छत्तीसगढ़ में 6 दिनों में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का आंकड़ा 3 लाख टन के पार पहुंचा

रायपुर  छत्तीसगढ़ में इन दिनों किसानों की बल्ले-बल्ले है. प्रदेश के किसानों ने महज 6 दिन में ही 502 करोड़ 53 लाख रुपये की कमाई कर ली है. यह कमाई किसानों को धान बेचने के एवज में हुई है. राज्य में 14 नवंबर से सरकारी सोसायटियों में धान खरीदी का महाअभियान चल रहा है. इस अभियान के तहत 68 हजार 668 किसानों ने 3.09 लाख मीट्रिक टन धान बेचा है. इसकी एवज में उन्हें 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान 6 दिनों में किया जा चुका है.धान खरीदी की यह प्रक्रिया करीब 70 दिन और चलेगी. 3 लाख टन के पार पहुंचा आंकड़ा छत्तीसगढ़ सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयालदास बघेल के हवाले से मिली जानकारी में कहा गया है कि 14 नवंबर से 19 नवंबर तक राज्य में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का आंकड़ा  3 लाख टन के पार पहुंच गया है. मंत्री बघेल ने कहा कि धान खरीदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रदेश के पंजीकृत किसानों से 2 हजार 739 उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर धान खरीद रही है. चालू विपणन वर्ष में 160 लाख टन धान उपार्जन का अनुमान है. 31 जनवरी तक चलेगा अभियान बता दें कि देव-दीवाली 14 नवंबर से शुरू हुए धान खरीदी महापर्व के 6वें दिन तक 3.09 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है. धान खरीदी का यह महाअभियान 31 जनवरी 2025 तक चलेगा. खाद्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में आज 20,296 किसानों से 93 हजार 581 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है. राज्य में धान बेचने के लिए इस साल 27.68 लाख किसानों का पंजीयन हुआ है, जिसमें 1.42 लाख नए किसान शामिल हैं. 19 नवंबर के लिए कुल 23791 टोकन जारी किए गए थे. आगामी दिवस के लिए 19934 टोकन जारी किए गए हैं.धान खरीदी व्यवस्था पर निगरानी के लिए अलग अलग जिलों के लिए राज्य स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाई गई है, जो लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं. recent visitors 57

नागरिक सुविधा व जनसामान्य के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का मुख्यमंत्री डैशबोर्ड एक उत्कृष्ट उदाहरण है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सरकार के कामकाज को बेहतर बनाने और नागरिक सुविधा व जनसामान्य के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का मुख्यमंत्री डैशबोर्ड एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधीनगर में गुजरात सीएम डैशबोर्ड की कार्यप्रणाली का अवलोकन करने तथा उसके संचालन संबंधी जानकारी प्राप्त करने के बाद उक्त विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ई-गवर्नेंस एप्लीकेशन, वेब सर्विसेज, कॉल सेंटर, ग्राम और तालुका स्तर से डाटा कलेक्शन, डाटा इंटीग्रेशन, डाटा वैलिडेशन, परफॉर्मेंस मेजरमेंट, फीडबैक सिस्टम और फीडबैक के आधार पर हितग्राही संतुष्टि से अवगत होने के लिए स्थापित व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पारदर्शिता बढ़ाने और वास्तविक समय में डेटा प्राप्त करने में सहायक उल्लेखनीय है कि गुजरात सीएम डैशबोर्ड एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। यह राज्य सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं और प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन में सहायक है। यह डैशबोर्ड राज्य के प्रशासन को पारदर्शी, प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। डैशबोर्ड पर योजनाओं की निगरानी और उनकी प्रगति का आंकलन किया जाता है, इससे यह सुनिश्चित होता है कि योजनाएं समय पर और प्रभावी तरीके से लागू हो रही हैं। डैशबोर्ड पर विभिन्न सरकारी विभागों के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों को ट्रैक भी किया जाता है, यह संकेतक राज्य के विकास और प्रशासन की गति को मापने में सहायक हैं। डैशबोर्ड पारदर्शिता को भी बढ़ावा देने और वास्तविक समय में डेटा प्राप्त करने में सहायक है। डैशबोर्ड स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क निर्माण व अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार और बेहतर प्रदर्शन में भी सहायक है।   recent visitors 25

प्रदेश के Lawyer पराली जलाने वालों का केस नहीं लड़ेंगे, MP हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने लिया कड़ा फैसला

जबलपुर मध्य प्रदेश में पराली जलाने (Stubble Burning) के आंकड़े चिंताजनक हैं. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में 15 सितंबर से 18 नवंबर 2024 के बीच लगभग 27 हजार 319 मामले पराली जलाने के सामने आए हैं. इसमें बताया गया है कि सबसे ज्यादा पराली के मामले मध्य प्रदेश के श्योपुर में रिकॉर्ड किए गए हैं. MP में 15 सितंबर से 14 नवंबर 2024 के बीच पराली जलाने की जो घटनाएं सामने आईं, उनमें सर्वाधिक 489 श्योपुर में दर्ज की गईं. जबलपुर में 275 घटनाएं हुईं तो ग्वालियर, नर्मदापुरम्, सतना, दतिया जैसे जिलों में लगभग 150-150 घटनाएं दर्ज की गईं. यह आंकड़ें पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान प्रदेशों से भी अधिक हैं. वहीं अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (MP High Court Bar Association) ने पराली जलाने के मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए यह निर्णय लिया है कि इस आरोप में फंसे किसानों की ओर से अधिवक्ता पैरवी नहीं करेंगे. यह निर्णय एसोसिएशन की कार्यकारिणी सभा की बैठक में लिया गया. वकीलों का क्या कहना है? एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता डीके जैन ने बताया कि बैठक में पराली जलाने के कारण होने वाले गंभीर पर्यावरणीय खतरों और जनजीवन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा की गई. पराली जलाने से खेतों की उर्वरता प्रभावित होती है, जीव-जंतुओं की मौत होती है, वायुमंडल जहरीला बनता है और लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर हुआ विमर्श     पराली जलाने से खेतों की उर्वरक क्षमता घटती है, जिससे अधिक रासायनिक खाद का उपयोग करना पड़ता है.     देश भर में पराली जलाने से वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन गया है, खासकर हरियाणा, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों में.     मध्य प्रदेश में पलारी (फसल अवशेष) जलाने पर पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है. इस पर विभिन्न कानूनों के तहत अपराध दर्ज किया जा सकता है, जैसे वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 जिसके तहत पलारी जलाना वायु प्रदूषण फैलाने का अपराध माना जाता है. इसमें दोषी पाए जाने पर जुर्माना या कारावास हो सकता है. ये अधिनियम भी हैं पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 : इस अधिनियम के तहत पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों पर रोक लगाई गई है. धारा 15 के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. भारतीय दंड संहिता (IPC) : धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना) अगर प्रशासन ने फसल जलाने पर प्रतिबंध लगाया हो और फिर भी कोई इसका उल्लंघन करे, तो यह अपराध दर्ज हो सकता है. धारा 269/270: जीवन के लिए खतरनाक लापरवाही या जानबूझकर बीमारी फैलाने का प्रयास. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देश : NGT ने पराली जलाने पर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं. जिला प्रशासन और संबंधित विभाग दोषियों पर जुर्माना लगाते हैं. जुर्माने की राशि भूमि क्षेत्र के हिसाब से तय होती है. जैसे  2 एकड़ तक: ₹2,500 वहीं 2-5 एकड़ पर ₹5,000 जबकि 5 एकड़ से अधिक पर ₹15,000 जुर्माना हो सकता है. स्थानीय प्रशासनिक नियम : जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारी संबंधित क्षेत्र में विशेष आदेश जारी कर सकते हैं. किसानों को अवगत कराने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं. समाधान और प्रोत्साहन पराली प्रबंधन मशीनरी की व्यवस्था के लिए किसानों को अनुदान मिलता है. वहीं जागरूकता अभियान के जरिए वैकल्पिक विधियों (जैसे मल्चिंग, खाद बनाना) को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है. यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उस पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है. एसोसिएशन ने बताया क्या है समस्या का प्रमुख कारण? एसोसिएशन ने निर्णय लिया है कि देशहित में पराली जलाने पर प्रतिबंध का समर्थन करते हुए इससे जुड़े अपराधियों की पैरवी नहीं की जाएगी. साथ ही, जागरूकता की कमी और प्रशासनिक उदासीनता को भी इस समस्या का प्रमुख कारण बताया गया. यह कदम पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. एसोसिएशन ने सरकार और न्यायालय द्वारा पराली जलाने पर जारी निर्देशों के पालन का आह्वान भी किया. recent visitors 49

अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल  मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि शासकीय सेवकों की स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जाए। अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाए। सामान्य प्रशासन विभाग के प्रविधानों के अनुसार स्थानांतरण प्रक्रिया में विभिन्न कारणों यथा पति-पत्नी शासकीय सेवक हैं और एक ही कार्यस्थल में पदस्थापना चाहते हैं, स्वयं की गंभीर बीमारी, परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य समस्याओं या अन्य बड़े कारणों के लिए प्राथमिकता दी जाए। पोर्टल पर समय पर उपलब्ध कराएं जानकारी उन्होंने कहा, ई-एचआरएमआइएस में ऐसे प्रविधान किए जाएं कि स्थानांतरण में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो। पोर्टल में शासकीय सेवकों की आवश्यकताओं और प्रविधानों के अनुरूप सभी जरूरी सुधार किए जाएं। रिक्तियों की अद्यतन जानकारी पोर्टल पर समय पर उपलब्ध कराई जाए। एक सप्ताह में तैयारियां करने को कहा उप मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए ई-एचआरएमआइएस पोर्टल के प्रविधानों की समीक्षा की। उन्होंने पोर्टल में सभी तैयारियां एक सप्ताह में करने के लिए कहा है। एमपीएसईडीसी के प्रतिनिधियों ने पोर्टल के प्रविधानों पर प्रस्तुतीकरण दिया। बता दें कि ई-एचआरएमआइएस से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में स्थानांतरण के लिए पहली बार आनलाइन सुविधा प्रारंभ की जा रही है। 1700 हेक्टेयर वन भूमि पर होंगे विकास कार्य, भारत सरकार ने दी स्वीकृति मप्र की 1700 हेक्टेयर वन भूमि पर विकास कार्य किए जाएंगे। इसके लिए भारत सरकार ने स्वीकृति दे दी है। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने मध्य प्रदेश के वन क्षेत्र में कुल एक हजार 709.45 हेक्टेयर भूमि 37 परियोजनाओं के लिए मंजूर की है। इसके बदले में अन्यत्र राजस्व भूमि एवं वर्तमान दर पर ली गई है।इन परियोजनाओं में जल संसाधन विभाग से संबंधित सात प्रकरणों में 1310.08 हेक्टेयर, विद्युत प्रोजेक्ट के 13 प्रकरणों में 220.36 हेक्टेयर, रेलवे के एक प्रकरण में 12.97 हेक्टेयर, खनन के दो प्रकरणों में 56.63 हेक्टेयर, सड़क के चार प्रकरणों में 35.42 हेक्टेयर और 10 अन्य प्रकरणों में 73.95 हेक्टेयर वन भूमि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा 48 प्रकरणों में 998.27 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्सन की सैद्धांतिक सहमति भी भारत सरकार ने दी है। recent visitors 68

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी का किया अवलोकन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गिफ्ट सिटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी)एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, यह भारत को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार आकार ले रही गिफ्ट सिटी ‍निवेशकों को बेहतर अवसर प्रदान करने के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इसके माध्यम से भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक मानकों से तालमेल रखते हुए मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में प्रभावी रूप से गतिविधियों का संचालन करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुजरात के गांधी नगर में साबरमती नदी के किनारे स्थित भारत की पहली ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी, भारत का फाइनेंशियल गेट-वे और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र 'गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी' (गिफ्ट सिटी) का अवलोकन कर अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गिफ्ट सिटी में स्वच्छता के लिए की गई व्यवस्था के संबंध में विशेष रूप से जानकारी प्राप्त करते हुए ऑटोमेटेड गारबेज एंड वेस्ट कलेक्शन सिस्टम और वेस्ट टनल का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि गांधी नगर, गुजरात में स्थित गिफ्ट सिटी का पूरा नाम गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी सिटी है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक वित्तीय केंद्र बनाने उद्देश्य से विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में स्थापित गिफ्ट सिटी को वर्ष 2007 में भारत सरकार द्वारा मंजूरी दी गई। यहां प्रमुख वित्तीय सेवाओं, जैसे बैंकिंग, बीमा, वित्तीय बाजार और तकनीकी सेवाओं के लिए आदर्श वातावरण उपलब्ध है। गिफ्ट सिटी में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजार की स्थापना की गई है, जहाँ वैश्विक निवेशक अपनी व्यापारिक गतिविधियाँ और निवेश कर सकते हैं। अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट सिटी तकनीक और हरित ऊर्जा प्रणालियों से युक्त गिफ्ट सिटी में उच्च गुणवत्ता वाले कार्यालय, आवासीय परिसर, होटल और मनोरंजन सुविधाएं उपलब्ध हैं।   recent visitors 69

तिलक वर्मा ने ICC T20I रैंकिंग में टॉप 10 में बड़ी छलांग लगाई, हार्द‍िक पंड्या फ‍िर बने नंबर T20 के नंबर-1 ऑलराउंडर

दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल (ICC) की नवीनतम रैंकिंग में भारतीय ख‍िलाड़‍ियों की बल्ले बल्ले हो गई है. भारत के अनुभवी खिलाड़ी हार्दिक पंड्या ने दुनिया के टॉप टी20 इंटरनेशनल ऑलराउंडर के रूप में अपना स्थान फिर से कब्जाया है. वहीं तिलक वर्मा ने ICC T20I रैंकिंग में बल्लेबाजों की ल‍िस्ट में टॉप 10 में बड़ी छलांग लगाई है. उन्होंने 69 स्थानों की छलांग लगाई है. पंड्या ने साउथ अफ्रीका में भारत की हालिया सीरीज के दौरान शानदार प्रदर्शन कर यह उपलब्ध‍ि हास‍िल की.  पंड्या ने इस दौरान इंग्लैंड के लियाम लिविंगस्टोन और नेपाल के दीपेंद्र सिंह ऐरी को पछाड़कर टी20 ऑलराउंडर में टॉप पोजीशन हास‍िल की. यह दूसरी बार है जब पंड्या ने टी-20 ऑलराउंडरों की रैंकिंग में नंबर 1 स्थान हासिल किया है. लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ी ने पहली बार इस साल के आईसीसी पुरुष टी-20 वर्ल्ड कप के अंत में टॉप पोजीशन हासिल की थी. 31 वर्षीय पंड्या को हाल में ही मुंबई इंड‍ियंस ने आईपीएल के लिए रिटेन किया है. वहीं ताजा रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाड़ियों ने भी बढ़त हासिल की है. चार मैचों की साउथ अफ्रीका संग सीरीज के दौरान पंड्या ने दूसरे मैच में 39 नॉट आउट की पारी खेली, जिससे भारत की पारी सम्मानजनक स्कोर तक पहुंच सकी. वहीं चौथे निर्णायक मुकाबले के दौरान पंड्या ने तीन ओवरों में 1/8 के स्पेल से भारतीय टीम ने 3-1 से सीरीज में प्रभावशाली जीत हासिल की. ​​ त‍िलक वर्मा बने T20I के नंबर 3 बल्लेबाज भारत-साउथ अफ्रीका सीरीज के में प्लेयर ऑफ द मैच रहे त‍िलक वर्मा ने दो शतक और 280 रन बनाने बनाए, इसके साथ ही उन्होंने बल्लेबाजी चार्ट में 69 पायदान की छलांग लगाई. इस बढ़त के साथ वर्मा नंबर 1 रैंक वाले टी20आई बल्लेबाज ट्रेविस हेड के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. इसका मतलब है कि अब वह भारत के सबसे हाइएस्ट रेटिंग वाले बल्लेबाज हैं, जबकि कप्तान सूर्यकुमार यादव एक पायदान नीचे खिसककर चौथे स्थान पर आ गए हैं. वहीं संजू सैमसन,  जिन्होंने साउथ अफ्रीका के साथ सीरीज के दौरान दो शतक भी लगाए. टी20आई बल्लेबाजों की इसी सूची में 17 पायदान चढ़कर 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं. वहीं ट्रिस्टन स्टब्स (तीन पायदान ऊपर चढ़कर 23वें स्थान पर) और हेनरिक क्लासेन (छह पायदान ऊपर चढ़कर 59वें स्थान पर) हैं. recent visitors 81

राजस्थान में प्रदूषण के कारण स्कूलों में छु्ट्टी, 300 के पार पहुंचा AQI; जानिए आदेश

जयपुर राजस्थान में प्रदूषण अब एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है. राजस्थान के इतिहास में पहली बार प्रदूषण के कारण सरकार को स्कूल बंद करने का फैसला लेना पड़ा है. राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंचने के कारण, जिला प्रशासन ने स्कूलों में 20 से 23 नवंबर तक छुट्टी घोषित की है. यह आदेश राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद लिया गया है. ख़तरनाक AQI के कारण स्कूलों में अवकाश जिला कलक्टर किशोर कुमार ने आदेश जारी कर बताया कि खैरथल-तिजारा में स्थित सभी राजकीय और गैर-राजकीय विद्यालयों में 20 से 23 नवंबर तक पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए अवकाश घोषित किया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन करना होगा. इस दौरान स्कूलों में शिक्षकों की छुट्टी नहीं होगी और वे स्कूल आकर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाएंगे. यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के कारण लिया गया है. ग़ौरतलब है कि राजस्थान में सर्दी बढ़ने के साथ ही करीब 25 से ज्यादा जिलों में एक्यूआई ख़तरनाक स्तर पर पहुंच चुका है. यहां कि कई जिले खतरनाक स्तर पर प्रदूषित हो चुके हैं. राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, इस समय राजस्थान के कई प्रमुख जिले जैसे झुंझुनूं, भिवाड़ी, करौली और बीकानेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 से भी ज्यादा दर्ज किया गया है. झुंझुनूं का AQI 432, बहरोड़ का 350, भिवाड़ी का 348 और अलवर का 175 तक पहुंच चुका है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है. राजस्थान-दिल्ली में आरोप प्रत्यारोप दिल्ली के मुख्यमंत्री आतिशी ने दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण के लिए राजस्थान को भी दोषी ठहराया था मगर राजस्थान सरकार का कहना है कि राजस्थान की आबो हवा दूसरे राज्यों की वजह से ख़राब हुई है. राजस्थान में न तो पराली जलाई जाती है और न ही इतनी फैक्ट्रियां हैं जिनकी वजह से प्रदूषण हो. इस बीच, सरकार ने लोगों से प्रदूषण को लेकर सतर्क रहने और मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतने की अपील की है, ताकि प्रदूषण से होने वाली समस्याओं से बचा जा सके. जानें आदेश में क्या? कलक्टर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश व दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 450 पार जाने के बाद राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर को आदेश जारी किए थे। उसी के अनुसरण में खैरथल-तिजारा में स्थित सभी राजकीय और गैर राजकीय विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं के लिए 20 नवंबर से 23 नवंबर तक भौतिक अवकाश घोषित किया जाता है। इस दौरान शिक्षक विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन क्लास संचालित करने की व्यवस्था करेंगे। यह आदेश केवल विद्यार्थियों के लिए ही लागू होगा।   recent visitors 99