इंदौर मेट्रो की बंगाली चौराहे से पलासिया तक अंडर ग्राउंड लाइन पर 1600 करोड़ रुपये की जरूरत

इंदौर  इंदौर मेट्रो का बंगाली चौराहे से पलासिया तक हिस्सा अंडर ग्राउंड करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए करीब 1600 करोड़ रुपये की जरूरत है। केंद्रीय आर्थिक कार्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार हमें इस संबंध में जो प्रस्ताव देगी, उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। मंत्रालय की यह टीम पहली बार निरीक्षण के लिए इंदौर आई।  मंत्रालय के अन्य बहुपक्षीय संस्थाएं प्रभाग की अवर सचिव नीलिमा मिंज व सेक्शन ऑफिसर हिमांशु सिंह ने इंदौर मेट्रो डिपो व प्रायोरिटी कॉरिडोर के स्टेशन नंबर पांच व तीन का निरीक्षण किया। प्रायोरिटी कॉरिडोर के स्टेशनों का निरीक्षण वे इंदौर मेट्रो निर्माण कार्य की प्रगति से संतुष्ट दिखे। नेशनल डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के सदस्यों ने भी मेट्रो के कास्टिंग यार्ड, सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी स्टेशनों का निरीक्षण किया। गौरतलब है कि मेट्रो के प्रथम चरण में 17 किलोमीटर हिस्से के लिए एनडीबी ने 1600 करोड़ रुपये लोन के रूप में देना तय किया है। इसमें से एनडीबी अभी तक लगभग 50 फीसद राशि दे चुकी है। ऐसे में एनडीबी के सदस्य यह आकलन कर रहे हैं कि मेट्रो को दी गई राशि का उपयोग किस तरह हुआ है। एनसीआर, ग्रेटर नोएडा में कुछ नहीं था, मेट्रो बनी तो विकास हुआ, ऐसा यहां भी होगा केंद्रीय आर्थिक कार्य मंत्रालय की अवर सचिव नीलिमा मिंज ने कहा कि जब एनसीआर में ग्रेटर नोएडा में मेट्रो चलाई गई थी तो उस समय वह क्षेत्र भी इंदौर के आज के सुपर कॉरिडोर की तरह हुआ करता था। मेट्रो बनने के बाद वहां विकास हुआ। ऐसे में इंदौर में सुपर कॉरिडोर आज भले आउटर एरिया है, लेकिन यहां पर कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान आएंगे। रिक्त जमीन पर माल व अन्य निर्माण होंगे। यह भी भविष्य में रहवासी व व्यवसायिक हब के रूप में विकसित होगा। मंत्रालय के सेक्शन आफिसर हिमांशु सिंह ने बताया कि मेट्रो के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। इंदौर में मेट्रो का निर्माण कार्य ठीक चल रहा है। हम पहली बार मेट्रो का भौतिक व वित्तीय निरीक्षण करने के लिए आए हैं। अभी तक मेट्रो का कार्य संतोषजनक है। मेट्रो की रिंग बनने के बाद होगा फायदे का सौदा सुपर कॉरिडोर पर मेट्रो के 5.9 किमी हिस्से पर फिलहाल कमर्शियल रन शुरू होना है। वहीं इसके बाद रेडिसन चौराहे तक 17 किलोमीटर हिस्से में कमर्शियल रन होगा। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक मेट्रो का अंडर ग्राउंड हिस्सा बनने क बाद जब मेट्रो की रिंग तैयार हो जाएगी तो इस पर काफी ज्यादा संख्या में यात्री सफर करेंगे। उसके बाद इंदौर मेट्रो फायदे में होगी। शुरुआती स्तर पर मेट्रो स्टेशन पर विज्ञापन व दुकानों की बिक्री कर मेट्रो की आय बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। यात्री किराए से मेट्रो को आय स्तर पर ज्यादा लाभ नहीं होगा। recent visitors 100

डीओएम से देश में ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया

नईदिल्ली केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मानसून मिशन, मिशन मौसम और डीप ओशन मिशन (डीओएम) शुरू किए हैं। इनमें से डीओएम से देश में ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी है। डीप ओशन मिशन को भारत सरकार के ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए अहम परियोजना के रूप में देखा जा सकता है। वर्ष 2021 से डीप ओशन मिशन शुरू किया गया था पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में 7 सितंबर 2021 से डीप ओशन मिशन शुरू किया गया था। दरसल ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) में मछली पकड़ना और अन्य गतिविधियाँ शामिल हैं, जो देश के लिए बेहद फायदेमंद है। वहीं, डीओएम एक बहु-मंत्रालयी, बहु-विषयक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र में रहने वाले और निर्जीव संसाधनों की खोज करना है ताकि ब्लू इकोनॉमी का समर्थन किया जा सके और महासागर संसाधनों का सतत दोहन किया जा सके। डीओएम के उद्देश्य गहरे समुद्र के संसाधनों की बेहतर समझ के लिए हैं, जिससे नीली अर्थव्यवस्था का विस्तार करने के प्रयासों में सहायता मिलेगी। डीओएम की गतिविधियाँ डीओएम की गतिविधियाँ ब्लू इकोनॉमी के घटकों, जैसे मत्स्य पालन, पर्यटन और समुद्री परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा, जलीय कृषि, समुद्र तल संसाधन अन्वेषण गतिविधियाँ और समुद्री जैव प्रौद्योगिकी में मदद करेंगी। डीओएम के तहत विकसित की गई प्रौद्योगिकियाँ महासागरों की खोज करने और संभवतः ऊर्जा, मीठे पानी और रणनीतिक खनिजों जैसे निर्जीव संसाधनों का दोहन करने में मदद करेंगी। मिशन के तहत विकसित की जाने वाली सलाह सामाजिक और आर्थिक लाभों के लिए उपयोगी समुद्र के स्तर, तीव्रता और तूफानों की आवृत्ति आदि के बारे में मिशन के तहत विकसित की जाने वाली सलाह भारतीय तटीय क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक लाभों के लिए उपयोगी होगी। गहरे समुद्र में रहने वाले और निर्जीव संसाधनों की बेहतर समझ और कोबाल्ट, निकल, तांबा और मैंगनीज जैसे रणनीतिक खनिजों की खोज से इन संसाधनों के भविष्य के वाणिज्यिक दोहन का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है। महासागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण अध्ययन अपतटीय ऊर्जा और मीठे पानी के उत्पादन के लिए हैं। डीओएम के उद्देश्यों में गहरे समुद्र की प्रौद्योगिकियों का विकास है शामिल गहरे समुद्र मिशन ( डीओएम) के उद्देश्यों में गहरे समुद्र की प्रौद्योगिकियों का विकास शामिल है, जिसमें गहरे समुद्र में खनन के लिए प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ 6000 मीटर पानी की गहराई के लिए निर्धारित मानवयुक्त पनडुब्बी का विकास, महासागर जलवायु परिवर्तन सलाहकार सेवाओं का विकास, गहरे समुद्र में खनिज संसाधनों और समुद्री जैव विविधता की खोज, गहरे समुद्र में सर्वेक्षण और बहु-विषयक अनुसंधान पोत की खोज और अधिग्रहण, तथा समुद्री जीव विज्ञान और गहरे समुद्र प्रौद्योगिकी में क्षमता निर्माण के साथ-साथ महासागर जीव विज्ञान के लिए एक उन्नत समुद्री स्टेशन की स्थापना शामिल है। हो रहा है व्यापक सर्वेक्षण और अन्वेषण कार्य वहीं दूसरी ओर डीओएम के एक भाग के रूप में , निकेल, कोबाल्ट, तांबा, मैंगनीज इत्यादि से समृद्ध पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स (पीएमएन) के लिए मध्य हिंद महासागर बेसिन में और तांबा, जस्ता इत्यादि से समृद्ध पॉलीमेटेलिक सल्फाइड्स (पीएमएस) के लिए मध्य और दक्षिण पश्चिम भारतीय कटकों में व्यापक सर्वेक्षण और अन्वेषण कार्य किया जा रहा है। भारत ने 75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए मध्य हिंद महासागर बेसिन में पीएमएन और 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए मध्य और दक्षिण पश्चिम भारतीय तटों में पीएमएस के अन्वेषण के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। गहरे महासागरीय संसाधनों की खोज और उनके सतत उपयोग के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास करने से समुद्री संसाधनों का अति-शोषण नहीं होगा। ‘उच्च समुद्र’ संधि पर हस्ताक्षर को मंजूरी इसके अलावा, वर्ष 2021 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत को राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से अलग जैव विविधता (BBNJ) समझौते या ‘उच्च समुद्र’ संधि पर हस्ताक्षर करने की मंज़ूरी दी। बीबीएनजे संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के तहत एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में समुद्री जैविक विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय देश में बीबीएनजे समझौते के कार्यान्वयन का नेतृत्व करेगा। recent visitors 60

अमेरिका-रूस के बाद चीन दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी परमाणु शक्ति, एक साल में जुटाए 100 हथियार

वॉशिंगटन मिडिल ईस्ट और यूरोप के कई देश फिलहाल जंग की मार झेल रहे हैं। बीते साल इजरायल ईरान और रूस यूक्रेन की जंग में दुनिया के कई देश उलझे रहे। इस दौरान पूरी दुनिया का ध्यान गाजा और यूक्रेन पर ही रहा। हालांकि इस बीच भी चीन अपनी चालबाजियों में जुटा रहा। अमेरिका में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल चीन की परमाणु शक्ति कई गुणा बढ़ गई है। यह रिपोर्ट बुधवार को सामने आई है जिसमें कई खुलासे और दावे किए गए हैं। पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन अपने परमाणु शक्ति बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने ताइवान के खिलाफ आक्रमकता बढ़ा दी है। वहीं पिछले एक साल में चीन ने रूस के साथ नजदीकियां भी बढ़ाई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मई तक चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार थे। दावा किया गया है कि 2030 तक यह आंकड़ा 1,000 से भी ज्यादा होगा। चीन ने 2020 की तुलना में तीन गुना किया परमाणु भंडार अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की इस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 2020 की तुलना में अपने परमाणु हथियारों का भंडार लगभग तीन गुना बढ़ाया है। यानी पिछले 4 साल में उसकी एटमी ताकत काफी बढ़ चुकी है। 18 दिसंबर को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 में चीन के परमाणु बमों की संख्या 600 से ज्यादा हो चुकी है। 2030 तक चीन के पास होंगे 1000 परमाणु बम रिपोर्ट के मुताबिक, चीन जिस स्पीड से अपने परमाणु भंडार को बढ़ाने में लगा है, उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि 2030 तक उसके पास 1000 से ज्यादा परमाणु बम होंगे। इनमें से कई एटम बम को ड्रैगन पूरी तरह से तैनाती वाले मोड में रखेगा। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी के मुताबिक, चीन न सिर्फ एटमी हथियार बढ़ा रहा है, बल्कि इन्हें कई तरह से डेवलप कर रहा है। ड्रैगन इस वक्त कम क्षमता वाली सटीक स्ट्राइक मिसाइलों से लेकर ICBM तक की प्रणालियों पर काम कर रहा है। सालभर पहले चीन के पास थे 500 परमाणु बम पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल पहले यानी 2023 तक चीन के पास परमाणु बमों की संख्या 500 के आसपास थी। यानी बीते एक साल में उसने 100 न्यूक्लिकर हथियार बना लिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन प्लूटोनियम का उत्पादन करने के लिए अपने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टरों का इस्तेमाल कर सकता है। इतना ही नहीं, चीन की पीपुल्स रिपब्लिक आर्मी की बढ़ती ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी रेंज में अमेरिका के कई बड़े शहर हैं। चीन के लिए भ्रष्टाचार बना सबसे बड़ी चुनौती रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से परमाणु बम बना रहे चीन के लिए भ्रष्टाचार सबसे बड़ी चुनौती है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2050 तक पीपुल्स आर्मी को दुनिया की सबसे बड़ी सेना बनाना चाहते हैं, लेकिन चीनी सरकार के साथ ही सेना में बढ़ते भ्रष्टाचार ने उनके लक्ष्य को पीछे धकेलने का काम किया है। चीन का आया जवाब इस रिपोर्ट पर चीन ने भी जवाब दिया है। चीन ने कहा है कि वह सेल्फ डिफेंस के लिए परमाणु रणनीति को अपनाता है। चीन ने हमेशा पहले आक्रमण ना करने की नीति का पालन किया है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी न्यूनतम स्तर पर अपनी परमाणु क्षमताओं को बनाए रखा है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने बुधवार को कहा कि पेंटागन की ऐसी रिपोर्ट कोल्ड वार की मानसिकता से भरी हुई हैं, जिसका चीन दृढ़ता से विरोध करता है। क्या प्लानिंग कर रहा चीन एक अमेरिकी अधिकारी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि बीजिंग तकनीकी रूप से लैस परमाणु शक्ति विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। परमाणु हथियारों की अपेक्षित संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। अधिकारी ने कहा कि चीन अलग-अलग तरह के लक्ष्यों पर हमला करने, अधिक नुकसान करने और जवाबी हमलों के लिए अधिक विकल्प रखने में सक्षम होने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने कई मौकों पर चीन से अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में अधिक पारदर्शी होने की अपील की है। recent visitors 161

दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी और हरियाणा में भी पटाखों की बिक्री पर लगाया बैन

नई दिल्ली दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एनसीआर में आने वाले यूपी और हरियाणा में भी पटाखों की बिक्री पर बैन लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अगले आदेश तक दोनों राज्यों में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। दरअसल गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के साथ-साथ अन्य शहरों में भी बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राजधानी में पूरे साल पटाखों के स्टॉक और बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इसका असर तभी होगा, जब NCR के दूसरे शहरों में भी ऐसी ही रोक हो। इसलिए यूपी और हरियाणा भी ऐसा करें। राजस्थान ने भी लगाया है प्रतिबंध: कोर्ट लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा, 'हमारा मानना ​​है कि यह प्रतिबंध तभी प्रभावी होगा, जब एनसीआर क्षेत्र का हिस्सा बनने वाले अन्य राज्य भी इसी तरह के उपाय लागू करेंगे। यहां तक ​​कि राजस्थान राज्य ने भी राजस्थान के उस हिस्से में इसी तरह का प्रतिबंध लगाया है, जो एनसीआर क्षेत्रों में आता है। फिलहाल हम उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों को उसी तरह का प्रतिबंध लगाने का निर्देश देते हैं, जैसा कि दिल्ली राज्य ने 19 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत लगाया है।' जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण से निपटने के उपायों की समीक्षा की। सुनवाई के दौराम पटाखों पर साल भर के प्रतिबंध, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया। राज्यों को टीमें गठित करने का निर्देश इसके अलावा प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अंतर्गत आने वाले राज्यों को आदेश दिया कि वे सभी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-4) के तहत प्रदूषण से बचने वाले उपायों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके क्रियान्वयन के लिए विभिन्न अधिकारियों की टीमें गठित की जानी चाहिए। इन राज्यों में एनसीआर क्षेत्र में आने वाले यूपी और हरियाणा शामिल हैं। पीठ ने निर्देश देते हुए कहा कि हम एनसीआर राज्यों को GARP- IV उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए पुलिस, राजस्व अधिकारियों की टीमों का गठन करने का निर्देश देते हैं। हम यह कहते हैं कि इस टीम में बनाए गए सदस्य इस न्यायालय के अधिकारी के रूप में काम करेंगे। recent visitors 63

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा – छात्र शक्ति में ही राष्‍ट्र भक्ति समाहित होती है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि छात्र शक्ति में ही राष्‍ट्र भक्ति समाहित होती है। विद्यार्थी अपने जीवन में शिक्षा और व्‍यावहारिक ज्ञान के साथ निरंतर आगे बढे़ और चिंतन-मनन के साथ अपने कर्तव्‍य पथ पर अग्रसर हों। यह बात प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को तात्‍या टोपे नगर गुना में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्‍य भारत के 57वां प्रांतीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुना में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित होकर अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई है। विद्यार्थी जीवन भविष्‍य को तय करता है। विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्‍यावहारिक ज्ञान से परिपूर्ण होना चाहिए। हम सभी को राष्‍ट्रवादी विचारधारा के साथ समाज को एक नयी दिशा प्रदान करने का दायित्‍व निभाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि भगवान श्रीकृष्‍ण को आदर्श मानकर उनके बताये मार्ग पर आगे बढे और अपने लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करें। विद्यार्थियों की शक्ति से ही भारत में लोकतंत्र की नींव मजबूत हुई है। मताधिकार 18 वर्ष के युवाओं को प्राप्‍त हुआ है। शिक्षा व्‍यवस्‍था के व्‍यापारीकरण को समाप्‍त किया गया। साथ ही शिक्षा में सुधार के लिये आवश्यकतानुसार बदलाव किया जा रहा हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा हमारे प्राचीन आदर्शों को सहेजने तथा संस्‍कृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के सराहनीय प्रयास किये गये है। उन्होंने शिक्षा की महत्‍ता को देश में स्‍थापित किया हैं। साथ ही नयी शिक्षा नीति तथा प्राचीन संस्‍कृति को सहेजने के लिये आवश्‍यक कदम उठाये हैं। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुना जिले को तात्‍या टोपे विश्‍वविद्यालय की सौगात मिलने से विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षा के प्रति आगे बढ़ाने के रास्‍ते आसान होगे। उन्‍होनें कहा कि प्रदेश में 55 एक्‍सीलेंस कॉलेज प्रारंभ किये गये हैं। साथ ही कृषि संकाय की पढाई प्रारंभ करवाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कॉलेजों में रोजगार देने वाले कोर्स प्रारंभ करने के लिये सरकार प्रतिबद्ध हैं। प्रदेश में 15 वर्ष में 30 मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किये गये। इन कॉलेजों में 5 हजार बच्‍चों की सीटें सुरक्षित रखी गई। आने वाले समय में 52 मेडिकल कॉलेजों में 10 हजार युवाओं को लाभ दिलाये जाने की योजना पर सरकार कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में एक-एक इंच सिंचाई के लिये सरकार कार्य कर रही है। पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से सिंचाई के लिये पानी उपलब्‍ध करवाया जायेगा। इन परियोजना का भूमि-पूजन शीघ्र ही प्रधानमंत्री श्री मोदी करेगें। युवाओं को रोजगार उपलब्‍ध कराने के लिये संभाग स्‍तर पर रीजनल इण्‍डस्‍ट्रीज कॉन्‍क्‍लेव का आयोजन कर उद्योगों के लिये उद्योगपतियों से निरंतर बातचीत हो रही हैं। उद्योगों की स्‍थापना के लिये सरकार हरसंभव मदद करेगी। उन्‍होनें कहा कि सरकार युवाओं के साथ संवाद स्‍थापित कर प्रदेश का विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिये कार्य करेगी। कार्यक्रम में श्री आशीष चौहान, श्री धर्मेंद्र राजपूत, श्री संदीप वैष्णव, सुश्री मोनिका शर्मा, श्री राजेश अग्रवाल, श्री यशवर्धन भार्गव, श्री वरुण सिंह, श्री शिवराज चंदेल उपस्थित रहे।   recent visitors 52

पुलिस ने 41 मोटरसाइकिल साइलेंसर जब्त किए जिन पर पुलिस ने रोड रोलर चलवाकर नष्ट करा दिया

विदिशा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले बाइक चालकों के खिलाफ विदिशा पुलिस कार्रवाई कर रही है। जिले के विदिशा, गंजबासौदा और सिरोंज क्षेत्रों में पिछले एक महीने के दौरान पुलिस ने 41 मोटरसाइकिल साइलेंसर जब्त किए जिन पर गुरुवार को पुलिस ने रोड रोलर चलवाकर नष्ट करा दिया। बंदूक की गोली चलने जैसी तेज आवाज यातायात प्रभारी निरपत सिंह लोधी ने बताया कि यह सभी साइलेंसर भारी मोटरसाइकिलों में लगाए गए थे, जिन्हें मॉडिफाई करके अधिक शोर पैदा करने के लिए उपयोग में लाया जा रहा था। इन साइलेंसरों से न केवल सामान्य आवाज़ के मुकाबले अधिक शोर होता था, बल्कि कई बार बंदूक की गोली चलने जैसी तेज आवाज भी सुनाई देती थी। इससे न केवल ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा था, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य वाहन चालकों को असुविधा हो रही थी।   मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ कार्रवाई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। यातायात विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और ऐसी गतिविधियों में शामिल न हों, जो दूसरों की शांति और सुरक्षा को प्रभावित करती हैं। विदिशा में ऐसी पहली कार्रवाई नीमताल चौराहे पर 41 साइलेंसर लाइन से रखे गए, फिर रोड रोलर चलवा दिया। इसके बाद साइलेंसर सड़क पर पापड़ की तरह चिपक गए। विदिशा पुलिस की इस कार्रवाई को स्थानीय नागरिकों से सराहना मिल रही है। लोगों का कहना है कि ऐसी कार्रवाई विदिशा में वे पहलीबर देख रहे है। ये कदम सड़क सुरक्षा और शांति बनाए रखने की दिशा में एक सही पहल है। recent visitors 47

मध्यप्रदेश बनेगा मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म का केंद्र : प्रमुख सचिव श्री शुक्ला

 अंतर्राष्ट्रीय डेलिगेट्स के साथ मेडिकल टूरिज्म को बढ़ाने पर हुआ मंथन।  इथोपिया और उज्बेकिस्तान से आए डेलीगेट्स से किए लक्ष्य साझा।  भोपाल. प्रमुख सचिव, पर्यटन और संस्कृति विभाग एवं प्रबंध संचालक, म.प्र. टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश आने वाले समय में मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म का केंद्र बनेगा। मध्यप्रदेश पर्यटन गन्तव्य स्थल अपने आप में वेलनेस स्थल है। यहां की प्राकृतिक नैसर्गिक सुंदरता और शांति के साथ आयुर्वेदीय जड़ी बूटियों और औषधीय वनोपज की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रमुख सचिव श्री शुक्ला कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में स्वास्थ्य पर्यटन और वेलनेस से संबंधित अतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के समूह और राज्य के हेल्थ, मेडिकल और टूरिज्म के प्रमुख हितधारकों को संबोधित कर रहे थे। प्रमुख सचिव श्री शुक्ला ने कहा कि पर्यटन के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता के द्रष्टिगत मध्यप्रदेश उच्च स्तरीय अंतराष्ट्रीय स्तर की सेवाएं देने के लिए सक्षम है। साथ ही विदेश और अन्य राज्यों की तुलना में चिकित्सा सुविधाएं काफी सस्ती हैं । हमारे चिकित्सक अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हैं ।    प्रमुख सचिव श्री शुक्ला ने चिकित्सा और पर्यटन के सभी हितधारकों को साझा प्रयास कर मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने का आग्रह किया। साथ ही शासन द्वारा हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य मध्यप्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ, ‘मेडिकल और वेलनेस’ के हित धारकों के बीच सहयोग के अवसरों को सृजित करना था। कार्यशाला में इस बात पर भी बल दिया गया कि प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थाओं, वहाँ उपलब्ध सेवाओं तथा उपचार के सम्पूर्ण पैकेज आदि की जानकारी वेबसाइट पर देने से बेहतर प्रचार प्रसार होगा। विदेशी प्रतिनिधियों ने उनके देश के साथ MoU करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।  इथोपिया और उज्बेकिस्तान से आए सभी डेलीगेट्स शुक्रवार को इंदौर में मेडिकल और वेलनेस की सुविधाओं और आवश्यक अधोसंरचनाओं पर अवसरों एवं संभावनाओं पर हितधारकों से चर्चा करेंगे। बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय गणराज्य उज्बेकिस्तान उप प्रमुख श्री शोखोबुद्दीन गुल्यामोव, श्री अब्दुजामोल जुराऐव, श्री एलूबाबोर बूनो और इथियोपिया के स्वास्थ्य मंत्रालय से डॉ. आइरुसलेम बेफेकाडु येरडॉ, डॉ. टेजिना रेगास्सा शामिल हुए। सभी ने मध्यप्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने एवं आवश्यक अधोसंरचना सहित प्रयासों पर चर्चा की। मध्यप्रदेश में मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म की वर्तमान सुविधाओं एवं अवसरों पर प्रजेन्टेशन भी दिया गया। अंतर्राष्ट्रीय डेलिगेट्स ने सुबह यूनेस्को विश्व धरोहर सांची की यात्रा की और शाम को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में अंतर्राष्ट्रीय वन मेले का अवलोकन भी किया ।     इसके साथ ही एमपी के स्टेकहोल्डर्स में उप संचालक आयुष डॉ. राजीव मिश्रा, गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन और सीईओ सीनियर प्रोफेसर कविता एन सिंह, अपोलो सेज हॉस्पिटल के मार्केटिंग प्रमुख श्री अरुण मोदी, ताज होटल्स के डीओएसएम श्री वरुण खंडेलवाल, गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन, सागर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉयरेक्टर श्री आदित्य अग्रवाल, मेडिकल डायरेक्टर सिद्धार्थ रेडक्रॉस श्री सिद्धार्थ वार्ष्णेय, मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रुति वासुदेवन, पीपुल्स ग्रुप के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अशोक, बंसल हॉस्पिटल के डॉ. अतुल समैया सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद थे। recent visitors 47