स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने सरकार 50 ऐतिहासिक स्थलों को चिह्नित करेगा जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण साबित हो

भोपाल  देशी-विदेशी पर्यटकों को देश के हृदय मध्य प्रदेश में कुछ अनदेखा दिखाने की तैयारी हो रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन मंडल ने 50 ऐसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों को चिह्नित किया है जो पर्यटकों के लिए नया आकर्षण साबित हो सकते हैं। इन स्थलों को अब विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो अपारंपरिक पर्यटन स्थल विकसित किए जाने हैं, उनमें से अधिकतर प्रमुख पर्यटन स्थलों के आसपास ही हैं। हालांकि सुविधाओं की कमी और जानकारी नहीं होने के कारण पर्यटक उस ओर नहीं जाते। जिन नए स्थलों को चिह्नित किया गया है, उनमें खजुराहो के पास रनेह वाटरफाल, भोजपुर के पास आशापुरी मंदिर समूह, पचमढ़ी के पास तामिया और देवगढ़, गांधी सागर के पास चतुर्भुज नाला प्रमुख हैं। घरेलू पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद पर्यटकों को कुछ नया अनुभव देने के लिए प्रदेश के बड़े शहरों के आसपास भी ऐसे स्थलों का चयन किया गया है। भोपाल में खारीगांव, केकड़िया, जगदीशपुर, जबलपुर में मदन महल और नर्मदा के किनारे के स्थलों, ग्वालियर में मितावली- पड़ावली के मंदिर, चौंसठ योगिनी मंदिर और दमोह में सिंग्रामपुर (रानी दुर्गावती व गोंड राजाओं का शासन केंद्र) में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जानी हैं। बता दें, मध्य प्रदेश में हर वर्ष ढाई से तीन करोड़ पर्यटक आते हैं। नया आकर्षण जुड़ जाने से घरेलू पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। ये स्थल भी किए जा रहे विकसित लांझी का किला- बालाघाट, सिंधिया की छतरियां- शिवपुरी, काला ताजमहल, असीरगढ़ का किला और बुरहानपुर का किला- बुरहानपुर, मितावली, पड़ावली, तेली का मंदिर, सहस्त्रबाहु मंदिर- ग्वालियर, ककनमठ मंदिर- मुरैना, पशुपतिनाथ व धर्मराजेश्वर मंदिर- मंदसौर, पातालकोट और तामिया (प्राकृतिक स्थल)- छिंदवाड़ा, सोनागिरी जैन मंदिर और दतिया का किला- दतिया, मोतीमहल- मंडला, मदन महल- जबलपुर, बहुति झरना, क्योटी जलप्रपात, भीमकुंड- रीवा, जटाशंकर, नजारा व्यू प्लाइंट, निदान कुंड और सद्भावना शिखर- दमोह। होम स्टे बनाए जा रहे हैं     50 अपारंपरिक पर्यटन स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड अपनी गतिविधियां चला रहा है। महिला पर्यटकों की सुरक्षा के लिए स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ग्रामीण होम स्टे बनाए जा रहे हैं। हेरिटेज वाक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। जल्द ही ये स्थल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की श्रेणी में आ जाएंगे। – बिदिशा मुखर्जी, अतिरिक्त प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड   recent visitors 75

ICMR ने कहा है भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान

नई दिल्ली भारत में कैंसर तेजी से फैल रहा है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसका सही समय पर पता न चले तो इलाज मुश्किल हो जाता है. 2023 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में पब्लिश हुई एक स्टडी में कहा गया था कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर जैसे कैंसर के मामले तेजी बढ़ रहे हैं. कुछ दिन पहले भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा है कि भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान है. ब्रिक्स देश यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका में कैंसर के मामले, उनसे होने वाली मौतों और उनका रोजमर्रा की लाइफ पर प्रभाव दिखाने वाली स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में मुंह और ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ने का जोखिम है. आईसीएमआर-नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इन्फॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च की रिसर्च के मुताबिक, पुरुषों में होंठ और मुंह के कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए हैं जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए. क्या कहती है रिसर्च कैंसर एपिडेमियोलॉजी में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से 20 प्रतिशत मौतें ब्रिक्स देशों में होती हैं. स्टडी के राइटर्स का कहना है, 'हमारा विश्लेषण भारत और दक्षिण अफ्रीका में 2022 और 2045 के बीच कैंसर के मामलों और मौतों में तेजी से वृद्धि होगी. स्टडी के राइटर सतीशकुमार ने बताया कि 2020 की तुलना में 2025 में भारत में कैंसर के मामलों में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि होगी और कैंसर की घटनाओं में तेजी लगातार जारी रहेगी.' निष्कर्ष क्या निकला स्टडी के निष्कर्ष में इस बारे में जानकारी दी गई है कि कैंसर कितना कॉमन है, इससे कितनी मौतें होती हैं और इससे आम इंसान की लाइफ पर कितना प्रभाव होता है. रिसर्च के मुताबिक, रूस में पुरुषों और महिलाओं में नए प्रकार के कैंसर के मामलों की दर सबसे अधिक थी. रूस में पुरुषों में सबसे आम प्रकार का कैंसर प्रोस्टेट, लंग्स और कोलोरेक्टल थे. अधिकांश ब्रिक्स देशों में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख था. हालांकि, भारत में होंठ और मुंह के कैंसर का ट्रीटमेंट पुरुषों में सबसे अधिक बार किया गया. दक्षिण अफ्रीका में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कैंसर से होने वाली मृत्यु दर सबसे अधिक थी. अगर रूस में सिर्फ पुरुषों की मौत सबसे अधिक कैंसर से हुई ती और महिलाओं की दक्षिण अफ्रीका में कैंसर से मौत सबसे अधिक हुई थी. स्टडी में यह भी बताया गया है कि भारत को छोड़कर सभी ब्रिक्स देशों में लंग्स कैंसर मौतों का सबसे बढ़ा कारण था. भारत में बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा रिसर्चर्स के अनुसार, आने वाले सालों में दक्षिण अफ्रीका और भारत में कैंसर के नए मामलों और कैंसर से संबंधित मौतों में सबसे अधिक वृद्धि होने की संभावना है. हालांकि ब्रिक्स देशों के पास कैंसर को कंट्रोल करने के तरीके हैं लेकिन फिर भी कैंसर के जोखिम और कैंसर की घटनाओं को प्रभावित करने वाले हेल्थ सिस्टम की जांच करनी काफी जरूरी है.   recent visitors 87

प्रदेश में अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही : मुख्यमंत्री यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के संतुलित विकास के लिये निरंतर सभी अंचलों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन कर रहे हैं। अगली आरआईसी आगामी 7 दिसम्बर को नर्मदापुरम में हो रही है। नर्मदापुरम् क्षेत्र में मुख्य रूप से कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्र-संस्करण इकाइयां और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग बहुतायत में हैं। नर्मदापुरम्, हरदा, और होशंगाबाद में पहले से स्थापित उद्योगों के साथ-साथ कृषि प्र-संस्करण, सोयाबीन तेल, मसाला उत्पादन और दुग्ध प्र-संस्करण जैसे उद्योग यहाँ की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य आधार हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्र की खनिज संपदा का उपयोग कर निर्माण और अन्य उद्योगों से भी स्थानीय विकास को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। छठवीं आईआईसी का आयोजन 7 दिसंबर 2024 को नर्मदापुरम् के डिवीजनल आईटीआई में किया जाएगा। पिछली पांच रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के अनुभवों से प्रेरित होकर, इस कॉन्क्लेव का नर्मदापुरम् क्षेत्र में आयोजन उद्योगों की वृद्धि, निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन के अवसरों को बढ़ाने के लिये किया जा रहा है। नर्मदापुरम आरआईसी में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, खनिज, MSME और पर्यटन क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से प्रदेश में एक उद्योग-हितैषी वातावरण बना है, जिससे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रगति हो रही है। नर्मदापुरम् और इसके आसपास के क्षेत्र जैसे होशंगाबाद, हरदा में एमएसएमई, कृषि आधारित उद्योग, और पर्यटन के क्षेत्र में कई संभावनाएं हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य सभी क्षेत्रों का संतुलित और समन्वित आर्थिक विकास करना है। इस कॉन्क्लेव से नर्मदापुरम् और इसके आस-पास के क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह आरआईसी नर्मदापुरम् और आसपास के क्षेत्रों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक धरोहर को उद्योगों के साथ जोड़ा जाएगा। पचमढ़ी, जो न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल है बल्कि यहाँ की अनूठी जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन, अब निवेशकों के लिये नया आकर्षण बनेंगा। साथ ही नर्मदा नदी तट पर औद्योगिक और पर्यटन दोनों क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएँ हैं। इस कॉन्क्लेव में कृषि, MSME, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और खनिज जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। नर्मदापुरम् और पचमढ़ी, जो पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध हैं, अब औद्योगिक दृष्टिकोण से भी नई ऊँचाइयों को छुएंगे। इस कॉन्क्लेव से औद्योगिक, पर्यटन और सामाजिक विकास के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संतुलन स्थापित होगा।   recent visitors 93

2000 के करीब 2% नोट अभी भी रिजर्व बैंक को वापस नहीं आए, 7000 करोड़ रुपये की वैल्यू

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में ₹500 और ₹1000 के नोट बंद कर दिए थे। उनकी जगह ₹2000 का नोट लाया गया था। 19 मई 2023 को RBI ने पहली बार ₹2000 के नोट वापस लेने की घोषणा की। उस समय चलन में ₹3.56 लाख करोड़ मूल्य के ₹2000 के नोट थे। RBI ने इन्हें बैंकों और डाकघरों में बदलने की सलाह दी। RBI की घोषणा के बाद लोग अपने ₹2000 के नोट बदलने लगे। अब तक लगभग 98.04% ₹2000 के नोट वापस आ चुके हैं। ₹2000 के नोट वापस लेने पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है। बताया जा रहा है कि अभी भी लगभग ₹6,970 करोड़ मूल्य के नोट चलन में हैं। इन्हें भी वापस लेने के लिए RBI ने एक और मौका दिया है। जिन लोगों के पास अभी भी ₹2000 के नोट हैं, वे उन्हें RBI कार्यालयों में बदल सकते हैं। इसके अलावा, इन्हें डाकघर के माध्यम से RBI के क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजकर भी बदला जा सकता है।  साल 2016 में नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट जारी किए थे। लेकिन पिछले साल रिजर्व बैंक ने इस नोट को चलन से बाहर कर दिया था। बैंक ने कहा था कि जिनके भी पास ये नोट हैं, उन्हें बदल लें। रिजर्व बैंक ने  इन नोटों को लेकर डेटा जारी किया। इस डेटा के मुताबिक 19 मई 2023 तक प्रचलन में रहे 2000 रुपये के नोटों में से करीब 98 फीसदी नोट अब वापस आ चुके हैं। वहीं करीब 2 फीसदी नोट अब भी प्रचलन में हैं। 19 मई 2023 को कारोबार बंद होने पर जब 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा की गई थी, तब प्रचलन में इन नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था। करीब जो दो फीसदी नोट अभी भी प्रचलन में हैं, उनकी वैल्यू करीब 7 हजार करोड़ रुपये है। यानी से नोट अभी भी लोगों के पास हो सकते हैं।बैंकों के मर्जर की तैयारी, 43 से घटकर रह जाएंगे 28, जानिए क्या है सरकार का प्लान क्या बेकार हो गए हैं 2000 के नोट? रिजर्व बैंक अब 2000 के नोटों को प्रचलन से बाहर कर चुका है। रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को घोषणा की थी कि 2000 रुपये के नोट अब प्रचलन में नहीं रहेंगे। लेकिन जिनके पास भी ये नोट हैं, वे 7 अक्टूबर 2023 तक किसी भी बैंक में जाकर अपने अकाउंट में जमा कर सकते हैं। ऐसे में लोगों के दिमाग में सवाल है कि जिनके पास अभी भी ये नोट हैं, क्या वे अब बेकार हो गए हैं। दरअसल, ये नोट अब बाजार में चलन में नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों के पास अभी भी ये नोट बचे हैं, वे रिजर्व बैंक जाकर अपने बैंक अकाउंट में जमा करवा सकते हैं। नोटबंदी के समय हुई थी शुरुआत 2000 के नोट रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के समय शुरू किए थे। दरअसल, नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 के नोट को बंद कर दिया गया था। ऐसे में लोगों की पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक ने 2000 के नोट जारी किए थे। हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद रिजर्व बैंक ने साल 2018-19 में इन नोटों की छपाई बंद कर दी थी। बाद में इनकाे प्रचलन से बाहर कर दिया। कैसे बदलें 2000 के नोट? अगर अभी भी आपके पास 2000 के नोट हैं तो उन्हें दिल्ली स्थित रिजर्व बैंक में जाकर बदला जा सकता है। इस दौरान ओरिजिनल आधार कार्ड और इसकी फोटो कॉपी ले जाना न भूलें। वहीं अगर कुल रकम 50 हजार रुपये से ज्यादा है तो ओरिजिनल पैन कार्ड और इसकी फोटो कॉपी भी जरूर लेकर जाएं। recent visitors 87

क्लाइमेट चेंज का असर खस के तेल की कीमतें बढ़कर 80,000 रुपये प्रति किलो पहुंची

कानपुर  क्लाइमेट चेंज का असर सिर्फ आम लोगों की सेहत या अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है। जबर्दस्त गर्मी और अनिश्चित मौसम ने खस को भी झटका दिया है। खस की घास से असेंशियल ऑइल का उत्पादन घटने लगा है। 2023 में हाथरस बेल्ट खस के तेल के उत्पादन में 20% तक गिरावट दर्ज हुई है। कन्नौज में तो खस की घास से निकलने वाले तेल की मात्रा में एक तिहाई तक कम हो गई। कन्नौज के सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) के डायरेक्टर शक्ति विनय शुक्ला का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण खस और पचौली के पौधों से निकलने वाला तेल कम हुआ। इस वजह से इनसे बनने वाले इत्र, परफ्यूम व अन्य उत्पादों की कीमत बढ़ने लगी है। देश में खस घास की 4-5 किस्में मिलती हैं। यूं तो खस जंगलों और नदी के किनारे उगती है, पर खस की खास प्रजातियों की खेती भी की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में दिवाली के बाद से मार्च तक खस की घास से तेल निकाला जाता है। 2022 तक तो खस के तेल का उत्पादन ठीक था, लेकिन 2023 में झटका लगा। हाथरस के इत्र कारोबारी लव शर्मा के अनुसार, 2022 में एक क्विंटल घास से 100 ग्राम तेल निकलता था, 2023 में यह घटकर 80 ग्राम रह गया। इस बार भी गर्मी का असर देखने लायक होगा। हाथरस में 2-3 दिन में खस का डिस्टिलेशन शुरू हो जाएगा। ज्यादा फसल लेने की चाह भी है वजह कन्नौज के इत्र एक्सपोर्टर प्रांजुल कपूर ने बताया कि मौसम ने निश्चित तौर पर इत्र/परफ्यूम के कारोबार पर असर डाला है। उत्पादकता घटी है, लेकिन इसके कई अन्य कारण भी हैं। पहले माना जाता था कि खस की बढ़िया उपज लेने के लिए घास की जड़ एक बार तोड़ने के बाद तीन साल तक उसे नहीं तोड़ना चाहिए। इस अंतराल में जड़ ज्यादा परिपक्व होती है और डिस्टिलेशन में तेल भी बढ़िया निकलता है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण अब कोई रुकने को तैयार नहीं है। कन्नौज में पैदा होने वाला गुलाब और बेला के फूलों से भी कम तेल निकल रहा है। रु. 28 हजार तक बढ़ गए दाम प्रांजुल बताते है कि पहले दुनिया में खस के तेल का बड़ा स्रोत हैती और डॉमिनिकन रिपब्लिक था, लेकिन वहां से इसकी सप्लाई बंद हो चुकी है। इस वजह से दुनिया अब खस की आपूर्ति के लिए भारत की तरफ देख रही है। एक साल पहले तक 62 हजार रुपये/किलो बिकने वाली 'रूह खस' ऑइल अब 80 हजार रुपये/किलो बिक रहा है। साधारण खस का ऑइल 14-15 हजार रुपये/किलो से बढ़कर 23 हजार रुपये तक पहुंच गया है। खस के दाम पर उसकी किस्म, डिस्टिलेशन और जगह का भी असर होता है। पचौली की फसल खराब, कीमत बढ़ी भारत में पचौली के तेल का भी इत्र और परफ्यूम में खूब इस्तेमाल होता है। पचौली के फूल और पत्तियां इंडोनेशिया से आते हैं। क्लाइमेट चेंज के कारण वहां भी फसल खराब हुई है। पचौली ऑइल के बढ़कर 16-19 हजार रुपये/किलो तक चल रहे हैं, जबकि 2 साल पहले दाम 3500-4000 रुपये/किलो की रेंज में होते थे। भारत में पूर्वोत्तर में पचौली का थोड़ा उत्पादन होता है। recent visitors 161

हाईकोर्ट ने CPS कानून को किया निरस्त, सरकार को झटका, 6 मुख्य संसदीय सचिव हटाए गए

शिमला हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बनाए मुख्य संसदीय सचिव अब नहीं रहेंगे। हाईकोर्ट ने सरकार के इन सभी संसदीय सचिवों को तुरंत प्रभाव से पद से हटाने के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद वर्तमान सरकार में कार्य कर रहे छह मुख्य संसदीय सचिवों को अपना पद व सुविधाएं छोड़नी होंगी। जस्टिस विवेक ठाकुर और बीसी नेगी की हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि इन सीपीएस की सभी सुविधाएं और विशेषाधिकार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए जाएं। कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ता, शक्तियां, विशेषाधिकार और संशोधन) अधिनियम, 2006 को शून्य घोषित कर दिया। सार्वजनिक संपत्ति पर किया कब्जा जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ये पद सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा करते हैं और सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से वापस ली जानी चाहिए।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 8 जनवरी, 2023 को कैबिनेट विस्तार से पहले छह सीपीएस-अर्की विधानसभा से संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह, दून से राम कुमार, रोहड़ू से मोहन लाल बराकटा, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल को नियुक्त किया था। ये भर्ती 2006 के अधिनियम के अनुसार की गई: बीजेपी एडवोकेट मुख्य संसदीय सचिवों की भर्ती पर हाईकोर्ट के आदेश पर भाजपा के वकील एडवोकेट वीरबहादुर वर्मा ने कहा कि सतपाल सती के नेतृत्व में 10 भाजपा विधायकों ने सीपीएस की भर्ती को कोर्ट में चुनौती दी थी। यह भर्ती 2006 के अधिनियम के अनुसार की गई थी। कोर्ट ने माना है कि 2006 का अधिनियम असंवैधानिक था। हाईकोर्ट ने सीपीएस सुविधाओं को तुरंत वापस लेने का भी आदेश दिया है। अगर दूसरा पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला करता है, तो उन्हें वहां भी कोई राहत नहीं मिलेगी, अधिनियम निरस्त कर दिया गया है। जयराम ठाकुर ने दी प्रतिक्रिया सीपीएस के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी पहले दिन से ही सीपीएस बनाने के फैसले के खिलाफ थी क्योंकि यह असंवैधानिक था और यह संविधान के विरुद्ध निर्णय था। उन्होंने कहा कि जब 2017 में हम सरकार में थे तो हमारे समय भी यह प्रश्न आया था। तो हमने इसे पूर्णतया असंवैधानिक बताते हुए सीपीएस की नियुक्ति नहीं की थी। आज हाईकोर्ट द्वारा फिर से सरकार के तानाशाही पूर्ण और असंवैधानिक फैसले को खारिज कर दिया। हम मांग करते हैं कि इस पद का लाभ लेने वाले सभी विधायकों की सदस्यता भी समाप्त हो। recent visitors 98

54 लाख टन से अधिक मसालों के उत्पादन के साथ मध्य प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया

भोपाल मध्यप्रदेश के किसानों ने मसाला फसलों के उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 2023-24 में रिकॉर्ड 54 लाख टन से अधिक मसालों के उत्पादन के साथ प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस उपलब्धि पर प्रदेश के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय किसानों की मेहनत और लगन को दिया गया है। कृषि को लाभकारी बनाने के उपाय प्रदेश के किसानों ने पिछले 4 सालों में 2 लाख 16 हजार मिट्रिक टन मसाला फसलों के उत्पादन में वृद्धि की है। मिर्च के उत्पादन में दूसरा स्थान मिला है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि किसानों के लिए यह आवश्यक है कि वे पारंपरिक कृषि फसलों के साथ-साथ कैश क्रॉप्स जैसे धनिया, हल्दी, मिर्च, अदरक, लहसुन और जीरा भी उगाएं। इन मसाला फसलों का उत्पादन अल्प समय में किया जा सकता है और बाजार में अच्छे दाम भी मिलते हैं। यह फसलें किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती हैं। फ्लोरीकल्चर और फलोद्यान अपनाने की सलाह मंत्री ने किसानों को मसाला फसलों के साथ-साथ फलोद्यान और फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) को भी अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भी किसानों को राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनुदान और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। इसके अलावा, शासकीय नर्सरियों से उत्तम गुणवत्ता के बीज और पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। फसलों के संरक्षण के लिए योजनाएं कुशवाह ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी किसानों को मदद देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और भंडारण सुविधाओं के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गई हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे फसलों के संरक्षण और भंडारण में सक्षम हो सकें। recent visitors 249