फिल्म “छावा” का विशेष शो हुआ ओपन थियेटर में

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज 17वीं सदी में शासक रहे छत्रपति संभाजीराव महाराज के जीवन और संघर्ष पर बनी फिल्म "छावा" देखी। लक्ष्मण उतेकर द्वारा निर्देशित इस फिल्म को मध्यप्रदेश सरकार ने टैक्स फ्री भी किया है। अशोका लेक व्यू परिसर में ओपन थियेटर में हुए फिल्म के विशेष प्रदर्शन को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अलावा विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री परिषद के सदस्यों और अनेक जन प्रतिनिधियों ने देखा और फिल्म की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह राष्ट्र प्रेम का संदेश देने वाली प्रेरक फिल्म है। मध्यप्रदेश सरकार ऐसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी भारत के गौरवशाली इतिहास से अवगत करवाने वाली फिल्मों को प्रोत्साहित करेगी। राज्य सरकार भारत के वीर शासकों और देशभक्तों के संघर्ष की गाथा को प्रस्तुत करने वाले सिनेमा को आगे बढ़ाने में पूर्ण सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज जितने साहसी और वीर थे वैसे ही उनके सुपुत्र छत्रपति संभाजीराव महाराज भी थे। वे ऐसे शासक थे जिन्होंने देश के लिए राष्ट्र प्रेम का अदभुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा 300 वर्ष से अधिक पुराने दौर को सिनेमा के परदे पर जीवंत किया गया है। फिल्म के निर्माता निर्देशक और कलाकार बधाई के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज विश्व में भी काफी उथल-पुथल है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत अपनी विरासत और संस्कृति के संरक्षण के साथ विकास की ओर बढ़ रहा है। निश्चित ही ऐसी फिल्म जनप्रतिनिधियों के साथ देखना मेरे लिए एक सुखद संयोग है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छत्रपति संभाजी महाराज की वीरता पर आधारित एक काव्य रचना भी पढ़कर सुनाई।   recent visitors 31

मुख्यमंत्री ने पेयजल प्रबंधों की जानकारी लेकर दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्रीष्मकाल के दृष्टिगत प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के लिए पर्याप्त पेयजल प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से सार्वजनिक प्याऊ स्थापित कर राहगीरों के लिए भी पीने के पानी का प्रबंध किया जाए। शहरों में प्रत्येक मोहल्ले में पेयजल की उपलब्धता, पानी की टंकियों की स्वच्छता और व्यवस्थित पेयजल वितरण जैसे कार्य सुचारू रूप से सम्पन्न हों। ग्रामों में नल-जल योजनाओं के क्रियान्वयन से ग्रामीण आबादी को लाभान्वित किया जाए। हर घर में टोंटी से जल पहुंचाने के कार्य पूर्ण किए जाएं। जिन क्षेत्रों में पेयजल की समस्या है, वहां लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, स्थानीय निकाय मिलकर नागरिकों के लिए समाधान की कार्यवाही करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई एक बैठक में पेयजल प्रबंधों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्रीमती संपतिया उइके, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ. राजेश राजौरा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में धरती आबा उत्कर्ष अभियान में अन्य विभागों के सहयोग से पेयजल प्रबंध के कार्य भी सम्पन्न किए जाएं। अन्य ग्रामों में एकल ग्राम नल-जल योजना और जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल घोषित ग्रामों में पेयजल की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। पेयजल प्रदाय के साथ ही स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों का भी संचालन किया जाए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और कृषि विभाग के अमले का सहयोग भी पेयजल प्रदाय में प्राप्त किया जाए। पंचायतों के पदाधिकारी और शहरों में नगरीय निकायों के अमले द्वारा पेयजल प्रदाय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेयजल के साथ स्वच्छता के कायों को पूर्ण कर प्रदेश को, देश में मॉडल बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा जल संवर्धन अभियान में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सक्रिय भूमिका की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अनुपयोगी हैंडपम्पों को उपयोगी बनाने के लिए रिचार्ज करने की योजना का क्रियान्वयन भी प्रदेश में किया जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के प्रारंभ होने से लेकर अब तक 62 लाख 71 हजार 124 कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। यह प्रदेश के कुल घरों एक करोड़ 11 लाख 80 हजार 901 का 63.81 प्रतिशत है। दिनांक 16 मार्च 2025 की स्थिति में प्रदेश के 76 लाख 24 हजार 275 घरों में नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं, यह उपलब्धि 68.19 प्रतिशत है। प्रदेश में 147 समूह नल जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से 23 हजार 164 ग्राम और 27 हजार 990 ग्राम, एकल ग्राम नल जल योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपम्पों का संधारण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नल जल योजनाओं का संचालन संधारण संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा किया जा रहा है। प्रदेश में 5 लाख 62 हजार 776 हैंडपम्प पेयजल प्रदाय में सहयोगी हैं।   recent visitors 33

सीएम मोहन यादव ने दिए संकेत, प्रदेश में 9 साल बाद होंगे कर्मचारियों के प्रमोशन

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 14 मार्च को विधानसभा में ये बयान दिया था। इसके साथ ही सीएम ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ होने वाला है। दरअसल, मध्यप्रदेश में पिछले 9 साल से कर्मचारी-अधिकारियों के प्रमोशन नहीं हुए हैं। इस दौरान 1 लाख से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो चुके हैं। मंत्रालय सूत्र बताते हैं कि सरकार ने प्रमोशन के लिए तीन क्राइटेरिया तय किए हैं। ये भी तय किया है कि जो भी प्रमोशन होंगे, वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन रहेंगे। विधानसभा में मुख्यमंत्री का बड़ा बयान विधानसभा में मुख्यमंत्री ने कहा, "हम किसी भी विभाग में पद खाली नहीं रहने देंगे। विपक्ष थोड़ी मदद करेगा तो हम प्रमोशन पर भी ठीक रास्ते पर जा रहे हैं। हम सभी वर्गों के जो प्रमोशन अटके हैं, उनका समाधान खोज रहे हैं, ताकि नीचे के रिक्त पद भी भरे जा सकें। यह काम हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ करेगी।" 9 साल से अटके हैं प्रमोशन मप्र में प्रमोशन प्रक्रिया पिछले 9 साल से रुकी हुई है। इस दौरान करीब 1 लाख से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो चुके हैं। निचले स्तर से लेकर वरिष्ठ पदों तक पदोन्नति की राह में कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं बनी हुई हैं। इससे न सिर्फ कर्मचारियों में असंतोष है बल्कि कई विभागों में रिक्तियों के कारण कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। आखिर क्यों अटके थे प्रमोशन? दरअसल, पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित था। कोर्ट के निर्देशों और विभिन्न याचिकाओं के चलते सरकार प्रमोशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पाई। इस कानूनी पेच के चलते पिछले 9 वर्षों से कोई भी विभाग प्रमोशन नहीं कर सका। सरकार ने निकाला समाधान सूत्रों के अनुसार, सरकार ने प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर तीन क्राइटेरिया तय कर लिए हैं। पहला, प्रमोशन प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन होगी। दूसरा, प्रक्रिया में सभी संवर्गों का संतुलन रखा जाएगा। तीसरा, विभागवार रिक्तियों और पात्रता के अनुसार चरणबद्ध ढंग से प्रमोशन किए जाएंगे। मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्द ही विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकती है, ताकि सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का पालन करते हुए प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की जा सके। कर्मचारियों में उम्मीद मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों में एक बार फिर आशा जगी है। कर्मचारी संगठन भी सरकार के रुख का स्वागत कर रहे हैं और जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिए जाने की अपेक्षा कर रहे हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद? साल 2002 में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण का प्रावधान करते हुए प्रमोशन नियम बनाए। इसके बाद आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलने लगा, लेकिन अनारक्षित वर्ग के कर्मचारियों में असंतोष पनपने लगा। मामला तब गंभीर हो गया जब बड़ी संख्या में अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी प्रमोशन से वंचित रह गए और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि प्रमोशन में आरक्षण का लाभ सिर्फ एक बार मिलना चाहिए। हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की रोक इन तर्कों के आधार पर मप्र हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002 को खारिज कर दिया। सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए प्रमोशन पर रोक लगा दी। इसके बाद से मप्र में सभी विभागों में प्रमोशन ठप हो गए। राजनीतिक गलियारों में उठा बवाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीति में भी गर्माहट आ गई। 12 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी-अधिकारियों (अजाक्स) के सम्मेलन में पहुंचे। उस समय विधानसभा चुनाव में करीब ढाई साल का समय बाकी था। सम्मेलन में शिवराज ने कहा था, "मेरे होते हुए कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। मध्यप्रदेश सरकार प्रमोशन में भी आरक्षण देगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "संविदा भर्तियों में भी आरक्षण दिया जाएगा। डॉ. भीमराव अंबेडकर के आरक्षण की बदौलत ही मैं मुख्यमंत्री और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन सके हैं।" जातिगत राजनीति और नाराजगी शिवराज सिंह का यह बयान सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा में आ गया। सवर्ण वर्ग, जो पहले से आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत कर रहा था, खुलकर नाराज हो गया। ग्वालियर-चंबल अंचल में इस बयान के खिलाफ सबसे ज्यादा आंदोलन हुए। आंदोलन इतने व्यापक हो गए कि कई जगहों पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए और सवर्ण संगठनों ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 2018 के चुनाव में दिखा असर 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। राजनीतिक पंडितों का मानना था कि शिवराज के 'माई का लाल' वाले बयान ने पार्टी को ग्वालियर-चंबल जैसे मजबूत गढ़ों में नुकसान पहुंचाया। परिणामस्वरूप बीजेपी कई अहम सीटें हार गई और कांग्रेस सत्ता में लौट आई। अब क्या तैयारी कर रही सरकार? अब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और सभी वर्गों के संतुलन के साथ प्रमोशन की प्रक्रिया फिर से शुरू करने की दिशा में बढ़ रही है। सरकार तीन अहम क्राइटेरिया के आधार पर योजना बना रही है, ताकि एक संतुलित और कानूनी रूप से मजबूत समाधान सामने लाया जा सके। क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होती है तो इससे जहां वर्षों से अटके अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत मिलेगी, वहीं सरकार को प्रशासनिक स्तर पर रिक्त पदों को भरने में भी मदद मिलेगी। राजनीतिक नजरिए से भी अहम यह मुद्दा आगामी चुनावों से पहले सरकार के लिए भी बेहद संवेदनशील है। सरकार प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर सतर्कता बरत रही है ताकि किसी भी वर्ग में असंतोष न फैले। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार कोर्ट के फैसले की दिशा में आगे बढ़कर इस जटिल मुद्दे को किस तरह सुलझाती है। recent visitors 33

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने महाराणा प्रताप के वंशज अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन पर शोक व्यक्त किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराणा प्रताप के वंशज और मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेवाड़ का जीवन भारतीय समाज और जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। उनहोंने मेवाड़ राजवंश की समृद्धशाली विरासत को आजीवन पूर्ण गरिमा के साथ संजोए रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. मेवाड़ की आत्मा की शांति के लिए बाबा महाकाल से प्रार्थना की है और शोक संतप्त परिजन के प्रति अपनी गहन संवेदनाएं व्यक्त की है।   recent visitors 27

कर्नाटक सरकार ने ठेकों में मुस्लिम वर्ग के ठेकेदारों के लिए 4 % कोटा देने के फैसले पर एमपी के सीएम यादव ने किया पलटवार

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा शासकीय कार्यों में ठेकेदारों के लिए धर्म आधारित आरक्षण की व्यवस्था को अनुचित और निंदनीय करार दिया है. उन्होंने इसे कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का हिस्सा बताते हुए कड़ी आलोचना की और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इस फैसले को वापस कराने की मांग की.   मुख्यमंत्री ने कहा, "लोकतांत्रिक देश में किसी धर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियम-प्रावधान बनाना कांग्रेस का अनैतिक चरित्र दर्शाता है. कर्नाटक सरकार का यह फैसला समाज को बांटने वाला है. हमारी सरकार दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए काम कर रही है, ताकि सभी को सम्मान और अधिकार मिले. लेकिन कांग्रेस ने हमेशा संविधान के मूल्यों की अनदेखी कर जातिगत पक्षपात और भेदभाव को बढ़ावा दिया है." उन्होंने इसे 'भारत तोड़ो' की विचारधारा का हिस्सा बताया. कांग्रेस पर निशाना CM यादव ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने हमेशा समाज को बांटने की राजनीति की है. कर्नाटक सरकार का यह निर्णय उसी अपशिष्ट राजनीति का उदाहरण है. उन्होंने जोर देकर कहा, "धर्म आधारित आरक्षण के खिलाफ पहले भी न्यायालयों ने फैसले दिए हैं. यह फैसला भी कोर्ट में टिक नहीं पाएगा." उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से अपील की कि वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर दबाव डालकर इस तुष्टिकरण के फैसले को वापस कराएं. कर्नाटक का फैसला कर्नाटक सरकार ने हाल ही में शासकीय ठेकों में ठेकेदारों के लिए धर्म आधारित आरक्षण का प्रावधान करने का फैसला लिया था, जिसे मध्य प्रदेश के CM ने संविधान विरोधी और समाज को बांटने वाला करार दिया. उनका कहना है कि यह कदम न केवल अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की ओर इशारा करता है, बल्कि समानता के सिद्धांत को भी कमजोर करता है. BJP का रुख मुख्यमंत्री ने बीजेपी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनकी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम कर रही है. उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, "कांग्रेसी भारत जोड़ो की बात करते हैं, लेकिन उनके फैसले भारत तोड़ो की नीति को दर्शाते हैं." इस बयान ने दोनों दलों के बीच सियासी तनाव को और बढ़ा दिया है. आगे की राह CM यादव ने इस मुद्दे को लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई की ओर इशारा किया. उनका मानना है कि यह फैसला न सिर्फ नैतिक रूप से गलत है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ भी है. अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कर्नाटक सरकार इस आलोचना पर क्या जवाब देती है और क्या यह मामला कोर्ट तक पहुंचेगा.   recent visitors 30

मध्य प्रदेश: छावा फिल्म का क्रेज, CM मोहन यादव आज मंत्रियों और विधायकों के साथ इस थिएटर में देखेंगे

भोपाल छत्रपति संभाजी महाराज पर बनी फिल्म छावा का क्रेज पूरे देश में दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश में भी इस फिल्म को लेकर काफी उत्साह नजर आ रहा है। ऐसे में आज मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार इस फिल्म को देखेगी। आज शाम 7:30 बजे सीएम, मंत्री और विधायक यह फिल्म देखेंगे। कहां देखी जाएगी फिल्म? भोपाल के लेक व्यू अशोका होटल ओपन थिएटर में मुख्यमंत्री मोहन यादव तमाम मंत्रियों और विधायकों के साथ फिल्म छावा देखेंगे। फिल्म के बाद सभी नेता डिनर करेंगे। बता दें कि मध्य प्रदेश में छावा फिल्म को सीएम मोहन यादव पहले ही टैक्स फ्री कर चुके हैं। सीएम ने छावा को टैक्स फ्री करने का किया था ऐलान मध्य प्रदेश में ‘छावा’ फिल्म टैक्स फ्री है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने 19 फरवरी को ‘छावा’ को कर मुक्त करने का ऐलान किया था। जबलपुर में स्टेडियम लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, “संभाजी महाराज ने अपने जीवन में सभी यातनाएं सहते हुए राष्ट्र और धर्म के लिए अपने प्राण दे दिए थे। छावा उन पर बनी ऐतिहासिक फिल्म है। यह फिल्म राष्ट्रप्रेम का संदेश देती है। शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज की देश भक्ति और उनके जीवन की विभिन्न महत्वपूर्ण घटनाओं से नागरिकों को परिचित करवाने के लिए मध्यप्रदेश में फिल्म टैक्स फ्री रहेगी।” जाने फिल्म के बारे में  छत्रपति शिवाजी महाराज के दिवंगत होने के बाद हिंदवी स्वराज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले संभाजी महाराज का इतिहास अत्यंत गौरवपूर्ण रहा है। औरंगजेब द्वारा छल-बल का उपयोग कर छत्रपति शंभूराजे और उनके मित्र कवि कलश को गिरफ्त में ले लिया गया था। इसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार न करते हुए 39 दिन की असहनीय प्रताड़ना को स्वीकार कर धर्म का संरक्षण करते हुए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। लेकिन अपना धर्म नहीं छोड़ा और छत्रपति के रूप में धर्म का संरक्षण किया। गोवा में भी टैक्स फ्री है छावा गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती के अवसर पर एक्स पर एक पोस्ट के जरिए ये घोषणा की थी की गोवा में इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने एक्स पर लिखा, 'मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन और बलिदान पर आधारित फिल्म छावा को गोवा में टैक्स फ्री किया जाएगा।' उन्होंने जोर देकर कहा कि यह फिल्म संभाजी महाराज की वीरता और साहस को दर्शाती है, जिन्होंने 'देव, देश और धर्म' के लिए मुगलों और पुर्तगालियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी फिल्म 'छावा' को टैक्स फ्री करने की अपील का स्वागत किया था। उन्होंने फिल्म के ऐतिहासिक प्रस्तुतिकरण की तारीफ की और कहा कि उन्हें जनता से फिल्म के बारे में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। सीएम फडणवीस ने कहा, 'मुझे खुशी है कि छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर एक बहुत अच्छी फिल्म बनाई गई है। हालांकि, मैंने इसे अभी तक नहीं देखा है, लेकिन मुझे जो प्रतिक्रिया मिली है, उससे पता चलता है कि इस फिल्म में इतिहास को विकृत नहीं किया गया है।' recent visitors 25

विधानसभा के बजट सत्र के दौरान 19 मार्च को मोहन सरकार दूसरी बार 6 हजार करोड़ का कर्ज लेने जा रही

भोपाल एमपी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान रंगपंचमी यानी 19 मार्च को मोहन सरकार दूसरी बार 6 हजार करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज 7 साल, 21 साल और 24 साल के लिए दो-दो हजार करोड़ रुपए की तीन अलग-अलग किस्तों में लिया जाएगा। मार्च में सरकार द्वारा 15 दिन के अंतराल में लिया जाने वाला यह तीसरा कर्ज होगा। इसके बाद संभावना जताई जा रही है कि मार्च के अंतिम सप्ताह में एक और कर्ज लिया जा सकता है। तीसरे कर्ज के पहले विधानसभा में डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा कह चुके हैं कि यह कर्ज नहीं निवेश है। रंगपंचमी तक अकेले मार्च में ही 16 हजार करोड़ रुपए का कर्ज सरकार ले चुकी होगी। कर्ज की इस राशि का भुगतान 19 मार्च 2032, 19 मार्च 2046 और 19 मार्च 2049 तक किया जाएगा। मार्च में दो बार पहले भी कर्ज ले चुकी सरकार इससे पहले 4 मार्च को सरकार ने 6 हजार करोड़ रुपए के तीन कर्ज दो-दो हजार करोड़ की तीन किस्तों पर लिए थे। इसके बाद 12 मार्च को फिर 4 हजार करोड़ रुपए के दो कर्ज दो-दो हजार करोड़ की रकम के रूप में लिए गए। अब 19 मार्च को तीसरा कर्ज उठाने की तैयारी है। इस तरह रंगपंचमी को लिए जाने वाले कर्ज समेत 15 दिन में सरकार ने तीन बार में 16 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने का फैसला किया है। अब तक 3.75 लाख करोड़ का कर्ज मध्यप्रदेश की जनता पर 31 मार्च 2024 को खत्म हुए वित्त वर्ष में 3 लाख 75 हजार 578 करोड़ रुपए का कर्ज है। एक अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक बीजेपी सरकार ने एक साल में 44 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया था। इसके पहले 31 मार्च 2023 को सरकार पर कर्ज की राशि 3 लाख 31 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा थी। recent visitors 35