शेख हसीना ने बांग्लादेश से हेलिकॉप्टर पर सवार होकर देश छोड़ा था, अब गिरफ्तारी वॉरंट हुआ जारी

ढाका बांग्लादेश में तख्तापलट और खूनी हिंसा के बाद देश छोड़कर निकलीं शेख हसीना के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया गया है। स्थानीय मीडिया के अनुसार देश की एक अदालत ने उन पर मानवता के खिलाफ अपराध किए जाने के आरोपों में गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया है। शेख हसीना ने बांग्लादेश से हेलिकॉप्टर पर सवार होकर देश छोड़ा था और दिल्ली के पास स्थित हिंडन एयरबेस पर उतरी थीं। उसके बाद से वह भारत में ही रह रही हैं, लेकिन उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। शेख हसीना के खिलाफ अदालत में अर्जी डालने वाले वकील मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने कहा कि यह यादगार दिन है। वहीं बांग्लादेश में आंदोलन के दौरान मारे गए सैकड़ों लोगों में से एक के परिजनों ने कहा कि यह अच्छी खबर है। हम उम्मीद करते हैं कि अब शेख हसीना के खिलाफ ट्रायल आगे बढ़ेगा और हमें न्याय मिलेगा। शेख हसीना बीते 15 सालों से बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज थीं। उन पर आरोप है कि पीएम रहते हुए उनके शासनकाल में बड़े पैमाने पर लोगों की गिरफ्तारी हुई। इसके अलावा राजनीतिक विरोधियों को चुन-चुनकर मार डाला गया। बांग्लादेश इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल के मुख्य अधिवक्ता ताजुल इस्लाम ने कहा कि शेख हसीना को 18 नवंबर को अदालत ने पेश करने का आदेश दिया है। इस्लाम ने कहा, 'शेख हसीना उन लोगों का नेतृत्व कर रही थीं, जिन्होंने देश में जुलाई से अगस्त तक हिंसा फैलाई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए।' अदालत ने शेख हसीना के अलावा उनकी पार्टी अवामी लीग के महासचिव कायदुल कादर को भी अरेस्ट करने को कहा है। इन दोनों नेताओं के अलावा 44 अन्य के लिए भी गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया गया है। इन 44 लोगों के नाम जारी नहीं किए गए हैं। recent visitors 92

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 6A को वैध करार दिया, नागरिकता कानून पर सरकार की बड़ी जीत

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6A की वैधता पर अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने धारा 6A की वैधता को बरकरार रखा है. CJI डीवाई चंद्रचूड़ का कहना था कि 6A उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते हैं और ठोस प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आते हैं. दरअसल, सिटीजनशिप एक्ट की धारा 6A को 1985 में असम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए संशोधन के बाद जोड़ा गया था. असम समझौते के तहत भारत आने वाले लोगों की नागरिकता के लिए एक विशेष प्रावधान के रूप में नागरिकता अधिनियम में धारा 6ए जोड़ी गई थी. इस धारा में कहा गया है कि जो लोग 1985 में बांग्लादेश समेत क्षेत्रों से 1 जनवरी 1966 या उसके बाद लेकिन 25 मार्च 1971 से पहले असम आए हैं और तब से वहां रह रहे हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए धारा 18 के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस प्रावधान ने असम में बांग्लादेशी प्रवासियों को नागरिकता देने की अंतिम तारीख 25 मार्च 1971 तय कर दी. इससे पहले दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे दायर किया था और कहा था कि वो भारत में अवैध प्रवास की सीमा के बारे में सटीक डेटा नहीं दे पाएगा क्योंकि प्रवासी चोरी-छिपे आए हैं. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा, 6ए उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो जुलाई 1949 के बाद प्रवासित हुए, लेकिन नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, S6A उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो 1 जनवरी 1966 से पहले प्रवासित हुए थे. इस प्रकार यह उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो अनुच्छेद 6 और 7 के अंतर्गत नहीं आते हैं. SC ने गुरुवार को नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6ए की वैधता बरकरार रखी और 4:1 के बहुमत से फैसला दिया. जस्टिस जे पारदीवाला ने असहमति जताई. जस्टिस पारदीवाला का कहना था कि यह संभावित प्रभाव से असंवैधानिक है. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत, एमएम सुंदरेश और मनोज मिश्रा बहुमत में रुख रहा. नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 6ए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. इन याचिकाओं पर SC की पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई की और फैसला सुनाया. कोर्ट का कहना था कि असम में 40 लाख प्रवासियों का प्रभाव पश्चिम बंगाल में जनसंख्या के कारण 56 लाख प्रवासियों के प्रभाव से ज्यादा है. असम को अलग करना वैध है. 1971 की कटऑफ तिथि तर्कसंगत विचार पर आधारित है. ऑपरेशन सर्चलाइट के बाद पूर्वी पाकिस्तान से पलायन बढ़ा है. कोर्ट ने कहा, 6A (3) का उद्देश्य दीर्घकालिक समाधान प्रदान करना है. असम समझौता वहां के निवासियों के अधिकारों को कमजोर करना था. बांग्लादेश और असम समझौते के बाद प्रावधान का उद्देश्य भारतीय नीति के संदर्भ में समझा जाना चाहिए. इसे हटाने से वास्तविक कारणों की अनदेखी होगी. भारत में नागरिकता प्रदान करने के लिए पंजीकरण व्यवस्था जरूरी नहीं है. S 6A को सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह पंजीकरण व्यवस्था का अनुपालन नहीं करता है. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि संसद बाद की नागरिकता के लिए शर्तें निर्धारित करने के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित करने में सक्षम है. जस्टिस सूर्यकान्त ने कहा, संविधान और उदाहरणों को पढ़ने से पता चलता है कि बंधुत्व के लिए सभी पृष्ठभूमि के लोगों से अपेक्षा की जाती है कि जियो और जीने दो. भाईचारे का चयनात्मक आवेदन संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि 6A असंवैधानिक है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 6 और 7 की तुलना में नागरिकता के लिए अलग-अलग तारीखें निर्धारित करता है. अलग-अलग तारीख निर्धारित करने की संसद की क्षमता संविधान में है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रत्येक नागरिक को अनिवार्य रूप से भारत के कानून और संविधान का पालन करना होगा. नागरिकता प्रदान करने से पहले निष्ठा की शपथ का स्पष्ट अभाव कानून का उल्लंघन नहीं है. कोर्ट ने कहा, हम हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं. S6A स्थायी रूप से संचालित नहीं होता है. 1971 के बाद प्रवेश करने वालों को नागरिकता प्रदान नहीं करता है. SC ने कहा, 1 जनवरी 1966 और 24 मार्च 1971 के बीच आए प्रवासियों के लिए नागरिकता नियम कानून के साथ सामंजस्यपूर्ण भूमिका के लिए बनाए गए थे. S6A उन लोगों के निर्वासन की अनुमति देता है जो कट ऑफ तिथि के बाद अवैध रूप से प्रवेश करते हैं. यह नहीं कह सकते कि आप्रवासन ने असम के नागरिकों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया है. याचिकाकर्ता किसी भी अधिकार का उल्लंघन साबित करने में विफल रहे हैं. कोर्ट ने कहा, S6A को यह कहने के लिए प्रतिबंधात्मक तरीके से समझने की जरूरत नहीं है कि किसी भी व्यक्ति का पता लगाया जा सकता है और सिर्फ विदेशी अधिनियम के तहत निर्वासित किया जा सकता है. हमें कोई कारण नहीं दिखता कि विदेशियों का पता लगाने के उद्देश्य से IEAA के तहत वैधानिक पहचान का उपयोग 6A के साथ संयोजन में क्यों नहीं किया जा सकता है. IEAA और 6A के बीच कोई विरोध नहीं है. IEAA और धारा 6A को सामंजस्य में पढ़ा जा सकता है.   recent visitors 64

भारतीय टीम 46 रन पर ढेर, 5 बल्लेबाज खाता तक नहीं खोल पाए, बना सबसे शर्मनाक रिकॉर्ड

 बेंगलुरु भारत और न्यूजीलैंड के बीच 3 मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला टेस्ट बेंगलुरु में खेला जा रहा है. आज (17 अक्टूबर) मैच का दूसरा द‍िन है. भारतीय टीम महज 46 रनों पर ऑलआउट हो गई. यह भारत का अपना तीसरा सबसे न्यूनतम स्कोर है. अब न्यूजीलैंड टीम अपनी पहली पारी में बल्लेबाजी कर रही है. डेवोन कॉन्वे और टॉम लैथम बल्लेबाजी कर रहे हैं. न्यूजीलैंड का स्कोर 30 रन के करीब है. 46 रन भारत की धरती पर क‍िसी का सबसे कम टीम का स्कोर है. भारतीय टीम के पांच बल्लेबाज 0 पर आउट हुए. वहीं न्यूजीलैंड की ओर से मैट हेनरी सबसे सफल गेंदबाज रहे. ज‍िन्होंने कुल 5 व‍िकेट हास‍िल क‍िए. विलियम ओरोर्के को कुल 4 सफलताएं म‍िली. इस मैच से जुड़े अपडेट और स्कोरकार्ड  लिए इस पेज को रिफ्रेश करते रहे. न्यूजीलैंड की टीम अब तक भारतीय जमीन पर कोई भी द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज नहीं जीत सकी है. इस बार दोनों टीमों के बीच 13वीं टेस्ट सीरीज खेली जाएगी. भारतीय टीम की कप्तानी रोहित शर्मा के हाथों में है. जबकि कीवी टीम की कमान टॉम लैथम संभाल रहे हैं. बेंगलुरु टेस्ट में भारतीय टीम ने बेहद शर्मनाक खेल द‍िखाया और पूरी टीम महज 46 रनों पर 31.2 ओवर्स में ऑलआउट हो गई.  यह भारत का अपना तीसरा सबसे न्यूनतम स्कोर है. वहीं भारत की धरती पर यह सबसे कम क‍िसी टीम का स्कोर है. इसके बाद ऋषभ पंत और यशस्वी जायसवाल (13) ने कुछ देर तक पारी संभाली. लेकिन जायसवाल विलियम ओरोर्के की गेंद पर एजाज पटेल को कैच थमा बैठे. भारतीय टीम को इस तरह 31 रन पर चौथा झटका लगा. इसके कुछ देर बाद ही केएल राहुल (0) भी पांचवे विकेट के रूप में 33 रन पर आउट हो गए. टीम इंड‍िया के स्कोर में महज 1 रन और जुड़ा था और गैरज‍िम्मेदाराना शॉट खेलकर रवींद्र जडेजा भी डक पर आउट हो गए. लंच के बाद आए रव‍िचंद्रन अश्व‍िन (0) पहली ही गेंद पर मैट हेनरी की गेंद पर ग्लेन फ‍िल‍िप्स को कैच दे बैठे. भारत के 5 बल्लेबाज खाता ही नहीं खोल सके भारतीय पारी में 5 बल्लेबाज ऐसे रहे, जो खाता ही नहीं खोल सके। किकेट के किंग कहे जाने वाले विराट कोहली शून्य पर आउट होने वाले पहले बल्लेबाज रहे, जबकि सरफराज खान, केएल राहुल, रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन भी बिना स्कोर किए पवेलियन लौट गए। विराट को विलियम ओ राउरकी ने ग्लेन फिलिप्स के हाथों कैच कराया, जबकि उन्हीं की गेंद पर केएल राहुल को टॉम ब्लंडेल ने कैच किया। रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन को दो लगातार गेंदों पर मैट हेनरी ने आउट किया। भारतीय टीम का टेस्ट में सबसे छोटा स्कोर-टॉप-10 स्कोर ओवर विपक्षी ग्राउंड कब 36 21.2 v ऑस्ट्रेलिया एडिलेड 17 दिसंबर 2020 42 17 v इंग्लैंड लॉर्ड्स 20 जून 1974 58 21.3×8 v ऑस्ट्रेलिया ब्रिस्बेन 28 नवंबर 1947 58 21.4 v इंग्लैंड मैनचेस्टर 17 जुलाई 1952 66 34.1 v दक्षिण अफ्रीका डरबन 26 दिसंबर 1996 67 24.2×8 v ऑस्ट्रेलिया मेलबर्न 6 फरवरी 1948 75 30.5 v वेस्टइंडीज दिल्ली 25 नवंबर 1987 76 20 v दक्षिण अफ्रीका अहमदाबाद 3 अप्रैल 2008 78 40.4 v इंग्लैंड लीड्स 25 अगस्त 2021 81 35.5 v वेस्टइंडीज ब्रिजटाउन 27 मार्च 1997 recent visitors 83

नायब सैनी फिर हरियाणा के बने मुख्यमंत्री, CM की शपथ ली, बीजेपी ने दिखाया पावर शो

चंडीगढ़ नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर हरियाणा के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है. नायब सिंह सैनी के साथ उनकी कैबिनेट के मंत्रियों ने भी शपथ ली है. नायब सिंह सैनी ने लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है. शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी समेत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे. इस मौके पर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे. नायब सिंह सैनी के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन पंचकूला में किया गया था. अनिल विज ने भी ली कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ नायब सिंह सैनी के शपथ ग्रहण के मौके पर हरियाणा बीजेपी के वरिष्ठ नेता और अंबाला कैंट से विधायक अनिल विज ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली. अनिल विज के बाद कृष्ण लाल पंवार जो इसराना से विधायक हैं शपथ लिया. कृष्णलाल के बाद राव नरवीर सिंह कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लिया. वो बादशाहपुर से एमएलए हैं. इनके बाद महिपाल ढांडा भी शपथ ली. ढांडा पानीपत ग्रामीण से विधायक हैं. विपुल गोयल को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. डॉ. अरविंद शर्मा गोहाना भी कैबिनेट मंत्री बने. वहीं, श्याम सिंह राणा को राज्य मंत्री बनाया गया है. वो रादौर से विधायक हैं. बरवाला से रणवीर सिंह गंगवा को भी राज्यमंत्री बना गया. रणवीर सिंह के बाद कृष्ण बेदी नरवाना राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लिया. श्रुत चौधरी को भी राज्य मंत्री बनाया गया है. आरती राव ने भी राज्यमंत्री का पदभार संभाला है. राजेश नागर और गौरव गौतम को भी राज्य मंत्री बनाया गया है.  पंचकूला में आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के अलावा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अन्य नेता भी शामिल थे। हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने सैनी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। सैनी लगातार दूसरी बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने हैं। इस दौरान सैनी के मंत्रिमंडल के सदस्यों को भी शपथ दिलाई गई। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बीजपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और केंद्रीय मंत्री मौजूद थे। अनिल विज सहित इन मंत्रियों ने ली शपथ सीएम सैनी के साथ सीनियर बीजेपी नेता अनिल विज ने मंत्री पद की शपथ ली। अनिल विज मनोहर लाल सरकार में गृह मंत्री थे। इसके अलावा कृष्ण लाल पंवार, राव नरबीर सिंह, महिपाल ढांडा, विपुल गोयल, अरविंद शर्मा, श्याम सिंह राणा, रणबीर गंगवा, कृष्ण कुमार बेदी, श्रुति चौधरी, आरती सिंह राव, राजेश नागर (स्वतंत्र प्रभार) और गौरव गौतम (स्वतंत्र प्रभार) ने मंत्री पद की शपथ ली। हरियाणा में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 14 मंत्री हो सकते हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पंचकूला में हुए शपथ ग्रहण समारोह के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। समारोह से कुछ घंटे पहले सैनी वाल्मीकि भवन गए और उन्होंने पंचकूला स्थित गुरुद्वारे एवं मनसा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा कि बीजेपी की नई सरकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हरियाणा को तीव्र गति से आगे ले जाने की दिशा में काम करेगी। सैनी ने विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर कहा कि हरियाणा की जनता ने मोदी सरकार की नीतियों में विश्वास दिखाया है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि बीजेपी के संकल्प पत्र को पूरी तरह लागू किया जाएगा। हरियाणा में पांच अक्टूबर को हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 90 सदस्यीय विधानसभा में 48 सीट जीतकर राज्य में ऐतिहासिक तीसरा कार्यकाल हासिल किया। वहीं, कांग्रेस ने 37 सीट पर जीत दर्ज की। मार्च में मनोहर लाल खट्टर की जगह हरियाणा के मुख्यमंत्री बने नायब सिंह सैनी राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे। 54 वर्षीय सैनी ने बुधवार (16 अक्टूबर) को दत्तात्रेय से मुलाकात की थी। उन्होंने पंचकूला में पार्टी कार्यालय में आयोजित एक बैठक में सर्वसम्मति से बीजेपी विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया। हरियाणा में लगातार तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ-साथ सैनी दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बीजेपी ने हरियाणा में रचा इतिहास भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा के चुनावी महाभारत में सत्ता विरोधी लहर को लेकर राजनीतिक पंडितों के अनुमानों को धत्ता बताते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और लगातार तीसरी बार जीत हासिल की। पिछले विधानसभा में राज्य में गठबंधन की सरकार चलाने वाली बीजेपी ने इस बार 90 सदस्यीय विधानसभा में अकेले 48 सीटों पर स्पष्ट बहुमत हासिल करके 10 साल बाद सत्ता में वापसी के मुख्य विपक्षी कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेर दिया। कांटे के सीधे मुकाबले में भगवा पार्टी कांग्रेस पर भारी पड़ी और कांग्रेस 37 सीटों तक ही पहुंच पाई है। वर्ष 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 40 और कांग्रेस को 31 सीटें मिली थीं। हरियाणा से महाराष्ट्र और झारखंड के लिए भी दिया मैसेज भारतीय जनता पार्टी ने पंजकूला के दशहरा मैदान में आयोजित नायब सैनी के शपथ ग्रहण समारोह से एक मैसेज देने की कोशिश कर रही थी. बीजेपी के लिए नायब सिंह सैनी का शपथ ग्रहण समारोह एक शक्तिप्रदर्शन की तरह था. इसकी एक सबसे बड़ी वजह आने वाले समय में महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी हैं. बीजेपी इस शपथ ग्रहण समारोह से इन दोनों राज्यों की जनता को संदेश देने की कोशिश करते दिखी कि अगर महाराष्ट्र और झारखंड में भी बीजेपी को मौका मिलता है तो वो जनता के हित में फैसले लेने में जरा भी देरी नहीं करेगी. नायब सिंह सैनी ने पूरा किया अपना वादा नायब सिंह सैनी ने शपथ लेने से पहले 24 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटने का वादा किया था. उन्होंने बुधवार को कहा था कि वह 17 अक्टूबर को शपथ लेने से पहले इन युवाओं को नियुक्ति पत्र देंगे. उसके बाद ही शपथ लेंगे. इस दौरान सैनी ने कहा कि था कि हमने चुनाव प्रचार के दौरान प्रदेश के युवाओं से ये वादा किया था. अब जब हम सत्ता में दोबारा आए हैं तो हम पहले जनता से किया अपना वादा पहले पूरा कर … Read more

संजीव खन्ना देश के 51वें चीफ जस्टिस होंगे, कार्यकाल सिर्फ 6 महीने का, 13 मई को रिटायर होंगे

नई दिल्ली CJI डीवाई चंद्रचूड़ नवंबर में कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। खबर है कि भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने जस्टिस संजीव खन्ना के नाम की सिफारिश की है। खास बात है कि जस्टिस खन्ना सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं। खास बात है कि जस्टिस खन्ना भी मई 2025 में रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने वकील के तौर पर साल 1983 में शुरुआत की थी। अगले CJI केंद्र सरकार को लिखे पत्र में सीजेआई चंद्रचूड़ ने जस्टिस खन्ना को उनका उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश की है। CJI चंद्रचूड़ 13 मई 2016 में पहली बार शीर्ष न्यायालय के जज बने थे। वहीं, जस्टिस खन्ना 18 जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट के पहली बार जज बने थे। इससे पहले वह दिल्ली हाईकोर्ट समेत कई ट्रिब्युनल्स में सेवाएं दे चुके हैं। 6 महीने बाद है रिटायरमेंट NALSA यानी नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की लिस्ट में शामिल जस्टिस खन्ना 13 मई 2025 को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अगर वह नवंबर में पद संभालते हैं, तो वह करीब 6 महीने CJI के तौर पर अदालत में सेवाएं देंगे। अगले कौन जस्टिस खन्ना के बाद अगले CJI के तौर पर जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई का नाम चर्चा में है। वह मई 2025 में यह पद संभाल सकते हैं। खास बात है कि देश के दूसरे CJI हो सकते हैं, जो अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। सुप्रीम कोर्ट को पहला दलित CJI जस्टिस केजी बालकृष्ण के रूप में मिला था। वह 11 मई 2010 को रिटायर हो गए थे। जस्टिस गवई भी 6 महीने में होंगे रिटायर खास बात है कि मई में CJI बनने के बाद जस्टिस गवई भी अगले 6 महीने में रिटायर हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 16 मार्च 1985 को कानूनी पेशे की शुरुआत करने वाले जस्टिस गवई 23 नवंबर 2025 को रिटायर होने जा रहे हैं। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि उनके बाद जस्टिस सूर्यकांत यह पद संभाल सकते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में 14 साल तक जज रहे जस्टिस संजीव खन्ना का जन्म 14 मई 1960 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई की। ग्रेजुएशन के बाद, उन्होंने 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में एक वकील के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया। सुप्रीम कोर्ट जज बनाए जाने से पहले वे दिल्ली हाईकोर्ट में 14 साल तक जज रहे। उन्हें 2019 में सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया था। सुप्रीम कोर्ट जज बनने पर भी हुआ था विवाद 32 जजों की अनदेखी करके जस्टिस खन्ना को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने पर जमकर विवाद हुआ था। 10 जनवरी 2019 को कॉलेजियम ने उनकी जगह जस्टिस माहेश्वरी और वरिष्ठता में 33वें स्थान पर जस्टिस खन्ना को प्रमोट करने का फैसला किया। इसके बाद सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दस्तखत कर दिए थे। वरीयता को अनदेखा करते हुए CJI बनाने के दो मामले, दोनों इंदिरा सरकार के अप्रैल 1973 में सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर जजों को दरकिनार करते हुए एएन रे को CJI बनाया गया था।1977 में जब जस्टिस रे रिटायर हुए तो जस्टिस एचआर खन्ना सबसे सीनियर थे। लेकिन, उनकी जगह जस्टिस एमएच बेग को चुना गया। इमरजेंसी के दौरान जस्टिस खन्ना ने इंदिरा सरकार के खिलाफ फैसले सुनाए थे, जस्टिस संजीव खन्ना उन्हीं के भतीजे हैं। जस्टिस संजीव खन्ना के पिता जस्टिस देवराज खन्ना भी दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे। उनके चाचा जस्टिस हंसराज खन्ना भी सुप्रीम कोर्ट जज रहे। यह दुर्लभ संयोग था कि जस्टिस संजीव खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर अपना पहला दिन उसी कोर्ट रूम से शुरू किया, जहां से उनके चाचा, दिवंगत जस्टिस एचआर. खन्ना रिटायर हुए थे। सेम सेक्स मैरिज केस की सुनवाई से खुद को अलग किया अगस्त 2024 में समलैंगिक विवाह पर 52 रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई होनी थी। लेकिन सुनवाई से ठीक पहले जस्टिस संजीव खन्ना ने खुद को केस से अलग कर लिया था। सूत्रों के मुताबिक जस्टिस खन्ना ने इसके पीछे निजी कारणों का हवाला दिया था। जस्टिस खन्ना के अलग होने से रिव्यू पिटीशंस पर विचार करने के लिए पांच जजों की नई बेंच बनाना जरूरी हो जाएगा। इसके बाद ही इन पर सुनवाई हो सकेगी। recent visitors 99

मध्य प्रदेश को कैपिटल ऑफ माइंस बनाने की तैयारी, जानें क्या है सीएम मोहन यादव का प्लान, माइनिंग कॉन्क्लेव में क्या हो…

 भोपाल राजधानी भोपाल में आज से दो दिवसीय माइनिंग कॉन्क्लेव शुरू हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव माइनिंग कॉन्क्लेव में उद्योगपतियों से चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री का कहना है कि माइनिंग कॉन्क्लेव से विकसित भारत 2047 का सपना पूरा होगा। मध्य प्रदेश सरकार राज्य को खनन की राजधानी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इसके लिए 17-18 अक्टूबर को भोपाल में माइनिंग कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव माइनिंग क्षेत्र के उद्योगपतियों से संवाद करेंगे। भोपाल के कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले इस माइनिंग कॉन्क्लेव का उद्देश्य मध्य प्रदेश को खनन क्षेत्र में प्रमुख केंद्र बनाना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का कहना है कि प्रदेश में खनन की असीमित संभावनाएं हैं और यह आयोजन राज्य को आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के नए अवसरों की ओर ले जाएगा। उनका मानना है कि इस कॉन्क्लेव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की प्राप्ति में मदद मिलेगी। प्रदेश में खनन की संभावनाएं मध्य प्रदेश खनिज संसाधनों के मामले में देश का एक प्रमुख राज्य है। यह भारत का एकमात्र राज्य है जो हीरे का उत्पादन करता है। इसके अलावा, मैग्नीज, तांबा अयस्क, चूना पत्थर, रॉक-फास्फेट, और कोयला उत्पादन में भी प्रदेश अग्रणी है। माइनिंग कॉन्क्लेव के माध्यम से राज्य सरकार खनन और खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। 600 से अधिक निवेशक होंगे शामिल इस कॉन्क्लेव में केंद्रीय खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी, राज्य मंत्री एससी दुबे, और केंद्रीय खान मंत्रालय के सचिव वीएल कांता राव शामिल होंगे। साथ ही एनसीएल, एचसीएल, एनएमडीसी, ओएनजीसी और जीएआईएल जैसी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि और अन्य राज्यों के उद्योगपतियों सहित 600 से अधिक प्रतिभागी इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन से राज्य में खनन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। recent visitors 111

सक्रिय सदस्यता अभियान में भी रिकॉर्ड बनाएंगे मध्यप्रदेश भाजपा के कार्यकर्ता-विष्णुदत्त शर्मा

– कार्यकर्ताओं की मेहनत, लगन और प्लानिंग से रचा सदस्यता का नया इतिहास – दूसरे चरण में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार किया डेढ़ करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य – सक्रिय सदस्यता अभियान में भी रिकॉर्ड बनाएंगे मध्यप्रदेश भाजपा के कार्यकर्ता – सदस्यता में लक्ष्य प्राप्त करने वाला चौथा राज्य बना मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने दी बधाई – कांग्रेस को समझना होगा कि सिर्फ झूठ परोसना ही राजनीति नहीं होती – विष्णुदत्त शर्मा   भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने संगठन पर्व को लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता को किया संबोधित भोपाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने संगठन पर्व को लेकर बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सदस्यता अभियान की पहली कार्यशाला में हमने यह कहा था कि मध्यप्रदेश में हम सभी कार्यकर्ता मिलकर इतिहास बनाएंगे। संगठन पर्व के पहले चरण में हमने 1 करोड़ का आंकड़ा पार किया था और अब मुझे यह बताते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि सदस्यता अभियान के दूसरे चरण के अंतिम दिन हमने सदस्यता का लक्ष्य पार कर लिया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी मेहनत, लगन और माइक्रोप्लानिंग के बल पर डेढ़ करोड़ का लक्ष्य पार करते हुए 1 करोड़ 50 लाख, 28 हजार 107 सदस्य बनाकर नया इतिहास रच दिया है। इसके लिए मैं पार्टी कार्यकर्ताओं और केंद्रीय नेतृत्व के प्रति आभार जताता हूं, धन्यवाद देता हूं। अब सक्रिय सदस्यता का अभियान शुरू हो गया है, मध्यप्रदेश भाजपा सक्रिय सदस्यता में भी रिकॉर्ड बनाएगी। झूठ, छल-कपट की राजनीति करने वाले कांग्रेस नेताओं को यह समझना होगा कि सिर्फ झूठ परोसना ही राजनीति नहीं होती। भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए डेढ़ करोड़ से अधिक सदस्य बनाए हैं। डेढ करोड का लक्ष्य प्राप्त करने पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा का पार्टी पदाधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। ऑफलाइन का डाटा आने पर और बढ़ेगा सदस्यता का आंकडा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि संगठन पर्व, सदस्यता अभियान के दूसरे चरण की समाप्ति तक प्रदेश के सभी 64871 बूथों पर जो 1 करोड़ 50 लाख, 28 हजार 107 सदस्य बनाए गए हैं, उनमें से 1 करोड़ 22 लाख, 74 हजार 300 सदस्य ऐसे हैं, जिन्होंने ऑनलाइन डिजिटल फार्म भरा है। डिजिटल फॉर्म भरने के मामले में मध्यप्रदेश देश के अन्य राज्यों में अग्रणी रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश के कई अंचल ऐसे भी हैं, जहां सही तरीके से मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क नहीं मिल पाता। कई घरों में मोबाइल फोन ही नहीं है। कुछ घरों में एक मोबाइल है और सदस्यता ग्रहण करने वाले चार-पांच सदस्य हैं। ऐसे अंचलों व घरों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर ऑफलाइन सदस्य बनाए हैं। अभी ऑफलाइन सदस्यता का आंकड़ा तैयार हो रहा है, इसका परीक्षण किया जा रहा है। जब यह आंकड़ा आएगा, तो एक और इतिहास रचा जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि सदस्यता अभियान के पहले दिन देश भर में 40 हजार ऑफलाइन फॉर्म भरे गए थे और हमारे लिए गर्व का विषय है कि इनमें से 23 हजार फॉर्म मध्यप्रदेश के थे। उन्होंने कहा कि आज से सक्रिय सदस्यता का अभियान शुरू हो चुका है और सक्रिय सदस्य बनने के लिए 100 प्राथमिक सदस्य बनाना आवश्यक है। इसलिए सक्रिय सदस्यता के मामले में भी पार्टी कार्यकर्ता एक और इतिहास रचने में जुट गए हैं। भाजपा संविधान में सक्रिय सदस्यता के लिए 50 प्राथमिक सदस्य बनाना ही निर्धारित है, लेकिन मध्यप्रदेश में सक्रिय सदस्य बनने के लिए 100 प्राथमिक सदस्य बनाना निर्धारित किया गया है। लेकिन ऐसा नहीं है कि 50 प्राथमिक सदस्य बनाने वालों को सक्रिय सदस्य बनने का अधिकार नहीं है। सिर्फ झूठ ही नहीं होता राजनीति का आधार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि जो लोग लगातार झूठ बोलते हैं और झूठ की ही राजनीति करते हैं, उन्हें मैं यह बता देना चाहता हूं कि सिर्फ झूठ ही राजनीति का आधार नहीं होता। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जमीन पर उतरकर माइक्रोप्लानिंग करके सदस्यता अभियान में दिए गए लक्ष्य को प्राप्त करके दिखाया है। मध्यप्रदेश में वैसे तो हमारे 41 लाख कार्यकर्ता हैं, लेकिन इनमें से 3 लाख कार्यकर्ता पूरी तरह से सदस्यता अभियान में जुटे हुए हैं। इनमें बूथ के कार्यकर्ता से लेकर पन्ना समिति के लोग और पन्ना प्रमुख तक शामिल हैं। हमारा सदस्यता अभियान 2 सितंबर से शुरू हुआ था और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती 25 सितंबर को हमने 12 लाख से ऊपर सदस्यता करके रिकॉर्ड बनाया था। अभियान का दूसरा चरण 1 अक्टूबर से शुरू हुआ था और इस चरण के अंतिम दिन यानी 15 अक्टूबर को भी हमने 11 लाख से अधिक सदस्य बनाए हैं। शर्मा ने कहा कि इस अभियान के दौरान केंद्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश की टोली और जिलों से लेकर शक्तिकेंद्र तथा बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता लगातार जुटे रहे। हर दिन शाम 7.00 बजे से जिलों की बैठक होती थी और सदस्यता अभियान में जुटे कार्यकर्ता इस बैठक में रिपोर्ट देते थे। इसके बाद शाम 8.00 बजे से संभाग की बैठक होती थी संभाग प्रभारी के साथ सभी जिलाध्यक्ष तथा सदस्यता अभियान में लगे कार्यकर्ता इसमें शामिल होते थे। रात्रि 9.00 बजे से प्रदेश स्तर की बैठक होती थी और हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, सह प्रभारी सतीश उपाध्याय, संगठन महामंत्री हितानंद जी तथा सदस्यता अभियान की टोली के सभी सदस्य बैठक करते थे और यह चर्चा होती थी कि किस विधानसभा में सदस्यता की क्या स्थिति रही। शर्मा ने कहा कि जो लोग झूठ की राजनीति करते हैं, उन्हें मैं यह बता देना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता परिश्रम और ईमानदारी से अपने संगठन तंत्र की मजबूती के लिए काम करते हैं और यही भाजपा की ताकत भी है। युवाओं, महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि संगठन पर्व के पहले चरण में एक करोड़ से अधिक सदस्य बनाए गए थे, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक युवाओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। मध्यप्रदेश में युवाओं के साथ महिलाएं, … Read more