यूनिटी मॉल से स्थानीय उत्पादों और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

यूनिटी मॉल परियोजना के लिए केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को दी 200 करोड़ रूपए की स्वीकृति राष्ट्रीय एकता को मिलेगी मजबूती और विभिन्न राज्यों के बीच बढ़ेगा आर्थिक एवं सांस्कृतिक आदानप्रदान – मुख्यमंत्री यूनिटी मॉल से स्थानीय उत्पादों और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा  रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा राज्य में ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) मॉडल को प्रोत्साहित करने एवं स्थानीय उत्पादों के विक्रय को बढ़ावा देने के लिए यूनिटी मॉल की स्थापना की जा रही है।  यूनिटी मॉल की स्थापना से स्थानीय हस्तशिल्पियों, बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन मिलेगा और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मॉल में उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय होने से हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य के छोटे उद्यमियों, शिल्पकारों एवं बुनकरों को लाभ मिलेगा। यह स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन एवं विक्रय के लिए ‘‘वन स्टॉप मार्केट प्लेस’’ के रूप में कार्य करेगा।     मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यूनिटी मॉल राज्य के गरीबों, युवाओं, अन्नदाताओं, और नारी शक्ति के विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगा। साथ ही यह मेक इन इंडिया और राष्ट्रीय एकता को भी प्रोत्साहित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश वासियों के विकास के साथ राष्ट्रीय एकीकरण एवं मेक इन इण्डिया जैसे महत्वपूर्ण विषयों को अपनी प्राथमिकता मानती है। राज्य में स्थापित किये जाने वाले यूनिटी मॉल में अन्य सभी राज्यों के महत्वपूर्ण स्थानीय उत्पादों का भी प्रदर्शन एवं विक्रय किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलेगी और विभिन्न राज्यों के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ेगा।            मुख्यमंत्री साय ने बताया कि हस्तशिल्पियों, बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय स्तर पर नवीन रोजगार सृजन करने स्वस्थ इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के इस रिफॉर्म के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केन्द्र सरकार द्वारा पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है। राज्य में यूनिटी मॉल की स्थापना के लिए केंद्र सरकार ने 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिसमें से 100 करोड़ रुपये राज्य को कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) के तहत अग्रिम रूप में प्रदान किए गए हैं।     वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि यूनिटी मॉल में स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों के साथ-साथ फूडकोर्ट्स में स्थानीय व्यंजनों को भी विक्रय के लिए उपलब्ध कराया जायेगा। यूनिटी मॉल के माध्यम से प्रत्येक जिले के विशेष उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की योजना है। यूनिटी मॉल की स्थापना का दायित्व रायपुर विकास प्राधिकरण को सौंपा गया है। यूनिटी मॉल से न केवल राज्य के स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास छत्तीसगढ़ में एक सशक्त और स्थायी इकोसिस्टम का निर्माण करेेगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और शहरी बाजारों तक उत्पादों की पहुंच में मददगार होगा। recent visitors 73

भोपाल में 3 से 6 जनवरी 2025 के बीच 4 दिवसीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा, मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का शुभारंभ करेंगे। रवीन्द्र भवन भोपाल में 3 से 6 जनवरी 2025 के बीच 4 दिवसीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना और उन्हें विज्ञान, नवाचार और तकनीकी क्षेत्र में योगदान करने के लिए प्रेरित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “यह आयोजन बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने और नवाचार के क्षेत्र में नई पीढ़ी को प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। मध्यप्रदेश को इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मेजबानी करते हुए गर्व हो रहा है।” राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में देश के 700 से अधिक विद्यार्थी, उनके शिक्षक और मेंटर भाग लेंगे। साथ ही बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, ओमान और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों के छात्र भी शामिल होंगे। इस वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय "स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को समझना" है। इस विषय को पांच उप-विषयों में विभाजित किया गया है, जिनमें पारिस्थितिकी तंत्र की समझ, पोषण व स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, आत्मनिर्भरता के लिए पारिस्थितिकी दृष्टिकोण, तकनीकी नवाचार और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय बाल विकास कांग्रेस एक राष्ट्रीय विज्ञान संचार कार्यक्रम है, जिसकी शुरूआत 1993 में हुई थी। यह भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद के द्वारा आयोजित किया जाता है। इसमें 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे भाग लेते है। वराह मिहिर वेधशाला का ऑटोमेशन का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव वराह मिहिर खगोलीय वेधशाला के ऑटोमेशन का उद्घाटन भी करेंगे। इससे विज्ञान और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को नई पहचान मिलेगी। ऑटोमेशन होने से आम नागरिक अब घर बैठे ही वेधशाला के टेलीस्कोप का उपयोग कर सकेंगे। मुख्य गतिविधियां राष्ट्रीय बाल विकास कांग्रेस में विभिन्न विषयों पर 20 से अधिक तकनीकी सत्र, कार्यशालाएं, प्रदर्शनी और विज्ञान आधारित खेलों का आयोजन होगा। इनमें चंद्रयान प्रदर्शनी, वॉटर रॉकेटरी, कागज से टोपी निर्माण, पर्यावरण साँप सीढ़ी का खेल, गणित सीढ़ी का खेल, जीव विज्ञान प्रदर्शनी, लीफ क्राफ्ट, पर्यावरण प्रदर्शनी, चीता प्रदर्शनी, लोक गीत द्वारा वैज्ञानिक जागरूकता, हाईड्रोपोनिक्स तकनीक रोबोटिक्स कार्यशाला, आकाशीय बिजली से बचाव पर प्रदर्शनी का आयोजन किया जायेगा। देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं छात्रों के मध्य फेस-टू-फेस संवाद भी होगा। प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जैसे सोलर मैन डॉ. चेतन सोलंकी (IIT मुंबई), डॉ. नंद कुमार (एम्स, दिल्ली) और डॉ. चैतन्य पूरी (आइसर पुणे) छात्रों के साथ संवाद करेंगे। स्थानीय विद्यार्थियों को भी मिलेगा मंच भोपाल के विद्यार्थियों को इस आयोजन में शामिल होने का विशेष अवसर दिया गया है। स्थानीय विद्यालयों और महाविद्यालयों से भी वैज्ञानिक प्रोजेक्ट आमंत्रित किए गए हैं। इससे विद्यार्थियों को देश-विदेश के प्रतिभागियों और वैज्ञानिकों से सीखने और संवाद करने का अवसर मिलेगा। भोपाल में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, शिक्षकों और वैज्ञानिक समुदाय के लिए विज्ञान के नए आयामों को समझने और साझा करने का मंच प्रदान करेगा।   recent visitors 62

अब छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि का भुगतान बालिका के खाते में सीधे UNIPAY के माध्यम से हो सकेगा

भोपाल महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि नव वर्ष से मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत पंजीकृत पात्र बालिकाओं को छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि का भुगतान UNIPAY के माध्यम से किया जायेगा। यह व्यवस्था लागू हो जाने से अब छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि का भुगतान बालिका के खाते में सीधे UNIPAY के माध्यम से हो सकेगा। भुगतान की सूचना भी मोबाईल में एसएमएस से बालिका को प्राप्त हो सकेगी। इस तरह भुगतान की प्रकिया अब और अधिक सटीक हो गयी है। मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना में बालिका को कक्षा 6, कक्षा 9, कक्षा 11 एवं कक्षा 12 में छात्रवृत्ति देने एवं स्नातक प्रथम एवं अंतिम वर्ष में प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रावधान है। अब तक लगभग 29 लाख से अधिक बालिकाओं को 813.64 करोड़ रूपये की छात्रवृत्ति स्वीकृत की जा चुकी है। पूर्व में यह राशि जिलों के द्वारा आहरित कर सम्बंधित बालिका के खाते में डिपोजिट की जाती थी, इसमें समय लगता था और बालिका को सूचना भी नहीं प्राप्त हो पाती थी। UNIPAY के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया प्रभावी और पारदर्शी हो गयी है। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि विभाग लाड़ली बहना योजना की हितग्राहियों को UNIPAY पेमेंट पोर्टल के माध्यम से सहायता राशि का हस्तांतरण करता है। इसके लिए प्रत्येक हितग्राही का बैंक खाता आधार लिंक एवं डीबीटी इनेबिल्ड होना चाहिए, इसके पोर्टल का संचालन एमपीएसईडीसी द्वारा किया जा रहा है। इसमें कोई मैन्युअल हस्तक्षेप नहीं है। एमपीएसईडीसी के पोर्टल पर पेमेंट आर्डर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी द्वारा जनरेट किया जाता है। पेमेंट आर्डर जनरेट होने के बाद एमपीएसईडीसी के UNIPAY पेमेंट पोर्टल से बैंकिंग पार्टनर को हितग्राही के आधार के रेफरेंस नंबर के साथ पेमेंट भेजा जाता है। इसके बाद बैंक यह पेमेंट आर्डर और NPCI को भेजता है NPCI इसे हितग्राही के पसम्बंधित बैंक को भेजता है।   recent visitors 67

इंदौर में जनवरी ने या फरवरी महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू हो जाएगी

इंदौर इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना के शुरू होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। मेट्रो चलाने के लिए अब मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की हरी झंडी का इंतजार है और सब कुछ ठीक रहा, तो शहर में इस महीने या अगले महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू कर सकती है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) ने तैयारी पूरी कर ली है। मेट्रो के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि एमपीएमआरसीएल द्वारा सीएमआरएस को जरूरी दस्तावेज जमा किए जाने का काम अंतिम दौर में है। उन्होंने इसके बाद सीएमआरएस का दल मेट्रो रेल के डिपो और स्टेशनों के निरीक्षण की तारीख तय करके सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेगा। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद सीएमआरएस की हरी झंडी मिलने की स्थिति में शहर में मेट्रो रेल का वाणिज्यिक परिचालन इस महीने या फरवरी से शुरू हो सकता है। मेट्रो अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में शहर के गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर के स्टेशन क्रमांक-तीन के बीच 5.90 किलोमीटर के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले गलियारे पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस गलियारे पर मेट्रो रेल प्रायोगिक परीक्षण (ट्रायल रन) सितंबर 2023 में किया गया था। बहरहाल, जानकारों का कहना है कि इस मार्ग पर छितराई आबादी के कारण मेट्रो रेल को शुरुआत में यात्रियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एमपीएमआरसीएल अधिकारी ने कहा कि शहर में एक बार मेट्रो रेल शुरू हो जाने और इसके मार्ग की लम्बाई बढ़ने के बाद यात्रियों की कोई कमी नहीं होगी। इस बारे में जानकारी देते हुए एक मेट्रो अधिकारी ने बताया कि शहर में मेट्रो रेल के स्टेशन इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि इनके जरिये छह डिब्बों की रेल चलाई जा सकती है। उन्होंने हालांकि बताया कि शुरुआत में हम तीन डिब्बों की रेल चलाएंगे। यात्रियों की तादाद बढ़ने पर इसमें तीन और डिब्बे जोड़े जा सकते हैं। अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मेट्रो रेल के एक डिब्बे में करीब 300 यात्री सफर कर सकते हैं जिनमें सीट पर बैठने वाले 50 लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर में 7,500.8 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण की नींव 14 सितंबर 2019 को रखी गई थी। इसके तहत शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लम्बा मेट्रो रेल गलियारा बनाया जाना है। recent visitors 48

मोहन सरकार का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, हर समस्या की होगी सुनवाई

भोपाल मोहन सरकार का मध्य प्रदेश में नए साल पर एक नया प्रयोग देखने को मिलने वाला है. जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के सीएम हाउस में 'जनता दरबार' की शुरुआत करेंगे. हालांकि मध्य प्रदेश की राजनीति में यह प्रयोग राजनीति में नया नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जनता दरबार लगा चुके हैं. जबकि दूसरे राज्यों के कई सीएम अभी भी जनता दरबार लगाते हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का नाम भी शामिल है. सीएम मोहन यादव जनता दरबार के जरिए आम लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे. बताया जा रहा है कि भोपाल में पहला जनता दरबार 6 जनवरी को लग सकता है, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां की जा रही हैं. हालांकि सीएम के इस प्रयोग की चर्चा सियासी गलियारों में शुरू हो गई है. सीएम मोहन सुनेंगे जनता की समस्याएं सूत्रों के हिसाब से सीएम मोहन यादव का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को हो सकता है, जो सुबह 10 से 12 बजे तक चलेगा. जहां सीएम हाउस पर पहुंचे लोगों से मुख्यमंत्री मिलेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान अधिकारियों के जरिए करेंगे. बताया जा रहा है कि इसके लिए सीएम के पास पहुंचने वाली शिकायतों की स्क्रूटनी होगी और उन्हीं के हिसाब से समस्याएं सुलझाई जाएगी. जनता दरबार में ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे मुद्दों की कोई सुनवाई नहीं होगी, यहां केवल बीमारी, जरूरतमंदों के आवेदनों पर ही सुनवाई होगी. जबकि ग्रामीण लोगों की समस्याओं को भी सुना जाएगा, माना जा रहा है कि एक बार के जनता दरबार में 500 से भी ज्यादा लोग आ सकते हैं. ऐसे में इसी हिसाब से व्यवस्थाएं की जाएगी. मध्यप्रदेश में मौजूदा समय में साप्ताहिक जनसुनवाई होती है, जहां जिला स्तर पर सभी जिला कलेक्टर और पुलिस कप्तान प्रत्येक मंगलवार को जनता की समस्याओं को सुनते हैं. इसके अलावा, सीधे जनता की समस्याओं को निपटाने के लिए सीएम हेल्पलाइन पोर्टल भी है. इस पर लोग अपनी शिकायतें और समस्याएं दर्ज करवाते हैं और उसके निराकरण के बाद पोर्टल पर ही शिकायत बंद भी करवा सकते हैं. हालांकि, सीएम हेल्पलाइन को लेकर बीच-बीच में शिकायतें आती रहती हैं. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अब खुद जनता से मिलकर यह देखना चाहते हैं कि सरकार की योजनाएं जनता तक पहुंच रही हैं या नहीं? जनता दरबार का आयोजन: कब और कैसे?     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पहला जनता दरबार 6 जनवरी को सीएम हाउस पर आयोजित होगा। यह दरबार सुबह 10 बजे से 12 बजे तक चलेगा, जिसमें लोग अपनी समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रख सकेंगे। इस कार्यक्रम में पहले से आई शिकायतों को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसमें मुख्य रूप से बीमार और जरूरतमंदों के आवेदन लिए जाएंगे। अनुमान है कि 500 से 600 लोग इस जनता दरबार में शामिल होंगे। सीएम हेल्पलाइन और अन्य समस्याओं के समाधान का तरीका मुख्यमंत्री ने इस पहल को लेकर दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, कि कई प्लेटफॉर्म्स होने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा था, जिससे लोग अफसरों और दफ्तरों के चक्कर काटते रहते थे। दूसरा, सीएम हेल्पलाइन जैसी योजनाओं में अक्सर शिकायतों को दबा दिया जाता था, जिससे समस्याओं का समाधान नहीं होता। पिछले नेताओं के जनता दरबार का इतिहास मध्यप्रदेश में जनता दरबार की परंपरा पहले भी रही है। उमा भारती और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने भी सीएम हाउस पर जनता दरबार लगाए थे। दिग्विजय सिंह के समय, मुख्यमंत्री हाउस में लोग सुबह 5 बजे से ही अपनी शिकायतें लेकर पहुंच जाते थे। उमा भारती के कार्यकाल में भी यह दरबार बहुत लोकप्रिय हुआ, हालांकि भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ था। शिवराज सिंह चौहान का तरीका और मोदी की सीख शिवराज सिंह चौहान ने भी अपनी सरकार के दौरान जनसुनवाई की व्यवस्था लागू की थी। उन्होंने जिला और प्रदेश स्तर पर जनसुनवाई की शुरुआत की और लोकसेवा गारंटी अधिनियम को लागू किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी तर्ज पर एक नया कदम उठाया है, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान सीधे सीएम हाउस में किया जा सके। योगी आदित्यनाथ से प्रेरणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में जनता दरबार की शुरुआत की थी, जिसे लखनऊ और गोरखपुर में आयोजित किया जाता है। वहां पर भी मुख्यमंत्री खुद लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं। इस तर्ज पर डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में भी जनता दरबार की शुरुआत की है। recent visitors 72

छत्तीसगढ़ में इस बार प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता, अध्यक्ष किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किए जाने की अटकलें

रायपुर  नए साल 2025 में बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलेगा। बीजेपी में संगठन चुनाव का दौर चल रहा है। माना जा रहा है कि जनवरी महीने में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की लिस्ट जारी हो जाएगी। उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष का नाम घोषित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में इस बार प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता है। बीजेपी में ऐसी चर्चा चल रही है। हालांकि इस संबंध में किसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी में बीजेपी छत्तीसगढ़ बीजेपी के नेताओं और पदाधिकारियों में यह चर्ता है कि नया प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से हो सकता है। क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री आदिवासी वर्ग से हैं और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव सामान्य वर्ग से आते हैं। विष्णुदेव साय की कैबिनेट में सभी वर्ग के नेताओं को शामिल किया गया है। बीजेपी अब राज्य की सियासत में ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी कर रही है। नए चेहरे को मिल सकती है जगह माना जा रहा है कि अब संगठन किसी ऐसे चेहरे को आगे करेगा जिसकी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ हो। चर्चा है कि इस बार प्रदेश अध्यक्ष रायपुर जिले से हो सकता है। अगर किरण सिंहदेव को कैबिनेट में शामिल किया जाता है तो उन नेताओं को मौका मिल सकता है जो कैबिनेट में शामिल होने की दौड़ में हैं। किस वर्ग से कौन से नेता हैं प्रबल दावेदार छत्तीसगढ़ बीजेपी सूत्रों के अनुसार, इस बार आदिवासी या फिर ओबीसी वर्ग के नेता को प्राथमिकता दी जाएगी। ओबीसी वर्ग का अध्यक्ष बनाकर बीजेपी भूपेश बघेल के सामने एक बड़ा चेहरा खड़ा कर सकती है। ऐसे में ओबीसी वर्ग से धरमलाल कौशिक, आदिवासी वर्ग से विक्रम उसेंडी औऱ सामान्य वर्ग से शिवरतन शर्मा का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। कैबिनेट विस्तार की अटकलें छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। विष्णुदेव साय की कैबिनेट में दो विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार और प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बीच बीजेपी ऐसे नेता को आगे बढ़ा सकती है जिसके नाम से किसी भी गुट को दिक्कत नहीं हो। दिल्ली में हुई थी बैठक हाल ही में सीएम विष्णुदेव साय दिल्ली के दौरे पर थे। सीएम विष्णुदेव साय ने दिल्ली दौरे में संगठन चुनाव को लेकर आयोजित बैठक में हिस्सा लिया था। इस बैठक नें प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी समेत पार्टी के सीनियर नेता मौजूद थे। कहा जा रहा है कि इसी बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट विस्तार को लेकर फॉर्म्युला बनाया गया है। recent visitors 69

मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के हितग्राहियों को बड़ी सौगात, 14 लाख का बीमा कराएगी सरकार

भोपाल  युवा अन्नदूत योजना के अनुबंधित परिवहनकर्ता हितग्राहियों को 3064 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर 14 लाख रुपये का बीमा कराया जाएगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि इस योजना के हितग्राहियों की असामयिक मृत्यु पर कोई सहायता नहीं प्राप्त होने से परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था। मंत्री राजपूत ने बताया कि हितग्राहियों के बीमा के लिए तीन बीमा योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इनमें से पहली सामूहिक बीमा योजना का क्रियान्वयन फरवरी-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 2608 रुपये और बीमित राशि 10 लाख रुपये है। वहीं, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का क्रियान्वयन जून-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये और बीमित राशि दो लाख रुपये है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का क्रियान्वयन जून-2025 से होगा। इसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये और बीमित राशि दो लाख रुपये है। कब मिलेगा बीमा का लाभ योजना में पालिसी जारी होने की दिनांक से हितग्राही की दुर्घटना में मृत्यु होने पर पूरी बीमा राशि मिलेगी। पालिसी जारी होने की दिनांक से 30 दिन के बाद हितग्राही की अन्य कारण से (दुर्घटना को छोड़कर) मृत्यु होने पर पूरी बीमा राशि दी जाएगी। अन्य कारणों से 30 दिन में मृत्यु होने पर हितग्राही द्वारा देय प्रीमियम राशि का 80 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। बीमा पालिसी जारी होने के एक वर्ष की अवधि में आत्महत्या करने पर जीवन बीमा की राशि देय नहीं होगी, मात्र देय प्रीमियम राशि का 80 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। हितग्राही की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होना चाहिए। जीवन बीमा एक वर्ष के लिए होगा, जिसका प्रतिवर्ष नवीनीकरण कराना होगा। हितग्राही की मृत्यु पर बीमा राशि परिवार को दी जाएगी। इन अधिकारियों को मिला उच्च पद का प्रभार मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की पहल पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में कार्यरत अधिकारियों को उच्च पद का प्रभार दिया गया है। विभाग के 65 कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों को वर्तमान पद स्थापना वाले जिले में ही उच्च पद का प्रभार देकर सहायक आपूर्ति अधिकारी का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, नौ नापतौल निरीक्षकों को प्रभारी सहायक नियंत्रक नापतौल, एक सहायक नियंत्रक नापतौल को प्रभारी उप नियंत्रक नापतौल, एक उप नियंत्रक नापतौल को प्रभारी संयुक्त नियंत्रक नापतौल, नौ सहायक आपूर्ति अधिकारी प्रभारी को प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी और आठ जिला आपूर्ति अधिकारी को प्रभारी जिला आपूर्ति नियंत्रक बनाया गया है। recent visitors 73