सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध

सीधी में रातों-रात आदिवासी परिवार बेघर, कमलेश्वर पटेल ने जताया विरोध

Tribal family became homeless overnight in Sidhi, Kamleshwar Patel protested सीधी । Tribal family became homeless जिले के डैनीहा गांव में बुधवार-गुरुवार की रात प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से हाहाकार मच गया। इस कार्रवाई में लगभग 100 आदिवासी परिवारों के घर जमींदोज कर दिए गए, जिनमें ज़ालिम कोल, लखन कोल, मोहन कोल और मसाली कोल जैसे परिवार शामिल हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें अपना सामान निकालने तक का वक्त नहीं दिया। पीड़ित परिवारों का दावा है कि वे पिछले 80 वर्षों से इस जमीन पर रह रहे थे। कार्रवाई के बाद अधिकांश परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हो गए, जबकि कुछ को अस्थायी आश्रय स्थल ‘रंग बसेरा’ में शरण दी गई है। कोर्ट के आदेश पर चली कार्रवाई Tribal family became homelessप्रशासन के मुताबिक यह कार्रवाई सिविल कोर्ट के आदेश पर की गई थी। जानकारी के अनुसार, मृगेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने करीब 20 वर्ष पहले अतिक्रमण हटाने की याचिका दायर की थी, जिस पर 2020 में निर्णय आया था। हाल ही में कोर्ट ने फिर से प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, जिसके बाद राजस्व विभाग की टीम ने यह कार्रवाई अंजाम दी। कमलेश्वर पटेल पहुंचे मौके पर, बताया अमानवीय Tribal family became homelessघटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल गुरुवार-शुक्रवार की रात लगभग 12 बजे मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और सीधी कलेक्टर को फोन कर पीड़ितों की व्यथा सुनाई।पटेल ने इस कार्रवाई को “अन्यायपूर्ण और अमानवीय” करार देते हुए कहा, Read More: ऑपरेशन सिंदूर”: भाजपा का नया नाटक या संस्कृति के नाम पर स्त्री अस्मिता का अपमान? “अगर अतिक्रमण हटाना आवश्यक था, तो पहले इन आदिवासी परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी।” कलेक्टर बोले – पहले से जानकारी नहीं थीसीधी कलेक्टर ने सफाई दी कि उन्हें इस कार्रवाई की पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा और प्रभावितों को राहत पहुंचाई जाएगी। recent visitors 118

खेलों में नई क्रांति: सरकार ने दोगुना किया खेल बजट, विधानसभा स्तर पर बनेंगे अत्याधुनिक मैदान – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

New revolution in sports: Government has doubled the sports budget, ultra-modern grounds will be built at Vidhan Sabha level – Chief Minister Dr. Mohan Yadav भोपाल ! New revolution in sports मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने क्षीरसागर स्टेडियम, उज्जैन में आयोजित अखिल भारतीय फिरोजिया ट्रॉफी 2025 के समापन समारोह में खेलों के क्षेत्र में सरकार की दूरदर्शी नीति की घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खेल बजट को दोगुना कर दिया है। साथ ही, ओलंपिक पदक विजेताओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को 50 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए करने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अत्याधुनिक खेल मैदानों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जहाँ खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल अब केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शिक्षा नीति का एक अभिन्न हिस्सा होंगे। खेल प्रशिक्षकों और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी। खेलों से राष्ट्रीय गौरव का निर्माण New revolution in sports मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा, “खेल केवल शरीर को नहीं, बल्कि चरित्र को भी गढ़ते हैं। प्राचीन भारत में खेलों को पुरुषार्थ का प्रतीक माना गया, और आज हम उसी भावना को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर पुनर्जीवित कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ हॉकी ग्राउंड जल्द ही बनकर तैयार होगा, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को वैश्विक मंच तक पहुँचने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं समापन समारोह में इंदौर और ओडिशा की टीमों के बीच हुए फाइनल मैच के अवसर पर मुख्यमंत्री ने दोनों टीमों को खेल भावना से खेलने की प्रेरणा दी और आशा जताई कि उज्जैन सहित पूरे प्रदेश से ऐसे खिलाड़ी उभरें जो रणजी ट्रॉफी खेलें, राष्ट्रीय टीम में चयनित हों और विश्व कप में भारत का नाम रोशन करें। फिरोजिया ट्रॉफी: खेल और परंपरा का संगम New revolution in sports इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का आयोजन 5 से 11 मई तक क्षीरसागर मैदान में रात्रिकालीन क्रिकेट मैचों के रूप में किया गया। यह ट्रॉफी सांसद अनिल फिरोजिया द्वारा अपने पिता, स्वर्गीय भूरेलाल जी फिरोजिया की स्मृति में पिछले 20 वर्षों से कराई जा रही है। समापन समारोह में सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, जनप्रतिनिधि संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी और खेल प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ट्रॉफी का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने उज्जैन में हो रहे औद्योगिक निवेश और विकास के कार्यों का भी उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और देश की सुरक्षा में भारतीय सेना के अद्वितीय योगदान का स्मरण किया। recent visitors 234

शासकीय ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय :शिक्षकों की घोर लापरवाही से 93 छात्र विद्यालय से बाहर निकलने हुए मजबूर

Government Gyanodaya Residential School: Due to gross negligence of teachers, 93 students were forced to leave the school जबलपुर । Government Gyanodaya Residential School शारदा नगर रांझी जबलपुर में मध्य प्रदेश शासन के अनुसूचित जाति विभाग द्वारा संचालित संभाग स्तर का विशेष विद्यालय है जिसमें शैक्षणिक एवं व्यवस्था हेतु केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का बजट आवंटित किया जाता है परंतु हाल ही में जारी हुए सत्र 2024 – 25 के विद्यालय के परीक्षा परिणाम पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि पूरे विद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था चौपट हो चुकी है और सीबीएसई पाठ्यक्रम से संचालित इस विद्यालय में A1 और A2 में पांच प्रतिशत बच्चे भी नहीं हैं । जबकि C1 C2 , D तथा E में 40% से ज्यादा छात्र आए हैं जिससे पता चलता है कि विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति अत्यंत जर्जर है ।कक्षा छठवीं ब में 39 छात्रों में से 22 छात्रों को विद्यालय से निकाला जा रहा है। ज्ञानोदय विद्यालय को प्राप्त है विशेष विद्यालय का दर्जाअनुसूचित जाति विभाग द्वारा संचालित अनुसूचित जाति एवं अन्य वर्ग के बीपीएल कार्ड धारक छात्र-छात्राओं के लिए यह संभाग स्तर का विशेष आवासीय विद्यालय है, इस विद्यालय में करोड़ों का बजट आवंटित होता है छात्रों के लिए रहने , खाने एवं पढ़ने की उच्च स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश हैं एवं प्रत्येक छात्र का प्रवेश कठिन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है , प्रवेश उपरांत छात्रों को निशुल्क रहने, खाने एवं पढ़ने की व्यवस्था शासन द्वारा सुनिश्चित की जाती है इस कारण से इस विद्यालय में प्रदेश के विभिन्न जिलों से उत्कृष्ट छात्र प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर इस विद्यालय में आते हैं, एवं प्रतिवर्ष न्यूनतम 60% परीक्षा परिणाम लाना होता है, 60% परीक्षा परिणाम न आने पर छात्रों को विद्यालय से बाहर निकाल दिया जाता है।सवाल यह है कि शिक्षकों के द्वारा पढ़ने में की गई घोर लापरवाही की सजा नन्हे मुन्ने छात्र-छात्राओं को भुगतान पड़ती है एवं इसका विपरीत परिणाम उनके भविष्य पर पड़ता है, Read More: मध्यप्रदेश में चार दिन रहेगा मौसम का कहर: बारिश, ओले और 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी आंधियाँ कक्षा नौवीं में 60% से कम प्राप्तांक से उत्तीर्ण वाले छात्रों को कहीं भी नहीं मिलता प्रवेश , हो जाते हैं शाला त्यागीइस विद्यालय में विगत कई वर्षों से कक्षा नौवीं में प्रवेशित एवं 33% से लेकर 59.9% तक उत्तीर्ण छात्राओं को विद्यालय से बाहर करने के नियम हैं , इस नियम के कारण 60% से कम प्राप्तांक से उत्तीर्ण कक्षा 9 के छात्रों को अन्य विद्यालयों में कक्षा दसवीं से सीधे प्रवेश नहीं दिया जाता जिससे हजारों छात्रों का भविष्य चौपट हो चुका है एवं वे शाला त्यागी होकर शिक्षा छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं । शिक्षकों के कार्यों का नहीं होता मूल्यांकनइस विशेष विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों के कार्यों का कोई मूल्यांकन नहीं होता एवं वरिष्ठ कार्यालय के द्वारा खराब परिणाम वाले शिक्षकों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं करने से साल दर साल विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है। विद्यालय में नहीं होती कभी पालक शिक्षक संघ की बैठक छात्र की शैक्षणिक स्थिति से पालकों को नहीं कराया जाता अवगतमध्य प्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग एवं अनुसूचित जाति व जनजाति विभाग द्वारा संचालित समस्त विद्यालयों में नियमित रूप से पालक शिक्षक संघ की बैठक आयोजित करने एवं बालकों को छात्रों की उपस्थित, शैक्षणिक योग्यता व कार्य व्यवहार से अवगत कराए जाने के निर्देश हैं परंतु इस विद्यालय में कभी भी पालक शिक्षक संघ की बैठक आयोजित नहीं की जाती जिससे पालकों को अपने बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का पता नहीं चलता है । दूर दराज के जिलों से पढ़ने आते हैं वंचित एवं कमजोर वर्ग के छात्रGovernment Gyanodaya Residential School में सिवनी, बालाघाट , छिंदवाड़ा, मंडला , डिंडोरी, उमरिया , कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर ,दमोह सहित आसपास के अनेक जिलों से छात्र पढ़ने आते हैं । विद्यालय में पूर्व में चार छात्रों की हो चुकी है मौतज्ञानोदय आवासीय विद्यालय में छात्रों को उचित गुणवत्ता युक्त भोजन न कराने , उनका ठीक से देखभाल न करने , स्वास्थ्य परीक्षण न करने एवं लापरवाही पूर्वक रखने के कारण चार छात्रों की विगत वर्षों में मौत हो चुकी है इसके बाद भी विद्यालय प्रबंधन एवं विभाग को किसी प्रकार का कोई फर्क नहीं पड़ा। शिक्षकों के कार्य की गलत जानकारी प्रेषित कर वरिष्ठ कार्यालय को किया जाता है गुमराहGovernment Gyanodaya Residential School द्वारा प्रतिवर्ष परीक्षा परिणाम का शिक्षकवार गोसवारा तैयार करते समय कुल उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत बताया जाता है जबकि यह जानकारी छुपा ली जाती है कि इस कक्षा से 60% से कम परिणाम आने के कारण इतने छात्रों को विद्यालय से निष्कासित किया जा रहा है । सालों से एक ही स्थान पर जमे हैं कई शिक्षक , पढ़ाने में नहीं लेते हैं बिल्कुल भी रुचिइस विद्यालय में पदस्थ अनेक शिक्षक विगत कई वर्षों से यहां पदस्थ हैं और प्रतिवर्ष खराब परिणाम देने के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है सवाल यह है कि ऐसे लापरवाह शिक्षकों को क्यों बचाया जा रहा है एवं इनका स्थानांतरण दूर दराज के स्कूलों में क्यों नहीं किया गया ? आदिवासी बहुजन अधिकार कल्याण संघ अबाक्स के प्रदेश अध्यक्ष देवेश चौधरी ने कहा कि संभाग के एक मात्र अनुसूचित जाति के विशेष विद्यालय में ऐसी घोर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए ।अनुसूचित जाति जनजाति छात्र संघ ने अत्यंत खराब परीक्षा परिणाम एवं बदतर शैक्षणिक व्यवस्था के लिए लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग की है, संघ के प्रदेश अध्यक्ष शुभम चौधरी ने बताया कि इस विद्यालय से लापरवाही की शिकायतें लगातार प्राप्त होती रहती हैं फिर भी विद्यालय प्रबंधन एवं वरिष्ठ कार्यालय इन्हें बचाता है। इनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए। सवाल यह है कि recent visitors 128

मध्यप्रदेश में चार दिन रहेगा मौसम का कहर: बारिश, ओले और 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी आंधियाँ

Weather havoc will prevail in Madhya Pradesh for four days: Rain, hail and storms will blow at the speed of 60 km/hour भोपाल। मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ली है। अगले चार दिन यानी 8 मई तक पूरे प्रदेश में आंधी, बारिश और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। रविवार को इंदौर में पौने 3 इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि भोपाल, उज्जैन, देवास और खंडवा समेत कई जिलों में तेज बारिश के साथ ओले गिरे। कहाँ-कहाँ होगा असर? मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश के मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं। वहीं ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, श्योपुर और शिवपुरी में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। राज्यभर में बदला मौसम भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रतलाम, खरगोन, देवास, खंडवा, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, रीवा, सतना, सीधी जैसे लगभग सभी जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं और बारिश का दौर जारी रहेगा। कई जगह ओले गिरने की भी आशंका है। क्यों बदला मौसम? सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. अरुण शर्मा के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ लाइन के कारण यह मौसमी बदलाव आया है। रविवार को जो हालात बने, वैसा ही मौसम सोमवार और अगले तीन दिन भी बना रहेगा। गर्मी से राहत, लेकिन ज्यादा दिन नहीं रविवार को इंदौर में 70 मिमी बारिश हुई। भोपाल में भी ओले गिरे। इस बारिश के चलते अधिकतम तापमान में 3-4 डिग्री तक की गिरावट आई है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि मई का महीना प्रदेश में सबसे गर्म रहता है और आने वाले दिनों में पारा 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। किन जिलों में पड़ेगी सबसे ज्यादा गर्मी? ग्वालियर, छतरपुर, टीकमगढ़, भिंड, दतिया, खंडवा, बड़वानी, मुरैना, शिवपुरी और विदिशा जैसे जिलों में भीषण गर्मी पड़ने का अनुमान है। खजुराहो और पृथ्वीपुर जैसे इलाकों में पारा 48 डिग्री तक पहुंच सकता है। सावधानी जरूरी आगामी दिनों में खराब मौसम को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। किसान भी ओलावृष्टि और तेज हवाओं से अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं। recent visitors 126

चिरोला गांव में नरवाई की आग से मचा तांडव: 12 घर खाक, महिला की दर्दनाक मौत, विधायक ने किया दौरा

Fire caused havoc in Chirola village due to stubble fire: 12 houses destroyed, woman died a painful death, MLA visited छतरपुर ! जिले की घुवारा तहसील के ग्राम पंचायत रामटौरिया से लगे चिरोला और छुल्ला गांव में शनिवार को नरवाई की आग ने भीषण तबाही मचाई। तेज़ आंधी के साथ खेतों में लगी आग ने देखते ही देखते रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। चिरोला गांव में आग से 12 घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए, वहीं एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई और कई लोग झुलसकर घायल हो गए। https://www.facebook.com/100095277861256/posts/691908000661789/?mibextid=rS40aB7S9Ucbxw6v ग्रामीणों के अनुसार, उनके घरों में रखी पूरी गृहस्थी – गेहूं, भूसा, कपड़े, पैसे, अनाज और अन्य जरूरी सामग्री – सब कुछ जलकर राख हो गया। कुछ मवेशी भी इस आग की चपेट में आकर मारे गए। गांव का दृश्य किसी लंका-दहन से कम नहीं रहा। जैसे ही क्षेत्रीय विधायक सुश्री रामसिया भारती को घटना की जानकारी मिली, वे तत्काल मौके पर पहुंचीं। उन्होंने पीड़ितों से मुलाकात की, शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना दी और अधिकारियों से बात कर जरूरी मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। विधायक ने प्रशासन से त्वरित राहत पहुंचाने की भी मांग की। पीड़ितों की पीड़ा बयान करते हुए एक ग्रामीण ने कहा, “साहब, मैं कुछ नहीं कर पाया। सब कुछ मेरी आंखों के सामने जलता रहा।” यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि हर साल नरवाई जलाने से होने वाली इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे। recent visitors 270

मध्यप्रदेश में मंजूरी के 4 दिन बाद तबादला नीति जारी: आधी रात के बाद आदेश; जिनकी परफॉर्मेंस खराब, उनको पहले बदलेंगे

Transfer policy issued in Madhya Pradesh 4 days after approval: Order after midnight; Those with poor performance will be replaced first 29 अप्रैल को मध्यप्रदेश कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन आदेश जारी नहीं किए गए थे। भोपाल। मध्यप्रदेश में कैबिनेट की मंजूरी के चार दिन बाद आधी रात को सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। एक अप्रैल 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच जिन अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया है, उनका ट्रांसफर मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा। मंगलवार 29 अप्रैल को मोहन कैबिनेट ने तबादला नीति को मंजूरी दे दी थी, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके आदेश जारी नहीं किए थे। शनिवार और रविवार की रात 12.05 बजे राज्य सरकार ने तबादला नीति जारी कर दी है। इसमें राज्य एवं जिला स्तर पर तबादले के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नीति जारी की गई है. जिसका पालन सभी विभागों को करना होगा। प्रदेश में 6 लाख 6 हजार नियमित कर्मचारी हैं। नई तबादला नीति में 10% का तबादला होना तय माना जा रहा है। ऐसे में 30 मई तक 60 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं। तबादला नीति की 3 बड़ी बातें… पुलिस तबादला बोर्ड के फैसले पर जिलों में पोस्टिंग तबादला नीति में कहा गया है कि गृह विभाग के अंतर्गत उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले गृह विभाग द्वारा गठित पुलिस स्थापना बोर्ड ‌के आधार पर होंगे। तबादला बोर्ड द्वारा जिले में पदस्थापना का निर्णय लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ‌द्वारा प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद पदस्थापना की जाएगी। उप पुलिस अधीक्षक और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभागीय मंत्री के अनुमोदन बाद सीएम समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर किए जाएंगे। कमजोर परफार्मेंस वालों को पहले हटाएंगे तबादला नीति में प्रावधान किया है कि प्रशासनिक आधार पर किए जाने वाले तबादलों में उन शासकीय सेवकों को पहले बदला जा सकेगा, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया है। यानी उनका परफार्मेंस कमजोर रहा हो। यह अनिवार्य नहीं है कि 3 साल पूर्ण होने पर ही तबादला किया जाए। खुद के खर्च पर ऐसे होंगे ट्रांसफर जो कर्मचारी-अधिकारी खुद के खर्च पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं या परस्पर ट्रांसफर चाहते हैं, उनके आवेदन ऑनलाइन या कार्यालय प्रमुख ‌द्वारा सत्यापित आवेदन के रूप में पेश किए जाएंगे। स्वयं के व्यय पर रिक्त परस्पर किए गए स्थानांतरण तथा प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण संबंधी आदेश अलग-अलग जारी किए जाएंगे। स्वेच्छा से स्थानांतरण संबंधी आवेदन में उन शासकीय सेवकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण किया गया हो। तबादला नीति में ये प्रावधान भी खास हैं… जो अधिकारी या कर्मचारी एक साल या उससे कम समय में रिटायर हो रहे हैं, उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी एक साथ ट्रांसफर का आवेदन देते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जा सकेगा। लेकिन नियुक्ति की जगह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर तय होगी। ऐसे कर्मचारी जिन्हें गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी खराब होने के कारण डायलिसिस या हार्ट सर्जरी की वजह से रेगुलर जांच कराना जरूरी है, उनका जहां ट्रांसफर होता है वहां ये सुविधा नहीं है तो मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर उनकी चाही गई जगह पर ट्रांसफर हो सकेगा। जो कर्मचारी 40% या इससे अधिक दिव्यांग कैटेगरी में हैं, उनके ट्रांसफर नहीं होंगे। वे चाहें तो खुद से ट्रांसफर ले सकेंगे। सभी तरह के अटैचमेंट खत्म होंगे ट्रांसफर पॉलिसी में कहा है कि सभी प्रकार के अटैचमेंट खत्म किए जाना है। साथ ही तबादले से रिक्त होने वाले पद की भरपाई उसी पद या समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना से की जाएगी। नियमित अधिकारी या कर्मचारी का तबादला कर उस पद का चार्ज जूनियर अधिकारी कर्मचारी को नहीं दिया जाएगा। जितने भी तबादले होंगे उसकी जानकारी विभाग प्रमुखों को जीएडी को देना अनिवार्य होगी। जिसका तबादला हो जाएगा, उस शासकीय सेवक का अवकाश नई पदस्थापना वाले कार्यालय में जॉइन करने के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा। सभी तबादला आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष के ई-ऑफिस माड्यूल से ही किए जाएंगे। 30 मई के बाद की गई एंट्री को शून्य माना जाएगा। ऐसे आदेशों का पालन नहीं होगा। कर्मचारी संगठन पदाधिकारियों को इस आधार पर मिलेगी छूट शासन से पत्राचार करने की मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की प्रदेश, संभाग, जिला, तहसील, विकासखंड शाखा के पदाधिकारियों जैसे अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष को पद पर नियुक्ति के बाद स्थानांतरण से दो पदावधि के लिए यानी 4 साल तक के लिए छूट रहेगी। यह सुविधा उसके पूरे सेवाकाल में दो पदावधि के लिए मिलेगी। चार साल से अधिक समय होने पर प्रशासकीय आवश्यकता के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों को भी स्थानांतरित किया जा सकेगा। संगठन के पदों में नियुक्ति की पूर्व सूचना के संबंध में सक्षम अधिकारी से संतुष्टि का आधार लिया जाएगा। काॅलेज से अतिशेष शिक्षकों को हटाएंगे तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, उच्च शिक्षा विभाग के जिन संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों में विषयवार तय संख्या से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं, वहां से अतिशेष शिक्षकों को दूसरी जगह पदस्थ किया जाएगा। ऐसा करने से जूनियर टीचर को अतिशेष कर्मचारी होने की स्थिति में सबसे पहले स्थानांतरित किया जाएगा। मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग शिक्षकों और जिनका रिटायरमेंट एक साल के कम है, उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। स्कूल शिक्षा में 6 से 16 मई तक लेंगे आवेदन उधर, स्कूल शिक्षा विभाग की तबादलों के लिए जारी गाइडलाइन में कहा है कि स्वैच्छिक तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन 6 मई से 16 मई तक किए जा सकेंगे। इस पर आदेश जनरेट करने का काम 20 मई तक होगा। ऐसे अतिशेष शिक्षक जिन्होंने स्वैच्छिक स्थानांतरण का विकल्प नहीं चुना है या जिन्हें विकल्प नहीं मिल सका है उनके तबादले प्रशासकीय आधार पर 30 मई तक होंगे। एक जून तक तबादला वाले शिक्षकों को जॉइन करना होगा। recent visitors 115

आबकारी विभाग में वसूली करने वाला अधिकारी बना ‘अपराधी ,ईडी की जांच में हुआ खुलासा

The excise department’s recovery officer became a ‘criminal’, revealed in ED investigation भोपाल ! मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में पता चला है कि जिस अधिकारी ने 2015 के 38 करोड़ रुपये के फर्जी चालान घोटाले में से 23 करोड़ रुपये की वसूली विभाग को कराई थी, उसी को विभाग ने ‘अपराधी’ घोषित कर दिया है। वहीं, पिछले 10 सालों में विभाग का कोई अन्य अधिकारी 23 रुपये भी वसूल नहीं कर सका है.साल 2015 में उजागर हुए फर्जी चालान घोटाले में शराब ठेकेदार बैंक और ट्रेजरी के साथ-साथ विभाग को 10 हजार रुपये का चालान जमा करते थे, लेकिन उसमें दो-तीन शून्य बढ़ाकर लाखों रुपये दिखाते थे। इस गोरखधंधे में बैंककर्मी, आबकारी विभाग के बाबू और ट्रेजरी अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई थी.तत्कालीन आबकारी अधिकारी संजीव दुबे ने इस घोटाले का खुलासा करते हुए 11 ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और उनसे 23 करोड़ रुपये की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कराए थे। लेकिन अब उसी अधिकारी को विभाग ने दोषी ठहराते हुए इंदौर से हटाकर मुख्यालय में अटैच कर दिया है। जबकि इस दौरान पदस्थ रहे अन्य अकाउंटेंट, एडीओ सहित कई अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई है.ईडी की हालिया छापेमारी में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी को बड़ी संख्या में शराब ठेकेदारों द्वारा नकद रकम जमा कराने के सबूत मिले हैं। इस पूरे मामले में कई आबकारी अधिकारियों और शराब ठेकेदारों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है। दिलचस्प बात यह है कि जिस संजीव दुबे को विभाग ने दोषी माना, उसके खिलाफ ईडी को कोई भी सबूत नहीं मिला, क्योंकि उन्होंने तो घोटाले का पता चलने पर तुरंत वसूली कर विभाग के खाते में जमा कराई थी। वहीं, इंदौर में लंबे समय तक पदस्थ रहे अन्य कई अधिकारी विभाग के खाते में एक रुपया भी जमा नहीं करा सके, जिससे शराब ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ की आशंका गहरा गई है. recent visitors 91