सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हत्या, रेप और आतंक के केस के आधार पर भी दोषी की किसी संपत्ति को तोड़ा जा नहीं सकती

नई दिल्ली देशभर में चल रहे बुलडोजर एक्शन के खिलाफ दाखिल जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच कर रही है. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई  पर रोक लगाते हुए कहा था कि सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण को हटाने की ही छूट होगी. इस मामले में यूपी, एमपी और राजस्थान की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता पेश हुए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में पूछा कि क्या दोषी करार देने पर भी किसी की संपत्ति तोड़ी जा सकती है? जिस पर एसजी तुषार ने कहा कि नहीं, यहां तक कि हत्या, रेप और आतंक के केस के आधार पर भी नहीं. मेरे कुछ सुझाव हैं, नोटिस को रजिस्टर्ड एडी से भेजा जाए. हम सबके लिए गाइडलाइन जारी करेंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं, हम सब नागरिकों के लिए गाइडलाइन जारी करेंगे. अवैध निर्माण हिंदू, मुस्लिम कोई भी कर सकता है. हमारे निर्देश सभी के लिए होंगे, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय के हों. बेशक, अतिक्रमण के लिए हमने कहा है कि अगर यह सार्वजनिक सड़क या फुटपाथ या जल निकाय या रेलवे लाइन क्षेत्र पर है, तो हमने स्पष्ट कर दिया है. अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक संरचना है, चाहे वह गुरुद्वारा हो या दरगाह या मंदिर, यह सार्वजनिक बाधा नहीं बन सकती. जस्टिस गवई ने कहा कि चाहे मंदिर हो, दरगाह हो,  उसे जाना ही होगा क्योंकि ⁠सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हाल ही में यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका में जमीयत ने अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया है। याचिका में सरकार को आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने से रोकने की मांग की गई है. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि यदि  2 संरचनाओं में उल्लंघन हुआ है और केवल 1 के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और आप पाते हैं कि पृष्ठभूमि में कोई अपराध है. यह समझौता करने योग्य या गैर समझौता करने योग्य अपराध हो सकता है. यदि आप शुरू में किसी व्यक्ति की जांच कर रहे हैं और आपको जल्द ही उसका आपराधिक इतिहास पता चलता है तो? दो गलतियां एक सही नहीं बनाती हैं. इस बारे में हमारी सहायता करें. न्यायिक निगरानी होनी चाहिए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि इसके लिए कुछ समाधान तो खोजना ही होगा, कुछ न्यायिक निगरानी होनी चाहिए. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मैं यूपी, एमपी, राजस्थान की ओर से पेश हुआ हूं. हमने पहले भी कहा है. हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होना चाहिए. साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. नोटिस जारी किए जाने चाहिए, पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक ​​कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. कानून किसी खास धर्म के लिए नहीं… इस मामले में जो भी नियम बनाए जाएं, उन्हें पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए. ⁠जब ​​याचिकाकर्ता कहते हैं कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसमें कुछ संवेदनशीलताएं शामिल हैं. अदालत को आरोपों से बाहर आना चाहिए और तय करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत. जस्टिस गवई ने कहा कि हम सभी के लिए कानून बनाएंगे, किसी खास धर्म के लिए नहीं. अवैध निर्माणों को सभी धर्मों से अलग किया जाना चाहिए. नोटिस की सही सर्विस होनी चाहिए, पंजीकृत ए.डी. के माध्यम से नोटिस हो. नोटिस चिपकाने की यह प्रक्रिया चले, डिजिटल रिकॉर्ड होना चाहिए. इससे अधिकारी भी सुरक्षित रहेंगे, हमारे पास भारत से पर्याप्त विशेषज्ञ है. एसजी ने कहा कि ऐसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बुलडोजर मामले बहुत कम होंगे, ये मामले दो फीसदी होंगे. लेकिन बिल्डरों से जुड़े इस तरह के मामले बहुत हैं. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि जब तक नगर निगम के अधिकारी इन पर फैसला नहीं ले लेते, तब तक कोई अर्ध न्यायिक निगरानी भी नहीं है. ये मामला दो फीसदी का नहीं है. आंकड़े बताते हैं कि साढ़े चार लाख मामले तोड़फोड़ के हैं. हिंदू-मुस्लिम की बात क्यों आती है? सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि हिंदू-मुस्लिम की बात क्यो आती है. वे हमेशा अदालत में जा सकते हैं  इसमें भेदभाव कहां है. जस्टिस विश्वनाथ ने कहा कि इसके लिए कुछ समाधान खोजना होगा. जैसे न्यायिक निरीक्षण किया जाए. इसपर SG ने कहा कोर्ट मीडिया में प्रचारित कुछ घटनाओं को छोड़कर इसके लिए एक सामान्य कानून बनाए जाने पर विचार करें. तुषार मेहता ने कहा कि मैं यूपी, एमपी, राजस्थान  की ओर से पेश हुआ हूं. हमने पहले भी कहा है, हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. ⁠नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होना चाहिए. ⁠साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. ⁠नोटिस जारी किए जाने चाहिए. ⁠पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. ⁠हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक ​​कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. तुषार मेहता ने आगे कहा कि⁠ जो भी नियम बनाए जाएं, उन्हें पूरे भारत में लागू किया जाना चाहिए. ⁠जब ​​याचिकाकर्ता कहते हैं कि चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. ⁠मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, तो इसमें कुछ संवेदनशीलताएं शामिल हैं. ⁠अदालत को आरोपों से बाहर आना चाहिए.⁠ तय करना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत.  ⁠जस्टिस गवई ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं. ⁠हम सभी के … Read more

धोखे से चली गोली से गोविंदा जख्मी, लोडेड रिवॉल्वर से सुबह 4.45 बजे कैसे हुआ हादसा?

मुंबई बॉलीवुड एक्टर गोविंदा घायल हो गए हैं। लाइसेंसी रिवॉल्वर साफ करते समय उनके घुटने में गोली लग गई। उन्हें इलाज के लिए नजदीकी हॉस्पिटल ले जाया गया। घटना मंगलवार सुबह करीब 5 बजे की है। पुलिस ने जब्त की रिवॉल्वर कहा जा रहा है कि अभिनेता आईसीयू में भर्ती है। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मुंबई पुलिस के मुताबिक, गोविंदा की बंदूक से गलती से गोली चली, जो उनके पैर में लग गई। गोली उनके घुटनों के पास लगी है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रिवॉल्वर जब्त कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। कैसे हुई घटना? गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने बयान जारी कर कहा कि गोविंदा कोलकाता जाने की तैयारी कर रहे थे. उनकी पत्नी सुनीता कोलकाता में हैं. वह अलमारी में अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर रख रहे थे कि तभी उनके हाथ से रिवॉल्वर नीचे गिर गई और गोली उनके पैर में लग गई. डॉक्टर ने अब गोविंदा के पैर से गोली निकाल ली है और उनकी हालत ठीक है. वह अभी अस्पताल में ही हैं. सिन्हा ने बताया कि गोविंदा ने उन्हें खुद कॉल कर गोली लगने की जानकारी दी. गोविंदा की बेटी टीना इस समय अस्पताल में मौजूद है. उन्हें अगले दो दिनों तक अस्पताल में ही ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा. ICU में भर्ती हैं गोविंदा गोविंदा को गोली लगते ही, उनके घर के पास क्रिटिकेयर हॉस्पिटल ले जाया गया. गोविंदा के पैर से गोली निकाल दी गई है और उन्हें ICU में रखा गया है. फिलहाल गोविंदा की हालत स्थिर बताई जा रही है. गोविंदा के मैनेजर ने ये भी बताया कि गोविंदा के साथ जब ये हादसा हुआ तब उनकी पत्नी सुनीता घर पर नहीं थीं. वो कोलकाता में थीं. जानकारी मिलते ही सुनीता मुंबई के लिए रवाना हो गई हैं और कुछ ही देर में वो मुंबई पहुंच जाएंगी. फिलहाल गोविंदा की बेटी टीना, हॉस्पिटल में उनके साथ हैं. सिन्हा ने बताया कि गोविंदा ने उन्हें खुद कॉल कर के गोली लगने की जानकारी दी थी. गोविंदा 90s के दौर में बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार्स में से एक थे. उन्होंने 'दूल्हे राजा', 'हीरो नंबर 1' और 'कुली नंबर 1' जैसी कई आइकॉनिक कॉमेडी फिल्मों में काम किया है. अपनी यादगार कॉमेडी और डांस के लिए पॉपुलर गोविंदा ने इसी साल पॉलिटिक्स में दोबारा एंट्री ली थी. मार्च में गोविंदा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना पार्टी जॉइन की थी. घटना के समय मुंबई में नहीं थी पत्नी सुनीता इस घटना के समय गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा मुंबई में नहीं थी. वह अब मुंबई लौट रही हैं. उन्हें बता दिया गया है कि अगले दो घंटे में उन्हें मुंबई पहुंच जाना चाहिए. गोविंदा की मौजूदा हालत से उन्हें वाकिफ करा दिया गया है. इससे पहले मुंबई पुलिस ने भी बताया था कि गोविंदा की लाइसेंसी रिवॉल्वर से गलती से गोली चल गई थी, जो उनके पैर में जा लगी. गोविंदा बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे. गोली उनके घुटनों के पास लगी. उनका इलाज मुंबई के Criti Care अस्पताल में चल रहा है. बता दें कि कॉमेडी फिल्मों और डांस स्टाइल के लिए लोकप्रिय गोविंदा इस साल मार्च में ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए थे. recent visitors 61

सभी की सहभागिता से स्थानीय पौष्टिक आहार, पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर

राष्ट्रीय पोषण माह 2024: पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर वजन त्यौहार के दौरान 23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया सभी की सहभागिता से स्थानीय पौष्टिक आहार, स्वस्थ्य जीवनशैली, पोषण के साथ पढ़ाई का संदेश जनसमुदाय तक पहुंचाने में मिली बड़ी सफलता रायपुर छत्तीसगढ़ में 01 सितम्बर से 30 सितम्बर तक जन आंदोलन के रूप में 7वां राष्ट्रीय पोषण माह आयोजित किया गया। इस दौरान गांवों से लेकर राज्यस्तर तक सुपोषण, बच्चों में व्याप्त कुपोषण एवं किशोरी बालिकाओं, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं में एनीमिया के संबंध में जागरूकता के लिए स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया गया। इस अभियान में हर वर्ग के लोगों की सक्रिय सहभागिता रही। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पोषण माह के प्रारंभ में सुपोषित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए राज्य के समस्त जनप्रतिनिधि, पंचायती राज संस्था के प्रतिनिधियों महिला स्व-सहायता समूहों, प्रबुद्ध वर्ग, विद्यार्थी वर्ग, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के निकायों के प्रतिनिधि एवं समस्त जनसमुदाय से सक्रिय सहभागिता की अपील की थी। पोषण माह की गतिविधियों में महिलाओं और बच्चों को पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए है जन प्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, महिला स्वसहायता समूह, प्रबुद्ध नागरिकों, विद्यार्थियों और स्थानीय जन समुदाय का भरपूर सहयोग मिला। पोषण माह का शुभारम्भ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विभागीय मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा पोस्टर व वीडियो का विमोचन, पोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर एवं पोषण शपथ दिलवाकर किया गया था। पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर विभागीय अमलों सहित सम्पूर्ण पोषण माह में जनप्रतिनिधियों, पंचायतीराज संस्थाओं, के प्रतिनिधि, स्व-सहायता समूह के सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के कुशल नेतृत्व, श्रीमती शम्मी आबिदी सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रभावी मार्गदर्शन और श्रीमती तुलिका प्रजापति, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग के सतत् प्रोत्साहन से राष्ट्रीय पोषण माह 2024 में छत्तीसगढ़ ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 01 करोड़ 33 लाख से ज्यादा गतिविधियों का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ ने इसमें पूरे देश में तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रदेश में कुल गतिविधि संख्या के आधार पर 8.77 लाख गतिविधि आयोजित कर जिला दुर्ग प्रथम, 8.70 लाख गतिविधि आयोजित कर जशपुर द्वितीय, 8.44 लाख गतिविधि आयोजित कर रायपुर तृतीय, 7.92 लाख गतिविधि आयोजित कर गरियाबंद चतुर्थ एवं 7.70 लाख गतिविधि आयोजित कर बलरामपुर पांचवें स्थान पर रहें। प्रति आंगनबाड़ी औसत गतिविधि संख्या के आधार पर जिला क्रमशः दुर्ग प्रथम, गरियाबंद द्वितीय, रायपुर तृतीय, धमतरी चतुर्थ एवं कबीरधाम पांचवे स्थान पर रहें। 23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण माह के दौरान एक विशेष अभियान के रूप में वजन त्यौहार का आयोजन किया गया, जिसमें समुदाय के सभी 0 से 06 वर्ष के बच्चों का वजन एवं ऊंचाई लेकर वृद्धि मापन किया गया। इस अभियान में लगभग 23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया। राष्ट्रीय पोषण माह 2024 की मुख्य थीम एनीमिया, वृद्धि निगरानी, पूरक पोषण आहार, पोषण भी पढ़ाई भी, बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और कुशल सेवा वितरण के लिए प्रौद्योगिकी का आयोजन और समग्र पोषण रखी गई थी। भारत शासन द्वारा प्रेषित थीम के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पूरे माह के लिए प्रतिदिन राज्य, जिला, विकासखण्ड, और आंगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर आयोजित की जाने वाली गतिविधियांे के लिए रोड मैप के रूप में दिनांकवार गतिविधि कैलेंडर तैयार किया गया। जिसके आधार पर व्यापक पैमाने पर थीम आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया। एनीमिया कैम्प, स्वास्थ्य जांच शिविर, पोषण संबंधी जागरूकता, भाषण एवं निबंध प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां आयोजित की गई- महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एनीमिया कैम्प, एनीमिया जागरूकता गतिविधियां, वीएचएसएनडी दिवस का आयोजन, आईवायसीएफ गतिविधियां, स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शालाओं एवं आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में छात्रों द्वारा पोषण संबंधी जागरूकता के लिए शपथ, व्यंजन प्रतियोगिता, व्यंजन प्रदर्शनी, भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, खेल भी पढ़ाई भी, पोषण भी पढ़ाई भी, पोषण चौपाल, खेल खेल में पोषण ज्ञान प्राप्त करने संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया। कृषि विभाग के सहयोग से मिलेट आधारित पौष्टिक भोजन संबंधी जागरूकता शिविर, प्रदर्शनी, जैविक उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु प्रचार-प्रसार इत्यादि गतिविधियां आयोजित की गई। लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग द्वारा जल संरक्षण एवं सुरक्षित पेयजल के उपयोग, वेस्ट वाटर के उचित निपटान के संबंध में जागरूकता प्रसार संबंधी उल्लेखनीय कार्य किया गया। वन विभाग द्वारा एक पेड़ मॉं के नाम अभियान अंतर्गत विशेष सहयोग देते हुए वृहत वृक्षारोपण का कार्य किया गया। आयुष विभाग द्वारा राज्य, जिला, विकासखंड एवं आंगनबाड़ी स्तर पर व्यापक पैमाने पर कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवनशैली, पौष्टिक आहार, योग गतिविधियां का प्रचार-प्रसार एवं आयोजन किया गया। खाद्य विभाग के सहयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से जन समुदाय के मध्य पौष्टिक आहार के सेवन के संबंध में प्रचार प्रसार किया गया। ग्राम पंचायतों में पोषण विषय पर विशेष चर्चा की गई। पोषण माह के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ अन्य सहयोगी विभागों द्वारा सक्रिय रूप से सहभागिता दी गई एवं सभी विभागों द्वारा समन्वित रूप से पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय पौष्टिक आहार, स्वस्थ्य जीवनशैली, पोषण के साथ पढ़ाई का संदेश जनसमुदाय तक पहुंचाया गया। recent visitors 99

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के लिए दुनिया के सबसे बड़े जन-आंदोलन को जन्म दिया

ग्रामीण क्षेत्रों में जन-आंदोलन बना "स्वच्छता ही सेवा अभियान" : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता अभियान में किए गए कई उल्लेखनीय कार्य और नवाचार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के लिए दुनिया के सबसे बड़े जन-आंदोलन को जन्म दिया भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के लिए दुनिया के सबसे बड़े जन-आंदोलन को जन्म दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के लिए ग्रामीणों को जागरूक करना इस मिशन की एक प्रमुख सफलता रही। मध्यप्रदेश ने ग्रामीण स्वच्छता में कई विशिष्ट उपलब्धियां हासिल की है। प्रदेश में 70 लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण कर संपूर्ण रूप से खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। मिशन के दूसरे चरण में प्रत्येक ग्राम की ओडीएफ की स्थिति को निरंतर रखते हुए ठोस एवं तरल अपशिष्ट का निपटान भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 155वीं जयंती एवं स्वच्छ भारत मिशन की 10 वीं वर्षगांठ पर स्वच्छता के दृष्टिकोण को शासकीय एवं सामुदायिक प्रयासों से जन-जन तक पहुंचाने के लिए "स्वच्छता ही सेवा" अभियान पखवाड़ा 17 सितंबर से प्रारंभ किया गया, जो 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर समारोह के साथ सम्पन्न होगा। जन-भागीदारी से लोगों को किया जागरूक स्वच्छता ही सेवा अभियान में जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये कई जन-प्रतिनिधि, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी, आम नागरिकों ने एकजुटता दिखाई। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने छिंदवाड़ा जिले के छिंदी ग्राम से "स्वच्छता साथी-वॉश ऑन व्हील सेवा" का शुभारंभ किया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने रीवा में स्वच्छता संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित होकर स्वस्थ भारत, स्वच्छ भारत के उद्देश्य को साकार करने के लिए प्रेरित किया। राज्य के सभी मंत्री, सांसद, विधायकों ने अपने क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर संपूर्ण स्वच्छता के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य करने का संदेश पहुंचाया। स्वच्छता शपथ के साथ हुईं स्वच्छता चौपालें स्वच्छता शपथ, स्वच्छता चौपाल, स्वच्छता रैली, स्वच्छता के लिये श्रमदान स्वच्छता संवाद, प्रतियोगिताएँ, खेल लीग, एक पेड़ माँ के नाम, घर-घर जागरूकता इत्यादि गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता में जन-भागीदारी की गतिविधियां की गई, जिसमें 40 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। स्वच्छता लक्षित इकाइयों का चिन्हांकन अभियान मेंऐसे स्थान जहां कूड़े-कचरे का ढेर था, उन स्थानों का चिन्हांकन कर स्वच्छ स्थानों में परिवर्तित किया गया। ऐसी 19 हजार 742 स्वच्छता लक्षित इकाइयों को 12 लाख 77 हज़ार लोगों की जन-भागीदारी से स्वच्छ साईट में परिवर्तित किया गया, जिससे खुले में पड़े 10 हजार 681 टन कचरे का सुरक्षित निपटान हुआ। अब तक 333 टन से अधिक प्लास्टिक कचरे का जन-भागीदारी से संग्रहण किया जाकर सुरक्षित निपटान किया गया है। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधित बनाकर 400 से अधिक ग्रामों को मॉडल श्रेणी में ओडीएफ़ प्लस घोषित किया जा चुका है। सफाई सुरक्षा मित्रों के योगदान को दी गई मान्यता अभियान का विशेष पहलू यह रहा कि सफाई कर्मियों और सफ़ाई मित्रों के योगदान को मान्यता दी गई। उनके स्वास्थ्य एवं सम्मान के लिए 1549 सफाई मित्र सुरक्षा शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें 42 हजार 466 सफ़ाई मित्रों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं 24 हजार 655 सफ़ाई मित्रों को सुरक्षा उपकरणों एवं पीपीई किट का वितरण किया गया। नर्मदा नदी के किनारे 776 ग्राम ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित नर्मदा नदी के किनारे बसे 884 ग्रामों में घाटों की साफ़-सफ़ाई, आस-पास के क्षेत्र को प्लास्टिक फ्री बनाये जाने एवं सिंगल यूज्ड प्लास्टिक कचरे का संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। नर्मदा नदी किनारे के 776 ग्राम तथा पर्यटन महत्व वाले सभी 117 ग्राम ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित हो चुके हैं। आगे की राह प्रदेश के सभी ग्रामों में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभाओं का अयोजन होगा। इसमें स्वच्छता पखवाड़े में हासिल उपलब्धियों से ग्रामवासियों को अवगत कराया जाएगा तथा स्वच्छता परिसंपतियो का शिलान्यास और कचरा वाहनों का लोकार्पण किया जायेगा।   recent visitors 62

मोदी सरकार ने अपने कर्मचारियों को नवरात्रि से पहले देगी महंगाई भत्ता का तोहफा, यहां जाने कितनी बढ़कर आएगी सैलरी

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारी अक्टूबर 2024 में महंगाई भत्ता (DA) में बकी घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन उम्मीद है कि सरकार दिवाली से पहले 3% से 4% तक की डीए बढ़ोतरी की घोषणा करेगी। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2024 से लागू मानी जाएगी, जिससे कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी होगी। साथ ही जुलाई से लागू डीए का एरियर भी सैलरी के साथ आएगा। सैलरी में कितनी होगी बढ़ोतरी? अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹18,000 प्रति माह है, तो 3% बढ़ोतरी से उसकी सैलरी ₹540 मंथली बढ़ेगी। अगर डीए 4% बढ़ता है तो सैलरी में मंथली ₹720 रुपये बढ़ जाएंगे। उदाहरण के लिए अगर किसी की कुल सैलरी ₹30,000 है और उसमें से ₹18,000 बेसिक पे है, तो मौजूदा 50% डीए के अनुसार उसे ₹9,000 महंगाई भत्ता मिलता है। 3% बढ़ोतरी के बाद यह ₹9,540 हो जाएगा और 4% बढ़ोतरी पर ₹9,720 हो जाएगा। DA और DR: क्या फर्क है? डीए सरकारी कर्मचारियों को दिया जाता है जबकि डीआर यानी महंगाई राहत पेंशनर्स की पेंशन में जुड़कर मिलता है। दोनों में ही साल में दो बार—जनवरी और जुलाई में रिवीजन होता है। हालांकि, सरकार कभी भी इसका ऐलान करें लेकिन ये जनवरी और जुलाई से ही लागू माने जाते हैं। इस बार की डीए और डीआर की बढ़ोतरी से एक करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स को फायदा होगा। डीए कैसे तय होता है? महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी का ऐलान ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आधार पर किया जाता है। पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर केंद्र सरकार डीए रिवाइज करती है, जिसका ऐलान आमतौर पर मार्च और सितंबर में किया जाता है। 8वां वेतन आयोग: कर्मचारियों की बढ़ी उम्मीदें 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें जनवरी 2016 से लागू हुई थीं और अब 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। हालांकि, 8वें वेतन आयोग की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कर्मचारी इसके जल्द गठन की उम्मीद कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 8वें वेतन आयोग से न्यूनतम वेतन ₹34,560 हो सकता है, जबकि पेंशन भी बढ़कर ₹17,280 हो सकती है। सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग पर कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन कर्मचारियों को उम्मीद है कि इसकी घोषणा जल्द की जाएगी। recent visitors 100

मध्य प्रदेश के पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई, यमराज को भी दिखया रेड सिग्नल!

भोपाल  मध्य प्रदेश में पुलिस वाले कानून व्यवस्था को संभालने के साथ ही जरूरतमंदों की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं। हाल ही में कई घटनाओं में पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई है। फिर चाहे वो किसी विधायक को हार्ट अटैक आने पर CPR देना हो, या सड़क किनारे बेहोश हुए एक बुजुर्ग की जान बचाना हो, एमपी पुलिस ने मानवता की मिसाल पेश की है। यहां तक की मौका आने पर उन्होंने सांप तक को सीपीआर देकर नया जीवनदान दिया है। आईए जानते हैं वो बड़ी पांच घटनाएं जहां पुलिस कर्मी देव दूत बनकर यमराज के पास से बचा लाए लोगों की जान विधायक को दिया नया जीवन सितंबर 2024 में राऊ विधानसभा से बीजेपी विधायक मधु वर्मा को हार्ट अटैक आ गया था। उनके पीएसओ अरुण भदौरिया ने तुरंत अपनी ट्रेनिंग का इस्तेमाल करते हुए उन्हें CPR दिया और अस्पताल पहुंचाया। समय पर मदद मिलने की वजह से उनकी जान बच गई। इसके बाद लोगों ने अरुण भदौरिया की जमकर तारीफ की। सीएम मोहन ने भी उन्हे सराहा। चलती एक्टिवा पर बच्ची के पापा को आ गया था अटैक अगस्त 2024 में इंदौर में भी ऐसी ही एक घटना घटी। एक शख्स को चलती एक्टिवा पर अटैक आ गया। उनकी 14 साल की बेटी ने लोगों से मदद की गुहार लगाई। तभी वहां से गुजर रहे एक कॉन्स्टेबल ने युवक को CPR देकर उसकी जान बचाई। पुलिस वाले अंकल ने साहस के साथ बच्ची के पापा को नया जीवन दिया। आरपीएफ जवान नहीं होता तो हो जाती अनहोनी नवंबर 2023 में जबलपुर में विधानसभा चुनाव के दौरान एक मतदान कर्मी को दिल का दौरा पड़ गया। आरपीएफ के जवानों ने तुरंत उसे CPR दिया और उसकी जान बचाई। यदि आरपीएफ के जवान समय पर मदद के लिए नहीं आते तो शायद बड़ी अनहोनी भी हो सकती थी। बुजुर्ग के लिए देवदूत बनकर आई लेडी सूबेदार साल 2022 में ग्वालियर में एक महिला ट्रैफिक सूबेदार ने सड़क किनारे बेहोश हुए एक बुजुर्ग को CPR देकर उसकी जान बचाई थी। इसके बाद सूबेदार सोनम पाराशर ने बुजुर्ग को अस्पताल में भर्ती भी करवाया था। सांप को सीपीआर देकर दिया जीवन दान अक्टूबर 2023 में नर्मदापुरम के सेमरी हरचंद कस्बे में पुलिस कांस्टेबल अतुल शर्मा ने एक सांप को सीपीआर देकर उसकी जान बचाई। सांप पाइप लाइन में फंसकर बेहोश हो गया था। अतुल शर्मा 2008 से काम कर रहे हैं और अब तक सैकड़ों सांपों का रेस्क्यू कर चुके हैं। काबिले तारीफ है ये जज्बा इसे लेकर एक प्रशंसक ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था ही नहीं संभालती, बल्कि ज़रूरतमंदों की मदद के लिए भी हमेशा तैयार रहती है। पुलिसकर्मियों का यह जज़्बा काबिले तारीफ है। recent visitors 88

सिएटल में वेश्यावृत्ति के धंधे में आया उछाल, अब लगेगी नशीली दवाओं पर लगाम

 सिएटल अमेरिका को सपनों का देश कहा जाता है, जहां की लाइफस्टाइल, जॉब्स और ग्लैमर दुनियाभर के लोगों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इस चमक-दमक के पीछे की सच्चाई अक्सर दुनिया की नजरों से दूर रहती है. कुछ ऐसी ही कहानी है सिएटल शहर की एक बदनाम गली की, जो वेश्यावृत्ति का केंद्र बन चुकी है. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सिएटल की इस गली को 'द ब्लेड' के नाम से जाना जाता है, जहां हर रात महिलाएं कम कपड़ों में ग्राहकों को लुभाने के लिए सड़कों पर खड़ी नजर आती हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गली के पास ही दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां जैसे अमेजन और एप्पल के ऑफिस भी मौजूद हैं. लेकिन इसके बावजूद, इस इलाके में वेश्यावृत्ति का धंधा तेजी से फैल रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गली में हर दिन लगभग 300 लोग आते हैं, और करीब 60 महिलाएं इस व्यापार में शामिल होती हैं. कोविड-19 महामारी के दौरान हालात और भी बिगड़ गए, जब क्लब और बार बंद हो गए और महिलाओं को मजबूरन सड़कों का रुख करना पड़ा. स्थानीय दुकानदार डटन क्लार्क के मुताबिक-कोविड के बाद हालात बेहद खराब हो गए हैं. पिछले साल इस गली में हर वक्त 50-60 महिलाएं खड़ी रहती थीं, जो ग्राहकों की तलाश में रहती थीं. सबसे दर्दनाक बात यह है कि इन महिलाओं में से कई की उम्र बेहद कम होती है. रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यहां आने वाले ग्राहकों में से एक तिहाई लोग आसपास की बड़ी टेक कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स होते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गली में वेश्यावृत्ति के साथ-साथ अपराध भी बढ़ गए हैं. जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है. यहां की घटनाओं ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है.अब यह गली सिर्फ वेश्यावृत्ति का केंद्र नहीं, बल्कि बढ़ते अपराधों की वजह से भी चर्चा में है. जिसने स्थानीय निवासियों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है. अब लगेगी नशीली दवाओं पर लगाम  सिएटल सिटी में  दो नए विधेयक पारित किए। इनका उद्देश्य सार्वजनिक रूप से नशीली दवाओं के उपयोग, बिक्री और वेश्यावृत्ति पर लगाम लगाना है।पहले विधेयक में यह प्रावधान है कि अब नशीलों दवाओं के सौदागरों के सिएटल शहर के मुख्य भाग स्टे आउट ऑफ ड्रग एरिया में प्रवेश करना प्रतिबंधित होगा। द सिएटल टाइम्स की एक खबर के अनुसार, नशीली दवाओं से संबंधित विधेयक लाने का प्रस्ताव काउंसिल सदस्य बॉब केटल ने किया। इसे सिटी अटॉर्नी एन डेविसन ने पेश किया। यह विधेयक 8 से 1 के अंतर से पारित हुआ। काउंसिल सदस्य टैमी मोरालेस ने इसके खिलाफ मतदान किया। दूसरा विधयेक उत्तरी सिएटल में ऑरोरा एवेन्यू से संबंधित है। यह जगह वेश्यावृत्ति और आवारागर्दी के लिए बदनाम है। इसमें कहा गया है कि सेक्स वर्कर को यहां से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। काउंसिल सदस्य कैथी मूर का यह विधेयक भी 8 से 1 के अंतर से पारित हुआ। काउंसिल सदस्य टैमी मोरालेस ने इस विधेयक के खिलाफ भी मतदान किया। उल्लेखनीय है कि सिएटल वाशिंगटन राज्य का एक प्रमुख शहर है। यह प्रमुख बंदरगाह है। यह प्रशांत महासागर और लेक वौशिंग्टन के बीच स्थित है। कनाडा की सीमा यहां से मात्र 160 किलोमीटर दूर है। अप्रैल 2009 में यहां की आबादी लगभग 61,700 थी।   recent visitors 88