उज्जैन में साधु संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर आदि को स्थाई आश्रम बनाने की अनुमति दी जाएगी -मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में हरिद्वार के तर्ज पर साधु संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर आदि को स्थाई आश्रम बनाने की अनुमति दी जाएगी। उज्जैन की पहचान साधु-संतों से है। साधु-संतों को उज्जैन में आने, ठहरने, कथा, भागवत इत्यादि और अन्य आयोजन के लिए पर्याप्त रूप से भूमि भूखंड की आवश्यकता पड़ती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा साधु-संतों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्थायी आश्रम बनाए जाने की योजना बनाई गई है। निजी होटल्स में साधु-संतों और श्रद्धालुओं को इस प्रकार के आयोजनों के लिए चुनौतियां आती हैं और महंगा भी पड़ता है। यहां 12 वर्षों में एक बार आयोजित होने वाला सिंहस्थ का आयोजन 2028 में किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में सिंहस्थ के संबंध में आयोजित प्रेस-वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय,महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति कलावती यादव, संभागायुक्त संजय गुप्ता, आईजी संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में जिस प्रकार साधु-संतों के अच्छे आश्रम बने हुए हैं, उसी प्रकार विकास के क्रम को जारी रखते हुए उज्जैन में भी साधु संतों के स्थायी आश्रम बनाने के प्रयास किए जाएंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से इस बड़ी योजना को आकार दिया जाएगा। सभी साधु-संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर सभी को आमंत्रित कर उनके स्थायी आश्रम बनाने की दिशा में काम करेंगे। सिंहस्थ के दृष्टिगत सड़क, बिजली, पेयजल, जल निकासी इत्यादि मूलभूत सुविधाओं के लिए भी स्थाई अधोसंरचना का निर्माण किया जाएगा। ताकि अस्थाई निर्माण से होने वाली समस्याएं निर्मित ना हों। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की तरह उज्जैन को धार्मिक शहर के रूप में विकसित करने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार की गई है। सभी प्रकार के फोरलेन, सिक्सलेन ब्रिज आदि स्थायी अधोसंरचना विकास के कार्य किए जाएंगे। सभी मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ साधु-संतों के लिए आश्रम निर्माण के कार्य समानांतर रूप से किए जाएंगे। समाज के इच्छुक सनातन धर्मावलंबियों के माध्यम से अन्न क्षेत्र, धर्मशाला, आश्रम, चिकित्सा केंद्र, आयुर्वेद केंद्र आदि सार्वजनिक गतिविधियों के संचालन कार्य को भी प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सहित प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश सरकार निरंतर आगे बढ़ रही है। समान रूप से विकास से सभी की खुशहाली के द्वार खुलेंगे। सभी देव स्थानों के आसपास हमारे धर्माचार्य आ जाए यह हमारी प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि साधु-संतों को आश्रम निर्माण के लिए अनुमति इस प्रकार दी जाएगी कि पांच बीघा में से एक बीघा भूखंड पर ही भवन का निर्माण किया जा सकेगा। शेष चार बीघा भूखंड खुला रहेगा, जिसमें पार्किंग आदि व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त खुला स्थान रहे। यह अनुमति केवल साधु-संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर को ही दी जाएगी। व्यक्तिगत और कमर्शियल उपयोग के लिए इस प्रकार की अनुमति नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि महाकाल महालोक बनने के बाद से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। निरंतर यहां धार्मिक आयोजनों का क्रम जारी रहता है। ऐसे में यह योजना धर्मावलंबियों के लिए बड़ी लाभकारी सिद्ध होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए पूरी योजना तैयार की गई है। उज्जैन-इंदौर सिक्स लेन कार्य की भी टेंडर प्रक्रिया हो गई है। वहीं उज्जैन- जावरा ग्रीन फील्ड फोरलेन मार्ग का शीघ्र भूमिपूजन किया जाएगा। इसी प्रकार बृहद योजना के तहत इंदौर, उज्जैन, धार, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर आदि को विकसित किया जाएगा। उज्जैन के धार्मिक मूल स्वरूप को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रो ट्रेन का संचालन की सैद्धांतिक स्वीकृति भी दे दी गई है। इसी के साथ उज्जैन, देवास, फतेहाबाद, इंदौर को जोड़ते हुए सर्किल वंदे मेट्रो ट्रेन का भी संचालन किया जाएगा, जिसकी गति मेट्रो ट्रेन की तुलना में अधिक होगी। रेल रूट के साथ उज्जैन के सभी मार्गों का भी सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। उज्जैन से निकलने वाले सभी मार्ग फोरलेन किए जाएंगे। वर्तमान एयरस्ट्रिप का भी उन्नयन कर टेक्निकल रूप से एयरपोर्ट बनाया जायेगा, ताकि 12 महीने हवाई यातायात सुविधा भी उज्जैन को मिल सके।       recent visitors 73

उड़ानों पर धमकी भरे फर्जी कॉल पर केंद्र सरकार सख्त, कानून में बदलाव करने का निर्णय, जुर्माने के साथ सजा भी दी जाएगी

नई दिल्ली देश भर की तमाम एयरलाइन कंपनियों के विमानों में बम की धमकी मिलने का सिलसिला पिछले कई हफ्तों से जारी है। रविवार को भी 25 विमानों में बम होने की धमकी दी गई थी, जिसके बाद 25 विमानों में बम होने की धमकी दी गई। इन धमकियों को लेकर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक आरएस भट्टी और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के महानिदेशक जुल्फिकार हसन ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस बैठक के दौरान गृह मंत्रालय को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर धमकी भरे फर्जी कॉल के बारे में अवगत कराया गया। केंद्र सरकार इस मामले में सख्त हो गई। उन्होंने कानून में बदलाव करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही अपराधी को जुर्माने के साथ सजा भी दी जाएगी। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने  विमानों को बम से उड़ाने की धमकी पर बात की। उन्होंने कहा, "अगर आवश्यक हुआ तो हमने मंत्रालय की तरफ से कुछ विधायी कार्रवाई के बारे में सोचा है। हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि ऐसे दो क्षेत्र हैं जिन पर हम काम कर सकते हैं। 1. विमान सुरक्षा नियमों में संशोधन। एन नियमों को बदलकर हम जो करना चाहते हैं , वह यह है कि अपराधी जब पकड़ा जाएगा तो हम उन्हें नो-फ्लाइंग सूची में डालना चाहते हैं। 2.  नागरिक उड्डयन सुरक्षा अधिनियम के विरुद्ध गैरकानूनी कार्यों को खत्म करना।" उन्होंने आगे कहा, "हम इसे संज्ञेय अपराधों की सूची में डाल रहे हैं और उस संशोधन के आधार पर जुर्माने के साथ सजा भी दी जाएगी।" लगातार मिल रहे इन धमकियों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने हवाईअड्डों पर एहतियातन सतर्कता बढ़ा दी है। उन्होंने इन झूठी धमकियों की रिपोर्ट भी मांगी है। रविवार को इंडिगो, विस्तारा, एयर इंडिया और अकासा समेत 20 से अधिक भारतीय विमानों में बम की धमकी मिली। इंडिगो, विस्तारा और एयर इंडिया की छह-छह उड़ानों में बम होने की धमकी दी गई। इंडिगो के प्रवक्ता ने बताया कि इंडिगो की 6E 58 जेद्दा से मुंबई, 6E87 कोझिकोड से दम्मम, 6E11 दिल्ली से इस्तांबुल, 6E17 मुंबई से इस्तांबुल, 6E133 पुणे से जोधपुर और 6E112 गोवा से अहमदाबाद फ्लाइट में बम होने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विमानों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले हैंडल को ब्लॉक कर दिया गया। पिछले हफ्ते से अब तक 100 से अधिक उड़ानों में बम की धमकियां मिल चुकी हैं। सभी धमकियां अफवाह निकली हैं।  recent visitors 95

अब मालदीव में भी भारत का UPI चलेगा, रिश्तों की बागडोर थाम मुइज्जू फिर भारत के दरवाजे पर आ खड़ा हुआ

नई दिल्ली  अब मालदीव में भी भारत का यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स सिस्टम) चलेगा। मोहम्मद मुइज्जू ने चुनाव प्रचार के दौरान से ही भारत के खिलाफ जो आक्रोश दिखाना शुरू किया था, अब वो ठंडा पड़ गया है। राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद मुइज्जू ने भारत के सैनिकों को मालदीव से निकाल दिया। इस बीच मुइज्जू की कुछ मंत्रियों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुत ओछी टिप्पणियां कीं। ये सब कुछ महीनों तक चलता रहा, लेकिन जब नफरत की गांठ खुली तो रिश्तों की बागडोर थाम मालदीव फिर भारत के दरवाजे पर आ खड़ा हुआ। इस वजह से भारत और मालदीव के बीच रिश्तों में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। मुइज्जू सरकार ने भारत के मुकाबले चीन की ओर अधिक झुकाव दिखाना शुरू किया। हालांकि, हाल के दिनों में भारत और मालदीव ने अपने रिश्तों को सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मालदीव में तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लागू करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। जयशंकर ने कहा कि यह डिजिटल इनोवेशन मालदीव में पर्यटन और आर्थिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत ने अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से वास्तव में डिजिटल लेनदेन में क्रांति ला दी है। भारत में इसने वित्तीय समावेशन को नए स्तरों पर पहुंचाया है। आज दुनिया के 40 प्रतिशत रियल टाइम डिजिटल पेमेंट हमारे देश में होते हैं। हम अपने जीवन में हर दिन इस क्रांति को देखते हैं। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि आज समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके हमने मालदीव में इस डिजिटल इनोवेशन को लाने की दिशा में पहला कदम उठाया है। इसका पर्यटन पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारत-मालदीव के रिश्तों में क्यों आई थी खटास? वर्ष 1988 से ही डिफेंस और सिक्यॉरिटी भारत और मालदीव के बीच सहयोग के बड़े क्षेत्र रहे हैं। भारत के रक्षा संस्थानों में मालदीव के सैनिकों को ट्रेनिंग दी जाती रही है। भारत और मालदीव के बीच अप्रैल 2016 में समन्वित रक्षा साझेदारी का भी समझौता हुआ था। भारत और मालदीव के बीच संबंधों में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी की मांग की। यह घटना उस समय हुई जब उन्होंने भारतीय सैन्य सहायता को एक खतरे के रूप में देखा। इसके बाद, भारतीय सैन्य कर्मियों को मालदीव से हटा दिया गया। यह स्थिति भारत के लिए न केवल कूटनीतिक दृष्टि से बल्कि सामरिक दृष्टि से भी चिंता का विषय बन गई। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने चीन के साथ निकटता बढ़ाई थी और भारत के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया था। यामीन के कार्यकाल में भारत के खिलाफ 'इंडिया आउट कैंपेन' चलाया गया, जिसने भारत-मालदीव संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। ऊपर से मालदीव ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में शामिल होकर भारत से अपने संबंधों को और कमजोर कर दिया। मालदीव हमारी 'नेबरहुड फर्स्ट' पॉलिसी की आधारशिलाओं में से एक है, यह हमारे विजन सागर में से एक है, साथ ही ग्लोबल साउथ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में संक्षेप में कहें तो भारत के लिए पड़ोस प्राथमिकता है और पड़ोस में मालदीव प्राथमिकता है। हम इतिहास और रिश्तेदारी के सबसे करीबी बंधन भी साझा करते हैं। मित्रता के दौर में वापसी हालांकि, हाल के महीनों में स्थिति में बदलाव आया है। राष्ट्रपति मुइज्जू के नेतृत्व में मालदीव ने भारत के साथ संबंधों को फिर से सुधारने का प्रयास किया है। उनका यह निर्णय आर्थिक संकट, भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और चीन से अपेक्षित समर्थन की कमी के कारण आया है। हाल ही में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मालदीव की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान यह घोषणा की कि भारत और मालदीव ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत मालदीव में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) लागू किया जाएगा। जयशंकर ने कहा, 'यह डिजिटल इनोवेशन मालदीव में लाने की दिशा में पहला कदम है। इससे पर्यटन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।' मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जामीर ने भी भारत को अपना करीबी मित्र और विकास साझीदार बताया, जो आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित है। उन्होंने मालदीव दौरे में कहा, 'जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत ने अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से वास्तव में डिजिटल लेनदेन में क्रांति ला दी है। भारत में इसने वित्तीय समावेशन को नए स्तरों पर पहुंचाया है। आज दुनिया के 40 प्रतिशत रियल टाइम डिजिटल पेमेंट हमारे देश में होते हैं। हम अपने जीवन में हर दिन इस क्रांति को देखते हैं। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि आज समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके हमने मालदीव में इस डिजिटल इनोवेशन को लाने की दिशा में पहला कदम उठाया है। मैं दोनों पक्षों के हितधारकों को शुभकामनाएं देता हूं और आशा करता हूं कि हम जल्द ही यहां पहला UPI लेनदेन देखेंगे। इसका पर्यटन पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।' सहयोग की नई संभावनाएं भारत और मालदीव के बीच संबंधों में सुधार के लिए कई कारण सामने आए हैं। सबसे पहले, आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। मालदीव ने भारत से वित्तीय सहायता की मांग की है, जिसमें करेंसी स्वैप की सुविधा भी शामिल है। भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए 750 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप की सुविधा की पेशकश की है। इसके अलावा, मालदीव और भारत के बीच व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाएं भी हैं। जामीर ने कहा कि ऐसे समझौते व्यापार उदारीकरण को सरल बनाएंगे और दोनों देशों के बीच व्यापारिक जोखिम को कम करेंगे। मालदीव दौरे पर जयशंकर ने कहा था, 'मालदीव हमारी 'नेबरहुड फर्स्ट' पॉलिसी की आधारशिलाओं में से एक है, यह हमारे विजन सागर में से एक है, साथ ही ग्लोबल साउथ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में संक्षेप में कहें तो भारत के लिए पड़ोस प्राथमिकता है और पड़ोस में मालदीव प्राथमिकता है। हम इतिहास और रिश्तेदारी के सबसे करीबी बंधन भी साझा करते हैं।' राजनीतिक … Read more

देश में सड़क हादसों में हर साल मरने वालों में 60% लोग 18-34 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं

नई दिल्ली भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा चिंताजनक है। 2023 में देश में 1,73,000 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा बैठे। इनमें से लगभग 55% मौतें केवल छह बड़े राज्यों – उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई हैं। राजस्थान में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा इजाफा देखा गया है, जहां 2022 की तुलना में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 6% की वृद्धि हुई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस बढ़ते हुए आंकड़े पर चिंता व्यक्त करते हुए शनिवार को अधिकारियों और इंजीनियरों से सड़क दुर्घटनाओं की जांच करने और सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया। सड़क हादसों में बुझ गए हजारों घरों के चिराग आंकड़ों से पता चलता है कि 2023 में इन छह राज्यों में 95,246 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई, जबकि 2022 में यह संख्या 91,936 थी। हालांकि सड़क परिवहन मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा अभी तक सड़क दुर्घटनाओं और मौतों पर रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई है, लेकिन यह ट्रेंड बताता है कि भारत द्वारा अगले छह वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को आधा करने की कोशिश के बावजूद यह समस्या कितनी गंभीर होती जा रही है। पिछले साल देश में कहां हुए सबसे अधिक सड़क हादसे दिल्ली में संयुक्त आयुक्त (यातायात) रह चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी सत्येंद्र गर्ग ने बताया कि दुर्घटनाओं की उचित जांच और हस्तक्षेप से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। दिल्ली के यातायात मुद्दों से निपटने के दौरान मुझे इसका एहसास हुआ था। ज़्यादातर दुर्घटनाओं और मौतों को रोका जा सकता है। हादसों की जांच जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अधिकारियों को इस मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है कि बड़े राज्यों में सड़कें और वाहन ज्यादा होने के कारण सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या भी ज्यादा होगी। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और ड्राइविंग मैनुअल के लेखक नरेश राघवन का कहना है कि कानूनों को लागू करने के साथ-साथ ड्राइवरों को शिक्षित करने पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। वह कहते हैं कि याद रखें कि केवल पांच या छह नियमों को ही पुलिस यातायात नियमों को लागू कर सकती है। शेष 45 बुनियादी सड़क नियम लोगों/ड्राइवरों को सिखाने होंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को सड़क और पुल निर्माण में उभरते रुझानों और तकनीकों पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले साल सड़क दुर्घटनाओं में हमने 1.73 लाख लोगों की जान गंवाई है और याद रखें कि हर साल मरने वाले लगभग 60% लोग 18-34 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं। सड़क दुर्घटनाओं की सामाजिक-आर्थिक लागत हमारे सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 3% है। कृपया इसे गंभीरता से लें। सड़क सुरक्षा के मुद्दों को संवेदनशीलता से निपटें, दुर्घटनाओं की जांच करें, खतरनाक जगहों को ठीक करें और मुद्दों का समाधान करें। हमने युद्धों में भी इतने लोगों को कभी नहीं खोया। recent visitors 166

CM नायडू ने देश के जनसांख्यिकीय लाभ को बनाए रखने के लिए युवा आबादी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया

अमरावती आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बढ़ती उम्रदराज आबादी के बारे में चिंता जाहिर की है. इसे लेकर बढ़ती चिंताओं का हवाला देते हुए उन्होंने दक्षिणी राज्यों के परिवारों से अधिक बच्चे पैदा करने का आग्रह किया. नायडू ने देश के जनसांख्यिकीय लाभ को बनाए रखने के लिए क्षेत्र में युवा आबादी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया. अपने संबोधन के दौरान, मुख्यमंत्री ने बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करने वाले कानून को पेश करने की योजना का खुलासा किया. नायडू ने घोषणा की, "सरकार केवल दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए पात्र बनाने के लिए कानून लाने की योजना बना रही है." बढ़ती उम्रदराज आबादी पर जाहिर की चिंता इस कदम का उद्देश्य परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना और आने वाले वर्षों में एक युवा, अधिक जीवंत आबादी सुनिश्चित करना है. नायडू ने आंध्र प्रदेश सहित दक्षिण भारत में बढ़ती उम्रदराज आबादी के उभरते मुद्दे पर प्रकाश डाला.  उन्होंने कहा, "हालांकि हमारे पास 2047 तक जनसांख्यिकीय लाभ है, लेकिन दक्षिण भारत में उम्र बढ़ने की समस्या के संकेत दिखाई देने लगे हैं. जापान, चीन और कुछ यूरोपीय देशों जैसे कई देश इस मुद्दे से जूझ रहे हैं, जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्ग है." उन्होंने कहा कि बेहतर अवसरों की तलाश में युवा लोगों के देश के दूसरे हिस्सों या विदेश में पलायन के कारण दक्षिणी राज्यों में यह चुनौती और भी बदतर हो गई है. ट्रेंड जारी रहा तो दिक्कतें बढ़ेंगी- नायडू CM नायडू ने कहा, "आंध्र प्रदेश और देश भर के कई गांवों में केवल बुजुर्ग लोग ही बचे हैं. युवा पीढ़ी शहरों में चली गई है." नायडू ने आगे कहा कि दक्षिणी राज्यों में प्रजनन दर पहले ही 1.6 तक गिर गई है, जो राष्ट्रीय औसत 2.1 से काफी कम है. उन्होंने चेताते हुए कहा, "अगर प्रजनन दर में गिरावट जारी रही, तो हम 2047 तक गंभीर वृद्धावस्था समस्या का सामना करेंगे, जो वांछनीय नहीं है." recent visitors 82

मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न हुई, नवीन प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की गई

भोपाल   महिला-बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में मंत्रालय में म.प्र. वित्त एवं विकास निगम की 79वीं संचालक मण्डल की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वर्तमान कार्यों की प्रगति तथा निगम के सुदृढ़ीकरण के लिये नवीन प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की गई। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि महिला-बाल विकास विभाग का मुख्य उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण है। महिला वित्त विकास निगम इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि निगम के माध्यम से प्रदेश के महिला वर्क-फोर्स के लिये रिसोर्स पूल तैयार करें। निगम ऑनलाइन पोर्टल तैयार कर प्रदेश की महिला वर्क-फोर्स की कौशल दक्षता का परीक्षण कर उन्हें कुशल, अर्द्ध-कुशल तथ अकुशल श्रेणी में वर्गीकृत करें। अकुशल ओर अर्द्ध-कुशल महिलाओं को प्रशिक्षण दें। सुश्री भूरिया ने कहा कि म.प्र. महिला वित्त एवं विकास निगम प्रदेश के सभी विभागों में महिला वर्क-फोर्स की माँग अनुसार रिसोर्स पूल से कुशल, अकुशल और अर्द्ध-कुशल श्रेणी महिला वर्क-फोर्स को संबंधित विभाग को उपलब्ध करा सकेगा। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये निगम को एक नई भूमिका में आना होगा। विभिन्न विभागों से समन्वय के लिये निगम के अंतर्गत चैनल पार्टनर को सूचीबद्ध करें। उन्होंने दूसरे राज्यों में महिला वित्त विकास निगम की कार्य पद्धति के अध्ययन के लिये टीम भेजकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। महिला वित्त एवं विकास निगम की प्रबंध संचालक श्रीमती निधि निवेदिता ने जानकारी देते हुए बताया कि निगम द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित ऐसे उत्पाद, जो गुणवत्तापूर्ण हों एवं विपणन संबंधित आवश्यकताओं की पूर्ति करते हो, का चिन्हांकन कर बाजार से लिंक किये जाने की कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने बताया कि प्रायोगिक तौर पर एक या दो उत्पाद जैसे कोदो-कुटकी से निर्मित बिस्कुट, कुकीज, नमकीन आदि, जो आवश्यक लायसेंस एवं पंजीकरण की पूर्ति करते हैं, को ऑनलाइन प्लेटफार्म जैसे अमेजॉन आदि पोर्टल पर जोड़ने की कार्यवाही की जायेगी। बैठक में आयुक्त महिला-बाल विकास श्रीमती सूफिया फारुकी वली, महिला वित्त एवं विकास निगम के महाप्रबंधक श्री अरविंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।   recent visitors 80

खाद्य मंत्री ने बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज का किया औचक निरीक्षण

भोपाल प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने सोमवार को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर का निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न डिपार्टमेंट के एचओडी के साथ बैठक कर समीक्षा भी की। मंत्री श्री  राजपूत ने कहा कि लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप बीएमसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का और विस्तार किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज में और भी आवश्यक डिपार्टमेंट खोले जाएंगे। उन्होंने सफल कार्निया प्रत्यारोपण पर खुशी जताते हुए कहा कि सागर में ऐसी सुविधाएं मिलना शुरू हो गईं हैं जो संपूर्ण क्षेत्र के लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पहले जिन सुविधाओं का अभाव था वह धीरे-धीरे  अब पूरी  हुई हैं। यहां  नए डिपार्टमेंट भी खुले हैं और जिन डिपार्टमेंट्स की आवश्यकता है वह भी पूरी की जाएगी। खासकर यहां कैंसर की मशीन आना है । हमारा प्रयास रहेगा कि भविष्य में यहां कैंसर अस्पताल खोला जाए। उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर उनकी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से चर्चा हुई है और स्वास्थ्य मंत्री  से भी बात हुई है।  सागर मेडिकल कॉलेज में जिन- जिन चीजों की आवश्यकता है उनकी जल्द ही पूर्ति किये जाने के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज से लोगों की बहुत सी अपेक्षाएं हैं। यहां आ रहे मरीजों के लिए अधिक से अधिक सुविधाओं की पूर्ति हो यह हमारा प्रयास रहेगा। विधायक शैलेंद्र जैन ने निरीक्षण के दौरान कहां की बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में कैथ लैब न्यूरो विभाग खोलने के लिए सभी तैयारी सुनिश्चित की गई है। शीघ्र ही यह विभाग कार्य करना शुरू करेंगे।   इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉक्टर पीएस ठाकुर ने बताया कि प्रसूति विभाग में डॉक्टरों की कमी है, उसको तत्काल पूरा किया जाए। अभी यहां प्रत्येक माह 1100 से अधिक प्रसव हो रहे हैं। महिला प्रसूति वार्ड की विभाग अध्यक्ष डॉक्टर शीला जैन ने बताया कि डॉक्टरों की पूर्ति हो जाए तो हम लोग 2000 तक प्रसव कराने में सक्षम है। डॉक्टर सुनील सक्सेना ने सर्जरी विभाग के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सर्जरी विभाग के साथ-साथ महिलाओं के स्तन कैंसर की भी जांच की जाती है एवं ऑपरेशन किए जा रहे हैं। नाक कान विभाग की विभाग अध्यक्ष डॉक्टर रीमा गोस्वामी ने मंत्री राजपूत को बताया कि नवजात बच्चों के बहरेपन की जांच प्रथम दिन से ही की जाती है एवं स्पीच थेरेपी भी की जा रही है। इसी प्रकार नेत्र विभाग के डॉ प्रवीण करें ने बताया कि यहां नेत्र प्रत्यारोपण होने से लोगों में कॉलेज के प्रति विश्वास बढ़ा है। हमें कॉलेज को नेत्रदान करने वाले दानदाता भी मिल रहे हैं।  आवश्यकता अनुसार व्यक्तियों का नेत्र प्रत्यारोपण किया जा रहा है।   recent visitors 84