वायनाड भूस्खलन से कई गांव तबाह, 13 फुटबॉल मैदान जितनी बड़ी जगह में मची तबाही

वायनाड वायनाड में मंगलवार तड़के कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि सैकड़ों जिंदगियां मौत के मुंह में समा गईं. कई घायल हैं और ऐसे लोगों की भी संख्या काफी बड़ी है जो परिवार से अलग हो गए हैं, अकेले रह गए हैं और बिछड़ गए हैं. बड़ी संख्या में लोग लापता भी हुए हैं और इनमें से कई ऐसे हैं, जिनकी जीवित बचे रह जाने की उम्मीद कम ही है. आंकड़ों में बात करें तो अब तक 256 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. लैंडस्लाइड के कारण 4 गांव मलबे में तब्दील हो गए हैं और अब वहां कुछ नहीं बचा है.     इस भीषण आपदा को लेकर इसरो ने भी चिंता जताई है और अपनी एक स्टडी में कहा है कि वायनाड में जितने बड़े हिस्से पर लैंडस्लाइड का प्रभाव पड़ा है, वह भूखंड इतना बड़ा है कि इस एरिया में 13 से अधिक इंटरनेशन फुटबॉल ग्राउंड बनाए जा सकते थे. लैंड स्लाइड के कारण इतना बड़ा भूखंड  इरुवाझिनझी नदी में समा गया है और इसी हिस्से पर बसे लोग मलबों के साथ बह गए. केरल के वायनाड के तीन गांवों में 250 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने  भूस्खलन वाले क्षेत्र का एरियल सर्वे किया. सैटेलाइट डेटा पर बेस्ड असेसमेंट में सामने आया कि लैंडस्लाड में लगभग 86,000 वर्गमीटर एरिया धसकते हुए मलबे में तब्दील हो गया. फीफा के नियमों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए फुटबॉल मैदान का आकार कम से कम 6,400 वर्गमीटर होना चाहिए. इस तरह देखा जाय तो यहां 13 से अधिक मैदान बनाए जा सकते थे. 31 जुलाई को अपने RISAT-2B सैटेलाइट द्वारा कैप्चर की गई सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर इसरो के विश्लेषण में कहा गया है कि भूस्खलन से हुआ कीचड़, बड़े पत्थरों और उखड़े हुए पेड़ों के साथ लगभग 8 किमी तक बहता रहा और आखिरकार चेलियार नदी की एक सहायक नदी में गिर गया. इसरो ने कहा, "बहते आ रहे मलबे की तेज गति ने इरावानीफुज़ार नदी के मार्ग को चौड़ा कर दिया है, जिससे इसके किनारे टूट गए हैं." आपदा में जो जीवित बचे वह इसकी विभीषिका बताते हुए अभी भी कांप उठते हैं. उन्होंने इस मलबे को कीचड़ की दीवार कहा है और उनका कहना है कि इसी के कारण सैकड़ों घर और कई बुनियादी ढांचे दफन हो गए. इस आपदा के केंद्र में इरुवाझिंझी नदी है, जो मुंडक्कई से लगभग 3 किमी ऊपर पहाड़ियों से निकलती है. इसरो ने कहा कि भूस्खलन समुद्र तल से लगभग 1500 मीटर की ऊंचाई पर हुआ. इंडिया टुडे की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम द्वारा किए गए इलाके के मानचित्रण से पता चला है कि आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंचने पर नदी तेजी से और लगातार अपनी ऊंचाई खोती जा रही है. इसका मतलब यह भी है कि जैसे-जैसे यह नीचे की ओर बहती है इसकी धाराएं मजबूत होती जाती हैं. इसके रास्ते में पहला शहर, मुंडक्कई, लगभग 950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इसका मतलब है कि नदी की ऊंचाई प्रोफ़ाइल लगभग 3 किमी की दूरी में लगभग 550 मीटर कम हो जाती है. अधिकारियों ने कहा कि विथिरी में 48 घंटों में लगभग 57 सेमी बारिश हुई, जिससे विनाशकारी घटना हुई. इंडिया टुडे ने पहले रिपोर्ट किया था कि नदी में 2020 में भी इसी तरह का भूस्खलन-प्रेरित स्लश रन देखा गया था. सामने आई नई इसरो इमेजरी से पता चला है कि मंगलवार का भूस्खलन 2020 वाली जगह पर ही हुआ है, लेकिन इस बार यह काफी बड़ा और विभीषिका वाला था, जिससे नुकसान भी भीषण हुआ है.   recent visitors 104

MP में मंत्रियों को जल्द मिल सकते हैं प्रभार के जिले, नए—नवेले मंत्रियों को एक जिले का ही प्रभार मिलेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश की नई सरकार को 7 महीने बीत गए हैं, लेकिन जिलों को प्रभारी मंत्री नहीं मिल सके हैं। इस बीच, एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जल्द ही मंत्रियों को जिलों का प्रभार देने जा रहे हैं। आने वाले दो—तीन दिनों में इसका ऐलान हो सकता है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ मंत्रियों को दो जिलों का प्रभार मिल सकता है, जबकि नए—नवेले मंत्रियों को एक जिले का ही प्रभार मिलेगा। किसी को एक तो किसी को मिलेंगे दो जिले खास बात यह है कि कुछ मंत्रियों को गृह जिलों का प्रभार देने पर भी विचार चल रहा है। गौरतलब है कि राज्य में 55 जिले हैं और मुख्यमंत्री सहित 32 मंत्री हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चाहते हैं कि सभी 55 जिलों में प्रभारी मंत्री रहें, ताकि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अधिक से अधिक जिलों में मंत्री ध्वजारोहण कर सकें। प्रभार देते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि मंत्रियों को ऐसे जिले दिए जाएंगे, जिनकी सीमाएं एक-दूसरे से लगी हों। राजनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए वरिष्ठ मंत्रियों को दो जिले और पहली बार के मंत्रियों को एक-एक जिले का प्रभार दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही यह बात कह चुके हैं कि 15 अगस्त को जिला मुख्यालयों पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के प्रभारी मंत्री मुख्य अतिथि होंगे। इनको मिलेंगे प्रमुख जिले मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बाद कद्दावर मंत्रियों में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और इसके बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह शामिल हैं। इन्हें दो जिलों का प्रभार दिये जाने पर विचार चल रहा है। अनुभव के आधार पर मिलेंगे जिले मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Sarkar) कुछ मंत्रियों को गृह जिलों का प्रभार देने पर भी विचार कर रही है। आपको बता दें कि प्रदेश में 55 जिले हैं और मुख्यमंत्री सहित 32 मंत्री हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) चाहते हैं कि सभी 55 जिलों में प्रभारी मंत्री रहें, जिससे 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ज्यादा से ज्यादा जिलों में मंत्री ध्वजारोहण कर सकें। प्रभार देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि मंत्रियों को ऐसे जिले दिए जाएंगे, जिनकी सीमाएं एक-दूसरे से लगी हों। राजनीतिक और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए वरिष्ठ मंत्रियों को दो जिले और पहली बार बने मंत्रियों को एक जिले का प्रभार सौंपा जा सकता है। सीएम डॉ. मोहन यादव पहले ही यह बात कह चुके हैं कि 15 अगस्त को जिला मुख्यालयों पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के प्रभारी मंत्री मुख्य अतिथि होंगे। मध्य प्रदेश में सीएम डॉ. मोहन यादव के बाद कद्दावर मंत्रियों में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और इसके बाद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह शामिल हैं। इन्हें दो जिलों का प्रभार दिये जाने पर विचार चल रहा है। recent visitors 104

मध्य प्रदेश में 3 नए मेडिकल कॉलेज खुलने की तैयारी, इसी शिक्षा सत्र में होंगे शुरू, MBBS की 450 नई सीटें होंगी

भोपाल मध्य प्रदेश के तीन जिलों में तीन नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत इसी सत्र से होगी, सीएम मोहन यादव ने इस बात का ऐलान कर दिया है. ऐसे में इन जिलों के लोगों को इलाज के लिए अब दूसरे जिलों में नहीं जाना होगा. इन जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मांग लंबे समय से चल रही थी. जिसे कैबिनेट की बैठक में पास किया गया था. ऐसे में अब इन जिलों में मेडिकल कॉलेज की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी. इन जिलों में नीमच जिला भी शामिल है. इन जिलों में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच और सिवनी जिले में इसी सत्र से मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहे हैं. नेशनल मेडिकल काउंसिल की तरफ से इन कॉलेजों के लिए 50-50 सीटों पर एडमिशन के लिए मंजूरी भी मिल गई है. यानि तीनों कॉलेजों में इसी सत्र से कुल 150 सीटों पर एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हो जाएगी. जिसके बाद प्रदेश में एमबीबीएस की कुल सीटें 2 हजार 425 हो जाएगी. प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला की तरफ से बताया गया कि मंदसौर, नीमच और सिवनी में इस सत्र से कॉलेज शुरू होंगे, जबकि सिंगरौली और श्योपुर में कॉलेजों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. यानि अगले सत्र से भी प्रदेश में दो और नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे. इन जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले जाने से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले छात्रों को तो फायदा होगा ही साथ ही जिले के लोगों के लिए इलाज के लिए भी परेशान नहीं होना पड़ेगा. सीएम ने जताई खुशी वहीं प्रदेश को एक साथ तीन मेडिकल कॉलेज की सुविधा मिलने पर सीएम मोहन यादव ने भी खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि यह तीनों मेडिकल कॉलेज खुलना प्रदेश के लिए खुशी की बात है. हमारा प्रयास है कि हर जिले में मेडिकल कॉलेज हो. कुछ जिलों में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारियां की जा रही हैं. जल्द ही इसे भी पूरा किया जाएगा. प्रदेश के लोगों को सभी तरह की सुविधाएं मिल सके इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है.  recent visitors 86

हानिया की मौत से युद्ध के मुहाने पर पश्चिम एशिया, ईरान बना रहा नया आतंकी संगठन !

तेहरान  इजरायल ने 20 जुलाई को यमन के हूतियों के कब्जे वाले होदेदाह पर हवाई हमला किया था। इस हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हुए। इसके बाद 30 जुलाई को इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के एक शीर्ष कमांडर फुआद शुकर को एक हमले में मार गिराया। इसके कुछ घंटे बाद हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हानिया की तेहरान में हत्या कर दी गई। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और हमास ने हानिया की हत्या के लिए इजरायल को दोषी ठहराया है। तीनों समूहों- यमन के हूती, लेबनान के हिजबुल्लाह और फिलिस्तीन के हमास के बीच एक बात सामान्य है कि इन तीनों को इजरायल के मुख्य प्रतिद्वंद्वी ईरान का समर्थन प्राप्त है। कुछ ही दिनों में तीनों गुटों को निशाना बनाकर इजरायल ने ईरान को तगड़ा झटका दिया है। वहीं लगातार हुए इन हमलों ने क्षेत्र को एक पूर्ण युद्ध के कगार पर पहुंचा दिया है। इसकी वजह ये है कि हूती, हमास और हिजबुल्ला इन हमलों के बाद ईरान के साथ एक मंच पर आकर इजरायल से भिड़ने की सोच सकते हैं। हानिया की मौत के बाद क्या करेगा ईरान?  एक रिपोर्ट में हालिया घटनाओं, खासतौर से हानिया की मौत से ईरान और इजरायल के रिश्ते पर पड़ने वाले असर की बात की गई है। गाजा के बाहर हमास के बड़े नेता हानिया की हत्या को इजरायल की जीत की तरह से देखा जा रहा है। शेख अहमद यासीन और अब्देल अजीज अल-रंतिसी के बाद हानिया को हमास के सबसे शक्तिशाली नेता के तौर पर देखा जाता था। यासीन मार्च 2004 में इजरायली मिसाइल हमले में मारे गए थे। उनके उत्तराधिकारी नियुक्त किए गए रंतिसी को भी एक महीने के भीतर इजरायलियों ने मार डाला था। ऐसे समय में जब हमास नेतृत्व विहीन होता दिख रहा था तो हानिया ने हमास को आगे बढ़ाया और इसमें उसे काफी कामयाबी भी हासिल की। गाजा पर हमास के कब्जे में हानिया की भूमिका काफी अहम रही तो दुनिया में भी समर्थन हासिल करने की कोशिश की। इस्माइल हानिया 2017 में गाजा छोड़कर कतर आ गया और हमास की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति का प्रमुख चेहरा बनकर उभरा। हानिया ने हालिया दिनों में गाजा में युद्ध विराम के लिए हमास की ओर से लगातार बातचीत का नेतृत्व किया था। हानिया की मौत से गाजा युद्ध विराम वार्ता को भी झटका लगा है। ऐसे में क्या हमास अब इजरायल के साथ बंधक समझौते को स्वीकार करेगा और ईरान इस हत्या की शर्मिंदगी के बाद क्या फैसला लेगा। ईरान ने इस साल दमिश्क में अपने दूतावास परिसर पर बमबारी के बाद इजरायल पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया था। इसके बाद से इजरायल ने ईरानी अधिकारियों या उसके मिशनों को निशाना नहीं बनाया था लेकिन ईरान से जुड़े तीन मिलिशिया के खिलाफ हमले करके इजरायल ने एक नई लड़ाई का ऐलान कर दिया है। खासतौर से तेहरान की जमीन पर हमला ईरान के लिए बड़ी शर्मिंदगी का सबब बन रहा है। जवाबी हमला करेगा ईरान? इस साल अप्रैल में जब सीरिया में उसके दूतावास परिसर पर हमला हुआ था तो ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन से हमला किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ईरान इस बार भी अपनी जमीन पर हुई हत्या के बाद जवाबी कार्रवाई करेगा। आईआरजीसी ने हमले के लिए इजरायल को दोषी ठहराया है, जो ये दिखाता है कि ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खुमैनी ने भी बदला लेने की कसम खाई है। अब यह देखना बाकी है कि ईरान और हिजबुल्लाह जवाबी कार्रवाई में क्या करने जा रहे हैं और इसके बाद इजरायल क्या करेगा। कहा जा सकता है कि पश्चिम एशिया खतरनाक रूप से एक पूर्ण युद्ध के करीब है। निश्चित रूप से हानिया की मौत ईरान और इजरायल के बीच तनाव को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकती है। recent visitors 137

नवजात बच्ची को गोद में लेकर किया दुलार, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पहुंचे महारानी अस्पताल

रायपुर, जिस समय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय महारानी अस्पताल पहुंचे। उसी समय कोंडगांव की मोनिका त्रिपाठी को पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई थी। मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी मिली तो मुख्यमंत्री बिटिया को आशीर्वाद देने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत शुभ घड़ी है। बिटिया के दर्शन हुए हैं। मुख्यमंत्री ने बिटिया को अपने हाथों में लिया और दुलारा। आशीर्वाद देते हुए पांच सौ रुपए की राशि भेंट की। उन्होंने बिटिया के पिता प्रत्युष त्रिपाठी को भी बहुत बधाई दी। उन्होंने कहा कि आपके घर लक्ष्मी आई है आपको बहुत बधाई। प्रत्युष त्रिपाठी ने कहा कि बिटिया को मुख्यमंत्री का आशीर्वाद मिल गया, ये उनकी बिटिया के लिए सबसे बड़ी निधि है। recent visitors 122

बस्तर संभाग को मिले 11 विशेषज्ञ चिकित्सक, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की पहल

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की अनुशंसा पर बस्तर संभाग में 11 विशेषज्ञ चिकित्सकों (एनएचएम संविदा)  की नियुक्ति की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) से इन विशेषज्ञ चिकित्सको का पोस्टिंग आदेश भी जारी हो गया है। इन चिकित्सकों के मिल जाने से संभाग में त्वरित एवं बेहतर उपचार की बड़ी सुविधा मिलेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी किये गए आदेश में डॉ. मेनका खरे,  एम.डी. मेडिसिन को  जिला अस्पताल, जिला – बस्तर , डॉ. गौरीसेट्टी श्रव्या, शिशुरोग विशेषज्ञ को जिला अस्पताल, जिला – बस्तर , डॉ. पाड़ीशाला हरिश कुमार, एम.डी. मेडिसिन को जिला अस्पताल, जिला – बीजापुर , डॉ. लीना पुराइन, स्त्रीरोग विशेषज्ञ को जिला अस्पताल, जिला – बीजापुर , डॉ. कृष्णा कुमार मरकाम, निश्चेतना विशेषज्ञ को जिला अस्पताल, जिला – नारायणपुर में पदस्थ किया गया है। इसी प्रकार  डॉ. लक्ष्मी नारायण वर्मा, नेत्ररोग विशेषज्ञ को जिला अस्पताल, जिला – नारायणपुर , डॉ. जयश्री साहू, शिशुरोग विशेषज्ञ को  जिला अस्पताल (एस.एन.सी.यू.), जिला – नारायणपुर, डॉ. मनोज कुमार, अस्थिरोग विशेषज्ञ को जिला अस्पताल, जिला – नारायणपुर,डॉ. परिणीता रायस्त, स्त्रीरोग विशेषज्ञ को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छिन्दनार, जिला – सुकमा ,डॉ. निरंजन एस काडलूर, शल्यकिया विशेषज्ञ को जिला अस्पताल, जिला – सुकमा , डॉ. सुरज नारायण हटकर, निश्चेतना विशेषज्ञ को जिला अस्पताल, जिला – सुकमा  में पदस्थ किया गया है। recent visitors 103

इजरायल का बड़ा दावा, हानिया ही नहीं हमास मिलिट्री चीफ दायफ का भी खात्मा

तेलअवीव इजरायल की सेना (IDF) ने गुरुवार को दावा किया कि हमास (Hamas) के सैन्य विंग के प्रमुख मोहम्मद दायफ (Mohammed Deif) की पिछले महीने गाजा में इजरायली हवाई हमले में मौत हो गई थी. यह जानकारी समूह के राजनीतिक नेता इस्माइल हानिया की तेहरान में हत्या के एक दिन बाद दी गई. इजरायली सेना ने की तरफ से कहा गया, "IDF ऐलान करता है कि 13 जुलाई, 2024 को IDF लड़ाकू विमानों ने खान यूनिस के इलाके में हमला किया और खुफिया आकलन के बाद यह पुष्टि की जा सकती है कि हमले में मोहम्मद दायफ मारा गया." इजरायली डिफेंस फोर्स ने इससे जुड़ा हुआ एक सोशल मीडिया पोस्ट भी किया. इजरायली अधिकारियों ने कहा कि उन्हें संकेत मिले थे कि उनका हमला सफल रहा, लेकिन वे अब तक यह पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि वह मारा गया है. हमास ने इजरायल के द्वारा किए गए इस ऐलान पर कोई तत्काल जवाब नहीं दिया है. यह ऐलान ऐसे वक्त में किया गया है, जब तेहरान में हमास के नेता इस्माइल हानिया के अंतिम संस्कार के लिए भीड़ इकट्ठा हो रही थी. ऐसा माना जाता है कि दायफ 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल पर हमास के हमले के मास्टरमाइंडों में से एक था, जिसकी वजह से गाजा युद्ध शुरू हुआ, जिसको 300 दिन हो रहे हैं. हमास के टॉप लीडर्स में शामिल था दायफ हमास के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक, दायफ 30 साल से ज्यादा वक्त तक समूह में आगे बढ़ता रहा और सुरंगों का नेटवर्क और बम बनाने में विशेषज्ञता विकसित करता रहा. मोहम्मद दायफ, दशकों से इजरायल की मोस्ट वॉन्डेट लिस्ट टॉप पर है. इजरायल उसे आत्मघाती बम विस्फोटों में दर्जनों इजरायलियों की मौत के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानता आया है. इस्माइल के जनाजे के बीच इजरायल ने दी यह खबर यहूदी देश की सेना ने कहा कि मोहम्मद डीफ ने ही 7 अक्टूबर के हमले की प्लान की और उसे अंजाम दिया था। इजरायल की ओर से यह घोषणा उस दौरान की गई, जब ईरान की राजधानी तेहरान में हमास के नेता इस्माइल हानियेह के जनाजे में हजारों की भीड़ जुटी थी। माना जा रहा है कि इस बड़े ऐलान के लिए इजरायल ने जानबूझकर ऐसा मौका चुना ताकि हमास और ईरान का मनोबल तोड़ा जा सके। बता दें कि मंगलवार को ही इजरायल ने तेहरान में इस्माइल को मार डाला था। उसकी हत्या उस दौरान की गई, जब वह ईरान के नए राष्ट्रपति के शपथ समारोह से लौट रहा था। 30 सालों से इजरायल को थी मोहम्मद डीफ की तलाश मोहममद डीफ का मारा जाना इजरायल के लिए बड़ी सफलता है क्योंकि उसकी 30 सालों से तलाश थी। उसे अमेरिका ने भी 2015 में अपनी इंटरनेशनल टेररिस्ट्स की लिस्ट में शामिल किया है। इजरायल की सेना ने कहा कि उनकी धरती पर डीफ ने बीते सालों में कई हमले किए थे। गौरतलब है कि इजरायल पर हुए भीषण हमले में 1200 लोग मारे गए थे। वहीं करीब 250 लोगों को हमास के आतंकियों ने बंधक बना लिया था।    recent visitors 195