पावर कॉरिडोर: मंत्री-सचिव की तकरार से लेकर वीआईपी प्रोटोकॉल तक, सत्ता के गलियारों की बड़ी हलचल

Power Corridors: Major stirrings in the corridors of power—from clashes between ministers and secretaries to VIP protocol issues. भोपाल। मध्य प्रदेश के सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक ओर मंत्री और विभागीय सचिव के बीच बढ़ती दूरी ने नए प्रशासनिक समीकरणों को जन्म दे दिया है, तो दूसरी ओर खजुराहो एयरपोर्ट पर कलेक्टर की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इसी बीच एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी ने अहम पद पर नियुक्त होकर नया रिकॉर्ड बनाया है, जबकि मुख्यमंत्री और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की मुलाकात भी कई अटकलों को हवा दे रही है। मंत्री ने सचिव हटाने की मांग, अब मुख्यमंत्री के फैसले पर नजर प्रदेश सरकार की एक महिला मंत्री ने अपने विभाग की सचिव को हटाने की मांग सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रख दी है। सूत्रों के मुताबिक मंत्री चाहती हैं कि उनके विभाग में सचिव स्तर के बजाय अपर मुख्य सचिव (ACS) या प्रमुख सचिव (PS) स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की जाए। बताया जा रहा है कि विभाग की 2005 बैच की आईएएस सचिव के साथ मंत्री के कार्यशैली को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं। हाल ही में विभाग में हुए तबादलों के दौरान भी दोनों के बीच असहमति खुलकर सामने आई थी। सूत्रों का कहना है कि मंत्री ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर सचिव को तत्काल हटाने का आग्रह किया है। अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री मंत्री की मांग स्वीकार करते हैं या वर्तमान व्यवस्था को बरकरार रखते हैं। खजुराहो एयरपोर्ट पर कलेक्टर की मौजूदगी से बढ़ा सियासी तापमान देश के प्रमुख उद्योगपति अनंत अंबानी के खजुराहो आगमन के दौरान छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल की एयरपोर्ट पर मौजूदगी ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री राजा पटेरिया ने राज्यपाल और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कलेक्टर की शिकायत की है। उनका आरोप है कि निजी दौरे पर आए व्यक्ति को सरकारी प्रोटोकॉल उपलब्ध कराना और प्रशासनिक संसाधनों का उपयोग करना अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का उल्लंघन है। हालांकि 2015 बैच के आईएएस अधिकारी पार्थ जायसवाल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि वे किसी निजी स्वागत के लिए नहीं पहुंचे थे और तस्वीरों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है।इस मामले पर जहां विपक्ष सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है, वहीं कुछ लोग इसे संभावित निवेश और जिले के विकास की दृष्टि से उचित कदम भी मान रहे हैं। आईएएस आलोक सिंह के नाम जुड़ा नया प्रशासनिक रिकॉर्ड हालिया प्रशासनिक फेरबदल में 2008 बैच के आईएएस अधिकारी आलोक सिंह को महानिरीक्षक पंजीयन के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कई मायनों में खास मानी जा रही है।बताया जाता है कि पिछले तीन से साढ़े तीन दशकों से इस महत्वपूर्ण पद पर मुख्यतः सीधी भर्ती वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की ही नियुक्ति होती रही है। आलोक सिंह संभवतः पहले प्रमोटी आईएएस अधिकारी हैं जिन्हें इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है। जानकार बताते हैं कि इससे पहले केवल स्वर्गीय मोती सिंह इस परंपरा से अलग अपवाद रहे थे और वे इस पद पर दो बार नियुक्त होने वाले दुर्लभ अधिकारियों में शामिल थे। ऐसे में आलोक सिंह की नियुक्ति प्रशासनिक हलकों में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। मुख्यमंत्री और अशोक वर्णवाल की मुलाकात के कई मायने हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के बीच हुई वन-टू-वन मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी हुई है।हालांकि मुलाकात में क्या बातचीत हुई इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि आगामी प्रशासनिक फेरबदल और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा हुई हो सकती है। 1991 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक वर्णवाल जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। माना जा रहा है कि सेवानिवृत्ति से पहले या उसके आसपास उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ऐसे में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पावर कॉरिडोर की चर्चा प्रदेश की नौकरशाही और राजनीति में इन चार घटनाओं ने नए संकेत दिए हैं। मंत्री-सचिव विवाद, वीआईपी प्रोटोकॉल पर उठे सवाल, प्रमोटी आईएएस की ऐतिहासिक नियुक्ति और मुख्यमंत्री की वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात—इन सभी घटनाओं पर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी रहेगी। recent visitors 34

शिवपुरी में किसान की पिटाई मामले ने तूल पकड़ा, जीतू पटवारी बोले- अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेंगे

शिवपुरी में किसान की पिटाई मामले ने तूल पकड़ा, जीतू पटवारी बोले- अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेंगे

The case of beating of a farmer in Shivpuri gained momentum, Jitu Patwari said – we will not tolerate atrocities. शिवपुरी। करैरा में खाद के टोकन के लिए लाइन में लगे किसान को नायब तहसीलदार द्वारा थप्पड़ मारने की घटना ने प्रदेश की सियायत को गर्मा दिया है। प्रदेश कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया है। उधर तहसीलदार कल्पना शर्मा ने कहा कि किसान व्यवस्था बिगाड़ रहा था। हंगामे के बाद वहां पहुंचे किसान कांग्रेस के नेता मान सिंह फौजी ने पीड़ित किसान की बात मोबाइल पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी से करवाई। पटवारी ने कहा कि किसानों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अब कलेक्टर से शिकायत कर नायब तहसीलदार पर कार्रवाई कराई जाएगी। जानकारी के अनुसार खाद वितरण केंद्र पर टोकन लेने के लिए किसानों की लाइन लगी थी। आरोप है कि इसी दौरान लाइन में धक्का-मुक्की के दौरान हाथरस गांव निवासी महेंद्र राजपूत को नायब तहसीलदार विजय त्यागी ने थप्पड़ मार दिया था। recent visitors 94

जब मंत्री ही अपराध के कटघरे में हों, तो न्याय किससे मांगे जनता?

जब मंत्री ही अपराध के कटघरे में हों, तो न्याय किससे मांगे जनता?

When the ministers themselves are in the dock for crime, then from whom should the public seek justice? भोपाल ! Shivraj government to ministers MP आई ताज़ा रिपोर्ट ने शिवराज सरकार की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के विश्लेषण ने साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार का मंत्रिमंडल स्वच्छ राजनीति का दावा करने के बावजूद विवादों और आपराधिक मामलों में गहराई तक उलझा हुआ है। प्रदेश की कैबिनेट में शामिल 31 मंत्रियों में से 12 मंत्री आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें से 3 मंत्री तो हत्या के प्रयास, महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार और भड़काऊ भाषण जैसे गंभीर आरोपों में घिरे हुए हैं। शेष 9 मंत्री भी हल्की धाराओं में ही सही, लेकिन कानून के शिकंजे में फंसे हुए हैं। सवाल यह है कि जब मंत्रिमंडल ही दागदार हो तो आम जनता किससे न्याय और सुरक्षा की उम्मीद करे? कैलाश विजयवर्गीय का मामला – सबसे चौंकाने वाला Shivraj government to ministers MP इस सूची में सबसे ऊपर नाम है भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का। उनके खिलाफ कुल 5 एफआईआर दर्ज हैं, जिनमें 6 गंभीर आईपीसी की धाराएँ और 14 अन्य धाराएँ शामिल हैं। इनमें साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, धार्मिक भावनाएँ भड़काने और भड़काऊ भाषण देने जैसे गंभीर आरोप हैं। अधिकतर मामले पश्चिम बंगाल की अदालतों में लंबित हैं। सवाल यह नहीं है कि अब तक आरोप तय क्यों नहीं हुए, बल्कि यह है कि ऐसे व्यक्ति को मंत्रिमंडल में बैठने का अधिकार आखिर कैसे दिया गया? लोकतंत्र का मज़ाक Shivraj government to ministers MPमध्यप्रदेश की शिवराज सरकार बार-बार सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति का दावा करती है, लेकिन ADR की रिपोर्ट ने इस दावे की पोल खोल दी है। जब सत्ता के गलियारों में बैठे लोग ही अपराध के मामलों में लिप्त हों, तो यह लोकतंत्र का मज़ाक है। जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल Shivraj government to ministers MPरिपोर्ट बताती है कि कुछ मंत्रियों पर महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार के गंभीर मामले दर्ज हैं। यह तब है, जब सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारों के सहारे खुद को महिलाओं की हितैषी बताती है। लेकिन हकीकत यह है कि जो नेता खुद कटघरे में खड़े हों, वे महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी कैसे दे सकते हैं? जनता की जिम्मेदारी Shivraj government to ministers MPयह मामला केवल सरकार की नाकामी का नहीं, बल्कि जनता की जिम्मेदारी का भी है। आखिरकार ये मंत्री चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचे और वहीं से कैबिनेट में शामिल किए गए। यदि हम जातीय, धार्मिक या भावनात्मक मुद्दों से ऊपर उठकर “स्वच्छ छवि” वाले उम्मीदवारों का चयन नहीं करेंगे, तो लोकतंत्र में ऐसे ही दागदार चेहरे सत्ता की कुर्सी तक पहुँचते रहेंगे। Read more: कर्ज़ का बोझ, विकास का खोखला वादा – 2020 से 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार ने जनता को दिया सिर्फ़ कर्ज़ का पहाड़ ADR की रिपोर्ट एक चेतावनी है। यह केवल आँकड़े नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गिरती साख का आईना है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को चाहिए कि वह ऐसे दागी चेहरों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाए और राजनीति को स्वच्छ बनाने का वास्तविक साहस दिखाए। वरना यह याद रखना होगा जब सत्ता अपराधियों से घिर जाती है, तो लोकतंत्र कमजोर होता है और जनता सबसे बड़ा नुकसान उठाती है। recent visitors 126

कर्ज़ का बोझ, विकास का खोखला वादा – 2020 से 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार ने जनता को दिया सिर्फ़ कर्ज़ का पहाड़

कर्ज़ का बोझ, विकास का खोखला वादा – 2020 से 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार ने जनता को दिया सिर्फ़ कर्ज़ का पहाड़

MP government Debt burden, empty promise of development – ​​from 2020 to 2025, the Madhya Pradesh government gave the people only a mountain of debt भोपाल ! MP government Debt burden पिछले पाँच सालों (2020 से 2025) में मध्य प्रदेश सरकार ने इतना कर्ज़ लिया कि अब हर नागरिक के सिर पर इसका बोझ साफ दिखाई देने लगा है। आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2025 तक प्रदेश पर ₹4.21 लाख करोड़ का कर्ज़ चढ़ चुका है, जो जल्द ही ₹4.35 लाख करोड़ को पार कर जाएगा। सवाल ये है कि इतना पैसा आखिर गया कहां? पांच साल… 2020 से 2025 तक। मध्य प्रदेश सरकार ने जनता के नाम पर कर्ज़ पर कर्ज़ लिया। आंकड़े गवाह हैं — MP government Debt burden अब जनता पूछ रही है — इतना पैसा आखिर गया कहां? MP government Debt burden सड़कें टूटी, स्कूल जर्जर, अस्पताल बेहालअगर कर्ज़ विकास के नाम पर लिया गया तो क्यों आज भी गाँवों में बच्चे खंडहरनुमा स्कूलों में पढ़ रहे हैं? क्यों सड़कें अधूरी और अस्पतालों में दवाई नदारद है? 370 योजनाएं ठंडे बस्ते में क्यों?जब शिक्षा, कृषि और बुनियादी योजनाएं बंद करनी थीं तो फिर कर्ज़ का ढोल क्यों पीटा गया? गैर-जरूरी खर्च किसके लिए?सरकार ने जेट विमान, नई गाड़ियाँ और आलीशान मरम्मत पर करोड़ों लुटाए। क्या जनता की गाढ़ी कमाई का कर्ज़ नेताओं की ऐशो-आराम में डुबोने के लिए था? “लाड़ली बहना” और कर्ज़ का गणितहर महीने योजना पर ₹1,500 करोड़ से ज्यादा खर्च। क्या आने वाली पीढ़ियों को गिरवी रखकर वोट खरीदना विकास कहलाता है? कटघरे में सरकार MP government Debt burden यह साफ है कि सरकार ने 2020 से 2025 तक कर्ज़ की राजनीति की है, विकास की नहीं। और अब जनता के पास यही सवाल है — ये कर्ज़ हमारा भविष्य सुधारने के लिए था, या नेताओं के वर्तमान को चमकाने के लिए? recent visitors 243

स्कूलों में शारीरिक दंड पर पूर्ण प्रतिबंध,बच्चों को मारने पर शिक्षकों पर होगी कार्रवाई: एमपी सरकार का बड़ा फैसला 

Teachers will be punished for beating children: MP government’s big decision, complete ban on corporal punishment in schools भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में अब छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट या किसी भी तरह की शारीरिक सजा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। टीचर्स और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई भी होगी। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चिट्ठी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए ऐसी हालत में कार्रवाई के लिए कहा है। साथ ही ऐसे मामलों की रिपोर्ट भी देने के लिए कहा गया है। लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रवीन्द्र कुमार सिंह की ओर से शारीरिक दंड (कॉर्पोरल पनिशमेंट) पर पूर्ण प्रतिबंध और कड़ी कार्रवाई संबंधी निर्देश मंगलवार को जारी किए गए हैं। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इसको लेकर 4 फरवरी 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखा था। आदेश के बाद अब इस मामले में सख्त एक्शन के निर्देश दिए जा रहे हैं। अपर संचालक ने कहा है कि मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 की धारा 17 (1) में शारीरिक मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव पूरी तरह प्रतिबंधित है। साथ ही धारा 17 (2) के तहत ऐसा करना दंडनीय अपराध है। भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत शारीरिक दंड भी प्रतिबंधित है। इसलिए प्रदेश के सभी जिलों में संचालित सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों को शारीरिक दंड देने की घटनाओं की त्वरित पहचान करने और इस तरह की स्थितियों पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को ये निर्देश भी दिए गए हैं कि किसी स्कूल या शिक्षक द्वारा शारीरिक दंड देने के मामले में तत्काल एक्शन लेकर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। इस तरह का एक मामला दो माह पहले भोपाल में हो चुका है। यहां सेंट माइकल स्कूल के टीचर ने 11वीं के छात्र को इतना पीटा था कि उसके दोनों पैरों की चमड़ी निकल गई थी। छात्र का कहना था कि टीचर ने उसके पैरों पर फुटबॉल के शूट की तरह मारा। इसके बाद छात्र के परिजनों ने जिला शिक्षा अधिकारी को इसकी शिकायत की थी जिस पर जांच समिति बनाई गई थी। recent visitors 297