बाल रंग में विभिन्न राज्यों के 10 हजार बच्चें अनेक रचनात्मक गतिविधियों में सहभागिता कर रहे

भोपाल राष्ट्रीय बाल रंग के दूसरे दिन 21 दिसम्बर को राष्ट्रीय मानव संग्रहालय श्यामला हिल्स में 22 राज्यों की लोक संस्कृति पर केन्द्रित नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां देशभर के बच्चों ने दी। इन प्रस्तुतियों में 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की झलक देखने को मिली। बाल रंग में विभिन्न राज्यों के 10 हजार बच्चें अनेक रचनात्मक गतिविधियों में सहभागिता कर रहे हैं। लोक नृत्य बच्चों को एक-दूसरे से जुड़ने का बेहतर माध्यम बाल रंग के दूसरे दिन सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल बच्चों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बालरंग कार्यक्रम मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों को पढ़ाई के साथ विभिन्न गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ने की अनुशंसा की गई है। बाल रंग में शामिल बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर दूसरे बच्चों के लिये प्रेरणा स्त्रोत बनेंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। बच्चों को संग्रहालय का भ्रमण भी करवाया जाये। सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. गोयल ने इस मौके पर प्रकाशित बाल पत्रिका का विमोचन भी किया। लोक नृत्य की प्रस्तुतियां कार्यक्रम की शुरूआत में पंजाब के बच्चों ने लोक संस्कृति पर केन्द्रित नृत्य की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में पंजाब की विरासत का बखान था। मध्यप्रदेश के बच्चों ने महाकौशल अंचल के लांगुरिया लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें ईश्वर की आराधना आस्था के साथ किस तरह से होती है। उसको आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया था। कार्यक्रम में मानव संग्रहालय के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे और विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे। विकसित भारत प्रदर्शनी बाल रंग में लगाई गई प्रदर्शनी में राजस्थान के स्टॉल में हवा महल, जन्तर-मन्तर, राज्य के परंपरागत वेश-भूषा और वर्ष 2047 में विकसित राजस्थान की कल्पना को मॉडल के जरिये दर्शाया गया। गोवा राज्य के स्टॉल में वहां की संस्कृति, त्यौहार, मछली पालन व्यवसाय और पर्यटन के क्षेत्र में लगातार हो रहे विकास को दर्शाया गया था। इन स्टॉलों में भोपाल के स्कूलों के बच्चों ने मेहनत से मॉडल तैयार किये है। बाल रंग में बच्चों को देश और दुनिया में विज्ञान के क्षेत्र में हो रही प्रगति से प्रदर्शनी के माध्यम से अवगत कराया गया। कार्यक्रम की शुरूआत में बच्चों ने अपने राज्यों की पट्टिका को लेकर मार्च पास्ट भी किया। बाल रंग के अंतिम दिन 22 दिसम्बर रविवार को प्रात: 10 बजे से गतिविधियों शुरू होंगी और बच्चों को पुरस्कार वितरित किये जायेंगे। कार्यक्रम स्थल में बच्चों का प्रवेश निशुल्क रखा गया है। बच्चों को अपनी शाला के गणवेश के साथ आना होगा।   recent visitors 104

सरकार ने स्कूलों में प्रकाश की व्यवस्था के लिए हर विद्यालय को 20 हजार रुपए की राशि उपलब्ध कराई

भोपाल प्रदेश में कड़ाके की ठंड के मद्देनजर स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में बिजली व्यवस्था सुचारू रखने के लिए कहा है ताकि सर्द हवाएं चलने पर कक्षाओं में खिड़की बंद रखकर पढ़ाई कराई जा सके। इसके चलते अंधेरा न हो और पठन पाठन का काम प्रभावित न हो। शासकीय विद्यालयों की कक्षाओं में विद्युत व्यवस्था के संबंध में मिलने वाली शिकायतों को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें कहा है कि सर्दी में ठंडी हवा से बचाव के लिए खिड़कियों को बंद करने पर कक्षाओं में पर्याप्त प्रकाश की आवश्यकता बढ़ जाती है। प्रकाश के अभाव में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसमें सुधार के लिए कक्षाओं में आवश्यक प्रकाश की व्यवस्था की जाएं। हर कक्षा में कम से कम 4 एलईडी ट्यूबलाईट की व्यवस्था की जाए। प्रकाश व्यवस्था के लिए 7 हजार 125 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में हर विद्यालय के हिसाब से 20 हजार रुपए की राशि सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है। शाला प्रभारियों को प्रकाश व्यवस्था के साथ बिजली के स्विच बोर्ड और आंतरिक विद्युतीकरण व्यवस्था अन्तर्गत तार की मरम्मत के लिये भी कहा है। ऐसे शासकीय विद्यालयों में जहां विद्युतीकरण नहीं है, एमपीईबी से एस्टीमेंट लेकर कर स्वीकृति के लिये वरिष्ठ कार्यालय को भेजे जाएं। इस कार्य को प्राथमिकता दिए जाने के लिए भी कहा है।   recent visitors 62

स्कूली छात्र ने कड़ी मेहनत के बल पर अनूठा ड्रोन बनाने में सफलता हासिल की, जाने क्या है विशेषता

ग्वालियर  ग्वालियर में सिंधिया स्कूल के एक छात्र ने कमाल कर दिखाया है. उसने कड़ी मेहनत के बल पर अनूठा ड्रोन बनाने में सफलता हासिल की. ड्रोन को एक व्यक्ति बैठकर उड़ सकता है. फोर्ट में स्थित सिंधिया स्कूल के मेघावी छात्र का नाम मेधांश त्रिवेदी है. मेधांश त्रिवेदी ड्रोन का सफल परीक्षण भी कर चुका है. होनहार छात्र को सफलता तीन महीने की मशक्कत के बाद मिली. ड्रोन को तैयार करने में करीब साढे़ तीन लाख रुपये का खर्च आया. एमएलडीटी 1 की जानें विशेषता     फिलहाल 4 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम     60 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से मंजिल तक पहुंच सकता है     अनूठे ड्रोन की चौड़ाई 1.8 मीटर और लंबाई 1.8 मीटर है     ड्रोन में करीब 45 हॉर्स पावर से ज्यादा की क्षमता     80 किलो वजन को लेकर 6 मिनट तक हवा में भर सकता उड़ान इंटर के छात्र ने किया कमाल मेधांश ने अनूठे ड्रोन को एमएलडीटी 1 नाम दिया है. होनहार छात्र ने बताया कि चीन के ड्रोन देखकर मन मे भी कुछ अलग करने का विचार आया. टीचर मनोज मिश्रा ने विचार को मूर्त रूप देने में छात्र को प्रोत्साहित किया. मेधांश का कहना है कि तकनीकी रूप से भी टीचर ने मदद की. छात्र का सपना अब एयर टैक्सी कंपनी शुरू करने का है. उसने लोगों के लिए सस्ता हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध कराने की मंशा जताई है. ड्रोन बनाने के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. आखिरकार शिक्षक और परिवार की मदद से छात्र सपने को साकार करने में सफल हुआ. एमएलडीटी 1 सामान्य ड्रॉन से एकदम अलग है. सिंधिया स्कूल के स्थापना दिवस समारोह पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और इसरो चीफ एस सोमनाथ ने मेधांश के इनोवेशन की जी खोलकर प्रशंसा की थी. मेधांश ने बताया कि ड्रोन बिना व्यक्ति के चार किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है. हालांकि सुरक्षा के चलते 10 मीटर तक ही उड़ा रहे हैं. छात्र ने बताया कि फंडिंग की व्यवस्था होने पर ड्रोन को हाइब्रिड मोड पर लॉन्च करने का काम होगा. अभी एमएलडीटी 1 में एग्रीकल्चर ड्रोन की चार मोटर लगा है. ऐसे मिली ड्रोन बनाने की प्रेरणा मेधांश वर्तमान में सिंधिया स्कूल के इंटर का छात्र है. छात्र का कहना है कि आने वाले समय में आम लोगों के काम आने वाले ड्रोन का निर्माण भी होगा. ड्रोन का इस्तेमाल सामान दूसरी जगह पहुंचाने और एग्रीकल्चर में किया जा सकेगा. टीचर मनोज मिश्रा मेधांश की तारीफ करते हैं. उन्होंने बताया कि मेधांश कक्षा 7 से नए-नए आविष्कार के बारे में जानकारी लेता रहता था. मकसद कुछ अलग करने की थी. उन्होंने बताया कि खुद भी मॉडल तैयार करते हैं. मॉडल और चीन के मानव ड्रोन को देखने के बाद मेधांश को ड्रोन बनाने की प्रेरणा मिली. मेधांश की प्रतिभा को देखकर स्कूल के स्टाफ भी मदद को आगे आए हैं. बता दें कि सिंधिया स्कूल का संचालन सिंधिया राज परिवार करता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया स्कूल के संरक्षक हैं. recent visitors 82

रणजीत हनुमान :भक्ति में डूबा शहर, सोने के रथ पर सवार होंगे पवन पुत्र, 51 हजार दीप लगाए जाएंगे

 इंदौर इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर में रणजीत अष्टमी महोत्सव के दिन शनिवार को दीपोत्सव मनाया जाएगा। शाम को 51 हजार दीप लगाए जाएंगे, जिसके बाद भजन संध्या का आयोजन होगा।मुख्य पुजारी पं.दीपेश व्यास ने बताया कि मंदिर में परंपरागत रणजीत अष्टमी महोत्सव मनाया जा रहा हैं। महोत्सव के दूसरे दिन 51 हजार दीपक से मंदिर परिसर रोशन होगा। 21 हजार दीपक मंदिर प्रबंधन द्वारा लगाए जाएंगे।  देश भर में हनुमान जी अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं, लेकिन इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर इकलौता ऐसा मंदिर है. जहां रणजीत रूप में हनुमान जी की पूजा होती है. खास बात यह है कि अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित यह भव्य मंदिर सबसे बड़ी प्रभात फेरी का भी हर साल साक्षी बनता है. शुक्रवार को इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर में भव्य कार्यक्रम के आयोजन की शुरुआत की गई. इस दौरान शहर की सुंदरता और पूरा माहौल देखते ही बन रहा था. रणजीत अष्टमी 4 दिन के महोत्सव की शुरूआत दरअसल, हर साल रणजीत अष्टमी के अवसर पर यहां चार दिन के महोत्सव की शुरुआत होती है. पहले दिन मंदिर पर जिला प्रशासन द्वारा ध्वज अर्पित किया जाता है. इसके बाद भजन संध्या और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. फिर यहां भगवान रणजीत हनुमान स्वर्ण रथ पर सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन के लिए निकलते हैं. इस दौरान निकलने वाली प्रभात फेरी में हर साल हजारों लोग शामिल होते हैं. इस अवसर पर पूरे यात्रा मार्ग में सैकड़ों की तादाद में मंच लगाए जाते हैं. जहां रणजीत हनुमान के भक्ति प्रभात फेरी का स्वागत करते हुए पूजा-अर्चना करते हैं. सीता जी की लंका में खोज के बाद वापस लौटे थे पवन पुत्र मंदिर के पुजारी पंडित दीपेश व्यास बताते हैं कि "इस अवसर पर रणजीत हनुमान के करीब एक रक्षा सूत्रों का वितरण भी होता है. जो सिद्ध किए हुए रक्षा सूत्र होते हैं." शुक्रवार को इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने मंदिर के लिए ध्वज अर्पित करने के अवसर पर बताया कि "रणजीत अष्टमी के अवसर पर आज यहां भजन पूजन के साथ ही ध्वजारोहण का आयोजन किया गया है. चूकी यह पर्व हनुमान जी द्वारा सीता जी की लंका में खोज कर वापस लौटने पर भगवान राम द्वारा उन्हें रंजीत की उपाधि दी गई थी. इस उपाधि के बाद जिस दिन वह वहां लौटकर आए थे. उस दिन अष्टमी थी, इसलिए रंजीत अष्टमी का आयोजन प्रतिवर्ष रणजीत हनुमान मंदिर में किया जाता है. इंदौर रणजीत हनुमान मंदिर     इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर से स्वर्ण रथ पर निकले बजरंग बली, प्रभात फेरी में भक्तों का सैलाब     रणजीत हनुमान मंदिर में प्रभात फेरी और बड़े आयोजन, करोड़ों की लागत से संवरेगा दरबार ऐसा रहेगा चार दिवसीय कार्यक्रम इस आयोजन के साथ ही चार दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है. शनिवार को 51000 दीपक प्रज्वलित किए जाएंगे. रविवार को भगवान रणजीत हनुमान की भजन संध्या होगी. 23 तारीख को सुबह 5:00 बजे सबसे बड़ी प्रभात फेरी, जिसमें लाखों की तादाद में लोग इकट्ठा होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेगें. उसके बाद भोजन प्रसादी का आयोजन भी रणजीत हनुमान मंदिर ट्रस्ट के द्वारा आयोजित किया जाएगा. जिसमें लाखों की तादाद में भक्त जाकर भोजन प्रसादी का आनंद भी लेंगे.   recent visitors 59

बेहतर स्वास्थ्य और शुद्ध मानसिकता का आधार है आहार- डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल ने अक्षय पात्र फाउंडेशन की केंद्रीयकृत रसोई का भोपाल में अवलोकन करते हुए संस्था के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और पौष्टिक भोजन विद्यार्थियों तक पहुँचाने का फाउंडेशन का यह प्रयास न केवल अनुकरणीय है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। उप मुख्यमंत्री ने फाउंडेशन के स्वचालित और योजनाबद्ध कार्य प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है। संस्था में कार्यरत कर्मचारियों के समर्पण को सराहते हुए श्री शुक्ल ने कहा, "अक्षय पात्र फाउंडेशन का यह कार्य बच्चों के भविष्य को संवारने और समाज को प्रेरित करने वाला है।" भोपाल स्थित रसोई से मध्य प्रदेश के 645 विद्यालयों के 35,000 बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है। फाउंडेशन पूरे भारत में 23,000 से अधिक विद्यालयों में 22 लाख 50 हजार बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने फाउंडेशन की स्वचालित प्रक्रिया, साफ-सफाई, समय प्रबंधन और पोषण गुणवत्ता की प्रशंसा करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। इस अवसर पर फाउंडेशन के भोपाल क्लस्टर के अध्यक्ष आचार्य रत्न दासा भी उपस्थित थे।   recent visitors 82

GST: लाइफ और हेल्थ इंश्योंरेस नहीं होगा सस्ता, GST Council ने टैक्स घटाने का फैसला टाला, इन शेयरों पर होगा असर!

 नई दिल्‍ली जीएसटी काउंसिल की बैठक (GST Council Meeting) में एक बड़ा फैसला लिया गया है. मंत्रियों के समूह ने हेल्‍थ और लाइफ इंश्‍योरेंस प्रीमियम पर GST घटाने का प्रस्‍ताव रखा था, जिसे जीएसटी काउंसिल की बैठक में नेक्‍स्‍ट मीटिंग के लिए टाल दिया गया है. इसका मतलब है कि अभी भी लोगों को अपने इंश्‍योरेंस पर पुराने टैक्‍स रेट के हिसाब से प्रीमियम जमा करना होगा. GST परिषद की 55वीं बैठक में स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर प्रीमियम कम करने का फैसला टालने के पीछे वजह बताया गया कि इस पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है. काउंसिल ने मंत्रियों के समूह (GOM) को अपनी रिपोर्ट को और अधिक व्यापक बनाने के लिए अतिरिक्त जानकारी पेश करने के लिए कहा है. इससे पता चलता है कि GST रेट्स को संशोधित करने या हेल्‍थ्‍स और लाइफ इंश्‍योरेंस से संबंधित प्रीमियम को कम करने पर कोई भी फैसला लेने से पहले मामले को और अधिक जांच की आवश्‍यकता है. अभी कितना लगता है जीएसटी रेट्स? वर्तमान में, स्वास्थ्य बीमा, टर्म लाइफ इंश्योरेंस और यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान 18 प्रतिशत जीएसटी दर के तहत आते हैं. एंडोमेंट प्लान में जीएसटी आवेदन अलग है, पहले वर्ष में 4.5 प्रतिशत और दूसरे वर्ष से 2.25 प्रतिशत की दर से. जीवन बीमा के लिए सिंगल प्रीमियम एन्युटी पॉलिसियों पर 1.8 प्रतिशत जीएसटी दर लागू होती है. ये रेट्स सभी आयु वर्ग पर समान रूप से लागू होती हैं. स्वास्थ्य बीमा पर मंत्रिसमूह (GOM) ने 16 दिसंबर को राज्य और केंद्र सरकार के राजस्व अधिकारियों के समक्ष अपनी सिफारिशें रखी थीं. बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि समूह, व्यक्तिगत, वरिष्ठ नागरिकों की पॉलिसियों पर टैक्सेशन के बारे में फैसला करने के लिए बीमा पर जीओएम की एक और बैठक होगी। चौधरी ने मीडिया से कहा कि कुछ सदस्यों ने कहा कि और चर्चा की जरुरत है। हम (GoM) जनवरी में फिर मिलेंगे। जीएसटी काउंसिल ने चौधरी की अध्यक्षता में इंश्योरेंस पर मंत्रियों के समूह (GoM) का गठन किया है, जिसने नवंबर में अपनी बैठक में सावधि जीवन बीमा पॉलिसियों के इंश्योरेंस प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने पर सहमति जताई थी। साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस कवर के लिए वरिष्ठ नागरिकों द्वारा दिए गए प्रीमियम को भी टैक्स से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के अलावा अन्य व्यक्तियों के 5 लाख रुपये तक के हेल्थ इंश्योरेंस के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने का भी प्रस्ताव है। हालांकि 5 लाख रुपये से अधिक के हेल्थ इंश्योरेंस कवर वाली पॉलिसी के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी जारी रहेगा। क्‍या की गई थीं सिफारिश?     जीवन बीमा के लिए छूट:  GOM ने परिवार के सदस्यों को कवर करने वाली शुद्ध अवधि जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए जीएसटी छूट का प्रस्ताव दिया था. इसका मतलब यह होगा कि ये पॉलिसियां जीएसटी के अधीन नहीं होंगी, जिससे पॉलिसीधारकों पर वित्तीय बोझ कम होगा.     सीनियर सिटीजन के लिए हेल्‍थ बीमा पर छूट:  एक अन्य प्रमुख सिफारिश खासतौर से सीनियर सिटीजन के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी से छूट है, जिससे बुजुर्ग आबादी के लिए हेल्‍थ सर्विस को अधिक किफायती बनाने में मदद मिलेगी.     पर्सनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पर जीएसटी दर कम करना:  GOM ने सभी पर्सनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसियों पर जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा है, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के विकल्प के बिना. इसका उद्देश्य प्रक्रिया को सरल रखते हुए व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की लागत को कम करना है. इन शेयरों पर भी असर होगा! सोमवार को जब शेयर बाजार खुलेगा तो जीएसटी रेट में कोई बदलाव नहीं करने से हेल्‍थ इंश्‍योरेंस और लाइफ इंश्‍योरेंस देने वाली लिस्‍टेड कंपनियों के शेयरों जैसे- पॉलिसीबाजार, गो डिजिट और निवा बूपा (Policy Bazaar, Go Digit, Niva Bupa Stocks) पर इसका असर हो सकता है. recent visitors 72

सरकार की लाड़ली बहना योजना का विस्तार की योजना नहीं, 21 से 60 वर्ष तक की महिलाएं पात्र, 1.28 करोड़ को मिल चुका है लाभ

भोपाल  लाड़ली बहना योजना का सरकार विस्तार नहीं करेगी। 60 वर्ष से अधिक की महिलाओं को इसमें शामिल करने का कोई विचार नहीं है। योजना 21 से 60 वर्ष तक की महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें एक करोड़ 28 लाख हितग्राही हैं और इन्हें जून 2023 से दिसंबर 2024 तक 29 हजार 218 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। यह जानकारी भाजपा विधायक डा.चिंतामणि मालवीय के ध्यानाकर्षण के लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने दी। 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को शामिल करने का तर्क डा. मालवीय ने 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को योजना में शामिल करने की बात उठाई। उन्होंने ध्यानाकर्षण में कहा कि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की माताओं तथा वरिष्ठ नागरिकों को राहत राशि की अधिक आवश्यकता होती है, इसलिए योजना का विस्तार किया जाना चाहिए। 21 वर्ष से 60 वर्ष की महिलाएं शामिल इसके उत्तर में विभागीय मंत्री ने बताया कि योजना में 21 वर्ष से 60 वर्ष की आयु पूरी होने तक महिलाएं शामिल हैं। पहले आयु 23 वर्ष थी, जिसे घटकार 21 वर्ष किया गया। ट्रैक्टर रखने वाले परिवार की विवाहित महिलाओं को भी पात्रता दी गई। जुलाई से अगस्त 2023 में छह लाख 339 नए हितग्राही जोड़े गए। जनवरी से दिसंबर 2024 तक 19,221 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। व्यापक विचार-विमर्श के बाद पात्रता आयु 21 से 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक की महिलाओं को ही लक्षित हितग्राही बनाया है। 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए कई योजनाएं राज्य और केंद्र सरकार 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला एवं वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। इसलिए लाड़ली बहना योजना का 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए विस्तार करने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। recent visitors 83