प्रधानमंत्री मोदी प्रदेश के 2 जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालयों का करेंगे लोकार्पण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15 नवम्बर को बिहार के जमुई में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के 2 जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालयों का वर्चुअली लोकार्पण करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी छिंदवाड़ा के बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय एवं जबलपुर के राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2016 को देश के विभिन्न प्रदेशों में जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित संग्रहालय के निर्माण की घोषणा की गई थी। बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय, छिंदवाड़ा छिंदवाड़ा शहर में स्थित बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय भवन का निर्माण 40 करोड़ 69 लाख रूपये की लागत से लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया है। यहां क्यूरेशन का कार्य जनजातीय कार्य विभाग के अधीन वन्या संस्थान द्वारा किया गया है। इसका निर्माण पुराने जनजातीय संग्रहालय की उपलब्ध भूमि पर ही किया गया है। यह स्थल पेंच-पचमढ़ी मार्ग पर स्थित है। संग्रहालय के आस-पास कई दर्शनीय तथा जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित महत्वपूर्ण स्थल भी हैं। नवीन जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय भवन में 6 गैलरी, एक कार्यशाला कक्ष तथा एक लाइब्रेरी के अलावा कार्यालय के लिये समुचित स्थान भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त 800 दर्शकों की क्षमता वाले ओपन एयर थिएटर, शिल्प बाजार (शिल्पग्राम) एवं ट्राइबल कैफेटेरिया का निर्माण भी यहां किया गया है। इसी परिसर में स्थित पुराने जनजातीय संग्रहालय का नवीनीकरण भी किया गया है, जिसमें जनजातीय संस्कृति से संबंधित विभिन्न प्रादर्श रखे हुए हैं। नवीन जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में प्रदेश के 9 मुख्य जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम तथा 16 जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का वर्णन एवं जीवंत चित्रण किया गया है। प्रथम गैलरी रानी दुर्गावती को समर्पित की गई है, जिसमें रानी दुर्गावती के जीवन, उनके शासन और उनके बाहरी आक्रमणकारियों से संघर्ष को प्रदर्शित किया गया है। ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेज सरकार द्वारा गोंड राज्यों को अपने अधीन लेने के खिलाफ गोंड राजाओं द्वारा किये गये संघर्ष का चित्रण गैलरी-2 में किया गया है। ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1927 में इंडियन फारेस्ट एक्ट लागू किया गया था, जिसके विरोध में जनजाति समाज द्वारा किये गये संघर्ष का चित्रण गैलरी-3 में "जंगल सत्याग्रह" के रूप में प्रदर्शित किया गया है। चौथी गैलरी में भील-भिलाला जनजाति, जो गोरिल्ला युद्ध में बेहद पारंगत थी उनका ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध किया गया संघर्ष चित्रित किया गया है। इस गैलरी में भीमा नायक, खाज्या नायक और टंट्या भील जैसे वीरों का संघर्ष चित्रित है। गैलरी-5 एवं 6 समय-समय पर पेंटिंग एवं फोटो एग्जीबिशन के लिए आरक्षित की गई हैं। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय, जबलपुर अद्वितीय वीरता और अदम्य साहस के प्रतीक राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के सम्मान में राज्य सरकार और केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से वर्ष 2021 में जबलपुर में संग्रहालय का निर्माण किया गया। इसका नामकरण राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय किया गया है। एक एकड भूमि पर निर्मित इस संग्रहालय में 14 करोड़ 26 लाख रूपये की लागत से भारतीय सांस्कृतिक निधि (इनटेक, नई दिल्ली) द्वारा संग्रहालय भवन का जीर्णोद्वार एवं क्यूरेशन का कार्य किया गया है। यह संग्रहालय परिसर ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यहीं पर राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को उनके बलिदान से चार दिन पहले कैद करके रखा गया था। इस ऐतिहासिक महत्व की इमारत को पारम्परिक संरक्षण विधि से उसके मूल स्वरूप में पुन: र्निमित किया गया है, ताकि राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान का प्रतीक यह स्थल भावी पीढियों के लिए प्रेरणा और गर्व का स्थायी स्रोत बना रहे। संग्रहालय की पहली दीर्घा में गोंड जनजातीय संस्कृति को प्रदर्शित किया गया है। दूसरी दीर्घा 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले मध्यप्रदेश के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को समर्पित है। तीसरी दीर्घा को राजा शंकरशाह के दरबार हाल के रूप में प्रदर्शित किया गया है, जिसमें राजा शंकरशाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान की कहानी को फिल्म के जरिये प्रदर्शित किया गया है। राजा एवं कुंवर के बलिदान के बाद उनकी रानियों के एवं 52वीं रेजीमेंट के विद्रोह को अगली गैलरी में प्रदर्शित किया गया है। अंतिम गैलरी में थ्री-डी होलोग्राम के माध्यम से राजा एवं कुंवर को श्रृद्धांजलि दी गयी है। जिस परिसर में राजा एवं कुंवर को कैद करके रखा गया था, उस जेल भवन में उनकी प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। जनजातीय समुदाय के लोग इस स्थल को पवित्र मानते हैं और नियमित रूप से यहां श्रृद्धांजलि अर्पित करने आते हैं।   recent visitors 67

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने रात्रि में लगाई चौपाल और किया रात्रि विश्राम

ग्वालियर ग्वालियर उप नगर के बरा गांव में नगर निगम के कचरा संग्रहण केन्द्र में लगी आग से फैले प्रदूषण से लोगों को सांस लेने में आ रही परेशानी की शिकायत मिलने के बाद ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने रात्रि 12 बजे ही ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर अग्नि शमन वाहन पर चढ़कर आग पर काबू किया। उन्होंने प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो। इसके पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उल्लेखनीय है कि ग्वालियर उप नगर के वार्ड क्रमांक-1 के बरा गांव के समीप खदान के गड्ढे को नगर निगम द्वारा कचरा संग्रहण के रुप में उपयोग किया जा रहा था। इसके कचरे में आग लगने से बरा गांव सहित आस-पास के किशन बाग, जाटव पुरा,तिरउआ पुरा, लक्ष्मीपुरम, न्यू किशन बाग तथा पादरी मोहल्ले में प्रदूषण फैलने लगा और यहां के रहवासियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। यह जानकारी जैसे ही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को लगी। उन्होंने बिना समय गंवाए प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों को आग पर नियंत्रण के निर्देश दिए और अधिकारियों के पहुंचने से पहले स्वयं मौके पर पहुंचकर अग्निशमन वाहन पर चढ़कर आग बुझाने का प्रयास किया। ऊर्जा मंत्री तोमर ने इस दौरान आसपास के हर घर में दस्तक देकर उनकी समस्याएं सुनी और उनका समाधान भी किया। उन्होंने हालात की गंभीरता को देखते हुए रात्रि विश्राम लक्ष्मीपुरम में ही करने का निर्णय लिया। इस दौरान उन्होंने सड़क किनारे ही टेंट लगाकर अपनी चौपाल लगाई तथा लोगों की समस्याओं को सुना और जन-सेवा के संकल्प को निभाते हुए, तत्काल समाधान के लिए जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। रात्रि विश्राम के बाद गुरुवार सुबह ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जाटव पुरा स्थित बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की। तदोपरांत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सेवा ही संकल्प स्वच्छता अभियान के तहत जाटव पुरा में झाड़ू लगाकर सफाई की। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि साफ -सफाई हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए अपने क्षेत्र को साफ रखें और निरोगी जीवन का आनंद ले। इसके बाद श्रीमती नर्मदा शाक्य के घर जाकर सुबह के नाश्ते में पूड़ी सब्जी खाई। आज भी बरा गांव में चौपाल लगाएंगे ऊर्जा मंत्री ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर बुधवार को बरा गांव खदान गड्ढा पर घटित अग्नि की घटना से उत्पन्न प्रदूषण के हालात के चलते गुरुवार की रात्रि भी बरा गांव खदान गड्ढा के पास चौपाल लगाकर जनसुनवाई करेंगे। इस दौरान जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे।   recent visitors 49

सरकार ने बढ़ाया गेहूं का समर्थन मूल्य, पोर्टल पर अभी रजिस्ट्रेशन कराएं किसान

भोपाल  भारत सरकार ने इस साल गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए क्विंटल निर्धारित किया है, जिससे किसानों को बीते साल की तुलना में इस साल प्रति क्विंटल गेंहू पर 150 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे. बता दें, साल 2025-26 के लिए भारत सरकार ने गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 2425 रुपए निर्धािरत किया है. भारत सरकार ने साल 2025-26 के लिए रबी फसल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपए घोषित किया है, जिससे बीते साल की तुलना में इस साल से 150 रुपए अधिक में गेहूं की खरीदी होगी. नए समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीदी के लिए सरकार ने तैयारी भी शुरू कर दी है. गेंहू खरीदी के लिए प्रदेश में स्थापित किए जाएंगे गेंहू उपार्जन केंद्र रिपोर्ट के मुताबिक रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए अब किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के लिए बारदाना, भंडारण, परिवहन की व्यवस्था की जा रही है. गेंहू खरीदी के लिए प्रदेश में गेंहू उपार्जन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे. वहीं, गेहूं की गुणवत्ता की जांच के लिए सर्वेयर को प्रशिक्षण दिया जाएगा. साल 2024-25 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारत सरकार ने समिति स्तर पर स्थापित कुल 1495 उपार्जन केन्द्रों के जरिए 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की थी और किसानों के आधार लिंक बैंक खाते में समर्थन मूल्य राशि के सीधे भुगतान की व्यवस्था की गई थी. पिछले वर्ष हुई थी 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी गौरतलब है पिछले साल 6 लाख 16 हजार किसानों से 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं का विक्रय समर्थन मूल्य पर किया गया था, गेहूं उपार्जन के लिए किसानों की सुविधानुसार कुल 3694 उपार्जन केन्द्र स्थापित किए गए थे. उपार्जित गेहूं के परिवहन, हैण्डलिंग व किसानों के पेमेंट के लिए 2199 उपार्जन केन्द्र गोदाम स्तर पर स्थापित किए गए थे.    भारत सरकार ने इस साल गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए क्विंटल निर्धारित किया है, जिससे किसानों को बीते साल की तुलना में इस साल प्रति क्विंटल गेंहू पर 150 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे. बता दें, साल 2025-26 के लिए भारत सरकार ने गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 2425 रुपए निर्धािरत किया है. भारत सरकार ने साल 2025-26 के लिए रबी फसल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2425 रुपए घोषित किया है, जिससे बीते साल की तुलना में इस साल से 150 रुपए अधिक में गेहूं की खरीदी होगी. नए समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीदी के लिए सरकार ने तैयारी भी शुरू कर दी है. गेंहू खरीदी के लिए प्रदेश में स्थापित किए जाएंगे गेंहू उपार्जन केंद्र रिपोर्ट के मुताबिक रबी विपणन वर्ष 2025-26 के लिए अब किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के लिए बारदाना, भंडारण, परिवहन की व्यवस्था की जा रही है. गेंहू खरीदी के लिए प्रदेश में गेंहू उपार्जन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे. वहीं, गेहूं की गुणवत्ता की जांच के लिए सर्वेयर को प्रशिक्षण दिया जाएगा. साल 2024-25 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भारत सरकार ने समिति स्तर पर स्थापित कुल 1495 उपार्जन केन्द्रों के जरिए 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की थी और किसानों के आधार लिंक बैंक खाते में समर्थन मूल्य राशि के सीधे भुगतान की व्यवस्था की गई थी. इतना बढ़ा MSP बता दें कि सरकार किसानों से 2275 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदती है। लेकिन आगामी समय में एमएसपी(MSP) बढ़ जाने से सरकार 2,425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों से गेहूं की फसल खरीदेगी। पहले के मुकाबले 150 रूपए का अधिक फायदा किसानों को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनावों के तहत किसानों को खुश करने के लिए यह फैसला लिया गया है। गेहूं उपार्जन केन्दों की होगी स्थापना नए सत्र के दौरान गेहूं की खरीदी(Wheat MSP) के लिए अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी गई है। भण्डारण और परिवहन की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही प्रदेश में कई जगहों पर गेहूं उपार्जन केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसके आलावा गेहूं की गुणवत्ता की जांच के लिए सर्वेयर को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पिछले वर्ष हुई थी 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी गौरतलब है पिछले साल 6 लाख 16 हजार किसानों से 48 लाख 38 हजार मीट्रिक टन गेहूं का विक्रय समर्थन मूल्य पर किया गया था, गेहूं उपार्जन के लिए किसानों की सुविधानुसार कुल 3694 उपार्जन केन्द्र स्थापित किए गए थे. उपार्जित गेहूं के परिवहन, हैण्डलिंग व किसानों के पेमेंट के लिए 2199 उपार्जन केन्द्र गोदाम स्तर पर स्थापित किए गए थे.   recent visitors 46

शीतकालीन सत्र में लोक निर्माण, जल संसाधन समेत अन्य विभागों को अतिरिक्त राशि आवंटित की जाएगी ,अनुपूरक बजट में नई योजना का प्रावधान नहीं.

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आगामी 16 दिसंबर में शुरू हो रहा है. 5 दिवसीय शीतकालीन सत्र में मोहन सरकार अपना पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी. एक अनुमान के मुताबिक मोहन सरकार का अनुपूरक बजट संभवतः 10 हजार करोड़ रुपए हो सकता है. माना जा रहा है कि सरकार अनुपूरक बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कामों के लिए निर्माण विभागों को अतिरिक्त राशि आवंटित की जा सकती है. वित्त विभाग ने मोहन सरकार के पहले अनुपूरक बजट को लेकर सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे हैं. 5 दिवसीय शीतकालीन सत्र में लोक निर्माण, जल संसाधन समेत अन्य विभागों को अतिरिक्त राशि आवंटित की जा सकती है. अनुपूरक बजट में किसी नई योजना का प्रावधान नहीं होगा. अनुपूरक बजट में किसी नई योजना का प्रावधान नहीं रिपोर्ट के मुताबिक कुल पांच दिन चलने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश होने वाले अनुपूरक बजट 10 हजार करोड़ रुपए का हो सकता है, लेकिन पूरी संभावना है कि बजट में किसी नई योजना का प्रावधान नहीं होगा.वहीं फिजूल खर्ची को रोक लगाने की कोशिश होगी, इसलिए वाहन खरीदारी के लिए भी कोई राशि आवंटित नहीं की जाएगी. मोहन सरकार 16 दिसंबर से शुरू हो रहे पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र में अनुपूरक बजट पेश करेगी. पूरी संभावना है कि फरवरी में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए उद्योग सहित अन्य विभागों के लिए राशि का प्रावधान होगा. अनुपूरक बजट के लिए सभी विभागों से मांगे गए प्रस्ताव गौरतलब है मध्य प्रदेश का वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए सरकार का बजट 3.65 लाख करोड रुपए से अधिक का है.जीएसटी समेत अन्य करों के संग्रहण में अच्छी स्थिति होने के चलते सरकार की आय वृद्धि की संभावना है. इन्हें देखते हुए वित्त विभाग ने मोहन सरकार पहले अनुपूरक बजट की तैयारी कर रहा है और सभी विभागों से प्रस्ताव मांगें है.   recent visitors 50

प्रयागराज : छात्रों के प्रदर्शन के आगे UP सरकार नतमस्तक, एक दिन में होगा PCS एग्जाम, RO-ARO परीक्षा स्थगित

 प्रयागराज  प्रयागराज में छात्र समुदाय की एक बड़ी जीत हुई है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सोमवार से लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के संघर्ष के बाद, UPPSC ने PSC (राज्य लोक सेवा आयोग) और RO/ARO (रिवाइजिंग ऑफिसर/ASSISTANT REVIEW OFFICER) की परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इस फैसले ने छात्रों को एक बड़ी राहत दी है और उनके आंदोलन को सफलता की दिशा में एक कदम और बढ़ा दिया। PCS परीक्षा अब एक ही शिफ्ट में होगी प्रदर्शनकारियों के मुख्य मुद्दों में से एक था कि UPPSC की परीक्षा दो शिफ्टों में होती थी, जिससे समय की कमी और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। UPPSC ने छात्रों की इस मांग को स्वीकार करते हुए फैसला लिया है कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 2024 अब एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। यह निर्णय छात्रों की समस्याओं का समाधान करेगा और परीक्षा की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। RO/ARO परीक्षा स्थगित इसके अलावा, UPPSC ने RO (रिवाइजिंग ऑफिसर) और ARO (ASSISTANT REVIEW OFFICER) की परीक्षा को स्थगित करने का फैसला भी किया है। यह कदम छात्रों की लगातार मांगों के बाद उठाया गया है, जो इन परीक्षाओं को एक साथ आयोजित करने के विरोध में थे। इस फैसले से छात्रों को अपनी तैयारी में पर्याप्त समय मिलेगा और उन्हें मानसिक शांति मिलेगी। CM योगी आदित्यनाथ का पहल इस बदलाव के पीछे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने छात्रों के आंदोलन और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया और आयोग को निर्देशित किया कि वे छात्रों के साथ संवाद करें और उनके मुद्दों पर समन्वय बनाएं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा था कि UPPSC को छात्रों के हित में सही और आवश्यक निर्णय लेने चाहिए, ताकि उनकी कठिनाइयां दूर हो सकें।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोग से कहा था कि वह छात्रों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें और उनके विचारों और मांगों का सम्मान करें। उनके समन्वय से यह निर्णय लिया गया कि परीक्षाओं के आयोजन की प्रक्रिया को छात्रों की जरूरतों के अनुसार ढाला जाए। महत्वपूर्ण बिंदु     परीक्षा पैटर्न तय करने के लिए कमेटी बनाने की बात कही है, प्रदर्शनकारी छात्र आयोग के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं।     छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है, छात्र इसे डिवाइड एंड रुल बता रहे हैं और हजारों की संख्या में छात्र जमा हैं।   recent visitors 55

राष्ट्र रक्षा के लिये भगवान बिरसा मुंडा द्वारा किये गये बलिदान का प्रकटीकरण हो और इससे समाज अवगत हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय गौरव दिवस भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि "अबुआ दिशोम-अबुआ राज"… अपना देश और अपनी माटी के महत्व का उद्घोष करने वाले और उलगुलान क्रांति से स्वत्व, स्वाभिमान और स्वराज की चेतना जगाने वाले भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आज हम सब उनको सादर नमन करते है। भगवान बिरसा मुंडा ने जनजातीय संस्कृति, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया और जनजातीय गौरव का प्रतीक बन गये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके अभूतपूर्व योगदान को स्मरण करने के लिए भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर पर प्रति वर्ष "जनजातीय गौरव दिवस" के आयोजन की परंपरा आरंभ की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल, जंगल, जमीन के रक्षक बिरसा मुंडा ने वर्ष 1893-94 में अंग्रेजों द्वारा वन अधिनियम बनाकर जंगलों पर कब्जा करने का विरोध किया, शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और स्वतंत्रता के लिये उलगुलान क्रांति शुरू की। उन्होंने जनजातियों के स्वाभिमान को जगाया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि यह हमारी धरती है और हम ही इसके रक्षक हैं। अपनी धरती और माटी की रक्षा के लिये जनजातियों ने बिरसा मुंडा के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला। यह क्रांति इतनी प्रभावी थी कि आखिरकार अंग्रेजों ने छोटा नागपुर टेनेंसी कानून पारित किया और जनजातियों को उनका अधिकार प्राप्त हुआ। गौरवमयी अतीत का प्रकटीकरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज का गौरवमयी अतीत समाज के सामने लाना और उनकी संस्कृति तथा परंपराओं का संरक्षण है। राष्ट्र रक्षा के लिये उनके द्वारा किये गये बलिदान का प्रकटीकरण हो और इससे समाज अवगत हो, वे अपनी संस्कृति और परंपराओं का महत्व समझें तथा उनमें स्वत्व का बोध हो। समाज, संस्कृति और राष्ट्र को समर्पित भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आज शहडोल और धार जिले में राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। मुझे प्रसन्नता है कि इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअली जुड़कर हमारा मार्गदर्शन करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन की शुरुआत के साथ जनजातियों के गौरव की पुनर्स्थापना की नींव रखी है। उनका लक्ष्य है अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का विकास करना तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना। जनजातीय समाज के कल्याण के लिये संकल्पित प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प की सिद्धि के लिये मध्यप्रदेश सरकार विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। जनजातीय वर्ग का समग्र विकास ध्येय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर जनजाति न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना और उनका शैक्षणिक, आर्थिक, स्वस्थ और सामाजिक विकास करना है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि इस योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश की विशेष उपलब्धि रही है। पीएम जन-मन योजना में प्रदेश के 24 जिलों के 118 गांवों में निवासरत बैगा, भारिया एवं सहरिया विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के 11 लाख 35 हजार से अधिक भाई-बहनों को सहायता, रोज़गार और कौशल प्रशिक्षण देकर इन्हें विकास की नई राह से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इसमें 7 हजार 300 करोड़ रुपये की लागत से नये स्वास्थ्य केंद्र, छात्रावास, बहुउद्देशीय केंद्र, सड़क, पुल और आवास सहित अन्य निर्माण कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उदाहरण देते हुए कहा कि पीएम जन-मन योजना में सिवनी जिले का झिंजरई गांव एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित हो चुका है। इस गांव में राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन शत-प्रतिशत हुआ। यही नहीं, छिंदवाड़ा और डिंडौरी जिले में 7 और कटनी में 6 विशेष पिछ़ड़े जनजातीय बहुल गांव आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। शौर्य और पराक्रम जनजातियों का मौलिक स्वभाव है। उनकी इस विशेषता को देखते हुए प्रदेश के विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के लिये शौर्य संकल्प योजना के अंतर्गत पीवीटीजी बटालियन गठित की जायेगी। जनजातीय विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य निर्माण के लिये उन्हें प्री-मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक, विदेश अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति, सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना और परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण का लाभ दिया जा रहा है। बजट वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय वर्ग के समग्र विकास और कल्याण के लिये हमने इस वित्त वर्ष में 40 हजार 804 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले बजट की तुलना में 23.4 प्रतिशत अधिक है। तेंदूपत्ता संग्राहकों का मानदेय 3 हजार रुपये प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 4 हजार रुपये किया गया। इससे 35 लाख संग्राहक लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश में जनजातीय विकास की अधोसंरचनाओं के निर्माण के लिये विशेष तकनीकी समूह तैयार करने का निर्णय लिया गया। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में अधिकतम 3900 रुपये प्रति हेक्टेयर की अतिरिक्त सहायता राशि स्वीकृत की गई। प्रदेश में जनजातियों को जल, जंगल, जमीन और श्रमिकों के अधिकारों की जानकारी तथा इनके संरक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं की सुरक्षा के लिये पेसा अधिनियम लागू किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समुदाय के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में विशेष पहल करते हुए 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान आरंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में जनजातीय आबादी के लिए समान अवसरों का सृजन, सामाजिक-आर्थिक स्तर का विकास, बुनियादी ढांचे का सुधार और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आजीविका के क्षेत्र में ठोस प्रगति करना है। हमारा लक्ष्य प्रदेश के 267 विकासखंडों में स्थित 11 हजार 377 जनजातीय बहुल गांव का सर्वांगीण विकास करना है। यही नहीं, इस योजना में केंद्र सरकार द्वारा देशभर में 100 जनजातीय ग्रामीण हाट बाजार तैयार करने की योजना है। प्रदेश के 19 जिलों में जनजातीय ग्रामीण हाट बाजार की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इसमें जनजातियों की पुरातन कला, संस्कृति के प्रतीक, शिल्पकारी, चित्रकारी, खिलौने, मिट्टी व बांस से तैयार उत्पाद आदि का प्रदर्शन किया जायेगा। इससे पारंपरिक कला संस्कृति समृद्ध होने के साथ जनजातीय वर्ग का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण होगा। मध्यप्रदेश, मोदी जी के संकल्प को करेगा साकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुझे इस बात से संतोष है कि भगवान बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज के स्वाभिमान और उत्थान के लिये जो स्वप्न देखा था, वह आज प्रधानमंत्री … Read more

तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता संभाल रही अंतरिम सरकार लगातार कट्टरपंथ की ओर झुकाव

ढाका शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता संभाल रही अंतरिम सरकार लगातार कट्टरपंथ की ओर झुकाव दिखा रही है। देश की स्थापना करने वाले शेख मुजीबुर रहमान के अपमान से लेकर बंगाली राष्ट्रवाद तक से अब किनारा किया जा रहा है और पाकिस्तान की विचारधारा की तरफ झुकाव बढ़ा है। इस बीच बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि देश में सेकुलरिज्म की ही कोई जरूरत नहीं है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने ऐसा कहा है। बांग्लादेशी अखबार Prothom Alo के अनुसार हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान असदुज्जमां ने यह बात कही। उन्होंने हाई कोर्ट में देश के संविधान में 15वें संशोधन के खिलाफ दायर अर्जी पर सुनवाई के दौरान ऐसा कहा। यह संविधान संशोधन शेख हसीना सरकार के दौर में 3 जुलाई, 2011 को हुआ था। इसी संशोधन के तहत देश को सेकुलर घोषित किया गया था और शेख मुजीबुर रहमान को राष्ट्रपिता माना गया था। महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने को भी इसके तहत मंजूरी मिली थी। एक तरह से उस संविधान संशोधन को बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जाता है। अब उसे ही हटाने की तैयारी है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने अदालत में कहा कि यहां तो 90 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। फिर सेकुलरिज्म जैसी चीज की यहां क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति संविधान के अनुच्छेद VIII में सेकुलरिज्म को रखना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले तो अल्लाह पर भरोसा रखने की बात कही जाती थी। अटॉर्नी जनरल ने मोहम्मद यूनुस सरकार से अपील की है कि इस संविधान संशोधन को खत्म किया जाए और पहले वाले नियम ही लागू किए जाएं। केस की सुनवाई के दौरान बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हमारे देश का आधिकारिक धर्म तो इस्लाम ही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि देश में हिंदू समेत तमाम अल्पसंख्यक रहते हैं तो उन्हें भी अधिकार है कि वे अपने तरीके से धर्म का पालन कर सकें और पूजा-पाठ करें। हालात यह हैं कि नई सरकार अब संविधान में बंगाली राष्ट्रवाद को भी हटाने की बात कर रही है। बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने इसे लेकर कहा कि संविधान के आर्टिकल 9 में बंगाली राष्ट्रवाद की बात कही गई है, लेकिन यह गलत है। ऐसा करना तो उन दूसरी भाषाओं के लोगों का अपमान है, जिन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष में हिस्सा लिया था। इसलिए इसे हटा देना चाहिए। माना जा रहा है कि बंगाली राष्ट्रवाद की बजाय इस्लाम के आधार पर राष्ट्र की अवधारणा की ओर जाने का विचार बांग्लादेश की नई सरकार का है। recent visitors 66