आपात स्थिति में जीवन संरक्षण में एयर एम्बुलेंस सेवा हो रही है कारगर

पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा से जच्चा-बच्चा का जीवन हुआ संरक्षित सरकार हर नागरिक को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री शुक्ल आपात स्थिति में जीवन संरक्षण में एयर एम्बुलेंस सेवा हो रही है कारगर भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सरकार हर नागरिक को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। चिकित्सा अधोसंरचना और चिकित्सकीय उन्नत तकनीक की व्यवस्था के साथ मैन पॉवर उपलब्धता के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 'पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा' आपातकाल में नागरिकों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण पहल है। आपात स्थिति में समय से उचित चिकित्सकीय सेवा की उपलब्धता से कई जिंदगियों का बचाव किया जा रहा है। छतरपुर के ग्राम खेरो की निवासी गर्भवती महिला श्रीमती रानी पटेरिया (पत्नी उमेश पटेरिया) को पीएमएयर एम्बुलेंस सुविधा से आपात स्थिति में उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर जच्चा- बच्चा का जीवन सुरक्षित किया गया। उल्लेखनीय है कि श्रीमती रानी पटेरिया को रविवार 10 नवंबर को जिला अस्पताल छतरपुर में भर्ती किया गया। महिला की स्थिति "फुल टर्म प्रेगनेंसी विद प्रिवियस एल एस सी एस" के कारण हाई रिस्क श्रेणी में थी। डॉ. निधी खरे द्वारा सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के पश्चात महिला को पोस्ट पार्टम ब्लीडिंग की समस्या उत्पन्न हो गई। स्त्री रोग विशेषज्ञ ने ब्लीडिंग रोकने के लिए आवश्यक उपचार किया तथा हिसटेक्टोमी की गई। महिला को 4 यूनिट ब्लड का ट्रांसफ्यूजन किया गया और उसे निरंतर ऑब्जर्वेशन में रखा गया। निःशुल्क मिली सुविधा ऑब्जर्वेशन के दौरान महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ ने सीएमएचओ डॉ. आर.पी. गुप्ता से विचार-विमर्श किया। जिला अस्पताल की टीम, सिविल सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और सीएमएचओ द्वारा महिला को हायर सेंटर रेफर करने का निर्णय लिया गया। चूंकि महिला आयुष्मान कार्ड धारक थी, अतः उसे आयुष्मान योजना के अंतर्गत चिरायू हॉस्पिटल, भोपाल में रेफर किया गया। चिरायू हॉस्पिटल में बेड उपलब्धता की पुष्टि के पश्चात, kelsa.io पर एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था हेतु अनुरोध किया गया। सीएमएचओ और सिविल सर्जन की देखरेख में महिला को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से खजुराहो एयरपोर्ट लाया गया और एयर एम्बुलेंस से भोपाल भेजा गया। भोपाल एयरपोर्ट पर महिला को 108 एम्बुलेंस द्वारा चिरायू हॉस्पिटल पहुँचाया गया, जहाँ शाम 7:30 बजे महिला को भर्ती कर लिया गया। वर्तमान में, चिरायू हॉस्पिटल में महिला की स्थिति स्थिर और सामान्य है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा से प्रदेश में कहीं भी चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न होने या चिन्हित विशेष प्रकार की चिकित्सा सुविधा या चिकित्सा विशेषज्ञों की आवश्यकता निर्मित होने पर कठिन भौगोलिक परिस्थिति में प्रदेशए के दूरस्थ अंचलों तक पहुंचकर उन्नत आपातकालीन चिकित्सा द्वारा मरीजों की को स्थिर कर उच्च चिकित्सा केन्द्रों तक एयर लिफ्ट किये जाने की सेवा प्रदाय की जाती है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा सड़कों एवं औद्योगिक स्थलों में होने वाले हादसों, प्राकृतिक आपदा में गंभीर पीड़ित घायल व्यक्ति को त्वरित उपचार के लिये हवाई परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। हृदय सम्बंधित अथवा अन्य विभिन्न गंभीर बीमारियों जिसमें रोगी/पीड़ित को तत्काल इलाज की आवश्यकता होने की स्थिति में मरीजों को अच्छे एवं उच्चतम चिकित्सा संस्थानों में त्वरित उपचार के लिये हवाई परिवहन सुविधा प्रदाय की जाती है। पात्रता सड़क एवं औद्योगिक दुर्घटना अथवा प्राकृतिक आपदा में पीड़ित को राज्य के अंदर एवं बाहर शासकीय अथवा निजी चिकित्सालय में निशुल्क परिवहन किया जाता है। आयुष्मान कार्डधारी के उपचार के लिये राज्य के अंदर एवं राज्य के बाहर सभी शासकीय एवं आयुष्मान सम्बद्ध अस्पतालों में उपचार हेतु निशुल्क परिवहन की व्यवस्था है। अन्य हितग्राही जो कि आयुष्मान कार्डधारी नहीं हैं, उनके उपचार के लिए राज्य के अंदर स्थित शासकीय अस्पतालों में निःशुल्क परिवहन जबकि राज्य के बाहर के किसी भी अस्पताल में अनुबंधित दर पर सशुल्क परिवहन सेवा उपलब्ध है।   recent visitors 64

दोषी-आरोपी है इसलिए घर नहीं गिरा सकते… बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली अपराधियों पर बुलडोजर ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुना रहा है। जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की पीठ ने अपनी टिप्पणी में कई अहम बातें कही हैं। कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर ऐक्शन कानून नहीं होने का भय दिखाता है। कोर्ट बुलडोजर ऐक्शन पर पूरे देश के लिए गाइडलाइन जारी करेगी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। पिछली सुनवाई में, अदालत ने अपराधों के आरोपियों को निशाना बनाने वाली अवैध विध्वंस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की कार्रवाई का एक भी उदाहरण संविधान की भावना के खिलाफ है। साथ ही इस तरह के मामलों में अखिल भारतीय दिशा-निर्देश बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें ➤कार्यपालिका किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर सकती। केवल आरोप के आधार पर यदि कार्यपालिका किसी व्यक्ति का घर तोड़ती है,तो यह कानून के शासन के बुनियादी सिद्धांत पर प्रहार करेगा। कार्यपालिका न्यायाधीश नहीं बन सकती और न ही किसी आरोपी की संपत्ति को ध्वस्त करने का निर्णय ले सकती है ➤कार्यपालिका द्वारा की गई ज्यादतियों से कानून की कड़ी शक्ति से निपटा जाना चाहिए। हमारे संवैधानिक आदर्श ऐसे किसी भी शक्ति के दुरुपयोग की अनुमति नहीं देते। यह कानून के न्यायालय द्वारा सहन नहीं किया जा सकता। ➤जब किसी विशेष संरचना को अचानक से ध्वस्त करने के लिए चुना जाता है और उसी प्रकार की बाकी संपत्तियों को नहीं छुआ जाता, तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि असली उद्देश्य कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि बिना सुनवाई के दंडित करना था। ➤आवास का अधिकार अनुच्छेद 21 का हिस्सा है। यदि लोगों को उनके घरों से बेदखल करना पड़े,तो अधिकारियों को यह साबित करना चाहिए कि ध्वस्तीकरण ही एकमात्र उपलब्ध विकल्प है। घर के एक हिस्से को ध्वस्त करने के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए। ➤रात के समय महिलाओं और बच्चों को सड़कों पर घसीटते देखना सुखद दृश्य नहीं है। बिना पूर्व कारण बताओ नोटिस के कोई ध्वस्तीकरण नहीं किया जाना चाहिए, जो या तो स्थानीय नगरपालिका कानूनों में दिए गए समय के अनुसार या सेवा की तारीख से 15 दिनों के भीतर (जो भी बाद में हो) प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह नोटिस पंजीकृत डाक के माध्यम से मालिक को भेजा जाएगा और संरचना के बाहरी हिस्से पर भी चिपकाया जाएगा। नोटिस में अवैध निर्माण की प्रकृति, विशेष उल्लंघन का विवरण और डेमोलेशन के आधार शामिल होने चाहिए। ➤अथॉरिटी को आरोपी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देना होगा। ऐसी बैठक के विवरण को रिकॉर्ड किया जाएगा। प्राधिकारी के अंतिम आदेश में नोटिसधारी के पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए। डेमोलशन की प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्डिंग किया जाएगा। डेमोलेशन रिपोर्ट को एक डिजिटल पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। ➤किसी भी निर्देश के उल्लंघन से अवमानना कार्यवाही शुरू की जाएगी। अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए कि यदि ध्वस्तीकरण को निर्देशों के उल्लंघन में पाया जाता है, तो उन्हें ध्वस्त की गई संपत्ति की पुनर्स्थापना के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अधिकारियों को व्यक्तिगत खर्च पर जवाबदेह ठहराया जाएगा, साथ ही हर्जाने का भुगतान भी करना होगा। मनमाने तरीके से घर नहीं गिरा सकते- सुप्रीम कोर्ट जस्टिस गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने फैसला पढ़ते हुए साफ कहा कि प्रशासन मनमाने ढंग से किसी का घर नहीं गिरा सकते। अगर ऐसा कोई भी अधिकारी किसी का भी घर मनमाने या अपनी मर्जी से गिराता है, तो उसपर कार्यवाई भी होनी चाहिए। पीठ ने आगे कहा कि अगर यह पाया गया कि घर अवैध तरीके से गिराया गया है तो, उसके लिए मुआवजा भी मिलेगा। बिना किसी का पक्ष सुने कार्यवाही न की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राशसन जज नहीं बन सकता। अपराध की सजा पूरे परिवार को नहीं- सुप्रीम कोर्ट बुलडोजर ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आप आरोपी के कारण उसके पूरे परिवार को परेशान नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हमारा यह फैसला किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। इसके लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि कार्रवाई के लिए नोटिस डीएम को दी जाए। नोटिस में यह भी बताएं कि यह मकान कैसे अवैध है या कौन सा हिस्सा अवैध है। बेंच ने कहा कि 3 महीने में पोर्टल बनाकर नोटिस साझा किए जाएं। यही नहीं, अवैध निर्माण को गिराने के लिए पहले से बताना जरूरी है। कोर्ट न कहा कि हमने आर्टिकल 142 के तहत फैसला सुनाया है। हमने संविधान के तहत गारंटीकृत अधिकारों पर विचार किया है जो व्यक्तियों को मनमाने राज्य कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करते हैं। कानून का शासन यह सुनिश्चित करने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है कि व्यक्तियों को पता हो कि संपत्ति मनमाने ढंग से नहीं ली जाएगी। दोष सिद्ध करने के लिए पहले से फैसला मत लें- जस्टिस गवई बुलडोजर ऐक्शन पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस गवई ने कहा कि घर होना एक ऐसी चाहत है जो कभी नहीं मिटती,हर परिवार का सपना होता है एक घर। उन्होंने आगे कहा कि एक महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या कार्यपालिका को सजा के प्रमुख रूप में आश्रय छीनने की अनुमति दी जानी चाहिए। जस्टिस गवई ने आगे कहा कि कानून का शासन लोकतांत्रिक सरकार की नींव है। मसला आपराधिक न्याय प्रणाली में निष्पक्षता का है,जो यह कहती है कि कानूनी प्रक्रिया को आरोपी का दोष सिद्ध करने के लिए पहले से ही निर्णय नहीं करना चाहिए।   क्या हो सकता है क्या नहीं?     सिर्फ इसलिए घर नहीं गिराया जा सकता क्योंकि कोई व्यक्ति आरोपी है. राज्य आरोपी या दोषी के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकता.     बुलडोजर एक्शन सामूहिक दंड देने के जैसा है, जिसकी संविधान में अनुमति नहीं है.     निष्पक्ष सुनवाई के बिना किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.     कानून के शासन, कानूनी व्यवस्था में निष्पक्षता पर विचार करना होगा.     कानून का शासन मनमाने विवेक की अनुमति नहीं देता है.     आरोपी और यहां तक ​​कि दोषियों को भी आपराधिक कानून में सुरक्षा … Read more

BRTS के विशेष कॉरिडोर में चल रहीं आईबसों में टिकट घोटाला, डेढ़ करोड़ रुपये हजम कर लिए गए कर्मचारी

 इंदौर  अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) भी रोडवेज की राह पर चलती दिख रही है। बीआरटीएस के विशेष कॉरिडोर में चल रहीं आईबसों में टिकट घोटाला सामने आया है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये हजम कर लिए गए। घोटाले के लिए बदनाम नगर निगम के तैनात कर्मचारी यहां भी केंद्र में हैं। मामला सामने आने के बाद दो कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। कुछ की जगह बदल कर इधर-उधर किया गया है। आशंका है कि घोटाले का आकार काफी बड़ा हो सकता है। अधिकारी अभी जांच जारी रहने की बात कह रहे हैं। ये कर रहे थे घोटाला आईबस के टिकट काउंटर पर तैनात कर्मचारियों से लेकर कंपनी में निगरानी के लिए तैनात सुपरवाइजर और अन्य अधिकारी टीम बनाकर घोटाले को अंजाम दे रहे थे। आईबस में जितने टिकट काटे जाते और जो कुल रुपया जमा होता, रिकॉर्ड में उसे कम दिखाया जाता था। इसके लिए आईबस के टिकटिंग सिस्टम को भी बदल दिया गया। करीब डेढ़ साल से यह फर्जीवाड़ा जारी था। गोपनीय शिकायत मिली इस बीच किसी ने गोपनीय शिकायत कर दी। नगर निगम के अपरआयुक्त और सिटी बस कंपनी के प्रभारी अधिकारी ने अपने स्तर पर जांच की। धांधली में शामिल एक कर्मचारी ने पूछताछ में कबूल भी कर लिया। इसके बाद खामोशी से नगर निगम ने दो कर्मचारियों की बर्खास्तगी का आदेश निकाल दिया। सिस्टम में शामिल कुछ लोगों की जगह बदल दी गई। न तो एफआइआर की गई न ही जांच का दायरा बढ़ाया गया। ऐसे किया घोटाला घोटाले को अंजाम देने के लिए आइबस स्टेशन पर टिकट खिड़की से घोटाले की शुरुआत हुई। ऑनलाइन सिस्टम को बंद कर हाथ में पकड़ी जाने वाली इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन (ईटीएम) से टिकट काटे जाते थे। संबंधित कर्मचारी मशीन का डाटा दर्ज करवाने शाम को एआईसीटीएसएल के दफ्तर जाते थे। वहां सुपरवाइजर और कंप्यूटर ऑपरेटर भी इनसे मिला होता था। ये लोग मिलकर टिकट की संख्या और रुपये को कम कर सिस्टम में दर्ज करते थे। इसके बाद उस मशीन का डाटा डिलीट कर दिया जाता था। दो कर्मियों को किया बर्खास्त घोटाले की प्रारंभिक पुष्टि होने के बाद कंपनी के सीईओ और नगर निगम अपर आयुक्त दिव्यांक सिंह ने अपने स्तर पर जांच को अंजाम दिया। इसके बाद सुपरवाइजर (ईटीएम) सुखदेव ग्रेवाल को बर्खास्त कर दिया गया है। एक अन्य आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेंद्र राजावत को भी हटा दिया गया है। इन लोगों पर निगरानी की जिम्मेदारी वाले तीन अन्य अधिकारियों चेतन कर्निक, जगजीतसिंह और अमित पाल की जगह बदली गई है। बताया जा रहा है कि घोटाले की जानकारी पूर्व के कुछ अधिकारियों को भी थी। अब यह भी जांच की जा रही है। recent visitors 114

भगवान बिरसा मुंडा ’’माटी के वीर पदयात्रा’’ आज जशपुर के पुरना नगर मैदान से हुई शुरू

रायपुर भगवान बिरसा मुंडा ’’माटी के वीर पदयात्रा’’ आज जशपुर के पुरना नगर मैदान से हुई शुरू। पदयात्रा में केंद्रीय युवा कार्यक्रम, खेल, श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय 10 हज़ार से  अधिक माय भारत युवा स्वयंसेवकों के साथ पदयात्रा कर रहे हैं।           माटी के वीर पदयात्रा में उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव,  वित्त, आवास एवं पर्यावरण, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग, कृषि विकास एवं कृषि कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिक विभाग मंत्री श्री रामविचार नेताम, खेल एवं युवा कल्याण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री श्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद श्री राधेश्याम राठिया, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं विधायक श्रीमती गोमती साय, विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, विधायक रामकुमार टोप्पो, विधायक सुशांत शुक्ला, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती प्रियम्वदा सिंह जूदेव शामिल हैं। पदयात्रा विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए समापन रणजीता स्टेडियम में होगा।   भारत माता, छत्तीसगढ़ महतारी और भगवान बिरसा मुंडा की वेशभूषा धारण किए युवा पदयात्रा की शोभा बढ़ा रहे हैं। recent visitors 135

भेड़िए से लड़ने वाली बहादुर भुजलो बाई से सीएम यादव ने की फोन पर बात, 1 लाख रुपए की दी प्रोत्साहन राशि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने छिंदवाड़ा जिले के खकराचौरई गांव में भेड़िए का साहस से सामना करने वाली बहादुर महिला भुजलो बाई से फोन पर बात कर उनका कुशलक्षेम पूछा। CM मोहन ने उनके उचित इलाज के लिए कलेक्टर छिंदवाड़ा को निर्देशित किया और भुजलो बाई के साहस के प्रोत्साहन स्वरूप उन्हें एक लाख रुपए स्वीकृत किए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने महिला से वीडियो कॉल में बात करते हुए कहा कि उचित इलाज के लिए कलेक्टर छिंदवाड़ा को निर्देशित किया है। साथ ही आवश्यक होने पर भोपाल में उपचार के निर्देश भी दिए है। इस दौरान डॉ यादव ने भेड़िये के हमले से घायल महिला  के परिजनों से भी हालचाल जाना, इसके साथ ही इलाज का पूरा खर्चा उठाने का भरोसा भी दिलाया। ऐसे हुआ था महिला का भेड़िए से सामना बता दें कि फसल की रखवाली के दौरान शुक्रवार सुबह अमरवाड़ा रेंज के अंतर्गत खकराचौरई गांव के पास खेत में दो महिलाएं भुजलो बाई (65) व दुर्गाबाई (55) सो रही थीं। तभी भुजलों पर भेड़िए ने हमला किया और उनके एक हाथ का अंगूठा चबा लिया। चिल्लाने की आवाज आई तो दुर्गा बाई भुजलो को बचाने पहुंची। भेड़िए ने उनके हाथ, सिर पर चोट पहुंचाई। आधे घंटे तक महिलाओं व भेड़िए के बीच संघर्ष चलता रहा। इसके बाद भुजलो ने पास रखे फावड़े से वार कर भेड़िए की जान ले ली। भेड़िए के हमले से घायल दोनों महिलाओं को जिला अस्पताल छिंदवाड़ा में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।  recent visitors 114

MP के हर जिले में स्थापित होगा साइबर थाना, हर थाने में होगी साइबर डेस्क: सीएम डॉ. मोहन यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि अगर किसी के साथ ऐसी किसी घटना होती है तो वो तुरंत पुलिस को सूचना दें। इसी के साथ अब मध्य प्रदेश के हर जिले में साइबर थाना बनाया जाएगा और हर थाने में साइबर डेस्क स्थापित की जाएगी। आज के डिजिटल युग में साइबर क्राइम और ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्कैमर्स नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को फंसा रहे हैं। हालिया मामलों में, साइबर अपराधी नकली फोन कॉल्स, फिशिंग ईमेल और फर्जी वेबसाइट्स का उपयोग कर लोगों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी हासिल कर रहे हैं। इसी के साथ पिछले कुछ दिनों में डिजिटल अरेस्ट के भी कई मामले सामने आए हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मन की बात कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए “रुकें, सोचें और एक्शन लें” का मंत्र दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी इसे लेकर लोगों को सचेत रहने को कहा है। अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी लोगों को साइबर अपराधों से सचेत रहने की बात कही है। इसी के साथ उन्होंने बताया कि प्रदेश में साइबर पुलिस को अत्याधुनिक बनाने के प्रयास तेज़ी से जारी हैं। इसी कड़ी में हर जिले में साइबर थाने स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही प्रदेश के सभी थानों में साइबर डेस्क की व्यवस्था भी की जा रही है। साइबर अपराध से निपटने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 को और भी अधिक प्रभावशाली बनाया जाएगा। पूरे प्रदेश में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक जन-जागरण अभियान भी चलाया जाएगा ताकि साइबर अपराध की रोकथाम के उपायों की जानकारी हर नागरिक तक पहुँच सके। जानिए क्या है डिजिटल अरेस्ट मुख्यमंत्री ने डिजिटल अरेस्ट से खासतौर पर बचने की सलाह दी है और ऐसी स्थिति बनने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करने को कहा है। बता दें कि “डिजिटल अरेस्ट” एक साइबर धोखाधड़ी का तरीका है जिसमें अपराधी ख़ुद को सामने वाले से सामने कानून प्रवर्तन अधिकारी जैसे पुलिस या सीबीआई अधिकारी के रूप में  प्रस्तुत करता है और उन्हें गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। इस धोखाधड़ी में, व्यक्ति को वीडियो कॉल या मोबाइल ऐप के माध्यम से धमकाया जाता है और उसे लगातार कॉल या चैट में बांधे रखते हुए पैसे या अन्य मांग की जाती है। इस तरह की ठगी के मामलों में अपराधी लोगों को उनके डेटा या आधार नंबर जैसे व्यक्तिगत जानकारी मांग कर वित्तीय नुकसान पहुंचाते हैं। डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों से बचने के उपाय अनजान कॉल्स और संदेशों से सतर्क रहें अगर कोई व्यक्ति पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर फोन पर जानकारी मांगे, तो सावधान रहें। किसी भी लिंक या ऐप को अनावश्यक रूप से डाउनलोड न करें। ठग इन ऐप्स के माध्यम से आपके फोन को नियंत्रित कर सकते हैं। डर की मन:स्थिति  में निर्णय न लें। हमेशा अपने दोस्तों या परिवार से चर्चा करें और सुनिश्चित करें कि वास्तव में कोई कानूनी कार्रवाई हो रही है या नहीं। और सबसे ज़रूरी है कि साइबर क्राइम हेल्पलाइन का उपयोग करें।  ऐसी स्थिति में फौरन साइबर क्राइम पुलिस की मदद लें। recent visitors 95

अब देश में एयर इंडिया एक मात्र फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस बची, चार एयरलाइंस बंद हो चुकी

नई दिल्ली  विस्तारा एयरलाइंस अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। इसके विमान एयर इंडिया के बेड़े से उड़ान भर रहे हैं। विस्तारा फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस थी, जिसका एयर इंडिया के साथ मर्ज हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में कई फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। अब सिर्फ एयर इंडिया ही बची है। देश में एविएशन सेक्टर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उतनी की तेजी से फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस खत्म हो रही हैं। पिछले 17 वर्षों में ऐसी 4 एयरलाइंस बंद हो चुकी हैं। इनमें सहारा एयरलाइंस, जेट एयरवेज, किंगफिशर और अब विस्तारा शामिल हैं। फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस से मतलब है कि ऐसी एयरलाइंस जिनमें यात्रियों को खाने की सुविधा दी जाती है। इनमें इंडिगो जैसी लो बजट एयरलाइंस शामिल नहीं होतीं। एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस की हिस्सेदारी विस्तारा में सिंगापुर एयरलाइंस की 49 फीसदी हिस्सेदारी थी। अब इसके एयर इंडिया में मर्ज होने के बाद विस्तारित एयर इंडिया में हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी हो जाएगी। एफडीआई से मिली रफ्तार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में एफडीआई को लेकर कई नियमों में रियायत दी थी। मनमोहन सिंह के नेतृत्व की यूपीए सरकार ने विदेशी एयरलाइंस को घरेलू एयरलाइंस में 49 फीसदी तक की हिस्सेदारी की अनुमति दी थी। इसी कारण से विदेशी एयरलाइंस की ओर से किए गए निवेश के कारण ही विस्तारा और दूसरी एयरलाइंस उड़ान भर सकीं। उसी समय जेट एयरवेज में गल्फ एयरलाइंस एतिहाद ने 24 फीसदी विदेशी हिस्सेदारी ली। वहीं एयर एशिया इंडिया में मलेशिया एयर एशिया की 49 फीसदी हिस्सेदारी रही। फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस का अंत विस्तारा की शुरुआत जनवरी 2015 में हुई थी। यह तब से ही फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस थी। साल 2007 में एयर इंडिया में इंडियन एयरलाइंस का विलय हुआ था। एयर इंडिया भी फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस है। उस दौरान सहारा एयरलाइंस, जेट एयरवेज और किंगफिशर भी यह सर्विस दे रही थीं। लेकिन बाद में चक्र पूरी तरह घूमता गया। साल 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस बंद हो गई। इसके बाद एयर सहारा का जेट एयरवेज में मर्जर हो गया। यानी एयर सहारा भी बंद। साल 2019 में जेट एयरवेज भी बंद हो गई। और अब 11 नवंबर 2024 से विस्तारा एयरलाइंस का एयर इंडिया में पूरी तरह मर्जर हो चुका है यानी विस्तारा का भी संचालन पूरी तरह बंद हो गया। ऐसे में अब सिर्फ एयर इंडिया ही फुल सर्विस कैरियर एयरलाइंस बची है। recent visitors 136