पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति – प्रधानमंत्री की उपस्थिति में दी गई मुखाग्नि

नई दिल्ली पूरे राजकीय सम्मान के साथ शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और रक्षा मंत्री सहित तमाम गणमान्य लोगों की उपस्थिति में निगम बोध घाट पर मुखग्नि दी गई। इससे पहले निवास से उनका पार्थिव शरीर कांग्रेस मुख्यालय लाया गया। यहां कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद निगम बोधी घाट के लिए अंतिम यात्रा रवाना हुई। कांग्रेस मुख्यालय में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा सहित पार्टी के सभी बड़े नेता मौजूद रहे। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी यहां डॉ. सिंह के अंतिम दर्शन किए और श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। गांधी परिवार भी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ। निगम बोध घाट पर पहले राष्ट्रपति के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अन्य लोगों ने श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। यहां कई गणमान्य नागरिक पहुंचे। इस दौरान रिंग रोड (महात्मा गांधी मार्ग), निशाद राज मार्ग, बुलेवार्ड रोड, एसपीएम मार्ग, लोथियन रोड और नेताजी सुभाष मार्ग सहित सड़कों पर सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक प्रतिबंध है। मनमोहन सिंह के स्मारक पर राजनीति इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री के स्मारक पर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर भी राजनीति कर रही है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी तरफ से डॉ. सिंह के लिए स्मारक बनाने का फैसला किया और इसकी जानकारी कांग्रेस नेतृत्व के साथ ही डॉ. सिंह के परिजन को भी दी। इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार को घेरा। सिद्धू ने कहा कि यदि अटल बिहारी वाजपेयी के साथ ऐसा होता तो भाजपा को कैसा लगता। गहलोत ने कहा कि स्मारक बनाने के बारे में सरकार को खुद ही सोचना था। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह साल 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री रहे थे। साल 1991 में मनमोहन सिंह की राजनीति में एंट्री हुई जब 21 जून को पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। उस समय देश एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था। पी.वी. नरसिंह राव के साथ मिलकर उन्होंने विदेशी निवेश का रास्ता साफ किया था। वित्त मंत्री रहते उन्होंने देश में आर्थिक उदारीकरण की नीतियों को लागू किया, जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला और भारत को विश्व बाजार से जोड़ा जा सका। वह 1991 में पहली बार असम से राज्यसभा के सांसद चुने गए। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कई सुधार किए, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर हुई। वह 1998 से 2004 तक विपक्ष के नेता भी रहे। हालांकि, साल 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली जीत के बाद उन्होंने 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने यूपीए-1 और 2 में प्रधानमंत्री का पद संभाला। मनमोहन सिंह ने पहली बार 22 मई 2004 और दूसरी बार 22 मई, 2009 को प्रधानमंत्री के पद की शपथ ली थी।   recent visitors 58

बेटे के निवास पर भी पड़ा छापा, छत्तीसगढ़-रायपुर में पूर्व मंत्री कवासी लखमा के घर पर ईडी की दबिश

रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पूर्ववर्ती भूपेश सरकार में आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा के धरमपुरा, रायपुर स्थित निवास पर छापा मारा है. ईडी की कार्रवाई के दौरान सीआरपीएफ के जवान घर को घेरे हुए हैं. ईडी की टीम सुबह से ही कांग्रेस नेताओं के घरों पर छापेमारी में जुटी है. इसके पहले सुकमा में कवासी लखमा के बेटे और जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी के साथ नगर पालिका अध्यक्ष राजू साहू के घरों पर ईडी की टीम ने दबिश दी थी. सूचना रायपुर पहुंचने से पहले ही कवासी लखमा के भी घर में ईडी की टीम ने दस्तक दे दी थी. बड़ी संख्या में सीआरपीएफ जवानों की तैनाती वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश कवासी पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के बेटे हैं। बताया जा रहा है कि शराब घोटाले में ईडी ने कुछ दिन पहले केस दर्ज किया था। शायद उसी मामले में कार्रवाई हो रही है। यह छापेमारी सुकमा और रायपुर में हो रही है। इस छापेमारी को डीएमएफ फंड स्कैम से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि ईडी इस मामले में लंबे समय से कार्रवाई कर रही है। आबकारी घोटाले में कई लोगों जेल में भी हैं। साथ ही बीतते समय के साथ जांच का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। ईडी की छापेमारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। कवासी लखमा छत्तीसगढ़ कांग्रेस के बड़े नेता हैं। वह हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। ED ने शराब घोटाले में दो पूर्व मंत्री पर भी कराई थी FIR छत्तीसगढ़ में शराब और कोयला घोटाले मामले में ED ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 100 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कराई थी। इनमें कांग्रेस सरकार में आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व विधायक यूडी मिंज, गुलाब कमरो, शिशुपाल का नाम शामिल हैं। वहीं 2161 करोड़ के शराब घोटाले के मामले में ED ने ट्रिपल A यानी IAS अफसर, अनवर ढेबर और अरुणपति त्रिपाठी को घोटाले का मास्टरमाइंड बताया था। जिसके बाद ACB इस मामले में अलग से कार्रवाई कर रही है। FIR में तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा का नाम भी FIR में शामिल है, जिन्हें हर महीने 50 लाख दिया जाता था। FIR में शामिल तथ्यों के आधार पर आपको बताते हैं कि किस तरह नया सिंडिकेट तैयार कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। तत्कालीन आबकारी मंत्री और आयुक्त को मिलते थे 50-50 लाख ये पूरा सिंडिकेट सरकार के इशारों पर ही चलता रहा। तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को भी इसकी जानकारी थी और कथित तौर पर कमीशन का बड़ा हिस्सा आबकारी मंत्री कवासी लखमा के पास भी जाता था। चार्जशीट के मुताबिक मंत्री रहे कवासी लखमा और तत्कालीन आबकारी आयुक्त निरंजन दास को 50-50 लाख हर महीने दिए जाते थे। शराब घोटाला मामले में FIR में दर्ज नाम     01. IAS, तत्कालीन संयुक्त सचिव (वाणिज्य एवं उद्योग विभाग छत्तीसगढ़ शासन)     02. अनवर ढेबर     03. अरुणपति त्रिपाठी (प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमीटेड)     04. मेसर्स रतनप्रिया मिडिया प्राईवेट लिमीटेड     05. कवासी लखमा (तत्कालीन आबकारी मंत्री)     06. निरंजनदास (आई.ए.एस. तत्कालीन आबकारी आयुक्त)     07. जनार्दन कौरव (तत्कालीन सहायक जिला आबकारी अधिकारी)     08. अनिमेष नेताम (तत्कालीन उपायुक्त आबकारी)     09. विजय सेन शर्मा (तत्कालीन उपायुक्त आबकारी)     10. अरविंद कुमार पटले (तत्कालीन सहायक आयुक्त आबकारी)     11. प्रमोद कुमार नेताम (तत्कालीन सहायक कमिशनर आबकारी)     12. रामकृष्ण मिश्रा (तत्कालीन सहायक आयुक्त आबकारी)     13. विकास कुमार गोस्वामी (तत्कालीन सहायक आयुक्त आबकारी)     14. इकबाल खान (तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी)     15. नीतिन खंडुजा (तत्कालीन सहायक जिला आबकारी अधिकारी)     16. नवीन प्रताप सिंग तोमर (तत्कालीन सहायक आयुक्त आबकारी)     17. मंजु कसेर (तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी)     18. सौरभ बख्शी (तत्कालीन सहायक आयुक्त)     19. दिनकर वासनिक (तत्कालीन सहायक आयुक्त आबकारी)     20. आशीष वास्तव (तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त आबकारी)     21. अशोक कुमार सिंह (तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी)     22. मोहित कुमार जायसवाल (जिला आबकारी अधिकारी)     23. नीतू नोतानी (उपायुक्त)     24. रविश तिवारी (तत्कालीन सहायक आयुक्त आबकारी)     25. गरीबपाल दर्दी (आबकारी अधिकारी)     26. नोहर सिंह ठाकुर (आबकारी अधिकारी)     27. सोनल नेताम (सहायक आयुक्त आबकारी विभाग)     28. अरविंद सिंह     29. अनुराग द्विवेदी (मेसर्स अनुराग ट्रेडर्स)     30. अमित सिंह (मेसर्स अदीप एग्रोटेक प्राईवेट लिमिटेड)     31. नवनीत गुप्ता     32. पिंकी सिंह (प्रोप्राईटर अदिप एम्पायर्स)     33 विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू     34. त्रिलोक सिंह, ढिल्लन (मेसर्स ढिल्लन सिटी मॉल प्राईवेट लिमीटेड)     35. यश टुटेजा (निवासी कटोरा तालाब रायपुर)     36. नितेश पुरोहित, गिरीराज होटल, रायपुर     37. यश पुरोहित, गिरीराज होटल, रायपुर     38. अभिषेक सिंह, डायरेक्टर मेसर्स नेक्सजेन पॉवर इंजीटेक प्राईवेट लिमीटेड     39. मनीष मिश्रा, मेसर्स नेक्सजेन पॉवर इंजीटेक प्राईवेट लिमीटेड     40. संजय कुमार मिश्रा, सी.ए. मेसर्स नेक्सजेन पॉवर इंजीटेक प्राईवेट लिमीटेड     41. अतुल कुमार सिंह श्री ओम साईं, बेवरेजेस प्राईवेट लिमीटेड     42. मुकेश मनचंदा, श्री ओम साई बेवरेजेस प्राईवेट लिमीटेड     43. विजय भाटिया, भिलाई     44. अशीष सौरभ केडिया, मेसर्स दिशिता वेंचर्स प्राईवेट लिमीटेड     45. मेसर्स छ.ग. डिस्टलरीस प्राईवेट लिमीटेड     46. मेसर्स भाटिया वाईन एवं मर्चेंटस प्राईवेट लिमीटेड     47. मेसर्स वेलकम डिस्टलरीस     48. सिद्धार्थ सिंघानिया, मेसर्स सुमीत फैसलिटीस लिमीटेड एवं टॉप सिक्योरिटीस फैसलिटीस मैनेजमेंट     49. बच्चा राज लोहिया मेसर्स इगल हंटर सॉल्युशन लिमीटेड एवं पार्टनर     50. मेसर्स अलर्ट कमाण्डों प्राईवेट लिमीटेड एवं पार्टनर     51. अमित मित्तल, मेसर्स ए टू जेड प्राईवेट लिमिटेड     52. उदयराव मेसर्स ए टू जेड प्राईवेट लिमीटेड का मैनेजर     53 मेसर्स प्राईम वन वर्क फोर्स     54. लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल निवासी भिलाई     55. विधु गुप्ता, प्रीज्म होलोग्राफी एवं सिक्योरिटीस प्राई लिमी.     56. दीपक दुआरी     57. दिपेन चावडा     58. मेसर्स प्राईम डेव्हलपर्स     59. मेसर्स ए ढेबर बिल्डकॉन     60. मेसर्स ए. जे. एस. एग्रोट्रेड प्राईवेट लिमीटेड     61. सफायर इस्पात के मालिक श्री उमेर ढेबर एवं श्री जुनैद ढेबर     62. अख्तर ढेबर     64. अशोक सिंह     65. सुमीत मलो     66. रवि बजाज     67. विवेक ढांढ, निवासी जी. ई. रोड रायपुर     68. अज्ञात कांग्रेस के पदाधिकारीगण     69. अन्य आबकारी … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- ई-मंडी योजना एक जनवरी से प्रदेश की बी-क्लास की 41 मंडियों में विस्तारित की जा रही है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ई-मंडी योजना एक जनवरी 2025 से प्रदेश की बी-क्लास की 41 मंडियों में विस्तारित की जा रही है। मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) अपनी महत्वपूर्ण ई-मंडी योजना का विस्तार कर रहा है। पूर्व से ई-मंडी योजना 42 मंडियों में क्रियाशील है। मंडियों को सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिये प्रदेश में निरंतर कार्य किया जा रहा है। ई-मंडी योजना से किसान मंडियों में अपनी उपज के विक्रय के लिये स्वयं अपनी पर्ची बना सकेंगे। मंडी ऐप से किसानों को सुविधा होगी। उन्हें उपज विक्रय के लिये या प्रवेश पर्ची के लिये लाईन में नहीं लगना होगा। ई-मंडी योजना के तहत मंडी प्रांगण में प्रवेश से लेकर नीलामी, तौल तथा भुगतान तक की कार्यवाही कंप्यूटराइज्ड रहेगी। मंडियों को हाईटेक बनाया जा रहा है। लक्ष्य रखा गया है कि 01 अप्रैल 2025 से सभी 259 मंडियां ई-मंडी के रूप में कार्य करें। मोबाइल ऐप से प्रक्रिया होगी सरल मंडी ऐप के द्वारा किसान भाइयों के लिये प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। किसानों को यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है कि वह मंडी आने से पहले मंडी में अपनी प्रवेश पर्ची स्वयं अपने मोबाइल से बना सकते हैं। एक बार प्रवेश पर्ची बन जाने पर बार-बार उन्हें अपना संपूर्ण डाटा मंडी में देने की आवश्यकता नहीं रहेगी। प्रवेश पर्ची बन जाने से किसान सीधे मंडी प्रांगण के नीलामी स्थलों पर जाकर अपनी कृषि उपज की नीलामी करा सकते हैं। नीलामी की कार्यवाही भी मिलेगी मोबाइल पर नीलामी की कार्यवाही की जानकारी किसानों को मोबाइल पर भी प्राप्त होगी। तुलावटी भाईयों को ई-मंडी योजना का प्रशिक्षण दिया गया है। वे एंड्रॉयड मोबाइल पर की गई तौल का फाइनल वजन दर्ज करेंगे और उन्हें कोई भी जानकारी लिखने की आवश्यकता नहीं रहेगी। साथ ही व्यापारी साथियों को भी भुगतान पत्रक बनाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। ई-मंडी योजना में व्यापारी की आईडी पर रेडीमेड भुगतान पत्रक प्रदर्शित होगा। व्यापारी को उनके द्वारा किसानों को किये जा रहे भुगतान की सिर्फ एंट्री ही करनी होगी। रियल टाइम होगा उपज रिकार्ड का संधारण ई-मंडी योजना से किसानों द्वारा मंडी में विक्रय की जा रही कृषि उपज का रिकार्ड संधारण रियल टाइम ऑनलाइन होगा। इससे मंडियों में भीड़-भाड़ भी नहीं होगी और असुविधा भी नहीं होगी। किसान भाइयों को प्रवेश, अनुबंध, तौल तथा भुगतान करने के बाद उनके मोबाइल पर एसएमएस तथा व्हाट्सएप मैसेज प्राप्त होगा। किसानों को यह जानकारी रहेगी कि उनकी उपज किस व्यापारी द्वारा कितने दाम पर खरीदी गई है।   recent visitors 73

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रदेश में सोयाबीन फसल उत्पादन में बीते वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सोयाबीन फसल उत्पादन में बीते वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार सोयाबीन का उपार्जन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि सोयाबीन के अलावा किसानों को दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जायेगा। इसके लिए किसानों के साथ चर्चा कर योजना बनाई जाएगी। उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में अधिक लाभ है, इसलिए किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर प्रवृत्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास में सोयाबीन उपार्जन की समीक्षा बैठक में यह बात कही। सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव एवं कृ‍षि उत्पादन आयुक्त श्री मोहम्मद सुलेमान, अपर मुख्य सचिव सहकारिता श्री अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी, सचिव किसान-कल्याण तथा कृषि विकास श्री एम. सेलवेन्द्रन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उपार्जन के बाद भुगतान भी जल्द से जल्द हो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी सोयाबीन उत्पादक किसानों से उपार्जन कर उन्हें जल्द से जल्द भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए। उपार्जन में किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई या बारदाने की समस्या न आने पाए। उपार्जित सोयाबीन का उठाव और भंडारण विधिवत तरीके से हो और उपज को ओला-पाला एवं बारिश से बचाया जाये। 31 दिसम्बर तक होगा सोयाबीन उपार्जन बैठक में सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने जानकारी दी कि प्रदेश में सोयाबीन उपार्जन 25 अक्टूबर से किया जा रहा है, जो 31 दिसम्बर तक चलेगा। गत 26 दिसम्बर तक 2 लाख 4 हजार किसान अपना सोयाबीन बेच चुके हैं। इन किसानों से 5 लाख 89 हजार मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जित किया गया है। आगामी 31 दिसम्बर तक करीब साढ़े 6 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जन का अनुमान है। प्रदेश में भोपाल संभाग में सर्वाधिक 180198.04 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जित किया गया है। उज्जैन संभाग में 149974.54 लाख मीट्रिक टन, सागर संभाग में 93495.33 लाख मीट्रिक टन एवं नर्मदापुरम संभाग में 93287.44 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन उपार्जित किया गया है। सोयाबीन का समर्थन मूल्य 4 हजार 892 रूपए प्रति क्विंटल है। किसानों को 1957.1 करोड़ रूपए उपार्जन राशि का भुगतान अब तक किया जा चुका है।   recent visitors 65

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार रात भोपाल के रैन बसेरों का निरीक्षण किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देर रात भोपाल के रैन बसेरों में पहुँचकर जरूरतमंदों और महिलाओं को वितरित किए कंबल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर को सभी रैन बसेरों में राम-रोटी प्रारंभ करने के दिए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार रात भोपाल के रैन बसेरों का निरीक्षण किया भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार रात भोपाल के रैन बसेरों का निरीक्षण किया। उन्होंने रैन बसेरों में राहगीरों, गरीबों, निराश्रितों से चर्चा की, उनके हालचाल जाने और सभी को कंबल वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क स्थित रैन बसेरा पहुंचे। उन्होंने रैन बसेरे में मौजूद कुरवाई के करोड़ीलाल प्रजापति, हशीब खान, संजु कुशवाहा, रवि शर्मा और पथरिया दमोह के दिव्यांग प्रताप मालवीय से चर्चा कर उनके हालचाल जाने और रैन बसेरे की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। राहगीरों ने बताया कि यहां की सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं। भोजन की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री ने कलेक्टर भोपाल को निर्देशित किया कि सभी रैन बसेरों में राम-रोटी की व्यवस्था करें। दिव्यांग प्रताप मालवीय ने बताया कि वह हर एक-दो दिन में आ जाते हैं, उनकी चार बेटियां हैं, गुजारे की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए वे यहां आकर रहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर को प्रताप की हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने सभी को कंबल प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसके बाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 के पास स्थित रैन बसेरा पहुंचे। रैन बसेरे का निरीक्षण कर उन्होंने वहां मौजूद सभी राहगीरों और गरीब व्यक्तियों से चर्चा कर उन्हें भी कंबल वितरित किए। मुख्यमंत्री ने यहां विशाल मालवीय, शंकर मालवीय, ओमराज, आशीष तिवारी, दिव्यांग विजय आईना (गुनावा) सभी से चर्चा कर उनके यहां आकर रूकने की वजह पूछी। बताया गया कि सब आगे के सफर के लिए यहां रूके हैं। महिलाओं से चर्चा की, उन्हें भी कंबल दिए रैन बसेरे का निरीक्षण कर लौटते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्लेटफार्म नंबर 6 के सामने ही कुछ महिलाओं को बैठे देखा। उन्होंने वाहन रूकवाकर महिलाओं के पास जाकर चर्चा की और वहां बैठने की वजह पूछी। महिलाओं ने बताया कि वे सब्जी बेचने आती हैं। रात कहां बिताओगी, मुख्यमंत्री ने पूछा तो महिलाओं ने बताया कि यहीं पर। खुले आसमान के नीचे रात बिताने की बात जानकार मुख्यमंत्री सभी महिलाओं को कंबल वितरित किए और कलेक्टर से कहा कि इन सभी के लिए भी व्यवस्थाएं की जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब और महिलाओं के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। किसी भी गरीब को सरकार की योजनाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। सर्दी के इस मौसम में कंबल वितरण से जरूरतमंदों को बड़ी राहत मिली। मुख्यमंत्री ने राहगीरों से संवाद किया और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के वंचित वर्गों के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है। किसी भी व्यक्ति को बेसहारा नहीं रहने देंगे। गरीब कल्याण मिशन के तहत समाज के कमजोर तबकों को समर्थ बनाने के लिए हम हर कदम उठायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है। ठंड के इस मौसम में किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े, यही हमारी प्राथमिकता है। राहगीरों और गरीबों ने मुख्यमंत्री की इस संवेदनशीलता की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सभी जरुरतमंदों को कंबल एवं गर्म कपड़े देकर सर्दी से जितना हो सके, बचने की अपील की। इस दौरान कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, नगर निगम कमिश्नर हरेन्द्र नारायण सहित सुमित पचौरी, जन-प्रतिनिधि एवं अधिकारी भी उपस्थित रहे।   recent visitors 52

स्मार्ट सिटी योजना से नागरिकों की जीवनशैली में सुधार के कार्य प्रमुख रूप से किये जा रहे

भोपाल स्मार्ट सिटी योजना के माध्यम से शहरों का समुचित विकास, आर्थिक सुधार और नागरिकों की जीवनशैली में सुधार के कार्य प्रमुख रूप से किये जा रहे हैं। योजना में पिछले एक वर्ष में सातों स्मार्ट सिटी शहरों में 1253 करोड़ 65 लाख रूपये की 21 कार्य पूरे किये जा चुके हैं। वर्तमान में 828 करोड़ के 43 कार्य प्रगति में है। प्रदेश के 7 शहरों में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना शहर शामिल है। सीआईटीआईआईएस में 2 शहरों का चयन स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा 'द सिटी इन्वेस्टमेंटस् टू इनोवेट इंटीग्रेट एण्ड सस्टेन' (सीआईटीआईआईएस 2.0) प्रोग्राम के कम्पोनेन्ट-1 अंतर्गत राज्य के 2 स्मार्ट सिटी शहर उज्जैन एवं जबलपुर का चयन किया गया है। योजना के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित कार्यों के लिये चयनित प्रत्येक शहर को 135 करोड़ रूपये के मान से अनुदान राशि प्राप्त होगी। चैंलेज कंपोनेंट-2 के अंतर्गत नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर केन्द्र सरकार को स्वीकृति के लिये भेजा है। जबलपुर-इंदौर स्मार्ट सिटी को सम्मान केन्द्र सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा नर्चरिंग नेबरहुड 1.0 के अंतर्गत किये गये कार्यों के लिये जबलपुर और इंदौर स्मार्ट सिटी को सम्मानित किया जा चुका है। जबलपुर स्मार्ट सिटी द्वारा आंगनवाड़ी, पार्कों का‍विकास कार्य और सिविल अस्पतालों में बच्चों के लिये वैक्सीनेशन सेंटर का निर्माण प्रमुख रूप से किया गया है। इंदौर स्मार्ट सिटी द्वारा सार्वजनिक स्थलों और ज्यादातर बस्तियों में विकास कार्य किये गये हैं। इंदौर स्मार्ट सिटी में जिज्ञासारत उमंग वाटिका और कर्मरथ आदि विकास कार्य प्रगति पर हैं। जबलपुर और पीथमपुर के प्रस्ताव केन्द्र सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुसार इन्क्यूबेशन ऑफ न्यू सिटीज चैलेंज के अंतर्गत जबलपुर टैक्सटाइल एण्ड लॉजिस्टिक क्लस्टर एवं पीथमपुर स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप सेक्टर-7 के प्रस्ताव तैयार कर नई दिल्ली भेजे गये हैं। चयनित शहर को व्हीजीएफ के रूप में एक हजार करोड़ रूपये की राशि प्राप्त होगी। उज्जैन शहर में यूनिटी मॉल केन्द्र सरकार की स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेटस् अंडर पार्ट-VI के अंतर्गत 'एक जिला-एक उत्पाद' के प्रचार-प्रसार और विक्रय के लिये उज्जैन शहर में 284 करोड़ रूपये लागत से यूनिट मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को प्रथम किश्त के रूप में 142 करोड़ रूपये की राशि जारी की गई है। योजना से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन के साथ जिलों में छोटे-मझोले व्यापारियों को अपने उत्पादों के विक्रय के लिये उपर्युक्त स्थान प्राप्त होगा। यह कार्य अगस्त 2025 तक पूरा किये जाने का लक्ष्य तय किया गया है।   recent visitors 61

महाकुंभ में मकर संक्रांति से महाशिवरात्रि तक मेले में एक विशेष लंगर सेवा का आयोजन किया जाएगा

 महाकुंभ नगर मकर संक्रांति से लेकर महाशिवरात्रि तक आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले में एक विशेष लंगर सेवा का आयोजन किया जाएगा। यह सेवा विश्व हिंदू परिषद (VHP) के विदर्भ प्रांत की ओर से संचालित की जाएगी, जो श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए भोजन उपलब्ध कराएगी। विश्व हिंदू परिषद द्वारा साधु-संतों के लिए निवास की व्यवस्था की जाएगी और वहीं पर यह लंगर सेवा चलाई जाएगी। लंगर सेवा की टाइमिंग? इस सेवा का मुख्य उद्देश्य महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं को बिन मांगे भोजन देना और उनके धार्मिक कर्तव्यों में सहयोग करना है। महाकुंभ मेला 13 जनवरी से 27 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान रोजाना सुबह 10:00 बजे से रात 10:00 बजे तक यह लंगर सेवा चलती रहेगी। यह सेवा विश्व हिंदू परिषद के सेवा विभाग, धर्माचार्य संपर्क विभाग और मंदिर अर्चक पुरोहित आयाम विदर्भ प्रांत की ओर से संचालित की जाएगी। 15,000 श्रद्धालुओं के लिए इंतजाम इस सेवा का लाभ प्रतिदिन करीब 15,000 श्रद्धालु उठाएंगे। कुंभ मेले में आने वाले साधु-संतों को विशेष सम्मान के साथ चौरंग और पाटे पर बैठाकर भोजन कराया जाएगा। यह सेवा उन लाखों श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है जो हर साल इस महाकुंभ में भाग लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं। अयोध्या की तर्ज पर प्रयागराज में इससे पहले 2023 में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान भी विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत ने एक महीने तक लंगर सेवा का आयोजन किया था, जिसमें लगभग 20 लाख श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराया गया था। प्रयागराज में यह सेवा उसी तर्ज पर चलाए जाने की योजना है। भोजन सामग्री दान करने की अपील महाकुंभ मेला हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र आयोजन है, जो हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है। इस मेले में करोड़ों श्रद्धालु अपने पुण्य लाभ के लिए डुबकी लगाते हैं। महाकुंभ मेले में इस बार लगभग 35 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। विश्व हिंदू परिषद ने महाकुंभ के आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं से आह्वान किया है कि वे इस पुण्य अवसर पर अनाज और अन्य भोजन सामग्री दान करें। recent visitors 66