्रालय, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, रिलायंस जियो, एरिक्सन और नोकिया सहित प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चाओं में 5-जी, मेक इन इंडिया, दूरसंचार उपकरण निर्माण, और कौशल विकास जैसे विषयों पर जोर दिया गया। साथ ही ग्वालियर के पास प्रस्तावित टेलीकॉम पार्क, सरकारी सब्सिडी, और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीतिगत सुधारों पर विचार-विमर्श हुआ। दूसरी इंटरैक्टिव राउंड टेबल, प्रमुख राजदूतों और राजनयिकों के साथ हुई। इसमें … Read more