एमपी में एक बार फिर से बेस्ट ऑफ फाइव योजना को लागू कर दिया गया, अप्रैल 2024 में रद्द किया था

भोपाल एमपी में बोर्ड परीक्षा MP Board Exam में बड़ा बदलाव हुआ है। इसके अंतर्गत परीक्षार्थी 5 पेपर में ही पास हो जाएंगे। हाईस्कूल यानि 10वीं क्लास के 6 प्रश्नपत्रों में से किसी एक में फेल हो जाने पर भी वे पास माने जाएंगे। दरअसल एमपी बोर्ड ने हाईस्कूल के छात्रों के लिए बेस्ट ऑफ फाइव योजना फिर लागू कर दी है। बोर्ड परीक्षार्थियों का मानसिक तनाव कम करने और कमजोर विषयों में राहत देने के उद्देश्य से यह योजना दोबारा लागू की गई है। एमपी बोर्ड परीक्षा में एक बार फिर से बेस्ट ऑफ फाइव योजना को लागू कर दिया गया है। इस योजना से छात्रों को सीधे फायदा होने जा रहा है। दरअसल, बेस्ट ऑफ फाइव योजना के लागू होने के बाद 10वीं बोर्ड के छह प्रश्नपत्रों में से पांच में पास होने वाले परीक्षार्थी पास माने जाएंगे। इसी साल अप्रैल महीने में स्कूल शिक्षा विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर इसे रद्द कर दिया था। हालांकि, एक बार फिर से इसको लागू कर दिया गया है। बेस्ट ऑफ फाइव योजना के बारे में जानिए जानकारी दें कि बेस्ट ऑफ फाइव योजना के तहत छात्रों को 10वीं बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन और सफलता की अधिक संभावना होगी। इसी उद्देश्य के साथ इस योजना को राज्य में लागू किया गया था। योजना के तहत अगर कोई परीक्षार्थी छह अनिवार्य प्रश्नपत्रों में से किसी पांच में पास हो जाता है, तो उसे पास माना जाएगा। इस नियम को छात्रों के ऊपर से परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। जानिए कैसे काम करेगी ये योजना     कक्षा 10वीं के लिए एमपी बोर्ड के अंतर्गत 6 अनिवार्य विषयों की परीक्षा होती है।     योजना के तहत छात्रों को इनमें से किसी पांच विषय में न्यूनतम पासिंग अंक लाने होते हैं।     अगर कोई छात्र किसी एक विषय में कमजोर है तो उसके लिए ये योजना काफी लाभदायक साबित होगी।     यदि किसी छात्र का एक विषय कमजोर रहता है, तो वह अन्य पांच विषयों में अच्छे अंक लाकर पास हो सकता है।     योजना के लागू होने के बाद छात्रों पर पढ़ाई का दबाव कम होता है।     योजना के लागू होने के बाद छात्रों को अपनी ताकत के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलता है। पहले योजना को किया गया रद्द उल्लेखनीय है कि इस योजना को इस साल अप्रैल के महीने में रद्द कर दिया गया था। इस योजना को रद्द करने के पीछे का उद्देश्य था कि छात्र सभी विषयों पर समान रूप से ध्यान दे सकें और अच्छा कर सकें। हालांकि, बाद में जनहित और छात्रों की मांग को देखते हुए इसे फिर से लागू किया गया है। किन छात्रों को होगा फायदा गौरतलब है कि ये योजना उन छात्रों के लिए विषेष रूप से लाभकारी साबित होने जा रही है, जो किसी एक विषय में कमजोर हैं। वहीं, वे अन्य विषयों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। माना जा रहा है कि ये योजना छात्रों के भीतर आत्मविश्वास को बढ़ाती है। इसके अलावा उनके मानसिक तनाव को भी कम करती है, जिससे वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। क्यों किया था रद्द अप्रैल 2024 में बेस्ट ऑफ फाइव योजना रद्द कर दी गई थी। तब कहा गया था कि बोर्ड परीक्षार्थियोें को सभी विषयों में समान रूप से मेहनत करने और ध्यान देने के लिए प्रेरित करने के लिए ऐसा किया गया।   recent visitors 147

NCPCR ने क्रिसमस से पहले जारी किया आदेश, सांता क्लॉज़ बनाने से पहले पैरेंट्स से लिखित अनुमति लेनी होगी

भोपाल मध्य प्रदेश के स्कूलों में क्रिसमस पर बच्चों को सांता क्लॉज़ बनाने से पहले पैरेंट्स से लिखित अनुमति लेनी होगी। ये आदेश बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने क्रिसमस से पहले जारी किया है। इसके लिए सभी जिला कलेक्टर को पत्र लिख निर्देशित किया गया है। क्रिसमस के मौके पर बच्चों को स्कूलों में सांता क्लॉज़ बनाने की परंपरा सी रही है। ये त्योहार मनाने का एक तरीका है और बच्चे भी इसमें उत्साह से भाग लेते आए हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में अब अगर कोई स्कूल इस तरह का आयोजन करने की योजना बना रहा है तो उसे अभिभावकों से अनुमति लेनी होगी और वो भी लिखित में। अन्यथा किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति बनने पर स्कूल या संस्था के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। बिना अनुमति बच्चों को न बनाएं सांता क्लॉज़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य अनुराग पांडेय ने इसके लिए स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत कहा गया है कि किसी भी स्कूल या संस्था द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने वाले बच्चों को किसी भी प्रकार की वेशभूषा पहनाने या किसी पात्र के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उनके अभिभावकों से लिखित अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। बाल संरक्षण आयोग का आदेश इस पत्र में लिखा गया है कि ‘विविध आयोजनों के अवसर पर विद्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सहभागिता करने वाले चयनित बालक/बालिकाओं को विविध वेशभूषा एवं अन्य कोई पात्र बनाए जाने के लिए विद्यालय/संस्था द्वारा बालक/बालिकाओं के अभिभावकों से लिखित अनुमति प्राप्त कर ही बनाया जाए। किसी भी स्थिति में बिना अभिभावकों की लिखित अनुमति के किसी भी बालक/बालिकाओं को उक्त कार्यक्रम में सहभागिता न कराई जाए जिससे कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो। इस संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद संज्ञान में आता है तो विद्यालय/संस्था के विरुद्ध सुसंगत अधिनियमों के प्रावधानों के तहत कार्यवाही अनुशंसित की जाएगी जिसका संपूर्ण उत्तरदायित्व विद्यालय/संस्था का होगा।’ इस प्रकार अब मध्य प्रदेश में क्रिसमस पर बच्चों को सांता क्लॉज़ बनाने से पहले स्कूलों को स्टूडेंस्ट के पैरेंट्स से अनुमति लेनी होगी, वो भी लिखित में। recent visitors 46

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना जल संरक्षण एवं जल समृद्धि की दिशा में एक नया अध्याय लिखने वाला होगा – विष्णुदत्त शर्मा

भोपाल      मध्यप्रदेश की पुण्यभूमि, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक गौरव के लिए प्रसिद्ध है, अब एक और ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने जा रही है। 25 दिसंबर 2024 को मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के खजुराहो में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का शिलान्यानस यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से होगा। यह क्षण न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए विकास, जल संरक्षण एवं जल समृद्धि की दिशा में एक नया अध्याय लिखने वाला होगा, साथ ही यह भारत की जल क्रांति की नई गाथा लिखने का भी प्रतीक बनेगा। शुभ योग यह है कि परियोजना का भूमिपूजन आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की 100वीं जयंती के दिन हो रहा है, जिन्होंने भारत के विकास के लिए अनेक सपने देखे थे, उनमें नदियों को जोड़ना विशेष रूप से शामिल था। उन्होंने इस दिशा में प्रारंभिक कदम भी उठाए थे। प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी अब स्वप्न दृष्टा वाजपेयी जी के सपने साकार करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। यह परियोजना प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता, मध्यप्रदेश के प्रति उनके विशेष स्नेह और अटलजी के विचारों के प्रति समर्पण का एक और प्रमाण है, जो मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगी।      प्राचीन भारतीय पौराणिक कथाओं में गंगा की धरा पर उपस्थिति का श्रेय राजा भागीरथ को दिया जाता है। राजा भागीरथ के तप और साधना से गंगा धरती पर अवतरित हुईं, जिसकी उपस्थिति से भारत का भू-भाग समृद्ध हुआ, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी आधुनिक भागीरथ हैं। मोदीजी ने भी जल संकट से जूझते भारत के लिए एक नई जल क्रांति की शुरुआत की है। जल संसाधनों को भारत की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाया है। उनके नेतृत्व में जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य और विकास का आधार बन गया है। गुजरात में जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उनकी जल नीतियों ने सूखे और जल संकट से जूझते गुजरात को जलसमृद्धि का अनूठा उदाहरण बनाया। गुजरात, जो कभी सूखे और जल संकट का प्रतीक था, आज नर्मदा नदी के जल से आच्छादित है। उनकी दूरदृष्टि और अदम्य साहस ने नर्मदा नदी के जल को सही दिशा में मोड़ते हुए गुजरात की प्यास बुझाई, कृषि क्षेत्र को समृद्ध किया और नर्मदा के जल से साबरमती नदी को भी नया जीवन दिया। यह उनकी नीतियों और इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि गुजरात में जल के अभाव का स्थान जल के सदुपयोग और समृद्धि ने ले लिया। गुजरात में उनका काम जल संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए आदर्श बन चुका है।      माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी नीति तक ही सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बनाया। उनके अनुसार, जल का प्रबंधन एक पुण्य कर्म है, जिसमें वर्तमान की जरूरतें और भविष्य की पीढ़ियों का उत्तरदायित्व दोनों निहित हैं। उनका यह कथन इस सोच को सार्थक रूप देता है कि जल का सवाल केवल संसाधनों का नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व का है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आधुनिक राजाभोज कहना न्याय संगत है। राजा भोज ने जल संरक्षण के लिए ऐसी संरचनाएं बनाईं, जो सदियों बाद भी जल प्रबंधन की उत्कृष्ट मिसाल बनी हुई हैं। भोपाल का ऐतिहासिक बड़ा तालाब राजा भोज की जल संरक्षण क्षमता का अद्भुत उदाहरण है,जो सदियों बीत जाने के बाद भी लाखों लोगों की प्यास बुझा रहा है। दो नदियों के संगम से बनाए गए इस तालाब ने यह सिद्ध कर दिया हैकि जल संरक्षण केवल उस समय की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि उसे पीढ़ियों के लिए उपहार के रूप में संरक्षित किया जाता है।      प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी का दृष्टिकोण भी ऐसा ही है। मोदी जी भी जल संरचनाओं के जनक राजाभोज की परंपरा को आधुनिकता के साथ मानवता के अस्तित्व के लिए आगे बढ़ा रहे हैं।      माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी का मानना है कि जल का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा है-“जल संचय केवल एक प्रयास नहीं, यह एक पुण्य है। इसमें उदारता और उत्तरदायित्व दोनों निहित हैं। आने वाली पीढ़ियां जब हमारा आकलन करेंगी, तो यह केवल हमारी आर्थिक उपलब्धियों या भौतिक विकास पर आधारित नहीं होगा। उनका पहला प्रश्न यही होगा कि हमने जल के प्रति क्या दृष्टिकोण अपनाया। जल का संरक्षण, प्रबंधन और इसके प्रति हमारी प्रतिबद्धता ही भविष्य में हमारी पहचान बनेगी।” यह विचार न केवल जल संरक्षण के महत्व को दर्शाता है इसीलिये उनकी जलनीतियां दीर्घकालिक हैं, जो न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करती हैं, बल्कि भविष्य के लिए भी टिकाऊ मार्ग प्रस्तुत करती हैं। माननीय मोदी जी के नेतृत्व में शुरू हुए “जल शक्ति अभियान” और “हर घर जल” और कैच द रैन जैसे अभियानों ने करोड़ों भारतीयों के जीवन को परिवर्तित कर दिया है। उनकी योजनाएं यह सिद्ध करती हैं कि जल प्रबंधन में उनका दृष्टिकोण कितना प्रभावशाली और स्थायी है।      मध्यप्रदेश के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का विशेष लगाव समय-समय पर उनकी योजनाओं और निर्णयों से स्पष्ट होता है। उन्होंने हमेशा मध्यप्रदेश को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। उनके प्रयासों से राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अब केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना मध्यप्रदेश के विकास में नई ईबारत लिखने जा रही है। केन-बेतवा लिंक परियोजना, जिस भूमि पर बन रही है, वह शौर्य, सम्मान और जनकल्याण के प्रतीक बुंदेलखंड की भूमि है, बुंदेलखंड की पवित्र भूमि ने ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया है, जिन्होंने लोकहित को सर्वोपरि रखा। राजा छत्रसाल ने अपनी नीतियों और नेतृत्व से बुंदेलखंड के लोगों के कल्याण के लिए जो काम किए, उनकी गूंज आज भी सुनाई देती है। प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व भी राजा छत्रसाल के दृष्टिकोण का आधुनिक संस्करण है। उनकी योजनाएं और प्रयास बुंदेलखंड को जल संकट से उबारने और यहां की सूखी धरती को फिर से हराभरा बनाने के लिए समर्पित हैं।      प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी जी के संकल्प का फल है कि 44,605 हजार करोड़ रूपये की केन-बेतवा लिंक जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजना आज जमीन पर उतर रही है और … Read more

भोपाल में दो समुदायों के बीच झड़प-पथराव, छह लोग घायल, भारी पुलिस बल तैनात

भोपाल राजधानी के जहांगीराबाद इलाके की पुरानी गल्ला मंडी में मंगलवार को दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई। दोनों ओर से जमकर पथराव किया गया। भीड़ में कुछ लोग तलवारें और डंडे लेकर घूम रहे थे। इस घटना में लगभग छह लोग घायल बताए जा रहे हैं। एक महिला को भीड़ ने डंडे से बुरी तरह पीटा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। थाना प्रभारी आशीष उपाध्याय ने बताया कि विवाद की वजह दो दिन पहले हुए युवकों के बीच मारपीट से जुड़ी है। उसी को लेकर मंगलवार सुबह एक पक्ष के लोग इकट्ठा हुए और दूसरे पक्ष के घरों पर पथराव करना शुरू कर दिया। यह देखकर दूसरे पक्ष के लोग भी डंडों और तलवारों के साथ बाहर निकल आए। घटना की खबर मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया। भारी पुलिस बल तैनात कर इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। वहीं दोनों पक्षों से कुल छह लोग घायल हुए। उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बवाल की वजह पुराना मामला यह पूरा बवाल दो दिन पहले हुई एक मारपीट की घटना से जुड़ा है। जहांगीराबाद थाना प्रभारी आशीष उपाध्याय के अनुसार, दो दिन पहले कुछ युवकों के बीच मारपीट हुई थी। उसी मामले को लेकर मंगलवार सुबह एक पक्ष के लोग इकट्ठा हुए और दूसरे पक्ष के घरों पर पथराव शुरू कर दिया। इससे इलाके में दहशत फैल गई। पथराव की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। recent visitors 46

रेलवे का महाकुंभ के लिए बड़ा प्लान, 3 हजार स्‍पेशल समेत 13 हजार ट्रेनें चलाएगा रेलवे

प्रयागराज उत्तर प्रदेश सरकार प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ की तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। इस विशाल धार्मिक आयोजन में देशभर से करोड़ों लोग शामिल होंगे। महाकुंभ के लिए रेलवे ने देशभर से 3,000 विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। हालांकि, उत्तर पश्चिम रेलवे से केवल दो विशेष ट्रेनें चलेंगी—एक उदयपुर और दूसरी बाड़मेर से। इसके अलावा, पांच अन्य विशेष ट्रेनें जयपुर सहित उत्तर पश्चिम रेलवे के कई स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। महाकुंभ 2025 में करीब 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की उम्‍मीद है। उनकी सुगम आवाजाही के लिए इंडियन रेलवे ने व्‍यापक तैयारी की है। महाकुंभ 2025 के मद्देनजर रेलवे द्वारा इस बार 3000 स्पेशल ट्रेनों के साथ 13000 से अधिक रेलगाड़ियों का संचालन करेगा। महाकुंभ 2025 की तैयारियों पर रेलवे अकेले प्रयागराज में ही पिछले 2 साल में 5000 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर चुका है। यह जानकारी प्रयागराज पहुंचे केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है। अर्द्धकुंभ से अधिक ट्रेनें चलेंगी उन्‍होंने बताया, प्रयागराज क्षेत्र में सुगम रेल परिचालन के लिए 21 रोड ओवर ब्रिजों और रोड अंडर ब्रिजों का निर्माण किया गया है। वर्ष 2019 में आयोजित कुम्भ मेला में 7000 गाड़ियों का संचालन किया गया था, जबकि इस बार 16000 से भी अधिक ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। मध्य प्रदेश से चलेंगी 48 से अधिक कुंभ स्पेशल ट्रेन इसमें भोपाल रेल मंडल सहित मप्र से विभिन्न स्टेशनों से लगभग 48 से अधिक ट्रेनें ठहराव लेकर चलेंगी। 01661-01662 रानी कमलापति-वाराणसी के लिए कुंभ स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। जानिए टाइम और स्टॉपेज की पूरी लिस्ट     रानी कमलापति से ट्रेन 16 जनवरी, 20 जनवरी, 23 जनवरी, 6 फरवरी, 17 फरवरी और 20 फरवरी को चलेगी। वहीं, वाराणसी से ट्रेन 17 जनवरी, 21 जनवरी, 24 जनवरी, 7 फरवरी, 18 फरवरी और 21 फरवरी को चलेगी।     यह ट्रेन मप्र के मंडीदीप, औबेदुल्लागंज, बुधनी, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), इटारसी, सोहागपुर, पिपरिया, गाडरवारा, करेली, नरसिंहपुर, श्रीधाम, मदनमहल, जबलपुर, देवरी, सिहोरा, कटनी, जुकेही, मैहर, सतना, मझगवां से होते हुए उप्र के मानिकपुर, प्रयागराज, मिजार्पुर से होते हुए वाराणसी जाएगी। श्रीधाम एक्सप्रेस नौ, मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस आठ घंटे देरी से पहुंची भोपाल भोपाल और रानी कमलापति रेलवे स्टेशनों पर रविवार देर रात और सोमवार सुबह यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इसका मुख्य कारण उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में चल रहा तीसरी लाइन का निर्माण कार्य है। संदलपुर-आंतरी स्टेशनों के बीच अप लाइन पर कट और कनेक्शन का काम चल रहा है, जिसके कारण भोपाल सहित मंडल के कई स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों को 22 दिसंबर तक परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा था। इसके साथ ही कोहरे का असर भी ट्रेनों की आवाजाही के समय पर पड़ रहा है। कोहरे के कारण कई ट्रेनों की गति धीमी हो गई है, जिससे ये ट्रेनें अपने निर्धारित समय से गंतव्य पर काफी देरी से पहुंच रही हैं। कुछ ट्रेनें तो डेढ़ घंटे से लेकर नौ घंटे तक की देरी से भोपाल पहुंची। ऐसे में यात्रियों को स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। यह ट्रेनें पहुंची देरी से     ट्रेन 12191 श्रीधाम एक्सप्रेस 9:35 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12618 मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस 8:06 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12644 हजरत निजामुद्दीन-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस 5:10 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12724 आंध्र एक्सप्रेस 2:15 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12780 हजरत निजामुद्दीन-वास्को डी गामा एक्सप्रेस 2:10 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12626 नई दिल्ली-त्रिवेंद्रम केरला एक्सप्रेस 1:52 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12722 दक्षिण एक्सप्रेस 1:30 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12616 जीटी एक्सप्रेस 1:35 घंटे लेट आई।     ट्रेन 11058 अमृतसर एक्सप्रेस 1:20 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12002 शताब्दी एक्सप्रेस 36 मिनट लेट आई।   पहली बार मेमू ट्रेन महाकुंभ 2025 को देखते हुए पहली बार छोटी दूरी के लिए बड़ी संख्या में मेमू ट्रेन का इंतजाम किया जा रहा है। महाकुंभ 2025 की रेगुलर गाड़ियों में दोनों तरफ इंजन लगाया जाएगा जिससे समय की बचत होगी । वहीं श्रद्धालुओं और रेलयात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी। बनारस से प्रयागराज के मध्य रेल ट्रैक के दोहरीकरण से ट्रेनों की स्पीड बढ़ी है। इसी खंड में झूंसी से दारागंज के मध्य गंगा नदी पर 100 वर्ष बाद नया रेल ब्रिज बन कर तैयार हो चुका है। फाफामऊ-जंघई के बीच दोहरीकरण होने से ट्रेन परिचालन क्षमता में वृद्धि हुई है। महाकुंभ 2025 के दौरान बेहतर सुविधाओं के लिए विभिन्न स्टेशनों पर 43 स्थायी होल्डिंग एरिया का निर्माण किया गया है। प्रयागराज क्षेत्र के सभी स्टेशनों पर सभी फुट ओवर ब्रिजों पर वनवे ट्रैफिक की व्यवस्था की गई है। वहीं प्रयागराज क्षेत्र में सुगम रेल परिचालन के लिए 21 रोड ओवर ब्रिजों और रोड अंडर ब्रिजों का निर्माण हो चुका है। 13 को प्रयागराज आ सकते हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 13 दिसंबर को प्रयागराज आ सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव महाकुम्भ की तैयारियों का अवलोकन करने रविवार प्रयागराज पहुंचे थे। उन्‍होंने प्रयागराज में सबसे पहले झूंसी रेलवे स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों एवं महाकुंभ 2025 की तैयारियों का निरीक्षण किया। इसके बाद झूंसी स्टेशन के निकट गंगा नदी पर प्रयागराज–वाराणसी रेल मार्ग दोहरीकरण कार्य के अंतर्गत बने नए ब्रिज संख्या 111 का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में फाफामऊ स्टेशन एवं प्रयाग जंक्‍शन का भी निरीक्षण किया और महाकुंभ 2025 की तैयारियों को परखा। इस दौरान रेलमंत्री ने फाफामऊ से प्रयाग तथा प्रयाग से प्रयागराज जंक्‍शन तक विंडो ट्रेलिंग करते हुए रेलपथ की संरक्षा की जानकारी भी ली। इस अवसर पर इन दोनों स्टेशनों पर उपस्थित जन प्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों से भेंट की। इस दौरान अध्यक्ष रेलवे बोर्ड श्री सतीश कुमार सहित उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे एवं पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक एवं संबंधित मंडल रेल प्रबंधकों के साथ अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। recent visitors 65

हिमाचल प्रदेश की वादियां बर्फ में लिपटी, 174 स्टेट और 3 नेशनल हाईवे बंद, 1000 से अधिक गाड़ियां फंस गईं

श्रीनगर/ मनाली लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पहाड़ सफेद चादर से ढक गए हैं. हिमाचल प्रदेश की वादियां बर्फ में लिपट गई हैं. मनाली, कुल्लू, रोहतांग और कई अन्य इलाकों में हुई भारी बर्फबारी ने संकट को तो बढ़ा दिया लेकिन पर्यटकों की भीड़ बढ़ गई है. कल इस बर्फबारी की वजह से मनाली-केलांग मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अस्थाई रूप से रोकनी पड़ी. अटल टनल के रास्ते पर तो करीब 1000 गाड़ियां फंस गईं. हालांकि प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए रेस्क्यू अभियान चलाया. हिमाचल में 3 नेशनल हाईवे बंद हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के चलते पिछले 24 घंटे में 174 स्टेट और 3 नेशनल हाईवे ( NH 03, NH 305, NH 505) बंद किए गए हैं.बिजली और पानी का भी कुछ ज़िलों के डिवीज़नल एरिया कनेक्शन काटा गया है.जबकि 6 ज़िलों में 683 जगह बिजली बाधित है.बदले मौसम और बर्फ़बारी के कारण जन सेवाएं बाधित है. आपदा सूचना विभाग ने जिले के अनुसार रिपोर्ट जारी की है. वहीं, सैलानियों के लिए भी एडवाइज़री जारी की गई है. हिमाचल प्रदेश जैसे हालात उत्तराखंड में भी होने लगे हैं. राज्य के कई ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई है. हालांकि हिमाचल की तुलना में अभी यहां बर्फबारी कम है. फिर भी औली, उत्तरकाशी, चकराता, बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले इलाके सफेद चादर से ढंक गए हैं. केदारनाथ धाम में इस सीजन की दूसरी बर्फबारी है. बर्फबारी की वजह से वहां चल रहा पुनर्निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ है. केदारनाथ धाम में कल से लगातार बर्फबारी जारी है. धाम में अभी तक एक फ़ीट से अधिक तक बर्फ गिर चुकी है. मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि क्रिसमस और न्यू ईयर पर ज्यादा ठंड रह सकती है. उत्तराखंड के मशहूर पर्यटन स्थल और स्की रिजॉर्ट औली भी एक बार फिर से जबरदस्त बर्फ की आगोश में आ चुका है. औली की वादियां में तस्वीरों में देख सकते हैं किस तरह से पेड़ पौधे, मकान, रास्ते सब कुछ यहां बर्फ की आगोश में दिखाई दे रहा है, जिसके बाद औली का नजारा अपने आप में बहुत ही खूबसूरत दिखाई दे रहा है. जिसका इंतजार पर्यटकों को और स्थानीय होटल व्यवसाईयों को लंबे समय से था वह अब जाकर यहां पर देखने को मिल रहा है. आधा फीट बर्फ की मोटी चादर के नीचे औली की वादियां हर तरफ सफेद दिखाई दे रही है. वहीं कल क्रिसमस है और इस समय वीकेंड के चलते बड़ी संख्या में पर्यटक उत्तराखंड के औली आ रहे हैं. ऐसे में उनके लिए यह बर्फबारी किसी तोहफे से कम नहीं है क्योंकि अब औली की वादियां बर्फ से लकदग हो चुकी है. ऐसे में यहां पहुंचे पर्यटकों को मन मांगी मुराद पूरी हो चुकी है औली अब एक बार फिर से जबरदस्त बर्फ की आगोश में आ चुका है. जम्मू-कश्मीर में भी मौसम का रूख काफी हद तक बदल गया है. वहां भी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी तेज है. कल पीर पंजाल और सोनमर्ग में बर्फबारी हुई. कई अन्य इलाकों में भी मौसम विभाग का अलर्ट है. इन दिनों कश्मीर का तापमान लगातार गिरा है. अभी श्रीनगर में रविवार की रात माइनस 3.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. मशहूर डल झील गिरते पारे की वजह से जमने लगी है. वहीं पहलगाम में माइनस 5 डिग्री तापमान रहा. मौसम विभाग की मानें तो बुधवार तक तापमान और झटका देने वाला है.   recent visitors 79

ड्रोन नीति पर हुई एक दिवसीय कार्यशाला, ड्रोन सूचना पोर्टल drone.mp.gov.in लाँच

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ॰ मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ड्रोन टेक्नोलॉजी में अग्रणी बनने की ओर अग्रसर है। राज्य में ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने और ड्रोन नीति पर विचार विमर्श के लिए सोमवार को "शासन में ड्रोन का उपयोग एवं मध्यप्रदेश में ड्रोन पारिस्थितिक तंत्र का विकास" विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला हुई। कार्यशाला में ड्रोन प्रौद्योगिकी के व्यापक अनुप्रयोगों पर चर्चा की गयी। सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया हितेश कुमार मकवाना, अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे, प्रबंध निदेशक एमपीएसईडीसी आशीष वशिष्ठ ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर ड्रोन केन्द्र सूचना पोर्टल https://drone.mp.gov.in/ भी लाँच किया गया। सर्वेयर जनरल मकवाना ने कहा कि भारत में पिछले छ: वर्षों में ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ है। ड्रोन के शुरूआती सीमित उपयोग से लेकर आज इसके व्यापक उपयोग तक ड्रोन एक बहुउपयोगी उपकरण के रूप में उभरा है। भारत सरकार ने ड्रोन टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग के लिये ड्रोन नीति बनाई है। मध्यप्रदेश ड्रोन टेक्नोलॉजी के उपयोग में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। राज्य ने स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन मे ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुये विशेष उपलब्धि हासिल की है। ड्रोन टेक्नोलॉजी कुशल, सुलभ और कम लागत मे उपलब्ध टेक्नोलॉजी है। एसीएस संजय दुबे ने कहा कि केन्द्र सरकार ने ड्रोन नीति के तहत ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित इको-सिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसमें ड्रोन के संचालन के लिये आवश्यक नियम, लाइसेंसिंग प्रक्रियाएं, संचालन की अवधि आदि निर्धारित की गई हैं। मध्यप्रदेश इस नीति को प्रेरणादायक मानते हुए ड्रोन के क्षेत्रीय स्तर पर व्यवहारिक और लाभकारी उपयोग के लिये कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि राज्य में एक मजबूत और समग्र इको-सिस्टम विकसित करें। जब हम ड्रोन की बात करते हैं तो यह केवल एक फ्लाइंग कैमरा ही नहीं बल्कि गेम चेंजिंग टेक्नोलॉजी है। यह टेक्नोलॉजी विभिन्न स्तरों पर सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है। राज्य में इस टेक्नोलॉजी के व्यापक अनुप्रयोग की संभावनाएं है, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। हमारा उद्देश्य है कि हम ऐसा इको-सिस्टम विकसित करें, जिससे ड्रोन का व्यापक उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में आसानी से हो सके। यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्म-निर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हमारा लक्ष्य ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित करने के साथ राज्य में निर्माण इकाइयों को स्थापित करना भी है। एमपीएसईडीसी के एम.डी. आशीष वशिष्ठ ने कहा कि आज ड्रोन टेक्नोलॉजी का व्यापक उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जा रहा है। खनन क्षेत्र में ड्रोन के मदद से प्रभावी खनन पर निगरानी रखी जा रही है। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग आबकारी, कानून व्यवस्था, निर्माण गतिविधियों में भी किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य मध्यप्रदेश को देश का ड्रोन हब बनाना है। ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार विस्तार के लिये ड्रोन की परिवर्तनकारी भूमिका है। उन्होंने कहा कि नमो ड्रोन दीदी जैसी पहल से ड्रोन का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग केवल एक विकल्प नहीं बल्कि यह भविष्य की आवश्यकता है। नाबार्ड के जीएम कमर जावेद ने कहा कि मध्यप्रदेश में ड्रोन टेक्नोलॉजी में उल्लेखनीय कार्य हुए है। सहकारी संस्थाओं की तरह पैक्स सोसायटी में भी ड्रोन के उपयोग को बढ़ाया जा सकता है। फिक्की ड्रोन कमेटी को-चैयरमेन एवं सीईओ अंकित मेहता ने कहा कि लॉ-एण्ड-ऑर्डर और निगरानी क्षेत्रों में ड्रोन टेक्नोलॉजी बहुत उपयोगी है। ड्रोन अपनी बहुआयामी उपयोगिता के साथ नवाचार को बढ़ावा दे रहे है और भविष्य की प्रौद्यागिकी को नया आकार दे रहे है। ड्रोन टेक्नोलॉजी के विभिन्न विषयों पर आयोजित हुए सत्र कार्यशाला में ड्रोन टेक्नोलॉजी के विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गये। ड्रोन पॉलिसी एवं इंडस्ट्री इनिशिएटिव विषय पर ड्रोन टेक्नोलॉजी के वर्तमान उपयोग एवं भविष्य में व्यापक उपयोग पर चर्चा की गई। ड्रोन केस स्टडीज विषय पर व्यावसायिक क्षेत्रों में ड्रोन के उपयोग पर जानकारी दी गई। ड्रोन स्टार्ट-अप एवं स्किल डेपलपमेंट विषय पर जानकरी दी गई एवं ड्रोन पॉलिसी ड्रॉफ्ट पर विस्तृत चर्चा भी की गई। इस अवसर पर ड्रोन केन्द्रित सूचना पोर्टल भी लाँच किया गया। यह पोर्टल ड्रोन टेक्नोलॉजी, नीति और प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी को एकीकृत करने में सहायक होगा। इस दौरान ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें ड्रोन टेक्नोलॉजी के नवीनतम उपयोगों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर एमपीएसईडीसी के परियोजना निदेशक गुरू प्रसाद, अपर परियोजना निदेशक डॉ. संदीप गोयल, परियोजना प्रबंधक अनूप पटेल, सीनियर जनरल मैनेजर कविराज मेहरा सहित एमपीएसईडीसी के अधिकारी-कर्मचारी, सर्वे ऑफ इंडिया डीजीसीए, आईआईटी इंदौर, ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया, नाबार्ड, मध्यप्रदेश सरकार के सभी विभागों के प्रमुख सहित ड्रोन इंडस्ट्री के प्रमुख जैसे आइडिया फोर्ज, एस्टेरिया एयरोस्पेस आदि के प्रतिनिधि, ड्रोन दीदीयां और तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थी उपस्थित रहे।   recent visitors 43