BJP के प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी? इस बात की चर्चा भोपाल से लेकर दिल्ली तक

भोपाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसकी ताजपोशी होगी? इस बात की चर्चा भोपाल से लेकर दिल्ली तक चल रही है. 15 जनवरी तक बीजेपी की मध्य प्रदेश इकाई को नया अध्यक्ष मिल जाएगा, लेकिन किसके नाम का ऐलान होगा? इसे लेकर हर कोई अलग-अलग नाम पर चर्चा कर रहा है. मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के जिला और शहर अध्यक्ष पद को लेकर नेताओं के बीच रायशुमारी चल रही है. सभी जिला और शहर अध्यक्षों की घोषणा के बाद प्रदेश अध्यक्ष का चयन होगा. प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में इस बार कई नेताओं के नाम शामिल हैं. मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारने वाले कई नेता प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हैं. इसके अलावा प्रदेश पदाधिकारी के लिए भी कई नामों का जिक्र हो रहा है. हालांकि, अभी आलाकमान का पूरा फोकस शहर और जिला अध्यक्ष पर किया है. शहर, जिला अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधि मिलकर प्रदेश अध्यक्ष का चयन करेंगे. प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा को 4 साल का कार्यकाल मिला है. लोकसभा चुनाव की वजह से पिछले साल होने वाले चुनाव को इस बार संपन्न कराया जा रहा है. प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया के मुताबिक, 15 जनवरी तक नए अध्यक्ष का नाम सामने आ जाएगा. उन्होंने बताया कि अभी शहर और जिला अध्यक्ष को लेकर विचार-विमर्श चल रही है. सांसद ही बनते आ रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष, इस बार क्या होगा? अगर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के पद की बात की जाए तो लंबे समय से यह देखने में आ रहा है कि सांसदों को ही ये जिम्मेदारी दी जा रही है. इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण जटिया, नंदू चौहान, राकेश सिंह, विष्णु दत्त शर्मा जैसे कई नाम शामिल हैं. इस बार भी यह कोशिश की जा रही है कि किसी सांसद को ही प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान मिले. वर्तमान अध्यक्ष भी दौड़ में शामिल वरिष्ठ पत्रकार सुनील जैन के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा भी दोबारा कार्यकाल की दौड़ में शामिल नजर आ रहे हैं. उनके कार्यकाल में ही बीजेपी की दो बार सरकार बन चुकी है. जब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, उस समय मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. इसके बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद बीजेपी की सरकार बन गई. इसके पश्चात विधानसभा चुनाव 2023 में भी विष्णु दत्त शर्मा का ही कार्यकाल था, जब बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की. recent visitors 70

UPSRTC की महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिए बड़ी तैयारी, AC बसों से लेकर किए गए ये खास इंतजाम

प्रयागराज उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर ने गुरुवार को झुंसी रोडवेज वर्कशॉप में बैठक की। इस बैठक में महाकुम्भ के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए जा रहे इंतजामों की समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक ने झुंसी के कटका में बने अस्थायी बस स्टैंड स्टैंड का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने बताया कि महाकुम्भ जो विश्व स्तर का आयोजन है इसकी तैयारी छह महीने से चल रही है। महाकुम्भ के दौरान करीब 7000 बसें चलाई जाएंगी जिनमें से 550 शटल बसें श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह निशुल्क होंगी। एमडी ने बताया कि बसों में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन लगाए गए हैं। महाकुम्भ के आयोजन में दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, और बिहार सहित आठ राज्यों का सहयोग लिया जाएगा। साथ ही शटल बसों पर कुम्भ मेले की ब्रांडिंग भी की गई है। बैठक में राज्य परिवहन निगम के अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के सदस्य भी उपस्थित रहे। प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू हो रहे महाकुंभ की तैयारियां अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. इस बार कुंभ में 40 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया है. ऐसे में यूपी रोडवेज की ओर से भी तैयारी की गई है. महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में लगभग 5000-6000 बसों को लगाया गया है. यहीं नहीं 550 इलेक्ट्रिक बसें भी चलाईं जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं को आवाजाही में परेशानी न हो. भूले-भटके काउंटर होंगे स्मार्ट महाकुम्भ नगर, प्रमुख संवाददाता। महाकुम्भ में इस बार संस्थाओं के भूले- भटके शिविरों की व्यवस्था भी स्मार्ट होगी। अपनों का साथ छूटने के बाद दोनों गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से संचालित शिविरों में पहुंचने वालों का कंप्यूटर में डेटाबेस तैयार होगा। दोनों गैर सरकारी संस्थाओं ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। भारत सेवा दल की ओर से संचालित भूले-भटके शिविर में डेटाबेस तैयार करने के साथ अपनों से बिछड़ने वालों की फोटो और ब्योरा संस्था की सोशल साइट पर अपलोड किया जाएगा। संस्था के प्रतिनिधि मेला क्षेत्र 25 सेक्टरों में तैनात होंगे। ये प्रतिनिधि थानों और दुकानों से सूचनाएं लेकर मुख्यालय केंद्र भेजेंगे। भूले भटके शिविर के संचालक उमेशचंद्र तिवारी ने बताया कि इस साल व्यवस्था में काफी सुधार देखने को मिलेगा। महिला और बच्चों के लिए संचालित होने वाले हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति शिविर में पहुंचने वाली महिला और बच्चों का लेखा भी कम्प्यूटर में दर्ज होगा। संचालक शेखर बहुगुणा ने बताया कि शिविर लगाने की तैयारी हो रही है। recent visitors 57

सर्द हवाओं और तापमान में भारी गिरावट, कुछ हिस्सों में ओले पड़ने और तेज हवाओं के साथ बारिश

नई दिल्ली इस साल सर्दियों का मौसम अपने शबाब पर है। एक तरफ बर्फीले थपेड़े और घना कोहरा आम जिंदगी को ठहरने पर मजबूर कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ बारिश की बूंदों ने कई हिस्सों में मौसम को तरोताजा बना दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 28 दिसंबर 2024 से 8 जनवरी 2025 तक के लिए विस्तारित मौसम का हाल पेश किया है, जिसमें सर्दी, बारिश और कोहरे से जुड़ी अहम जानकारियां शामिल हैं। उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का कहर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सर्दी का प्रकोप जारी है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में शीतलहर की गंभीर चेतावनी दी गई है। राजस्थान के चुरु में इस सीजन का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया। घने कोहरे ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में आम जनजीवन को प्रभावित किया है। 28 -31 दिसंबर के बीच कोहरा और ज्यादा घना होने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक पश्चिमी हिमालय और आसपास के इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के चलते 27-28 दिसंबर को बारिश और बर्फबारी की संभावना है। इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओले पड़ने और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान तापमान में गिरावट भी दर्ज की जाएगी। सर्द हवाओं और तापमान में बदलाव की संभावना उत्तर और पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान अगले दो दिनों में 2 डिग्री तक गिर सकता है। मध्य भारत और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर रहने की उम्मीद है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में शीतलहर और बर्फबारी का सिलसिला जारी रहेगा। दक्षिण भारत में बारिश का जोर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में पिछले हफ्ते भारी बारिश ने मौसम को बदल दिया। यह निम्न दबाव क्षेत्र के कारण इन इलाकों में गरज के साथ बारिश हुई। अगले कुछ दिनों में तमिलनाडु, पुदुचेरी और आंध्र प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। दक्षिण भारत में इस बार मानसून के बाद की बारिश सामान्य से 15% ज्यादा रही है। recent visitors 71

GG flyover की 1 से 5 जनवरी के बीच ब्रिज की जाएगी ओपनिंग

भोपाल जीजी फ्लाइओवर पीडब्ल्यूडी की अंदरूनी खींचतान में उलझकर जीजी फ्लाइओवर को शुरू करने का काम फिलहाल टल गया है। दूसरी और इसके नीचे की सड़क को बनाने के लिए मेट्रो तैयार है इन पीडब्ल्यूडी। दोनों के निर्माण के दौरान ये सड़क खराब हुई, लेकिन दोनों ही एजेंसी अपने अपने कॉरिडोर के नीचे की ड़क दुरुस्त कर रहे हैं। करीब दस से पंद्रह फीट का हिस्सा बेहाल लावारिस छोड़ दिया। स्थिति ये कि भोपाल पुलिस ने सड़क निर्माण के लिए एक दिन ट्रैफिक बंद करने का कहा, लेकिन सवाल फिर कि इसे कौन बनाएगा? इसमें ही उलझ गया। यह भोपाल का सबसे लंबा ब्रिज है। इसकी लंबाई 2734 मीटर यानी, करीब पौने 3 किमी है। इसका काम दिसंबर 2020 में शुरू हुआ था। जिसे 2 साल में बन जाना था, लेकिन इसे बनने में 4 साल लगे। आखिरकार अब इसका काम आखिरी दौर में है। पहले 26 दिसंबर को ब्रिज की ओपनिंग करने की बात सामने आई थी, लेकिन थर्ड आर्म नहीं बनने की वजह से ट्रैफिक शुरू नहीं हो सका। वहीं, मंत्री गुजरात दौरे पर चले गए। ऐसे में अब उम्मीद है कि 1 से 5 जनवरी के बीच ब्रिज की ओपनिंग हो जाएगी। लाइट की टेस्टिंग शुरू गणेश मंदिर से वल्लभ भवन चौराहा के बीच दो आर्म्स के बीच कुल 230 पोल पर लाइटें लगाई गई हैं। जिसकी टेस्टिंग की जा रही है। करीब 15 मीटर चौड़े इस ब्रिज की थर्ड आर्म पर भी लाइट लगाई जाएगी। ताकि, यह हिस्सा भी रोशन हो सके। यदि लाइटिंग और सर्विस रोड समय पर बन जाती है तो थर्ड आर्म पर भी ट्रैफिक शुरू हो सकता है। वरना, गणेश मंदिर से वल्लभ भवन चौराहा तक ही ट्रैफिक शुरू होगा। लोड टेस्ट पूरा पीडब्ल्यूडी के अफसरों के मुताबिक, गणेश मंदिर से वल्लभ भवन चौराहा की ओर आने वाली पहली और दूसरी आर्म का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। इस रूट पर लोड टेस्ट भी हो चुका है। फिर भी ट्रैफिक का संचालन शुरू होने पर लोगों को कोई परेशानी न आए, इसलिए यहां कुछ उपाय किए जा रहे हैं। ऐसा मैनिट के एक्सपर्ट्स से मिली सलाह के बाद पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने ये बदलाव करने का फैसला लिया है। ऐसे समझें स्थिति • मेट्रो रेल कारपोरेशन का स्टेशन यहां है। इसके नीचे की रोड भी खराब है, लेकिन इसे मेट्रो कारपोरेशन बनाने को तैयार है। इसके साथ ही पास अंडरग्राउंड ड्रेन बनाएंगे। ये स्टेशन की लंबाई के बराबर ही होगी, उसके बाद काम नहीं होगा। इसमें उलझन है। • पीडब्ल्यूडी ब्रिज के नीचे की सड़क ठीक है। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की ओर वाला करीब 200 मीटर का हिस्सा बैरिकेडिंग से ढंका है, इसे बनाना है, लेकिन बनाया नहीं गया। यहां भी मेट्रो का एफओबी बन रहा है, इसलिए पीडब्ल्यूडी ने मेट्रो से ही इसे ठीक करने कहा। इतना ही नहीं, स्टेशन से लगे जिस हिस्से पर मेट्रो ड्रेन बनाएगा, उसके दोनों किनारों पर करीब 150-150 मीटर लंबाई में रोड पर डामर का काम पीडब्लयूडी ने मेट्रो से करने का कहा है। मामले अभी उलझन में है। इस तरह ट्रैफिक प्रभावित जिंसी, पुराना भोपाल, जहांगीराबाद, प्लेटफार्म नंबर छह से सुभाष ब्रिज, पुल बोगदा और आगे तक का ट्रैफिक एमपी नगर, साकेत नगर, नर्मदापुरम रोड तक आवाजाही करता है। बोर्ड ऑफिस के पास मेट्रो स्टेशन व रोड का हिस्सा मेट्रो क्यों नहीं बना रहे इस मामले में मेट्रो कारपोरेशन के अफसर स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है। recent visitors 71

अब दिल्ली में भी होगी मोदी सरकार की स्कीम लागू, हाई कोर्ट ने दिया आदेश, 12 दिन का दिया वक्त

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएम-आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) स्कीम को राजधानी में लागू करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच 5 जनवरी 2025 तक एमओयू साइन करने को कहा है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने कहा कि योजना को पूरी तरह लागू करना होगा ताकि दिल्ली के लोग इस स्कीम के तहत मिलने वाले फंड और सुविधाओं से वंचित ना रहें। 24 दिसंबर के आदेश में कोर्ट ने कहा कि यदि इस बीच दिल्ली में आचार संहिता लागू हो जाए तो भी एमओयू साइन करना ही होगा, क्योंकि यह दिल्ली के नागरिकों के फायदे के लिए है। कोर्ट ने कहा कि जब 33 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसे पहले ही लागू कर चुके हैं तो ऐसा दिल्ली में ना करना उचित नहीं है। कोर्ट ने 12 दिन की मोहलत देते हुए 5 जनवरी तक एमओयू साइन करने को कहा। अगली सुनवाई के दिन इस एमओयू को पेश करने को कहा गया है। कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में आईसीयू बेड्स और वेंटिलेटर्स की सुविधा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। फरवरी में डॉ. एसके सरीन कमिटी का गठन किया गया था जिसे दिल्ली सरकार और एमसीडी समेत अन्य अस्पतालों में मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए सलाह देनी थी। बेंच ने इससे पहले दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि राजधानी में सभी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोले जाएं। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हाई कोर्ट का आभार जताते हुए कहा कि PM-ABHIM योजना की घोषणा फरवरी 2021 में की गई थी और उसी साल अक्टूबर में लॉन्च किया गया था। इस योजना के तहत मोदी सरकार हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए पैसा देती है। दिल्ली के लिए मोदी सरकार ने 2406.77 करोड़ रुपए आवंटित करके रखा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत दिल्ली में 1139 अर्बन हेल्थ और वेलनेस सेंटर बनने थे। 11 डिस्ट्रिक्ट इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब बनने थे, 9 क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स बनने थे जिनमें 950 बेड होते। 400 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स बनने थे हर जिला अस्पताल में। 50 बेड वाले 5 ब्लॉक्स बनने थे हर सरकारी जिला अस्पताल में। सांसद ने कहा, ‘कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि एमओयू बना रखा है, 2400 करोड़ रुपया मोदी सरकार ने दिल्ली सरकार के लिए रखा है। लेकिन द्वेष की राजनीति के कारण केजरीवाल सरकार ने ना तो एमओयू साइन किया, ना पैसा लिया, ना हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया। दिल्ली के विकास में अवरोध डाला।’ recent visitors 71

मनमोहन सिंह: आर्थिक सुधारों के जनक और एक दृढ़ राजनेता

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन को राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति बताया है। उन्होंने सिंह की प्रशंसा करते हुए शुक्रवार को कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद वह देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे। मोदी ने एक प्रतिष्ठित सांसद के रूप में उनकी सराहना करते हुए कहा कि सिंह का जीवन उनकी ईमानदारी और सादगी का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने सुधारों के प्रति सिंह की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि देश के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंह का जीवन भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमेशा एक सीख के रूप में काम करेगा कि कैसे कोई व्यक्ति अभावों और संघर्षों से ऊपर उठकर सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। पूर्व वित्त मंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा, शनिवार को होगी अंत्येष्टि  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई प्रमुख नेताओं तथा अन्य हस्तियों ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की। तिरंगे में लिपटे पूर्व प्रधानमंत्री के पार्थिव शरीर को उनके आवास पर फूलों से सजे ताबूत में रखा गया, जहां दलगत भावना से ऊपर उठकर नेताओं ने दिवंगत नेता को अंतिम श्रद्धांजलि दी। सिंह की पत्नी गुरशरण कौर और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। सिंह का अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह पार्टी मुख्यालय में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और फिर वहीं से सुबह साढ़े नौ बजे उनकी अंतिम यात्रा भी शुरू होगी। राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी समेत कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने भी सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि दी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव प्रियंका गांधी और अन्य नेता भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति बताया और कहा कि उन्हें एक दयालु इंसान, विद्वान अर्थशास्त्री और आर्थिक सुधारों के जरिए देश को एक नए युग में ले जाने वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा। मोदी ने एक वीडियो संदेश में सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि उनका जीवन भविष्य की पीढ़ियों को सिखाता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों से ऊपर उठकर ऊंचाइयों को प्राप्त किया जाता है। मोदी ने कहा, ‘‘डॉ. सिंह का निधन राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। विभाजन के दौरान भारत आने के क्रम में बहुत कुछ खोने के बावजूद उन्होंने इन उपलब्धियों को हासिल किया।’’ उनका कहना था, ‘‘डॉ. सिंह का जीवन भविष्य की पीढ़ियों को सिखाता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों से ऊपर उठकर महान ऊंचाइयों को प्राप्त किया जाए।’’ भारत में आर्थिक सुधारों के जनक कहे जाने वाले पूर्व वित्त मंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार को निधन हो गया था। वह 92 साल के थे। मनमोहन सिंह को बृहस्पतिवार की शाम तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार देर रात एम्स से उनके आवास पर ले जाया गया। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री सिंह के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किया और कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय जीवन पर अपनी छाप छोड़ी है और उनके निधन से राष्ट्र ने एक प्रख्यात राजनेता, जानेमाने अर्थशास्त्री और एक प्रतिष्ठित को नेता खो दिया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की स्मृति में एक शोक प्रस्ताव पारित किया। मंत्रिमंडल ने दो मिनट का मौन रखकर डॉ० मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी।’’ कांग्रेस नेता सिंह 2004 से 2014 तक, 10 वर्ष देश के प्रधानमंत्री रहे और उससे पहले उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में मदद की। वह वैश्विक वित्तीय और आर्थिक क्षेत्रों में एक प्रसिद्ध नाम थे। उनकी सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई), शिक्षा का अधिकार (आरटीई) और मनरेगा जैसी युग परिवर्तनकारी योजनाओं की शुरूआत की। हमेशा नीली पगड़ी पहनने वाले सिंह को 1991 में नरसिम्हा राव सरकार में भारत का वित्त मंत्री नियुक्त किया गया था। आर्थिक सुधारों की एक व्यापक नीति शुरू करने में उनकी भूमिका को अब दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है। मनमोहन सिंह: आर्थिक सुधारों के जनक और एक दृढ़ राजनेता  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारत में आर्थिक सुधारों के जनक, उसे लाइसेंस राज से मुक्त कराने वाले और देश को उस स्थिति से उबारने वाले उद्धारक के रूप में याद किया जाएगा जब इसका स्वर्ण भंडार भी गिरवी रख दिया गया था। एक दृढ़ राजनेता के तौर पर पहचान बनाने वाले डा. मनमोहन सिंह मौजूदा भारत के शिल्पकार और विद्वता के धनी इंसान थे। विनम्र, विद्वान, मृदुभाषी और आमसहमति में यकीन रखने वाले मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार रात दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। कांग्रेस नेता के रूप में उन्होंने 2004-2014 तक 10 वर्षों के लिए देश का नेतृत्व किया और उससे पहले वित्त मंत्री के रूप में देश के आर्थिक ढांचे को तैयार करने में मदद की। वह वैश्विक स्तर पर वित्तीय और आर्थिक क्षेत्र की एक मशहूर शख्सियत थे। उनकी सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई), शिक्षा का अधिकार (आरटीई) और मनरेगा जैसी युग परिवर्तनकारी योजनाओं की शुरूआत की। मनमोहन सिंह ने अभावों के बीच अपने जीवन की शुरूआत की। कभी बिजली से वंचित अपने गांव में मिट्टी के तेल के दीये की मंद रोशनी में पढ़ाई करने वाले मनमोहन सिंह … Read more

एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार अफगानिस्तान, 15000 तालिबान लड़ाके कर रहे कूच, पाकिस्तान की आएगी शामत!

 पेशावर  भारत के पड़ोस में खूनी जंग छिड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान और तालिबान की दोस्ती अब दुश्मनी में बदलने लगी है और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद अब अफगानिस्तान ने भी बदला लेने की ठान ली है। 15 हजार तालिबानी लड़ाकों पाकिस्तान की ओर तेजी से बढ़ रहे है। पाकिस्तान ने मंगलवार (24 दिसंबर) को देर रात अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तानी तालिबान के संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया था। एयरस्ट्राइक में कम से कम 46 लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान की ओर बढ़े तालिबानी लड़ाके पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार तालिबान के 15000 लड़ाके काबुल, कंधार और हेरात से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से लगती मीर अली सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। तालिबान के यह लड़ाके पाकिस्तान से एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार हैं। तालिबान प्रवक्ता का कहना है कि पाकिस्तान को उसकी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। 'कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे…' वहीं, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। उसका आरोप है कि एयरस्ट्राइक में महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों को भी निशाना बनाया गया। रक्षा मंत्रालय ने इस पर कहा, 'अपनी मातृभूमि की रक्षा करना हमारा अधिकार है। हम इस कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे।' क्यों बढ़ा तनाव? टीटीपी एक अलग आतंकवादी संगठन है, लेकिन इसे अफगान तालिबान का करीबी सहयोगी माना जाता है, जो अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। पाकिस्तान में पिछले दो दशक में बड़ी संख्या में आतंकवादी हमले हुए हैं, लेकिन हाल के महीनों में इनमें वृद्धि हुई है। TTP ने हाल ही में उत्तर-पश्चिम में एक जांच चौकी पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 16 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान पर साझा सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोप खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी संगठन को किसी भी देश के खिलाफ हमले करने की इजाजत नहीं देती है। क्या है तालिबान की रणनीति? अफगान तालिबान लंबे समय से यह दिखाता आया है कि वह किसी भी बड़े सैन्य शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को उसने वर्षों तक चुनौती दी और आखिरकार उन्हें अफगानिस्तान से लौटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान के पास न तो वैसी सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक क्षमता, जिससे वह तालिबान का सामना कर सके. मीर अली बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों के चलते पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है. स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और स्थिति किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रही है. तनाव बढ़ने के साथ ही यह देखना होगा कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव किस ओर बढ़ता है. तालिबान का उभार अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ था. पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है छात्र खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. कहा जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से पाकिस्तान में इनकी बुनियाद खड़ी की थी. तालिबान पर देववंदी विचारधारा का पूरा प्रभाव है. तालिबान को खड़ा करने के पीछे सऊदी अरब से आ रही आर्थिक मदद को जिम्मेदार माना गया. शुरुआती तौर पर तालिबान ने ऐलान किया कि इस्लामी इलाकों से विदेशी शासन खत्म करना, वहां शरिया कानून और इस्लामी राज्य स्थापित करना उनका मकसद है. शुरू-शुरू में सामंतों के अत्याचार, अधिकारियों के करप्शन से आजीज जनता ने तालिबान में मसीहा देखा और कई इलाकों में कबाइली लोगों ने इनका स्वागत किया लेकिन बाद में कट्टरता ने तालिबान की ये लोकप्रियता भी खत्म कर दी लेकिन तब तक तालिबान इतना पावरफुल हो चुका था कि उससे निजात पाने की लोगों की उम्मीद खत्म हो गई. अफगान और तालिबान की सैन्य ताकत कितनी? तालिबान की ताकत कितनी है कि वह अफगानिस्तान की सेना पर भारी पड़ रहा? अफगानिस्तान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट कहते हैं- 'तालिबान का जल्द खात्मा होगा. उनके पास 80 हजार के करीब लड़ाके हैं और अफगानिस्तान की सेना के पास 5 से 6 लाख के बीच सैनिक. इसके अलावा अफगानिस्तान के पास वायु सेना है जो तालिबान पर भारी पड़ेगी.' हालांकि, इस दावे के बावजूद कई ऐसे फैक्ट हैं जो जमीनी स्तर पर तालिबान को मजबूत साबित कर रहे हैं. तालिबान का मैनपावर सोर्स कबाइली इलाकों में बसे कबीले और उनके लड़ाके हैं. इसके अलावा कट्टर धार्मिक संस्थाएं, मदरसे भी उनके विचार को सपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन इन सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सीक्रेट मदद तालिबान के लिए मददगार साबित हो रही है. अमेरिकी खुफिया आकलन भी जमीनी हालात को साफ करते हैं जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के 6 महीने के भीतर अफगानिस्तान सरकार का प्रभुत्व खत्म हो जाएगा और तालिबान का शासन आ सकता है.   recent visitors 60