मध्यप्रदेश हाई कोर्ट से फीस वृद्धि मामले में निजी स्कूलों को अंतरिम राहत

जबलपुर हाई कोर्ट ने जिला कमेटी के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके जरिए निजी स्कूलों को फीस रिफंड करने कहा गया था और समिति द्वारा फीस निर्धारित की गई थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने जिला कमेटी के आदेश को निर्धारित नियम का उल्लंघन करार दिया। इसके साथ ही आयुक्त लोक शिक्षण, कलेक्टर जबलपुर व डीईओ को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। स्कूलों ने आनलाइन पार्टल पर फीस वृद्धि की जानकारी अपलोड नहीं की थी दरअसल क्राइस्ट चर्च स्कूल, सेंट अलॉयसियस स्कूल, ज्ञानगंगा, स्टेमफील्ड व स्कूलों की ओर से यह अपील दायर की गई थी। अपीलार्थियों की से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि जिला कमेटी ने इस आधार पर उक्त आदेश जारी किया था कि स्कूलों ने आनलाइन पार्टल पर फीस वृद्धि की जानकारी अपलोड नहीं की थी। स्कूलों ने बताए नियम उनके मामले में फीस में बढ़ोतरी 10 फीसदी से कम है और असाधारण मामलों में 13 फीसदी तक है। इसके अलावा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर स्कूल फीस बढ़ोतरी की गाइडलाइन भी अपलोड नहीं की गई है। जिला समिति को अगर यह पता चलता कि फीस में वृद्धि ज्यादा है, तो वह केवल संबंधित स्कूलों पर जुर्माना लगा सकती थी। 25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की पीठ ने एक अंतरिम आदेश में संबंधित जिला समितियों के आदेशों पर रोक लगा दी और प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा, जिला कलेक्टर, शिक्षा अधिकारी, और जिला समितियों सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए। मामले की सुनवाई अब 25 अगस्त को होगी। जिला कमेटी ने बढ़ाई गई फीस वापस करने के आदेश जारी किए थे जिला कमेटी ने वर्ष 2017-18 से 2024-25 के शैक्षणिक सत्र में बढ़ाई गई फीस वापस करने के आदेश जारी किए थे। इसके अलावा कमेटी ने वर्तमान सत्र की फीस भी निर्धारित की थी। जिला कमेटी ने फीस वृद्धि का गलत आंकलन किया था। मप्र निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) के अंतर्गत स्कूल प्रबंधन फीस में दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर सकता है। स्कूल प्रबंधन ने 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं की है स्कूल प्रबंधन द्वारा फीस वृद्धि में 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की जाती है, तो इसके लिए जिला कमेटी से अनुमति आवश्यक है। फीस में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी करने पर राज्य कमेटी से अनुमति आवश्यक है। स्कूल प्रबंधन के द्वारा 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं की गई है। लिहाजा, जिला कमेटी के अादेश पर रोक अपेक्षित है। हाई कोर्ट ने मांग स्वीकार करते हुए अंतरिम रोक लगा दी। recent visitors 88

भारतीय पहलवान विनेश फोगाट की याचिका खारिज, उम्मीद ख़त्म, नहीं मिलेगा सिल्वर मेडल

नई दिल्ली पेरिस ओलंपिक गेम्स 2024 के बाद भारतीय फैंस को करारा झटका लगा है। महिला स्टार पहलवान विनेश फोगाट ने रजत पदक के लिए कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स में केस दायर किया था। इस मामले में बुधवार को फैसला आया। CAS ने फोगाट की अपील खारिज कर दी है। इसका मतलब है कि विनेश फोगाट सिल्वर मेडल मिलने का सपना टूट गया है। इससे पहले इस मामले में फैसला 13 अगस्त को आना था, लेकिन खबर सामने आई थी कि फैसले की डेट बढ़कर 16 अगस्त कर दी गई है। अब इस फैसला का निर्णय पहले ही कर दिया गया है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन अध्यक्ष पीटी उषा ने इस मामले में निराशा व्यक्त। उन्होंने कहा कि यह फैसला सुनकर आश्चर्य हुआ। स्वर्ण पदक मैच से पहले डिसक्वालिफाई दरअसल, ओलंपिक गेम्स के दौरान विनेश फोगाट ने 50 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती के फाइनल में जगह बनाकर सिल्वर पदक पक्का कर लिया था। गोल्ड मेडल का मुकाबला 7 अगस्त की रात को होने वाला था, लेकिन उसी दिन सुबह फोगाट को डिसक्वालिफाई कर दिया गया, क्योंकि मैच से पहला उनका वेट 100 ग्राम ज्यादा था। इसके बाद विनेश फोगाट ने सीएएस में मामला दर्ज कराया था। उनकी पहली मांग थी कि फाइनल मैच खेलने दिया जाएं, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए उनकी मांग खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने सिल्वर मेडल दिए जाने की अपील की थी। विनेश फोगाट ने रेसलिंग से लिया संन्यास 7 अगस्त को पेरिस ओलंपिक गेम्स में 50 किग्रा कुश्ती का फाइनल खेला गया। इसके अगले दिन विनेश फोगाट ने रेसलिंग से रिटायरमेंट लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने यह जानकारी एक्स हैंडल पर दी थी। उन्होंने कहा कि मां कुश्ती मेरे से जीत गई, मैं हार गई। माफ करना आपका सपना, मेरी हिम्मत सब टूट चुके। इससे ज्यादा ताकत नहीं रही अब। अलविदा कुश्ती 2001-24। आप सबकी हमेशा ऋणी रहूंगी। प्री क्वार्टर फाइनल विनेश फोगाट ने जापान की युई सुसाकी को 5-3 से हराया। फोगाट ने अंतिम 10 सेंकड में जीत हासिल की। युई टोक्यो ओलंपिक की चैंपियन थी। क्वार्टर फाइनल क्वार्टर फाइनल में विनेश फोगाट ने यूक्रेन की ओकसाना को 7-5 से हराया था। अंतिम पलों में विनेश ने डिफेंस और अटैक टेक्नीक से जीतने में कामयाब रही थीं। सेमीफाइनल विनेश ने क्यूबा की पहलवान गुजमैन लोपेज को 5-0 से हराया। फाइनल में पहुंचते ही उनका सिल्वर मेडल पक्का हो गया था। recent visitors 105

भारत और बांग्लादेश के बीच ग्वालियर के नए क्रिकेट स्टेडियम में T20 मैच का करेंगे विरोध, हिंदू महासभा ने किया ऐलान

ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में तकरीबन 14 साल बाद इंटरनेशनल क्रिकेट मैच होने जा रहा है. आखिर मैच कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुआ था. यह जानकारी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया ने एक प्रेस वार्ता आयोजित करके दी. ठीक इसके कुछ देर बाद ही हिंदू महासभा ने इस क्रिकेट मैच का विरोध करने का ऐलान करते हुए हड़कंप मचा दिया है. हिंदू महासभा ने साफ तौर पर इस बात का ऐलान किया है कि अगर ग्वालियर में इंडिया और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट मैच हुआ तो उसका भरपूर विरोध किया जाएगा. हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस बात की अपील की है कि वह ग्वालियर में होने जा रहे इंडिया बांग्लादेश क्रिकेट मैच को निरस्त करें. दरअसल, पिछले दिनों ग्वालियर में माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम बनकर तैयार हुआ है. शंकरपुर में तैयार हुए इस स्टेडियम में एमपीएल मैच भी खेला जा चुका है. अब इसी माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम में इंटरनेशनल क्रिकेट मैच t20 के तहत इंडिया और बांग्लादेश की टीम के बीच क्रिकेट मैच होने जा रहा है. इसकी तारीख 6 अक्टूबर तय की गई है. 14 साल बाद ऐसा समय आया है, जब कोई इंटरनेशनल क्रिकेट मैच ग्वालियर में होने जा रहा है. इसकी खुशी जाहिर करने और जानकारी देने के लिए महा आर्यमन सिंधिया द्वारा बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई. इस कॉन्फ्रेंस में महाआर्यमन सिंधिया ने बताया कि ग्वालियर को इंडिया बांग्लादेश क्रिकेट मैच के रूप में बड़ी सौगात मिलने जा रही है. प्रेस वार्ता के दौरान सिंधिया ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए BCCI सचिव जय शाह को धन्यवाद भी दिया. उधर, कुछ देर बाद ही हिंदू महासभा ने इस बात का ऐलान कर दिया कि अगर इंडिया बांग्लादेश क्रिकेट मैच ग्वालियर में होगा, तो खुलकर विरोध होगा. शहर के दाल बाजार स्थित अपने कार्यालय पर हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज ने बताया,  बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हुए हैं, हिंदुओं का कत्लेआम हुआ है, हिंदुओं की बहू बेटियों का बांग्लादेश में बलात्कार किया गया है, ऐसे में बांग्लादेश की टीम को ग्वालियर बुलवाकर क्रिकेट मैच करवाना और हिंदुओं से तालियां बजवाना यह कतई बर्दाश्त नहीं है. हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वह इस क्रिकेट मैच को निरस्त करवा दें. हिंदू महासभा से जब यह सवाल किया गया कि यह तो सिंधिया का सपना है? इस पर हिंदू महासभा के पदाधिकारी ने कहाकि सपने को पूरा करने के लिए पाकिस्तान की टीम के साथ मैच करवा दें, लेकिन बांग्लादेश की टीम के साथ मैच नहीं होना चाहिए, अगर बांग्लादेश की टीम ग्वालियर में आई और क्रिकेट मैच खेला तो हिंदू महासभा इसका जबरदस्त विरोध करेगी. recent visitors 90

तीसरी लाइन जोड़ने का कार्य चल रहा है, इस कारण से 46 ट्रेनें कैंसल, रक्षाबंधन पर यात्रियों को होगी असुविधा

अनूपपुर अधोसंरचना कार्य को पूरा करने के लिए ट्रेनों का परिचालन एक ही बार प्रभावित हो, इसलिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन ने पश्चिम मध्य रेलवे जोन के साथ सामंजस्य बनाया है। दमोह स्टेशन व उमरिया स्टेशन में एक साथ तीसरी लाइन जोड़ने का कार्य होगा। इसके कारण 27 अगस्त से नौ सितंबर तक 46 ट्रेनें अलग-अलग तिथि में रद्द रहेंगी। कई जोन में एक साथ होगा कार्य पहले यह होता था कि हर जोन अपने-अपने स्तर पर अलग तिथि में अधोसंरचना के कार्य करने की योजना बनाते थे। इसके कारण होता यह था कि दोनों जोन के कार्यों के चलते ट्रेनें दो बार रद्द होती थीं। जिसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता था। ट्रेन रद्द होने से यात्री परेशान होते थे। परेशानी अभी भी होगी, लेकिन, एक ही बार।   उत्तर भारत को जोड़ने वाली प्रमुख लाइन दरअसल पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर के दमोह स्टेशन के साथ-साथ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन उमरिया स्टेशन में भी तीसरी लाइन जोड़ने का कार्य करना चाह रहा है। इसके लिए दोनों जोन के बीच सहमति भी हो गई है। बिलासपुर-कटनी के बीच तीसरी रेल लाइन इस रेलवे की एक महत्वपूर्ण तथा व्यस्त रेल मार्ग है, जो पूरे क्षेत्र को उत्तर भारत से जोड़ती है। इसी सेक्शन के उमरिया रेलवे स्टेशन को तीसरी लाइन से जोड़ने के लिए यार्ड रिमोडलिंग का कार्य किया जाएगा। 24 अगस्त से पांच सितंबर तक चलेगा कार्य उमरिया रेलवे स्टेशन के तीसरी रेललाइन को जोड़ने का कार्य 24 अगस्त से पांच सितंबर चलेगा। वहीं मुड़वाड़ा-बीना रेलवे स्टेशनों के बीच दमोह रेलवे स्टेशन को तीसरी रेल लाइन को जोड़ने का 26 अगस्त से नौ सितंबर तक किया जाएगा। इस कार्य को पूरा करने के लिए ट्रेनों का रद्द भी करना पड़ रहा है। यह ट्रेनें रहेंगी रद्द     28 अगस्त, 4 व 11 सितंबर को रानी कमलापति (हबीबगंज)-सांतरागाछी एक्सप्रेस     28 अगस्त से 5 सितंबर तक चिरमिरी-चंदिया रोड पैसेंजर और चंदिया रोड-चिरमिरी पैसेंजर।     कटनी-चिरमिरी मेमू स्पेशल और चिरमिरी-कटनी मेमू स्पेशल।     29 व 31 अगस्त, 3, 5 व 7 सितंबर को चिरमिरी-अनूपपुर पैसेंजर और अनूपपुर- चिरमिरी पैसेंजर स्पेशल।     27 अगस्त से 5 सितंबर तक बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस और जबलपुर-अंबिकापुर एक्सप्रेस     28 अगस्त से 6 सितंबर तक अंबिकापुर-जबलपुर एक्सप्रेस।     27 अगस्त से 4 सितंबर तक बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस और 28 अगस्त से 5 सितंबर तक रीवा-बिलासपुर एक्सप्रेस।     27 अगस्त से 5 सितंबर तक नागपुर-शहडोल एक्सप्रेस और 28 अगस्त से 5 सितंबर तक शहडोल-नागपुर एक्सप्रेस।     28 व 30 अगस्त, 2 व 4 सितंबर को रीवा-चिरमिरी पैसेंजर स्पेशल और 29 एवं 31 अगस्त, 3 व 5 सितंबर को चिरमिरी-रीवा पैसेंजर स्पेशल।     29 अगस्त, 2 व 5 सितंबर को लखनऊ-रायपुर गरीब रथ एक्सप्रेस और 30 अगस्त, 3 व 6 सितंबर को रायपुर-लखनऊ गरीब रथ एक्सप्रेस।   अनूपपुर में भोला गिरी खड़ेश्वर बाबा की हत्या, जंगल में बने आश्रम में मिला शवअनूपपुर में भोला गिरी खड़ेश्वर बाबा की हत्या, जंगल में बने आश्रम में मिला शव 22 अगस्त व 3 सितंबर को निज़ामुद्दीन-अम्बिकापुर एक्सप्रेस और 29 अगस्त व 5 सितंबर को अंबिकापुर -निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस। आठ ट्रेनें बदले रेलमार्ग से चलेंगी     इस कार्य के चलते आठ ट्रेनें परिवर्तित मार्ग से चलेंगी। इसके तहत 31 अगस्त व नौ सितंबर को दुर्ग से रवाना होने वाली दुर्ग-निजामुद्दीन संपर्क क्रांति एक्सप्रेस न्यू कटनी–कटनी-सतना-ओहन केबिन-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी जंक्शन होकर चलेगी।     इसी तरह 10 सितंबर को निज़ामुद्दीन- दुर्ग संपर्क क्रांति एक्सप्रेस भी इस मार्ग से चलेगी।     वहीं 12 सितंबर को अंबिकापुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस, 11 सितंबर को अमृतसर-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस इसी मार्ग से चलेगी।     27 अगस्त को भुज-शालीमार एक्सप्रेस संत हिरद्दयाराम नगर-भोपाल-इटारसी-जबलपुर-कटनी- न्यू कटनी।     27 अगस्त से चार सितंबर तक गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस, 27 अगस्त से चार सितंबर तक बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग कटनी जबलपुर- नैनपुर-बालघाट-गोंदिया होकर चलेगी।   recent visitors 94

भारत में सबसे बड़ा फ्रॉड, डॉक्टर को साइबर ठगों ने 7 दिन तक झांसे में रखकर धीरे-धीरे 2.81 करोड़ रुपए ठगे

लखनऊ उत्तर प्रदेश के पीजीआई लखनऊ अस्पताल की एक डॉक्टर भारत में डिजिटल अरेस्ट या साइबर अरेस्ट के सबसे बड़े फ्रॉड का शिकार बन गई हैं। डॉक्टर रुचिका टंडन को साइबर ठगों ने 7 दिन तक झांसे में रखकर धीरे-धीरे 2.81 करोड़ रुपए ठग लिए। डॉक्टर टंडन ने कई दिन बाद इंटरनेट पर इसी तरह से ठगी के कई मामले देखे तो साइबर क्रिमिनल्स के फैलाए डर से बाहर निकल पाईं और पुलिस के पास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। देश में इस समय खौफनाक बन चुके मनी लांड्रिंग केस का खौफ दिखाकर टंडन को डिजिटल अरेस्ट बताया और बाकायदा ऑनलाइन कोर्ट और मुकदमा भी चला। इसी हफ्ते एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि पिछले चार महीने में देश भर में डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर साइबर ठगों ने आम लोगों को 120 करोड़ रुपए की चपत लगा दी है। डॉक्टर टंडन ने भारत समाचार चैनल से बातचीत में बताया कि उन्हें सुबह 8 बजे एक फोन आया कि उनके नंबर पर साइबर सेल में लोगों को परेशान करने वाले मैसेज के कई केस दर्ज हैं। फिर उन्होंने कॉल ट्रांसफर कर दिया और बताया कि जिन्हें कॉल ट्रांसफर किया गया है, वो आईपीएस अफसर हैं। उसके बाद उन्हें बताया गया कि उनके बैंक खाते पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस है और उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश मुंबई से मिला है। ये राष्ट्रीय सुरक्षा का केस है इसलिए इस बात को गोपनीय रखना है, किसी को बताना नहीं है। आपको अब डिजिटल कस्टडी में रहना होगा। डिजिटल अरेस्ट में 4 महीने में 120 करोड़ गंवाए, ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम में बदलाव डॉक्टर ने बताया कि इसके बाद अगले छह-सात दिन तक ऑनलाइन तरीके से कोर्ट में फर्जी केस चलाया। एक नया फोन खरीदवाया गया और उस पर वीडियो कॉल के ऐप डाउनलोड करवा दिए। वीडियो पर वो निगरानी रखते थे। ठगों ने अलग-अलग बैंक खाते के नंबर दिए और कहा कि इन खातों में पैसे भेजिए। जांच में आप निर्दोष निकलीं तो सारे पैसे वापस आ जाएंगे। डॉक्टर ने बताया कि सात-आठ दिन बाद उन्होंने पता किया और फिर कुछ न्यूज रिपोर्ट देखी तो उन्हें समझ आया कि उनके साथ ठगी हो गई है। डॉक्टर को झांसा दिया गया था कि आपको गलती से किसी ने केस में फंसा दिया है। पुलिस और कोर्ट जांच में गलत पाती है तो सारे पैसे वापस कर दिए जाएंगे। recent visitors 99

तहसीलदार बिसन सिंह ठाकुर ने अपने कार्यकाल में अपात्र लोगों को दिए किसान सम्मान निधि का लाभ

डिंडोरी  पीएम किसान सम्मान निधि में गड़बड़ी को लेकर जबलपुर कमिश्नर अभय वर्मा ने डिंडोरी जिले के तत्कालीन तहसीलदार बिसन सिंह ठाकुर को निलंबित कर दिया है। तत्कालीन तहसीलदार पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत सुशीला बाई और कीरत सिंह को पात्र माना गया। दोनों को 05 सितंबर 2019 से 20 अक्टूबर 2019 तक और 25 नवंबर 2019 से 07 अगस्त 2021 तक पीएम किसान योजना की किस्त प्रदान की गई। बाद में इन लाभुकों को मृत बताकर योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया। हालांकि बाद में जांच के दौरान पता चला कि दोनों जीवित हैं। तहसीलदार की आईडी से मृत घोषित किया गया इसके साथ ही जांच में यह पाया गया कि दोनों लाभुक जीवित हैं। सुशीला बाई और कीरत सिंह को तहसीलदार की आईडी से मृत अंकित किया गया है। जबलपुर कमिश्नर ने पाया कि तहसीलदार का यह कार्य गंभीर लापरवाही का द्योतक है। बिना जमीन के ही किसान सम्मान निधि का लाभ वहीं, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के सत्यापन के दौरान तहसील डिंडोरी के अंतर्गत लगभग 2700 ऐसे किसान पाए गए, जिनके नाम पर भूमि नहीं है। तहसीलदार द्वारा सत्यापित कर इन्हें पीएम किसान योजना का लाभ दिया जा रहा था। सेल्फ रजिस्ट्रेशन के माध्यम से किसान सिर्फ अपना पंजीयन कर सकते है, लेकिन पात्रता की जांच कर अनुमोदन तहसीलदार की आईडी से किया जाता है। तहसीलदार ठाकुर द्वारा हितग्राहियों की पात्रता संबंधी जांच परीक्षण नहीं किया गया है। 2.83 करोड़ रुपए की राशि का नुकसान इस कारण से अपात्र लोगों को योजना का लाभ प्राप्त हुआ। साथ ही शासन को 2.83 करोड़ रुपए की क्षति हुई है। क्षति की राशि में से मात्र राशि 6.85 लाख रुपए की वसूली की गई, जो मात्र 2.42 प्रतिशत है। तहसीलदार की करतूत वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। सत्यापन के दौरान लगभग 300 ऐसे हितग्राही पाए गए, जिनके परिवार के मुखिया के साथ-साथ अन्य सदस्यों को भी लाभ दिया जा रहा था। इनमें से कुछ तो नाबालिग और स्कूल में अध्ययनरत सदस्यों को लाभ दिया गया है। पात्रता की जांच नहीं की इससे साफ पता चलता है कि तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर द्वारा अनुमोदन करने से पूर्व संबंधित हितग्राहियों के पात्र होने का परीक्षण नहीं किया गया है। इसके साथ ही न ही अधीनस्थ अमले से जांच कराई गई है। यह कार्य के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। 3916 अपात्रों को दिए लाभ तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर ने पीएम किसान सम्मान की शासन के निर्देशों के विपरीत निधि योजनांतर्गत लगभग 3916 अपात्र कृषकों पात्र करते हुए योजना से लाभांवित किया जाता रहा। इससे शासन को लगभग राशि रूपये 2.83 करोड़ की क्षति हुई है। ठाकुर द्वारा ऐसे व्यक्तियों को लाभ दिया गया है, जिनके नाम पर जमीन नहीं है। श्री ठाकुर का उक्त कृत्य वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। जांच के दौरान पीएम किसान पोर्टल पर योजना का लाभ ले चुके अपात्र किसानों से वसूल की जाने वाली राशि 3,68,70,000/- के विरूद्ध 15,17,000/- रुपए की वसूली की जा चुकी है। वित्तीय अनियमितता सामने आई जबलपुर कमिश्नर अभय वर्मा ने कहा कि तहसीलदार बिसन सिंह ठाकुर द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत राशि वितरण लापरवाही बरती गई। उनका यह कृत्य मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 के विपरीत है और कदाचार की श्रेणी में आता है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में तहसीलदार का मुख्यालय कार्यालय कलेक्टर, सिवनी नियत किया गया है। recent visitors 165

प्रधानमंत्री मोदी देश की प्रगति के लिए सक्षम नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

देश का विभाजन 20वीं शताब्दी की सबसे अधिक दु:खद और अत्यंत त्रासदीपूर्ण दुर्घटना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश को आगे बढ़ना है तो इतिहास के घावों और गलतियों से सबक लेना होगा प्रधानमंत्री मोदी देश की प्रगति के लिए सक्षम नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की विभाजन का दंश झेल चुके परिवारों के सदस्यों का किया सम्मान विभाजन की त्रासदी पर केन्द्रित प्रदर्शनी और लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन सरोजनी नायडू कन्या महाविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हुआ कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन में देश की विभाजन विभीषिका के संबंध में जो पीड़ा है, वह हम सब अनुभव करते हैं। देश का विभाजन 20वीं शताब्दी की सबसे अधिक दु:खद, दुर्दांत और अत्यंत त्रासदीपूर्ण दुर्घटना है। इसका विवरण करूण और कठिन है। यह वास्तविकता है कि इस त्रासदी से गुजरे कई लोग इस संबंध में बात भी नहीं करना चाहते, लेकिन यदि किसी देश को लंबी यात्रा करना है, उसे आगे बढ़ना है तो इतिहास के घावों और गलतियों से उसे सबक लेना होगा, अन्यथा देश का भविष्य खतरे में होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या महाविद्यालय भोपाल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभाजन पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में विभाजन की विभीषिका पर केन्द्रित लघु फिल्म तथा प्रधानमंत्री मोदी के इस विभीषिका पर सोच को दर्शाती फिल्म भी प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी उपस्थित थे। भारतीयों ने छल और चालाकी के कारण हानि उठाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस संबंध में कई उदाहरण प्रासंगिक हैं। इजराइल, इराक और इरान ने अपनी अस्मिता और राष्ट्रीयता के लिए जो संघर्ष किया वह हम सबके लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि हम भारतीयों की यह विशेषता है कि हम अपने उदात्त भाव के परिणामस्वरूप सभी को अपना मानते हैं, परंतु अक्सर लोगों की चालाकियों और छल के कारण हानि उठानी पड़ती है। उन्होंने इस संबंध में पृथ्वीराज चौहान, गुलामवंश के शासकों, मोहम्मद गजनी, मोहम्मद बिन कासिम का उदाहरण देते हुए कहा कि कई युद्ध छल से जीते गए और देश को लंबे समय तक गुलामी का दंश झेलना पड़ा। अन्य चालाकियों और छल प्रपंचों से देश में धर्मांतरण की प्रक्रिया को भी तेज किया गया। व्यापार करने आए अंग्रेजों ने भी 1857 की क्रांति के बाद देश में अपने पैर जमाए रखने के लिए "फूट डालो राज करो" की नीति से हिन्दू-मुसलमानों को विभाजित किया, परिणामस्वरूप 1906 में अंग्रेजों के माध्यम से मुस्लिम लीग का फार्मूला लाया गया। मुस्लिम बहुलता वाले निर्वाचन क्षेत्रों को चुनकर वहां मतदान के अधिकार और चुनाव लड़ने का अधिकार भी केवल मुसलमानों को था। अंग्रेजों का षड़यंत्र नहीं समझ सके राजनैतिक दल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंग्रेजों की इस विभाजन करने वाली सोच के बाद भी यह भारतीय समाज की ताकत थी कि 1906 में जब पहली बार मुस्लिम लीग ने अपने प्रत्याशी खड़े किए तो अंग्रेजों के षड़यंत्र को समझते हुए वर्ष 1906, 1911, 1916 और 1923 के चुनाव में देशभक्त जनता ने मुस्लिम लीग के प्रत्याशियों को विजयी नहीं होने दिया, और 1936 तक मुस्लिम लीग के प्रत्याशी लगातार हारते रहे। लेकिन तत्कालीन भारतीय राजनैतिक दल अंग्रेजों का यह षड़यंत्र नहीं समझ सके और उन्होंने तुर्की में हुए खलीफा आंदोलन को धर्म के आधार पर समर्थन प्रदान किया। परिणामस्वरूप देश के बंटवारे की भावनाओं का अंकुरण होना आरंभ हो गया और 1940 के चुनाव में विभाजनकारी ताकतों ने सभी सीटें जीत लीं। हमारी सांस्कृतिक एकता के मापदंड भूलने के कारण देश ने विभाजन की विभीषिका झेली मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल, नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे नेता इस षड़यंत्र के विरूद्ध थे। इन्हें नेतृत्व का मौका नहीं मिला। गणेश उत्सव की शुरूआत करने वाले बाल गंगाधर तिलक, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले पंडित मदन मोहन मालवीय, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह जैसे राष्ट्रभक्त हाशिए पर चले गए। देश का बंटवारा नहीं होने देने के लिए प्रतिबद्ध राजनैतिक दल अपने प्रण पर दृढ़ नहीं रह सका। रातों-रात देश के बंटवारे का सिद्धांत बना, लार्ड माउंटबेटन ने उसे स्वीकृति प्रदान की और हमारे भाई-बहनों को विभाजन की विभीषिका झेलनी पड़ी। देश में राष्ट्रवादी मुसलमानों का सम्मान नहीं किया गया। हमारी सांस्कृतिक एकता के मापदंड को भूलने के परिणामस्वरूप ही देश को विभाजन की विभीषिका झेलनी पड़ी और भीषण नरसंहार भोगना पड़ा। ऐसे कई रेलें थीं जिनके सभी यात्रियों को मार डाला गया, बहन-बेटियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। पंजाब दो भागों में बटा, सिंध हाथ से चला गया और राष्ट्र गान में सिंध का शब्द शेष रह गया। विभाजन के समय परिवारों ने धर्म और संस्कृति रक्षा के लिए अपना सब कुछ त्यागा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभाजन की विभीषिका को इस स्वरूप में देखा जाना चाहिए कि हमारे द्वारा लिए गए गलत निर्णयों का परिणाम कई पीढ़ियां भुगतती हैं। कई परिवारों को केवल देशभक्ति और सनातन संस्कृति को बचाए रखने के लिए अपना घर, धन-दौलत, जमीन-जायदाद एक रात में छोड़कर आना पड़ा, यह कष्ट कल्पनातीत है। धर्म रक्षा के लिए किया गया यह त्याग केवल भारत में ही संभव है। भारत विश्व में अपनी अच्छाई, सच्चाई और संस्कृति के लिए जाना जाता है। भारत रसखान और रहीम को भूल नहीं सकता, वे हमारे पाठ्यक्रम का भाग हैं। ऐसे मूल्यों के अनुसरण के परिणामस्वरूप ही इंडोनेशिया की करेंसी पर आज भी भगवान गणेश का चित्र अंकित है और उनकी गरूड़ एयरलाइंस विष्णु भगवान के वाहन के नाम से जानी जाती है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर हुई नागरिकता देने की व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी ने उस काल के कष्ट और तत्कालीन नेतृत्वकर्ताओं की गलती को समझा है। वे इनसे सबक लेते हुए देश की एकता को बनाए रखने व भविष्य में देश को प्रगति पथ पर अग्रसर करने के लिए सक्षम नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। वर्ष 1857 के बाद भारत से अलग … Read more